🌿 कर्म का सत्य 🌿
पुण्य के फल में अनेक लोग सहभागी बन जाते हैं।
जब जीवन में सुख, सम्मान, समृद्धि और प्रसन्नता आती है, तब परिवार, मित्र और समाज सब साथ खड़े दिखाई देते हैं।
सब उस सुख में अपना हिस्सा खोज लेते हैं।
लेकिन…
जब पाप का फल पकता है,
जब दुःख, पीड़ा, पछतावा और अशांति सामने आती है,
तब उस दुख को अकेले ही सहना पड़ता है।
कोई भी हमारे कर्मों का भार अपने ऊपर नहीं ले सकता।
न कोई रिश्तेदार,
न कोई मित्र,
न कोई प्रियजन —
उस समय केवल हमारा कर्म ही हमारे साथ खड़ा होता है।
इसलिए बुद्धिमान वही है
जो हर विचार, हर वचन और हर कर्म को सजगता से करता है।
क्योंकि कर्म कभी नष्ट नहीं होते,
वे समय आने पर अवश्य फल देते हैं।
इसलिए कर्म करने से पहले ठहरिए, सोचिए और सचेत रहिए।
ऐसे कर्म कीजिए जो स्वयं के लिए भी कल्याणकारी हों
और संसार के लिए भी मंगलकारी।
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Ayye Abhiññā
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