... Acharya Rajesh kumar
ShareChat
click to see wallet page
@astrorajesh
astrorajesh
... Acharya Rajesh kumar
@astrorajesh
I Love ShareChat
#🌟देखिए खास ज्योतिष उपायएक तंदुरुस्त मर्द के किसी औरत के साथ सेक्स करने के बाद जो वीर्य निकलता है उसमें 40 मिलियन तक स्पर्म मौजूद होते हैं, आसान शब्दों में कहें तो अगर सबको सही जगह (गर्भाशय) मिल जाए तो 40 मिलियन बच्चे पैदा हो जायें जबकि ये सारे के सारे स्पर्म माँ की बच्चेदानी (गर्भाशय) की तरफ पागलों की तरह भागते हैं और इस दौड़ में सिर्फ 300 से 500 तक स्पर्म ही बच जाते हैं और बाकी रास्ते में ही थकन और हारकर मर जाते हैं ये 300 से 500 वही स्पर्म हैं जो गर्भाशय तक पहुंचने में कामयाब हो पाते हैं इनमें से भी सिर्फ एक बहुत मजबूत स्पर्म होता है जो गर्भाशय में पहुँचकर फर्टिलाइज होता है क्या आप जानते हैं वो खुशनसीब, मजबूत और जीतने वाला स्पर्म कौन है? वो खुशनसीब स्पर्म आप, मैं, या हम सब हैं! आप सोच भी नहीं सकते कि जब आप पहली बार भागे थे तब आंख, हाथ-पैर, चेहरा कुछ भी नहीं था फिर भी आप जीत गये जब आप भागे तब आपके पास सर्टिफिकेट्स नहीं थे, आपके पास दिमाग़ नहीं था, लेकिन आप फिर भी जीत गये बहुत से बच्चे माँ के पेट में ही खो गए लेकिन आप मौजूद रहे और आपने अपने 9 महीने पूरे किए और आज.................. आज आप घबराये हैं, जब कुछ होता है तो आप मायूस हो जाते हैं मगर क्यूँ? आपको क्यूँ लगता है कि आप हार गए हैं? आपने भरोसा क्यूँ खो दिया है? अब तो आपके पास दोस्त हैं, बहन भाई, सर्टिफिकेट्स सब कुछ है फिर आप मायूस क्यूँ हो गए? आप सबसे पहले जीते, आखिर में जीते, बीच में जीत जाते हैं.परमात्मा(प्रकृति )पर यकीन और सच्ची लगन से मकसद को हासिल करने के लिए पूरी जद्दोजहद करें, वो आपको हारने नहीं देगा जैसे मिलियन स्पर्म में से आपको जीतने का मौका दिया वैसे ही वो अब भी आपको कामयाब जरूर बनाएगा! #💫राशि के अनुसार भविष्यवाणी #🙏गुरु महिमा😇 #🙏कर्म क्या है❓ #✡️ज्योतिष समाधान 🌟
#🔯कुंडली दोष 🔥 कृत्तिका नक्षत्र: 6 माताओं का त्याग और शरीर का अद्भुत विज्ञान 🔥 🔥 कृत्तिका नक्षत्र: 6 माताओं का त्याग और शरीर का अद्भुत विज्ञान 🔥 हम अक्सर सोचते हैं कि 'आग' (Fire) का काम केवल जलाना है। लेकिन कृत्तिका नक्षत्र बताता है कि आग का असली काम 'बनाना' (Creation) है। ​यही वह नक्षत्र है जो भोजन को 'खून' में और खून को 'जीवन' (वीर्य) में बदलता है। इसके देवता अग्नि हैं और स्वामी सूर्य। ​👇 गहराई से समझें: कार्तिकेय, 6 माताएं और आपका शरीर 👇 ​पौराणिक कथा कहती है कि भगवान शिव के तेज (वीर्य) से कार्तिकेय का जन्म हुआ। लेकिन उन्हें जन्म देने वाली माँ एक नहीं, 6 माताएं (कृत्तिकाएं) थीं, जिन्होंने अपना दूध पिलाकर उन्हें पाला। ​यह केवल कहानी नहीं, आयुर्वेद का सबसे बड़ा रहस्य है: ​🧬 6 माताएं आपके भीतर हैं (The 6 Dhatus): जब हम भोजन करते हैं, तो पेट की 'जठराग्नि' (कृत्तिका की आग) उसे पकाती है। इसके बाद शरीर में 7 धातुएं क्रम से बनती हैं। अंतिम धातु 'शुक्र/वीर्य' (कार्तिकेय) है। उसे बनाने के लिए उससे पहले की 6 धातुएं (माताएं) अपना पोषण देती हैं: १. रस (Plasma) २. रक्त (Blood) ३. मांस (Muscle) ४. मेद (Fat) ५. अस्थि (Bone) ६. मज्जा (Marrow) ​जब ये 6 माताएं पुष्ट होती हैं, तभी 7वें रूप में 'तेज' (जीवन शक्ति) का जन्म होता है। इसलिए कृत्तिका जातक 'सृजन' (Creation) और 'पालक' (Nurturer) की भूमिका में सर्वश्रेष्ठ होते हैं। ​🌟 कृत्तिका के 4 चेहरे: नवांश बदलते ही बदल जाता है इंसान 🌟 ​कृत्तिका नक्षत्र मेष (आग) और वृषभ (पृथ्वी) राशि को जोड़ता है। देखिए, नवांश के अनुसार आप कैसे दिखते हैं और सोचते हैं: ​👣 प्रथम चरण (धनु नवांश - गुरु): [मेष राशि] (अग्नि + ज्ञान) 🔹 रूप: इनका मस्तक चौड़ा और शरीर गठीला होता है। आँखों में एक चमक और चेहरे पर लालिमा होती है (मंगल का प्रभाव)। 🔹 स्वभाव: ये 'धर्म-योद्धा' होते हैं। अत्यंत सिद्धांतवादी। इन्हें भूख बहुत लगती है (जठराग्नि तीव्र होती है)। 🔹 विचार: "नियम मतलब नियम।" ये झुकना नहीं जानते। सेना, पुलिस या प्रशासन में उच्च पद पाते हैं। ​👣 द्वितीय चरण (मकर नवांश - शनि): [वृषभ राशि] (पृथ्वी + धैर्य) 🔹 रूप: इनका कद मध्यम और शरीर मजबूत होता है। चेहरे पर गंभीरता होती है। ये अपनी उम्र से बड़े दिख सकते हैं। 