Jeet Singh
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#✔️राष्ट्रीय लोक दल #✔️राष्ट्रीय जनता दल #🧹आम आदमी पार्टी🕴 #🏹जनता दल यूनाइटेड ✔️ #👩‍🎨WhatsApp प्रोफाइल DP #सोचकर_देखो_शायद_समझ_जाओ 2017 से ही चुनाव आयोग अपरोक्ष रूप से वोटचोरी करते हुए आ रहा था, इस वोटचोरी को लीगल बनाने हेतु केंद्र कि भाजपा सरकार तथा चुनाव आयोग ने मिलकर, बिजली कि गति से चुनाव नियमों बदलाव किए ये नियम शब्दशः संविधान कि हर धारा के पूर्णरूप से खिलाफ है लेकिन किसी भी न्यायलय को दिखाई नही देगा, स्वतः संज्ञान कि बात तो छोड़ ही दो 1. चुनाव आयुक्तों कि नियुक्ति भाजपा कि केंद्र सरकार कर रही है 2. SIR का फार्मूला भाजपा कि केंद्र सरकार और चुनाव आयोग का है 3. SIR का पहला रुल टाइमलिमिट में ही SIR होना चाहिए 4. दूसरा रुल शक के दायरे में बताकर वोटर संख्या को आवश्यकता अनुसार कम करना 5. तीसरा रुल आवश्यकता अनुसार फर्जी वोट बढ़ाने 6. चौथा रुल, जहां EVM रखी गई हैं वहां कि लाईट आवश्यकता अनुसार बंद करनी 7. पांचवां रुल, वोट गिनती के समय बैलेट पेपर कि गिनती आवश्यकता अनुसार कम या ज्यादा समय में करनी 8. छठा रुल, आवश्यकता अनुसार बैलेट पेपर के वोट मान्य और अमान्य किया जाना 👇 👇 👇 राजस्थान, हरियाणा, महाराष्ट्र और दिल्ली का विधानसभा चुनाव SIR मॉडल पर ही चुनाव आयोग ने बीजेपी की झोली में जीत के रूप डाल दिया, बिना SIR अगले चुनाव जीते नही जाएंगें इसलिए SIR करना चुनाव आयोग कि मजबूरी है क्योंकि चुनाव आयुक्तों को लग रहा है कि वो बीजेपी RSS के नमक का कर्ज़ अदा कर रहे हैं जबकि देश के किसी भी संविधान पद पर जो व्यक्ति बैठा है वो सिर्फ जनता के टैक्स से ही तनख्वाह पाता है, परोक्ष रूप से कहा जाए तो देश का नमक खा रहा है देश के हर संवैधानिक पद कि गरिमा का मजाक खुद संवैधानिक पद पर बैठे खुलेआम धड़ल्ले से उड़ा रहे हैं संविधान कि हर धारा को खूंटी पर लटका कर जो व्यक्ति यह कहता है कि आप राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, राजपाल, उपराज्यपाल, मुख्यमंत्री, गोदी मिडिया और देश के किसी भी न्यायलय तथा उनके द्वारा दिए गए निर्णय पर सवाल नही उठा सकते हो तो यह सोच केवल डिक्टेटर शिप साबित करती है क्योंकि इन संवैधानिक पदों पर व्यक्ति विराजमान होते हैं जो हरिश्चंद्र के आखरी वंशज नही हैं, जनता में से कोई भी व्यक्ति इन संवैधानिक पद धारकों से संविधान कि धाराओं के अनुरूप हर संवैधानिक धारा के तहत प्रश्न कर सकता है ताकि भूतकाल, वर्तमान व भविष्य में संवैधानिक रूप से कार्यप्रणाली, विधायिका तथा न्यायपालिका निर्वाह कर सके जो आज के दिन हो नही कर रहे हैं, आज के दिन RSS भाजपाई, बीजेपी आईटी सेल, चुनाव आयोग और सभी न्यायालयों सहीत गोदी मिडिया जनता के विरुद्ध स्पष्ट रूप से खड़े हुए दिखाई दे रहे हैं जिसकी शुरुआत 2014 से हुई थी और यह मैं नही कह रहा हूं बल्कि देश का कोई भी व्यक्ति गहनता से आंकलन करना शुरू करेगा तो खुद साबित हो जाएगा कि संविधान कि प्रत्येक धारा को खुलेआम धड़ल्ले से खूंटी पर टांग के दिन प्रतिदिन देश कि जनता को बेतुके तर्कों से बेवकूफ बनाया जा रहा है जब तक देश कि जनसंख्या के मुकाबले कुल 3% RSS से जुड़े हुए व्यक्तियों को देश से खदेड़ा नही जाएगा तब तक देश कि 99.97% जनता चैन से नही सो सकती, अगर आप आज "दीपक मोहम्मद" नही बने तो अगला नंबर आपका होगा Note:- इन नफ़रतियों कि कुल आबादी केवल 3% से भी कम है और यह भाजपा सरकार के आदेश पर ही एक्टिव होते हैं, जिनके साथ देश के सभी न्यायालय तक हैं, देश के न्यायालय भाजपाई सरकारों के साथ नहीं होते तो देश कि किसी भी प्राइवेट संस्थाओं के हाथों राज्य तथा देश कि कानून व्यवस्था कभी सौंपी ही नही जाती व न्यायालय खुद संज्ञान लेते, ये सब के सब सरकारी संस्थाओं में बैठे अधिकारियों से लेकर जज तक, जनता के टैक्स से तनख्वाह पाकर, आए दिन जनता को ही प्रताड़ित करते रहते हैं संविधान को खूंटी पर टांग के। 🙈 🙊 🙉 आज के दिन सबसे बड़ा मुद्दा चुनाव आयोग के आयुक्तों कि निष्पक्ष नियुक्ति है जो संविधान कि धारा के अनुरूप लोकतंत्र कि पहली सीढ़ी है जिसे देश का सर्वोच्च न्यायालय तक संविधान कि हर धारा को खूंटी पर टांग के निर्णय तक नही दे सकता है इसलिए भाजपा सरकार को परोक्ष रूप से सहायता कर रहा है चुनाव से जुड़ी हर केस को लटकाते हुए 👇👇👇 विपक्षी ही नही बल्कि NDA के सहयोगी दलों सहित जनता के पास अब आखरी पर्याय सिर्फ सड़कों पर उतरना ही बचा है, गोदी मिडिया, RSS भाजपाई, सभी न्यायालयों सहीत चुनाव आयोग के खिलाफ अनिश्चितकालीन आंदोलन हेतु क्योंकि देश कि 99.97% जनता का भविष्य खराब करने करने के साथ देश को खुलेआम लूटा जा रहा है नोट:- जो आज चुप है कल उनका नंबर जरूर आएगा तथा जो RSS भाजपाई के टॉप 20 को देश छोड़ने तक उनका साथ दे रहे हैं उनको खुद कि तो छोड़ो उनके परिवार तक को जनता के गुस्से का सामना करना ही पड़ेगा
✔️राष्ट्रीय लोक दल - देश के सर्वोच्च न्यायालय ने धारा १४२ का उपयोग करते हुए राज्यों के जजों की ड्यूटी बंगाल चुनाव 3 से पहले SIR करने हेतू लगा दी लेकिन धारा १४२ का उपयोग करके आयुक्तों कि नियुक्ति R$3 Hlq निष्पक्ष नही करा सके समझदार को इशारा काफ़ी है देश के सर्वोच्च न्यायालय ने धारा १४२ का उपयोग करते हुए राज्यों के जजों की ड्यूटी बंगाल चुनाव 3 से पहले SIR करने हेतू लगा दी लेकिन धारा १४२ का उपयोग करके आयुक्तों कि नियुक्ति R$3 Hlq निष्पक्ष नही करा सके समझदार को इशारा काफ़ी है - ShareChat
