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#26january
26january - ShareChat
00:14
#सरस्वती बसत की हार्दिक शुभकामनाएं #basat panchanmi
सरस्वती बसत की हार्दिक शुभकामनाएं - ShareChat
00:38
#premanand ji maharaj🙏
premanand ji maharaj🙏 - ShareChat
01:00
#📖जीवन का लक्ष्य🤔
📖जीवन का लक्ष्य🤔 - ShareChat
00:52
#☝ मेरे विचार
☝ मेरे विचार - सुंदर विचार १५ गरीब ज़मीन पर बैठे, तो उसकी मजबूरी , और अमीर बैठे , तो उसका बड़प्पन. ?? यही मानसिकता इंसानियत को पीछे खींच रही है। इंसान सिर्फ इंसान होता है...!! वह कभी गरीब या अमीर नहीं होता | बड़ा इंसान बही है॰ जो अपने साथ वाले व्यक्ति को कभी छोटा होने का अहसास न होने दे। सुंदर विचार १५ गरीब ज़मीन पर बैठे, तो उसकी मजबूरी , और अमीर बैठे , तो उसका बड़प्पन. ?? यही मानसिकता इंसानियत को पीछे खींच रही है। इंसान सिर्फ इंसान होता है...!! वह कभी गरीब या अमीर नहीं होता | बड़ा इंसान बही है॰ जो अपने साथ वाले व्यक्ति को कभी छोटा होने का अहसास न होने दे। - ShareChat
#📖जीवन का लक्ष्य🤔
📖जीवन का लक्ष्य🤔 - ShareChat
01:00
#लोहारी की शुभकामनाएं
लोहारी की शुभकामनाएं - ShareChat
00:25
#📖जीवन का लक्ष्य🤔
📖जीवन का लक्ष्य🤔 - ShareChat
01:33
#📒 मेरी डायरी
📒 मेरी डायरी - पीढी তিনব্দা তন্স 1985, 1986, 1987, 1988, 1989,1990, 1991,1992, 1993, 1994, १९९५, में हुआ है खास उन्हीं के लिए यह लेख़. [ यह पीढ़ी अब ३५ पार करके ४० ४५ की ओर बढ रही है। इस पीढ़ी की सबसे बड़ी सफलता यह है कि इसने जिंदगी में बहुत बड़े बदलाव देखे और उन्हें आत्मसात भी किया, १, २, ५, १०, २० , २५, ५० पैसे देखने वाली यह पीढ़ी बिना झिझक मेहमानों से पैसे ले लिया करती थी। स्याही कलम / पेंसिल/पेन से शुरुआत कर आज यह पीढ़ी स्मार्टफोन, लैपटॉप, पीसी को बखूबी चला रही है। जिसके बचपन में साइकिल भी एक विलासिता थी, वही पीढ़ी आज बखूबी स्कूटर और कार चलाती है। कभी चंचल तो कभी गंभीर। बहुत सहा और भोगा लेकिन संस्कारों में पली बढी यह पीढ़ी। पीढी তিনব্দা তন্স 1985, 1986, 1987, 1988, 1989,1990, 1991,1992, 1993, 1994, १९९५, में हुआ है खास उन्हीं के लिए यह लेख़. [ यह पीढ़ी अब ३५ पार करके ४० ४५ की ओर बढ रही है। इस पीढ़ी की सबसे बड़ी सफलता यह है कि इसने जिंदगी में बहुत बड़े बदलाव देखे और उन्हें आत्मसात भी किया, १, २, ५, १०, २० , २५, ५० पैसे देखने वाली यह पीढ़ी बिना झिझक मेहमानों से पैसे ले लिया करती थी। स्याही कलम / पेंसिल/पेन से शुरुआत कर आज यह पीढ़ी स्मार्टफोन, लैपटॉप, पीसी को बखूबी चला रही है। जिसके बचपन में साइकिल भी एक विलासिता थी, वही पीढ़ी आज बखूबी स्कूटर और कार चलाती है। कभी चंचल तो कभी गंभीर। बहुत सहा और भोगा लेकिन संस्कारों में पली बढी यह पीढ़ी। - ShareChat