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🙏🌹Vip Verma jiii 🌹🙏Ham Banarasi Hai Guru 🌹🙏
#✍️ साहित्य एवं शायरी #✍️ अनसुनी शायरी #🖊 एक रचना रोज़ ✍ #सोना की जिंदगी कुछ इस तरह
✍️ साहित्य एवं शायरी - साथ तो सभी का छूटना तय फिर वो चाहे फूल का टहनी से, देह से, या मन का किसी अपने आत्मा का @sona_creationa3 साथ तो सभी का छूटना तय फिर वो चाहे फूल का टहनी से, देह से, या मन का किसी अपने आत्मा का @sona_creationa3 - ShareChat
#✍️ साहित्य एवं शायरी #✍️ अनसुनी शायरी #🖊 एक रचना रोज़ ✍ #सोना की जिंदगी कुछ इस तरह
✍️ साहित्य एवं शायरी - साथ तो सभी का छूटना तय है, फिर वो चाहे फूल का टहनी से, आत्मा का देह से, या मन का किसी अपने . creationa3 @sona साथ तो सभी का छूटना तय है, फिर वो चाहे फूल का टहनी से, आत्मा का देह से, या मन का किसी अपने . creationa3 @sona - ShareChat
#✍️ साहित्य एवं शायरी #✍️ अनसुनी शायरी #🖊 एक रचना रोज़ ✍ #सोना की जिंदगी कुछ इस तरह
✍️ साहित्य एवं शायरी - ) 96 ज़माना एक दिन मुझको इन्हीं लफ़्ज़ों में ढूँढेगा* *वो हर एहसास जो में लफ़्ज़ों में छोड़ जाऊगा ) 96 ज़माना एक दिन मुझको इन्हीं लफ़्ज़ों में ढूँढेगा* *वो हर एहसास जो में लफ़्ज़ों में छोड़ जाऊगा - ShareChat
#✍️ साहित्य एवं शायरी #✍️ अनसुनी शायरी #🖊 एक रचना रोज़ ✍ #सोना की जिंदगी कुछ इस तरह
✍️ साहित्य एवं शायरी - दुआ के साथ बद्दुआ भी लग गयी थी मुझे मैं उससे मिलने गया था, बिछड़कर आ TT | | दुआ के साथ बद्दुआ भी लग गयी थी मुझे मैं उससे मिलने गया था, बिछड़कर आ TT | | - ShareChat
#✍️ साहित्य एवं शायरी #✍️ अनसुनी शायरी #🖊 एक रचना रोज़ ✍ #सोना की जिंदगी कुछ इस तरह
✍️ साहित्य एवं शायरी - दर्द कागज़ पर मेरा बिकता रहा मैं बेचैन था, रातभर लिखता रहा.. @ छू रहे थे सब बुलंदियाँ आसमान मैं सितारों के बीच, चाँद की तरह छिपता < अगर होती तो, कभी का टूट गया होता , मैं था नाजुक डाली, जो सबके आगे झुकता रहा.. बदलते यहाँ लोग, रंग अपने अपने ढंग से, रंग मेरा भी निखर पर, मैं महेंदी की तरह पीसता रहा.. जिन्हें जल्दी थी, वो बढ चले मंज़िल की ओर मैं समंदर से राज, गहराई में डूबता रहा. दर्द कागज़ पर मेरा बिकता रहा मैं बेचैन था, रातभर लिखता रहा.. @ छू रहे थे सब बुलंदियाँ आसमान मैं सितारों के बीच, चाँद की तरह छिपता < अगर होती तो, कभी का टूट गया होता , मैं था नाजुक डाली, जो सबके आगे झुकता रहा.. बदलते यहाँ लोग, रंग अपने अपने ढंग से, रंग मेरा भी निखर पर, मैं महेंदी की तरह पीसता रहा.. जिन्हें जल्दी थी, वो बढ चले मंज़िल की ओर मैं समंदर से राज, गहराई में डूबता रहा. - ShareChat
#✍️ साहित्य एवं शायरी #✍️ अनसुनी शायरी #🖊 एक रचना रोज़ ✍ #सोना की जिंदगी कुछ इस तरह
✍️ साहित्य एवं शायरी - लगता था उसे मोहब्बत है, मुझे कहा ना लगता था लगता था उसे मोहब्बत है, मुझे कहा ना लगता था - ShareChat
