
𝙳𝚒𝚗𝚊𝚗𝚊𝚝𝚑 Sitaram 𝚅𝚒𝚜𝚑𝚠𝚊𝚔𝚊𝚛𝚖𝚊
@dina51
जियो जिंदगी👌
सबसे बडा रोग, क्या कहेंगे लोग👌
हम अपने दिन का एक बड़ा हिस्सा ऑफिस में बिताते हैं, इसलिए कलीग्स के साथ अच्छी बॉन्डिंग होना लाजमी है। लेकिन क्या आप भी अपने सहकर्मियों को अपना जिगरी दोस्त मानकर दिल की हर बात शेयर कर देते हैं? अगर हां, तो थोड़ा सावधान हो जाइए!
ऑफिस की दोस्ती में एक प्रोफेशनल बाउंड्री होना बेहद जरूरी है। भावनाओं में बहकर कही गई कुछ बातें आपकी इमेज और करियर दोनों पर भारी पड़ सकती हैं। आइए जानते हैं उन खास बातों के बारे में, जो आपको भूलकर भी अपने कलीग्स को नहीं बतानी चाहिए।
कंपनी या बॉस की शिकायतें
ऑफिस में पॉलिटिक्स या काम का दबाव होना आम बात है, लेकिन अपने बॉस या कंपनी की नीतियों के बारे में कलीग्स से बुराई करना भारी पड़ सकता है। आपकी कही गई बात कब और किस रूप में मैनेजमेंट तक पहुंच जाए, आप नहीं जानते। यह आपकी टीम प्लेयर वाली इमेज को खराब करता है और प्रमोशन के समय आपके खिलाफ जा सकता है।
आपकी सैलरी और बोनस की जानकारी
सैलरी हमेशा एक सेंसिटिव टॉपिक होता है। भले ही आपकी दोस्ती गहरी हो, लेकिन अपनी सैलरी या बोनस के बारे में चर्चा न करें। सैलरी में अंतर होने पर सहकर्मियों के बीच जलन पैदा हो सकती है। इससे टीम वर्क प्रभावित होता है और दूसरों का नजरिया भी आपके लिए बदल सकता है।
भविष्य के करियर प्लान या जॉब चेंज
अगर आप दूसरी नौकरी तलाश रहे हैं या भविष्य में अपना खुद का काम शुरू करने की प्लानिंग कर रहे हैं, तो इसे तब तक सीक्रेट रखें जब तक आप इस्तीफा न दे दें। अगर आपके मैनेजर को पता चल जाए कि आप छोड़ने वाले हैं, तो वे आपको जरूरी प्रोजेक्ट्स से बाहर कर सकते हैं या आपकी वफादारी पर शक कर सकते हैं।
पर्सनल लाइफ से जुड़ी समस्याएं
अपनी शादीशुदा जिंदगी के झगड़े, पारिवारिक कलह या गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं को ऑफिस में चर्चा का विषय न बनाएं। जब आप अपनी समस्याओं को बहुत ज्यादा शेयर करते हैं, तो लोग आपकी प्रोफेशनल क्षमता को कम आंकने लगते हैं। उन्हें लग सकता है कि आपका ध्यान काम पर नहीं है। साथ ही, ऑफिस गॉसिप के लिए आप एक आसान शिकार बन जाते हैं।
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आज के समय में रिश्ते पहले की तुलना में अधिक जटिल हो गए हैं। शुरुआत में सब कुछ अच्छा लगता है, लेकिन धीरे-धीरे संवाद कम होने लगता है और छोटी-छोटी बातों पर बहस बढ़ जाती है। अक्सर लोग अपने पार्टनर को समझने के बजाय उन्हें बदलने की कोशिश करते हैं, जो रिश्ते की नींव हिलाने का मुख्य कारण बनता है। ऐसे में सदियों पुरानी चाणक्य नीति आज भी उतनी ही कारगर है।
चाणक्य नीति का सार यह है कि कोई भी रिश्ता अपने आप नहीं चलता, उसे निरंतर प्रयास और आपसी समझ से सींचना पड़ता है। आज के दौर में, जहां हम अक्सर अपने पार्टनर को समझने के बजाय उसे अपनी पसंद के अनुसार बदलने की कोशिश में दूरियां बढ़ा लेते हैं, वहां धैर्य और स्वीकार्यता ही सबसे बड़े मार्गदर्शक हैं।
अगर हम अपनी उम्मीदों को हकीकत के करीब रखें और अहंकार को छोड़कर संवाद को प्राथमिकता दें, तो सदियों पुरानी यह बुद्धिमानी आज के 'कॉम्प्लिकेटेड' रिश्तों को भी फिर से सरल और मधुर बना सकती है।
रिश्तों को बचाने के मूल मंत्र
भरोसा और पारदर्शिता: किसी भी रिश्ते की असली ताकत 'भरोसा' है। शक दीमक की तरह इसे खत्म कर देता है, इसलिए पारदर्शिता बनाए रखना जरूरी है।
सम्मान की अहमियत: सिर्फ प्यार काफी नहीं होता, पार्टनर की भावनाओं का सम्मान करना भी अनिवार्य है।
सच्चाई का रास्ता: झूठ बोलकर कुछ समय के लिए स्थिति संभाली जा सकती है, लेकिन लंबे समय में केवल सच्चाई ही काम आती है।
छोटी आदतें लाएंगी बड़े बदलाव
उम्मीदें कम रखें: पार्टनर से जरूरत से ज्यादा अपेक्षाएं रखना निराशा का कारण बनता है।
गुस्से पर नियंत्रण: गुस्से में बोले गए शब्द सालों की नजदीकियों को पल भर में खत्म कर सकते हैं।
समय का निवेश: व्यस्त जीवन में अपने रिश्तों को समय देना सबसे जरूरी है, क्योंकि बिना समय दिए कोई भी रिश्ता फल-फूल नहीं सकता।
मजबूती के आसान तरीके
रिश्ता मजबूत बनाने के लिए सही साथी का चुनाव बहुत अहम है जो आपकी भावनाओं को समझे। साथ ही, बड़े सरप्राइज के बजाय रोजमर्रा की छोटी खुशियों, जैसे एक छोटी सी तारीफ या साथ में बिताए वक्त की अहमियत समझें।
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#📲मोबाइल पर तेज आवाज के साथ अलर्ट🚨 घड़ी में 11.41 बजते ही मिला अलर्ट, भारत ने लॉन्च किया ‘सेल ब्रॉडकास्ट मैसेजिंग सिस्टम’, क्या है मकसद?
