Jagmohan  Nagar
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#❤️जीवन की सीख
❤️जीवन की सीख - शराब मज़ा नहीं देती. ज़िंदगी छीन लेती है! शराब पीने से लिवर खराब होता है। 1 २. शराब पीने से रिश्ते खराब होते हैं। ३. शराब पीने से समाज में इज़्ज़त चली जाती है। ४. शराब पीने से पैसों का नुकसान होता है। ५. शराब पीने से मानसिक संतुलन बिगड़ जाता है। ६. यह मज़ा नहीं , धीरे-्धीरे बर्बादी है। ७ . अपने उस दोस्त को शेयर करो जो शराब पीता है शराब मज़ा नहीं देती. ज़िंदगी छीन लेती है! शराब पीने से लिवर खराब होता है। 1 २. शराब पीने से रिश्ते खराब होते हैं। ३. शराब पीने से समाज में इज़्ज़त चली जाती है। ४. शराब पीने से पैसों का नुकसान होता है। ५. शराब पीने से मानसिक संतुलन बिगड़ जाता है। ६. यह मज़ा नहीं , धीरे-्धीरे बर्बादी है। ७ . अपने उस दोस्त को शेयर करो जो शराब पीता है - ShareChat
#❤️Love You ज़िंदगी ❤️
❤️Love You ज़िंदगी ❤️ - सुविचार परिवार को मालिक बनकर नहीं बल्कि माली बनकर संभालो जो ध्यान तो सब का रखता है पर अधिकार किसी पर नहीं जताता Jagmohan Nagar karn kandere सुविचार परिवार को मालिक बनकर नहीं बल्कि माली बनकर संभालो जो ध्यान तो सब का रखता है पर अधिकार किसी पर नहीं जताता Jagmohan Nagar karn kandere - ShareChat
#❤️Love You ज़िंदगी ❤️
❤️Love You ज़िंदगी ❤️ - ۃld মন ম आसु होनी चाहिए নষীন নবল যা না নল @f जरूर _ ভ্রবলনা& ۃld মন ম आसु होनी चाहिए নষীন নবল যা না নল @f जरूर _ ভ্রবলনা& - ShareChat
#🙏गुरु महिमा😇
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#😇गुरुवार भक्ति स्पेशल🌟
😇गुरुवार भक्ति स्पेशल🌟 - 33 3 महाशिवरात्रि २०२६ शिव आराधना , व्रत और जागरण की महान रात्रि महाशिवरात्रि क्यों मनाई जाती हे२ महाशिवरात्रि २०२६ तिथि और समय शिव-पार्वती विवाहः इसी रात्रि भगवान शिव और पर्व तिथिः १५ फरवरी २०२६, रविवार "9ಞ माता पार्वती का दिव्य विवाह हुआ।  चतुर्दशी तिथि प्रारंभः १५ फरवरी ~ शाम ०५:०४ वजे ज्योतिर्लिग प्राकट्यः शिव पुराण के अनुसार, भगवान चतुर्दशी तिथि समाप्तः १६ फरवरी m 05.34 8 शिव अग्नि स्तंभ (ज्योतिलिँग) के रूप मे प्रकट हुए।  विशेष कारणः भगवान शिव की पूजा में निशीथ  शिव तांडवः सृजन , संरक्षण और सहार के प्रतीठ काल' (धी रात) महत्वपूर्ण, इसलिए मुख्य व्रत और आनंद तांडवका विधान।  पूजन १५ फरवरी को ही किया जाएगा।  