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🚩भगवा की ताकत के आगे, ब्रम्हांड भी सर झुकाता हैं,
🔥"कलयुग" की शुरुआत कैसे हुई जानिए शास्त्रसम्मत सत्य।।🙏🚩 सादर प्रणाम! क्या आपको पता है कि कलयुग की शुरुआत कैसे हुई थी? अगर नहीं पता तो पोस्ट को पढ़िए जानिए सारा सत्य। 👇 शास्त्र (मुख्यतः श्रीमद्भागवत पुराण और महाभारत) के अनुसार कलयुग की शुरुआत की घटना और स्थान का सटीक वर्णन यहाँ दिया गया है: ​॥ कलयुग का प्राकट्य: स्थान और प्रमाण ॥ ​कलयुग की शुरुआत केवल समय से नहीं, बल्कि एक विशेष स्थान और घटना से जुड़ी है। ​1. शुरुआत कहाँ से हुई? (स्थान का प्रमाण) महाभारत के अनुसार, कलयुग का प्रथम प्रवेश 'सरस्वती नदी' के तट पर हुआ था। जब कुरुक्षेत्र युद्ध के बाद पांडव हिमालय चले गए, तब अभिमन्यु के पुत्र राजा परीक्षित सरस्वती नदी के किनारे टहल रहे थे। वहाँ उन्होंने एक अत्यंत हृदयविदारक दृश्य देखा। ​धर्म रूपी बैल और पृथ्वी रूपी गाय: वहां एक सफेद बैल खड़ा था, जिसके तीन पैर कटे हुए थे और वह केवल एक पैर पर कांपते हुए खड़ा था। उसके पास ही एक गाय खड़ी थी, जो अत्यंत दुर्बल थी और उसकी आँखों में आँसू थे। ​बैल कौन था? वह स्वयं 'धर्म' था। ​गाय कौन थी? वह स्वयं 'पृथ्वी' माता थी। ​धर्म के चार चरण (पैर): सतयुग में धर्म के चार पैर थे— सत्य, तप, पवित्रता और दान। ​त्रेतायुग में अधर्म के प्रभाव से 'तप' रूपी पैर कट गया। ​द्वापरयुग में 'पवित्रता' रूपी पैर भी समाप्त हो गया। ​कलयुग के आगमन पर केवल 'सत्य' का एक पैर शेष रह गया था। ​कलि का प्रहार: राजा परीक्षित ने देखा कि एक शूद्र वेशधारी राजा (जो स्वयं कलयुग था) अपने हाथ में डंडा लेकर उस बैल के अंतिम पैर 'सत्य' को भी तोड़ने का प्रयास कर रहा था और गाय (पृथ्वी) को लात मार रहा था। ​राजा परीक्षित का क्रोध और कलि का आत्मसमर्पण: यह देखकर राजा परीक्षित अत्यंत क्रोधित हुए और उन्होंने अपनी तलवार निकाल ली। उन्होंने कलि से कहा— "मेरे राज्य में गौवंश और धर्म पर प्रहार करने वाले का वध निश्चित है!" मृत्यु को निकट देख कलि राजा के चरणों में गिर गया और प्राणों की भीख मांगने लगा। ​कलयुग को मिले पांच स्थान: शरणागत की रक्षा करना क्षत्रिय धर्म है, इसलिए परीक्षित ने उसे मारा नहीं, बल्कि रहने के लिए पांच स्थान दिए: ​द्यूतं (जुआ) ​पानं (मदिरा/नशा) ​स्त्रिय: (अनैतिक संबंध) ​सूना (हिंसा/पशु वध) ​सुवर्ण (अन्याय से कमाया सोना) ​निष्कर्ष: जैसे ही कलयुग ने राजा के स्वर्ण मुकुट में प्रवेश किया, धर्म का ह्रास बढ़ गया। आज हम जिस युग में हैं, वहाँ धर्म केवल 'सत्य' के एक कमजोर पैर पर टिका है, जिसे बचाना हम सबका कर्तव्य है। ​🌟 फेसबुक के लिए विशेष: ​Like: यदि आप धर्म की रक्षा के संकल्प के साथ हैं।👍❤️ ​Comment: कलयुग के इस अंधकार में उजाले के लिए लिखें— 'जय श्री कृष्ण'। 