❤️dolly 🥰
ShareChat
click to see wallet page
@dufermissyou
dufermissyou
❤️dolly 🥰
@dufermissyou
🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳
. हर रोज मिलने आ जाती हैं तन्हाइयां मुझसे क्यों बंद नहीं होते हैं ये दफ्तर तेरी यादों के रात में भी .. #💓 फ़ौजी के दिल की बातें #❤️Love You ज़िंदगी ❤️ #🌹प्यार के नगमे💖 #🥰लव कोट्स🌹 #💗माना के हम यार नहीं 🤗 @ sahiba 🥰
💓 फ़ौजी के दिल की बातें - ShareChat
00:49
जय हो माँ जगदम्बे 🙏🚩🌹 माँ की छत्र-छाया सदैव आपके परिवार पर 🙏🚩🙏 बनी रहे,🙏 ऐसी माँ से कामना है।🚩🙏 जय माता दी 🙏🚩🌹 #🙏 देवी दर्शन🌸 #🙏जय माता दी📿 #🙏 जय माँ दुर्गा 🙏 #🪔नवरात्रि Status⏳ #🪷देवी कात्यायनी🪔📿 @ sahiba 🥰
🙏 देवी दर्शन🌸 - ShareChat
Jai Hind 🇮🇳🇮🇳🌹🚩🙏 jai bharat 🙏🚩 #I ❤️️ इंडियन आर्मी 🇮🇳 #🎖️देश के जांबाज #💓 फ़ौजी के दिल की बातें #🙏🏻माँ तुझे सलाम #🎖️देश के सिपाही @ sahiba 🥰
I ❤️️ इंडियन आर्मी 🇮🇳 - 1ic [ ೊ11 Mfik| MINITTAI] uனIIo  शहीदों की चिताओं पर लगेंगे हर बरस मेले वतन पर मिटने वारलों का यही बाकी निशां होगा  २३ मार्च शहीदी दिवस पर அ 1ic [ ೊ11 Mfik| MINITTAI] uனIIo  शहीदों की चिताओं पर लगेंगे हर बरस मेले वतन पर मिटने वारलों का यही बाकी निशां होगा  २३ मार्च शहीदी दिवस पर அ - ShareChat
जवाब मिले ना मिले सवाल उभरना जरूरी है,,,, कहीं पहुंचने के लिए, कहीं से निकलना जरूरी है.... जिन रास्तों की मंज़िल नहीं हुआ करती,,, एक बार तो उनसे गुजरना जरूरी है....। #💓 फ़ौजी के दिल की बातें #I ❤️️ इंडियन आर्मी 🇮🇳 #🎖️देश के जांबाज #🎨I love India Word आर्ट🖌️ #❤️Love You ज़िंदगी ❤️ @ sahiba 🥰
💓 फ़ौजी के दिल की बातें - ShareChat
Two side of love 💞💞 ❤️💗💞 #💗माना के हम यार नहीं 🤗 #🥰लव कोट्स🌹 #❤️Love You ज़िंदगी ❤️ #🌹प्यार के नगमे💖 #💓 फ़ौजी के दिल की बातें @ sahiba 🥰
💗माना के हम यार नहीं 🤗 - ShareChat
00:59
जिंदगी जीना आसान थोड़ी होता हैँ ज़िंदगी का कोई भरोसा नहीं ये सच है लेकिन जिंदगी है तो भरोसा भी रखो क्योंकि यही जीवन है #🌹प्यार के नगमे💖 #❤️Love You ज़िंदगी ❤️ #💓 फ़ौजी के दिल की बातें #🥰लव कोट्स🌹 #💗माना के हम यार नहीं 🤗 @ sahiba 🥰
🌹प्यार के नगमे💖 - ShareChat
00:42
#जीवन वही है # जो #आज है कल का इंतज़ार .. मत करो क्या पता #कल_हो_ना_हो.. #💗माना के हम यार नहीं 🤗 #💓 फ़ौजी के दिल की बातें #❤️Love You ज़िंदगी ❤️ #🥰लव कोट्स🌹 #🌹प्यार के नगमे💖 @ sahiba 🥰
💗माना के हम यार नहीं 🤗 - ShareChat
00:12
