CONRAD (CONY ) DSOUZA
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प्रेयर - गुरुवार १९ फ़रवरी २०२६ EVANGELIST CONRAD DSOUZA TT-fqa और स्वर्गीय आनंद कैे बीच ख्रोस्तीय जीवन सांसारिक सुखों एक संघर्ष है। जीवन में हमें अनेक परिस्थितियों का सामना करना पडता है , जहाँ हमें सही चुनाव करने की आवश्यकता  होती है। सही चुनाव हमें जीवन और समृद्धि की ओर ले जाते हैं, जबकि गलत चुनाव विनाश और ओर। आज कैे पहले मृत्यु की पाठ में , ईश्वर हमें अच्छाई और बुराई , जीवन और मृत्यु , आशीर्वाद और श्राप के बीच परख कर सही चुनाव करने के लिए एक बडी चुनौती देते हैं। वे आगे को प्रेम करने , दूसरों और उनके साथे जुड़े रहनै कै द्वारा उनकी वाणी को মুনন जीवन को चुनने का आह्वान करते हैं। ईश्वर की आज्ञाओं का লিভ पालन और उनसे प्रेम करना हमारे जीवन का स्रोत है। संदेश को प्रतिध्वनित करता है आज का सुसमाचार भी కౌి जीवन को प्राप्त करने कै लिए अपने दैनिक क्रूस कौ उठाना  आवश्यक है। प्रभु येसु अपने शिष्यों को अपनी qg मृत्यु और पुनरुत्थान कै बारे में बताते हुए, सच्चे शिष्यत्व की एक गहरी  सीख देते हैंl एक सच्चा शिष्य वह है जो मसीह का निकटता से अनुसरण करता है , उसकी आज्ञाओं का सच्चे मन से पालन करता है , उसके मार्ग पर चलता है और प्रतिदिन अपने क्रूस को साहसपूर्वक उठाता है। जीवन के संघर्ष को हमें भारी बौझ के रूप मेँ नहीं देखना चाहिए , बल्कि यह एक सार्थक जीवन जीने का साधन है। क्योंकि प्रभु येसु स्पष्ट रूप से कहते हैंः "जो अपना जीवन सुरक्षित रखना चाहता है , वह उसै खो दैगा , और जो मैरे कारण अपना जीवन खो देगा , बह उसे सुरक्षित (লুক্রম 9:24) रखेगा| 0 हमें स्वयं से पूछने की आवश्यकता हैः हमारे लिए जीवन का अर्थ क्या है? क्या यह केवल सांसारिक जीवन है, जो भौतिक की खोज मैँ रहता है और से बचने का प्रयास करता ব্রুজ্সী' T है? या यह अनंत जीवन है, जौ स्वॅर्गीय आनंद की ओर उन्मुख है और बलिदान और कष्ट कैे मार्ग को अपनाने की माँग करता है? इस चालीसाकाल के दौरान , आइए हम आत्ममंथन करें , अपने जीवन की प्राथमिकताओं को सही दिशा दें और सच्चे शिष्य बनने कैे लिए अपने पथ को समर्पित करें। गुरुवार १९ फ़रवरी २०२६ EVANGELIST CONRAD DSOUZA TT-fqa और स्वर्गीय आनंद कैे बीच ख्रोस्तीय जीवन सांसारिक सुखों एक संघर्ष है। जीवन में हमें अनेक परिस्थितियों का सामना करना पडता है , जहाँ हमें सही चुनाव करने की आवश्यकता  होती है। सही चुनाव हमें जीवन और समृद्धि की ओर ले जाते हैं, जबकि गलत चुनाव विनाश और ओर। आज कैे पहले मृत्यु की पाठ में , ईश्वर हमें अच्छाई और बुराई , जीवन और मृत्यु , आशीर्वाद और श्राप के बीच परख कर सही चुनाव करने के लिए एक बडी चुनौती देते हैं। वे आगे को प्रेम करने , दूसरों और उनके साथे जुड़े रहनै कै द्वारा उनकी वाणी को মুনন जीवन को चुनने का आह्वान करते हैं। ईश्वर की आज्ञाओं का লিভ पालन और उनसे प्रेम करना हमारे जीवन का स्रोत है। संदेश को प्रतिध्वनित करता है आज का सुसमाचार भी కౌి जीवन को प्राप्त करने कै लिए अपने दैनिक क्रूस कौ उठाना  आवश्यक है। प्रभु येसु अपने शिष्यों को अपनी qg मृत्यु और पुनरुत्थान कै बारे में बताते हुए, सच्चे शिष्यत्व की एक गहरी  सीख देते हैंl एक सच्चा शिष्य वह है जो मसीह का निकटता से अनुसरण करता है , उसकी आज्ञाओं का सच्चे मन से पालन करता है , उसके मार्ग पर चलता है और प्रतिदिन अपने क्रूस को साहसपूर्वक उठाता है। जीवन के संघर्ष को हमें भारी बौझ के रूप मेँ नहीं देखना चाहिए , बल्कि यह एक सार्थक जीवन जीने का साधन है। क्योंकि प्रभु येसु स्पष्ट रूप से कहते हैंः "जो अपना जीवन सुरक्षित रखना चाहता है , वह उसै खो दैगा , और जो मैरे कारण अपना जीवन खो देगा , बह उसे सुरक्षित (লুক্রম 9:24) रखेगा| 0 हमें स्वयं से पूछने की आवश्यकता हैः हमारे लिए जीवन का अर्थ क्या है? क्या यह केवल सांसारिक जीवन है, जो भौतिक की खोज मैँ रहता है और से बचने का प्रयास करता ব্রুজ্সী' T है? या यह अनंत जीवन है, जौ स्वॅर्गीय आनंद की ओर उन्मुख है और बलिदान और कष्ट कैे मार्ग को अपनाने की माँग करता है? इस चालीसाकाल के दौरान , आइए हम आत्ममंथन करें , अपने जीवन की प्राथमिकताओं को सही दिशा दें और सच्चे शिष्य बनने कैे लिए अपने पथ को समर्पित करें। - ShareChat
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प्रेयर - फरवरी १९, २०२६ EVANGELIST CONRAD DSOUZA राख-बुध के बाद का बृहस्पतिवार मेरेपीछे हे ले अपना व्रठग फरवरी १९, २०२६ EVANGELIST CONRAD DSOUZA राख-बुध के बाद का बृहस्पतिवार मेरेपीछे हे ले अपना व्रठग - ShareChat
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✝️ प्रभु आप सबको आशिष दे ✋🤚#प्रेयर
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प्रेयर - #54` नगर का इलाज कर के ೩, इसके निवासियों चंगा करूंगा; और पूरी शान्ति और सच्चाई प्रगट 314{ ಹ oTl यिर्मयाह ३३ः 6 #54` नगर का इलाज कर के ೩, इसके निवासियों चंगा करूंगा; और पूरी शान्ति और सच्चाई प्रगट 314{ ಹ oTl यिर्मयाह ३३ः 6 - ShareChat
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प्रेयर - प्रभु आपको आशोष द God bless you Cood night 05~ प्रभु आपको आशोष द God bless you Cood night 05~ - ShareChat
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प्रेयर - फ़रवरी ತಾಗ' २०२६ 94 मनन-चिंतन चालीसाकाल के पवित्र समय की शुरुआत कर रहे ٩ ٤٩ आज हैंl यह समय आत्मचिंतन और अपने जीवन को पुनः निर्मित करने का स्वर्णिम अवसर है। यद्यपि यह समय हमें पश्चाताप , प्रार्थना , उपवास , तपस्या और दान देने के लिए समर्पित करने भी इसे दुःख का समय नहीं माना जा का आह्वान करता है, फिर सकता। बल्कि , यह आशा का समय है, जो हमें ईश्वर की दया पर भरोसा रखने के लिए बुलाता है। योएल नबी हमारे ईश्वर के सच्चे स्वरूप का वर्णन करते हुए हर्में ईश्वर के पास लौटने का साहस प्रदान करते हैंः "अपने प्रभु ईश्वर के पास लौट आओ , क्योंकि वह करुणामय , दयालु , सहनशील और दयासागर है और सहज ही द्रवित हा 7 जाता है । " (योएल २:१३) हम जानते हैं कि हम कमजोर  प्रवृत्तियों मनुष्य हैं। बार-बार हम अपनी दुर्बलताओं और पापी किन्तु  के शिकार हा जाते हैं। ईश्वर का प्रेम और दया हमारे पापों से कहों अधिक शक्तिशाली है। फिर भी , उध्दार पाने के 8 लिए सच्चे पश्चाताप के साथ ईश्वर के पास लौट आना ही ೩ केवल एक मार्ग है, चाहे हमारे जीवन में कितनी भी कठिनाइयाँ , अशुद्धियाँ और अयोग्यता क्यों न हो। हमारे लिए క चालीसाकाल का क्या अर्थ है? क्या केवल प्रार्थना , उपवास और दान देना ही हमें ईश्वर की दया प्राप्त करने में सहायता कर सकते हैं? हमारा ईश्वर वह है जो हमारे अतंरतम को देखता और जानता है। प्रभु येसु आज के सुसमाचार में स्वयं को धर्मी की बुराई और पाखंड के प्रति हमें सावधान करते हैंl वे हमें सार्वजनिक रूप से दिखावे के लिए की गई प्रार्थना , उपवास  ؟؟ और दान देने की मानसिकता रहने की चेतावनी देते हैंl प्रभु हमें सिखाते हैं कि ईश्वर धार्मिकता के दिखावे से बाहरी अधिक हृदय की सच्चाई को पसंद करते हैं। ईश्वर उन लोगों पर दया करते हैं जो अपने पापों को सच्चे मन से स्वीकार करते हैं , भारी हृदय से पश्चाताप करते हैं और ईश्वर की दया के लिए उनके पास लौट आते हैंl आइए, हम आत्मनिरीक्षण करें ~ क्या हमारा धार्मिक जीवन और धार्मिक में प्रामाणिक है? क्या हम केवल बाहरी रूप से आचरण वास्तव धार्मिकता का प्रदर्शन करते हैं , या हमारे हृदय की गहराइयों में सच्ची धार्मिकता का निवास है? ईश्वर हमें इस पवित्र चालीसाकाल के माध्यम से हमारी अंतरात्मा को जाँचने की कृपा दें और हमें सच्चे हृदय से पश्चाताप करने के लिए सक्षम बनाएँ , जिससे हम उनकी दया और क्षमा को प्राप्त कर सकें | फ़रवरी ತಾಗ' २०२६ 94 मनन-चिंतन चालीसाकाल के पवित्र समय की शुरुआत कर रहे ٩ ٤٩ आज हैंl यह समय आत्मचिंतन और अपने जीवन को पुनः निर्मित करने का स्वर्णिम अवसर है। यद्यपि यह समय हमें पश्चाताप , प्रार्थना , उपवास , तपस्या और दान देने के लिए समर्पित करने भी इसे दुःख का समय नहीं माना जा का आह्वान करता है, फिर सकता। बल्कि , यह आशा का समय है, जो हमें ईश्वर की दया पर भरोसा रखने के लिए बुलाता है। योएल नबी हमारे ईश्वर के सच्चे स्वरूप का वर्णन करते हुए हर्में ईश्वर के पास लौटने का साहस प्रदान करते हैंः "अपने प्रभु ईश्वर के पास लौट आओ , क्योंकि वह करुणामय , दयालु , सहनशील और दयासागर है और सहज ही द्रवित हा 7 जाता है । " (योएल २:१३) हम जानते हैं कि हम कमजोर  प्रवृत्तियों मनुष्य हैं। बार-बार हम अपनी दुर्बलताओं और पापी किन्तु  के शिकार हा जाते हैं। ईश्वर का प्रेम और दया हमारे पापों से कहों अधिक शक्तिशाली है। फिर भी , उध्दार पाने के 8 लिए सच्चे पश्चाताप के साथ ईश्वर के पास लौट आना ही ೩ केवल एक मार्ग है, चाहे हमारे जीवन में कितनी भी कठिनाइयाँ , अशुद्धियाँ और अयोग्यता क्यों न हो। हमारे लिए క चालीसाकाल का क्या अर्थ है? क्या केवल प्रार्थना , उपवास और दान देना ही हमें ईश्वर की दया प्राप्त करने में सहायता कर सकते हैं? हमारा ईश्वर वह है जो हमारे अतंरतम को देखता और जानता है। प्रभु येसु आज के सुसमाचार में स्वयं को धर्मी की बुराई और पाखंड के प्रति हमें सावधान करते हैंl वे हमें सार्वजनिक रूप से दिखावे के लिए की गई प्रार्थना , उपवास  ؟؟ और दान देने की मानसिकता रहने की चेतावनी देते हैंl प्रभु हमें सिखाते हैं कि ईश्वर धार्मिकता के दिखावे से बाहरी अधिक हृदय की सच्चाई को पसंद करते हैं। ईश्वर उन लोगों पर दया करते हैं जो अपने पापों को सच्चे मन से स्वीकार करते हैं , भारी हृदय से पश्चाताप करते हैं और ईश्वर की दया के लिए उनके पास लौट आते हैंl आइए, हम आत्मनिरीक्षण करें ~ क्या हमारा धार्मिक जीवन और धार्मिक में प्रामाणिक है? क्या हम केवल बाहरी रूप से आचरण वास्तव धार्मिकता का प्रदर्शन करते हैं , या हमारे हृदय की गहराइयों में सच्ची धार्मिकता का निवास है? ईश्वर हमें इस पवित्र चालीसाकाल के माध्यम से हमारी अंतरात्मा को जाँचने की कृपा दें और हमें सच्चे हृदय से पश्चाताप करने के लिए सक्षम बनाएँ , जिससे हम उनकी दया और क्षमा को प्राप्त कर सकें | - ShareChat
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प्रेयर - बुधवार 1 फरवरी १८, २०२६ EVANGELIST CONRAD DSOUZA एकांत में अपने पिता से प्रार्थना करो बुधवार 1 फरवरी १८, २०२६ EVANGELIST CONRAD DSOUZA एकांत में अपने पिता से प्रार्थना करो - ShareChat
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प्रेयर - यांद्रे గార్టా; ؟؟ होे और  मिट्टी में ही॰ मिलजाओगे [ ওননি 3,19  BuNGauLS CND DSOUL राख   बुधवार यांद्रे గార్టా; ؟؟ होे और  मिट्टी में ही॰ मिलजाओगे [ ওননি 3,19  BuNGauLS CND DSOUL राख   बुधवार - ShareChat