Divyansh Garg
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भक्ति रस धारा
#🌸 बोलो राधे राधे #🌸 जय श्री कृष्ण😇 #🎵 राधा-कृष्ण भजन 🙏 #🙏 राधा रानी #😊कृष्ण कथाएं
🌸 बोलो राधे राधे - ऋषि के पुत्र का नाम उद्दालक नारायणनारायण श्वेतकेतु था! वेद वेदान्त आदि पढ़कर "@ಹಷ್ತತಕೆ आने के बाद उसने कहा- अहंकार आ गया और पिता समझकर नमस्कार नहीं किया! वास्तव में जो अपने को पण्डित समझे 8சர है! पिता ने कहा- बेटा 6 कि नहीं जिस एक बात वह विद्या के जानने से सारी बात का ज्ञान हो जाय लड़के ने कहा यह तो नहीं पढी पिता बोले- एक परमात्मा का ज्ञान होने से सबका ज्ञान हो जायगा उन्होंने पहले ही सोच लिया था कि होता तो अहंकार नहीं आता बहज्ञान भगवान कैसे dak | ? घोखखपुर परम श्रद्धेय जियदयाल गोयन्दकाजी (संस्थापक- गीताप्रेस गोरखपुर) मैं सत्संग और पुस्तकों से तारता हूँ ऋषि के पुत्र का नाम उद्दालक नारायणनारायण श्वेतकेतु था! वेद वेदान्त आदि पढ़कर "@ಹಷ್ತತಕೆ आने के बाद उसने कहा- अहंकार आ गया और पिता समझकर नमस्कार नहीं किया! वास्तव में जो अपने को पण्डित समझे 8சர है! पिता ने कहा- बेटा 6 कि नहीं जिस एक बात वह विद्या के जानने से सारी बात का ज्ञान हो जाय लड़के ने कहा यह तो नहीं पढी पिता बोले- एक परमात्मा का ज्ञान होने से सबका ज्ञान हो जायगा उन्होंने पहले ही सोच लिया था कि होता तो अहंकार नहीं आता बहज्ञान भगवान कैसे dak | ? घोखखपुर परम श्रद्धेय जियदयाल गोयन्दकाजी (संस्थापक- गीताप्रेस गोरखपुर) मैं सत्संग और पुस्तकों से तारता हूँ - ShareChat
#😊कृष्ण कथाएं #🙏 राधा रानी #🎵 राधा-कृष्ण भजन 🙏 #🌸 जय श्री कृष्ण😇 #🌸 बोलो राधे राधे
😊कृष्ण कथाएं - চ ೫ ಫ % आश्रय 75 हम भगवान् के आश्रित हो जायें अथवा संसार का आश्रय छोड़ दें दोनों का एक ही अर्थ होता है। संसार का आश्रय सर्वथा छूट जाने से भगवान् का आश्रय स्वतः प्राप्त हो जाता है और भगवान् के सर्वथा आश्रित हो जाने से संसार का आश्रय स्वतः छूट जाता है। इन दोनों में से किसी एक की मुख्यता रखकर चलें अथवा दोनों को साथ  अर्थात् रखते हुए चलें एक ही अवस्था हो जाती है कल्याण हो जाता है। ಫ श्रद्धेय स्वामी श्रीरामसुखदासजी महाराज जय जय श्री राधे 0 श्रीजी की चरण सेवा চ ೫ ಫ % आश्रय 75 हम भगवान् के आश्रित हो जायें अथवा संसार का आश्रय छोड़ दें दोनों का एक ही अर्थ होता है। संसार का आश्रय सर्वथा छूट जाने से भगवान् का आश्रय स्वतः प्राप्त हो जाता है और भगवान् के सर्वथा आश्रित हो जाने से संसार का आश्रय स्वतः छूट जाता है। इन दोनों में से किसी एक की मुख्यता रखकर चलें अथवा दोनों को साथ  अर्थात् रखते हुए चलें एक ही अवस्था हो जाती है कल्याण हो जाता है। ಫ श्रद्धेय स्वामी श्रीरामसुखदासजी महाराज जय जय श्री राधे 0 श्रीजी की चरण सेवा - ShareChat
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🌸 बोलो राधे राधे - ये आँखों से निकले ऑँसू एक दिन विनाश का कारण बनेंगे ! सृष्टि के॰ GAULOGV ये आँखों से निकले ऑँसू एक दिन विनाश का कारण बनेंगे ! सृष्टि के॰ GAULOGV - ShareChat
