
राष्ट्रीय माँ Rama गाय 🌾
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प्रेस विज्ञप्ति
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**जो गौ माता के पक्ष में हैं, वही असली हिन्दू है ।* *
ज्योतिष्पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामिश्रीः अविमुक्तेश्वरानंदः सरस्वती '१००८' जी महाराज
सीतामढी, बिहार
13 सितम्बर 2025
गौ मतदाता संकल्प बिहार यात्रा की शुरुआत आज भगवती जानकी जी की उत्पत्तिस्थल सीतामढी में माता के दिव्य दर्शन पूजन से शुरु हुई । निवासस्थल से मन्दिर तक पदयात्रा करके शंकराचार्य जी महाराज ने इस अभियान की शुरुआत की ।
पुनौराधाम के मन्दिर में दर्शन पूजन किया , फिर मनोज हिसारिया जी के गौधाम में गौ दर्शन किया साथ ही सीतामढी गौशाला परिसर का निरीक्षण कर भगवति जानकी जी के मन्दिर में जाकर पूजन किया आरती की । निर्मला उत्सव पैलेस के हाल में आयोजित सभा में गौभक्तों को सम्बोधित किया । संकल्प दिलाया की आप सब गौ मतदाता बनें और उसी प्रत्याशी को वोट दिया जाए जिसकी प्राथमिकता गाय है । कार्यक्रम में मंच पर उपस्थित रहे सर्वश्री स्वामी श्रीनिधिरव्यानन्द सागर, देवेन्द्र पाण्डेय, अखिलेश ब्रह्मचारी, देवेन्द्र पाण्डेय, शैलेन्द्र योगी, श्री रमाशंकर शास्त्री, राधेश्याम मिश्र, आनंद मोहन सिंह, शिवरतन झा, विमल कुमार पड़ीमल,दिनेश चंद्र द्विवेदी,आलोक कुमार आदि सैकड़ो लोग उपस्थित रहे ।
आज सायं सीतामढी से मधुबनी की ओर प्रस्थान करके वहीं रात्रि-विश्राम करेंगे ।
कल दोपहर में वहीं पर गौ मतदाता संकल्प सभा का आयोजन होगा ।
मीडिया टीम ज्योतिर्मठ
Madhubani News
ABP News : बिहार में कांग्रेस और आरजेडी के मंच से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मां को आपत्तिजनक शब्द कहे जाने का मामला गरमाया हुआ है. इस पूरे विवाद पर ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती की प्रतिक्रिया आई है. उन्होंने इसे भारतीय संस्कृति के खिलाफ बताया है.
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#🪔अनंत चतुर्दशी🌸
माँ - बाप पर जाने का किसी को अधिकार नहीं।
।। राधे राधे।। 🌸
धर्मसम्राट परमाराध्य' परमधर्माधीश उत्तराम्नाय ज्योतिष्पीठाधीश्वर जगद्गुरु शङ्कराचार्य स्वामिश्रीः अविमुक्तेश्वरानन्दः सरस्वती महाराजजी '१००८' को प्रणाम। @1008.guru
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![🗞️नेपाल हिंसा पर बड़ी अपडेट 🔴 - राष्ट्रीय स्वाभिमान 061246 Sep 2025 - Page 1 11 सनातन की आत्मा ही नेपाल की पहचान हैः स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद 14 స011] वाराण सोः ज्योतिष्पीठाधीश्वर वेद ऋग्वद शंकराचार्य स्वामी जगदगुरु महावाक्य प्रज्ञा सरस्वती अविमुक्तेश्वरानंद श्री प्रथमाचार्य मौजूदा ने नेपाल Tst की महाराज ब्रह्मचारी परिस्थितियों ক্ধা लेकर गंभीर o' चिंता करत हुए कहा कि॰ व्यक्त तश्रीविभूषित यदि नेपाल अपनी सनातन जड़ों शचला ೯ಕ್ हुआ, तो उसकी आत्मा ही समाप्त हा जाएगी | उन्होंने कहा कि॰ नेपाल केवल एक पड़ोसी