💬 ​Share: इस महान कथा को साझा करें ताकि लोग अधर्म के स्थानों (नशा, जुआ आदि) से दूर रहें। 🔄 ​धर्म की इस गूढ़ जानकारी को जन-जन तक पहुँचाएं। 🔄 ​Follow: शास्त्रों के प्रामाणिक ज्ञान और सनातन धर्म की गहराई जानने के लिए हमसे जुड़ें। . !! जय जय श्री राधे-कृष्ण !! ➳ᴹᴿ̶᭄K̶u̶m̶a̶r̶ ̶R̶a̶u̶n̶a̶k̶ ̶K̶a̶s̶h̶y̶a̶p̶ ऐसी ही अनेकानेक पोस्ट पाने के लिये हमारे फेसबुक पेज ‘शिव पुराण ’ को फॉलो और लाईक करें हमारा पेज का लिंक हमारी फेसबुक पर देखें। फेसबुक लिंक– https://www.facebook.com/share/16z3CgT2xK/ #🙏 जय माँ दुर्गा 🙏 #🙏🌺जय बजरंगबली🌺🙏 #🔱हर हर महादेव #🚩जय श्रीराम🙏 #🌷शुभ रविवार https://www.facebook.com/share/17k2bcrKp8/
🙏 जय माँ दुर्गा 🙏 - Il धर्म का पतन और कलयुग का आगमन |l Il धर्म का पतन और कलयुग का आगमन |l - ShareChat
यह कहानी सीता माता कहती थी और श्रीराम इसे सुना करते थे। एक दिन श्रीराम भगवान को किसी काम के लिए बाहर जाना पड़ गया तो सीता माता कहने लगी कि भगवान मेरा तो बारह वर्ष का नितनेम (नित्य नियम) है। अब आप बाहर जाएंगे तो मैं अपनी कहानी किसे सुनाऊंगी? श्रीराम ने कहा कि तुम कुएं की पाल पर जाकर बैठ जाना और वहां जो औरतें पानी भरने आएंगी उन्हें अपनी कहानी सुना देना। सीता माता कुएं की पाल पर जाकर बैठ जाती हैं। एक स्त्री आई उसने रेशम की जरी की साड़ी पहन रखी थी और सोने का घड़ा ले रखा था। सीता माता उसे देख कहती हैं कि बहन मेरा बारह वर्ष का नितनेम सुन लो। पर वह स्त्री बोली कि मैं तुम्हारा नितनेम सुनूंगीं तो मुझे घर जाने में देर हो जाएगी और मेरी सास मुझसे लड़ेगी। उसने कहानी नहीं सुनी और चली गई। उसकी रेशम जरी की साड़ी फट गई, सोने का घड़ा मिट्टी के घड़े में बदल गया। सास ने देखा तो पूछा कि ये किस का दोष अपने सिर लेकर आ गई है? बहू ने कहा कि कुएं पर एक औरत बैठी थी उसने कहानी सुनने के लिए कहा लेकिन मैने सुनी नही जिसका यह फल मिला। बहू की बात सुनकर अगले दिन वही साड़ी और घड़ा लेकर सास कुएं की पाल पर गई। सास को वहीं माता सीता बैठी मिलीं तो माता सीता ने कहा कि बहन मेरी कहानी सुन लीजिए... सास बोली कि एक बार छोड़, मैं तो चार बार कहानी सुन लूंगी... . राम आए लक्ष्मण आए देश के पुजारी आए नितनेम का नेम लाए आओ राम बैठो राम तपी रसोई जियो राम, माखन मिसरी खाओ राम दूध बताशा पियो राम,सूत के पलका मोठो राम शाल दुशाला पोठो राम, शाल दुशाला ओढ़ो राम जब बोलूं जब राम ही राम, राम संवारें सब के काम खाली घर भंडार भरेंगे सब का बेड़ा पार करेंगे श्री राम जय राम जय-जय राम सास बोली कि बहन कहानी तो बहुत अच्छी लगी। कहानी सुनकर सास घर चली गई और उसकी साड़ी फिर से रेशम जरी की बन गई। मिट्टी का घड़ा फिर सोने के घड़े में बदल गया। बहू कहने लगी सासू मां, आपने