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#👏भगवान विष्णु की अद्भुत लीला😇 #🙏गुरु महिमा😇 #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #🙏गीता ज्ञान🛕
👏भगवान विष्णु की अद्भुत लीला😇 - कहते है* भगवान कर मुझे जमीन ओ-आसमान 'तलाश ना की गर्दिशों में अगर तेरे दिल में नहीं हूँ तो कहीं नहीं हूँ 91' कहते है* भगवान कर मुझे जमीन ओ-आसमान 'तलाश ना की गर्दिशों में अगर तेरे दिल में नहीं हूँ तो कहीं नहीं हूँ 91' - ShareChat
#🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #🙏गुरु महिमा😇 #👏भगवान विष्णु की अद्भुत लीला😇 #🙏गीता ज्ञान🛕
🙏🏻आध्यात्मिकता😇 - *जनकसुता जग जननि जानकी। अतिसय प्रिय करुनानिधान की Il ताके जुग पद कमल मनावउँ । जासु कृपाँ निरमल मति पावउँ II* *जनकसुता जग जननि जानकी। अतिसय प्रिय करुनानिधान की Il ताके जुग पद कमल मनावउँ । जासु कृपाँ निरमल मति पावउँ II* - ShareChat
#🙏गीता ज्ञान🛕 #👏भगवान विष्णु की अद्भुत लीला😇 #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #🙏गुरु महिमा😇
🙏गीता ज्ञान🛕 - II9aR:ll अपनी जिम्मेवारी तो एक ही है - हर वक्त भगवान् को याद रखना, हर वक्त भगवान् को रटना; फिर सारी जिम्मेवारी भगवान् ले लेंगे। अमृत वचन पृष्ट संख्या - ११ -श्रद्धेय सेठजी श्रीजयदयालजी गोयन्दका II9aR:ll अपनी जिम्मेवारी तो एक ही है - हर वक्त भगवान् को याद रखना, हर वक्त भगवान् को रटना; फिर सारी जिम्मेवारी भगवान् ले लेंगे। अमृत वचन पृष्ट संख्या - ११ -श्रद्धेय सेठजी श्रीजयदयालजी गोयन्दका - ShareChat
#🙏गुरु महिमा😇 #👏भगवान विष्णु की अद्भुत लीला😇 #🙏गीता ज्ञान🛕 #🙏🏻आध्यात्मिकता😇
🙏गुरु महिमा😇 - *अर्जुन : सामने अपने हैं! श्री कृष्ण : अपने हैं तो सामने क्यों 82* *अर्जुन : सामने अपने हैं! श्री कृष्ण : अपने हैं तो सामने क्यों 82* - ShareChat
#🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #👏भगवान विष्णु की अद्भुत लीला😇 #🙏गुरु महिमा😇 #🙏गीता ज्ञान🛕
🙏🏻आध्यात्मिकता😇 - *रैन बिना जग दुःखी, और चंद्र बिन 3: रैन, तुम बिन कान्हा मैं दुःखी, और दर्स बिन दुःखी १ ! *रैन बिना जग दुःखी, और चंद्र बिन 3: रैन, तुम बिन कान्हा मैं दुःखी, और दर्स बिन दुःखी १ ! - ShareChat
#🙏गीता ज्ञान🛕 #👏भगवान विष्णु की अद्भुत लीला😇 #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #🙏गुरु महिमा😇
🙏गीता ज्ञान🛕 - *नगरी हो अयोध्या सी रघुकुल सा घरना 61. राघव के चरण जहाँ हो वहा मेरा ठिकाना हो. 4 *नगरी हो अयोध्या सी रघुकुल सा घरना 61. राघव के चरण जहाँ हो वहा मेरा ठिकाना हो. 4 - ShareChat
#🙏गुरु महिमा😇 #🙏गीता ज्ञान🛕 #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #👏भगवान विष्णु की अद्भुत लीला😇
🙏गुरु महिमा😇 - ऊँ श्री परमात्मने नमः 35 নসী নায়যণায श्रीकृष्णार्पणमस्तु सो मुद मंगलमय रितुराजूI।  बरनब राम बिबाह समाजू। ग्रीषम दुसह राम बनगवनू। पंथकथा खर आतप पवनूI। भावार्थः श्री रामचंद्रजी के विवाह समाज का वर्णन ही आनंद मंगलमय ऋतुराज वसंत है।श्री रामजी का वनगमन दुःसह ग्रीष्म ऋतु है और मार्ग की कथा ही कडी धूप और लू है।। श्रीकृष्णपार्पणमस्तु LIKE SHARE FOLLOW ऊँ श्री परमात्मने नमः 35 নসী নায়যণায श्रीकृष्णार्पणमस्तु सो मुद मंगलमय रितुराजूI।  बरनब राम बिबाह समाजू। ग्रीषम दुसह राम बनगवनू। पंथकथा खर आतप पवनूI। भावार्थः श्री रामचंद्रजी के विवाह समाज का वर्णन ही आनंद मंगलमय ऋतुराज वसंत है।श्री रामजी का वनगमन दुःसह ग्रीष्म ऋतु है और मार्ग की कथा ही कडी धूप और लू है।। श्रीकृष्णपार्पणमस्तु LIKE SHARE FOLLOW - ShareChat