#😊कृष्ण कथाएं #🙏 राधा रानी #🎵 राधा-कृष्ण भजन 🙏 #🌸 जय श्री कृष्ण😇 #🌸 बोलो राधे राधे
😊कृष्ण कथाएं - लगातार १० वर्ष तक यदि बच्चों को देशी गाय का दूध पीने को मिले तो बच्चों का बौद्धिक विकास बहुत तेजी से होता है लगातार १० वर्ष तक यदि बच्चों को देशी गाय का दूध पीने को मिले तो बच्चों का बौद्धिक विकास बहुत तेजी से होता है - ShareChat
#🌸 बोलो राधे राधे #🌸 जय श्री कृष्ण😇 #🎵 राधा-कृष्ण भजन 🙏 #🙏 राधा रानी #😊कृष्ण कथाएं
🌸 बोलो राधे राधे - निकट भविष्य में भारत फिर से गाँव के में अपनी पहचान दुनिया  कारण, बनाएगा और गाँव गाय के कारण! निकट भविष्य में भारत फिर से गाँव के में अपनी पहचान दुनिया  कारण, बनाएगा और गाँव गाय के कारण! - ShareChat
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😊कृष्ण कथाएं - गाय को स्पर्श करने मात्र सेःव्यक्ति के सभी पाप नष्ट हो ज़ाते हैं -कल्याण गौ अंक विशेषांक गाय को स्पर्श करने मात्र सेःव्यक्ति के सभी पाप नष्ट हो ज़ाते हैं -कल्याण गौ अंक विशेषांक - ShareChat
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😊कृष्ण कथाएं - इस दोहे में पूज्य श्री सद्गुरुदेव दूध न पीबै लाड़ली, प्रियतम बिन अकुलाय राधा कृष्ण की अंतरंग निकुंज लीला का वर्णन कर रहे हैं।श्री कुन्दप्रिया हरि अधरसुधा, बीरी सरस खवाय किशोरी अपने प्रियतम बिना   इतनी श्यामसुंदर व्याकुल हैं कि वे मान या विरह की दशा में दुग्धपान भी स्वीकार नहीं कर रही हैं । प्रियतम के अभाव में उन्हें संसार की कोई भी बस्तु सुखद नहीं लग रही है। तभी एक चतुर सखी कुन्दप्रिया (गुरुदेव का सखी स्वरूप ) किशोरी जी की इस दशा को समझ जाती है। बह जानती है कि लाड़ली जी की भूख और प्यास केबल प्रियतम के सान्निध्य से ही रशात होगी | सखी एक अद्भुत युक्ति लगाती है और श्यामसुंदर के ' अधर सुधा' (अधरों के रस ) से सिंचित ' सरस बीरी (पान का बीड़ा ) लाकर किशोरी जी को बड़े प्रेम से खिलाती है।जैसे ही प्रियतम के अधरामृत का स्पर्श होता श्री राधा जी की व्याकुलता दूर हो जाती है और वे तृप्त हो जाती हैं। SWAMI KARUN DASS JIMAHARAJ इस दोहे में पूज्य श्री सद्गुरुदेव दूध न पीबै लाड़ली, प्रियतम बिन अकुलाय राधा कृष्ण की अंतरंग निकुंज लीला का वर्णन कर रहे हैं।श्री कुन्दप्रिया हरि अधरसुधा, बीरी सरस खवाय किशोरी अपने प्रियतम बिना   इतनी श्यामसुंदर व्याकुल हैं कि वे मान या विरह की दशा में दुग्धपान भी स्वीकार नहीं कर रही हैं । प्रियतम के अभाव में उन्हें संसार की कोई भी बस्तु सुखद नहीं लग रही है। तभी एक चतुर सखी कुन्दप्रिया (गुरुदेव का सखी स्वरूप ) किशोरी जी की इस दशा को समझ जाती है। बह जानती है कि लाड़ली जी की भूख और प्यास केबल प्रियतम के सान्निध्य से ही रशात होगी | सखी एक अद्भुत युक्ति लगाती है और श्यामसुंदर के ' अधर सुधा' (अधरों के रस ) से सिंचित ' सरस बीरी (पान का बीड़ा ) लाकर किशोरी जी को बड़े प्रेम से खिलाती है।जैसे ही प्रियतम के अधरामृत का स्पर्श होता श्री राधा जी की व्याकुलता दूर हो जाती है और वे तृप्त हो जाती हैं। SWAMI KARUN DASS JIMAHARAJ - ShareChat