ये सब कैसे किया? सास ने कहा कि बहू तू दोष लगा के आई थी और मैं अब दोष उतारकर आ रही हूं. . . बहू ने फिर पूछा कि वह कुएं वाली स्त्री कौन है? सास बोली कि वे सीता माता थीं... वे पुराने से नया कर देती हैं, खाली घर में भंडार भर देती हैं, वह लक्ष्मी जी का वास घर में कर देती हैं, आदमी की जो भी इच्छा हो उसे पूरा कर देती हैं.... बहू बोली कि ऎसी कहानी मुझे भी सुना दो.... सास बोली कि ठीक है तुम भी सुनो और सास ने कहानी शुरु की... राम आए लक्ष्मण आए देश के पुजारी आए नितनेम का नेम लाए आओ राम बैठो राम तपी रसोई जियो राम, माखन मिसरी खाओ राम दूध बताशा पियो राम,सूत के पलका मोठो राम शाल दुशाला पोठो राम, शाल दुशाला ओढ़ो राम जब बोलूं जब राम ही राम, राम संवारें सब के काम खाली घर भंडार भरेंगे सब का बेड़ा पार करेंगे श्री राम जय राम जय-जय राम कहानी सुनकर बहू बोली कि कहानी तो बहुत अच्छी है.. .. सास ने कहा कि ठीक है इस कहानी को रोज कहा करेगें। अब सास-बहू रोज सवेरे उठती, नहाती-धोती और पूजा करने के बाद नितनेम की सीता की कहानी कहती। एक दिन उनके यहां एक पड़ोस की औरत आई और बोली कि बहन जरा सी आंच देना तो वह बोली कि आंच तो अभी हमने जलाई ही नहीं। पड़ोसन ने कहा कि तुम सुबह चार बजे से उठकर क्या कर रही हो फिर? उन्होंने कहा कि सुबह उठकर हम पूजा करते हैं फिर सीता माता की नितनेम की कहानी कहते हैं। पड़ोसन ने उनकी बात सुनकर फिर कहा कि सीता माता की कहानी कहने से तुम्हें क्या मिला? वे बोली कि इनकी कहानी कहने से घर में भंडार भर जाते हैं। सारे काम सिद्ध होते हैं, मन की इच्छा भी पूरी होती है। पड़ोसन कहती है कि बहन ऎसी कहानी तो मुझे भी सुना दो फिर। वह बोली कि ठीक है तुम भी यह कहानी सुन लो... राम आए लक्ष्मण आए देश के पुजारी आए नितनेम का नेम लाए आओ राम बैठो राम …………….. सारी कहानी सुनने के बाद पड़ोसन कहने लगी बहन कहानी तो मुझे बहुत अच्छी लगी। अब वह पड़ोसन भी नितनेम सीता माता की कहानी कहने लगी। कहानी कहने से सीता माता ने पड़ोसन के भी भंडार भर दिए। अब तो पूरे मोहल्ले में नितनेम की कथा चल पड़ी.. हर किसी की मनोकामना पूरी होने लगी... हे सीता माता ! जैसे आपने उनके भंडार भरे, वैसे ही आप हमारे भी भंडार भरना। कहानी सुनने वाले के भी और कहानी कहने वाले के भी। उत्तरप्रदेश, बिहार, हिमाचल प्रदेश और हरियाणा के कुछ क्षेत्रों में आज भी यह कथा सीता जयंती पर चाव से सुनाई जाती है.. . !! जय जय श्री राम !! ➳ᴹᴿ̶᭄K̶u̶m̶a̶r̶ ̶R̶a̶u̶n̶a̶k̶ ̶K̶a̶s̶h̶y̶a̶p̶ ऐसी ही अनेकानेक पोस्ट पाने के लिये हमारे फेसबुक पेज ‘शिव पुराण ’ को फॉलो और लाईक करें हमारा पेज का लिंक हमारी फेसबुक पर देखें। फेसबुक लिंक– https://www.facebook.com/share/16z3CgT2xK/ #🌷शुभ रविवार #🚩जय श्रीराम🙏 #🔱हर हर महादेव #🙏 जय माँ दुर्गा 🙏 #🙏🌺जय बजरंगबली🌺🙏 https://www.facebook.com/share/17k2bcrKp8/