#🇮🇳मेरा भारत, मेरी शान #🌐 राष्ट्रीय अपडेट #👩‍🎨WhatsApp प्रोफाइल DP #🥰Express Emotion #😇 चाणक्य नीति #सोचकर_देखो_शायद_समझ_जाओ 2017 से ही चुनाव आयोग अपरोक्ष रूप से वोटचोरी करते हुए आ रहा था, इस वोटचोरी को लीगल बनाने हेतु केंद्र कि भाजपा सरकार तथा चुनाव आयोग ने मिलकर, बिजली कि गति से चुनाव नियमों बदलाव किए ये नियम शब्दशः संविधान कि हर धारा के पूर्णरूप से खिलाफ है लेकिन किसी भी न्यायलय को दिखाई नही देगा, स्वतः संज्ञान कि बात तो छोड़ ही दो 1. चुनाव आयुक्तों कि नियुक्ति भाजपा कि केंद्र सरकार कर रही है 2. SIR का फार्मूला भाजपा कि केंद्र सरकार और चुनाव आयोग का है 3. SIR का पहला रुल टाइमलिमिट में ही SIR होना चाहिए 4. दूसरा रुल शक के दायरे में बताकर वोटर संख्या को आवश्यकता अनुसार कम करना 5. तीसरा रुल आवश्यकता अनुसार फर्जी वोट बढ़ाने 6. चौथा रुल, जहां EVM रखी गई हैं वहां कि लाईट आवश्यकता अनुसार बंद करनी 7. पांचवां रुल, वोट गिनती के समय बैलेट पेपर कि गिनती आवश्यकता अनुसार कम या ज्यादा समय में करनी 8. छठा रुल, आवश्यकता अनुसार बैलेट पेपर के वोट मान्य और अमान्य किया जाना 👇 👇 👇 राजस्थान, हरियाणा, महाराष्ट्र और दिल्ली का विधानसभा चुनाव SIR मॉडल पर ही चुनाव आयोग ने बीजेपी की झोली में जीत के रूप डाल दिया, बिना SIR अगले चुनाव जीते नही जाएंगें इसलिए SIR करना चुनाव आयोग कि मजबूरी है क्योंकि चुनाव आयुक्तों को लग रहा है कि वो बीजेपी RSS के नमक का कर्ज़ अदा कर रहे हैं जबकि देश के किसी भी संविधान पद पर जो व्यक्ति बैठा है वो सिर्फ जनता के टैक्स से ही तनख्वाह पाता है, परोक्ष रूप से कहा जाए तो देश का नमक खा रहा है देश के हर संवैधानिक पद कि गरिमा का मजाक खुद संवैधानिक पद पर बैठे खुलेआम धड़ल्ले से उड़ा रहे हैं संविधान कि हर धारा को खूंटी पर लटका कर जो व्यक्ति यह कहता है कि आप राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, राजपाल, उपराज्यपाल, मुख्यमंत्री, गोदी मिडिया और देश के किसी भी न्यायलय तथा उनके द्वारा दिए गए निर्णय पर सवाल नही उठा सकते हो तो यह सोच केवल डिक्टेटर शिप साबित करती है क्योंकि इन संवैधानिक पदों पर व्यक्ति विराजमान होते हैं जो हरिश्चंद्र के आखरी वंशज नही हैं, जनता में से कोई भी व्यक्ति इन संवैधानिक पद धारकों से संविधान कि धाराओं के अनुरूप हर संवैधानिक धारा के तहत प्रश्न कर सकता है ताकि भूतकाल, वर्तमान व भविष्य में संवैधानिक रूप से कार्यप्रणाली, विधायिका तथा न्यायपालिका निर्वाह कर सके जो आज के दिन हो नही कर रहे हैं, आज के दिन RSS भाजपाई, बीजेपी आईटी सेल, चुनाव आयोग और सभी न्यायालयों सहीत गोदी मिडिया जनता के विरुद्ध स्पष्ट रूप से खड़े हुए दिखाई दे रहे हैं जिसकी शुरुआत 2014 से हुई थी और यह मैं नही कह रहा हूं बल्कि देश का कोई भी व्यक्ति गहनता से आंकलन करना शुरू करेगा तो खुद साबित हो जाएगा कि संविधान कि प्रत्येक धारा को खुलेआम धड़ल्ले से खूंटी पर टांग के दिन प्रतिदिन देश कि जनता को बेतुके तर्कों से बेवकूफ बनाया जा रहा है जब तक देश कि जनसंख्या के मुकाबले कुल 3% RSS से जुड़े हुए व्यक्तियों को देश से खदेड़ा नही जाएगा तब तक देश कि 99.97% जनता चैन से नही सो सकती, अगर आप आज "दीपक मोहम्मद" नही बने तो अगला नंबर आपका होगा Note:- इन नफ़रतियों कि कुल आबादी केवल 3% से भी कम है और यह भाजपा सरकार के आदेश पर ही एक्टिव होते हैं, जिनके साथ देश के सभी न्यायालय तक हैं, देश के न्यायालय भाजपाई सरकारों के साथ नहीं होते तो देश कि किसी भी प्राइवेट संस्थाओं के हाथों राज्य तथा देश कि कानून व्यवस्था कभी सौंपी ही नही जाती व न्यायालय खुद संज्ञान लेते, ये सब के सब सरकारी संस्थाओं में बैठे अधिकारियों से लेकर जज तक, जनता के टैक्स से तनख्वाह पाकर, आए दिन जनता को ही प्रताड़ित करते रहते हैं संविधान को खूंटी पर टांग के। 🙈 🙊 🙉 आज के दिन सबसे बड़ा मुद्दा चुनाव आयोग के आयुक्तों कि निष्पक्ष नियुक्ति है जो संविधान कि धारा के अनुरूप लोकतंत्र कि पहली सीढ़ी है जिसे देश का सर्वोच्च न्यायालय तक संविधान कि हर धारा को खूंटी पर टांग के निर्णय तक नही दे सकता है इसलिए भाजपा सरकार को परोक्ष रूप से सहायता कर रहा है चुनाव से जुड़ी हर केस को लटकाते हुए 👇👇👇 विपक्षी ही नही बल्कि NDA के सहयोगी दलों सहित जनता के पास अब आखरी पर्याय सिर्फ सड़कों पर उतरना ही बचा है, गोदी मिडिया, RSS भाजपाई, सभी न्यायालयों सहीत चुनाव आयोग के खिलाफ अनिश्चितकालीन आंदोलन हेतु क्योंकि देश कि 99.97% जनता का भविष्य खराब करने करने के साथ देश को खुलेआम लूटा जा रहा है नोट:- जो आज चुप है कल उनका नंबर जरूर आएगा तथा जो RSS भाजपाई के टॉप 20 को देश छोड़ने तक उनका साथ दे रहे हैं उनको खुद कि तो छोड़ो उनके परिवार तक को जनता के गुस्से का सामना करना ही पड़ेगा
🇮🇳मेरा भारत, मेरी शान - देश के सर्वोच्च न्यायालय ने धारा १४२ का उपयोग करते हुए ३ राज्यों के जजों की ड्यूटी बंगाल चुनाव से पहले SIR करने हेतू लगा दी लेकिन धारा १४२ का उपयोग करके सिर्फ 3 चुनाव आयुक्तों कि नियुक्ति निष्पक्ष नही करा सके समझदार को इशारा काफ़ी है देश के सर्वोच्च न्यायालय ने धारा १४२ का उपयोग करते हुए ३ राज्यों के जजों की ड्यूटी बंगाल चुनाव से पहले SIR करने हेतू लगा दी लेकिन धारा १४२ का उपयोग करके सिर्फ 3 चुनाव आयुक्तों कि नियुक्ति निष्पक्ष नही करा सके समझदार को इशारा काफ़ी है - ShareChat
#😇 चाणक्य नीति #🥰Express Emotion #👩‍🎨WhatsApp प्रोफाइल DP #🌐 राष्ट्रीय अपडेट #🇮🇳मेरा भारत, मेरी शान 2017 से ही चुनाव आयोग अपरोक्ष रूप से वोटचोरी करते हुए आ रहा था, इस वोटचोरी को लीगल बनाने हेतु केंद्र कि भाजपा सरकार तथा चुनाव आयोग ने मिलकर, बिजली कि गति से चुनाव नियमों बदलाव किए ये नियम शब्दशः संविधान कि हर धारा के पूर्णरूप से खिलाफ है लेकिन किसी भी न्यायलय को दिखाई नही देगा, स्वतः संज्ञान कि बात तो छोड़ ही दो 1. चुनाव आयुक्तों कि नियुक्ति भाजपा कि केंद्र सरकार कर रही है 2. SIR का फार्मूला भाजपा कि केंद्र सरकार और चुनाव आयोग का है 3. SIR का पहला रुल टाइमलिमिट में ही SIR होना चाहिए 4. दूसरा रुल शक के दायरे में बताकर वोटर संख्या को आवश्यकता अनुसार कम करना 5. तीसरा रुल आवश्यकता अनुसार फर्जी वोट बढ़ाने 6. चौथा रुल, जहां EVM रखी गई हैं वहां कि लाईट आवश्यकता अनुसार बंद करनी 7. पांचवां रुल, वोट गिनती के समय बैलेट पेपर कि गिनती आवश्यकता अनुसार कम या ज्यादा समय में करनी 8. छठा रुल, आवश्यकता अनुसार बैलेट पेपर के वोट मान्य और अमान्य किया जाना 👇 👇 👇 राजस्थान, हरियाणा, महाराष्ट्र और दिल्ली का विधानसभा चुनाव SIR मॉडल पर ही चुनाव आयोग ने बीजेपी की झोली में जीत के रूप डाल दिया, बिना SIR अगले चुनाव जीते नही जाएंगें इसलिए SIR करना चुनाव आयोग कि मजबूरी है क्योंकि चुनाव आयुक्तों को लग रहा है कि वो बीजेपी RSS के नमक का कर्ज़ अदा कर रहे हैं जबकि देश के किसी भी संविधान पद पर जो व्यक्ति बैठा है वो सिर्फ जनता के टैक्स से ही तनख्वाह पाता है, परोक्ष रूप से कहा जाए तो देश का नमक खा रहा है देश के हर संवैधानिक पद कि गरिमा का मजाक खुद संवैधानिक पद पर बैठे खुलेआम धड़ल्ले से उड़ा रहे हैं संविधान कि हर