कश्मीर की दुर्गम चोटियों पर स्थित 'पोस्ट 43' पर उस रात बर्फीला तूफान अपने चरम पर था। तापमान माइनस 25 डिग्री तक गिर चुका था और हवाएं इतनी तेज चल रही थीं कि उनकी आवाज किसी भूखे भेड़िये के रोने जैसी लग रही थी। इस शून्य कर देने वाली ठंड में भी सूबेदार विक्रम सिंह की आंखें नाइट-विजन दूरबीन से एलओसी (LOC) के पार अंधकार को चीर रही थीं। ​विक्रम राजपूताना राइफल्स का एक अनुभवी और जांबाज सैनिक था। उसे सरहद की हर आहट और हवा के हर रुख की पहचान थी। रात के 2:15 बज रहे थे। सब कुछ सामान्य लग रहा था, लेकिन विक्रम के फौजी दिमाग में एक अजीब सी बेचैनी थी। वह खामोशी जो आमतौर पर शांति का प्रतीक होती है, आज किसी गहरे खतरे का इशारा कर रही थी। ​तभी वायरलेस सेट पर एक अजीब सी गड़गड़ाहट (Static) हुई और फिर सब शांत हो गया। बेस कैंप से उनका संपर्क टूट चुका था। खराब मौसम में ऐसा होना आम बात थी, लेकिन विक्रम का 'सिक्स्थ सेंस' कह रहा था कि यह सिर्फ मौसम की खराबी नहीं है। ​विक्रम ने अपने साथी संतरी, सिपाही अर्जुन को सतर्क किया, "अर्जुन, अपनी पोज़िशन होल्ड करना। मैं जनरेटर और कम्यूनिकेशन टेंट चेक करके आता हूँ। मुझे कुछ ठीक नहीं लग रहा।" ​अपनी इंसास (INSAS) राइफल को कस कर पकड़े हुए विक्रम बर्फ में दबे कदमों से आगे बढ़ा। बर्फ इतनी ताजी और भुरभुरी थी कि हर कदम पर निशान बन रहे थे। अचानक विक्रम के कदम ठिठक गए। जनरेटर टेंट से करीब दस कदम दूर, उसे बर्फ पर जूतों के निशान दिखाई दिए। ​उसने अपनी टॉर्च की हल्की रोशनी उन निशानों पर डाली। ये मिलिट्री बूट्स के ही निशान थे, लेकिन वे निशान टेंट की तरफ आ तो रहे थे, पर वापस जाने के कोई निशान नहीं थे। विक्रम ने तुरंत अपने दिमाग में गिनती की—पोस्ट पर कुल 8 जवान थे। दो पेट्रोलिंग पर, दो सो रहे थे, दो बंकर में और वह खुद अर्जुन के साथ संतरी ड्यूटी पर। फिर यह नौवां इंसान कौन था? ​विक्रम ने अपनी राइफल का सेफ्टी कैच हटाया। 'क्लिक' की वह हल्की सी आवाज भी उस सन्नाटे में गूंज गई। वह धीरे-धीरे जनरेटर टेंट के पास पहुंचा। टेंट का फ्लैप आधा खुला था। उसने झटके से अंदर प्रवेश किया और अपनी राइफल तान दी। अंदर कोई नहीं था, लेकिन जनरेटर के तारों को बहुत ही सफाई से काटा गया था। यह किसी घुसपैठिए का काम था, और वह अभी भी कैंप के अंदर ही मौजूद था। ​तभी बाहर से एक हल्की सी 'थप' की आवाज आई। विक्रम तेजी से बाहर निकला और उसने देखा कि जिस दिशा में एम्युनिशन (हथियारों का) बंकर था, वहाँ एक परछाईं तेजी से खिसक कर अंधेरे में गायब हो गई। घुसपैठिए ने भारतीय सेना की ही स्नो-ड्रेस (सफेद वर्दी) पहन रखी थी, ताकि वह बर्फ में छिप सके। ​विक्रम ने वायरलेस पर अर्जुन को कोड वर्ड में संदेश भेजा—"अल्फा-रेड, आई रिपीट, अल्फा-रेड।" यह कैंप में घुसपैठ का अलर्ट था। अब तक सो