Hiranand Thadani
ShareChat
click to see wallet page
@hiranand2576
hiranand2576
Hiranand Thadani
@hiranand2576
मुझे ShareChat पर फॉलो करें!
#🌸 जय श्री कृष्ण😇
🌸 जय श्री कृष्ण😇 - Hrb & 910146[ से कुछ 446[[ नहीं करनी चाहिए। अरे! जिस भक्ि के बल से মুন্দিন का साम्राज्य मिल सकता है उससे संसार की तुच्छ सामग्री मांगकर भक्ि को दूषित  करते हो? নযী Hrb & 910146[ से कुछ 446[[ नहीं करनी चाहिए। अरे! जिस भक्ि के बल से মুন্দিন का साम्राज्य मिल सकता है उससे संसार की तुच्छ सामग्री मांगकर भक्ि को दूषित  करते हो? নযী - ShareChat
#🙏 सतनाम वाहेगुरु
🙏 सतनाम वाहेगुरु - वक्त की अनमोल घड़ी (The Value of Time) वक्त रेत की तरह फिसल रहा है! ?& खोई हुई दौलत वापस मिल सकती है, पर बीता वक्त नहीं। मुख्य भाग १. जैसे घड़े के छेद से पानी टुपक ्टुपक कर निकलता है॰ वैसे ही साँसे कम हाे रही हैं। २. हम अपना कीमती समय बर्बाद कर रहे हैं। ३. वक्त बहुत अनमोल है, इसे भजन सिमरन में लगाओ। वक्त की कद्र करो , इससे पहले कि बहुत देर हो जाए। Spath Ok Shabad वक्त की अनमोल घड़ी (The Value of Time) वक्त रेत की तरह फिसल रहा है! ?& खोई हुई दौलत वापस मिल सकती है, पर बीता वक्त नहीं। मुख्य भाग १. जैसे घड़े के छेद से पानी टुपक ्टुपक कर निकलता है॰ वैसे ही साँसे कम हाे रही हैं। २. हम अपना कीमती समय बर्बाद कर रहे हैं। ३. वक्त बहुत अनमोल है, इसे भजन सिमरन में लगाओ। वक्त की कद्र करो , इससे पहले कि बहुत देर हो जाए। Spath Ok Shabad - ShareChat
#🙏 सतनाम वाहेगुरु
🙏 सतनाम वाहेगुरु - अंदर गूँजता अखंड कीर्तन राग सुना है जो बिना साजों के बज रहा है? क्या आपने वह दसवें द्वार में अनहद शब्द 1 की ध्वनि निरंतर हो रही है। यह संगीत ही आत्मा का 2 असली भोजन और सुख है। ३ डेस्े सुनने से मन के सारे विकार शांत हो जाते हैं। रूहानी संगीत से जुड़ो इस Spath Of और जन्म मरण से छूटो। Shabad अंदर गूँजता अखंड कीर्तन राग सुना है जो बिना साजों के बज रहा है? क्या आपने वह दसवें द्वार में अनहद शब्द 1 की ध्वनि निरंतर हो रही है। यह संगीत ही आत्मा का 2 असली भोजन और सुख है। ३ डेस्े सुनने से मन के सारे विकार शांत हो जाते हैं। रूहानी संगीत से जुड़ो इस Spath Of और जन्म मरण से छूटो। Shabad - ShareChat
#shree hit premanand ji Maharaj
shree hit premanand ji Maharaj - श्री राधावल्लभो जयति ।। मई 03 श्री हित राधा केलि कुँज (वृदावन) नाम जप और संत समागम पाप की प्रवृत्ति का नाश कर देते हैं। श्री हित प्रेमानंद गोविन्द शरण जी महाराज श्री राधावल्लभो जयति ।। मई 03 श्री हित राधा केलि कुँज (वृदावन) नाम जप और संत समागम पाप की प्रवृत्ति का नाश कर देते हैं। श्री हित प्रेमानंद गोविन्द शरण जी महाराज - ShareChat
#shree hit premanand ji Maharaj
shree hit premanand ji Maharaj - श्री राधावल्लभो जयति ।। मई 04 श्री हित राधा केलि कुँज (वृदावन ) सुख आपकी मान्यता में है, किसी पदार्थ में नहीं। श्री हित प्रेमानंद गोविन्द शरण जी महाराज श्री राधावल्लभो जयति ।। मई 04 श्री हित राधा केलि कुँज (वृदावन ) सुख आपकी मान्यता में है, किसी पदार्थ में नहीं। श्री हित प्रेमानंद गोविन्द शरण जी महाराज - ShareChat
#shree hit premanand ji Maharaj
shree hit premanand ji Maharaj - श्री राधावल्लभो जयति ।। 5 05 506 श्री हित राधा केलि कुँज (वृदावन ) धर्म से चलने নালে কা विपत्ति में भी सकारात्मक चिंतन होता है। श्री हित प्रेमानंद गोविन्द शरण जी महाराज श्री राधावल्लभो जयति ।। 5 05 506 श्री हित राधा केलि कुँज (वृदावन ) धर्म से चलने নালে কা विपत्ति में भी सकारात्मक चिंतन होता है। श्री हित प्रेमानंद गोविन्द शरण जी महाराज - ShareChat
#shree premanand maharaj ji🙏
shree premanand maharaj ji🙏 - श्री राधावल्लभो जयति ।। #೯ 06 श्री हित राधा केलि कुँज (वृदावन) 43 भाग्यशाली हैं ஈகி प्रभु के नाम में श्रद्धा at7s81 श्री हित प्रेमानंद गोविन्द शरण जी महाराज श्री राधावल्लभो जयति ।। #೯ 06 श्री हित राधा केलि कुँज (वृदावन) 43 भाग्यशाली हैं ஈகி प्रभु के नाम में श्रद्धा at7s81 श्री हित प्रेमानंद गोविन्द शरण जी महाराज - ShareChat
#🙏 सतनाम वाहेगुरु
🙏 सतनाम वाहेगुरु - आत्मा का आईना खुद की पहचानः परमात्मा की पहचान आप खुद को नहीं जानते , ডন নক आप परमात्मा को कैसे जान पाएंगे ? आत्मा शरीर और मन से अलग एक दिव्य और अमर থাকি ট1 रूहानी अभ्यास द्वारा आत्मा को मन के पंजे से आजाद करना ही असली काम है। दसवें द्वार में पहुँचकर ही आत्मा को अपने निर्मल स्वरूप का बोध होता है। निष्कर्षः PthOf अपनी आत्मा को पहचानो , Glbud यही परमात्मा से मिलने का पहला कदम है। आत्मा का आईना खुद की पहचानः परमात्मा की पहचान आप खुद को नहीं जानते , ডন নক आप परमात्मा को कैसे जान पाएंगे ? आत्मा शरीर और मन से अलग एक दिव्य और अमर থাকি ট1 रूहानी अभ्यास द्वारा आत्मा को मन के पंजे से आजाद करना ही असली काम है। दसवें द्वार में पहुँचकर ही आत्मा को अपने निर्मल स्वरूप का बोध होता है। निष्कर्षः PthOf अपनी आत्मा को पहचानो , Glbud यही परमात्मा से मिलने का पहला कदम है। - ShareChat