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🌸 प्रभु श्रीराम की शरणागति और सरल भक्ति 🌸 चौपाई: भृकुटि बिलास नचावइ ताही। अस प्रभु छाड़ि भजिअ कहु काही॥ मन क्रम बचन छाड़ि चतुराई। भजत कृपा करिहहिं रघुराई॥ 🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸 सुंदर भावार्थ: इस चौपाई में गोस्वामी तुलसीदास जी प्रभु श्रीराम की असीम सत्ता और उनकी सहज दयालुता का वर्णन कर रहे हैं। १. प्रभु की माया और सामर्थ्य: जो अपनी भौहों के मात्र एक इशारे (भृकुटि बिलास) से इस समस्त जगत और काल (समय) को नचाते हैं, जिनकी इच्छा के बिना पत्ता भी नहीं हिलता—ऐसे परम शक्तिशाली और समर्थ प्रभु को छोड़कर भला और किसकी शरण में जाया जाए? २. भक्ति का सरल मार्ग: भगवान को रिझाने के लिए किसी बड़े आडंबर या चालाकी की आवश्यकता नहीं है। प्रभु केवल सरलता के भूखे हैं। ३. पूर्ण समर्पण: यदि हम अपने मन, कर्म और वाणी से सारी चतुराई (अभिमान और कपट) त्यागकर प्रभु की शरण में जाते हैं, तो वह 'रघुराई' अत्यंत शीघ्र अपने भक्त पर दया करते हैं और उसे अपना लेते हैं। ⚜️🏹⚜️🏹⚜️🏹⚜️🏹⚜️🏹⚜️🏹⚜️🏹 निष्कर्ष: संसार की उलझनों और चतुराइयों को प्रभु के चरणों में समर्पित कर दें। जब हृदय निर्मल और कपट रहित होता है, तब रघुनाथ जी की कृपा स्वतः ही बरसने लगती है। 🚩 ॥ जय श्री राम ॥ 🚩 🚩 ॥ जय गोस्वामी तुलसीदास ॥ 🚩 . !! जय जय श्री राम !! ➳ᴹᴿ̶᭄K̶u̶m̶a̶r̶ ̶R̶a̶u̶n̶a̶k̶ ̶K̶a̶s̶h̶y̶a̶p̶ ऐसी ही अनेकानेक पोस्ट पाने के लिये हमारे फेसबुक पेज ‘शिव पुराण ’ को फॉलो और लाईक करें हमारा पेज का लिंक हमारी फेसबुक पर देखें। फेसबुक लिंक– https://www.facebook.com/share/16z3CgT2xK/ #🙏🌺जय बजरंगबली🌺🙏 #🙏 जय माँ दुर्गा 🙏 #🌷शुभ रविवार #🚩जय श्रीराम🙏 #🔱हर हर महादेव https://www.facebook.com/share/17k2bcrKp8/
🙏🌺जय बजरंगबली🌺🙏 - हनूमान सम नहिं बड़भागी। अनुरागी। नहिं कोउ राम चरन गिरिजा जासु प्रीति सेवकाई। बार बार प्रभु निज मुख गाई। हनूमान सम नहिं बड़भागी। अनुरागी। नहिं कोउ राम चरन गिरिजा जासु प्रीति सेवकाई। बार बार प्रभु निज मुख गाई। - ShareChat
हनूमान सम नहिं बड़भागी। नहिं कोउ राम चरन अनुरागी। गिरिजा जासु प्रीति सेवकाई। बार बार प्रभु निज मुख गाई। 🌸🏵️🌸🏵️🌸🏵️🌸🏵️🌸🏵️🌸🏵️🏵️🌸 (शिवजी कहते हैं) हे गिरिजे! हनुमान जी के समान न तो कोई बड़भागी है और न कोई श्री राम जी के चरणों का प्रेमी ही है, जिनके प्रेम और सेवा की (स्वयं) प्रभु ने अपने श्रीमुख से बार-बार बढ़ाई की है। 🏵️🌸🏵️🌸🏵️🌸🏵️🌸🏵️🌸🏵️🌸🏵️🌸 जय बजरंगबली 🙏 जय जय सियाराम 🚩 . !! जय जय श्री राम !! ➳ᴹᴿ̶᭄K̶u̶m̶a̶r̶ ̶R̶a̶u̶n̶a̶k̶ ̶K̶a̶s̶h̶y̶a̶p̶ ऐसी ही अनेकानेक पोस्ट पाने के लिये हमारे फेसबुक पेज ‘शिव पुराण ’ को फॉलो और लाईक करें हमारा पेज का लिंक हमारी फेसबुक पर देखें। फेसबुक लिंक– https://www.facebook.com/share/16z3CgT2xK/ #🔱हर हर महादेव #🚩जय श्रीराम🙏 #🌷शुभ रविवार #🙏🌺जय बजरंगबली🌺🙏 #🙏 जय माँ दुर्गा 🙏 https://www.facebook.com/share/17k2bcrKp8/