धारा को खूंटी पर लटका कर जो व्यक्ति यह कहता है कि आप राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, राजपाल, उपराज्यपाल, मुख्यमंत्री, गोदी मिडिया और देश के किसी भी न्यायलय तथा उनके द्वारा दिए गए निर्णय पर सवाल नही उठा सकते हो तो यह सोच केवल डिक्टेटर शिप साबित करती है क्योंकि इन संवैधानिक पदों पर व्यक्ति विराजमान होते हैं जो हरिश्चंद्र के आखरी वंशज नही हैं, जनता में से कोई भी व्यक्ति इन संवैधानिक पद धारकों से संविधान कि धाराओं के अनुरूप हर संवैधानिक धारा के तहत प्रश्न कर सकता है ताकि भूतकाल, वर्तमान व भविष्य में संवैधानिक रूप से कार्यप्रणाली, विधायिका तथा न्यायपालिका निर्वाह कर सके जो आज के दिन हो नही कर रहे हैं, आज के दिन RSS भाजपाई, बीजेपी आईटी सेल, चुनाव आयोग और सभी न्यायालयों सहीत गोदी मिडिया जनता के विरुद्ध स्पष्ट रूप से खड़े हुए दिखाई दे रहे हैं जिसकी शुरुआत 2014 से हुई थी और यह मैं नही कह रहा हूं बल्कि देश का कोई भी व्यक्ति गहनता से आंकलन करना शुरू करेगा तो खुद साबित हो जाएगा कि संविधान कि प्रत्येक धारा को खुलेआम धड़ल्ले से खूंटी पर टांग के दिन प्रतिदिन देश कि जनता को बेतुके तर्कों से बेवकूफ बनाया जा रहा है जब तक देश कि जनसंख्या के मुकाबले कुल 3% RSS से जुड़े हुए व्यक्तियों को देश से खदेड़ा नही जाएगा तब तक देश कि 99.97% जनता चैन से नही सो सकती, अगर आप आज "दीपक मोहम्मद" नही बने तो अगला नंबर आपका होगा Note:- इन नफ़रतियों कि कुल आबादी केवल 3% से भी कम है और यह भाजपा सरकार के आदेश पर ही एक्टिव होते हैं, जिनके साथ देश के सभी न्यायालय तक हैं, देश के न्यायालय भाजपाई सरकारों के साथ नहीं होते तो देश कि किसी भी प्राइवेट संस्थाओं के हाथों राज्य तथा देश कि कानून व्यवस्था कभी सौंपी ही नही जाती व न्यायालय खुद संज्ञान लेते, ये सब के सब सरकारी संस्थाओं में बैठे अधिकारियों से लेकर जज तक, जनता के टैक्स से तनख्वाह पाकर, आए दिन जनता को ही प्रताड़ित करते रहते हैं संविधान को खूंटी पर टांग के। 🙈 🙊 🙉 आज के दिन सबसे बड़ा मुद्दा चुनाव आयोग के आयुक्तों कि निष्पक्ष नियुक्ति है जो संविधान कि धारा के अनुरूप लोकतंत्र कि पहली सीढ़ी है जिसे देश का सर्वोच्च न्यायालय तक संविधान कि हर धारा को खूंटी पर टांग के निर्णय तक नही दे सकता है इसलिए भाजपा सरकार को परोक्ष रूप से सहायता कर रहा है चुनाव से जुड़ी हर केस को लटकाते हुए 👇👇👇 विपक्षी ही नही बल्कि NDA के सहयोगी दलों सहित जनता के पास अब आखरी पर्याय सिर्फ सड़कों पर उतरना ही बचा है, गोदी मिडिया, RSS भाजपाई, सभी न्यायालयों सहीत चुनाव आयोग के खिलाफ अनिश्चितकालीन आंदोलन हेतु क्योंकि देश कि 99.97% जनता का भविष्य खराब करने करने के साथ देश को खुलेआम लूटा जा रहा है नोट:- जो आज चुप है कल उनका नंबर जरूर आएगा तथा जो RSS भाजपाई के टॉप 20 को देश छोड़ने तक उनका साथ दे रहे हैं उनको खुद कि तो छोड़ो उनके परिवार तक को जनता के गुस्से का सामना करना ही पड़ेगा
😇 चाणक्य नीति - १८ घंटे में 3 विमान हादसे, अब अजित पवार विमान पर हादसे 46} सवाल मत शंकराचार्य पर झूठी पॉक्सो एक्ट पर हेतू पर्दे के पीछे FIR * बहुत मेहनत लगी थी समझदार को इशारा काफ़ी है १८ घंटे में 3 विमान हादसे, अब अजित पवार विमान पर हादसे 46} सवाल मत शंकराचार्य पर झूठी पॉक्सो एक्ट पर हेतू पर्दे के पीछे FIR * बहुत मेहनत लगी थी समझदार को इशारा काफ़ी है - ShareChat
#🧹आम आदमी पार्टी🕴 #✔️राष्ट्रीय जनता दल #😇 चाणक्य नीति #🏹जनता दल यूनाइटेड ✔️ #✔️राष्ट्रीय लोक दल 2017 से ही चुनाव आयोग अपरोक्ष रूप से वोटचोरी करते हुए आ रहा था, इस वोटचोरी को लीगल बनाने हेतु केंद्र कि भाजपा सरकार तथा चुनाव आयोग ने मिलकर, बिजली कि गति से चुनाव नियमों बदलाव किए ये नियम शब्दशः संविधान कि हर धारा के पूर्णरूप से खिलाफ है लेकिन किसी भी न्यायलय को दिखाई नही देगा, स्वतः संज्ञान कि बात तो छोड़ ही दो 1. चुनाव आयुक्तों कि नियुक्ति भाजपा कि केंद्र सरकार कर रही है 2. SIR का फार्मूला भाजपा कि केंद्र सरकार और चुनाव आयोग का है 3. SIR का पहला रुल टाइमलिमिट में ही SIR होना चाहिए 4. दूसरा रुल शक के दायरे में बताकर वोटर संख्या को आवश्यकता अनुसार कम करना 5. तीसरा रुल आवश्यकता अनुसार फर्जी वोट बढ़ाने 6. चौथा रुल, जहां EVM रखी गई हैं वहां कि लाईट आवश्यकता अनुसार बंद करनी 7. पांचवां रुल, वोट गिनती के समय बैलेट पेपर कि गिनती आवश्यकता अनुसार कम या ज्यादा समय में करनी 8. छठा रुल, आवश्यकता अनुसार बैलेट पेपर के वोट मान्य और अमान्य किया जाना 👇 👇 👇 राजस्थान, हरियाणा, महाराष्ट्र और दिल्ली का विधानसभा चुनाव SIR मॉडल पर ही चुनाव आयोग ने बीजेपी की झोली में जीत के रूप डाल दिया, बिना SIR अगले चुनाव जीते नही जाएंगें इसलिए SIR करना चुनाव आयोग कि मजबूरी है क्योंकि चुनाव आयुक्तों को लग रहा है कि वो बीजेपी RSS के नमक का कर्ज़ अदा कर रहे हैं जबकि देश के किसी भी संविधान पद पर जो व्यक्ति बैठा है वो सिर्फ जनता के टैक्स से ही तनख्वाह पाता है, परोक्ष रूप से कहा जाए तो देश का नमक खा रहा है देश के हर संवैधानिक पद कि गरिमा का मजाक खुद संवैधानिक पद पर बैठे खुलेआम धड़ल्ले से उड़ा रहे हैं संविधान कि हर धारा को खूंटी पर लटका कर जो व्यक्ति यह कहता है कि आप राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, राजपाल, उपराज्यपाल, मुख्यमंत्री, गोदी मिडिया और देश के किसी भी न्यायलय तथा उनके द्वारा दिए गए निर्णय पर सवाल नही उठा सकते हो तो यह सोच केवल डिक्टेटर शिप साबित करती है क्योंकि इन संवैधानिक पदों पर व्यक्ति विराजमान होते हैं जो हरिश्चंद्र के आखरी वंशज नही हैं, जनता में से कोई भी व्यक्ति इन संवैधानिक पद धारकों से संविधान कि धाराओं के अनुरूप हर संवैधानिक धारा के तहत प्रश्न कर सकता है ताकि भूतकाल, वर्तमान व भविष्य में संवैधानिक रूप से कार्यप्रणाली, विधायिका तथा न्यायपालिका निर्वाह कर सके जो आज के दिन हो नही कर रहे हैं, आज के दिन RSS भाजपाई, बीजेपी आईटी सेल, चुनाव आयोग और सभी न्यायालयों सहीत गोदी मिडिया जनता के विरुद्ध स्पष्ट रूप से खड़े हुए दिखाई दे रहे हैं जिसकी शुरुआत 2014 से हुई थी और यह मैं नही कह रहा हूं बल्कि देश का कोई भी व्यक्ति गहनता से आंकलन करना शुरू करेगा तो खुद साबित हो जाएगा कि संविधान कि प्रत्येक धारा को खुलेआम धड़ल्ले से खूंटी पर टांग के दिन प्रतिदिन देश कि जनता को बेतुके तर्कों से बेवकूफ बनाया जा रहा है जब तक देश कि जनसंख्या के मुकाबले कुल 3% RSS से जुड़े हुए व्यक्तियों को देश से खदेड़ा नही जाएगा तब तक देश कि 99.97% जनता चैन से नही सो सकती, अगर आप आज "दीपक मोहम्मद" नही बने तो अगला नंबर आपका होगा Note:- इन नफ़रतियों कि कुल आबादी केवल 3% से भी कम है और यह भाजपा सरकार के आदेश पर ही एक्टिव होते हैं, जिनके साथ देश के सभी न्यायालय तक हैं, देश के न्यायालय भाजपाई सरकारों के साथ नहीं होते तो देश कि किसी भी प्राइवेट संस्थाओं के हाथों राज्य तथा देश कि कानून व्यवस्था कभी सौंपी ही नही जाती व न्यायालय खुद संज्ञान लेते, ये सब के सब सरकारी संस्थाओं में बैठे अधिकारियों से लेकर जज तक, जनता के टैक्स से तनख्वाह पाकर, आए दिन जनता को ही प्रताड़ित करते रहते हैं संविधान को खूंटी पर टांग के। 