@arunkumargbd
@arunkumargbd

Arun Kumar

एे बुरे "वक्त" जरा अदब से पेश आ!! "वक्त" हि कितना लगता है "वक्त" बदलने में ............

#

🎉 हैप्पी न्यू ईयर 2020

*प्रमुख त्यौहार 2020* की आप सभी को हार्दिक शुभ कामना in advance🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻💐💐💐 *13 जनवरी 2020 :- सोमवार :- लोहरी* *14 जनवरी 2020 :- मंगलवार :- मकर सक्रांति* *26 जनवरी 2020 :- रविवार :- गणतंत्र दिवस* *30 जनवरी 2020 :- गुरुवार :- बसन्त पंचमी* *9 फ़रवरी 2020 :- रविवार :- सन्त रविदास जयन्ती* *21 फ़रवरी 2020 :- शुक्रवार :- महाशिवरात्रि* *9 मार्च 2020 :- सोमवार :- होलिका दहन* *10 मार्च 2020 :- मंगलवार :- { दुलेन्धी } :- होली रंगो वाली* *25 मार्च 2020 :- बुधवार :- हिन्दू नव वर्ष 2077 :- गुड़ी पड़वा :- नवरात्र पर्व* *2 अप्रैल 2020 :- गुरुवार :- श्री राम नवमीं* *6 अप्रैल 2020 :- सोमवार :- भगवान महावीर जयन्ती* *8 अप्रैल 2020 :- बुधवार :- श्री हनुमानजी जन्मोत्सव* *13 अप्रैल 2020 :- सोमवार :- बैसाखी* *14 अप्रैल 2020 :- मंगलवार :- अम्बेडकर जयन्ती* *7 मई :- 2020 :- गुरुवार :- बुद्ध पूर्णिमा* *3 अगस्त 2020 :- सोमवार :- रक्षा बंधन* *11 अगस्त 2020 :- मंगलवार :-जन्माष्ठमी* *15 अगस्त 2020 :- शनिवार :- स्वतंत्रता दिवस* *22 अगस्त 2020 :- शनिवार :- श्री गणेश चतुर्थी महाराष्ट्रा* *1 सितम्बर 2020 :- मंगलवार :- अनन्त चौदस* *17 सितम्बर 2020 :- गुरुवार :- भगवान विश्वकर्मा दिवस* *2 अक्टूबर 2020 :- शुक्रवार :- गांधी जयन्ती* *17 अक्टूबर 2020 :- शनिवार :- शारदीय नवरात्र पर्व* *25 अक्टूबर 2020 :- रविवार :- दशहरा* *31 अक्टूबर 2020 :- शनिवार :- भगवान वाल्मिकी जयन्ती* *12 नवम्बर 2020 :- गुरुवार :- धन तेरस* *13 नवम्बर 2020 :- शुक्रवार :- छोटी दीवाली* *14 नवम्बर 2020 :- शनिवार :- दीपावली* *15 नवम्बर 2020 :- रविवार :- गोवर्धन पूजा अंकूट* *16 नवम्बर 2020 :- सोमवार :- भाई दूज* *20 नवम्बर 2020 :- शुक्रवार :- छठ पूजा* *30 नवम्बर 2020 :- सोमवार :- गुरु नानक जयन्ती* *आपके सभी त्योहार मंगलमय व आनंदमयी होवे* *_विष🔥कृत्या 9131705072_* #🎉 हैप्पी न्यू ईयर 2020
655 ने देखा
28 दिन पहले
#

