Bhanupriya Ji
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#🕉️सनातन धर्म🚩 #🙏गीता ज्ञान🛕 #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #🙏🏻गुरबानी #🙏गुरु महिमा😇
🕉️सनातन धर्म🚩 - 66 जिस शरीर से सद्ुगुरु की प्राप्ति हुई है, उस शरीर के प्रति अपनी कृतज्ञुता कैसे प्रकट की जाय ? उस शरीर को परमात्त्मा की, सदगुरु की सेवा में लगा दिया जाय यही कृत्तज्ञता है। संत आशारामजी बापू  99 66 जिस शरीर से सद्ुगुरु की प्राप्ति हुई है, उस शरीर के प्रति अपनी कृतज्ञुता कैसे प्रकट की जाय ? उस शरीर को परमात्त्मा की, सदगुरु की सेवा में लगा दिया जाय यही कृत्तज्ञता है। संत आशारामजी बापू  99 - ShareChat
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🕉️सनातन धर्म🚩 - गूर भक्ति देवी-देवताओं की पूजा के बाद भी कोई पूजा  शेष रह जाती है की पूजा किंतु सदगुरु कोई पूजा  के बाद नहीं बचती| पूज्य बापूजी गूर भक्ति देवी-देवताओं की पूजा के बाद भी कोई पूजा  शेष रह जाती है की पूजा किंतु सदगुरु कोई पूजा  के बाद नहीं बचती| पूज्य बापूजी - ShareChat
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🕉️सनातन धर्म🚩 - सद्गुरु साक्षात् ईश्वर है ऐसा जो कहा गया है॰ 6 सत्य ही है। उनकी महिमा शब्दातीत है l... मनुष्य बुद्धि की वहाँ पहुँच नहीं है। संत की महिमा वेद न जानें ..जेताजाने तेताबसानें| सद्गुरु साक्षात् ईश्वर है ऐसा जो कहा गया है॰ 6 सत्य ही है। उनकी महिमा शब्दातीत है l... मनुष्य बुद्धि की वहाँ पहुँच नहीं है। संत की महिमा वेद न जानें ..जेताजाने तेताबसानें| - ShareChat
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🙏गीता ज्ञान🛕 - सद्गुरु साक्षात् ईश्वर है ऐसा जो कहा गया है॰ 6 सत्य ही है। उनकी महिमा शब्दातीत है l... मनुष्य बुद्धि की वहाँ पहुँच नहीं है। संत की महिमा वेद न जानें ..जेताजाने तेताबसानें| सद्गुरु साक्षात् ईश्वर है ऐसा जो कहा गया है॰ 6 सत्य ही है। उनकी महिमा शब्दातीत है l... मनुष्य बुद्धि की वहाँ पहुँच नहीं है। संत की महिमा वेद न जानें ..जेताजाने तेताबसानें| - ShareChat
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🙏गीता ज्ञान🛕 - अलख क গলিযা! ऐसे महापुरुषों के पास q हम निःस्वार्थ, निःसंदेह, तर्करहित होकर केवल के पुष्प  प्रेम लेकर पहुँचते हैं श्रद्धा के दो आँसू लेकर हैं तो बदले में पहुँचते  $ =R खूलने का अनुभव हो जाता है। जिसे केवल गुरुभक्त जान सकता है औरों को क्या पता इस बात का ? पूज्य संत श्री आशारामजी बापू अलख क গলিযা! ऐसे महापुरुषों के पास q हम निःस्वार्थ, निःसंदेह, तर्करहित होकर केवल के पुष्प  प्रेम लेकर पहुँचते हैं श्रद्धा के दो आँसू लेकर हैं तो बदले में पहुँचते  $ =R खूलने का अनुभव हो जाता है। जिसे केवल गुरुभक्त जान सकता है औरों को क्या पता इस बात का ? पूज्य संत श्री आशारामजी बापू - ShareChat
