Divyansh Garg
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भक्ति पथ धारा
#🌸 बोलो राधे राधे #😊कृष्ण कथाएं #🎵 राधा-कृष्ण भजन 🙏 #🌸 जय श्री कृष्ण😇 #🙏 राधा रानी
🌸 बोलो राधे राधे - GOD GOD & ONLY GOD प्रभु को अपने भक्तों की आत्मीयता सबसे प्यारी लगती है | bhaktivicharin WWW Chapter no 12, Serial no.790 GOD GOD & ONLY GOD प्रभु को अपने भक्तों की आत्मीयता सबसे प्यारी लगती है | bhaktivicharin WWW Chapter no 12, Serial no.790 - ShareChat
#🙏 राधा रानी #🌸 जय श्री कृष्ण😇 #🎵 राधा-कृष्ण भजन 🙏 #😊कृष्ण कथाएं #🌸 बोलो राधे राधे
🙏 राधा रानी - ச் शीपरमात्यने H1: 1 गीताके नित्य पठनीय पाँच श्लोक भूतानामीश्वरोउपि सन्। अजोउपि सन्नव्ययात्मा स्वामधिष्ठाय uof सम्भवाम्यात्ममायया ।। धर्मस्य   ग्लानिर्भवति { যন यदा भारत | अभ्युत्थानमधर्मस्य तदात्मानं सृजाम्यहम् ।। परित्राणाय साधूनां   विनाशाय दुष्कृताम्। च धर्मसंस्थापनार्थाय ম্নাণি युगे II युगे जन्म कर्म च मे दिव्यमेवं यो वेत्ति तत्त्वतः पुनर्जन्म नैति मामेति   सोउर्जुन।। त्यक्त्वा   देहं मामुपाश्रिताः নীনযোযংযন্ধীখা ٦٦٦٢ बहवो ज्ञानतपसा পুনা मद्द्रावमागताः Il (Tm "| ೯-೭೦ ) ச் शीपरमात्यने H1: 1 गीताके नित्य पठनीय पाँच श्लोक भूतानामीश्वरोउपि सन्। अजोउपि सन्नव्ययात्मा स्वामधिष्ठाय uof सम्भवाम्यात्ममायया ।। धर्मस्य   ग्लानिर्भवति { যন यदा भारत | अभ्युत्थानमधर्मस्य तदात्मानं सृजाम्यहम् ।। परित्राणाय साधूनां   विनाशाय दुष्कृताम्। च धर्मसंस्थापनार्थाय ম্নাণি युगे II युगे जन्म कर्म च मे दिव्यमेवं यो वेत्ति तत्त्वतः पुनर्जन्म नैति मामेति   सोउर्जुन।। त्यक्त्वा   देहं मामुपाश्रिताः নীনযোযংযন্ধীখা ٦٦٦٢ बहवो ज्ञानतपसा পুনা मद्द्रावमागताः Il (Tm "| ೯-೭೦ ) - ShareChat
#🌸 बोलो राधे राधे #😊कृष्ण कथाएं #🎵 राधा-कृष्ण भजन 🙏 #🌸 जय श्री कृष्ण😇 #🙏 राधा रानी
🌸 बोलो राधे राधे - राधासर्वेश्वरो विजयते।।  श्रीभगवाननिंचार्काचार्याय नमः।। श्री निम्बार्क आश्रय अधिक जानकारी के लिए संपर्क करे 907315 7039 97660 44801 / 62626 56379 ) जगत गुरु निम्बार्क आचार्य ३४वें पीठाधीश्वर श्री श्रीभटटदेवाचार्य जी महाराज तथा अपना उत्तराधिकार जगत गुरु गद्दी पीठ के पीठाधीश्वर के रूप में अपने प्रमुख शिष्य जगत गुरु निम्बार्क आचार्य ३५वें पीठाधीश्वर  श्रीवीरमदेव जी को प्रदान किया उनके समय के दौरान। Shri Nimbark Aashray राधासर्वेश्वरो विजयते।।  श्रीभगवाननिंचार्काचार्याय नमः।। श्री निम्बार्क आश्रय अधिक जानकारी के लिए संपर्क करे 907315 7039 97660 44801 / 62626 56379 ) जगत गुरु निम्बार्क आचार्य ३४वें पीठाधीश्वर श्री श्रीभटटदेवाचार्य जी महाराज तथा अपना उत्तराधिकार जगत गुरु गद्दी पीठ के पीठाधीश्वर के रूप में अपने प्रमुख शिष्य जगत गुरु निम्बार्क आचार्य ३५वें पीठाधीश्वर  श्रीवीरमदेव जी को प्रदान किया उनके समय के दौरान। Shri Nimbark Aashray - ShareChat
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🙏 राधा रानी - मेरे गोविंद का नाम "सृत्यु के समय एक सात्र रक्षा गोविन्दं भज गोविन्दं भज गोविन्दं मूढमते। भज सम्प्राप्ते सन्निहिते काले, न हि न हि रक्षति डुकृञकरणे।  अरे मूर्खों ( मूढ़मति ) केवल श्रीगोविन्द का भजन करो, केवल श्रीगोविन्द का करो, केवल श्रीगोविन्द का भजन करो। तुम्हारा व्याकरण का ज्ञान एवं भजन शब्दचातुरी  रक्षा नहीं कर मृत्यु के ் পায়ৌ |  समय शंकराचार्य मेरे गोविंद का नाम "सृत्यु के समय एक सात्र रक्षा गोविन्दं भज गोविन्दं भज गोविन्दं मूढमते। भज सम्प्राप्ते सन्निहिते काले, न हि न हि रक्षति डुकृञकरणे।  अरे मूर्खों ( मूढ़मति ) केवल श्रीगोविन्द का भजन करो, केवल श्रीगोविन्द का करो, केवल श्रीगोविन्द का भजन करो। तुम्हारा व्याकरण का ज्ञान एवं भजन शब्दचातुरी  रक्षा नहीं कर मृत्यु के ் পায়ৌ |  समय शंकराचार्य - ShareChat
