CONRAD (CONY ) DSOUZA
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प्रेयर - रबिवार १५ फ़रवरी २०२७ DSOUZA EVANGELIST मनन- चिंतन ConRAD ` आज का सुसमाचार पर्वत उपदेश से है, जहाँ येसु अपने अनुयायियों को धार्मिंकता और संहिता के बारे में सिखाते है। अनुच्छेद में , येसु केवल संहिता के अक्षर के बजाय , संहिता 5 करने के महत्व पर बल देते है। बे सिर्फ को पूरा को भावना बाहरी आज्ञाकारिता के बजाय आंतरिक धार्मिकता के महत्व के बारे में भी सिखाते है। इस सन्दर्भ को इस तरह समझा जा सकता है कि येसु ने अपने समय के धार्मिक नेताओं द्वारा सिखाई गई शिक्षा की तुलना में धार्मिकता के लिए एक उच्च स्तर स्थापित किया है। पदसंख्या १७ में , येसु कहते है कि वे संहिता को रद्द करने नहीं , परन्तु उसे पूरा करने आये है। इसके बाद बह इस बात का उदाहरण देते हैं कि संहिता को कैसे समझा जाना चाहिए और इसे अधिक गहरे , अधिक सार्थक तरीके से लागू किया जाना चाहिए। उदाहरण के लिए, पदसंख्याए 21-22 ಗ, ಶೆ सिखाते है कि क्रोध हत्या के विरुद्ध आज्ञा का उतना ही उल्लंघन है जितना वास्तव में हत्या करना| तरह, पदसंख्या २७ -२८ में , येसु सिखाते हैंकि एक इसो महिला को बासना से देखना व्यभिचार के विरुद्ध आज्ञा का उतना ही उल्लंघन है जितना कि बास्तव में व्यभिचार करना। इस तरह, येसु नियम या संहिता के प्रति केवल बाहरी आज्ञाकारिता के बजाय आंतरिक धार्मिकता के महत्व पर बल दे रहे है। पदसंख्या ३१-३२ और ३३-३७ में , येसु अपने वादों को निभाने और विवाह की पवित्रता के महत्व के बारे में भी सिखाते है। बह हमारे संबंधों में पूरी तरह से प्रतिबद्ध और विश्वासयोग्य होने के महत्व पर बल देते है , न कि केवल अधुनिक चलन या सरल राह की ओर चलने के बजाय। पर्वत उपदेश का यह अंश हमें नियम या संहिता की भावना को पूरा करने के महत्व और आंतरिक धार्मिकता के महत्व के बारे में सिखाता है। यह हमें याद दिलाता है कि सच्ची धार्मिकता केवल नियमों का पालन करने के बारे में नहीं है, बल्कि येसु की शिक्षाओं का पालन करने कै बारे में है जो संहिता की अनुरूप है। भावना के रबिवार १५ फ़रवरी २०२७ DSOUZA EVANGELIST मनन- चिंतन ConRAD ` आज का सुसमाचार पर्वत उपदेश से है, जहाँ येसु अपने अनुयायियों को धार्मिंकता और संहिता के बारे में सिखाते है। अनुच्छेद में , येसु केवल संहिता के अक्षर के बजाय , संहिता 5 करने के महत्व पर बल देते है। बे सिर्फ को पूरा को भावना बाहरी आज्ञाकारिता के बजाय आंतरिक धार्मिकता के महत्व के बारे में भी सिखाते है। इस सन्दर्भ को इस तरह समझा जा सकता है कि येसु ने अपने समय के धार्मिक नेताओं द्वारा सिखाई गई शिक्षा की तुलना में धार्मिकता के लिए एक उच्च स्तर स्थापित किया है। पदसंख्या १७ में , येसु कहते है कि वे संहिता को रद्द करने नहीं , परन्तु उसे पूरा करने आये है। इसके बाद बह इस बात का उदाहरण देते हैं कि संहिता को कैसे समझा जाना चाहिए और इसे अधिक गहरे , अधिक सार्थक तरीके से लागू किया जाना चाहिए। उदाहरण के लिए, पदसंख्याए 21-22 ಗ, ಶೆ सिखाते है कि क्रोध हत्या के विरुद्ध आज्ञा का उतना ही उल्लंघन है जितना वास्तव में हत्या करना| तरह, पदसंख्या २७ -२८ में , येसु सिखाते हैंकि एक इसो महिला को बासना से देखना