जब चंद्रगुप्त मौर्य वानप्रस्थ की ओर जाने लगे तो सवाल उठा कि चंद्रगुप्त मौर्य के बाद कौन ?
क्योंकि, एक तरफ चंद्रगुप्त मौर्य की पहली पत्नी दुर्धरा का पुत्र बिंदुसार था तो दूसरी तरफ चंद्रगुप्त की दूसरी पत्नी (सेल्युकस की बेटी) हेलेना का पुत्र जस्टिन.
दोनों पक्ष के लोग अपने-अपने चहेते को मगध का उत्तराधिकारी बनाना चाहते थे जिस कारण राजमहल साजिशों का केंद्र बन चुका था.
अंत में आचार्य चाणक्य से इस बारे में सलाह ली गई और आचार्य चाणक्य ने इसका कालजयी उत्तर देते हुए कहा कि... "विदेशी माता के गर्भ से उत्पन्न पुत्र कभी भी देशभक्त नहीं हो सकता."
और, इसके बाद बिंदुसार को मगध का उत्तराधिकारी बना दिया गया.
मुझे लगता है कि आचार्य चाणक्य ने अपने इस कालजयी उत्तर के जरिए ये संदेश देने की कोशिश की कि... एक विदेशी माता के गर्भ से उत्पन्न पुत्र को उस देश की सभ्यता-संस्कृति एवं और परंपरा की उतनी जानकारी नहीं होती है जिस कारण वो देश को समझ नहीं पाता है और परिणामतः उसे देश से लगाव नहीं रहता है.
और, वो सत्ता सिर्फ पावर और पैसे के लिए चाहता है तथा इस हेतु वो किसी भी हद तक जा सकता है.
हालांकि, आचार्य चाणक्य के इस कथन को लगभग 2500 साल बीत चुके हैं लेकिन आज भी उनका कथन उतना ही प्रासंगिक है.
और, कल दिल्ली के भारत मंडपम में चले रहे AI समिट के दौरान खांग्रेसियों का वो फूहड़ विरोध प्रदर्शन उसी का प्रत्यक्ष उदाहरण था.
जहाँ तक मैं समझता हूँ कि... विगत 10-12 सालों से सत्ता से बाहर रहने के कारण उसका जमीनी कैडर टूट चुका है और अब वो बस सोशल मीडिया बेस्ड पार्टी बन कर रह गई है.
इसीलिए, खांग्रेस की तरफ से कई बार इस तरह के अजीबोगरीब बयान भी सुनने को मिलते हैं कि.... सोशल मीडिया पर राहु जी को मोदी जी से ज्यादा लाइक आते हैं इसीलिए राहु जी को प्रधानमंत्री बनना चाहिए.
खैर... जब कोई पार्टी जमीनी स्तर से हटकर सोशल मीडिया बेस्ड पार्टी हो जाती है तो वो सोशल मीडिया को ही पूरी दुनिया मानने लगती है और वो इस बात को स्वीकार ही नहीं कर पाती है कि सोशल मीडिया से भी बाहर एक दुनिया है जो इससे बहुत अलग है.
तो, हुआ ये कि... आजकल सोशल मीडिया पर हो रहे आक्रामक मोदी विरोध को उसने भारतीय जनता की नब्ज मान लिया और उसे लगा कि यदि हमने किसी तरह से इस अंतरराष्ट्रीय समिट में मोदी जी को अपमानित करवा दिया तो मोदी जी से रूष्ट जनता हमें सर आंखों पर बिठा लेगी.
लेकिन, जैसा कि मैंने पहले भी बताया कि एक विदेशी मूल के व्यक्ति की सबसे बड़ी दिक्कत ये है कि वो न देश की नब्ज पहचान पाता है और उसकी परंपरा.
और, फिर... अगर वो ऐसी पार्टी से आता हो जो जहाँ वामपंथी लोगों एवं टुकड़े-टुकड़े गैंग के सिम्पेथाइजर बहुतायत हों तो करेला नीम पर चढ़ जाता है.
इसीलिए, वे इस बात को समझ ही नहीं पाए कि... सोशल मीडिया मोदी के पक्ष में हो या विरोध में... वो देशद्रोही नहीं है.
अगर वे सोशल मीडिया की पोस्ट पढ़ते तो जानते कि...
चाहे मोदी के पक्षधर हों या विरोधी.. सभी एक सुर से देश की अस्मिता, विकास और सम्मान की ही बात कर रहे हैं.
अंतर सिर्फ ये हैं कि... कुछ लोगों का मानना है कि ये सिर्फ मोदी जी ही दिलवा सकते हैं.
जबकि, कुछ लोगों का मानना है कि ये मोदी जी से नहीं हो पायेगा इसीलिए किसी दूसरे को कमान दे दी जाए.
इस तरह दोनों पक्ष देश की ही बात कर रहे हैं.. अंतर सिर्फ मत की भिन्नता में है.
लेकिन, खांग्रेस और सोरोस गैंग की दिक्कत ये है कि उनके पेड युट्यूबर्स एवं इंफ्लुएंसर अपनी पोस्ट डालते हैं और चलते बनते हैं.
वे किसी की पढ़ते ही नहीं हैं.
जिसके बाद उनके कुछ सब कॉन्ट्रेक्टर (उनसे नीचे जो हैं और वे एजेंडा सेट नहीं करते बल्कि सिर्फ उसे आगे बढ़ाते हैं) उसे अपने अपने तरह से अपनी वाल पर फैलाते हैं.. जिसे पढ़कर भोले-भाले और मासूम लोग उद्देलित हो जाते हैं क्योंकि उनके मन में सिर्फ देश और धर्म चलता रहता है जिसके विचलन से वे परेशान और क्रोधित हो जाते हैं..!
क्योंकि, हर किसी को हर घटना की जानकारी रहना सम्भव नहीं है और वे इंफ्लुएंसर पर विश्वास करते हैं.. इसीलिए, तथ्यों की जानकारी के अभाव में उनका उत्तेजित हो जाना स्वभाविक है.
ऐसी स्थिति में हमलोग मोर्चा संभालते हैं और तथ्यों के तह तक जाकर उसकी पूरी जानकारी देते हैं...
और, ऐसे टूलकिटियों के झूठ को उजागर करते हैं.
कुल मिलाकर सोशल मीडिया पर यही सिनेरियो रहता है जिसे आमलोगों को ये लड़ाई और विवाद का घर सा लगता है.
लेकिन, वास्तविकता है कि देश के लगभग हर लोग (खान्ग्रेसी, वामपंथी और कटेशरों को छोड़कर) देशभक्त हैं और वे अपने देश और धर्म के लिए निस्वार्थ भाव से अपना बेस्ट देना चाहते हैं.
हाँ, इससे इंकार नहीं है कि इसमें कुछ गद्दार और कालनेमि भी हैं जो पैसे लेकर हर बात में सरकार की कमी गिनवाते हैं..
लेकिन, उनकी संख्या बेहद कम है.
बाकी के सभी लोग इनोसेंट हैं और वे सिर्फ और सिर्फ देश के लिये समर्पित हैं.
यही कारण है कि...जब खांग्रेस ने भारत मंडपम में देश का अपमान करने की कोशिश की तो पूरी सोशल मीडिया आपसी मतभेद भूल कर खांग्रेसियों को बांस करने में जुट गई.
इसीलिए, मैं बार बार कहता हूँ कि खांग्रेस चाहे कुछ भी कर ले... वो भारत में अभी 20-25 साल तक सत्ता में नहीं आने वाली है..जबतक कि हमलोगों की जेनरेशन जीवित है और जिन्होंने खांग्रेस का शासन देखा है.
बाकी, लोकतंत्र में सत्ता परिवर्तन तो कभी न कभी होगा ही.
लेकिन, हमलोगों के रहते तो पप्पू इस जन्म में पास नहीं होगा..!!
🚩 #🕉️सनातन धर्म🚩 #🙏गुरु महिमा😇 #🙏गीता ज्ञान🛕 #🙏 देवी दर्शन🌸 #🙏 जय माँ दुर्गा 🙏 जय महाकाल...!!!🚩
कुमार सतीश