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🌸 बोलो राधे राधे - G0D GOD & ONLY GOD भक्ति में हमें हर तरफ प्रभु की ही अनुभूति होती है | bhaktivicharin WNW; Chapter no 12 Serial no.787 G0D GOD & ONLY GOD भक्ति में हमें हर तरफ प्रभु की ही अनुभूति होती है | bhaktivicharin WNW; Chapter no 12 Serial no.787 - ShareChat
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🌸 जय श्री कृष्ण😇 - GOD GOD & ONLY GOD भक्त सदैव अपनी भक्ति से प्रभु को सुख देना चाहता है | bhaktivichar.in WWW Chapter no 12, Serial no.785 GOD GOD & ONLY GOD भक्त सदैव अपनी भक्ति से प्रभु को सुख देना चाहता है | bhaktivichar.in WWW Chapter no 12, Serial no.785 - ShareChat
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🌸 बोलो राधे राधे - GOD GOD & ONLY GOD जीवन की एक॰एक चेष्टा प्रभु के निकट जाने के लिए हो , यही श्रीगोपी भाव 81 bhaktivcharin _ Chapteruo 12 Serial no 784 GOD GOD & ONLY GOD जीवन की एक॰एक चेष्टा प्रभु के निकट जाने के लिए हो , यही श्रीगोपी भाव 81 bhaktivcharin _ Chapteruo 12 Serial no 784 - ShareChat
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🌸 जय श्री कृष्ण😇 - GOD GOD & ONLYGOD मन जब भी जाए केवल प्रभु के निकट ही जाए। मन को ऐसी आदत लगा देनी चाहिए | www bhaktivicharin Chapter no: 12, Serial no.783 GOD GOD & ONLYGOD मन जब भी जाए केवल प्रभु के निकट ही जाए। मन को ऐसी आदत लगा देनी चाहिए | www bhaktivicharin Chapter no: 12, Serial no.783 - ShareChat
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🌸 बोलो राधे राधे - ISKCON BS DEH भगवान् नारायण की एकान्त भक्ति में लगे भक्तगण जीवन की किसी भी परिस्थिति से कभी नहीं डरते। श्रीमद्भागवतम् 9H.२१ ISKCON BS DEH भगवान् नारायण की एकान्त भक्ति में लगे भक्तगण जीवन की किसी भी परिस्थिति से कभी नहीं डरते। श्रीमद्भागवतम् 9H.२१ - ShareChat
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🙏 राधा रानी - "যান ২ত্রী" 45 मिलने का भगवान् सत्यसंकल्प हे॰वे जिब तुमसे संकल्प करेंगे तो उसी क्षण निर्बाध मिलकर तुम्हें तुमसे कर देंगे। तुम उन्हें चाहोगे अपने क्षुद्र संकुचित कृतार्थ और पाप तापकलुषित जड मन से ; क्योकि तुम्हारा मन ऐसा ही है और वे तुरम्हे चाहेंगे अपने महान विशाल और परम पवित्र दिव्य चिन्मय मन से ; क्योकि उनका मन वैसा ही तुम ही हेः अतः उनके चाहते कृतकृत्य और महान् बन जाओगे। तुम उन्हें दोगे अपनी कोई अनित्य अपूर्व और मायाजनित प्रिय वस्तु या अधिक से अधिक अर्पण कर दोगे अपना कर्मजन्य पांचभौतिक रक्तमांसमय घृणित पास बही है, और वे तुम्हें देंगे अपनी शरीर; क्योकि ঔদ্গ২ नित्य पूर्ण शाश्वत दिव्य वस्तु या अर्पण कर देंगे अपना नित्य पूर्ण सर्वैश्वर्यमय सच्चिदानन्द स्वरूप ; क्योंकि उनके पास वही है। सोचो कितना लाभ है उनसे मिलने की चाह में और उन्हें कोई वस्तु समर्पण करने में। कल्याण वर्ष॰ ९१ अंक॰ ०३ गीताप्रेस गोरखपुर "যান ২ত্রী" 45 मिलने का भगवान् सत्यसंकल्प हे॰वे जिब तुमसे संकल्प करेंगे तो उसी क्षण निर्बाध मिलकर तुम्हें तुमसे कर देंगे। तुम उन्हें चाहोगे अपने क्षुद्र संकुचित कृतार्थ और पाप तापकलुषित जड मन से ; क्योकि तुम्हारा मन ऐसा ही है और वे तुरम्हे चाहेंगे अपने महान विशाल और परम पवित्र दिव्य चिन्मय मन से ; क्योकि उनका मन वैसा ही तुम ही हेः अतः उनके चाहते कृतकृत्य और महान् बन जाओगे। तुम उन्हें दोगे अपनी कोई अनित्य अपूर्व और मायाजनित प्रिय वस्तु या अधिक से अधिक अर्पण कर दोगे अपना कर्मजन्य पांचभौतिक रक्तमांसमय घृणित पास बही है, और वे तुम्हें देंगे अपनी शरीर; क्योकि ঔদ্গ২ नित्य पूर्ण शाश्वत दिव्य वस्तु या अर्पण कर देंगे अपना नित्य पूर्ण सर्वैश्वर्यमय सच्चिदानन्द स्वरूप ; क्योंकि उनके पास वही है। सोचो कितना लाभ है उनसे मिलने की चाह में और उन्हें कोई वस्तु समर्पण करने में। कल्याण वर्ष॰ ९१ अंक॰ ०३ गीताप्रेस गोरखपुर - ShareChat