🙈 🙊 🙉 आज के दिन सबसे बड़ा मुद्दा चुनाव आयोग के आयुक्तों कि निष्पक्ष नियुक्ति है जो संविधान कि धारा के अनुरूप लोकतंत्र कि पहली सीढ़ी है जिसे देश का सर्वोच्च न्यायालय तक संविधान कि हर धारा को खूंटी पर टांग के निर्णय तक नही दे सकता है इसलिए भाजपा सरकार को परोक्ष रूप से सहायता कर रहा है चुनाव से जुड़ी हर केस को लटकाते हुए 👇👇👇 विपक्षी ही नही बल्कि NDA के सहयोगी दलों सहित जनता के पास अब आखरी पर्याय सिर्फ सड़कों पर उतरना ही बचा है, गोदी मिडिया, RSS भाजपाई, सभी न्यायालयों सहीत चुनाव आयोग के खिलाफ अनिश्चितकालीन आंदोलन हेतु क्योंकि देश कि 99.97% जनता का भविष्य खराब करने करने के साथ देश को खुलेआम लूटा जा रहा है नोट:- जो आज चुप है कल उनका नंबर जरूर आएगा तथा जो RSS भाजपाई के टॉप 20 को देश छोड़ने तक उनका साथ दे रहे हैं उनको खुद कि तो छोड़ो उनके परिवार तक को जनता के गुस्से का सामना करना ही पड़ेगा
🧹आम आदमी पार्टी🕴 - १८ घंटे में 3 विमान हादसे, अब अजित पवार विमान हादसे এ২ पूछो सवाल मत qiai शंकराचार्य पर झूठी हेतू पर्दे के पीछे एक्ट पर FIR करने बहुत मेहनत लगी थी समझदार को इशारा काफ़ी है १८ घंटे में 3 विमान हादसे, अब अजित पवार विमान हादसे এ২ पूछो सवाल मत qiai शंकराचार्य पर झूठी हेतू पर्दे के पीछे एक्ट पर FIR करने बहुत मेहनत लगी थी समझदार को इशारा काफ़ी है - ShareChat
#🏹जनता दल यूनाइटेड ✔️ #✔️राष्ट्रीय लोक दल #😇 चाणक्य नीति #✔️राष्ट्रीय जनता दल #🧹आम आदमी पार्टी🕴 2017 से ही चुनाव आयोग अपरोक्ष रूप से वोटचोरी करते हुए आ रहा था, इस वोटचोरी को लीगल बनाने हेतु केंद्र कि भाजपा सरकार तथा चुनाव आयोग ने मिलकर, बिजली कि गति से चुनाव नियमों बदलाव किए ये नियम शब्दशः संविधान कि हर धारा के पूर्णरूप से खिलाफ है लेकिन किसी भी न्यायलय को दिखाई नही देगा, स्वतः संज्ञान कि बात तो छोड़ ही दो 1. चुनाव आयुक्तों कि नियुक्ति भाजपा कि केंद्र सरकार कर रही है 2. SIR का फार्मूला भाजपा कि केंद्र सरकार और चुनाव आयोग का है 3. SIR का पहला रुल टाइमलिमिट में ही SIR होना चाहिए 4. दूसरा रुल शक के दायरे में बताकर वोटर संख्या को आवश्यकता अनुसार कम करना 5. तीसरा रुल आवश्यकता अनुसार फर्जी वोट बढ़ाने 6. चौथा रुल, जहां EVM रखी गई हैं वहां कि लाईट आवश्यकता अनुसार बंद करनी 7. पांचवां रुल, वोट गिनती के समय बैलेट पेपर कि गिनती आवश्यकता अनुसार कम या ज्यादा समय में करनी 8. छठा रुल, आवश्यकता अनुसार बैलेट पेपर के वोट मान्य और अमान्य किया जाना 👇 👇 👇 राजस्थान, हरियाणा, महाराष्ट्र और दिल्ली का विधानसभा चुनाव SIR मॉडल पर ही चुनाव आयोग ने बीजेपी की झोली में जीत के रूप डाल दिया, बिना SIR अगले चुनाव जीते नही जाएंगें इसलिए SIR करना चुनाव आयोग कि मजबूरी है क्योंकि चुनाव आयुक्तों को लग रहा है कि वो बीजेपी RSS के नमक का कर्ज़ अदा कर रहे हैं जबकि देश के किसी भी संविधान पद पर जो व्यक्ति बैठा है वो सिर्फ जनता के टैक्स से ही तनख्वाह पाता है, परोक्ष रूप से कहा जाए तो देश का नमक खा रहा है देश के हर संवैधानिक पद कि गरिमा का मजाक खुद संवैधानिक पद पर बैठे खुलेआम धड़ल्ले से उड़ा रहे हैं संविधान कि हर धारा को खूंटी पर लटका कर जो व्यक्ति यह कहता है कि आप राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, राजपाल, उपराज्यपाल, मुख्यमंत्री, गोदी मिडिया और देश के किसी भी न्यायलय तथा उनके द्वारा दिए गए निर्णय पर सवाल नही उठा सकते हो तो यह सोच केवल डिक्टेटर शिप साबित करती है क्योंकि इन संवैधानिक पदों पर व्यक्ति विराजमान होते हैं जो हरिश्चंद्र के आखरी वंशज नही हैं, जनता में से कोई भी व्यक्ति इन संवैधानिक पद धारकों से संविधान कि धाराओं के अनुरूप हर संवैधानिक धारा के तहत प्रश्न कर सकता है ताकि भूतकाल, वर्तमान व भविष्य में संवैधानिक रूप से कार्यप्रणाली, विधायिका तथा न्यायपालिका निर्वाह कर सके जो आज के दिन हो नही कर रहे हैं, आज के दिन RSS भाजपाई, बीजेपी आईटी सेल, चुनाव आयोग और सभी न्यायालयों सहीत गोदी मिडिया जनता के विरुद्ध स्पष्ट रूप से खड़े हुए दिखाई दे रहे हैं जिसकी शुरुआत 2014 से हुई थी और यह मैं नही कह रहा हूं बल्कि देश का कोई भी व्यक्ति गहनता से आंकलन करना शुरू करेगा तो खुद साबित हो जाएगा कि संविधान कि प्रत्येक धारा को खुलेआम धड़ल्ले से खूंटी पर टांग के दिन प्रतिदिन देश कि जनता को बेतुके तर्कों से बेवकूफ बनाया जा रहा है जब तक देश कि जनसंख्या के मुकाबले कुल 3% RSS से जुड़े हुए व्यक्तियों को देश से खदेड़ा नही जाएगा तब तक देश कि 99.97% जनता चैन से नही सो सकती, अगर आप आज "दीपक मोहम्मद" नही बने तो अगला नंबर आपका होगा Note:- इन नफ़रतियों कि कुल आबादी केवल 3% से भी कम है और यह भाजपा सरकार के आदेश पर ही एक्टिव होते हैं, जिनके साथ देश के सभी न्यायालय तक हैं, देश के न्यायालय भाजपाई सरकारों के साथ नहीं होते तो देश कि किसी भी प्राइवेट संस्थाओं के हाथों राज्य तथा देश कि कानून व्यवस्था कभी सौंपी ही नही जाती व न्यायालय खुद संज्ञान लेते, ये सब के सब सरकारी संस्थाओं में बैठे अधिकारियों से लेकर जज तक, जनता के टैक्स से तनख्वाह पाकर, आए दिन जनता को ही प्रताड़ित करते रहते हैं संविधान को खूंटी पर टांग के। 🙈 🙊 🙉 आज के दिन सबसे बड़ा मुद्दा चुनाव आयोग के आयुक्तों कि निष्पक्ष नियुक्ति है जो संविधान कि धारा के अनुरूप लोकतंत्र कि पहली सीढ़ी है जिसे देश का सर्वोच्च न्यायालय तक संविधान कि हर धारा को खूंटी पर टांग के निर्णय तक नही दे सकता है इसलिए भाजपा सरकार को परोक्ष रूप से सहायता कर रहा है चुनाव से जुड़ी हर केस को लटकाते हुए 👇👇👇 विपक्षी ही नही बल्कि NDA के सहयोगी दलों सहित जनता के पास अब आखरी पर्याय सिर्फ सड़कों पर उतरना ही बचा है, गोदी मिडिया, RSS भाजपाई, सभी न्यायालयों सहीत चुनाव आयोग के खिलाफ अनिश्चितकालीन आंदोलन हेतु क्योंकि देश कि 99.97% जनता का भविष्य खराब करने करने के साथ देश को खुलेआम लूटा जा रहा है नोट:- जो आज चुप है कल उनका नंबर जरूर आएगा तथा जो RSS भाजपाई के टॉप 20 को देश छोड़ने तक उनका साथ दे रहे हैं उनको खुद कि तो छोड़ो उनके परिवार तक को जनता के गुस्से का सामना करना ही पड़ेगा