🖊 एक रचना रोज ✍

*" भिखारी // व्यापारी "* 🙏🏻🌹💞🌹🙏🏻 एक था भिखारी ! रेल सफ़र में भीख़ माँगने के दौरान एक सूट बूट पहने सेठ जी उसे दिखे। उसने सोचा कि यह व्यक्ति बहुत अमीर लगता है, इससे भीख़ माँगने पर यह मुझे जरूर अच्छे पैसे देगा। वह उस सेठ से भीख़ माँगने लगा। भिख़ारी को देखकर उस सेठ ने कहा, “तुम हमेशा मांगते ही हो, क्या कभी किसी को कुछ देते भी हो ?” भिख़ारी बोला, “साहब मैं तो भिख़ारी हूँ, हमेशा लोगों से मांगता ही रहता हूँ, मेरी इतनी औकात कहाँ कि किसी को कुछ दे सकूँ ?” सेठ:- जब किसी को कुछ दे नहीं सकते तो तुम्हें मांगने का भी कोई हक़ नहीं है। मैं एक व्यापारी हूँ और लेन-देन में ही विश्वास करता हूँ, अगर तुम्हारे पास मुझे कुछ देने को हो तभी मैं तुम्हे बदले में कुछ दे सकता हूँ। तभी वह स्टेशन आ गया जहाँ पर उस सेठ को उतरना था, वह ट्रेन से उतरा और चला गया। इधर भिख़ारी सेठ की कही गई बात के बारे में सोचने लगा। सेठ के द्वारा कही गयीं बात उस भिख़ारी के दिल में उतर गई। वह सोचने लगा कि शायद मुझे भीख में अधिक पैसा इसीलिए नहीं मिलता क्योकि मैं उसके बदले में किसी को कुछ दे नहीं पाता हूँ। लेकिन मैं तो भिखारी हूँ, किसी को कुछ देने लायक भी नहीं हूँ।लेकिन कब तक मैं लोगों को बिना कुछ दिए केवल मांगता ही रहूँगा। बहुत सोचने के बाद भिख़ारी ने निर्णय किया कि जो भी व्यक्ति उसे भीख देगा तो उसके बदले मे वह भी उस व्यक्ति को कुछ जरूर देगा। लेकिन अब उसके दिमाग में यह प्रश्न चल रहा था कि वह खुद भिख़ारी है तो भीख के बदले में वह दूसरों को क्या दे सकता है ? इस बात को सोचते हुए दिनभर गुजरा लेकिन उसे अपने प्रश्न का कोई उत्तर नहीं मिला। दुसरे दिन जब वह स्टेशन के पास बैठा हुआ था तभी उसकी नजर कुछ फूलों पर पड़ी जो स्टेशन के आस-पास के पौधों पर खिल रहे थे, उसने सोचा, क्यों न मैं लोगों को भीख़ के बदले कुछ फूल दे दिया करूँ। उसको अपना यह विचार अच्छा लगा और उसने वहां से कुछ फूल तोड़ लिए। वह ट्रेन में भीख मांगने पहुंचा। जब भी कोई उसे भीख देता तो उसके बदले में वह भीख देने वाले को कुछ फूल दे देता। उन फूलों को लोग खुश होकर अपने पास रख लेते थे। अब भिख़ारी रोज फूल तोड़ता और भीख के बदले में उन फूलों को लोगों में बांट देता था। कुछ ही दिनों में उसने महसूस किया कि अब उसे बहुत अधिक लोग भीख देने लगे हैं। वह स्टेशन के पास के सभी फूलों को तोड़ लाता था। जब तक उसके पास फूल रहते थे तब तक उसे बहुत से लोग भीख देते थे। लेकिन जब फूल बांटते बांटते ख़त्म हो जाते तो उसे भीख भी नहीं मिलती थी,अब रोज ऐसा ही चलता रहा । एक दिन जब वह भीख मांग रहा था तो उसने देखा कि वही सेठ ट्रेन में बैठे है जिसकी वजह से उसे भीख के बदले फूल देने की प्रेरणा मिली थी। वह तुरंत उस व्यक्ति के पास पहुंच गया और भीख मांगते हुए बोला, आज मेरे पास आपको देने के लिए कुछ फूल हैं, आप मुझे भीख दीजिये बदले में मैं आपको कुछ फूल दूंगा। शेठ ने उसे भीख के रूप में कुछ पैसे दे दिए और भिख़ारी ने कुछ फूल उसे दे दिए। उस सेठ को यह बात बहुत पसंद आयी। सेठ:- वाह क्या बात है..? आज तुम भी मेरी तरह एक व्यापारी बन गए हो, इतना कहकर फूल लेकर वह सेठ स्टेशन पर उतर गया। लेकिन उस सेठ द्वारा कही गई बात एक बार फिर से उस भिख़ारी के दिल में उतर गई। वह बार-बार उस सेठ के द्वारा कही गई बात के बारे में सोचने लगा और बहुत खुश होने लगा। उसकी आँखे अब चमकने लगीं, उसे लगने लगा कि अब उसके हाथ सफलता की वह 🔑चाबी लग गई है जिसके द्वारा वह अपने जीवन को बदल सकता है। वह तुरंत ट्रेन से नीचे उतरा और उत्साहित होकर बहुत तेज आवाज में ऊपर आसमान की ओर देखकर बोला, “मैं भिखारी नहीं हूँ, मैं तो एक व्यापारी हूँ.. मैं भी उस सेठ जैसा बन सकता हूँ.. मैं भी अमीर बन सकता हूँ ! लोगों ने उसे देखा तो सोचा कि शायद यह भिख़ारी पागल हो गया है, अगले दिन से वह भिख़ारी उस स्टेशन पर फिर कभी नहीं दिखा। एक वर्ष बाद इसी स्टेशन पर दो व्यक्ति सूट बूट पहने हुए यात्रा कर रहे थे। दोनों ने एक दूसरे को देखा तो उनमे से एक ने दूसरे को हाथ जोड़कर प्रणाम किया और कहा, “क्या आपने मुझे पहचाना ?” सेठ:- “नहीं तो ! शायद हम लोग पहली बार मिल रहे हैं। भिखारी:- सेठ जी.. आप याद कीजिए, हम पहली बार नहीं बल्कि तीसरी बार मिल रहे हैं। सेठ:- मुझे याद नहीं आ रहा, वैसे हम पहले दो बार कब मिले थे ? अब पहला व्यक्ति मुस्कुराया और बोला: हम पहले भी दो बार इसी ट्रेन में मिले थे, मैं वही भिख़ारी हूँ जिसको आपने पहली मुलाकात में बताया कि मुझे जीवन में क्या करना चाहिए और दूसरी मुलाकात में बताया कि मैं वास्तव में कौन हूँ। नतीजा यह निकला कि आज मैं फूलों का एक बहुत बड़ा व्यापारी हूँ और इसी व्यापार के काम से दूसरे शहर जा रहा हूँ। आपने मुझे पहली मुलाकात में प्रकृति का नियम बताया था... जिसके अनुसार हमें तभी कुछ मिलता है, जब हम कुछ देते हैं। लेन देन का यह नियम वास्तव में काम करता है, मैंने यह बहुत अच्छी तरह महसूस किया है, लेकिन मैं खुद को हमेशा भिख़ारी ही समझता रहा, इससे ऊपर उठकर मैंने कभी सोचा ही नहीं था और जब आपसे मेरी दूसरी मुलाकात हुई तब आपने मुझे बताया कि मैं एक व्यापारी बन चुका हूँ। अब मैं समझ चुका था कि मैं वास्तव में एक भिखारी नहीं बल्कि व्यापारी बन चुका हूँ। भारतीय मनीषियों ने संभवतः इसीलिए स्वयं को जानने पर सबसे अधिक जोर दिया और फिर कहा - सोऽहं शिवोहम !! समझ की ही तो बात है... भिखारी ने स्वयं को जब तक भिखारी समझा, वह भिखारी रहा | उसने स्वयं को व्यापारी मान लिया, व्यापारी बन गया | जिस दिन हम समझ लेंगे कि मैं कौन हूँ... फिर जानने समझने को रह ही क्या जाएगा 🙏🏻🌹🤗💞🤗🤗💞🤗🌹🙏🏻 #🖊 एक रचना रोज ✍
281 ने देखा
28 दिन पहले
#