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🙏गीता ज्ञान🛕 - far नहीं समझ सकते ! जप-्तप-्योग से जो नही मिल पाता गुरु के लिए वह प्रेम की एक तरंग से गुरुभक्त को मिल जाता है, इसे निगुरे नहीं समझ सकते... पूज्य संत श्री आशारामजी बापू far नहीं समझ सकते ! जप-्तप-्योग से जो नही मिल पाता गुरु के लिए वह प्रेम की एक तरंग से गुरुभक्त को मिल जाता है, इसे निगुरे नहीं समझ सकते... पूज्य संत श्री आशारामजी बापू - ShareChat
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🙏गीता ज्ञान🛕 - इस शरीर को ` मैं ' वस्तुओं को मानकर और मेरी ' मानकर जो सुखी होना चाहता है उसके Hp4 4 g& 8 g& & 00 पूज्य बापूजी इस शरीर को ` मैं ' वस्तुओं को मानकर और मेरी ' मानकर जो सुखी होना चाहता है उसके Hp4 4 g& 8 g& & 00 पूज्य बापूजी - ShareChat
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🙏गीता ज्ञान🛕 - মদিন सूर्य दिनमें प्रकाश करते हैं, चन्द्रमा रात्रि में प्रकाशित होते हैं और दीपक घर में उजाला करता है तथा सदा घर के अँधेरे का नाश करता है; परंत्तु गुरु अपने शिष्य के हृदय में रात-दिन सदा ही प्रकाश फैलाते रहते हैं। वे शिष्य के सम्पूर्ण अज्ञानमय अन्धकार का नाश कर देते हैं। शिष्यों के लिये गुरु ही परम तीर्थ हैं। अतः पद्मपुराण , भूमिखण्ड (८५ 12-14) মদিন सूर्य दिनमें प्रकाश करते हैं, चन्द्रमा रात्रि में प्रकाशित होते हैं और दीपक घर में उजाला करता है तथा सदा घर के अँधेरे का नाश करता है; परंत्तु गुरु अपने शिष्य के हृदय में रात-दिन सदा ही प्रकाश फैलाते रहते हैं। वे शिष्य के सम्पूर्ण अज्ञानमय अन्धकार का नाश कर देते हैं। शिष्यों के लिये गुरु ही परम तीर्थ हैं। अतः पद्मपुराण , भूमिखण्ड (८५ 12-14) - ShareChat
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🙏गीता ज्ञान🛕 - ऋषि प्रसाद ज्ञानामृत अगस्त २०१० अंक २१२ उपासना का प्राण समर्पण और आत्मदान है নিনা ওতামনা इसके  भैया ! নিষ্কল ঔ प्राणरहित है | q ) तक आप अपनी 1 और अहंकार खुदी परमेश्वर के हवाले न करोगे तब तक स्वभाव में स्थिति कैसे होगी ! परमेश्वर जैसे भगवान वे आपसे दूर -ही -दूर रहेंगे ) श्रीकृष्ण कालयवन से दूर रहते थे | ऋषि प्रसाद ज्ञानामृत अगस्त २०१० अंक २१२ उपासना का प्राण समर्पण और आत्मदान है নিনা ওতামনা इसके  भैया ! নিষ্কল ঔ प्राणरहित है | q ) तक आप अपनी 1 और अहंकार खुदी परमेश्वर के हवाले न करोगे तब तक स्वभाव में स्थिति कैसे होगी ! परमेश्वर जैसे भगवान वे आपसे दूर -ही -दूर रहेंगे ) श्रीकृष्ण कालयवन से दूर रहते थे | - ShareChat
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🕉️सनातन धर्म🚩 - अंक ३६५, मई २०२३ पृष्ठ 4 एक बार निर्विकारी नारायण cgச்5 जाओ... फिर बाहर के सभी सुख मिल के भी आपको गिरा नहीं सकते नाशारामजा आश्रम द्वारा प्रकाशित ऋषि प्रसद नासिक पतरिका rishiprasad org 9512081081 07961210714 अंक ३६५, मई २०२३ पृष्ठ 4 एक बार निर्विकारी नारायण cgச்5 जाओ... फिर बाहर के सभी सुख मिल के भी आपको गिरा नहीं सकते नाशारामजा आश्रम द्वारा प्रकाशित ऋषि प्रसद नासिक पतरिका rishiprasad org 9512081081 07961210714 - ShareChat