🔱हर हर महादेव - सीता की रामनराम Hcm प्रतीशा लआप्सा नगररी णिव॰पार्वती नृत्य नन 463 ಊದ रामःनान की रामनाम अयोध्या नगरी जी सोए हुए हनुमान सीता की रामनराम Hcm प्रतीशा लआप्सा नगररी णिव॰पार्वती नृत्य नन 463 ಊದ रामःनान की रामनाम अयोध्या नगरी जी सोए हुए हनुमान - ShareChat
🔥 संसार की सबसे महान प्रेम कथा: जिसके वियोग ने '51 शक्तिपीठों' को जन्म दिया! 🔱 हम अक्सर सांसारिक प्रेम की बातें करते हैं, लेकिन क्या आपने कभी उस 'महाप्रेम' को महसूस किया है जिसके छिन जाने पर खुद भगवान बेसुध हो गए थे? जिसने सृष्टि की परिक्रमा ही रोक दी थी? यह कहानी है माता सती और महादेव के उसी अलौकिक प्रेम और भयंकर वियोग की... 🌸 ✨ एक हठ और पिता का अहंकार: जब माता सती ने पिता राजा दक्ष के महायज्ञ में बिना निमंत्रण जाने की जिद की, तो भोलेनाथ ने समझाया था— "विवाहिता को बिना बुलाए पिता के घर नहीं जाना चाहिए।" लेकिन बहनों और पिता के मोह में सती जी न मानीं। यज्ञ में पहुँचकर जो उन्होंने देखा, वह उनके हृदय को चीर गया। वहां हर देवता का सम्मान था, सिवाय उनके प्राणनाथ 'कैलाशपति' के! 😔 ✨ सती का क्रोध और आत्मदाह: पिता दक्ष द्वारा शिव जी को 'श्मशानवासी' और 'अघोरी' कहकर अपमानित करने पर सती का मुखमंडल प्रलय के सूर्य सा दहक उठा। उन्होंने भरी सभा में सिंहनी सी गर्जना की— "नारी के लिए उसका पति ही उसका सर्वस्व है। मेरे स्वामी के इस अपमान के बाद मैं एक क्षण भी जीवित नहीं रहना चाहती!" और यह कहते हुए सती ने धू-धू करते यज्ञ कुंड में छलांग लगा दी। 🔥 ✨ जब प्रलयंकार भी रो पड़े... सती के प्राण त्यागने की खबर से महादेव अपना सुध-बुध खो बैठे। जो कामदेव को भस्म कर सकते थे, जो पूरी सृष्टि के संहारक और रक्षक थे... वे अपनी सती के जले हुए शरीर को कंधे पर उठाकर पागलों की तरह पूरे ब्रह्मांड में भटकने लगे। उनके रुदन से पृथ्वी कांप उठी, हवाएं रुक गईं, देवताओं की सांसें अटक गईं! 🌪️ ✨ शक्तिपीठों का उदय: सृष्टि को इस महाप्रलय से बचाने के लिए भगवान विष्णु ने अपने सुदर्शन चक्र से माता सती के शरीर के अंग काटे। धरती पर जहां-जहां वे अंग गिरे, वहां 'शक्तिपीठ' स्थापित हुए, जो आज भी हमारी आस्था का सबसे बड़ा केंद्र हैं। 🙏 सार: शिव और सती का यह आख्यान बताता है कि स्वाभिमान से समझौता कभी नहीं करना चाहिए। और सच्चा प्रेम कभी मरता नहीं, वह वंदनीय होकर युगों-युगों तक पूजा जाता है। ❤️ क्या आपको शिव-सती का यह प्रसंग भावुक करता है? 