#✍️ साहित्य एवं शायरी #✍️ अनसुनी शायरी #🖊 एक रचना रोज़ ✍ #सोना की जिंदगी कुछ इस तरह
✍️ साहित्य एवं शायरी - पाने का कभी था ही नहीं 38 मक़सद मेरा वादा 38 416+ का था, उम्र भर जो आजभी कायम है @sona_creationa3 पाने का कभी था ही नहीं 38 मक़सद मेरा वादा 38 416+ का था, उम्र भर जो आजभी कायम है @sona_creationa3 - ShareChat
#✍️ साहित्य एवं शायरी #✍️ अनसुनी शायरी #🖊 एक रचना रोज़ ✍ #सोना की जिंदगी कुछ इस तरह
✍️ साहित्य एवं शायरी - रिश्ते छू कर ही महसूस नही होते कुछ रिश्ते इतने संवेदनशील होते है कि एहसास से ही हृदय अनुभूति से , सकून की उच्चस्तरीय सराबोर हो जाता है! ! !! ! ये मेहसूस होता. खैर काश. @sona_creationa3 रिश्ते छू कर ही महसूस नही होते कुछ रिश्ते इतने संवेदनशील होते है कि एहसास से ही हृदय अनुभूति से , सकून की उच्चस्तरीय सराबोर हो जाता है! ! !! ! ये मेहसूस होता. खैर काश. @sona_creationa3 - ShareChat
#✍️ साहित्य एवं शायरी #✍️ अनसुनी शायरी #🖊 एक रचना रोज़ ✍ #सोना की जिंदगी कुछ इस तरह
✍️ साहित्य एवं शायरी - का बलिदान पति ने एक दिन गुस्से से कहाः तुम्हारी हैसियत ही क्या है? आज मेरे खुद की नाम और मेरे कमाए हुए पैसों से ही तो दुनिया तुम्हें जानती और इज्जत देती है! पत्नी ने आँखों में आंसू लिए पर पूरी मजबूती से कहाः मैंने अपना सरनेम , अपना मायका और अपनी सारी ख्वाहिशें इसलिए मिटा दीं॰ ताकि # uri आप बेफिक्र होकर दुनिया पहचान बना सकें। अगर मैं घरकी चारदीवारी, आपके बच्चे और बुजुर्गों को ना संभालती तो आपकी आधी उम्र उलझनों में ही कट जाती। मेरी खोई हुई पहचान ही आपकी इस कामयाबी की नींव है।" क्या आप पत्नी की इस बात से पूरी तरह सहमत हो? का बलिदान पति ने एक दिन गुस्से से कहाः तुम्हारी हैसियत ही क्या है? आज मेरे खुद की नाम और मेरे कमाए हुए पैसों से ही तो दुनिया तुम्हें जानती और इज्जत देती है! पत्नी ने आँखों में आंसू लिए पर पूरी मजबूती से कहाः मैंने अपना सरनेम , अपना मायका और अपनी सारी ख्वाहिशें इसलिए मिटा दीं॰ ताकि # uri आप बेफिक्र होकर दुनिया पहचान बना सकें। अगर मैं घरकी चारदीवारी, आपके बच्चे और बुजुर्गों को ना संभालती तो आपकी आधी उम्र उलझनों में ही कट जाती। मेरी खोई हुई पहचान ही आपकी इस कामयाबी की नींव है।" क्या आप पत्नी की इस बात से पूरी तरह सहमत हो? - ShareChat
#✍️ साहित्य एवं शायरी #✍️ अनसुनी शायरी #🖊 एक रचना रोज़ ✍ #सोना की जिंदगी कुछ इस तरह
✍️ साहित्य एवं शायरी - एक दिन हम भी कफ़न ओढ़ जाएँगे . हर एक रिश्ता इस ज़मीन से तोड़े जाएँगे . जितना जी चाहे सतालो यारी. एक दिन रुलाते हुए सबको छोड़ जाएँगे . @sona_creationa3 9 Sona Verma एक दिन हम भी कफ़न ओढ़ जाएँगे . हर एक रिश्ता इस ज़मीन से तोड़े जाएँगे . जितना जी चाहे सतालो यारी. एक दिन रुलाते हुए सबको छोड़ जाएँगे . @sona_creationa3 9 Sona Verma - ShareChat