रहे जवान भी अपनी राइफलें लेकर खामोशी से अपनी-अपनी पोज़िशन लेने लगे थे। पूरे कैंप में मौत का सा सन्नाटा छा गया। ​विक्रम जानता था कि अगर घुसपैठिया एम्युनिशन बंकर तक पहुंच गया, तो वह पूरे पोस्ट को धमाके से उड़ा सकता है। विक्रम ने बंकर की ओर जाने वाले संकरे रास्ते को चुना। वहां की बर्फ पर कोई नए निशान नहीं थे। इसका मतलब था कि दुश्मन बंकर की छत के रास्ते या पीछे की चट्टानों से वहां पहुंचने की कोशिश कर रहा था। ​अचानक विक्रम के सिर के ठीक ऊपर से एक बर्फीला पत्थर गिरा। उसने तुरंत खुद को दाईं ओर रोल किया और उसी पल एक साइलेंसर लगी पिस्तौल से चली गोली ठीक उस जगह की बर्फ में धंसी, जहां विक्रम एक सेकंड पहले खड़ा था। ​दुश्मन चट्टान के ऊपर था! ​विक्रम ने बिना पलक झपकाए उस दिशा में अपनी राइफल से दो फायर किए। ऊपर से एक कराहने की आवाज आई और एक भारी शरीर बर्फ पर आ गिरा। विक्रम सतर्कता से उसके पास पहुंचा। वह एक प्रशिक्षित आतंकी था, जिसने हमारे ही जवानों जैसी वर्दी पहन रखी थी। विक्रम ने उसकी नब्ज जांची, वह मर चुका था। ​लेकिन तभी विक्रम की नजर उस आतंकी की कलाई पर बंधी एक डिजिटल घड़ी पर पड़ी। वह घड़ी नहीं, बल्कि एक टाइमर था, जिसमें सिर्फ 2 मिनट और 45 सेकंड बचे थे। ​विक्रम का खून जम गया। इसका मतलब यह सिर्फ एक ध्यान भटकाने वाला मोहरा था! असली खतरा कहीं और था। विक्रम का दिमाग तेजी से दौड़ा। अगर यह आतंकी यहां था, तो उसका दूसरा साथी कहां होगा? कम्यूनिकेशन कट चुका है, जनरेटर बंद है... अगला सबसे महत्वपूर्ण टारगेट क्या हो सकता है? ​"ऑर्टिलरी शेड (Artillery Shed)!" विक्रम के मुंह से बरबस ही निकला। जहां मोर्टार और गोले रखे हुए थे। ​वह पागलों की तरह ऑर्टिलरी शेड की तरफ भागा। वहां पहुंचकर उसने देखा कि संतरी ड्यूटी पर तैनात जवान बेहोश पड़ा था। शेड का ताला टूटा हुआ था। विक्रम अंदर घुसा। अंदर बिल्कुल अंधेरा था। उसने अपनी नाइट-विजन गॉगल ऑन की। ​शेड के ठीक बीचों-बीच, गोलों के एक बड़े बक्से के ऊपर एक सी-4 (C4) एक्सप्लोसिव लगा हुआ था और वहां एक दूसरा आतंकी उसे सेट कर रहा था। विक्रम ने बिना कोई आवाज किए अपनी कमांडो नाइफ (चाकू) निकाली और एक चीते की फुर्ती से उस आतंकी पर छलांग लगा दी। ​दोनों बर्फ और हथियारों के बक्सों के बीच गिर पड़े। आतंकी बहुत ही ताकतवर और मार्शल आर्ट्स में माहिर था। उसने विक्रम के हाथ पर जोरदार लात मारी जिससे चाकू दूर जा गिरा। आतंकी ने अपनी पिस्तौल निकालनी चाही, लेकिन विक्रम ने अपनी पूरी ताकत से उसके चेहरे पर एक मुक्का जड़ा और उसकी पिस्तौल छीनकर उसी के सिर पर दे मारी। आतंकी वहीं ढेर हो गया। ​विक्रम ने तुरंत मुड़कर बम की तरफ देखा। टाइमर की लाल बत्ती ब्लिंक कर रही थी। ​00:00:23... 