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#❤️Love You ज़िंदगी ❤️
❤️Love You ज़िंदगी ❤️ - मा कहती थी मेरी अहमियत Ink By शादी के बाद समझ आएगी॰ Slveyaa में हॅस देती थी हर बार {/ सोचती थी "माँ भी ना, बस यूँ ही समझाती हे॰" पर आज থালী # खुद की जव खाना परोसते वक्त कोई आवाज नहीं आती और ले ले, कम खा रही है॰ बुखार में भी॰ जव खुद ही पानी पीना पड़ता है  कोई माथा छूकर ये नहीं कहता  "तुझे कुछ हुआ तो नहीं ?  तब सभझ आता हे माँ सिर्फ एक रिश्ता नही एक आदत होती हे जो जब तक साथ होती हे हम उसकी कद्र नहीं करते और हरछीटीह चीज़ज़ती है inkbyshreyaa वही याद आती हे आज सच में मों कीवो बात याद आ रही हे मेरी अहमियत शादी के आएगी " बाद समड औरहाँ मा॰ तेरी हर बात सच लग रही हेः आज मा कहती थी मेरी अहमियत Ink By शादी के बाद समझ आएगी॰ Slveyaa में हॅस देती थी हर बार {/ सोचती थी "माँ भी ना, बस यूँ ही समझाती हे॰" पर आज থালী # खुद की जव खाना परोसते वक्त कोई आवाज नहीं आती और ले ले, कम खा रही है॰ बुखार में भी॰ जव खुद ही पानी पीना पड़ता है  कोई माथा छूकर ये नहीं कहता  "तुझे कुछ हुआ तो नहीं ?  तब सभझ आता हे माँ सिर्फ एक रिश्ता नही एक आदत होती हे जो जब तक साथ होती हे हम उसकी कद्र नहीं करते और हरछीटीह चीज़ज़ती है inkbyshreyaa वही याद आती हे आज सच में मों कीवो बात याद आ रही हे मेरी अहमियत शादी के आएगी " बाद समड औरहाँ मा॰ तेरी हर बात सच लग रही हेः आज - ShareChat
#❤️Love You ज़िंदगी ❤️
❤️Love You ज़िंदगी ❤️ - C~- Rishte agar Dil me ho toh Todne se bhi nahi toot the Auree Rishte agar | Dimaag me ho toh Jodne se bhi nahi judte | C~- Rishte agar Dil me ho toh Todne se bhi nahi toot the Auree Rishte agar | Dimaag me ho toh Jodne se bhi nahi judte | - ShareChat
#❤️Love You ज़िंदगी ❤️
❤️Love You ज़िंदगी ❤️ - कितनी प्यारी लाईन हैं. भटक गए राहों में मंज़िल का ठिकाना नहीं था. ले गई ज़िंदगी उन राहौं में जहां हमें जाना नहीं था.. ! = शायरी का अनोखा सफर४४ कितनी प्यारी लाईन हैं. भटक गए राहों में मंज़िल का ठिकाना नहीं था. ले गई ज़िंदगी उन राहौं में जहां हमें जाना नहीं था.. ! = शायरी का अनोखा सफर४४ - ShareChat
#❤️Love You ज़िंदगी ❤️
❤️Love You ज़िंदगी ❤️ - >K% आप सभी को बैसाखी  हार्दिक शुभकामनाएं। >K% आप सभी को बैसाखी  हार्दिक शुभकामनाएं। - ShareChat
#❤️Love You ज़िंदगी ❤️
❤️Love You ज़िंदगी ❤️ - सफ़रअकेले का है , जाना भी अकेले ही है॰॰. अपनी जिंदगी को अहमियत दीजिए इसलिए॰ दुनियाको नहीं.॰j!  ه  9 00  93334 सफ़रअकेले का है , जाना भी अकेले ही है॰॰. अपनी जिंदगी को अहमियत दीजिए इसलिए॰ दुनियाको नहीं.॰j!  ه  9 00  93334 - ShareChat