👇 कमेंट में एक बार पूरी श्रद्धा से लिखें: "हर हर महादेव" या "जय माता दी" 🌺 . !! जय जय श्री महाकाली !! ➳ᴹᴿ̶᭄K̶u̶m̶a̶r̶ ̶R̶a̶u̶n̶a̶k̶ ̶K̶a̶s̶h̶y̶a̶p̶ ऐसी ही अनेकानेक पोस्ट पाने के लिये हमारे फेसबुक पेज ‘शिव पुराण ’ को फॉलो और लाईक करें हमारा पेज का लिंक हमारी फेसबुक पर देखें। फेसबुक लिंक– https://www.facebook.com/share/16z3CgT2xK/ #🚩जय श्रीराम🙏 #🙏 जय माँ दुर्गा 🙏 #🌷शुभ रविवार #✋भगवान भैरव🌸 #🔱हर हर महादेव https://www.facebook.com/share/17k2bcrKp8/
🚩जय श्रीराम🙏 - दक्ष का महायज्ञ सती अपने पिता द३ा के भव्य यज्ज मैं पढ़ुँबती है॰ जहाँ महादेव को आनंत्रित  दक्ष! अपमान और दुःख दक्ष भरी सभा में महादेव का घोर अपमान करते हैं जिससे सती को गहरा दुःख होता है। सती का योगनिद्रा में आत्मदाह अपमान सहन न कर पाने पर, सती योगाग्नि द्वारा अपने शरीर को यज्ञ में भस्म कर देती हैं। वीरभद्र का विनाशकारी तांडव सती के आत्मदाह से क्रोधित महादेव वीरभद्न को उत्पन्न करते हें, जो यज्ञ का विध्वंस करते हैं। शिव का व्याकुल वियोग महादेव वियोग में व्याकुल होकर सती के मृत शरीर को कंधे पर लेकर तांडव करते हुए भटकते हैं। सुदर्शन चक्र और शक्तिपीठों की उत्पत्ति सृष्टि बचाने के लिए विष्णु सुदर्शन चक्र से सती के शरीर को काटते हैं जहाँ ज्हाँ अंग गिरे, वहाँ ५१ शक्तिपीठ बने। दक्ष का महायज्ञ सती अपने पिता द३ा के भव्य यज्ज मैं पढ़ुँबती है॰ जहाँ महादेव को आनंत्रित  दक्ष! अपमान और दुःख दक्ष भरी सभा में महादेव का घोर अपमान करते हैं जिससे सती को गहरा दुःख होता है। सती का योगनिद्रा में आत्मदाह अपमान सहन न कर पाने पर, सती योगाग्नि द्वारा अपने शरीर को यज्ञ में भस्म कर देती हैं। वीरभद्र का विनाशकारी तांडव सती के आत्मदाह से क्रोधित महादेव वीरभद्न को उत्पन्न करते हें, जो यज्ञ का विध्वंस करते हैं। शिव का व्याकुल वियोग महादेव वियोग में व्याकुल होकर सती के मृत शरीर को कंधे पर लेकर तांडव करते हुए भटकते हैं। सुदर्शन चक्र और शक्तिपीठों की उत्पत्ति सृष्टि बचाने के लिए विष्णु सुदर्शन चक्र से सती के शरीर को काटते हैं जहाँ ज्हाँ अंग गिरे, वहाँ ५१ शक्तिपीठ बने। - ShareChat
🌾 एक महाश्मशान... जो बन गया पूरे ब्रह्मांड की 'रसोई'! क्या आप जानते हैं कैसे? ✨ हम सब जानते हैं कि काशी मोक्ष की नगरी है, बाबा विश्वनाथ का श्मशान है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि राख और भस्म के इस शहर में कभी कोई भूखा क्यों नहीं सोता? इसके पीछे महादेव और माता पार्वती की एक बेहद रोचक 'पारिवारिक' कथा है! 👇 🌸 जब माँ पार्वती ने बसाई अपनी 'गृहस्थी': विवाह के बाद जब महादेव माता पार्वती को अपने सनातन गृह 'काशी' लेकर आए, तो वह जगह केवल एक भयंकर महाश्मशान थी। किसी भी सामान्य नवविवाहिता स्त्री की तरह, माता भवानी को अपना घर सिर्फ एक 'श्मशान' होना बिल्कुल नहीं भाया! तब ब्रह्मांड के भरण-पोषण के लिए एक अद्भुत देव-व्यवस्था बनी— यह तय हुआ कि सतयुग, त्रेता और द्वापर में काशी भले ही श्मशान रहे, लेकिन कलियुग में यह 'माँ अन्नपूर्णा की पुरी' होकर बसेगी! 