#न_जन्मा_न_मरा
हिंदू राजा बीर सिंह बघेल और मुस्लिम राजा बिजली खाँ—दोनों कबीर साहेब के शिष्य थे।
कबीर साहेब ने कहा—जो मिलेगा आधा-आधा बाँट लेना।
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508th God Kabir NirvanDiwas #भ भक्ति भावनाएं
#508वां_GodKabir_निर्वाणदिवस
पांच तत्व का धड़ नहीं मेरा, जानूं ज्ञान अपारा।
कबीर साहेब स्वयं कहते हैं—मैं अविनाशी परमात्मा हूँ।
न मेरा जन्म होता है, न मृत्यु। सबका उद्धार करने ही परमेश्वर कबीर साहेब आए थे।
SatLok Ashram #भगवान
#मगहर_से_सतलोक_गया_कबीरा
कबीर साहेब ने मृत्यु के डर को सदा के लिए मिटा दिया।
जो सशरीर सतलोक गया, वही पूर्ण परमात्मा है।
2Days Left For Nirvan Diwas #🙏गुरु महिमा😇
#मगहर_से_सतलोक_गया_कबीरा
कबीर साहेब किसी एक धर्म के नहीं, पूरे मानव समाज के उद्धारक हैं #भगवान कौन है ।
हिंदू उन्हें देव कहते हैं, मुसलमान पीर—यही कबीर साहेब की महिमा है।
2Days Left For Nirvan Diwas
#SacrificedAll_LostMoksha
बिना गुरु की साधना दिशाहीन होती है।
करौंत लकड़ी काटने का औज़ार था, मोक्ष का साधन नहीं।
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God KabirJi Nirvan Diwas #असली भगवान पृथ्वी पर
#पहचान_अविनाशी_प्रभु_की
मंदिर और मजार—100-100 फुट की दूरी पर आज भी मगहर में मौजूद हैं।
यह धार्मिक सामंजस्य की अनोखी मिसाल है।
—कबीर साहेब का स्पष्ट संदेश।
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5Days Left For Nirvan Diwas #🙏गुरु महिमा😇
#SacrificedAll_LostMoksha
गीता कहती है—
तद्विद्धि प्रणिपातेन…
तत्त्वदर्शी संत के बिना ज्ञान नहीं।
पूर्ण संत की शरण में गए बिना मुक्ति संभव नहीं।
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God KabirJi Nirvan Diwas # # सच्चा -सतगुरु -कौन
#salvation #ganges #maghar #kashi #banaras #varanas
#KabirisGod
#SupremeGod
God is merciful, not cruel.
Suicide can never be a means of salvation.
Give up superstition and embrace philosophy.
People were robbed by intimidating them with the threat of the Karaunt. #🙏गुरु महिमा😇
#GodNightFriday
#MakaraSankranti26
. कबीर साहिब जी भगवान है
पूर्ण परमात्मा कबीर साहिब जी चारों युगों में आए हैं। सृष्टी व वेदों की रचना से पूर्व भी अनामी लोक में मानव सदृश कविर्देव नाम से विद्यमान थे। परमात्मा कबीर साहिब जी ने फिर सतलोक की रचना की, बाद में परब्रह्म, ब्रह्म के लोकों व वेदों की रचना की इसलिए वेदों में कविर्देव का विवरण है।