देश नहीं, बल्कि सदियों से सनातन धर्म का हैं, तो यह उनके लिए आत्मघाती है। प्रेम , शांति और भाईचारा ही वह अद्वितीय ध्वजवाहक और हमारी सिद्ध होगा | इतिहास गवाह है अमृत है, जिससे सभी संकटों पर कदम सांस्कृतिक आध्यात्मिक विरासत कि जिन समाजों ने अपनी संस्कृति विजय पाई जा सकती है। का उज्ज्वल रत्न है। महाराजश्री ने भावुक स्वर में कहा का सम्मान किया, वही सुख, शांति महाराजश्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा ক্ি সানেনামী মনন নপাল ক মাথ और समृद्धि को प्राप्त कर सके।" " पशुपतिनाथ को पावन भूमि पर खड़े हैं, क्योंकि हमारे रिश्ते केवल उन्होंने नेपाल के नागरिकों से भौगोलिक नहीं, कोई भी उथल- पुथल केवल नेपाल आह्वान किया किवे किसी भी॰ बल्कि आत्मिक की नहीं, बल्कि पूरे सनातन जगत बाहरी दबाव या आंतरिक मतभेद और आध्यात्मिक भी हैं। उन्होंने की चिंता का विषय है। आज यदि को कि भगवान पशुपतिनाथ धार्मिक और কর अपनी कारण कामना कुछ लोग नेपाल को उसको पहचान नैतिक धरोहर को न त्यागें | सनातन नेपाल को सदा स्थिरता, शांति और ٦ ؟ ले जाना चाहते की गरिमा ही उनकी असली शक्ति और परंपरा समृद्धि का आशीर्वाद देते रहें। राष्ट्रीय स्वाभिमान 061246 Sep 2025 - Page 1 11 सनातन की आत्मा ही नेपाल की पहचान हैः स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद 14 స011] वाराण सोः ज्योतिष्पीठाधीश्वर वेद ऋग्वद शंकराचार्य स्वामी जगदगुरु महावाक्य प्रज्ञा सरस्वती अविमुक्तेश्वरानंद श्री प्रथमाचार्य मौजूदा ने नेपाल Tst की महाराज ब्रह्मचारी परिस्थितियों ক্ধা लेकर गंभीर o' चिंता करत हुए कहा कि॰ व्यक्त तश्रीविभूषित यदि नेपाल अपनी सनातन जड़ों शचला ೯ಕ್ हुआ, तो उसकी आत्मा ही समाप्त हा जाएगी | उन्होंने कहा कि॰ नेपाल केवल एक पड़ोसी देश नहीं, बल्कि सदियों से सनातन धर्म का हैं, तो यह उनके लिए आत्मघाती है। प्रेम , शांति और भाईचारा ही वह अद्वितीय ध्वजवाहक और हमारी सिद्ध होगा | इतिहास गवाह है अमृत है, जिससे सभी संकटों पर कदम सांस्कृतिक आध्यात्मिक विरासत कि जिन समाजों ने अपनी संस्कृति विजय पाई जा सकती है। का उज्ज्वल रत्न है। महाराजश्री ने भावुक स्वर में कहा का सम्मान किया, वही सुख, शांति महाराजश्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा ক্ি সানেনামী মনন নপাল ক মাথ और समृद्धि को प्राप्त कर सके।" " पशुपतिनाथ को पावन भूमि पर खड़े हैं, क्योंकि हमारे रिश्ते केवल उन्होंने नेपाल के नागरिकों से भौगोलिक नहीं, कोई भी उथल- पुथल केवल नेपाल आह्वान किया किवे किसी भी॰ बल्कि आत्मिक की नहीं, बल्कि पूरे सनातन जगत बाहरी दबाव या आंतरिक मतभेद और आध्यात्मिक भी हैं। उन्होंने की चिंता का विषय है। आज यदि को कि भगवान पशुपतिनाथ धार्मिक और কর अपनी कारण कामना कुछ लोग नेपाल को उसको पहचान नैतिक धरोहर को न त्यागें | सनातन नेपाल को सदा स्थिरता, शांति और ٦ ؟ ले जाना चाहते की गरिमा ही उनकी असली शक्ति और परंपरा समृद्धि का आशीर्वाद देते रहें। - 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