वैज्ञानिक महत्वः इस रात्रि पृथ्वी और चंद्रमा की स्थिति ऐसी होती हे कि मानव शरीर की ऊर्जा  स्वतः ऊपर की ओर प्रवाहित होती है, जिससे ध्यान और जागरण विशेप फलदायी होते हे। पूजा विधि और आवश्यक सामग्री महाशिवरात्रि पूजा विधि अभिषेक सामग्रीः गंगाजल, कच्चा दूध, दही, शुद्ध घी॰ शहद शक्कर (पंचामृत) धारण करें (सफेद  प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्न अर्पण सामग्रीः वेलपत्र (खंडित न हो) धतूरा आक  लाल वस्त्र शेष्ठ ) ককুল भस्म सफेद चदन अक्षत जनेऊ और शिवलिंग पर पहले शुद्ध जल अर्पित करें फिर সাল पंचामृत से अभिषेक करे दीप रपूर  अन्य सामग्रीः धूप  " ३० नमः शिवाय " मंत्र का जाप करते हुए बेलपत्र ऋतुफल (विशेपकर वेर), पान, सुपाररी ओर मिठाई  व अन्य सामग्री चढाए धूप-दीप से आरती करें ओर दिनभर शिव मंत्रों  का मानसिक जप करते रहे बत के नियम वत समापन (पारण) विधि सात्विम आहारः फल सेव केला, कुट्रूसिघाड़े का  मूंगफली  आटा, सादुदाना  पारण समयः १६ फरवरी २०२६, सूर्योदय के वाट गर्जितः प्याज , लहसुन अनाज ओर साधारण नमक  विधिः पारण से पहले स्नान करें पुनः शिव पूजा  ।केवल सेंधा नमक प्रयोग करे ओर दान-पुण्य करें फिर सात्विक भोजन सेव॰ रात्रि जागरणः पूरी रात भजन, कीर्तन या ध्यान पूर्ण करे अत्यंत फलदायी  महाशिवरात्रि केवल व्रत नहीं, आत्मा को शिव से जोडने की रात्रि है 0 33 3 महाशिवरात्रि २०२६ शिव आराधना , व्रत और जागरण की महान रात्रि महाशिवरात्रि क्यों मनाई जाती हे२ महाशिवरात्रि २०२६ तिथि और समय शिव-पार्वती विवाहः इसी रात्रि भगवान शिव और पर्व तिथिः १५ फरवरी २०२६, रविवार "9ಞ माता पार्वती का दिव्य विवाह हुआ।  चतुर्दशी तिथि प्रारंभः १५ फरवरी ~ शाम ०५:०४ वजे ज्योतिर्लिग प्राकट्यः शिव पुराण के अनुसार, भगवान चतुर्दशी तिथि समाप्तः १६ फरवरी m 05.34 8 शिव अग्नि स्तंभ (ज्योतिलिँग) के रूप मे प्रकट हुए।  विशेष कारणः भगवान शिव की पूजा में निशीथ  शिव तांडवः सृजन , संरक्षण और सहार के प्रतीठ काल' (धी रात) महत्वपूर्ण, इसलिए मुख्य व्रत और आनंद तांडवका विधान।  पूजन १५ फरवरी को ही किया जाएगा।  वैज्ञानिक महत्वः इस रात्रि पृथ्वी और चंद्रमा की स्थिति ऐसी होती हे कि मानव शरीर की ऊर्जा  स्वतः ऊपर की ओर प्रवाहित होती है, जिससे ध्यान और जागरण विशेप फलदायी होते हे। पूजा विधि और आवश्यक सामग्री महाशिवरात्रि पूजा विधि अभिषेक सामग्रीः गंगाजल, कच्चा दूध, दही, शुद्ध घी॰ शहद शक्कर (पंचामृत) धारण करें (सफेद  प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्न अर्पण सामग्रीः वेलपत्र (खंडित न हो) धतूरा आक  लाल वस्त्र शेष्ठ ) ককুল भस्म सफेद चदन अक्षत जनेऊ और शिवलिंग पर पहले शुद्ध जल अर्पित करें फिर সাল पंचामृत से अभिषेक करे दीप रपूर  अन्य सामग्रीः धूप  " ३० नमः शिवाय " मंत्र का जाप करते हुए बेलपत्र ऋतुफल (विशेपकर वेर), पान, सुपाररी ओर मिठाई  व अन्य सामग्री चढाए धूप-दीप से आरती करें ओर दिनभर शिव मंत्रों  का मानसिक जप करते रहे बत के नियम वत समापन (पारण) विधि सात्विम आहारः फल सेव केला, कुट्रूसिघाड़े का  मूंगफली  आटा, सादुदाना  पारण समयः १६ फरवरी २०२६, सूर्योदय के वाट गर्जितः प्याज , लहसुन अनाज ओर साधारण नमक  विधिः पारण से पहले स्नान करें पुनः शिव पूजा  ।केवल सेंधा नमक प्रयोग करे ओर दान-पुण्य करें फिर सात्विक भोजन सेव॰ रात्रि जागरणः पूरी रात भजन, कीर्तन या ध्यान पूर्ण करे अत्यंत फलदायी  महाशिवरात्रि केवल व्रत नहीं, आत्मा को शिव से जोडने की रात्रि है 0 - ShareChat