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#👩‍🎨WhatsApp प्रोफाइल DP #❤️सैड व्हाट्सएप स्टेटस #🇮🇳मेरा भारत, मेरी शान #🌐 राष्ट्रीय अपडेट #✍मेरे पसंदीदा लेखक 2017 से ही चुनाव आयोग अपरोक्ष रूप से वोटचोरी करते हुए आ रहा था, इस वोटचोरी को लीगल बनाने हेतु केंद्र कि भाजपा सरकार तथा चुनाव आयोग ने मिलकर, बिजली कि गति से चुनाव नियमों बदलाव किए ये नियम शब्दशः संविधान कि हर धारा के पूर्णरूप से खिलाफ है लेकिन किसी भी न्यायलय को दिखाई नही देगा, स्वतः संज्ञान कि बात तो छोड़ ही दो 1. चुनाव आयुक्तों कि नियुक्ति भाजपा कि केंद्र सरकार कर रही है 2. SIR का फार्मूला भाजपा कि केंद्र सरकार और चुनाव आयोग का है 3. SIR का पहला रुल टाइमलिमिट में ही SIR होना चाहिए 4. दूसरा रुल शक के दायरे में बताकर वोटर संख्या को आवश्यकता अनुसार कम करना 5. तीसरा रुल आवश्यकता अनुसार फर्जी वोट बढ़ाने 6. चौथा रुल, जहां EVM रखी गई हैं वहां कि लाईट आवश्यकता अनुसार बंद करनी 7. पांचवां रुल, वोट गिनती के समय बैलेट पेपर कि गिनती आवश्यकता अनुसार कम या ज्यादा समय में करनी 8. छठा रुल, आवश्यकता अनुसार बैलेट पेपर के वोट मान्य और अमान्य किया जाना 👇 👇 👇 राजस्थान, हरियाणा, महाराष्ट्र और दिल्ली का विधानसभा चुनाव SIR मॉडल पर ही चुनाव आयोग ने बीजेपी की झोली में जीत के रूप डाल दिया, बिना SIR अगले चुनाव जीते नही जाएंगें इसलिए SIR करना चुनाव आयोग कि मजबूरी है क्योंकि चुनाव आयुक्तों को लग रहा है कि वो बीजेपी RSS के नमक का कर्ज़ अदा कर रहे हैं जबकि देश के किसी भी संविधान पद पर जो व्यक्ति बैठा है वो सिर्फ जनता के टैक्स से ही तनख्वाह पाता है, परोक्ष रूप से कहा जाए तो देश का नमक खा रहा है देश के हर संवैधानिक पद कि गरिमा का मजाक खुद संवैधानिक पद पर बैठे खुलेआम धड़ल्ले से उड़ा रहे हैं संविधान कि हर धारा को खूंटी पर लटका कर जो व्यक्ति यह कहता है कि आप राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, राजपाल, उपराज्यपाल, मुख्यमंत्री, गोदी मिडिया और देश के किसी भी न्यायलय तथा उनके द्वारा दिए गए निर्णय पर सवाल नही उठा सकते हो तो यह सोच केवल डिक्टेटर शिप साबित करती है क्योंकि इन संवैधानिक पदों पर व्यक्ति विराजमान होते हैं जो हरिश्चंद्र के आखरी वंशज नही हैं, जनता में से कोई भी व्यक्ति इन संवैधानिक पद धारकों से संविधान कि धाराओं के अनुरूप हर संवैधानिक धारा के तहत प्रश्न कर सकता है ताकि भूतकाल, वर्तमान व भविष्य में संवैधानिक रूप से कार्यप्रणाली, विधायिका तथा न्यायपालिका निर्वाह कर सके जो आज के दिन हो नही कर रहे हैं, आज के दिन RSS भाजपाई, बीजेपी आईटी सेल, चुनाव आयोग और सभी न्यायालयों सहीत गोदी मिडिया जनता के विरुद्ध स्पष्ट रूप से खड़े हुए दिखाई दे रहे हैं जिसकी शुरुआत 2014 से हुई थी और यह मैं नही कह रहा हूं बल्कि देश का कोई भी व्यक्ति गहनता से आंकलन करना शुरू करेगा तो खुद साबित हो जाएगा कि संविधान कि प्रत्येक धारा को खुलेआम धड़ल्ले से खूंटी पर टांग के दिन प्रतिदिन देश कि जनता को बेतुके तर्कों से बेवकूफ बनाया जा रहा है जब तक देश कि जनसंख्या के मुकाबले कुल 3% RSS से जुड़े हुए व्यक्तियों को देश से खदेड़ा नही जाएगा तब तक देश कि 99.97% जनता चैन से नही सो सकती, अगर आप आज "दीपक मोहम्मद" नही बने तो अगला नंबर आपका होगा Note:- इन नफ़रतियों कि कुल आबादी केवल 3% से भी कम है और यह भाजपा सरकार के आदेश पर ही एक्टिव होते हैं, जिनके साथ देश के सभी न्यायालय तक हैं, देश के न्यायालय भाजपाई सरकारों के साथ नहीं होते तो देश कि किसी भी प्राइवेट संस्थाओं के हाथों राज्य तथा देश कि कानून व्यवस्था कभी सौंपी ही नही जाती व न्यायालय खुद संज्ञान लेते, ये सब के सब सरकारी संस्थाओं में बैठे अधिकारियों से लेकर जज तक, जनता के टैक्स से तनख्वाह पाकर, आए दिन जनता को ही प्रताड़ित करते रहते हैं संविधान को खूंटी पर टांग के। 🙈 🙊 🙉 आज के दिन सबसे बड़ा मुद्दा चुनाव आयोग के आयुक्तों कि निष्पक्ष नियुक्ति है जो संविधान कि धारा के अनुरूप लोकतंत्र कि पहली सीढ़ी है जिसे देश का सर्वोच्च न्यायालय तक संविधान कि हर धारा को खूंटी पर टांग के निर्णय तक नही दे सकता है इसलिए भाजपा सरकार को परोक्ष रूप से सहायता कर रहा है चुनाव से जुड़ी हर केस को लटकाते हुए 👇👇👇 विपक्षी ही नही बल्कि NDA के सहयोगी दलों सहित जनता के पास अब आखरी पर्याय सिर्फ सड़कों पर उतरना ही बचा है, गोदी मिडिया, RSS भाजपाई, सभी न्यायालयों सहीत चुनाव आयोग के खिलाफ अनिश्चितकालीन आंदोलन हेतु क्योंकि देश कि 99.97% जनता का भविष्य खराब करने करने के साथ देश को खुलेआम लूटा जा रहा है नोट:- जो आज चुप है कल उनका नंबर जरूर आएगा तथा जो RSS भाजपाई के टॉप 20 को देश छोड़ने तक उनका साथ दे रहे हैं उनको खुद कि तो छोड़ो उनके परिवार तक को जनता के गुस्से का सामना करना ही पड़ेगा https://youtu.be/odYPV_7t368?si=CSrjkh4dfDfTKSqj