व्यभिचार के विरुद्ध आज्ञा का उतना ही उल्लंघन है जितना कि बास्तव में व्यभिचार करना। इस तरह, येसु नियम या संहिता के प्रति केवल बाहरी आज्ञाकारिता के बजाय आंतरिक धार्मिकता के महत्व पर बल दे रहे है। पदसंख्या ३१-३२ और ३३-३७ में , येसु अपने वादों को निभाने और विवाह की पवित्रता के महत्व के बारे में भी सिखाते है। बह हमारे संबंधों में पूरी तरह से प्रतिबद्ध और विश्वासयोग्य होने के महत्व पर बल देते है , न कि केवल अधुनिक चलन या सरल राह की ओर चलने के बजाय। पर्वत उपदेश का यह अंश हमें नियम या संहिता की भावना को पूरा करने के महत्व और आंतरिक धार्मिकता के महत्व के बारे में सिखाता है। यह हमें याद दिलाता है कि सच्ची धार्मिकता केवल नियमों का पालन करने के बारे में नहीं है, बल्कि येसु की शिक्षाओं का पालन करने कै बारे में है जो संहिता की अनुरूप है। भावना के - ShareChat
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प्रेयर - EUAIGELISTCOIRAD DSOUZA कानूनं को पूरा करने के लिए॰ संहिता को पूरा करने आया हूँl EUAIGELISTCOIRAD DSOUZA कानूनं को पूरा करने के लिए॰ संहिता को पूरा करने आया हूँl - ShareChat
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प्रेयर - सुसमाचार येसु की आज्ञाएँ यहूदी धर्मग्रंथ की आज्ञाओं की तरह जटिल  नहों है, फिर भो बह उस धर्मग्रंथ से भी निःस्वार्थ भ्रातृ-प्रेम , वैवाहिक शुद्वता तथा निष्कपट सत्यवादिता के लिए अनुरोध ক্রহন ই1 মন্নী ক গনুমায এরিন্ন মুমমান্রায 5:17-31 येस् ने अपने शिष्यों से कहा ["यह न समझो कि मैं संहिता अथवा नबियों के लेखों को रद्द करने आया हूँ। उन्हें रद्द करने नहों , बल्कि पूरा करने आया हूँl मैं तुम लोगों से कहे देता हू:- आकाश और पृथ्वी भले हो टल r ataarera  fia uiaiaii जायें, किन्तु संहिता की एक मात्रा अथवा एक पूरा हुए नहों टलेगा। সাসাগী में से एक को भो भंग करता और को ऐसा करना सिखाता दूसरों है बह स्वर्गराज्य में छोटा समझा जायेगा। जो उनका पालन करता और उन्हैं सिखाता है, वह स्वर्गराज्य में बड़ा समझा जायेगा। ] मैं तुम लोगों से कहता हूँ - यदि तुम्हारी धार्मिकता करमिैक तुम लोग्हरे न्हुनाईैको शास्त्रियों और फ़रोसियों की নী तुम स्वर्गराज्य में प्रवेश नहों करोगे।  पूर्वजों से कहा गया है - हत्या मत करो ; यदि कोई हत्या करे, तौ बह कचहरो में दण्ड के योग्य ठहराया जायेगा। परन्तु मैं तुम  से कहे देता हूँ - जो अपने भाई पर क्रोध करता है, बह कचहरी में दण्ड के योग्य ठहराया जायेगा। [ यदि वह अपने भाई से कहे "रे मूर्ख ! ' तो बह महासभा में दण्ड के योग्य ठहराया जायेगा। और यदि बह कहे, "रे नास्तिक !' तो बह नरक की आग के यौग्य ठहराया जायेगा। जब तुम बेदो पर अपनी भेंट चढ़ा रहे हो और तुम्हें बहाँ याद आये कि मैरे भाई को मुझ से कोई शिकायत है, तो अपनो भेंट बहों बेदो के सामने छोड़ कर पहले अपने भाई और तब आ कर अपनी भेंट चढाओ। से मेल करने जाओ "कचहरो जाते समय रास्ते में हो अपने मुद्दई से समकौता कर लो। कहों ऐसा न हो कि बह तुम्हें न्यायकर्त्त के हवाले कर दे, न्यायकर्त्ता तुम्हें प्यादे के हवाले कर दे और प्यादा तुम्हें बंदोगृह में डाल दे। में तुम से कहे देता हूँ - जब तक कौड़ो -कौड़ी न चुका दोगे , तब तक बहाँ से नहों निकल पाओगे "१] "নুস লীঘী ন মুনা ই ক্রি ক্রমা যমা ই - যমিমরায মন ক্রমী ; परन्तु मैं तुम से कहता हूँ जो बुरो इच्छा से किसो स्त्री पर दृष्टि डालता है, वह अपने मन में उसके साथ व्यभिचार कर चुका है। [ यदि तुम्हारी दाहिनो आँख तुम्हारे लिए पाप का कारण बन  जाये तो उसे निकाल कर फेंक दो। अच्छा यहो है कि तुम्हारे  अंगों में से एक नष्ट हो जाये , किन्तु तुम्हारा सारा शरोर नरक में और यदि तुम्हारा दाहिना हाथ तुम्हारे लिए पाप  न डाला जाये। का कारण बन जाये , तो उसे काट कर फेंक दो। अच्छा यहो है कि तुम्हारे अंगों में से एक नष्ट हो जाये , किन्तु तुम्हारा सारा शरोर नरक में न जाये। यह भौ कहा गया है - जो कोई अपनो पत्नी को त्यागे , बह उसे त्याग-पत्र दे। परन्तु मैं तुम से कहता हँ व्यभिचार को छोड़ किसो अन्य कारण से जो अपनो पत्नी को त्याग देता है, बह उस से व्यभिचार कराता है। बह जो त्यागौ हुई स्त्रो से विवाह करता है बह व्यभिचार करता है। ] तुम लोगों ने यह भी सुना है कि पूर्वजों से कहा गया है - झूठी शपथ मत खाओ । प्रभु के सामने खायो हुई शपथ को पूरा करो। परन्तु मैं तुम से कहता हूँ शपथ कभी नहों खानी चाहिए [न तो स्वर्ग की , क्योँकि बह ईश्वर का सिंहासन है; न पृथ्वो की , क्योंकि बह उसका पावदान है; न येरुसलेम की, क्योंकि बह राजाधिराज का नगर है और न अपने सिर की , क्योंकि तुम भौ सफेद या काला नहों कर सकते। ] इसका एक बाल बात इतनो हो - हाँ की हाँ, नहों की नहों। जो इस से तुम्हारी अधिक है, बह बुराई से उत्पन्न होता है"। प्रभु का सुसमाचारा सुसमाचार येसु की आज्ञाएँ यहूदी धर्मग्रंथ की आज्ञाओं की तरह जटिल  नहों है, फिर भो बह उस धर्मग्रंथ से भी निःस्वार्थ भ्रातृ-प्रेम , वैवाहिक शुद्वता तथा निष्कपट सत्यवादिता के लिए अनुरोध ক্রহন ই1 মন্নী ক গনুমায এরিন্ন মুমমান্রায 5:17-31 येस् ने अपने शिष्यों से कहा ["यह न समझो कि मैं संहिता अथवा नबियों के लेखों को रद्द करने आया हूँ। उन्हें रद्द करने नहों , बल्कि पूरा करने आया हूँl मैं तुम लोगों से कहे देता हू:- आकाश और पृथ्वी भले हो टल r ataarera  fia uiaiaii जायें, किन्तु संहिता की एक मात्रा अथवा एक पूरा हुए नहों टलेगा। সাসাগী में से एक को भो भंग करता और को ऐसा करना सिखाता दूसरों है बह स्वर्गराज्य में छोटा समझा जायेगा। जो उनका पालन करता और उन्हैं सिखाता है, वह स्वर्गराज्य में बड़ा समझा जायेगा। ] मैं तुम लोगों से कहता हूँ - यदि तुम्हारी धार्मिकता करमिैक तुम लोग्हरे न्हुनाईैको शास्त्रियों और फ़रोसियों की নী तुम स्वर्गराज्य में प्रवेश नहों करोगे।  पूर्वजों से कहा गया है - हत्या मत करो ; यदि कोई हत्या करे, तौ बह कचहरो में दण्ड के योग्य ठहराया जायेगा। परन्तु मैं तुम  से कहे देता हूँ - जो अपने भाई पर क्रोध करता है, बह कचहरी में दण्ड के योग्य ठहराया जायेगा। [ यदि वह अपने भाई से कहे "रे मूर्ख ! ' तो बह महासभा में दण्ड के योग्य ठहराया जायेगा। और यदि बह कहे, "रे नास्तिक !' तो बह नरक की आग के यौग्य ठहराया जायेगा। जब तुम बेदो पर अपनी भेंट चढ़ा रहे हो और तुम्हें बहाँ याद आये कि मैरे भाई को मुझ से कोई शिकायत है, तो अपनो भेंट बहों बेदो के सामने छोड़ कर पहले अपने भाई और तब आ कर अपनी भेंट चढाओ। से मेल