#😇गुरुवार भक्ति स्पेशल🌟
😇गुरुवार भक्ति स्पेशल🌟 - महाशिवरात्रि पर्व 20261 ~ महाशिवरात्रि पर्व १५ फरवरी २०२६ 35 दिन रविवार चतुर्दशी तिथि तिथि समय १५ फरवरी २०२६, शाम ५:०४ बजे से प्रारंभ १६ फरवरी २०२६, शाम ५:३४ बजे तक সসাদ १६ फरवरी २०२६, शाम ५३३४ बजे तक समाप्त महाशिवरात्रि पूजा के चारों पहर 39 ? সথস সময থযাম 6:11 নতী মী ९:२३ बजे तक रात २.द्वितीय प्रहर হান 9:23 নতী ম 12:35 নতী লব্ধ ३.तुतीय  6 रात १२ ३५ बजे से ३ः४७ बजे तक ४. चतुर्थ प्रहर सुबह ३:४७ बजे से ६:५९ बजे तक निशिता काल (अति शुभ समय) रात १२०९ बजे से १:०१ बजे तक में भगवान शिव की पूजा महाशिवरात्रि की रात चार प्रहरों रुद्राभिषेक करने से विशेष पुण्य फल प्राप्त होता है। महाशिवरात्रि पर्व 20261 ~ महाशिवरात्रि पर्व १५ फरवरी २०२६ 35 दिन रविवार चतुर्दशी तिथि तिथि समय १५ फरवरी २०२६, शाम ५:०४ बजे से प्रारंभ १६ फरवरी २०२६, शाम ५:३४ बजे तक সসাদ १६ फरवरी २०२६, शाम ५३३४ बजे तक समाप्त महाशिवरात्रि पूजा के चारों पहर 39 ? সথস সময থযাম 6:11 নতী মী ९:२३ बजे तक रात २.द्वितीय प्रहर হান 9:23 নতী ম 12:35 নতী লব্ধ ३.तुतीय  6 रात १२ ३५ बजे से ३ः४७ बजे तक ४. चतुर्थ प्रहर सुबह ३:४७ बजे से ६:५९ बजे तक निशिता काल (अति शुभ समय) रात १२०९ बजे से १:०१ बजे तक में भगवान शिव की पूजा महाशिवरात्रि की रात चार प्रहरों रुद्राभिषेक करने से विशेष पुण्य फल प्राप्त होता है। - ShareChat
#😇गुरुवार भक्ति स्पेशल🌟
😇गुरुवार भक्ति स्पेशल🌟 - झूला जितना पीछे जाता है ठीक उसी के बराबर उतना ही आगे भी आता 8 तरह सुख और 5 दुःख दोनों ही जीवन में बराबर आते और जाते हैं। जीवन का झूला अगर पीछे जाए तो डरिए मत वह आगे भी आएगा ಔನತೊಳುಟಟುಟ झूला जितना पीछे जाता है ठीक उसी के बराबर उतना ही आगे भी आता 8 तरह सुख और 5 दुःख दोनों ही जीवन में बराबर आते और जाते हैं। जीवन का झूला अगर पीछे जाए तो डरिए मत वह आगे भी आएगा ಔನತೊಳುಟಟುಟ - ShareChat
#🙏चारधाम यात्रा🛕
🙏चारधाम यात्रा🛕 - iSchool24 iSchool24 वृंदावन यात्रा गाइडः मथुरा जंक्शन से प्रभु श्रीकृष्ण की लीला स्थली के एक सम्पूर्ण यात्रा मार्ग दर्शन iSchoo/24 [ iSchool24 मथुरा जंक्शन वृंदावन प्रवेश iSchool24 १. श्री बांके बिहारी मंदिरः मुख्य दर्शन " भगवान कृष्ण के बाल रूप की मनमोहक छवि। दूरीः वृंदावन प्रवेश से ~२ किमी।  इ-रिक्शा या ऑटो द्वारा १० १5 मिनट।  बांके बिहारी मंदिर २. श्री राधावल्लभ मंदिरः प्रेम और भक्ति का केंद्र। राधा और कृष्ण की युगल सेवा।  