🔹 स्वभाव: ये बहुत मेहनती और व्यावहारिक (Practical) होते हैं। ये भावनाओं में नहीं बहते। ये अपनी ऊर्जा को धीरे-धीरे जलाते हैं, लम्बी रेस के घोड़े होते हैं। 🔹 विचार: "परिणाम क्या मिलेगा?" ये भौतिक सफलता और संसाधन जुटाने में विश्वास रखते हैं। ​👣 तृतीय चरण (कुंभ नवांश - शनि): [वृषभ राशि] (पृथ्वी + बुद्धि) 🔹 रूप: इनकी शारीरिक बनावट थोड़ी अलग या विशिष्ट (Unique) होती है। आँखें विचारशील होती हैं। 🔹 स्वभाव: ये 'विद्रोही' होते हैं। समाज की पुरानी रीतियों को काटना (कृत्तिका का उस्तरा) इनका काम है। ये भविष्यवक्ता या वैज्ञानिक सोच वाले होते हैं। 🔹 विचार: "सब कुछ बदला जा सकता है।" ये समाज कल्याण और मानवता के लिए अपनी आग का प्रयोग करते हैं। ​👣 चतुर्थ चरण (मीन नवांश - गुरु): [वृषभ राशि] (पुष्कर नवांश - सबसे पवित्र) 🔹 रूप: यह कृत्तिका का सबसे सुंदर और सौम्य रूप है। त्वचा कोमल और आँखें बड़ी/पानीदार होती हैं। 🔹 स्वभाव: यहाँ आग 'दीपक' बन जाती है। ये भोग-विलास (वृषभ) के बीच रहकर भी 'संन्यासी' (मीन) होते हैं। इनमें कला और संगीत की समझ होती है। 🔹 विचार: "शांति और मोक्ष।" ये दूसरों की मदद करने के लिए हमेशा तत्पर रहते हैं। ​🗡️ कृत्तिका का प्रतीक: उस्तरा (Razor) कृत्तिका का काम है काटना। किसको? अज्ञान और मोह को। जैसे अग्नि भोजन से 'मल' को अलग करती है और 'रस' को अलग, वैसे ही कृत्तिका जातक झूठ और सच को अलग कर देता है। ​⚠️ जीवन सूत्र: अपनी जठराग्नि और काम-अग्नि (Passion) का सम्मान करें। सात्विक भोजन करें, क्योंकि जैसा अन्न होगा, वैसी ही 6 माताएं (धातुएं) बनेंगी और वैसा ही आपका जीवन (तेज) बनेगा। ​🙏 क्या आप अपनी भीतर की इस ऊर्जा को महसूस करते हैं? कमेंट में "जय कार्तिकेय" या 🔥 लिखें और शेयर करें। ​#KrittikaNakshatra #Ayurveda #SevenDhatus #Kartikeya #Navamsha #VedicAstrology #AcharyaRajesh #JyotishScience - जनवरी 12, 2026 इसे ईमेल करें इसे ब्लॉग करें! X पर शेयर करें Facebook पर शेयर करें Pinterest पर शेयर करें #✡️ज्योतिष समाधान 🌟 #🙏कर्म क्या है❓ #🙏गुरु महिमा😇 #💫राशि के अनुसार भविष्यवाणी
🔯कुंडली दोष - मेदा अस्थि मंक्ष्स 2 7 মড়]] 7 अस्थि H रक्त Hsl lಮil मेदा अस्थि मंक्ष्स 2 7 মড়]] 7 अस्थि H रक्त Hsl lಮil - ShareChat
#🌸 जय श्री कृष्ण😇 जिंदगी में उन्हीं को महत्व दो जो तुम्हारे साथ बने रहना चाहते है बाकी सब तो बस वक्त के मुसाफिर हैं #💫राशि के अनुसार भविष्यवाणी #🙏गुरु महिमा😇 #🙏कर्म क्या है❓ #✡️ज्योतिष समाधान 🌟
🌸 जय श्री कृष्ण😇 - भरणी नक्षत्रः सौंदर्य और संयम भरणी नक्षत्रः सौंदर्य और संयम - ShareChat
#🌸 जय श्री कृष्ण😇 🌙 हृदय की झील में खिली 'कुमुदिनी' और रिश्तों की 'पिस्ता-खीर' 🪷 ज्योतिष को अक्सर हम केवल गणित और गणनाओं तक सीमित मान लेते हैं, लेकिन वास्तव में यह परमात्मा की बनाई हुई सबसे सुंदर और रहस्यमयी पेंटिंग है जहाँ कभी-कभी कुंडली में ग्रह ऐसी युति बनाते हैं कि एक लुभावना दृश्य पैदा हो जाता है जिसे देखकर बड़े-बड़े ज्ञानी भी अपना दिल हार बैठते हैं और ईश्वरीय लीला के आगे नतमस्तक हो जाते हैं। एक ऐसे ही काव्यात्मक योग की जब हम कल्पना करते हैं जहाँ किसी जातक की कुंडली में चौथे भाव यानी सुख स्थान में बुध और शनि एक साथ बैठे हों और दूर आकाश में यानी बारहवें भाव में चंद्रमा अकेले चमक रहा हो, तो यह साधारण योग नहीं बल्कि प्रकृति का एक दृश्य काव्य बन जाता है क्योंकि चौथा भाव एक शांत तालाब रूपी जल तत्व है जिसके भीतर बुध की हरियाली और शनि की गहराई मिलकर एक गहरे हरे रंग की वनस्पति का निर्माण करते हैं, और उधर बारहवें भाव का चंद्रमा जो आकाश है जब उसकी अदृश्य चांदनी उस गहरे पानी पर पड़ती है तो वहां कमल नहीं बल्कि 'कुमुदिनी' खिल उठती है जो अंधेरे में उम्मीद और सौंदर्य का प्रतीक है। ऐसे व्यक्ति का व्यक्तित्व बड़ा ही जादुई होता है क्योंकि बुध की बुद्धि और हास्य में जब शनि की गंभीरता मिलती है तो वह इंसान छिछली बातें नहीं करता और उसकी हंसी-मजाक में भी एक गहरा फलसफा छुपा होता है, मानो उसकी जुबान से निकली बात हवा में नहीं उड़ती बल्कि पत्थर पर तराशे अक्षरों की तरह अमर हो जाती है। जब हम आतिथ्य की बात करते हैं तो चौथा भाव दूध और ममता का है, और सोचिये कि दूध में जब शनि की आंच यानी