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🌸 बोलो राधे राधे - GAULOGY गाय का काम जो करेगा वो भगवान की कृपा से सर्वोच्च पद और प्रतिष्ठा को प्राप्त करेगा | राजेन्द्र दास महाराज GAULOGY गाय का काम जो करेगा वो भगवान की कृपा से सर्वोच्च पद और प्रतिष्ठा को प्राप्त करेगा | राजेन्द्र दास महाराज - ShareChat
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😊कृष्ण कथाएं - श्रीहरिः अनुकूल या प्रतिकूल परिस्थिति का प्राप्त होना " प्रारब्ध" के अधीन  सदुपयोग करना " पुरुषार्थ" के अधीन है और प्राप्त परिस्थिति का है। इसलिए कर्तव्य - पालन , सत्संग स्वाध्याय भजनन्ध्यान आदि करने में तो मनुष्य स्वतंत्र है, पर धन कमाने में स्वतंत्र नहीं है। मनुष्य यह नियम तो लेे सकता है कि मैं रोजाना इतनी माला जप करूँगा , इतना स्वाध्याय करूंगा, पर यह नियम नहीं ले सकता कि मैं रोजाना इतने रुपए कमाउँगा| कारण कि भजन -ध्यान आदि "पुरुषार्थ" के अधीन है और रुपये कमाना प्रारब्ध के अधीन करना लगाना चाहिए, वहां प्रारब्ध लगा दिया और है। परंतु जहां पुरुषार्थ जहां प्रारब्ध लगाना चाहिए वहां लगा दिया। पुरुषार्थ  इससे दोनों बीमारियां बढ़ गयी। पेट की बीमारी बढ़ने से जीवन - निर्वाह का खर्चा बहुत बढ़ गया। पढ़ाई - लिखाई में खान- पान में , स्वाद - शौकिनी में, रहननसहन में खर्चा बढ गया और कहते हैं कि स्टैंडर्ड ऊंचा होना चाहिए! स्टैंडर्ड ऊंचा करने में॰ पेट भरने में लगा दिया और पुरुषार्थ  सारा आँख से कुछ दिखता ही नहीं है कि भगवान् क्या है ? संसार क्या है? मैं कौन हूं? मेरे को क्या करना है? रात - दिन ' हाय पैसा! हाय पैसा! ' करते हैं। अगर ' हाय भगवन्! हाय भगवन्। ' करे तो निहाल हो जायँ। स्वामी रामसुखदास जी महाराज श्रीहरिः अनुकूल या प्रतिकूल परिस्थिति का प्राप्त होना " प्रारब्ध" के अधीन  सदुपयोग करना " पुरुषार्थ" के अधीन है और प्राप्त परिस्थिति का है। इसलिए कर्तव्य - पालन , सत्संग स्वाध्याय भजनन्ध्यान आदि करने में तो मनुष्य स्वतंत्र है, पर धन कमाने में स्वतंत्र नहीं है। मनुष्य यह नियम तो लेे सकता है कि मैं रोजाना इतनी माला जप करूँगा , इतना स्वाध्याय करूंगा, पर यह नियम नहीं ले सकता कि मैं रोजाना इतने रुपए कमाउँगा| कारण कि भजन -ध्यान आदि "पुरुषार्थ" के अधीन है और रुपये कमाना प्रारब्ध के अधीन करना लगाना चाहिए, वहां प्रारब्ध लगा दिया और है। परंतु जहां पुरुषार्थ जहां प्रारब्ध लगाना चाहिए वहां लगा दिया। पुरुषार्थ  इससे दोनों बीमारियां बढ़ गयी। पेट की बीमारी बढ़ने से जीवन - निर्वाह का खर्चा बहुत बढ़ गया। पढ़ाई - लिखाई में खान- पान में , स्वाद - शौकिनी में, रहननसहन में खर्चा बढ गया और कहते हैं कि स्टैंडर्ड ऊंचा होना चाहिए! स्टैंडर्ड ऊंचा करने में॰ पेट भरने में लगा दिया और पुरुषार्थ  सारा आँख से कुछ दिखता ही नहीं है कि भगवान् क्या है ? संसार क्या है? मैं कौन हूं? मेरे को क्या करना है? रात - दिन ' हाय पैसा! हाय पैसा! ' करते हैं। अगर ' हाय भगवन्! हाय भगवन्। ' करे तो निहाल हो जायँ। स्वामी रामसुखदास जी महाराज - ShareChat