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#✔️राष्ट्रीय जनता दल #🧹आम आदमी पार्टी🕴 #✔️राष्ट्रीय लोक दल #🥰Express Emotion #🏹जनता दल यूनाइटेड ✔️ 2017 से ही चुनाव आयोग अपरोक्ष रूप से वोटचोरी करते हुए आ रहा था, इस वोटचोरी को लीगल बनाने हेतु केंद्र कि भाजपा सरकार तथा चुनाव आयोग ने मिलकर, बिजली कि गति से चुनाव नियमों बदलाव किए ये नियम शब्दशः संविधान कि हर धारा के पूर्णरूप से खिलाफ है लेकिन किसी भी न्यायलय को दिखाई नही देगा, स्वतः संज्ञान कि बात तो छोड़ ही दो 1. चुनाव आयुक्तों कि नियुक्ति भाजपा कि केंद्र सरकार कर रही है 2. SIR का फार्मूला भाजपा कि केंद्र सरकार और चुनाव आयोग का है 3. SIR का पहला रुल टाइमलिमिट में ही SIR होना चाहिए 4. दूसरा रुल शक के दायरे में बताकर वोटर संख्या को आवश्यकता अनुसार कम करना 5. तीसरा रुल आवश्यकता अनुसार फर्जी वोट बढ़ाने 6. चौथा रुल, जहां EVM रखी गई हैं वहां कि लाईट आवश्यकता अनुसार बंद करनी 7. पांचवां रुल, वोट गिनती के समय बैलेट पेपर कि गिनती आवश्यकता अनुसार कम या ज्यादा समय में करनी 8. छठा रुल, आवश्यकता अनुसार बैलेट पेपर के वोट मान्य और अमान्य किया जाना 👇 👇 👇 राजस्थान, हरियाणा, महाराष्ट्र और दिल्ली का विधानसभा चुनाव SIR मॉडल पर ही चुनाव आयोग ने बीजेपी की झोली में जीत के रूप डाल दिया, बिना SIR अगले चुनाव जीते नही जाएंगें इसलिए SIR करना चुनाव आयोग कि मजबूरी है क्योंकि चुनाव आयुक्तों को लग रहा है कि वो बीजेपी RSS के नमक का कर्ज़ अदा कर रहे हैं जबकि देश के किसी भी संविधान पद पर जो व्यक्ति बैठा है वो सिर्फ जनता के टैक्स से ही तनख्वाह पाता है, परोक्ष रूप से कहा जाए तो देश का नमक खा रहा है देश के हर संवैधानिक पद कि गरिमा का मजाक खुद संवैधानिक पद पर बैठे खुलेआम धड़ल्ले से उड़ा रहे हैं संविधान कि हर धारा को खूंटी पर लटका कर जो व्यक्ति यह कहता है कि आप राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, राजपाल, उपराज्यपाल, मुख्यमंत्री, गोदी मिडिया और देश के किसी भी न्यायलय तथा उनके द्वारा दिए गए निर्णय पर सवाल नही उठा सकते हो तो यह सोच केवल डिक्टेटर शिप साबित करती है क्योंकि इन संवैधानिक पदों पर व्यक्ति विराजमान होते हैं जो हरिश्चंद्र के आखरी वंशज नही हैं, जनता में से कोई भी व्यक्ति इन संवैधानिक पद धारकों से संविधान कि धाराओं के अनुरूप हर संवैधानिक धारा के तहत प्रश्न कर सकता है ताकि भूतकाल, वर्तमान व भविष्य में संवैधानिक रूप से कार्यप्रणाली, विधायिका तथा न्यायपालिका निर्वाह कर सके जो आज के दिन हो नही कर रहे हैं, आज के दिन RSS भाजपाई, बीजेपी आईटी सेल, चुनाव आयोग और सभी न्यायालयों सहीत गोदी मिडिया जनता के विरुद्ध स्पष्ट रूप से खड़े हुए दिखाई दे रहे हैं जिसकी शुरुआत 2014 से हुई थी और यह मैं नही कह रहा हूं बल्कि देश का कोई भी व्यक्ति गहनता से आंकलन करना शुरू करेगा तो खुद साबित हो जाएगा कि संविधान कि प्रत्येक धारा को खुलेआम धड़ल्ले से खूंटी पर टांग के दिन प्रतिदिन देश कि जनता को बेतुके तर्कों से बेवकूफ बनाया जा रहा है जब तक देश कि जनसंख्या के मुकाबले कुल 3% RSS से जुड़े हुए व्यक्तियों को देश से खदेड़ा नही जाएगा तब तक देश कि 99.97% जनता चैन से नही सो सकती, अगर आप आज "दीपक मोहम्मद" नही बने तो अगला नंबर आपका होगा Note:- इन नफ़रतियों कि कुल आबादी केवल 3% से भी कम है और यह भाजपा सरकार के आदेश पर ही एक्टिव होते हैं, जिनके साथ देश के सभी न्यायालय तक हैं, देश के न्यायालय भाजपाई सरकारों के साथ नहीं होते तो देश कि किसी भी प्राइवेट संस्थाओं के हाथों राज्य तथा देश कि कानून व्यवस्था कभी सौंपी ही नही जाती व न्यायालय खुद संज्ञान लेते, ये सब के सब सरकारी संस्थाओं में बैठे अधिकारियों से लेकर जज तक, जनता के टैक्स से तनख्वाह पाकर, आए दिन जनता को ही प्रताड़ित करते रहते हैं संविधान को खूंटी पर टांग के। 🙈 🙊 🙉 आज के दिन सबसे बड़ा मुद्दा चुनाव आयोग के आयुक्तों कि निष्पक्ष नियुक्ति है जो संविधान कि धारा के अनुरूप लोकतंत्र कि पहली सीढ़ी है जिसे देश का सर्वोच्च न्यायालय तक संविधान कि हर धारा को खूंटी पर टांग के निर्णय तक नही दे सकता है इसलिए भाजपा सरकार को परोक्ष रूप से सहायता कर रहा है चुनाव से जुड़ी हर केस को लटकाते हुए 👇👇👇 विपक्षी ही नही बल्कि NDA के सहयोगी दलों सहित जनता के पास अब आखरी पर्याय सिर्फ सड़कों पर उतरना ही बचा है, गोदी मिडिया, RSS भाजपाई, सभी न्यायालयों सहीत चुनाव आयोग के खिलाफ अनिश्चितकालीन आंदोलन हेतु क्योंकि देश कि 99.97% जनता का भविष्य खराब करने करने के साथ देश को खुलेआम लूटा जा रहा है नोट:- जो आज चुप है कल उनका नंबर जरूर आएगा तथा जो RSS भाजपाई के टॉप 20 को देश छोड़ने तक उनका साथ दे रहे हैं उनको खुद कि तो छोड़ो उनके परिवार तक को जनता के गुस्से का सामना करना ही पड़ेगा https://youtu.be/odYPV_7t368?si=CSrjkh4dfDfTKSqj
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#🏹जनता दल यूनाइटेड ✔️ #🥰Express Emotion #✔️राष्ट्रीय लोक दल #🧹आम आदमी पार्टी🕴 #✔️राष्ट्रीय जनता दल 📜 “न्यायाधीश नियुक्ति (पारदर्शिता एवं स्वतंत्रता) विधेयक” --- धारा 1 – संक्षिप्त नाम और प्रारंभ 1. इस अधिनियम को “न्यायाधीश नियुक्ति (पारदर्शिता एवं स्वतंत्रता) अधिनियम, 20XX” कहा जाएगा। 2. यह पूरे भारत पर लागू होगा। --- धारा 2 – परिभाषाएँ 1. “समिति” का अर्थ होगा – नियुक्ति समिति (Appointment Committee) जो इस अधिनियम के अंतर्गत गठित होगी। 2. “ADR” का अर्थ होगा – एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स या संसद द्वारा मान्यता प्राप्त कोई समकक्ष संस्था। 3. “गुप्त मतदान” का अर्थ होगा – ऐसा मतदान जिसमें मतदाता की पहचान सार्वजनिक न हो। --- धारा 3 – नियुक्ति समिति की संरचना समिति में कुल 7 सदस्य होंगे: 1. 2 वरिष्ठ वकील – एक बार काउंसिल ऑफ इंडिया से, एक राज्य बार काउंसिल से। 2. 2 सेवानिवृत्त न्यायाधीश – (सुप्रीम कोर्ट/हाईकोर्ट से, जिन्हें सेवानिवृत्ति के बाद कोई सरकारी पद न मिला हो)। 3. 2 स्वतंत्र संस्थान प्रतिनिधि – (भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) और लोकपाल)। 4. 1 ADR प्रतिनिधि – (या संसद द्वारा नामित कोई समकक्ष संस्था)। 👉 केंद्र सरकार का एक प्रतिनिधि केवल पर्यवेक्षक (Observer) होगा, उसे मतदान का अधिकार नहीं होगा। --- धारा 4 – नामांकन प्रक्रिया 1. योग्य उम्मीदवारों की सूची सार्वजनिक पोर्टल पर प्रकाशित की जाएगी। 2. ADR, मीडिया और नागरिक समाज आपत्तियाँ/फीडबैक दर्ज कर सकते हैं। 3. समिति सभी नामों की पारदर्शी जाँच करेगी (मेरिट, ईमानदारी, केस हिस्ट्री)। --- धारा 5 – चयन की प्रक्रिया 1. समिति गुप्त मतदान (Secret Ballot) से चयन करेगी। 2. निर्णय न्यूनतम 4/7 बहुमत से होगा। 3. सर्वाधिक मत पाने वाला उम्मीदवार न्यायाधीश नियुक्त होगा। 4. टाई की स्थिति में पुनः मतदान होगा। --- धारा 6 – पारदर्शिता उपाय 1. पूरी प्रक्रिया की वीडियो रिकॉर्डिंग होगी, जिसे सार्वजनिक नहीं किया जाएगा लेकिन संसद को सौंपा जाएगा। 