छत्तीसगढ़ : ATM से ₹1000 कम निकले, युवक ने 12 साल तक लड़ी कानूनी लड़ाई... बैंक को देने पड़े ₹4.36 लाख
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कामयाबी के शिखर पर तो दुनिया तालियाँ बजाती है, लेकिन जो आपके शून्य पर होने के बावजूद आपके साथ खड़ा रहे, वही असली जीवनसाथी है। वरुण चक्रवर्ती आज भारतीय टीम का एक बड़ा नाम हैं, लेकिन एक वक्त ऐसा भी था जब उनके पास न कोई नौकरी थी और न ही भविष्य का कोई ठिकाना।
"मुझ पर भरोसा मत करो"
हताशा के उस दौर में वरुण ने अपनी पत्नी से यहाँ तक कह दिया था कि "मुझ पर भरोसा मत करो और मेरे साथ मत आओ, क्योंकि मेरे पास कोई काम नहीं है।" उन्हें डर था कि वे उन्हें एक अच्छी ज़िंदगी नहीं दे पाएंगे। लेकिन उस वक्त उनकी पत्नी ने जो कहा, उसने न सिर्फ वरुण की दुनिया बदल दी, बल्कि आज हर संघर्ष करने वाले इंसान के लिए एक मिसाल बन गई।
उनकी पत्नी का वो ऐतिहासिक जवाब था— "तुम बस क्रिकेट खेलो और महीने के 5-6 हज़ार भी कमा लोगे तो चलेगा। मैं 15 हज़ार कमा रही हूँ, हम मिलकर सब संभाल लेंगे।"
यह सिर्फ़ "हम संभाल लेंगे" के तीन शब्द नहीं थे, बल्कि एक ऐसा अटूट विश्वास था जिसने वरुण को फिर से मैदान पर उतरने का हौसला दिया। आज वे जहाँ भी हैं, उसमें उनके हुनर के साथ-साथ उनकी पत्नी के उस त्याग और भरोसे का भी उतना ही बड़ा हाथ है।
सच्ची पार्टनरशिप और बराबरी का इससे खूबसूरत उदाहरण और क्या हो सकता है? जहाँ अहंकार खत्म होता है और भरोसा शुरू होता है, वहीं से ऐसी महान कहानियाँ जन्म लेती हैं।
"क्या आपके पास भी कोई ऐसा इंसान है जिसने आपके सबसे मुश्किल वक्त में आपसे कहा हो कि 'सब ठीक हो जाएगा, मैं हूँ न'? उस खास इंसान के लिए कमेंट्स में एक 'Thank You' या एक ❤️ ज़रूर लिखें।" ✍️ सच्चा साथ ही सबसे बड़ी दौलत है! #🏏T20 अपडेट 📰
समाज में आज भी लड़का और लड़की के बीच जो गहरी खाई है, उसे मिटाने के लिए पुणे के एक डॉक्टर ने जो रास्ता चुना है, वह पूरी दुनिया के लिए एक मिसाल है। डॉ. गणेश रख, जिन्हें लोग अब प्यार से 'दया का फरिश्ता' कहते हैं, पिछले कई सालों से समाज की उस सोच को चुनौती दे रहे हैं जो बेटियों के जन्म को बोझ मानती है।
"जब फरिश्ते जन्म लेते हैं, तो मैं कोई फीस नहीं लेता।"
डॉ. रख ने साल 2012 से एक अनोखी मुहिम शुरू की थी। उनके अस्पताल में जब भी किसी बेटी का जन्म होता है, तो वे परिवार से डिलीवरी की एक भी पाई नहीं लेते। अब तक उनके अस्पताल में 2,000 से ज़्यादा बेटियाँ बिना किसी फीस के इस दुनिया में कदम रख चुकी हैं। सिर्फ इतना ही नहीं, अगर किसी नवजात बच्ची को ICU की ज़रूरत पड़ती है, तो उसका इलाज भी पूरी तरह मुफ्त किया जाता है।
अस्पताल में दिवाली जैसा जश्न!