यजुर्वेद के अध्याय नं. 29 के श्लोक नं. 25 जिस समय पूर्ण परमात्मा प्रकट होता है उस समय सर्व ऋषि व सन्त जन शास्त्र विधि त्याग कर मनमाना आचरण अर्थात् पूजा कर रहे होते हैं। तब अपने तत्वज्ञान का संदेशवाहक बन कर स्वयं ही कबीर प्रभु ही आता है। कबीर परमेश्वर चारों युगों में अपने सत्य ज्ञान का प्रचार करने आते हैं।
सतगुरु पुरुष कबीर हैं, चारों युग प्रवान।
झूठे गुरुवा मर गए, हो गए भूत मसान।।
श्रीमद्भगवद गीता अध्याय 8 का श्लोक 3 में गीता ज्ञान दाता ब्रह्म भगवान ने कहा है कि वह परम अक्षर ‘ब्रह्म‘ है जो जीवात्मा के साथ सदा रहने वाला है। वह परम अक्षर ब्रह्म गीता ज्ञान दाता से अन्य है, वह कबीर परमात्मा हैं।
परमात्मा शिशु रूप में प्रकट होकर लीला करता है। तब उनकी परवरिश कंवारी गायों के दूध से होती है।
ऋग्वेद मंडल 9 सूक्त 1 मंत्र 9 यह लीला कबीर परमेश्वर ही आकर करते हैं।
ऋग्वेद मण्डल 9 सूक्त 96 मंत्र 17 में कहा गया है कि कविर्देव शिशु रूप धारण कर लेता है। लीला करता हुआ बड़ा होता है। कविताओं द्वारा तत्वज्ञान वर्णन करने के कारण कवि की पदवी प्राप्त करता है अर्थात् उसे ऋषि, सन्त व कवि कहने लग जाते हैं, वास्तव में वह पूर्ण परमात्मा कविर् (कबीर साहेब जी) ही है।
पूर्ण परमात्मा कविर्देव (कबीर परमेश्वर) वेदों के ज्ञान से भी पूर्व सतलोक में विद्यमान थे तथा अपना वास्तविक ज्ञान (तत्वज्ञान) देने के लिए चारों युगों में भी स्वयं प्रकट हुए हैं। सतयुग में सतसुकृत नाम से, त्रेतायुग में मुनिन्द्र नाम से, द्वापर युग में करूणामय नाम से तथा कलयुग में वास्तविक कविर्देव (कबीर प्रभु) नाम से प्रकट हुए हैं।
कबीर परमात्मा अन्य रूप धारण करके कभी भी प्रकट होकर अपनी लीला करके अन्तर्ध्यान हो जाते हैं। उस समय लीला करने आए परमेश्वर को प्रभु चाहने वाले श्रद्धालु नहीं पहचान पाते, क्योंकि सर्व महर्षियों व संत कहलाने वालों ने प्रभु को निराकार बताया है। वास्तव में परमात्मा आकार में है। मनुष्य सदृश शरीर युक्त है।
परमेश्वर का शरीर नाड़ियों के योग से बना पांच तत्व का नहीं है। एक नूर तत्व से बना है। पूर्ण परमात्मा जब चाहे यहाँ प्रकट हो जाते हैं वे कभी मां से जन्म नहीं लेते क्योंकि वे सर्व के उत्पत्ति करता हैं।
ऋग्वेद मण्डल 9 सूक्त 1 मंत्र 9
अभी इमं अध्न्या उत श्रीणन्ति धेनवः शिशुम्। सोममिन्द्राय पातवे।।9।।
पूर्ण परमात्मा अमर पुरुष जब लीला करता हुआ बालक रूप धारण करके स्वयं प्रकट होता है उस समय कंवारी गाय अपने आप दूध देती है जिससे उस पूर्ण प्रभु की परवरिश होती है।
ऋग्वेद मण्डल 9 सूक्त 96 मंत्र 17
शिशुम् जज्ञानम् हर्य तम् मृजन्ति शुम्भन्ति वह्निमरूतः गणेन।
कविर्गीर्भि काव्येना कविर् सन्त् सोमः पवित्रम् अत्येति रेभन्।।