2. नियुक्ति का परिणाम तुरंत सार्वजनिक किया जाएगा। 3. किसी भी प्रकार का दबाव, खरीद-फरोख्त या बाहरी प्रभाव दंडनीय अपराध होगा। --- धारा 7 – कार्यकाल और हटाने की प्रक्रिया 1. नियुक्त न्यायाधीश संविधान के अनुच्छेद 124 एवं 217 में वर्णित कार्यकाल तक पद पर रहेंगे। 2. उन्हें हटाने की प्रक्रिया केवल संसद के 2/3 बहुमत + समिति की सहमति से ही होगी। 3. सेवानिवृत्ति के बाद न्यायाधीश को कोई भी सरकारी पद (राज्यपाल, आयोग, ट्रिब्यूनल इत्यादि) नहीं दिया जाएगा। --- धारा 8 – विशेष प्रावधान 1. यदि समिति का कोई सदस्य उपलब्ध न हो, तो शेष सदस्यों की उपस्थिति में कार्यवाही होगी, बशर्ते कम से कम 5 सदस्य उपस्थित हों। 2. समिति की कार्यवाही का रिकॉर्ड सार्वजनिक पोर्टल पर सारांश रूप में उपलब्ध कराया जाएगा। --- 🔑 निष्कर्ष इस विधेयक से – जजों की नियुक्ति पारदर्शी और निष्पक्ष होगी। सरकार का नियंत्रण समाप्त होगा। ADR और स्वतंत्र संस्थाओं के जुड़ने से जनता का विश्वास बढ़ेगा। छोटे आकार की समिति होने से प्रक्रिया तेज़ और प्रभावी होगी। >>>>>>>>>>>>>>>>>>>>><<<<<<<<<<<<<<<<<<< >>> #सोचकर_देखो_शायद_समझ_जाओ <<< मैने जो प्रस्ताव रखा है, उससे वास्तव में पारदर्शिता और लोकतांत्रिक संतुलन आएगा: 1. सभी राजनीतिक दल (जिन्होंने कभी भी किसी राज्य या केंद्र में सरकार बनाई हो) इसमें शामिल हों। 2. प्रत्येक दल से एक-एक प्रतिनिधि आए। 3. मतदान गुप्त मतपत्र (ballot paper) से हो, ताकि दबाव न बने। 4. वोटिंग और गिनती CJI की देखरेख में तुरंत हो जाए। 5. CJI केवल पर्यवेक्षक हों, उन्हें मतदान का अधिकार न मिले। --- 🎯 इस प्रक्रिया से फायदे: नियुक्ति पर किसी एक पार्टी का कब्ज़ा नहीं रहेगा। हर बड़े दल की भागीदारी से सहमति आधारित CEC चुना जाएगा। गुप्त मतदान से दल-बदल या दबाव का खतरा नहीं रहेगा। जनता का भरोसा बढ़ेगा कि चुनाव आयोग सचमुच स्वतंत्र है। >>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>> 📜 प्रस्तावित कानून प्रारूप “मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्त (नियुक्ति एवं सेवा शर्तें) विधेयक” --- धारा 1 – संक्षिप्त नाम और प्रारंभ 1. इस अधिनियम को “चुनाव आयुक्त नियुक्ति (पारदर्शिता एवं निष्पक्षता) अधिनियम” कहा जाएगा। 2. यह पूरे भारत पर लागू होगा। --- धारा 2 – परिभाषाएँ 1. “CEC” का अर्थ होगा – मुख्य चुनाव आयुक्त। 2. “चुनाव समिति” का अर्थ होगा – सभी मान्यता प्राप्त राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय दलों के प्रतिनिधियों की समिति। 3. “CJI” का अर्थ होगा – भारत के मुख्य न्यायाधीश। --- धारा 3 – नियुक्ति समिति की संरचना 1. प्रत्येक राष्ट्रीय दल और प्रत्येक ऐसा राज्य स्तरीय दल जिसने कम से कम एक बार किसी राज्य में सरकार बनाई हो, उससे एक-एक प्रतिनिधि नियुक्ति समिति में होगा। 2. समिति की बैठक भारत के मुख्य न्यायाधीश की देखरेख में होगी। 3. मुख्य न्यायाधीश केवल पर्यवेक्षक (Observer) होंगे, उन्हें मतदान का अधिकार नहीं होगा। --- धारा 4 – नियुक्ति की प्रक्रिया 1. सभी योग्य उम्मीदवारों की सूची समिति को प्रस्तुत की जाएगी। 2. समिति के सभी सदस्य गुप्त मतपत्र (Secret Ballot) से मतदान करेंगे। 3. सर्वाधिक मत पाने वाला उम्मीदवार मुख्य चुनाव आयुक्त नियुक्त होगा। 4. यदि दो या अधिक उम्मीदवार बराबर मत पाते हैं, तो पुनः मतदान होगा। --- धारा 5 – पारदर्शिता उपाय 1. मतदान की प्रक्रिया की वीडियो रिकॉर्डिंग होगी, जिसे सार्वजनिक नहीं किया जाएगा लेकिन संसद को सौंपा जाएगा। 2. नियुक्ति का परिणाम तुरंत सार्वजनिक किया जाएगा। 3. किसी भी समिति सदस्य पर दबाव, खरीद-फरोख्त या बाहरी प्रभाव का प्रयास दंडनीय अपराध होगा। --- धारा 6 – कार्यकाल और हटाने की प्रक्रिया 1. मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य आयुक्त का कार्यकाल 6 वर्ष या 65 वर्ष की आयु (जो पहले हो) तक रहेगा। 2. हटाने की प्रक्रिया वही होगी जो वर्तमान में संविधान (अनुच्छेद 324) के तहत निर्धारित है। --- धारा 7 – विशेष प्रावधान 1. यदि किसी राष्ट्रीय या राज्यीय दल का प्रतिनिधि उपलब्ध न हो, तो उसकी अनुपस्थिति के बावजूद मतदान की प्रक्रिया चलेगी। 2. समिति की कार्यवाही का कोरम कम से कम 2/3 होना चाहिए। --- निष्कर्ष इस विधेयक से – चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति पर किसी एक पार्टी का नियंत्रण नहीं होगा और जनता का भरोसा सुनिश्चित होगा।
🏹जनता दल यूनाइटेड ✔️ - भारतीय इतिहास में २०१४ से लगातार विश्वस्तरीय बेइज्जती हो रही थी और रही सही कसर गलगोटिया ने पूरी कर दी, जिसे गोदी मिडिया तथा बीजेपी आईटी सेल के 2 रुपए वाले अंधभक्त मजदूर भी संभाल नही पाए अनपढ़ RSS भाजपाई और गलगोटिया के पास आउट गोदी मिडिया वाले एंकर असेंबल मोबाईल कंपनी तथा ग्लोबल समिट में अंतर तक नही कर पाए समझदार को इशारा काफी है भारतीय इतिहास में २०१४ से लगातार विश्वस्तरीय बेइज्जती हो रही थी और रही सही कसर गलगोटिया ने पूरी कर दी, जिसे गोदी मिडिया तथा बीजेपी आईटी सेल के 2 रुपए वाले अंधभक्त मजदूर भी संभाल नही पाए अनपढ़ RSS भाजपाई और गलगोटिया के पास आउट गोदी मिडिया वाले एंकर असेंबल मोबाईल कंपनी तथा ग्लोबल समिट में अंतर तक नही कर पाए समझदार को इशारा काफी है - ShareChat
#☝ मेरे विचार #🌐 राष्ट्रीय अपडेट #🤘My Status😎 #🙌 Never Give Up #🇮🇳मेरा भारत, मेरी शान 📜 “न्यायाधीश नियुक्ति (पारदर्शिता एवं स्वतंत्रता) विधेयक” --- धारा 1 – संक्षिप्त नाम और प्रारंभ 1. इस अधिनियम को “न्यायाधीश नियुक्ति (पारदर्शिता एवं स्वतंत्रता) अधिनियम, 20XX” कहा जाएगा। 2. यह पूरे भारत पर लागू होगा। --- धारा 2 – परिभाषाएँ 1. “समिति” का अर्थ होगा – नियुक्ति समिति (Appointment Committee) जो इस अधिनियम के अंतर्गत गठित होगी। 2. “ADR” का अर्थ होगा – एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स या संसद द्वारा मान्यता प्राप्त कोई समकक्ष संस्था। 3. “गुप्त मतदान” का अर्थ होगा – ऐसा मतदान जिसमें मतदाता की पहचान सार्वजनिक न हो। --- धारा 3 – नियुक्ति समिति की संरचना समिति में कुल 7 सदस्य होंगे: 1. 2 वरिष्ठ वकील – एक बार काउंसिल ऑफ इंडिया से, एक राज्य बार काउंसिल से। 2. 2 सेवानिवृत्त न्यायाधीश – (सुप्रीम कोर्ट/हाईकोर्ट से, जिन्हें सेवानिवृत्ति के बाद कोई सरकारी पद न मिला हो)। 3. 2 स्वतंत्र संस्थान प्रतिनिधि – (भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) और लोकपाल)। 4. 1 ADR प्रतिनिधि – (या संसद द्वारा नामित कोई समकक्ष संस्था)। 👉 केंद्र सरकार का एक प्रतिनिधि केवल पर्यवेक्षक (Observer) होगा, उसे मतदान का अधिकार नहीं होगा। --- धारा 4 – नामांकन प्रक्रिया 1. योग्य उम्मीदवारों की सूची सार्वजनिक पोर्टल पर प्रकाशित की जाएगी। 2. ADR, मीडिया और नागरिक समाज आपत्तियाँ/फीडबैक दर्ज कर सकते हैं। 3. समिति सभी नामों की पारदर्शी जाँच करेगी (मेरिट, ईमानदारी, केस हिस्ट्री)। --- धारा 5 – चयन की प्रक्रिया 1. समिति गुप्त मतदान (Secret Ballot) से चयन करेगी। 2. निर्णय न्यूनतम 4/7 बहुमत से होगा। 3. सर्वाधिक मत पाने वाला उम्मीदवार न्यायाधीश नियुक्त होगा। 4. टाई की स्थिति में पुनः मतदान होगा। --- धारा 6 – पारदर्शिता उपाय 1. पूरी प्रक्रिया की वीडियो रिकॉर्डिंग होगी, जिसे सार्वजनिक नहीं किया जाएगा लेकिन संसद को सौंपा जाएगा। 2. नियुक्ति का परिणाम तुरंत सार्वजनिक किया जाएगा। 3. किसी भी प्रकार का दबाव, खरीद-फरोख्त या बाहरी प्रभाव दंडनीय अपराध होगा। --- धारा 7 – कार्यकाल और हटाने की प्रक्रिया 1. नियुक्त न्यायाधीश संविधान के अनुच्छेद 124 एवं 217 में वर्णित कार्यकाल तक पद पर रहेंगे। 2. उन्हें हटाने की प्रक्रिया केवल संसद के 2/3 बहुमत + समिति की सहमति से ही होगी। 3. सेवानिवृत्ति के बाद न्यायाधीश को कोई भी सरकारी पद (राज्यपाल, आयोग, ट्रिब्यूनल इत्यादि) नहीं दिया जाएगा। --- धारा 8 – विशेष प्रावधान 1. यदि समिति का कोई सदस्य उपलब्ध न हो, तो शेष सदस्यों की उपस्थिति में कार्यवाही होगी, बशर्ते कम से कम 5 सदस्य उपस्थित हों। 2. समिति की कार्यवाही का रिकॉर्ड सार्वजनिक पोर्टल पर सारांश रूप में उपलब्ध कराया जाएगा। --- 🔑 निष्कर्ष इस विधेयक से – जजों की नियुक्ति पारदर्शी और निष्पक्ष होगी। सरकार का नियंत्रण समाप्त होगा। ADR और स्वतंत्र संस्थाओं के जुड़ने से जनता का विश्वास बढ़ेगा। छोटे आकार की समिति होने से प्रक्रिया तेज़ और प्रभावी होगी। >>>>>>>>>>>>>>>>>>>>><<<<<<<<<<<<<<<<<<< >>> #सोचकर_देखो_शायद_समझ_जाओ <<< मैने जो प्रस्ताव रखा है, उससे वास्तव में पारदर्शिता और लोकतांत्रिक संतुलन आएगा: 1. सभी राजनीतिक दल (जिन्होंने कभी भी किसी राज्य या केंद्र में सरकार बनाई हो) इसमें शामिल हों। 2. प्रत्येक दल से एक-एक प्रतिनिधि आए। 3. मतदान गुप्त मतपत्र (ballot paper) से हो, ताकि दबाव न बने। 4. वोटिंग और गिनती CJI की देखरेख में तुरंत हो जाए। 5. CJI केवल पर्यवेक्षक हों, उन्हें मतदान का अधिकार न मिले। --- 🎯 इस प्रक्रिया से फायदे: नियुक्ति पर किसी एक पार्टी का कब्ज़ा नहीं रहेगा। हर बड़े दल की भागीदारी से सहमति आधारित CEC चुना जाएगा। गुप्त मतदान से दल-बदल या दबाव का खतरा नहीं रहेगा। जनता का भरोसा बढ़ेगा कि चुनाव आयोग सचमुच स्वतंत्र है। >>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>> 📜 प्रस्तावित कानून प्रारूप “मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्त (नियुक्ति एवं सेवा शर्तें) विधेयक” --- धारा 1 – संक्षिप्त नाम और प्रारंभ 1. इस अधिनियम को “चुनाव आयुक्त नियुक्ति (पारदर्शिता एवं निष्पक्षता) अधिनियम” कहा जाएगा। 2. यह पूरे भारत पर लागू होगा। --- धारा 2 – परिभाषाएँ 1. “CEC” का अर्थ होगा – मुख्य चुनाव आयुक्त। 2. “चुनाव समिति” का अर्थ होगा – सभी मान्यता प्राप्त राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय दलों के प्रतिनिधियों की समिति। 3. “CJI” का अर्थ होगा – भारत के मुख्य न्यायाधीश। --- धारा 3 – नियुक्ति समिति की संरचना 1. प्रत्येक राष्ट्रीय दल और प्रत्येक ऐसा राज्य स्तरीय दल जिसने कम से कम एक बार किसी राज्य में सरकार बनाई हो, उससे एक-एक प्रतिनिधि नियुक्ति समिति में होगा। 2. समिति की बैठक भारत के मुख्य न्यायाधीश की देखरेख में होगी। 3. मुख्य न्यायाधीश केवल पर्यवेक्षक (Observer) होंगे, उन्हें मतदान का अधिकार नहीं होगा। --- धारा 4 – नियुक्ति की प्रक्रिया 1. सभी योग्य उम्मीदवारों की सूची समिति को प्रस्तुत की जाएगी। 2. समिति के सभी सदस्य गुप्त मतपत्र (Secret Ballot) से मतदान करेंगे। 3. सर्वाधिक मत पाने वाला उम्मीदवार मुख्य चुनाव आयुक्त नियुक्त होगा। 4. यदि दो या अधिक उम्मीदवार बराबर मत पाते हैं, तो पुनः मतदान होगा। --- धारा 5 – पारदर्शिता उपाय 1. मतदान की प्रक्रिया की वीडियो रिकॉर्डिंग होगी, जिसे सार्वजनिक नहीं किया जाएगा लेकिन संसद को सौंपा जाएगा। 2. नियुक्ति का परिणाम तुरंत सार्वजनिक किया जाएगा। 3. किसी भी समिति सदस्य पर दबाव, खरीद-फरोख्त या बाहरी प्रभाव का प्रयास दंडनीय अपराध होगा। --- धारा 6 – कार्यकाल और हटाने की प्रक्रिया 1. मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य आयुक्त का कार्यकाल 6 वर्ष या 65 वर्ष की आयु (जो पहले हो) तक रहेगा। 2. हटाने की प्रक्रिया वही होगी जो वर्तमान में संविधान (अनुच्छेद 324) के तहत निर्धारित है। --- धारा 7 – विशेष प्रावधान 1. यदि किसी राष्ट्रीय या राज्यीय दल का प्रतिनिधि उपलब्ध न हो, तो उसकी अनुपस्थिति के बावजूद मतदान की प्रक्रिया चलेगी। 2. समिति की कार्यवाही का कोरम कम से कम 2/3 होना चाहिए। --- निष्कर्ष इस विधेयक से – चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति पर किसी एक पार्टी का नियंत्रण नहीं होगा और जनता का भरोसा सुनिश्चित होगा।
☝ मेरे विचार - भारतीय इतिहास में २०१४ से लगातार विश्वस्तरीय बेइज्जती हो रही थी और रही सही कसर गलगोटिया ने पूरी कर दी, जिसे गोदी मिडिया तथा बीजेपी आईटी सेल के 2 रुपए वाले अंधभक्त मजदूर भी संभाल नही पाए अनपढ़ RSS भाजपाई और गलगोटिया के पास आउट गोदी मिडिया वाले एंकर असेंबल मोबाईल कंपनी तथा ग्लोबल समिट में अंतर तक नही कर पाए समझदार को इशारा काफी है भारतीय इतिहास में २०१४ से लगातार विश्वस्तरीय बेइज्जती हो रही थी और रही सही कसर गलगोटिया ने पूरी कर दी, जिसे गोदी मिडिया तथा बीजेपी आईटी सेल के 2 रुपए वाले अंधभक्त मजदूर भी संभाल नही पाए अनपढ़ RSS भाजपाई और गलगोटिया के पास आउट गोदी मिडिया वाले एंकर असेंबल मोबाईल कंपनी तथा ग्लोबल समिट में अंतर तक नही कर पाए समझदार को इशारा काफी है - ShareChat