दूरीः बांके बिहारी मंदिर से ~१ किमी | - रिक्शा या पैदल ५-१ 0 मिनट। श्री राधावल्लभ मंदिर iSchool24 ३. इस्कॉन मंदिरः वैश्विक कृष्ण भक्ति।  आधुनिक और भव्य मंदिर, कीर्तन और प्रसाद। दूरीः राधावल्लभ मंदिर से ~३ किमी। ऑटो द्वारा १५ २० मिनट। বলৈনূম  इस्कॉन मंदिर న  iSchool24 ४. प्रेम मंदिरः भव्यता और लीला दर्शन। शाम को अद्भुत प्रकाश सज्जा और कृष्ण लीला की झांकियां। दूरीः इस्कॉन मंदिर से ~२ किमी। 0u0ल ऑटो या ई-रिक्शा द्वारा १० १५ मिनट। Ruuicuas प्रेम मंदिर ५. गोविंद देव जी मंदिरः ऐतिहासिक राजा मानसिंह द्वारा निर्मित लाल बलुआ 664| पत्थर का विशाल मंदिर। दूरीः प्रेम मंदिर से ~४ किमी। ऑटो द्वारा २० २५ मिनट| गोविंद देव जी मंदिर iSchool24 मह्त्वपूर्ण सुझावः यात्रा के लिए ऑटो या ई-रिक्शा का उपयोग करें। दूरियां अनुमानित हैं, ट्रैफिक के अनुसार समय मंदिरों के खुलने और बंद होने के समय का बदल सकता है। 3 { {ು iSchool24 iSchool24 वृंदावन यात्रा गाइडः मथुरा जंक्शन से प्रभु श्रीकृष्ण की लीला स्थली के एक सम्पूर्ण यात्रा मार्ग दर्शन iSchoo/24 [ iSchool24 मथुरा जंक्शन वृंदावन प्रवेश iSchool24 १. श्री बांके बिहारी मंदिरः मुख्य दर्शन " भगवान कृष्ण के बाल रूप की मनमोहक छवि। दूरीः वृंदावन प्रवेश से ~२ किमी।  इ-रिक्शा या ऑटो द्वारा १० १5 मिनट।  बांके बिहारी मंदिर २. श्री राधावल्लभ मंदिरः प्रेम और भक्ति का केंद्र। राधा और कृष्ण की युगल सेवा।  दूरीः बांके बिहारी मंदिर से ~१ किमी | - रिक्शा या पैदल ५-१ 0 मिनट। श्री राधावल्लभ मंदिर iSchool24 ३. इस्कॉन मंदिरः वैश्विक कृष्ण भक्ति।  आधुनिक और भव्य मंदिर, कीर्तन और प्रसाद। दूरीः राधावल्लभ मंदिर से ~३ किमी। ऑटो द्वारा १५ २० मिनट। বলৈনূম  इस्कॉन मंदिर న  iSchool24 ४. प्रेम मंदिरः भव्यता और लीला दर्शन। शाम को अद्भुत प्रकाश सज्जा और कृष्ण लीला की झांकियां। दूरीः इस्कॉन मंदिर से ~२ किमी। 0u0ल ऑटो या ई-रिक्शा द्वारा १० १५ मिनट। Ruuicuas प्रेम मंदिर ५. गोविंद देव जी मंदिरः ऐतिहासिक राजा मानसिंह द्वारा निर्मित लाल बलुआ 664| पत्थर का विशाल मंदिर। दूरीः प्रेम मंदिर से ~४ किमी। ऑटो द्वारा २० २५ मिनट| गोविंद देव जी मंदिर iSchool24 मह्त्वपूर्ण सुझावः यात्रा के लिए ऑटो या ई-रिक्शा का उपयोग करें। दूरियां अनुमानित हैं, ट्रैफिक के अनुसार समय मंदिरों के खुलने और बंद होने के समय का बदल सकता है। 3 { {ು - ShareChat
#👏भगवान विष्णु की अद्भुत लीला😇
👏भगवान विष्णु की अद्भुत लीला😇 - ShareChat
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#🙏शुभ मंगलवार🌸
🙏शुभ मंगलवार🌸 - आपके कर्म आपकी प्रार्थना हैँ, उन्हें शुद्ध रखें। Radhe Radhe आपके कर्म आपकी प्रार्थना हैँ, उन्हें शुद्ध रखें। Radhe Radhe - ShareChat