✔ राइट या रॉन्ग ❌🎦

किसी￰ बाजार में एक चिड़ीमार तीतर बेच रहा था ! उसके पास एक बड़ी सी जाली वाली बक्से में बहुत सारे तीतर थे ..और एक छोटे से बक्से में सिर्फ एक तीतर किसी ग्राहक ने उससे पूछा तीतर कितने का है ! तो उसने जवाब दिया एक तीतर की कीमत 80 रूपये है ग्राहक ने दुसरे बक्से में जो तन्हा तीतर था उसकी कीमत पूछी तो तीतर वाले ने जवाब दिया ! अव्वल तो मैं इसे बेचना ही नहीं चाहूंगा लेकिन अगर आप लेने की जिद करोगे तो इसकी कीमत 500 रूपये होगी ग्राहक ने आश्चर्य से पूछा इसकी कीमत 500 रुपया क्यों.. इसपे तीतर वाले का जवाब था ये मेरा अपना पालतू तीतर है ! और दुसरे तीतरो को जाल में फसाने का काम करता है और दूसरे सभी फंसे हुए तीतर है ! ये चीख पुकार करके दूसरे तीतरो को बुलाता है! और दुसरे तीतर बिना सोचे समझे एक जगह जमा हो जाते है और मैं आसानी से शिकार कर पाता हूँ ! इसके बाद फंसाने वाले तीतर को उसके मन पसंद की खुराक दे देता हूँ ! जिससे ये खुश हो जाता है बस इस वजह से इसकी कीमत ज्यादा है ! बाजार में एक समझदार आदमी ने उस तीतर वाले को 500 रूपये देकर उस तीतर का सरे बाजार गर्दन उड़ा दिया ! किसी ने पूछा आपने ऐसा क्यों किया ! उसका जवाब था ऐसे जमीर फरोश को जिन्दा रहने का कोई हक़ नहीं जो अपने मुनाफे के लिए अपनी कौम को फंसाने का काम करे और अपने ही लोगो को धोखा देता है | अपने धर्म और समाज के ऐसे तीतरों से सावधान रहिये..!! #✔ राइट या रॉन्ग ❌🎦 #😱आज पूरे देश में प्रदर्शन #🔥🔥लाल किले पर प्रदर्शन
340 ने देखा
1 महीने पहले
अन्य एप्स पर शेयर करें
Facebook
WhatsApp
लिंक कॉपी करें
डिलीट करें
Embed
मैं इस पोस्ट का विरोध करता हूँ, क्योंकि ये पोस्ट...
Embed Post
अन्य एप्स पर शेयर करें
Facebook
WhatsApp
अनफ़ॉलो
लिंक कॉपी करें
शिकायत करें
ब्लॉक करें
रिपोर्ट करने की वजह: