Devkanya  Taware
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#❤️जीवन की सीख #☝ मेरे विचार
❤️जीवन की सीख - चुकीला `वकील' आणि स्वतःच्या इतरांच्या चुकीला ` न्यायाधीश' होणाऱ्या माणसाशी हुज्जत घालण्यापेक्षा, तुझंच खरं' म्हणून संपवलेला विषय हा कधीही आपल्यासाठी चांगलाच असतो! चुकीला `वकील' आणि स्वतःच्या इतरांच्या चुकीला ` न्यायाधीश' होणाऱ्या माणसाशी हुज्जत घालण्यापेक्षा, तुझंच खरं' म्हणून संपवलेला विषय हा कधीही आपल्यासाठी चांगलाच असतो! - ShareChat
#🌞 Good Morning🌞
🌞 Good Morning🌞 - मकर संक्रांत शुभ आमचे नाते तुमचे . हळुवार जपायचे. सकाळ तिळगुळ हलव्यासंगे अधिक दृढ करायचेः Aniuauweanion ழ స गोड गोड बोला ಔತನ ಕೊನಿತತಟ[ आपणांस गोड गोड शुभेच्छा.. मकर संक्रांत शुभ आमचे नाते तुमचे . हळुवार जपायचे. सकाळ तिळगुळ हलव्यासंगे अधिक दृढ करायचेः Aniuauweanion ழ స गोड गोड बोला ಔತನ ಕೊನಿತತಟ[ आपणांस गोड गोड शुभेच्छा.. - ShareChat
#☝ मेरे विचार
☝ मेरे विचार - ** धन्यवाद ** माझ्या वाढदिवसानिमित्ताने आपण सर्वांनी प्रत्यक्ष ٩٤ ,फोन व्हॉट्सअप, फेसबुक , इंन्स्टाग्रामच्या शुभेच्छांचा दिल्या.आपल्या शुभेच्छा माध्यमातून मनापासून स्वीकार करते आणि आपल्यासारखे मिञ परिवार बहिण भाऊ नातेवाईक मिळाले हे माझे भाग्य समजते आणि पुन्हा एकदा सर्वांना थन्यवक JI ** धन्यवाद ** माझ्या वाढदिवसानिमित्ताने आपण सर्वांनी प्रत्यक्ष ٩٤ ,फोन व्हॉट्सअप, फेसबुक , इंन्स्टाग्रामच्या शुभेच्छांचा दिल्या.आपल्या शुभेच्छा माध्यमातून मनापासून स्वीकार करते आणि आपल्यासारखे मिञ परिवार बहिण भाऊ नातेवाईक मिळाले हे माझे भाग्य समजते आणि पुन्हा एकदा सर्वांना थन्यवक JI - ShareChat
#❤️जीवन की सीख
❤️जीवन की सीख - रामायण चौपाईः "जाकी रही भावना जैसी, प्रभु मूरत देखी तिन तैसी।"  सरल लेकिन गहरी व्याख्याः इस चौपाई का अर्थहै  जैसी हमारी सोच होती है, वैसी ही हमें दुनिया दिखाई देती है। रामायण में कई पात्रों ने श्रीराम को अलग अलग रूप में देखाः भक्त ने उन्हें भगवान माना शत्रु ने उन्हें सामान्य मनुष्य समझा ज्ञानी ने उन्हें धर्म का साक्षात् स्वरूप जाना जीवन से संबंधः अगर मन में क्रोध , ईर्ष्या या नकारात्मकता है॰ तो हर इंसान गलत लगेगा | शुद्ध है, तो कठिन परिस्थिति में भी 3iR 3TRTT ईश्वर की कृपा दिखाई देगी। समस्या बाहर नहीं, हमारी भावना के भीतर होती है। आत्मसंयम का असली अर्थहै। 46 रामायण चौपाईः "जाकी रही भावना जैसी, प्रभु मूरत देखी तिन तैसी।"  