करने जाओ "कचहरो जाते समय रास्ते में हो अपने मुद्दई से समकौता कर लो। कहों ऐसा न हो कि बह तुम्हें न्यायकर्त्त के हवाले कर दे, न्यायकर्त्ता तुम्हें प्यादे के हवाले कर दे और प्यादा तुम्हें बंदोगृह में डाल दे। में तुम से कहे देता हूँ - जब तक कौड़ो -कौड़ी न चुका दोगे , तब तक बहाँ से नहों निकल पाओगे "१] "নুস লীঘী ন মুনা ই ক্রি ক্রমা যমা ই - যমিমরায মন ক্রমী ; परन्तु मैं तुम से कहता हूँ जो बुरो इच्छा से किसो स्त्री पर दृष्टि डालता है, वह अपने मन में उसके साथ व्यभिचार कर चुका है। [ यदि तुम्हारी दाहिनो आँख तुम्हारे लिए पाप का कारण बन  जाये तो उसे निकाल कर फेंक दो। अच्छा यहो है कि तुम्हारे  अंगों में से एक नष्ट हो जाये , किन्तु तुम्हारा सारा शरोर नरक में और यदि तुम्हारा दाहिना हाथ तुम्हारे लिए पाप  न डाला जाये। का कारण बन जाये , तो उसे काट कर फेंक दो। अच्छा यहो है कि तुम्हारे अंगों में से एक नष्ट हो जाये , किन्तु तुम्हारा सारा शरोर नरक में न जाये। यह भौ कहा गया है - जो कोई अपनो पत्नी को त्यागे , बह उसे त्याग-पत्र दे। परन्तु मैं तुम से कहता हँ व्यभिचार को छोड़ किसो अन्य कारण से जो अपनो पत्नी को त्याग देता है, बह उस से व्यभिचार कराता है। बह जो त्यागौ हुई स्त्रो से विवाह करता है बह व्यभिचार करता है। ] तुम लोगों ने यह भी सुना है कि पूर्वजों से कहा गया है - झूठी शपथ मत खाओ । प्रभु के सामने खायो हुई शपथ को पूरा करो। परन्तु मैं तुम से कहता हूँ शपथ कभी नहों खानी चाहिए [न तो स्वर्ग की , क्योँकि बह ईश्वर का सिंहासन है; न पृथ्वो की , क्योंकि बह उसका पावदान है; न येरुसलेम की, क्योंकि बह राजाधिराज का नगर है और न अपने सिर की , क्योंकि तुम भौ सफेद या काला नहों कर सकते। ] इसका एक बाल बात इतनो हो - हाँ की हाँ, नहों की नहों। जो इस से तुम्हारी अधिक है, बह बुराई से उत्पन्न होता है"। प्रभु का सुसमाचारा - ShareChat
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प्रेयर - इसलिये अब तुम देख लो कि मैं ही और मेरेसंग कोई देवता नहीं; 7 हौ मार डालता, और मैं जिलाता भी हूं; मैं ही घायल करता  और मैं ही चंगा भी करता हूं; और मेरे हाथ से कोई नहीं छुड़ा सकता व्यवस्थाविवरण ३२: ३९ Me इसलिये अब तुम देख लो कि मैं ही और मेरेसंग कोई देवता नहीं; 7 हौ मार डालता, और मैं जिलाता भी हूं; मैं ही घायल करता  और मैं ही चंगा भी करता हूं; और मेरे हाथ से कोई नहीं छुड़ा सकता व्यवस्थाविवरण ३२: ३९ Me - ShareChat
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प्रेयर - EVANGELIST CONRAD DSOUZA आज का सुसमाचार सुक्रवार १३ फ़रवरी २०२६ जयघोष : प्रेरित १६:१४ हमारा हृदय खोल दे, जिससे हम तेरे अल्लेलूया हे प्रभु अल्लेलूया ! शिक्षा ग्रहण कर सकें। पुत्र की सुसमाचार मारकुस के अनुसार पवित्र सुसमाचार ७:३1-३७ बहरों को कान और गूँगों को वाणी देते हैं। १ ४वह येसु तीरुस प्रान्त से चले गये। वह सिदोन हा कर और देकापोलिस का प्रान्त पार कर गलीलिया के समुद्र के पास पहुँचे। लोग एक बहरे गूँगे को उनके पास ले आये और उन्होंने यह प्रार्थना की कि आप उस पर हाथ रख दीजिए। येसु ने उसे भीड़ से अलग एकान्त में ले जा कर उसके कानों में अपनी उँगलियाँ डाल दीं और उसकी जीभ पर अपना