शनिवार सुबह लगभग 11 बजकर 41 मिनट पर देश में करोड़ों लोगों के फोन पर एकसाथ अलर्ट आया। भारत सरकार ने ‘सेल ब्रॉडकास्ट मैसेजिंग सिस्टम’ लॉन्च करने की सूचना दी। इससे आपदा के समय लोगों को अलर्ट किया जा सकेगा। हालांकि कई फोन्स में यह अलर्ट नहीं मिला, क्योंकि उनके फोन की सेटिंग्स ऑफ थी।
भारत ने शनिवार को स्वदेशी तकनीक का उपयोग करते हुए ‘सेल ब्रॉडकास्ट मैसेजिंग सिस्टम’ (Cell Broadcast messaging system) को लॉन्च किया। इसका मकसद आपदा के समय देश के नागरिकों को तुरंत अलर्ट भेजना है। शनिवार सुबह लगभग 11:41 बजे केंद्र सरकार ने इस सिस्टम का परीक्षण करने के लिए देश के लगभग सभी नागरिकों को एक अलर्ट भेजा। लोगों के मोबाइल फोन में बीप की तेज आवाज आई, जो करीब 10 सेकंड तक बजती रही। इसके साथ ही एक मैसेज ब्रॉडकास्ट किया गया था।
india cell broadcasting system launched
शनिवार सुबह लगभग 11:41 बजे केंद्र सरकार ने इस सिस्टम का परीक्षण करने के लिए देश के लगभग सभी नागरिकों को एक अलर्ट भेजा।
क्या मैसेज आया लोगों के फोन में
बीप की आवाज के साथ लोगों के फोन में एक मैसेज प्रसारित हुआ- भारत ने स्वदेशी तकनीक का उपयोग करते हुए सेल ब्रॉडकास्ट सर्विस शुरू की है, जिससे नागरिकों को आपदा की तत्काल सूचना मिल सकेगी। सतर्क नागरिक, सुरक्षित राष्ट्र। इस संदेश को प्राप्त करने पर जनता को कोई कार्रवाई करने की जरूरत नहीं है। यह एक परीक्षण संदेश है।
- भारत सरकार
पहले ही दे दी गई थी सूचना
लोगों के फोन में बीप के साथ मैसेज बजने की सूचना पहले ही दे दी गई थी। सरकार की ओर से बताया गया था कि 2 मई को इस सिस्टम को टेस्ट किया जाएगा। यह तेज आवाज के साथ आने वाला एक इमरजेंसी अलर्ट था, जिसे दूरसंचार विभाग और राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण द्वारा मिलकर किए जा रहे सेल ब्रॉडकास्ट सिस्टम की टेस्टिंग के तौर पर भेजा गया।
सभी को नहीं मिला अलर्ट
जिस वक्त यह अलर्ट आया। मैं नोएडा न्यूजरूम में था। एक साथ कई फोन्स में बीप बजने लगी। हालांकि कुछ फोन्स में अलर्ट नहीं आया। इसकी वजह यह थी कि इमरजेंसी अलर्ट उन्हीं लोगों के फोन पर आ सकता था, जिनमें इसके लिए सेटिंग्स ऑन हैं। बहुत से लोग सेटिंग्स ऑफ करके रखते हैं, उनके फोन में यह बीप नहीं सुनाई दी। बता दें कि इस तरह के अलर्ट मैसेजेस को OK बटन दबाकर बंद किया जा सकता है।
सेल ब्रॉडकास्ट सिस्टम और SMS में अंतर
कुछ समय पहले तक सरकार आपदाओं से जुड़ी जानकारी SMS के द्वारा भेजती थी। हालांकि ऐसे खतरे जिसमें बहुत कम समय बाकी है जैसे- बिजली गिरना, सुनामी आदि को देखते हुए सेल ब्रॉडकास्ट टेक्नोलॉजी को लाया गया है। आपदा के हालात में SMS, नेटवर्क बाधित होने की वजह से अटक सकते हैं। लेकिन सेल ब्रॉडकास्ट एकसाथ एक खास इलाके के सभी मोबाइल फोन पर तुरंत पहुंचता है। इसे C-DOT ने स्वदेशी रूप से विकसित किया है। इस टेक्नोलॉजी की खासियत है कि इसके लिए मोबाइल में नेटवर्क का सिग्नल मजबूत होना भी जरूरी नहीं है, यह सीधे टॉवर से फोन तक पहुंच सकती है।
क्या होगा फायदा?
भारत का स्वदेशी सिस्टम लोगों को आपदा के समय अलर्ट करेगा। आजकल हर कोई स्मार्टफोन या मोबाइल फोन इस्तेमाल करता है। मुसीबत के समय लोगों के फोन में अलर्ट भेजकर उन्हें सुरक्षित स्थान पर रहने के लिए अलर्ट किया जा सकेगा।
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