हैरानी की बात यह है कि जहाँ कई परिवारों में बेटी होने पर सन्नाटा पसर जाता है, वहीं डॉ. रख के अस्पताल में केक काटकर, मिठाइयाँ और फूल बाँटकर जश्न मनाया जाता है। डॉ. साहब का कड़वा अनुभव कहता है कि लोग लड़के के लिए हर कीमत चुकाने को तैयार रहते हैं, लेकिन लड़की होने पर माँ को ही अनदेखा कर देते हैं। इसी भेदभाव को खत्म करना उनके जीवन का सबसे बड़ा लक्ष्य बन गया है।
देशभर में फैली उम्मीद की लहर
आज डॉ. गणेश रख की इस निस्वार्थ सेवा का असर पूरे देश में दिख रहा है। उनसे प्रेरित होकर भारत के 6,000 से ज़्यादा डॉक्टर इस मुहिम में शामिल हो चुके हैं, जिनमें से कई ने हर महीने कम से कम एक बेटी की डिलीवरी मुफ्त करने का संकल्प लिया है।
यह कहानी हमें सिखाती है कि बदलाव की शुरुआत एक छोटे से कदम से ही होती है। जब हम बेटियों को जश्न के साथ स्वीकार करेंगे, तभी समाज का भविष्य उज्ज्वल होगा।
"समाज की इस पुरानी सोच को बदलने के लिए आप डॉ. गणेश रख के इस प्रयास को कैसे देखते हैं? क्या आपको लगता है कि ऐसे नेक इरादे ही हमारे समाज में वास्तविक बदलाव ला सकते हैं? अपनी बेबाक राय कमेंट्स में साझा करें।" ✍️ बेटी है तो कल है!
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ऑस्ट्रेलिया 🇦🇺 वर्ल्डकप से बाहर ज़िम्बांबे सुपर 8 में
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#🏏 बेस्ट क्रिकेट मोमेंट्स "Ishan Kishan has earned everything on his own.
No BCCI Central Contract.
No 'Godfather' in the world of cricket.
Performs brilliantly under intense pressure.
Possesses a fearless, attacking mindset.
More focused and consistent than Abhishek Sharma.
Capable of playing in all three formats.
Handles both wicketkeeping and opening the batting.
A high strike-rate player.
Earned everything through sheer hard work in domestic cricket.
Only a Pakistani (hater) would refrain from congratulating him!"
आप सभी को महा शिवरात्रि की हार्दिक शुभकामनायें...
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यहाँ तुर्री सक्ती (तुर्री धाम) के बारे में मुख्य जानकारी दी गई है:
1. धार्मिक महत्व
भगवान शिव का निवास: तुर्री धाम मुख्य रूप से भगवान शिव को समर्पित है। यहाँ एक प्राचीन शिवलिंग स्थापित है।
स्वयंभू शिवलिंग: स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, यहाँ का शिवलिंग स्वयं प्रकट हुआ था, जिसे 'स्वयंभू' माना जाता है।
पवित्र जल स्रोत (तुर्री): इस स्थान का नाम 'तुर्री' यहाँ के निरंतर बहने वाले प्राकृतिक जल स्रोत के कारण पड़ा है। पहाड़ों के बीच से पानी की एक पतली धारा (तुर्री) हमेशा बहती रहती है, जिसे अत्यंत पवित्र माना जाता है।
2. प्राकृतिक सुंदरता
यह स्थान पहाड़ियों और घने पेड़ों से घिरा हुआ है, जो इसे एक बेहतरीन पिकनिक स्पॉट और दर्शनीय स्थल बनाता है।
शांति की तलाश करने वाले लोगों और प्रकृति प्रेमियों के लिए यह एक आदर्श जगह है।
3. प्रमुख उत्सव
महाशिवरात्रि: महाशिवरात्रि के अवसर पर यहाँ विशाल मेले का आयोजन होता है। हजारों की संख्या में श्रद्धालु दूर-दूर से यहाँ जल चढ़ाने आते हैं।
सावन मास: सावन के महीने में भी यहाँ भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है।
4. कैसे पहुँचें?
स्थान: यह सक्ती जिले के मुख्यालय से लगभग 10-12 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।
सड़क मार्ग: सक्ती शहर से निजी वाहन या ऑटो के माध्यम से यहाँ आसानी से पहुँचा जा सकता है।
रेल मार्ग: नजदीकी रेलवे स्टेशन सक्ती (SKT) है, जो #🚗🧗🏻भारत भ्रमण व सफर प्रेमी🚂⛰ #😍खूबसूरत पर्यटन स्थल🏝 हावड़ा-मुंबई मुख्य रेल मार्ग पर स्थित है।
विशेष टिप: यदि आप शांति से दर्शन करना चाहते हैं, तो सोमवार या त्योहारों के बजाय अन्य दिनों में जाना बेहतर होता है। यहाँ का वातावरण आपको मानसिक शांति का अनुभव कराएगा।