सरल लेकिन गहरी व्याख्याः इस चौपाई का अर्थहै  जैसी हमारी सोच होती है, वैसी ही हमें दुनिया दिखाई देती है। रामायण में कई पात्रों ने श्रीराम को अलग अलग रूप में देखाः भक्त ने उन्हें भगवान माना शत्रु ने उन्हें सामान्य मनुष्य समझा ज्ञानी ने उन्हें धर्म का साक्षात् स्वरूप जाना जीवन से संबंधः अगर मन में क्रोध , ईर्ष्या या नकारात्मकता है॰ तो हर इंसान गलत लगेगा | शुद्ध है, तो कठिन परिस्थिति में भी 3iR 3TRTT ईश्वर की कृपा दिखाई देगी। समस्या बाहर नहीं, हमारी भावना के भीतर होती है। आत्मसंयम का असली अर्थहै। 46 - ShareChat
#❤️जीवन की सीख #☝ मेरे विचार
❤️जीवन की सीख - परेशानी जिंदगी का हिस्सा है, अगर नहीं तो इंसान आएगी निखरेगा कैसे. क्योंकि ये परेशानियां ही तो हैं जो इंसान को जिंदगी जीने का सही समझाती हैं মনলন परेशानी जिंदगी का हिस्सा है, अगर नहीं तो इंसान आएगी निखरेगा कैसे. क्योंकि ये परेशानियां ही तो हैं जो इंसान को जिंदगी जीने का सही समझाती हैं মনলন - ShareChat
#❤️जीवन की सीख #☝ मेरे विचार
❤️जीवन की सीख - बोलणं सगळ्यांना येतं, कोणाची जीभ बोलते, कोणाचा हेतू बोलतो , कोणाचा पैसा बोलतो , कोणाची वेळ बोलते, आणि कोणाचं पद बोलतं! पण शेवटी देवासमोर फक्त व्यक्तीचं कर्म बोलतं! बोलणं सगळ्यांना येतं, कोणाची जीभ बोलते, कोणाचा हेतू बोलतो , कोणाचा पैसा बोलतो , कोणाची वेळ बोलते, आणि कोणाचं पद बोलतं! पण शेवटी देवासमोर फक्त व्यक्तीचं कर्म बोलतं! - ShareChat
#☝ मेरे विचार #❤️जीवन की सीख
☝ मेरे विचार - वो दिनबहुत अच्छेथे घडी सिर्फ एककेपासथी और समय सभी केपासथाअब घडी सभीकेपास हैलेकिन समय किसी केपासनहीं वो दिनबहुत अच्छेथे घडी सिर्फ एककेपासथी और समय सभी केपासथाअब घडी सभीकेपास हैलेकिन समय किसी केपासनहीं - ShareChat
#☝ मेरे विचार #❤️जीवन की सीख
☝ मेरे विचार - इस संसार में अपना केवल "समय" है अगर वो सही है तो "अपने" हैं वरना सब कोई नहीं.. इस संसार में अपना केवल "समय" है अगर वो सही है तो "अपने" हैं वरना सब कोई नहीं.. - ShareChat
#❤️जीवन की सीख #☝ मेरे विचार
❤️जीवन की सीख - पती की दौलत नही,साया ही काफी होता है पती की दौलत नही,साया ही काफी होता है - ShareChat
#☝ मेरे विचार #❤️जीवन की सीख
☝ मेरे विचार - "মান ননোভমী নট নল্মী নটন ক্ষীয Il " कोई व्यक्ति आपने बल से नहीं बढ सकता। जब राम बढ़ता है. तो झोपड़ी को महल बना देते हैं। । कोई व्यक्ति आपने बल से नहीं बढ सकता। राम बढ़ाते है, तो झोपड़ी को महल बना देते हैं।। ७९० जब "মান ননোভমী নট নল্মী নটন ক্ষীয Il " कोई व्यक्ति आपने बल से नहीं बढ सकता। जब राम बढ़ता है. तो झोपड़ी को महल बना देते हैं। । कोई व्यक्ति आपने बल से नहीं बढ सकता। राम बढ़ाते है, तो झोपड़ी को महल बना देते हैं।। ७९० जब - ShareChat