गाढ़ापन और बुध का हरा रंग यानी पिस्ता मिलता है तो वह पिस्ता वाली गाढ़ी रबड़ीदार खीर बन जाती है, जिससे ऐसे व्यक्ति के हाथ का भोजन केवल पेट नहीं भरता बल्कि आत्मा को तृप्त कर देता है क्योंकि उनके प्रेम में शनि का धैर्य और बुध का स्वाद घुला होता है। चौथे भाव का शनि अक्सर दिल में एक एकांत देता है लेकिन बारहवें घर का चंद्रमा उस अंधेरे को डरावना नहीं बल्कि शायराना बना देता है, इसलिए ऐसा जातक जब कविता लिखता है तो लगता है जैसे वह अंधेरे कमरे में टॉर्च लेकर किसी बहुत ही मुलायम और कोमल चीज़ को ढूंढ रहा हो। यह योग माता के साथ भी एक गहरे और मूक संबंध को दर्शाता है जहाँ माँ का प्रेम उस कुमुदिनी की तरह होता है जो रात के सन्नाटे में खिलती है, और साथ ही बारहवें भाव का मोक्ष और चौथे भाव के मन का यह संबंध जातक को जन्मजात योगी बनाता है जो भीड़ में भी खुद को अकेला महसूस कर सकता है लेकिन अपने कमरे के एकांत में ही खुद को पूर्ण पाता है। बुध यादें हैं और शनि स्थायित्व, इसलिए ऐसे लोग पुरानी यादों और पुराने रिश्तों के संरक्षक होते हैं जिनके मन की तलहटी में बचपन की छोटी बातें हमेशा सुरक्षित रहती हैं, और अंततः यह "कुमुदिनी योग" हमें यही सिखाता है कि जीवन में शनि की कालिमा भी ज़रूरी है ताकि उस पर चंद्रमा की चांदनी चमक सके और एक गंभीर व्यक्तित्व के भीतर भावनाओं का सागर हिलोरें ले सके। — आचार्य राजेश कुमार (हनुमानगढ़, राजस्थान) (सत्य सनातन ज्योतिष एवं महाकाली सेवक) #Astrology #Jyotish #PlanetaryYoga #Moon #Saturn #Mercury #Spirituality #PoetryInStars #AcharyaRajeshKumar #🙏जय माता दी📿 #🔯वास्तु दोष उपाय #✡️ज्योतिष समाधान 🌟 #💫राशि के अनुसार भविष्यवाणी
🌸 जय श्री कृष्ण😇 - ShareChat
#🌟देखिए खास ज्योतिष उपाय लुई चौदहवें के समय की बात है, एक कैदी को मौत की सजा सुनाई गई थी। उसे महल के एक दूरस्थ हिस्से में कैद कर दिया गया था और भोर होने में अब बस एक रात बाकी थी... ​आधी रात को, कोठरी का दरवाजा अचानक खुला। राजा अपने पहरेदारों के साथ अंदर आया और बोला: ​"मैं तुम्हें एक मौका दूंगा। अगर तुम इसका सही इस्तेमाल करते हो, तो तुम बच सकते हो। तुम्हारी कोठरी में एक बिना पहरे वाला निकास द्वार (एग्जिट) है। अगर तुम उसे ढूंढ लेते हो, तो तुम आजाद हो जाओगे। अगर नहीं ढूंढ पाए, तो सूर्योदय होते ही वे तुम्हें फांसी देने के लिए आएंगे।" ​जंजीरें हटा दी गईं। दरवाजा बंद हो गया। और एक हताश खोज शुरू हुई। ​कैदी ने हर कोना छान मारा। एक फटे-पुराने कालीन के नीचे, उसे एक छिपा हुआ चोर-दरवाजा मिला। सीढ़ियां नीचे एक अंधेरे तहखाने की ओर जाती थीं। आगे और सीढ़ियां उसे वापस ऊपर ले गईं। उसने ताजी हवा का झोंका महसूस किया। उम्मीद जग उठी। ​लेकिन उसने खुद को एक ऐसी ऊंची मीनार में पाया जहां से जमीन बमुश्किल दिखाई दे रही थी। ​दीवार का एक पत्थर हिला। उसके पीछे एक संकरा रास्ता था, इतना चौड़ा कि रेंगकर निकला जा सके। तभी उसे पानी की आवाज सुनाई दी। एक नदी! आजादी बस करीब ही थी! ​लेकिन नहीं... वहां सिर्फ एक सलाखों वाली खिड़की थी। ​रात इसी तरह बीत गई। उम्मीद की हर किरण एक बंद रास्ते में बदल गई। ​जब सूरज उगा, तो राजा एक बार फिर दरवाजे पर प्रकट हुआ। ​"मैं देख रहा हूं कि तुम अभी भी यहीं हो," उसने कहा। ​"आपने मुझसे झूठ क्यों बोला?" कैदी ने निराशा में पूछा। ​"मैं तुम्हारे साथ ईमानदार था," राजा ने उत्तर दिया। ​"मैंने हर जगह खोजा। निकास द्वार कहां है?" राजा ने शांति से उत्तर दिया: ​"कोठरी का दरवाजा खुला था।" ​सच सरल है, हालांकि दर्दनाक भी: लोग अक्सर अपनी मुश्किलें खुद पैदा करते हैं, जटिल रास्ते खोजते हैं जबकि जवाब ठीक उनके सामने होता है। ​जीवन सरल हो सकता है जब हमारी सोच सरल हो। और यह तब भारी हो जाता है जब हम खुद इसे ऐसा बना देते हैं। ​कभी-कभी, बाहर निकलने का रास्ता बस... एक खुला दरवाजा होता है। तनाव और डर की स्थिति में इंसान का दिमाग 'Tunnel Vision' का शिकार हो जाता है, जहाँ वह केवल मुश्किल रास्तों पर ध्यान देता है और सबसे सरल विकल्प को अनदेखा कर देता है। कहानी कैसी लगी जरूर बताइएगा। #MoralStory #motivation #history #लुई14 #💫राशि के अनुसार भविष्यवाणी #✡️ज्योतिष समाधान 🌟 #🔯वास्तु दोष उपाय #🙏जय माता दी📿
#🙏कर्म क्या है❓ #✡️ज्योतिष समाधान 🌟 #💫राशि के अनुसार भविष्यवाणी