00:00:22... 00:00:21... ​सिर्फ 20 सेकंड बचे थे! बम को डिफ्यूज करना विक्रम की एक्सपर्टीज नहीं थी, लेकिन उसने ट्रेनिंग में इसके बेसिक्स सीखे थे। बम में तीन तार थे—लाल, नीला और काला। किसी भी गलत तार को काटने का मतलब था पोस्ट 43 का नक्शे से मिट जाना। ​00:00:15... 00:00:14... ​विक्रम के माथे पर इस जमा देने वाली ठंड में भी पसीने की बूंदें छलक आईं। उसने गहरी सांस ली। उसे अपने इंस्ट्रक्टर की बात याद आई, "जब दुश्मन ने सब कुछ परफेक्शन के साथ किया हो, तो वह सबसे आसान दिखने वाले जाल में तुम्हें फंसाता है।" ​लाल तार सबसे ऊपर था और उसे काटना सबसे आसान लग रहा था। विक्रम समझ गया कि यह एक धोखा है। ​00:00:07... 00:00:06... ​उसने अपना मल्टी-टूल निकाला और बिना ज्यादा सोचे, सबसे नीचे छिपे हुए नीले तार को काट दिया। ​00:00:02... ​टाइमर रुक गया। लाल बत्ती जलना बंद हो गई। ​विक्रम वहीं जमीन पर बैठ गया और उसने एक लंबी राहत की सांस ली। बाहर तूफान अब थमने लगा था। अर्जुन और बाकी जवान शेड के अंदर आ चुके थे। उन्होंने स्थिति को तुरंत कंट्रोल में ले लिया। ​सुबह की पहली किरण जब पोस्ट 43 की बर्फ पर पड़ी, तो वह सोने की तरह चमक रही थी। दुनिया के लिए यह एक आम सुबह थी। देश के लोग अपनी-अपनी चाय की प्याली के साथ अखबार पढ़ रहे थे, इस बात से पूरी तरह अनजान कि रात के अंधेरे में एक फौजी ने कितनी खामोशी से मौत को मात देकर उनके कल को सुरक्षित किया था। ​सूबेदार विक्रम सिंह ने अपनी राइफल को कंधे पर टांगा और तिरंगे की तरफ देखकर एक फक्र भरी मुस्कान के साथ कड़क सैल्यूट ठोका। उनके लिए, यह बस ड्यूटी पर बीता एक और आम दिन था। जय हिंद 🇮🇳🇮🇳🌹🚩🇮🇳🌹 #🙏🏻माँ तुझे सलाम #💓 फ़ौजी के दिल की बातें #🎖️देश के जांबाज #I ❤️️ इंडियन आर्मी 🇮🇳 #🎖️देश के सिपाही @ sahiba 🥰
🙏🏻माँ तुझे सलाम - ऑपरेशन स्नाइलेंट स्नोः सस्पेंस और बहादुरी की एक अनकही कहानी सरहद पर बर्फ के बीच , एक अनजान आहट ने रातों की नींद हराम कर दी.. ऑपरेशन स्नाइलेंट स्नोः सस्पेंस और बहादुरी की एक अनकही कहानी सरहद पर बर्फ के बीच , एक अनजान आहट ने रातों की नींद हराम कर दी.. - ShareChat
टी-20 विश्वकप में इस शानदार जीत के लिए टीम इंडिया को कोटि-कोटि बधाई। यह जीत हर भारतीय के धैर्य और जुनून की जीत है। इसके लिए समस्त देशवासियों को हार्दिक शुभकामनाएँ! #T20WorldCup2026 #TeamIndia #💓 फ़ौजी के दिल की बातें #🇮🇳मेरा भारत, मेरी शान #🙏🏻माँ तुझे सलाम #🇮🇳 देशभक्ति #🏏T20 अपडेट 📰 @ sahiba 🥰