#👏भगवान विष्णु की अद्भुत लीला😇 #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #🙏गुरु महिमा😇 #🙏गीता ज्ञान🛕
👏भगवान विष्णु की अद्भुत लीला😇 - शब्द शब्द सब कोई कहै, वो तो शब्द विदेह| जिभ्या पर आवै नहीं, निरखि परखिए करि देह। | भावार्थ कबीर दास जी कहते हैं कि लोग शब्दों से तो बहुत कुछ कह देते हैं, पर वह सत्य शब्दों से परे है। वह न जीभ पर आता है, न बोलकर बताया जा सकता है। उसे केवल अपने भीतर अनुभव करके देख-परख कर ही जाना जा सकता है। SN व्याख्या संसार में लोग धर्म , ज्ञान और ईश्वर की बातें शब्दों में करते हैं, पर जिस सत्य की ओर वे संकेत करते हैं वह शब्दों से परे है। देहहीन, निराकार और भाषा में न बँधने वाला। जीभ केवल उसी को बोल सकती है जो वस्तु की तरह सामने हो, जबकि आत्मा या ब्रह्म कोई वस्तु नहीं , बल्कि स्वयं कहने वाले की जड़ है। इसलिए उस सत्य को सुनकर या बोलकर नहीं  बल्कि अपने जीवन, मन और चेतना में उतारकर जाना जाता है। जैसे आग को शब्द से नहीं , जलने के अनुभव से पहचाना जाता है। शब्द केवल दिशा दिखाते हैं, मंज़िल नहीं | शब्द शब्द सब कोई कहै, वो तो शब्द विदेह| जिभ्या पर आवै नहीं, निरखि परखिए करि देह। | भावार्थ कबीर दास जी कहते हैं कि लोग शब्दों से तो बहुत कुछ कह देते हैं, पर वह सत्य शब्दों से परे है। वह न जीभ पर आता है, न बोलकर बताया जा सकता है। उसे केवल अपने भीतर अनुभव करके देख-परख कर ही जाना जा सकता है। SN व्याख्या संसार में लोग धर्म , ज्ञान और ईश्वर की बातें शब्दों में करते हैं, पर जिस सत्य की ओर वे संकेत करते हैं वह शब्दों से परे है। देहहीन, निराकार और भाषा में न बँधने वाला। जीभ केवल उसी को बोल सकती है जो वस्तु की तरह सामने हो, जबकि आत्मा या ब्रह्म कोई वस्तु नहीं , बल्कि स्वयं कहने वाले की जड़ है। इसलिए उस सत्य को सुनकर या बोलकर नहीं  बल्कि अपने जीवन, मन और चेतना में उतारकर जाना जाता है। जैसे आग को शब्द से नहीं , जलने के अनुभव से पहचाना जाता है। शब्द केवल दिशा दिखाते हैं, मंज़िल नहीं | - ShareChat
#🙏गीता ज्ञान🛕 #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #🙏गुरु महिमा😇 #👏भगवान विष्णु की अद्भुत लीला😇
🙏गीता ज्ञान🛕 - नीलोत्पल तन स्याम काम कोटि सोभा अधिक सुनिअ तासु गुन ग्राम जासु नाम अघ खग बधिक जिनका नीले कमल के समान श्याम शरीर है॰ जिनकी शोभा करोड़ों कामदेवों से भी अधिक है और जिनका नाम पापरूपी लिए पक्षियों को मारने के बधिक |व्याध के समान है, उन श्री राम के गुणों के समूह (लीला) को अवश्य सुनना चाहिए नीलोत्पल तन स्याम काम कोटि सोभा अधिक सुनिअ तासु गुन ग्राम जासु नाम अघ खग बधिक जिनका नीले कमल के समान श्याम शरीर है॰ जिनकी शोभा करोड़ों कामदेवों से भी अधिक है और जिनका नाम पापरूपी लिए पक्षियों को मारने के बधिक |व्याध के समान है, उन श्री राम के गुणों के समूह (लीला) को अवश्य सुनना चाहिए - ShareChat
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👏भगवान विष्णु की अद्भुत लीला😇 - pppDm {ರ೮o ;4d नाथ एकबर मागउ रम कृपा देहु | करि जन्म जन्म प्रशु पद कमल 35 I कबहुँ घटै जनि pppDm {ರ೮o ;4d नाथ एकबर मागउ रम कृपा देहु | करि जन्म जन्म प्रशु पद कमल 35 I कबहुँ घटै जनि - ShareChat