🙏कर्म क्या है❓ - ShareChat
00:20
#🌟देखिए खास ज्योतिष उपाय ।बहुरूपी संसार: ग्रहों की वक्र दृष्टि, समय का चक्र और कर्म का विधान ।। सोचने वाली बात है कि इस दुनिया की आबादी 800 करोड़ से भी ज्यादा है, लेकिन उन्हें चलाने वाले अंक (ग्रह) केवल 9 हैं। यही 9 ग्रह अपनी चाल और गोचर से पूरी दुनिया को नचा रहे हैं। लोग सोचते हैं कि नाम की स्पेलिंग (वर्तनी) बदल लेने से किस्मत बदल जाएगी, लेकिन सच तो यह है कि स्पेलिंग बदलने से कुछ नहीं होता, जब तक कि ग्रहों की चाल और आपके कर्म नहीं बदलते। यह संसार बड़ा ही विचित्र और बहुरूपी है। बचपन में पुत्र पिता के सहारे चलता है, उसकी उंगली पकड़कर जीवन की राहें ढूंढता है। कुदरत का नियम तो यही है कि जवान होते ही पुत्र पिता का सहारा बने। लेकिन ग्रहों की माया देखिये—यदि पिता की कुंडली में पुत्र का कारक ग्रह 'वक्री' हो, तो वह पुत्र जवानी आते ही अपनी स्वार्थ पूर्ति के बाद पिता से दूर हो जाता है। पिता का जीवन भर का किया-धरा सब परे रह जाता है और अंत समय में वह दूसरों पर आश्रित होकर अपना बुढ़ापा निकालता है। ठीक यही स्थिति पुत्री की है। शादी तक वह पिता पर और शादी के बाद पति पर निर्भर होती है। लेकिन यदि उसकी कुंडली में गुरु (बृहस्पति) वक्री हो, तो वह पहले पिता का बदला हुआ रूप देखती है और फिर पति का। अंततः अपने स्वार्थ के कारण वह संबंधों को केवल मतलब तक ही सीमित रखती है। असल में, वक्री ग्रहों के इसी प्रभाव ने संसार में हर काम और संबंध के लिए 'दो प्रकार के अर्थ' बना दिए हैं और दुनिया का रूप 'दो-रंगा' कर दिया है। रिश्तों की यह अदला-बदली गोचर के खेल पर टिकी है। जन्म समय का सूर्य यदि मित्र भाव में हो तो सहयोग देता है, लेकिन जब वही सूर्य गोचर में शत्रु भाव में आता है, तो उस सूर्य के अंदर शत्रुता जैसे गुण आ जाते हैं; जो कार्य और दोस्त अब तक सहायक थे, वही 'विश्वासघात' करने लगते हैं। यही बात रोजाना की जिंदगी में चन्द्रमा के लिए मानी जाती है। कर्क राशि का चन्द्रमा हृदय को द्रवित (कोमल) कर देता है, लेकिन मकर का चन्द्रमा हृदय को कठोर कर देता है। पर गोचर का विरोधाभास देखिये—जन्म के समय का कठोर चन्द्रमा जब गोचर से कर्क राशि में आता है, तो वह अपने स्वभाव को 'द्रव' बना लेता है और कभी-कभी एक 'कसाई भी दया कर जाता है'। इसके विपरीत, जिसका चन्द्रमा जन्म से ही कर्क राशि का हो या चौथे भाव का प्रभाव देने वाला हो, और वही चन्द्रमा जब दसवें भाव में आता है या मकर राशि का होता है, तो दया का प्रभाव समाप्त होकर केवल स्वार्थ की नीति पैदा हो जाती है; तब दया करने वाला भी 'कसाई' का रूप धारण कर लेता है। समय का चक्र बड़ा बलवान है। केतु अपने उच्च समय में जातक की खूब 'जय-जयकार' करवाता है, लेकिन ठीक नौ साल बाद जब वही केतु नीच राशि में गोचर करता है, तो बदनामी भी देता है। जितनी अधिक जय-जयकार हुई होती है, उतनी ही गहरी नफरत भी वह अपनी शक्ति से प्रदान कर देता है। उधर राहु, जब बारहवें भाव में होता है तो ऊपरी बाधाएं और आकस्मिक कष्ट प्रदान करता है, लेकिन वही राहु जब छठे भाव में गोचर करता है, तो जातक को दूसरों के लिए 'आफत' बनाकर सामने खड़ा कर देता है। इसलिए कहा है—"पुरुष बली नहि होत है, समय होत बलवान।" जो लोग समय को समझकर चलते हैं, वे न किसी को दिक्कत देते हैं और न खुद दिक्कत का सामना करते हैं। समय की धारा में भूतकाल पिता है, वर्तमान काल खुद का जीवन है और भविष्य खुद की संतान का रूप है। अगर पिता ने अच्छे कर्म किए हैं, तो आप खुद भी अच्छे जीवन को जियोगे और पिता के कर्मों का भोग प्राप्त करोगे। लेकिन यदि आपने खुद (वर्तमान में) कोई अच्छा काम नहीं किया, तो भले ही कितनी ही अच्छी जिन्दगी जीने का हक मिले, लेकिन आपकी संतान तो दुखी रहेगी, उसे कोई रोक नहीं सकता। यह संसार एक चक्की की तरह है और सामाजिकता उस विशाल बड़ (वटवृक्ष) के पेड़ की तरह है जिसके नीचे यह संसार की चक्की चल रही है। कहा भी है—"चक्की चल रही बड़ के नीचे, रस पीजा लांगुरिया।" अब उस रस को पीकर कैसा चलना है, वह आपकी सामाजिकता पर निर्भर करता है। जन्म हुआ है तो मरना भी होगा, इसे कोई रोक नहीं सकता। जब सूर्य ने जन्म लिया है, तो शनि भी जन्म लेगा। और यहाँ एक गहरा राज है—जब शनि खुद कुछ नहीं कर पाता, तो वह अपने 'चेलों' राहु और