विलक्षण मनुष्य के बच्चे के रूप में प्रकट होकर पूर्ण परमात्मा कविर्देव अपने वास्तविक ज्ञानको अपनी कविर्गिभिः अर्थात् कबीर बाणी द्वारा पुण्यात्मा अनुयाइयों को कवि रूप में कविताओं, लोकोक्तियों के द्वारा वर्णन करता है। वह स्वयं सतपुरुष कबीर ही होता है।
कबीर परमात्मा हर युग में आते हैं
ऋग्वेद मण्डल 9 सूक्त 96 मंत्र 18
कविर्देव शिशु रूप धारण कर लेता है। लीला करता हुआ बड़ा होता है। कविताओं द्वारा तत्वज्ञान वर्णन करने के कारण कवि की पदवी प्राप्त करता है अर्थात् उसे कवि कहने लग जाते हैं, वास्तव में वह पूर्ण परमात्मा कविर् (कबीर प्रभु) ही है। परमात्मा कबीर जी सतयुग में सत सुकृत नाम से प्रकट हुए थे। उस समय अपनी एक प्यारी आत्मा सहते जी को अपना शिष्य बनाया ओर अमृत ज्ञान समझाकर सतलोक का वासी बनाया।
त्रेता युग में परमात्मा कबीर मुनींद्र नाम से आए थे उस समय एक लीलामय तरीके से बंके नाम की एक प्यारी आत्मा को अपनी शरण में लिया,सत्य ज्ञान समझाया ओर पार किया। परमेश्वर कबीर साहिब जी चारों युगों में नामांतर करके शिशु रूप में प्रकट होते हैं और एक-एक शिष्य बनाते हैं जिससे कबीर पंथ का प्रचार होता है। सतयुग - सहते जीत्रेता - बंके जी द्वापर - चतुर्भुज जी कलियुग - धर्मदास जी
कलयुग में कबीर परमेश्वर अपने वास्तविक नाम कबीर रूप में काशी नगरी में लहरतारा तालाब में कमल के पुष्प पर अवतरित हुए। कलयुग में निसंतान दंपति नीरू और नीमा ने उनका पालन पोषण किया।
परमेश्वर कबीर जी त्रेतायुग में ऋषि मुनीन्द्र जी के रूप में लीला करने आए तब हनुमान जी से मिले। तथा सतलोक के बारे में बताया हनुमानजी को विश्वास हुआ कि ये परमेश्वर हैं। सत्यलोक सुख का स्थान है। परमेश्वर मुनीन्द्र जी से दीक्षा ली। अपना जीवन धन्य किया। मुक्ति के अधिकारी हुए।
द्वापर युग में कबीर परमेश्वर की दया से पांडवों का अश्वमेध यज्ञ संपन्न हुआ। पांडवों की अश्वमेघ यज्ञ में अनेक ऋषि, महर्षि, मंडलेश्वर उपस्थित थे यहां तक कि भगवान कृष्ण भी उपस्थित थे फिर भी उनका शंख नहीं बजा। कबीर परमेश्वर ने सुदर्शन सुपच वाल्मीकि के रूप में शंख बजाया और पांडवों का यज्ञ संपन्न किया।गरीबदास जी महाराज की वाणी में इसका प्रमाण है
गरीब ~सुपच रुप धरि आईया, सतगुरु पुरुष कबीर।
तीन लोक की मेदनी, सुर नर मुनि जन भीर।।
कबीर साहेब हीं पूर्ण परमात्मा हैं। लगभग एक दर्जन संतो ने इनकी गवाही ठोककर दी है।आएं देखें परमात्मा प्राप्त संतो की वाणी में क्या प्रमाण है।
1. सतगुरु पुरुष कबीर हैं, चारों युग प्रवान।
झूठे गुरुवा मर गए, हो गए भूत मसान।।
-गरीबदास जी
अनंत कोटि ब्रम्हांड में, बंदीछोड़ कहाये।
सो तो पुरष कबीर है, जननी जने न माय।।
-गरीबदास जी
