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#ramayan #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #🙏🏻गुरबानी #likes
ramayan - हरि शरण्म - चौपाई करहिं बिबिध बिधि भोग बिलासा। गनन्ह समेत बसहिं कैलासा|| fga गिरिजा बिहार नित नयऊ। एहि बिधि 7 काल चल्ि गयऊ।। er भावार्थः शिव-पार्वती विविध प्रकार के भोग विलास करते हुए अपने गणों सहित कैलास पर रहने लगे। वे नित्य नए विहार करते थे। इस प्रकार बहुत समय बीत गया।।३II FB page পী হাসববিল সানস /tramayan like Share Follwo हरि शरण्म - चौपाई करहिं बिबिध बिधि भोग बिलासा। गनन्ह समेत बसहिं कैलासा|| fga गिरिजा बिहार नित नयऊ। एहि बिधि 7 काल चल्ि गयऊ।। er भावार्थः शिव-पार्वती विविध प्रकार के भोग विलास करते हुए अपने गणों सहित कैलास पर रहने लगे। वे नित्य नए विहार करते थे। इस प्रकार बहुत समय बीत गया।।३II FB page পী হাসববিল সানস /tramayan like Share Follwo - ShareChat
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🙏🏻आध्यात्मिकता😇 - हरि शरण्म    चौपाई जबहिं संभु कैलासहिं आए। सुर सब निज निज लोक सिधाए।। जगत मातु पितु संभु भवानी। तेहिं सिंगारु न कहउँ बखानी।l भावार्थः ्जब शिवजी कैलास पर्वत पर पहुँचे, तब सब देवता अपने अपने लोकों को चले गए। (तुलसीदासजी कहते हैं कि) पार्वतीजी और शिवजी जगत के माता-पिता हैं, इसलिए मैं उनके श्रृंगार का वर्णन नहीं करता।I२ |I FB page পী যাসববিল সানস tramayan like Share Follwo हरि शरण्म    चौपाई जबहिं संभु कैलासहिं आए। सुर सब निज निज लोक सिधाए।। जगत मातु पितु संभु भवानी। तेहिं सिंगारु न कहउँ बखानी।l भावार्थः ्जब शिवजी कैलास पर्वत पर पहुँचे, तब सब देवता अपने अपने लोकों को चले गए। (तुलसीदासजी कहते हैं कि) पार्वतीजी और शिवजी जगत के माता-पिता हैं, इसलिए मैं उनके श्रृंगार का वर्णन नहीं करता।I२ |I FB page পী যাসববিল সানস tramayan like Share Follwo - ShareChat
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ramayan - हरि शरण्म   ಅr೯ जाचक सकल संतोषि संकरु उमा सहित भवन चले। हरषे सुमन बरषि निसान नभ बाजे भले।। सब अमर भावार्थः- महादेवजी सब याचकों को संतुष्ट कर पार्वती के साथ घर (कैलास) को चले। सब देवता प्रसन्न होकर फूलों वर्षा करने लगे और आकाश में सुंदर नगाड़े बजाने लगे। FB page পী যাসববিল সানস tramayan like Share Follwo हरि शरण्म   ಅr೯ जाचक सकल संतोषि संकरु उमा सहित भवन चले। हरषे सुमन बरषि निसान नभ बाजे भले।। सब अमर भावार्थः- महादेवजी सब याचकों को संतुष्ट कर पार्वती के साथ घर (कैलास) को चले। सब देवता प्रसन्न होकर फूलों वर्षा करने लगे और आकाश में सुंदर नगाड़े बजाने लगे। FB page পী যাসববিল সানস tramayan like Share Follwo - ShareChat
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🙏🏻आध्यात्मिकता😇 - 8r शरण्म /7 छन्द जननिहि बहुरि मिलि चली उचित असीस सब काहूँ दईं।  फिरि फिरि बिलोकति मातु तन तब सखीं लै सिव पहिं गईं।। भावार्थः पार्वतीजी माता से फिर मिलकर चलीं, सब किसी ने उन्हें योग्य आशीर्वाद दिए। पार्वतीजी फिर-फिरकर माता की ओर देखती जाती थीं। तब सखियाँ उन्हें शिवजी के पास ले गईं। FB page পী যাসববিল সানস tramayan like Share Follwo 8r शरण्म /7 छन्द जननिहि बहुरि मिलि चली उचित असीस सब काहूँ दईं।  फिरि फिरि बिलोकति मातु तन तब सखीं लै सिव पहिं गईं।। भावार्थः पार्वतीजी माता से फिर मिलकर चलीं, सब किसी ने उन्हें योग्य आशीर्वाद दिए। पार्वतीजी फिर-फिरकर माता की ओर देखती जाती थीं। तब सखियाँ उन्हें शिवजी के पास ले गईं। FB page পী যাসববিল সানস tramayan like Share Follwo - ShareChat