केतु से अपने कार्य को करवाता है। जब शनि के साथ राहु मिलता है तो उल्टे काम करवाता है; जो भी होगा वह केवल 'झूठ की दीवार' पर खड़ा होगा और जिस दिन गुरु और केतु की छाया उस दीवार पर आयी, झूठ की दीवार पर खड़ा यह संसार धराशायी हो जाएगा। इसलिए घमंड करना बेकार की बात है। जो प्राप्त कर रहे हो वह अपने पूर्वजों के कर्मों से प्राप्त कर रहे हो। अपनी-अपनी तानी (ऐंठन) तो 'म' के ऊपर लगी बिंदी जैसी है, जो सीधी 'ड' के नीचे आ जाएगी और वही 'घमंड' शब्द 'घमड़' (मिट्टी में मिलना) बन जाएगा और जैसे ही जीवन 'घमड़' हुआ, समझ लो घमंड का फल मिलने लगा। अंततः, कभी भी एक ही ग्रह का आसरा नहीं पकड़ना चाहिए। दिमाग में जब बुरे भाव आने लगें, तो सोचना चाहिए कि चन्द्रमा बुरे ग्रह के साथ है। कुंडली देखकर समझ सकते हो तो समझ लो कि चन्द्रमा किस ग्रह के साथ या किसकी शक्ति में अपना गोचर कर रहा है। नजरिया समय के साथ बदलता है—किसी भी सड़ी-गली चीज से नफरत होना स्वाभाविक है, लेकिन वही सड़ी-गली चीज कभी-कभी मन को बहुत सुंदर लगने लगती है, जैसे भूख लगने पर 'फलों का सड़ा-गला अचार' भी कितना अच्छा लगता है। यदि लड़का उद्दंड हो गया है, बात को नहीं मानता है, तो उसे 'प्रकृति के सहारे पर छोड कर चुप लगाना उचित होगा'। जैसे ही समय की मार लड़के पर पड़ेगी, वह अपने आप ही ठीक भी हो जाएगा और अपनी दुनियादारी भी बदल कर इस बहुरूपी संसार का प्रभाव आपके सामने सिद्ध कर देगा। आखिरकार, कर्म का विधान तो यही कहता है—"बोया पेड़ बबूल का, तो आम कहाँ से खाय?" डिस्क्लेमर: यह लेख केवल ज्योतिषीय जानकारी और ग्रह-गोचर के प्रभाव को समझाने के उद्देश्य से लिखा गया है। पाठक इसे अपने विवेक से लें। #💫राशि के अनुसार भविष्यवाणी #✡️ज्योतिष समाधान 🌟 #🙏गुरु महिमा😇 #🙏कर्म क्या है❓
🌟देखिए खास ज्योतिष उपाय - आचार्य राजेश कुमार हनुमानगढ़ आचार्य राजेश कुमार हनुमानगढ़ - ShareChat
#🌟देखिए खास ज्योतिष उपाय 🛑 ब्रह्मांड का विज्ञान बनाम 'गूगलिया' दुकानदारी: एक महा-विश्लेषण 🛑 (चेतावनी: यह लेख आपकी सोच की नींव हिला सकता है। सत्य सुनने का साहस हो, तभी पढ़ें।) आज सोशल मीडिया पर 'भविष्य' बेचने वालों की मंडी लगी है। कोई मोबाइल नंबर बेच रहा है, तो कोई नाम की स्पेलिंग। भ्रम के इस शोर में, आज मैं, आचार्य राजेश कुमार, ज्योतिष और विज्ञान का वो नग्न सत्य रखने जा रहा हूँ जो आपको टीवी चैनल और गूगल वाले पंडित कभी नहीं बताएंगे। आइये, आज झूठ के हर पर्दे को एक-एक करके हटाते हैं: 📅 1. तारीख का धोखा: 1 जनवरी vs. विक्रम संवत हम 1 जनवरी को 'हैप्पी न्यू ईयर' मनाते हैं, पर क्यों? * अंग्रेजी कैलेंडर (Gregorian): यह सिर्फ 'ऑफिस चलाने' की व्यवस्था है। 1 जनवरी को कड़कड़ाती ठंड होती है, प्रकृति सोई होती है और दिन की शुरुआत 'आधी रात' (निशा काल/प्रेत काल) से होती है। * हिजरी कैलेंडर: यह चांद पर आधारित है, इसलिए इनके त्यौहार हर साल मौसम से 10 दिन पीछे खिसक जाते हैं। * विक्रम संवत (हमारा विज्ञान): हमारे ऋषियों ने 'सुपर-कंप्यूटर' बनाया। हमने सूर्य (आत्मा) और चंद्रमा (मन) को 'अधिक मास' से बैलेंस किया। हमारा नया साल (चैत्र प्रतिपदा) तब आता है जब पेड़ों पर नए पत्ते आते हैं, फसल पकती है और सूर्य मेष राशि में उच्च का होता है। हम प्रकृति के साथ चलते हैं, घड़ी की सुई के साथ नहीं। 📱 2. मोबाइल नंबर का टोटल '24' या '6' करने से मोक्ष नहीं मिलता!ना ही घन मिलेगा यह आज का सबसे बड़ा फ्रॉड है। "जी, आपका मोबाइल नंबर 8 पर खत्म हो रहा है, इसलिए आप दुखी हैं। 5000 का लकी नंबर लो, करोड़पति बन जाओगे।" * मित्रों: ज़रा सोचिये, अगर मोबाइल नंबर के 'जोड़' (Total) से किस्मत चमकती, तो सड़क पर सिम कार्ड बेचने वाला लड़का आज अरबपति होता, धूप में खड़ा नहीं होता। * तर्क: रावण का मोबाइल नंबर चाहे जो भी होता, उसका अंत श्री राम के हाथ ही होना था। यह उसके 'कर्म' थे, उसका 'सिम कार्ड' नहीं। नंबर बदलने से ग्रह नहीं बदलते। 🧮 3. 800 करोड़ आबादी और 9 अंकों का गणित 'न्यूमेरोलॉजिस्ट' कहते हैं— "आप 1 नंबर वाले हैं, आप राजा बनेंगे।" * गणित: दुनिया की आबादी 800 करोड़ है। अंक सिर्फ 9 हैं। * 800 करोड़ ÷ 9 = लगभग 88 करोड़ लोग। * क्या इसका मतलब यह है कि दुनिया के 88 करोड़ लोग राजा हैं? क्या 6 नंबर वाले सभी 88 करोड़ लोग अमीर हैं? नहीं! उसी तारीख को एक भिखारी भी पैदा हुआ है और एक अरबपति भी। निष्कर्ष: भविष्य 1 से 9 के खेल से नहीं, आपकी व्यक्तिगत कुंडली (Lagna/Nakshatra) और पुरुषार्थ से तय होता है। 🔡 4. स्पेलिंग का रायता: 'Amit' या 'Aamit'? लोग आधार कार्ड पर नाम की इंग्लिश स्पेलिंग (Spelling) ऐसे बिगाड़ रहे हैं जैसे टाइपिंग मिस्टेक हो। * वैज्ञानिक सत्य: यह ब्रह्मांड 'नाद' (Sound/Vibration) को पकड़ता है, आपकी 'लिपि' (Script) को नहीं। * आप कागज पर 'Raam' को 'Rraamm' लिख लीजिये, लेकिन जब मुंह से पुकारेंगे तो आवाज 'राम' ही निकलेगी। शनिदेव को आपकी इंग्लिश स्पेलिंग से कोई मतलब नहीं है। * यह मारुति कार पर मर्सिडीज का स्टिकर लगाने जैसा है। स्टिकर बदलने से इंजन (प्रारब्ध) नहीं बदलता। 🔭 5. पश्चिमी ज्योतिष: गलत नक्शे से सही मंजिल? "मेरा जन्मदिन मई में है, मेरा भविष्य बताइये।" अंग्रेजी ज्योतिष (Sun Sign) कहता है कि 20 मार्च से 20 अप्रैल तक जन्मे करोड़ों लोग 'मेष' हैं। * पोल-खोल: वे जिस आसमान की गणना कर रहे हैं (Sayana), वो 2000 साल पहले था। आज तारे 23-24 डिग्री खिसक चुके हैं (Ayanamsa)। वे गलत आसमान देख रहे हैं। वैदिक ज्योतिष 'महीने' को नहीं, 'पल' (Second) को पकड़ता है, इसलिए यहाँ जुड़वा बच्चों का भाग्य भी अलग होता है। 🤡 6. पांचवीं कक्षा का गणित और टीआरपी की भूख दुख की बात है कि आज ज्योतिष वो लोग सिखा रहे हैं जो बेरोजगार थे। * जिनके पास कोई काम नहीं था, उन्होंने 2 दिन का कोर्स किया, 2+2=4 करना सीखा और इंस्टाग्राम पर 'गुरु' बन गए। * मीडिया को 'सत्य' नहीं, 'शोर' चाहिए। इसलिए असली ज्ञानी मौन साधना में है और 'अधजल गगरी' सोशल मीडिया पर छलक रही है। अंतिम सत्य: मित्रों, ईश्वर ने आपको 'अधूरा' बनाकर नहीं भेजा। कोई नंबर मिसिंग नहीं है। सफलता हाथ पर हरे पेन से नंबर लिखने या नाम बिगाड़ने से नहीं, बल्कि सही दिशा में किये गए कर्म और ग्रहों की सटीक शांति से मिलती है। शॉर्टकट छोड़िये, वेदों की शरण में आइये। सत्य सनातन ही विज्ञान है। 🏚️ 7. रील वाली दुनिया का 'काला सच' सोशल मीडिया पर 30 सेकंड की रील बनाकर करोड़ों के उपाय बताने वाले इन 'गुरुओं' की असलियत कभी जानने की कोशिश कीजिये। * कड़वा सवाल: जो व्यक्ति आपको नाम की स्पेलिंग बदलकर या मोबाइल नंबर देकर 'करोड़पति' बनाने का दावा कर रहा है, वो खुद किराए के मकान में क्यों रह रहा है? * अगर उनके पास कुबेर का खजाना खोलने की चाबी है, तो वो आपसे 500-1000 रुपये की फीस के लिए क्यों गिड़गिड़ा रहे हैं? वो खुद भारत के सबसे अमीर आदमी क्यों नहीं बन जाते? * हकीकत: 90% ऐसे लोग सिर्फ कैमरे के सामने चमकते हैं, असल जिंदगी में उनका ज्योतिष से कोई लेना-देना नहीं। याद रखिये, हर चमकती हुई चीज सोना नहीं होती। 🇮🇳 8. भारतीयों का कर्तव्य: ऋषियों के विज्ञान को बचाएं भारत का वैदिक ज्योतिष वो महान विज्ञान है जो सदियों से पूरी दुनिया को 'चंदन' की तरह शीतलता और रोशनी दे रहा है। लेकिन आज चंद अज्ञानी लोगों ने टीआरपी (TRP) और 'व्यूज' (Views) के चक्कर में इस पवित्र विद्या पर दाग लगा दिया है। * जो भी परोसा जा रहा है, उसे आंख मूंदकर न निगलें। अपनी बुद्धि और तर्क की कसौटी पर कसें। * आवाज उठाएं: गलत के साथ खड़े न हों। उनसे सवाल पूछना शुरू करें। जब आप सवाल पूछेंगे, तभी यह झूठ की बाढ़ थमेगी। निष्कर्ष: यह लड़ाई सिर्फ ज्योतिष की नहीं, हमारी संस्कृति और विज्ञान को बचाने की है। आइये, मिलकर इस पाखंड को रोकें और 'सत्य सनातन' की मशाल को ऊंचा रखें। 🚩 - आचार्य राजेश कुमार (सत्य सनातन ज्योतिष एवं महाकाली सेवक, हनुमानगढ़)7597718725 #🙏जय माता दी📿 #🔯वास्तु दोष उपाय #✡️ज्योतिष समाधान 🌟 #💫राशि के अनुसार भविष्यवाणी
🌟देखिए खास ज्योतिष उपाय - 3 6 2 63 5 6 4 2 1  3 3 5-19 4Wx NEWS:  IRP 872 NH L 5 LUCKY 85 ' 0 8NK ہل -^ NUMBER Uo 5 Change Name Spelling पण्प्चनग ঐনিক নিগান दुकानदारी गूगलिया (Vedic Science) (Pop Astrology) 3 6 2 63 5 6 4 2 1  3 3 5-19 4Wx NEWS:  IRP 872 NH L 5 LUCKY 85 ' 0 8NK ہل -^ NUMBER Uo 5 Change Name Spelling पण्प्चनग ঐনিক নিগান दुकानदारी गूगलिया (Vedic Science) (Pop Astrology) - ShareChat
#✡️ज्योतिष समाधान 🌟 #💫राशि के अनुसार भविष्यवाणी #🚀SC बूस्ट के साथ Views को सुपरचार्ज करें #🔯वास्तु दोष उपाय #🙏जय माता दी📿