थूक लगाया। फिर आकाश की ओर आँखें उठा कर उन्होंने आह भरी और उस से कहा ,  एफेता  সথনি স্তুল না"| उसी क्षण उसके कान खुल गये और उसकी जीभ का बंधन छूट गया, जिससे वह अच्छी तरह बोलने लगा। येसु ने लोगों को आदेश दिया कि वे यह बात किसी से नहीं कहें; परन्तु वह जितना ही मना करते थे, लोग उतना ही इसका प्रचार करते थे। लोगों के आश्चर्य की सीमा न थी। वे कहते रहते थे, * वह जो कुछ करते हैं, अच्छा ही करते हैं। वह बहरों को कान और गूँगों को वाणी देते हैं। " प्रभु का सुसमाचार EVANGELIST CONRAD DSOUZA आज का सुसमाचार सुक्रवार १३ फ़रवरी २०२६ जयघोष : प्रेरित १६:१४ हमारा हृदय खोल दे, जिससे हम तेरे अल्लेलूया हे प्रभु अल्लेलूया ! शिक्षा ग्रहण कर सकें। पुत्र की सुसमाचार मारकुस के अनुसार पवित्र सुसमाचार ७:३1-३७ बहरों को कान और गूँगों को वाणी देते हैं। १ ४वह येसु तीरुस प्रान्त से चले गये। वह सिदोन हा कर और देकापोलिस का प्रान्त पार कर गलीलिया के समुद्र के पास पहुँचे। लोग एक बहरे गूँगे को उनके पास ले आये और उन्होंने यह प्रार्थना की कि आप उस पर हाथ रख दीजिए। येसु ने उसे भीड़ से अलग एकान्त में ले जा कर उसके कानों में अपनी उँगलियाँ डाल दीं और उसकी जीभ पर अपना थूक लगाया। फिर आकाश की ओर आँखें उठा कर उन्होंने आह भरी और उस से कहा ,  एफेता  সথনি স্তুল না"| उसी क्षण उसके कान खुल गये और उसकी जीभ का बंधन छूट गया, जिससे वह अच्छी तरह बोलने लगा। येसु ने लोगों को आदेश दिया कि वे यह बात किसी से नहीं कहें; परन्तु वह जितना ही मना करते थे, लोग उतना ही इसका प्रचार करते थे। लोगों के आश्चर्य की सीमा न थी। वे कहते रहते थे, * वह जो कुछ करते हैं, अच्छा ही करते हैं। वह बहरों को कान और गूँगों को वाणी देते हैं। " प्रभु का सुसमाचार - ShareChat
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प्रेयर - EVANGELST CONRAD DSOUZA सुक्रवार १३ फ़रवरी २०२६ वह बहरों को कान और गूँगों को वाणी देते हैंl EVANGELST CONRAD DSOUZA सुक्रवार १३ फ़रवरी २०२६ वह बहरों को कान और गूँगों को वाणी देते हैंl - ShareChat
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प्रेयर - ٤VANGELIS TCONRAD DSOUZA सुक्रवार १३ फ़रवरी २०२६ মনন-নিনন मारकुस ७:३१ ३७ से आज के सुसमाचार में हम येसु की करुणा और चंगा करने वाले स्पर्श का एक शक्तिशाली प्रदर्शन देखते हैं। एक बहरा आदमी , जिसकी बोलने में अड़चन थी, येसु के पास प्रभु उसे अलग ले जाते हैं, भीड़ से दूर। लाया जाता है, और हमारे यह कार्य, व्यक्तिगत इशारा, हमें ईश्वर के साथ हमारे संबंध में के महत्व को सिखाता है। जब येसु उस आदमी के व्यक्तिगत ध्यान कानों में अपनी उंगलियां डालते हंे और लार से उसकी जीभ को छूते हैं॰ तो एक गहरा संबंध स्थापित होता है। यह शारीरिक मुलाकात हमें यह बताती है कि जब हम येसु को अपने जीवन के घायल हिस्सों को स्पर्श करने की अनुमति देते हैं, तब गहरी चंगाई होती है। येसु स्वर्ग की ओर देखते हैं, अपने शक्ति के स्रोत को स्वीकार करते हुए, हमारे लिए एक याद दिलाने वाला है कि हमें ईश्वर की ओर कृतज्ञता और निर्भरता के साथ अपने हृदय को आदमी की सुनने और बोलने की चंगाई हमें उठाना चाहिए। उस विश्वास में सुनना और घोषणा करना दोनों याद