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ramayan - 8r शरण्म /7 चौपाई पुनि पुनि मिलति परति गहि चरना। परम प्रेमु कछु जाइ न बरना।| सब नारिन्ह मिलि भेंटि भवानी। जाइ जननि उर पुनि लपटानी |l  भावार्थः मैना बार-बार मिलती हैं और ( पार्वती के) चरणों को पकड़कर गिर पडती हैं। बड़़ा ही प्रेम है॰ कुछ वर्णन नहीं किया जाता। भवानी सब स्त्रियों से मिल भेंटकर फिर अपनी माता के हृदय से जा लिपटीं ll४|l FB page পী যাসববিল সানস tramayan like Share Follwo 8r शरण्म /7 चौपाई पुनि पुनि मिलति परति गहि चरना। परम प्रेमु कछु जाइ न बरना।| सब नारिन्ह मिलि भेंटि भवानी। जाइ जननि उर पुनि लपटानी |l  भावार्थः मैना बार-बार मिलती हैं और ( पार्वती के) चरणों को पकड़कर गिर पडती हैं। बड़़ा ही प्रेम है॰ कुछ वर्णन नहीं किया जाता। भवानी सब स्त्रियों से मिल भेंटकर फिर अपनी माता के हृदय से जा लिपटीं ll४|l FB page পী যাসববিল সানস tramayan like Share Follwo - ShareChat
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🙏🏻आध्यात्मिकता😇 - 8r शरण्म /7 ಇಂ್ चौपाई कत बिधि सृजीं नारि जग माहीं| पराधीन सपनेहूँ सुखु नाहीं |l भै अति प्रेम बिकल महतारी| धीरजु कीन्ह कुसमय बिचारी।| भावार्थः (फिर बोलीं कि) विधाता ने जगत में स्त्री जाति को क्यों पैदा किया? पराधीन को सपने में भी सुख नहीं मिलता। यों कहती हुई माता प्रेम में अत्यन्त विकल हो गईं, परन्तु कुसमय जानकर (दुःख करने का अवसर न जानकर) उन्होंने शीरज &T||3 || FB page পী যাসববিল সানস tramayan like Share Follwo 8r शरण्म /7 ಇಂ್ चौपाई कत बिधि सृजीं नारि जग माहीं| पराधीन सपनेहूँ सुखु नाहीं |l भै अति प्रेम बिकल महतारी| धीरजु कीन्ह कुसमय बिचारी।| भावार्थः (फिर बोलीं कि) विधाता ने जगत में स्त्री जाति को क्यों पैदा किया? पराधीन को सपने में भी सुख नहीं मिलता। यों कहती हुई माता प्रेम में अत्यन्त विकल हो गईं, परन्तु कुसमय जानकर (दुःख करने का अवसर न जानकर) उन्होंने शीरज &T||3 || FB page পী যাসববিল সানস tramayan like Share Follwo - ShareChat
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ramayan - 8r शरण्म /7 चौपाई संभु सासु समुझाई। गवनी भवन चरन सिरु नाई।। sff जननीं उमा बौलि तब लीन्ही। लै उछंग सुंदर सिख दीन्ही|| भावार्थः शिवजी ने बहुत तरह से अपनी सास को समझाया। तब वे शिवजी के चरणों में सिर नवाकर घर गईं। फिर माता ने पार्वती को बुला लिया और गोद में बिठाकर यह सुंदर सीख ఢేTIl1 Il FB page পী যাসববিল সানস tramayan like Share Follwo 8r शरण्म /7 चौपाई संभु सासु समुझाई। गवनी भवन चरन सिरु नाई।। sff जननीं उमा बौलि तब लीन्ही। लै उछंग सुंदर सिख दीन्ही|| भावार्थः शिवजी ने बहुत तरह से अपनी सास को समझाया। तब वे शिवजी के चरणों में सिर नवाकर घर गईं। फिर माता ने पार्वती को बुला लिया और गोद में बिठाकर यह सुंदर सीख ఢేTIl1 Il FB page পী যাসববিল সানস tramayan like Share Follwo - ShareChat
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