✡️ज्योतिष समाधान 🌟 - Acharya Rajesh Kumar कुछ लोगों को लगता है कि वो हमें छोड़कर आगे बढ गए पर असल में वो उस छाँव देने वाले पेड़ को ही छोड गए जो उन्हें तपती धूप्में बचाती थी। हम अपनी जगह कल भी थे॰ औरआज भी अडिग हैं. पर याद रखना , छाँव देने वाले पेड़ बारभ्बारनही मिला करते। 0 तलाश आपकी कभी खत्म नहीं होगी , येहमारा यक़ीन है। maakallijyotish astrologer philosopher Ratan expert and vastu expert 7597718725 Acharya Rajesh Kumar कुछ लोगों को लगता है कि वो हमें छोड़कर आगे बढ गए पर असल में वो उस छाँव देने वाले पेड़ को ही छोड गए जो उन्हें तपती धूप्में बचाती थी। हम अपनी जगह कल भी थे॰ औरआज भी अडिग हैं. पर याद रखना , छाँव देने वाले पेड़ बारभ्बारनही मिला करते। 0 तलाश आपकी कभी खत्म नहीं होगी , येहमारा यक़ीन है। maakallijyotish astrologer philosopher Ratan expert and vastu expert 7597718725 - ShareChat
#🌸 जय श्री कृष्ण😇 ग्रहों का विचित्र खेल और मोहल्ले की 'सुप्रीम कोर्ट': सुषमा भाभीग्रहों का विचित्र खेल और मोहल्ले की 'सुप्रीम कोर्ट': सुषमा भाभी लेखक: आचार्य राजेश कुमार हमारे मोहल्ले की फिजाओं में अगर किसी शख्सियत का सिक्का चलता है, तो वे हैं—सुषमा भाभी। अगर एक ज्योतिषी की नज़र से देखा जाए, तो सुषमा भाभी महज एक महिला नहीं, बल्कि ग्रहों की एक चलती-फिरती और बड़ी ही दिलचस्प 'युति' हैं। उनकी फितरत में एक अजीब सा हुनर है—वे राई का पहाड़ बनाने में माहिर हैं। ज्योतिष में यह 'राहू' (Rahu) का साक्षात् प्रभाव है, जो धुएं को भी बादल बनाकर पेश करता है। इसी राहू के दम पर वे मोहल्ले की किसी छोटी सी बात को इतना उछाल देती हैं कि सामने वाला शरीफ आदमी अपना बोरिया-बिस्तर समेट कर भागने को मजबूर हो जाता है, या फिर अपनी बातों में इतना वजन डाल देती हैं कि कल का आया हुआ अजनबी भी मोहल्ले का 'चौधरी' बन बैठता है। जुबान का जादू और ग्रहों की गवाही उनकी बातों में शुक्र (Venus) का ऐसा जबरदस्त आकर्षण है कि अमीर हो या गरीब, बूढ़ा हो या जवान, सब उनकी बातों को ऐसे गौर से सुनते हैं जैसे कोई ब्रह्मवाक्य हो। और मजे की बात यह है कि बात करते वक्त वे गवाही अपने साथ रखती हैं, अगर कोई गवाह न मिले तो "भगवान की सौगंध" उनकी जुबान पर धरी रहती है। यहाँ साफ़ दिखता है कि उनका गुरु (Jupiter), जो धर्म का कारक है, वो उनके स्वार्थ (राहू) के आगे कमजोर पड़ गया है, तभी तो वे ईश्वर की कसम को केवल एक हथियार की तरह इस्तेमाल करती हैं। व्यवहार कुशलता में तो उनका जवाब नहीं! जब वे बुजुर्गों के पास बैठती हैं, तो शनि (Saturn) जैसी गंभीरता ओढ़ लेती हैं—सिर पर पल्ला और लहज़े में खानदानी तहजीब। वहीँ, जब हमउम्र औरतों या पुरुषों के बीच होती हैं, तो शुक्र अपना रंग दिखाता है—कटाक्ष भरे नैन-मटक्के और हंसी-ठिठोली। और बच्चों के साथ? वहां उनका चंद्रमा (Moon) जाग उठता है, इतना लाड़-प्यार लुटाती हैं कि बच्चे अपनी सगी माँ की गोद छोड़कर भाभी की गोद में जा बैठते हैं। यह ग्रहों का ऐसा बहुरूपिया खेल है जो सबको अपना बना लेता है। घर का 'न्यूज़ रूम' और तीन 'बुध' रूपी कन्याएं अब ज़रा उनके घर के ग्रहों का हाल देखिए। पतिदेव किसी कचहरी में 'बाबू' हैं। जितने भाभी के चर्चे हैं, पतिदेव उतने ही खामोश और अपनी दुनिया में मस्त रहने वाले जीव हैं। ज्योतिषीय भाषा में कहें तो यह 'कमजोर सूर्य' (Weak Sun) और 'पीड़ित गुरु' का लक्षण है। घर की असली 'सरकार' यानी सूर्य का तेज, भाभी के बलिष्ठ राहू के आगे फीका पड़ गया है। उनके पास तीन लड़कियां हैं, जो ज्योतिष में 'बुध' (Mercury) का प्रतीक हैं—यानी संदेशवाहक। जब तक पिता घर पर हैं, ये बुध रूपी कन्याएं शांत रहती हैं, लेकिन जैसे ही भाभी घर लौटती हैं, ये तीनों 'एक्टिव' हो जाती हैं। भाभी मोहल्ले भर की खबरें—किसके घर क्या पका, कौन कहाँ गया—अपनी इन 'रिपोर्टरों' को सुनाती हैं। और कमाल देखिए, जब भाभी बातें करते हुए कुछ भूल जाती हैं, तो यही बेटियां उन्हें याद दिलाती हैं। यह साबित करता है कि भाभी का अपना बुध कमजोर है, इसलिए उन्हें अपनी बेटियों के 'स्मृति-कोष' का सहारा लेना पड़ता है। विलासिता, गुप्त धन और अष्टम भाव का रहस्य सुषमा भाभी को ईश्वर ने गाने-बजाने और नाचने का भी खूब हुनर बख्शा है, जो कि उच्च के शुक्र की निशानी है। किसी भी