दिलाती है कि शामिल हैं। क्या हम वास्तव में अपने जीवन में ईश्वर के वचन को सुन रहे हैं? और क्या हम अपने विश्वास को दूसरों के साथ साझा करने में साहसी हैं? यह सुसमाचार हमें ईश्वर की आवाज को सुनने के लिए अपने कान खोलने और उसकी सत्य की साहस के साथ घोषणा करने अपने होंठों को खोलने की चुनौती देता है। आज का सुसमाचार हमें अपने जीवन में येसु के चंगा करने वाले स्पर्श की वचन को ध्यान से सुनने तलाश करने का आह्वान करता है, उसके का, और अपने विश्वास को विनम्रता के साथ साझा करने का। हमें येसु की परिवर्तन करने वाली शक्ति के लिए खुले रहना चाहिए, जो हमें पूर्ण बनाने के लिए स्पर्श की करती है और हमें उसके प्रेम के गवाह बनने के लिए सशक्त बनाती है। हमारी इच्छा है कि हमारी येसु के साथ मुलाकातें हमारा विश्वास गहरा करें और हमें उस गहरी चंगाई का अनुभव कराये जो वह कृपापूर्वक प्रदान करता है। ٤VANGELIS TCONRAD DSOUZA सुक्रवार १३ फ़रवरी २०२६ মনন-নিনন मारकुस ७:३१ ३७ से आज के सुसमाचार में हम येसु की करुणा और चंगा करने वाले स्पर्श का एक शक्तिशाली प्रदर्शन देखते हैं। एक बहरा आदमी , जिसकी बोलने में अड़चन थी, येसु के पास प्रभु उसे अलग ले जाते हैं, भीड़ से दूर। लाया जाता है, और हमारे यह कार्य, व्यक्तिगत इशारा, हमें ईश्वर के साथ हमारे संबंध में के महत्व को सिखाता है। जब येसु उस आदमी के व्यक्तिगत ध्यान कानों में अपनी उंगलियां डालते हंे और लार से उसकी जीभ को छूते हैं॰ तो एक गहरा संबंध स्थापित होता है। यह शारीरिक मुलाकात हमें यह बताती है कि जब हम येसु को अपने जीवन के घायल हिस्सों को स्पर्श करने की अनुमति देते हैं, तब गहरी चंगाई होती है। येसु स्वर्ग की ओर देखते हैं, अपने शक्ति के स्रोत को स्वीकार करते हुए, हमारे लिए एक याद दिलाने वाला है कि हमें ईश्वर की ओर कृतज्ञता और निर्भरता के साथ अपने हृदय को आदमी की सुनने और बोलने की चंगाई हमें उठाना चाहिए। उस विश्वास में सुनना और घोषणा करना दोनों याद दिलाती है कि शामिल हैं। क्या हम वास्तव में अपने जीवन में ईश्वर के वचन को सुन रहे हैं? और क्या हम अपने विश्वास को दूसरों के साथ साझा करने में साहसी हैं? यह सुसमाचार हमें ईश्वर की आवाज को सुनने के लिए अपने कान खोलने और उसकी सत्य की साहस के साथ घोषणा करने अपने होंठों को खोलने की चुनौती देता है। आज का सुसमाचार हमें अपने जीवन में येसु के चंगा करने वाले स्पर्श की वचन को ध्यान से सुनने तलाश करने का आह्वान करता है, उसके का, और अपने विश्वास को विनम्रता के साथ साझा करने का। हमें येसु की परिवर्तन करने वाली शक्ति के लिए खुले रहना चाहिए, जो हमें पूर्ण बनाने के लिए स्पर्श की करती है और हमें उसके प्रेम के गवाह बनने के लिए सशक्त बनाती है। हमारी इच्छा है कि हमारी येसु के साथ मुलाकातें हमारा विश्वास गहरा करें और हमें उस गहरी चंगाई का अनुभव कराये जो वह कृपापूर्वक प्रदान करता है। - ShareChat
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प्रेयर - फरवरी १४ 2026 7 ) EVANGELIST CONRAD DSOUZA पास कितनी रोटियाँ हैं? বুদ্কাই फरवरी १४ 2026 7 ) EVANGELIST CONRAD DSOUZA पास कितनी रोटियाँ हैं? বুদ্কাই - ShareChat
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