💓 फ़ौजी के दिल की बातें - ICC MENS 120 WORLD CUP INDIA VS NEWZEALAND 2026 | ICC MEN S T20 WORLD CUP 2026 CHOMPIONST Congratulations #HistoryRepeated #BleedBlue #INDVSNZ | #TZOWORLDCUP #Proudindia | ICC MENS 120 WORLD CUP INDIA VS NEWZEALAND 2026 | ICC MEN S T20 WORLD CUP 2026 CHOMPIONST Congratulations #HistoryRepeated #BleedBlue #INDVSNZ | #TZOWORLDCUP #Proudindia | - ShareChat
ठीक 12 बज रहे थे। भारत-पाक सीमा पर ठंडी हवाएँ ऐसे चल रही थीं जैसे कोई अनदेखी परछाईं रेत को सहला रही हो। दूर-दूर तक सिर्फ सन्नाटा… और बीच-बीच में चौकी की टिमटिमाती पीली लाइट। राजस्थान के थार इलाके में तैनात था जवान अर्जुन सिंह। उम्र सिर्फ 26 साल। बहादुर, ईमानदार और अपने परिवार का इकलौता बेटा। गाँव से निकलकर देश की रक्षा का सपना लेकर वह फौज में आया था। उस रात उसकी ड्यूटी पोस्ट नंबर 17 पर थी — एक पुरानी चौकी, जिसके बारे में अफवाह थी कि वहाँ पहले भी कई अजीब घटनाएँ हो चुकी हैं। 🌑 पहली आहट रात 12:30… अर्जुन ने अपने नाइट विज़न दूरबीन से चारों तरफ देखा। सब कुछ सामान्य था। तभी उसे लगा जैसे दूर रेत के टीले के पीछे कोई खड़ा है। “कौन है वहाँ?” उसने ऊँची आवाज़ में पूछा। कोई जवाब नहीं। रेत उड़ती रही… हवा सिसकती रही… लेकिन अचानक उसे साफ दिखाई दिया — एक धुंधली आकृति। सफेद कपड़ों में कोई औरत… जिसके बाल हवा में उड़ रहे थे। अर्जुन का दिल जोर से धड़कने लगा। सीमा पर इस समय कोई महिला? असंभव। उसने वायरलेस उठाया — “अल्फा टू ब्रावो, क्या आपको भी पोस्ट 17 के पास कोई मूवमेंट दिख रही है?” दूसरी तरफ से जवाब आया — “निगेटिव अर्जुन, सब क्लियर है।” लेकिन अर्जुन की आँखों के सामने वह आकृति धीरे-धीरे उसकी ओर बढ़ रही थी। 👣 पदचिन्ह जो अचानक गायब हो गए अर्जुन ने हिम्मत जुटाई और आगे बढ़ा। जैसे-जैसे वह पास गया, आकृति धुंध में बदल गई। वहाँ सिर्फ रेत थी… और कुछ पदचिन्ह। पर अजीब बात यह थी कि पदचिन्ह बीच में ही खत्म हो गए — जैसे कोई हवा में उड़ गया हो। अर्जुन के माथे पर पसीना आ गया। उसे याद आया — तीन साल पहले इसी पोस्ट पर तैनात एक जवान की रहस्यमय मौत हुई थी। रिपोर्ट में लिखा गया था — “हार्ट अटैक”। लेकिन साथियों ने कहा था कि वह मरने से पहले चिल्ला रहा था — “वो फिर आ गई…!” 📻 टूटी हुई आवाज़ रात 2 बजे… चौकी के अंदर रखी पुरानी रेडियो मशीन अचानक खुद-ब-खुद चालू हो गई। उसमें से खड़खड़ाती आवाज़ आई — “मुझे… घर… जाना है…” अर्जुन ने घबराकर स्विच बंद किया। लेकिन आवाज़ फिर आई — “तुम… भी… नहीं बचोगे…” अर्जुन ने तुरंत पूरी चौकी की तलाशी ली। कोई नहीं था। 