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❤️Love You ज़िंदगी ❤️ - থী....... Jnk By पूछनी बात एक Sheyaa  7 ৯ লিব  4 बेटे पैदा किए थे ना? तो फिर शिकायतें से क्यों? 78 सहारा बेटा तो उम्मीदें बहू से क्यों ?  पालन्पोसकर बड़ा उसे किया, नाम उसका आगे बढ़ाया. पर सेवा की बारी आई तो उंगली बहू पर उठाया ? बेटा देर से आए जब "ಖಹ TಚT FಹT " और जाए पल भर को बहू बैठ  " संस्कार नहीं हैं. " की लाठी अगर बेटा है, बुढ़ापे  तो कसौटी हर बार बहू ही क्यों? #4#48 बेटा कभी बड़ा नहीं होता, और बहू कभी अपनी नहीं होती. बस यही सोच घर तोड़ देती है। থী....... Jnk By पूछनी बात एक Sheyaa  7 ৯ লিব  4 बेटे पैदा किए थे ना? तो फिर शिकायतें से क्यों? 78 सहारा बेटा तो उम्मीदें बहू से क्यों ?  पालन्पोसकर बड़ा उसे किया, नाम उसका आगे बढ़ाया. पर सेवा की बारी आई तो उंगली बहू पर उठाया ? बेटा देर से आए जब "ಖಹ TಚT FಹT " और जाए पल भर को बहू बैठ  " संस्कार नहीं हैं. " की लाठी अगर बेटा है, बुढ़ापे  तो कसौटी हर बार बहू ही क्यों? #4#48 बेटा कभी बड़ा नहीं होता, और बहू कभी अपनी नहीं होती. बस यही सोच घर तोड़ देती है। - ShareChat
#❤️Love You ज़िंदगी ❤️
❤️Love You ज़िंदगी ❤️ - पंख निकलते ही परिंदे ठिकाना भूल जाते हैं।  दौलत ज़्यादा हो तो बच्चे कमाना भूल जाते हैं। दौर नही रहा ज़माने में, /মুলীমা মাRহ্ন নীনানা ীমূল ভামান চ গন কৃষ্যা  বালা अब गरीब सोच समझ कर गुज़रना इश्क़ की राहों से, इस पे क़दम पड़ते ही सब ठिकाना भूल जाते हैं। की लाठी समझ बड़ा तो करते हैं लेकिन, बुढ़ापे < बूढ़ा माँ बाप बच्चों पे हक़ जताना भूल जाते हैं। जो कहते हैं नई नस्ल में बेफ़िक्री का आलम है, कितनी जल्दी वो अपना ज़माना भूल जाते हैं। ये सोच के वो बच्चों को स्कूल नही भेजते की, दो किताब पढ के बच्चे बोझ उठाना भूल जाते हैं। पंख निकलते ही परिंदे ठिकाना भूल जाते हैं।  दौलत ज़्यादा हो तो बच्चे कमाना भूल जाते हैं। दौर नही रहा ज़माने में, /মুলীমা মাRহ্ন নীনানা ীমূল ভামান চ গন কৃষ্যা  বালা अब गरीब सोच समझ कर गुज़रना इश्क़ की राहों से, इस पे क़दम पड़ते ही सब ठिकाना भूल जाते हैं। की लाठी समझ बड़ा तो करते हैं लेकिन, बुढ़ापे < बूढ़ा माँ बाप बच्चों पे हक़ जताना भूल जाते हैं। जो कहते हैं नई नस्ल में बेफ़िक्री का आलम है, कितनी जल्दी वो अपना ज़माना भूल जाते हैं। ये सोच के वो बच्चों को स्कूल नही भेजते की, दो किताब पढ के बच्चे बोझ उठाना भूल जाते हैं। - ShareChat
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