उत्सव में अगर भाभी नहीं, तो वो फीका लगता है। किसी की रसोई (जो कि दूसरे भाव का विषय है) में अगर भाभी का दखल न हो, तो खाना बेस्वाद माना जाता है। आर्थिक स्थिति का गणित बड़ा ही विचित्र है। पतिदेव जो सैलरी लाते हैं, वो तो भाभी के कपड़ों की धुलाई और शान-शौकत में ही स्वाहा हो जाती है—यह खर्चीले शुक्र का प्रभाव है। लेकिन घर का असली रसूख और खर्चा जिस 'गुप्त स्रोत' से चलता है, उसका पता आज तक किसी को नहीं चला। यह कुंडली का 'अष्टम भाव' (8th House) और 'राहू' है, जो गुप्त धन और अनजान जुगाड़ से काम चलाता है। भाभी की यही 'राहू-नीति' है कि उनकी जान-पहचान से बड़े-बड़े काम चुटकियों में हो जाते हैं। राजनीति: सूर्य पर राहू का ग्रहण मोहल्ले की राजनीति में भाभी का कोई पद नहीं है, लेकिन वे 'किंगमेकर' हैं। ज्योतिष में राजा सूर्य होता है, लेकिन यहाँ राहू (भाभी) तय करता है कि राजा कौन बनेगा। आपको शुक्ला जी याद होंगे? उन्हें नेतागिरी का शौक था (सूर्य का प्रभाव), लेकिन भाभी ने उन्हें उखाड़ फेंका। और फिर श्रीवास्तव जी, जिन्होंने भाभी को कोई विशेष 'गुड़' खिलाया (जो कि राहू को शांत करने का उपाय था), वे रातों-रात अध्यक्ष बन गए। यह साफ़ तौर पर सूर्य-राहू के ग्रहण दोष और कूटनीति का प्रमाण है कि सत्ता उसी को मिलेगी जिस पर 'सुषमा भाभी' रूपी राहू की कृपा होगी। धर्म और दिखावे की संस्कृति धर्म के मामले में भाभी का नज़रिया बड़ा ही 'मॉडर्न' है। सत्संग में जाती जरूर हैं, लेकिन वहां गुरु (भक्ति) नदारद रहता है और शुक्र (दिखावा) हावी रहता है। वे केवल झांकी की सजावट, कीर्तन के सुर और यह देखती हैं कि कौन सा भजन किस फिल्मी गीत की तर्ज़ पर था। ईश्वर के प्रति श्रद्धा की बात पर उनका जवाब होता है—"अजी, कर्म ही पूजा है, भगवान घर देने थोड़े ही आएंगे।" शादियों में उनका आशीर्वाद लिफाफे के वजन पर निर्भर करता है—यह 'वणिक बुद्धि' (Business Minded Mercury) है। रिश्तों को लेकर उनकी सोच—कि पटरी न खाए तो तलाक ले लो—यह बताता है कि उनके लिए 'संस्कार' (Jupiter) से ज्यादा 'निजी सुख' (Venus) महत्वपूर्ण है। भाषा का अहंकार और मंगल का 'खोपड़ा' सुषमा भाभी को अपनी मातृभाषा हिंदी बोलने में कभी-कभी 'तकलीफ' होती है। अपना रुतबा जमाने के लिए वे बीच-बीच में विदेशी (अंग्रेजी) शब्द बोलती हैं—यह विदेशी कारक राहू का प्रभाव है। जो लोग रसूखदार हैं, भाभी उनके कसीदे पढ़ती हैं, लेकिन अगर कोई विद्वान गरीब है, तो उसे नीचा दिखाने का मौका नहीं छोड़तीं। यहाँ लक्ष्मी (शुक्र) ने सरस्वती (गुरु) को दबा रखा है। जो अज्ञानी उनकी चापलूसी करे, उसे वे आसमान पर चढ़ा देती हैं। चुनाव के समय तो नेताओं की भीड़ उनके दरवाजे पर होती है। उस समय भाभी का 'वाक-चातुर्य' (Mercury-Rahu) देखने लायक होता है—बुरे को अच्छा और अच्छे को गोल-मोल बताना। लेकिन सबसे खतरनाक है उनका "खोपड़ा घूमना"। यह कुंडली का 'अंगारक योग' (मंगल+राहू) है। जब यह योग जागता है, तो भाभी किसी को भी अर्श से फर्श पर पटक सकती हैं, इसी डर से कोई उनके सामने मुंह नहीं खोलता। निष्कर्ष: कलयुग का मीडिया अंत में, अगर हम व्यापक दृष्टिकोण से देखें, तो हमारे हर शहर, हर गांव में ऐसी हज़ारों 'सुषमा भाभियां' मौजूद हैं। ये सिर्फ़ महिलाएं नहीं हैं, बल्कि यह आज के दौर का मीडिया तंत्र है। कोई अखबार बनकर, कोई चैनल बनकर तो कोई वेबसाइट बनकर 'सुषमा भाभी' का किरदार निभा रहा है। इनका ज्योतिषीय समीकरण स्पष्ट है: * कल्पना और ग्लैमराइज करना: यह शुक्र और राहू का काम है। * सूचनाओं को तोड़-मरोड़ कर पेश करना: यह पीड़ित बुध और केतु का खेल है। * तीन बेटियां: वे उन 'दत्तक संतानों' या 'रिपोर्टरों' की तरह हैं जो आज इस चैनल में हैं, कल उस अखबार में। उनका सरोकार सच से नहीं, बल्कि इस बात से है कि 'टीआरपी' कैसे आए और क्या 'बिक' सकता है। सुषमा भाभी उस व्यवस्था का नाम है जहाँ गुरु (ज्ञान और नैतिकता) चुपचाप कोने में बैठा है और महफिल लूट रहे हैं—राहू (छलावा) और शुक्र (दिखावा)। #💫राशि के अनुसार भविष्यवाणी #✡️ज्योतिष समाधान 🌟 #🔯वास्तु दोष उपाय #🚀SC बूस्ट के साथ Views को सुपरचार्ज करें
🌸 जय श्री कृष्ण😇 - ग्रहों का विचित्र खेल और मोहल्ले की 'सुप्रीम कोर्ट ६ सुषमा भाभी ग्रहों का विचित्र खेल और मोहल्ले की 'सुप्रीम कोर्ट ६ सुषमा भाभी - ShareChat