हम सुल्तानी नानक तारे, दादु को उपदेश दिया।
जाति जुलाहा भेद न पाया,कशी मे कबीर हुआ।
-गरीबदास जी
2. और संत सब कूप हैं, केते झरिता नीर।
दादू अगम अपार है, दरिया सत्य कबीर।।
-दादु दयाल जी
जिन मोको निज नाम दिया,सोई सतगुरु हमार।भ
दादु दूसरा कोई नहीं, कबीर सृजनहार।।
-दादु दयाल जी
3. खालक आदम सिरजिआ आलम बडा कबीर॥
काइम दिइम कुदरती सिर पीरा दे पीर॥
सजदे करे खुदाई नू आलम बडा कबीर॥
-नानक जी
यक अर्ज गुफ्तम पेश तोदर कून करतार।
हक्का कबीर करीम तू बेऐब परवरदिगार।।
-नानक जी
नानक नीच कह विचार, धाणक रूप रहा करतार।
-नानक जी
4. वाणी अरबो खरवो, ग्रन्थ कोटी हजार।
करता पुरुष कबीर है, रहै नाभे विचार।।
नाभादास जी
5. साहेब कबीर समर्थ है, आदी अन्त सर्व काल।
ज्ञान गम्य से दे दीया, कहै रैदास दयाल॥
-रविदास जी
6. नौ नाथ चौरसी सिद्धा, इनका अन्धा ज्ञान।
अविचल ज्ञान कबीर का, यो गति विरला जान॥
-गोरखनाथ जी
7. बाजा बाजा रहितका, परा नगरमे शोर।
सतगुरू खसम कबीर है, नजर न आवै और॥
-धर्मदास जी
8.
सन्त अनेक सन्सार मे, सतगुरू सत्य कबीर।
जगजीवन आप कहत है, सुरती निरती के तीर॥
-जगजीवन जी
9. तुम स्वामी मै बाल बुद्धि, भर्म कर्म किये नाश।
कहै रामानन्द निज हमरा दृढ़ विश्वास।।
-रामानन्द जी
10 जपो रे मन साहिब नाम कबीर
एक समय सतगुरू बंशी बजाई काल इन्द्री के तीर
- मुलक दास जी
11. बंदीछोड़ हमारा नामम्, अजर अमर अस्थिर ठामम्।।
-कबीर साहिब
तारण तरण अभय पद दाता, मैं हूँ कबीर अविनाशी।
-कबीर साहिब
कबीर इस संसार को, समझांऊ के बार ।
पूंछ जो पकङे भेड़ की, उतरया चाहे पार ॥
-कबीर साहिब
జ్ఞాన గంగా ##भक्ति भावनाये और ईश्वर आस्था#गुरु महिमा #🙏गुरु की महिमा🙏 #गुरु महिमा भजन संध्या #🙏गुरु की महिमा 🙏
#SupremeGodKabir
श्रीमद्भगवद गीता अध्याय 8 श्लोक 3
परम अक्षर ब्रह्म, गीता ज्ञानदाता से भिन्न है। वही कबीर परमात्मा हैं।
परमात्मा शिशु रूप में प्रकट होते हैं।
ऋग्वेद मंडल 9 सूक्त 1 मंत्र 9 इसका प्रमाण है।
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![भगवान - न जन्मा, नमरा महीना माघ शुक्ल पक्ष तिथि एकादशी वि॰ स. १५७५, सन् १५१८ को परमेश्वर कबीर साहेब जी मगहर से सशरीर अपने अविनाशी सतलोक गए थे जिसका प्रमाण आज भी मगहर (वर्तमान धाम जिला कबीर नगर) में विद्यमान है। यही प्रमाण ऋग्वेद मंडल 9 सूक्त ९३ मंत्र 2 देता है कि परमात्मा सशरीर प्रकट होता है और सशरीर अपने निज लोक को चला जाता है। गरीब, ` काया काशी मन मगहर, दौहूं के मध्य कबीर। काशी तज मगहर गया, पाया नहीं शरीर।। [ ऋग्वेद मण्डल 9 सूक्त ९३ मंत्र २ ] शिशुः सम् मातृभिः न वावशानः वृषा दधन्वे पुरुवरः अरिः मर्यः न योषाम् अभि