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🤲ला इलाहा इल्लल्लाह मुहम्मदुर् रसूलल्लाह🤲
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☪इस्लामी स्टेटस📝 - ज़ुल हिज्जा के १० दिनः सुन्नत और नेक आमाल लिए  साल के सबसे बेहतरीन दिन हैं। বুল ম্িসা ক १० दिन इबादत के शुरूआती सही हदीस के मुताबिक इन दिनों के खास आमाल ये हैंः शुरू के 9 दिनों के रोज़ेः सुनन अबू दाऊद (२४३७ ) और नसाई (२४१७) के 1 मुताबिक, अल्लाह के रसूल %४ जुल हिज्जा के शुरू के 9 दिनों में रोज़ा रखा करते थे। अराफ़ा का रोज़ाः 9 जुल हिज्जा (हज के दिन) का रोज़ा सबसे अहम है।  2 सही मुस्लिम (११६२ ) के मुताबिक, इस एक दिन के रोज़े से पिछले एक साल और अगले एक साल के गुनाह माफ़ हो जाते हैं। (यह उन लोगों के लिए है जो हज पर नहीं हैं) । नेक कामों की कसरतः सही (९६९ ) के मुताबिक, इन १० दिनों में 3 बुखारी  किए गए नेक काम अल्लाह को साल के किसी भी और दिन के ज़्यादा पसंद हैं। সুকানল  ज़िक्र ओ-अज़कारः मुसनद अहमद ( ५४४४ ) की सही रिवायत के সুনানিক, 4 (ला इलाहा इल्लल्लाह ) , तकबीर ( अल्लाहु अकबर ) इन दिनों में ज़्यादा से ज़्यादा तहलील  और तहमीद ( अल्हम्दुलिल्लाह  पढ़ना चाहिए। बाल और नाखू़न ना काटनाः सही मुस्लिम (१९७७ ) के मुताबिक, जो शख्स़ " 5 करने का इरादा रखता हो, उसे ज़ुल हिज्जा का चाँद दिखने से लेकर  कुर्बानी  होने तक अपने बाल और नाखू़न नहीं काटने चाहिए। ক্তুননীি  खास नोटः इन मुकद्दस दिनों में अपनी इबादतों का दायरा बढ़ाएं। ज़्यादा से ज़्यादा क़ुरआन शरीफ़ की तिलावत करें, अपनी हैसियत के सदका व खैरात करें और हर वक़्त मुताबिक इस्ल्चम अल्लाह के ज़िक्र में मशगूल रहें। कोशिश करें कि इन बरकत वाले दिनों का कोई भी लम्हा बेकार न जाए। ज़ुल हिज्जा के १० दिनः सुन्नत और नेक आमाल लिए  साल के सबसे बेहतरीन दिन हैं। বুল ম্িসা ক १० दिन इबादत के शुरूआती सही हदीस के मुताबिक इन दिनों के खास आमाल ये हैंः शुरू के 9 दिनों के रोज़ेः सुनन अबू दाऊद (२४३७ ) और नसाई (२४१७) के 1 मुताबिक, अल्लाह के रसूल %४ जुल हिज्जा के शुरू के 9 दिनों में रोज़ा रखा करते थे। अराफ़ा का रोज़ाः 9 जुल हिज्जा (हज के दिन) का रोज़ा सबसे अहम है।  2 सही मुस्लिम (११६२ ) के मुताबिक, इस एक दिन के रोज़े से पिछले एक साल और अगले एक साल के गुनाह माफ़ हो जाते हैं। (यह उन लोगों के लिए है जो हज पर नहीं हैं) । नेक कामों की कसरतः सही (९६९ ) के मुताबिक, इन १० दिनों में 3 बुखारी  किए गए नेक काम अल्लाह को साल के किसी भी और दिन के ज़्यादा पसंद हैं। সুকানল  ज़िक्र ओ-अज़कारः मुसनद अहमद ( ५४४४ ) की सही रिवायत के সুনানিক, 4 (ला इलाहा इल्लल्लाह ) , तकबीर ( अल्लाहु अकबर ) इन दिनों में ज़्यादा से ज़्यादा तहलील  और तहमीद ( अल्हम्दुलिल्लाह  पढ़ना चाहिए। बाल और नाखू़न ना काटनाः सही मुस्लिम (१९७७ ) के मुताबिक, जो शख्स़ " 5 करने का इरादा रखता हो, उसे ज़ुल हिज्जा का चाँद दिखने से लेकर  कुर्बानी  होने तक अपने बाल और नाखू़न नहीं काटने चाहिए। ক্তুননীি  खास नोटः इन मुकद्दस दिनों में अपनी इबादतों का दायरा बढ़ाएं। ज़्यादा से ज़्यादा क़ुरआन शरीफ़ की तिलावत करें, अपनी हैसियत के सदका व खैरात करें और हर वक़्त मुताबिक इस्ल्चम अल्लाह के ज़िक्र में मशगूल रहें। कोशिश करें कि इन बरकत वाले दिनों का कोई भी लम्हा बेकार न जाए। - ShareChat