🕯️ रहस्य की परत सुबह होते ही अर्जुन ने अपने सीनियर सूबेदार मेजर से बात की। पहले तो उन्होंने टाल दिया, लेकिन जब अर्जुन ने सब विस्तार से बताया, तो उनका चेहरा उतर गया। उन्होंने धीमी आवाज़ में कहा — “आज से 5 साल पहले यहाँ एक गाँव था। सीमा विवाद में गोलाबारी हुई। एक परिवार मारा गया… उस परिवार की एक लड़की की लाश कभी नहीं मिली। लोग कहते हैं उसकी आत्मा यहीं भटकती है।” अर्जुन हँसना चाहता था — पर पिछली रात की घटना ने उसकी हँसी रोक दी। 🌪️ दूसरी रात – सच्चाई का सामना अर्जुन ने ठान लिया — आज वह सच्चाई जाने बिना नहीं रहेगा। रात 1 बजे… वही ठंडी हवा… वही सन्नाटा। अचानक पीछे से किसी ने उसका नाम फुसफुसाया — “अर्जुन…” वह पलटा — वही सफेद कपड़ों वाली लड़की, इस बार बिल्कुल सामने। उसकी आँखें खाली थीं… चेहरा पीला… और पैरों के नीचे रेत नहीं हिल रही थी। “तुम यहाँ क्यों हो?” अर्जुन ने साहस जुटाकर पूछा। लड़की की आवाज़ धीमी थी — “मेरे परिवार को बचा नहीं पाए… अब तुम भी नहीं बचोगे…” अचानक हवा तेज हो गई। चौकी की लाइट झपकने लगी। अर्जुन ने मंत्र याद किया जो उसकी माँ ने सिखाया था। उसने जोर से कहा — “मैं देश की रक्षा करता हूँ, किसी का बुरा नहीं किया!” लड़की का चेहरा बदलने लगा। उसकी आँखों से आँसू बहने लगे। “मुझे न्याय चाहिए…” अर्जुन समझ गया — यह बदले की आत्मा नहीं, दर्द की आत्मा है। ⚖️ न्याय की तलाश अगले दिन अर्जुन ने पुराने रिकॉर्ड खंगाले। उसे पता चला कि उस घटना में असल में गाँव पर दुश्मन देश की तरफ से हमला हुआ था, लेकिन रिपोर्ट में सच्चाई छुपा दी गई थी। अर्जुन ने पूरी रिपोर्ट तैयार कर उच्च अधिकारियों तक भेजी। तीसरी रात… लड़की फिर आई। लेकिन इस बार उसका चेहरा शांत था। “धन्यवाद… अब मुझे मुक्ति मिलेगी…” और धीरे-धीरे वह रेत में घुल गई। 🌅 आख़िरी मोड़ सुबह जब साथी जवान अर्जुन को जगाने आए — वह चौकी के बाहर बैठा था… मुस्कुराते हुए। लेकिन उसकी आँखें बंद थीं। दिल की धड़कन रुक चुकी थी। डॉक्टर ने कहा — “हार्ट फेलियर।” पर उसके चेहरे पर डर नहीं… सुकून था। उस दिन के बाद पोस्ट 17 पर कभी कोई अजीब घटना नहीं हुई। गाँव में अर्जुन की मूर्ति लगी — “वो जवान जिसने सीमा ही नहीं, एक भटकी आत्मा को भी सुकून दिया।” और आज भी जब रात में हवा चलती है, तो ऐसा लगता है जैसे कोई फुसफुसा रहा हो — “जय हिंद…” #I ❤️️ इंडियन आर्मी 🇮🇳 #🎖️देश के सिपाही #🎖️देश के जांबाज #💓 फ़ौजी के दिल की बातें #🙏 जवानों को सलाम @ sahiba 🥰
I ❤️️ इंडियन आर्मी 🇮🇳 - सीमा पर दुश्मन से नहीं... उस रात वो किसी और से लड़ रहा था... पोस्ट नंबर १७ की आख़िरी ड्यूटी ; जय हिंद सीमा पर दुश्मन से नहीं... उस रात वो किसी और से लड़ रहा था... पोस्ट नंबर १७ की आख़िरी ड्यूटी ; जय हिंद - ShareChat