निष्कृतम् यन्त् सम् गच्छते कलश उस्त्रियाभिः Sant Rampal Ji YOUTUBE fee Buuk Maharaj 7496801825 CHANNEL CS1miRpa AMnll ral ' न जन्मा, नमरा महीना माघ शुक्ल पक्ष तिथि एकादशी वि॰ स. १५७५, सन् १५१८ को परमेश्वर कबीर साहेब जी मगहर से सशरीर अपने अविनाशी सतलोक गए थे जिसका प्रमाण आज भी मगहर (वर्तमान धाम जिला कबीर नगर) में विद्यमान है। यही प्रमाण ऋग्वेद मंडल 9 सूक्त ९३ मंत्र 2 देता है कि परमात्मा सशरीर प्रकट होता है और सशरीर अपने निज लोक को चला जाता है। गरीब, ` काया काशी मन मगहर, दौहूं के मध्य कबीर। काशी तज मगहर गया, पाया नहीं शरीर।। [ ऋग्वेद मण्डल 9 सूक्त ९३ मंत्र २ ] शिशुः सम् मातृभिः न वावशानः वृषा दधन्वे पुरुवरः अरिः मर्यः न योषाम् अभि निष्कृतम् यन्त् सम् गच्छते कलश उस्त्रियाभिः Sant Rampal Ji YOUTUBE fee Buuk Maharaj 7496801825 CHANNEL CS1miRpa AMnll ral ' - ShareChat भगवान - न जन्मा, नमरा महीना माघ शुक्ल पक्ष तिथि एकादशी वि॰ स. १५७५, सन् १५१८ को परमेश्वर कबीर साहेब जी मगहर से सशरीर अपने अविनाशी सतलोक गए थे जिसका प्रमाण आज भी मगहर (वर्तमान धाम जिला कबीर नगर) में विद्यमान है। यही प्रमाण ऋग्वेद मंडल 9 सूक्त ९३ मंत्र 2 देता है कि परमात्मा सशरीर प्रकट होता है और सशरीर अपने निज लोक को चला जाता है। गरीब, ` काया काशी मन मगहर, दौहूं के मध्य कबीर। काशी तज मगहर गया, पाया नहीं शरीर।। [ ऋग्वेद मण्डल 9 सूक्त ९३ मंत्र २ ] शिशुः सम् मातृभिः न वावशानः वृषा दधन्वे पुरुवरः अरिः मर्यः न योषाम् अभि निष्कृतम् यन्त् सम् गच्छते कलश उस्त्रियाभिः Sant Rampal Ji YOUTUBE fee Buuk Maharaj 7496801825 CHANNEL CS1miRpa AMnll ral ' न जन्मा, नमरा महीना माघ शुक्ल पक्ष तिथि एकादशी वि॰ स. १५७५, सन् १५१८ को परमेश्वर कबीर साहेब जी मगहर से सशरीर अपने अविनाशी सतलोक गए थे जिसका प्रमाण आज भी मगहर (वर्तमान धाम जिला कबीर नगर) में विद्यमान है। यही प्रमाण ऋग्वेद मंडल 9 सूक्त ९३ मंत्र 2 देता है कि परमात्मा सशरीर प्रकट होता है और सशरीर अपने निज लोक को चला जाता है। गरीब, ` काया काशी मन मगहर, दौहूं के मध्य कबीर। काशी तज मगहर गया, पाया नहीं शरीर।। [ ऋग्वेद मण्डल 9 सूक्त ९३ मंत्र २ ] शिशुः सम् मातृभिः न वावशानः वृषा दधन्वे पुरुवरः अरिः मर्यः न योषाम् अभि निष्कृतम् यन्त् सम् गच्छते कलश उस्त्रियाभिः Sant Rampal Ji YOUTUBE fee Buuk Maharaj 7496801825 CHANNEL CS1miRpa AMnll ral ' - ShareChat](https://cdn4.sharechat.com/bd5223f_s1w/compressed_gm_40_img_861591_1c434746_1769620859067_sc.jpg?tenant=sc&referrer=user-profile-service%2FrequestType50&f=067_sc.jpg)