🍛 जहाँ खुद महादेव मांगते हैं भिक्षा: आज काशीवासियों के योग-क्षेम का पूरा भार माँ अन्नपूर्णा (भवानी) के ही कंधों पर है। उनका वात्सल्य इतना विराट है कि भगवान शिव कहते हैं— "मैं अपने पांचों मुखों से भी अन्नपूर्णा का पूरा गुणगान नहीं कर सकता।" जहाँ विश्वनाथ तारक-मंत्र देकर 'मुक्ति' देते हैं, वहीं महादेव स्वयं माता के सामने भिक्षुक बनकर ज्ञान और वैराग्य मांगते हैं: "अन्नपूर्णे सदा पूर्णे शङ्करप्राणवल्लभे। ज्ञान-वैराग्य-सिद्धयर्थम् भिक्षाम् देहि च पार्वति॥" ✨ माँ का अलौकिक और करुणामयी स्वरूप: कल्पना कीजिए... रक्त वर्ण, अनुपम लावण्य, मस्तक पर बालचंद्र और स्वर्ण सिंहासन पर विराजमान माँ! उनके एक हाथ में अन्न से भरा माणिक्य पात्र है और दूसरे में रत्नों की कलछूल। वह सिर्फ संसार का पेट ही नहीं भरतीं, बल्कि जन्मों की दरिद्रता मिटाकर मोक्ष भी प्रदान करती हैं। 🙏 जो भी व्यक्ति पूरे वात्सल्य और भक्ति-भाव से माता का अपने घर में आवाहन करता है, माँ सूक्ष्म रूप से वहां हमेशा वास करती हैं। उनके रहते घर में कभी धन-धान्य की कमी नहीं होती। क्या आपके घर की रसोई में भी माँ अन्नपूर्णा का वास है? 👇 कमेंट में पूरी श्रद्धा और प्रेम से लिखें: "जय माँ अन्नपूर्णा" 🌺 . !! जय जय श्री महाकाली !! ➳ᴹᴿ̶᭄K̶u̶m̶a̶r̶ ̶R̶a̶u̶n̶a̶k̶ ̶K̶a̶s̶h̶y̶a̶p̶ ऐसी ही अनेकानेक पोस्ट पाने के लिये हमारे फेसबुक पेज ‘शिव पुराण ’ को फॉलो और लाईक करें हमारा पेज का लिंक हमारी फेसबुक पर देखें। फेसबुक लिंक– https://www.facebook.com/share/16z3CgT2xK/ #🙏 जय माँ दुर्गा 🙏 #🌷शुभ रविवार #✋भगवान भैरव🌸 #🚩जय श्रीराम🙏 #🔱हर हर महादेव https://www.facebook.com/share/17k2bcrKp8/
🙏 जय माँ दुर्गा 🙏 - अन्जपूर्णा [[| ২ 1 दारिद्रवदमनीनित्यमुख गोद प्रदाविनी।l शोविणीसर्वपापानांमोवनी सकलापदाम। अन्न्नपूर्णेसदा पूर्णेशङ्ककरप्राणवल्लभे। ज्ञान वैराग्य सिद्धवयर्थम् भिक्षाम्देहिचपार्वति।। अन्जपूर्णा [[| ২ 1 दारिद्रवदमनीनित्यमुख गोद प्रदाविनी।l शोविणीसर्वपापानांमोवनी सकलापदाम। अन्न्नपूर्णेसदा पूर्णेशङ्ककरप्राणवल्लभे। ज्ञान वैराग्य सिद्धवयर्थम् भिक्षाम्देहिचपार्वति।। - ShareChat
🌍 क्या कोलंबस से पहले ही भारतीयों ने खोज लिया था अमेरिका? महाभारत काल की हैरान करने वाली 'ग्लोबल कनेक्टिविटी'! ✈️ हमेशा से बताया जाता है कि अमेरिका की खोज कोलंबस ने की, लेकिन हमारे प्राचीन ग्रंथों और महाभारत की कथाओं पर नज़र डालें तो एक अलग ही तस्वीर सामने आती है। क्या वाकई प्राचीन काल में भारत पूरी दुनिया से जुड़ा हुआ था? आइए जानते हैं कुछ बेहद दिलचस्प और चौंकाने वाले दावे: 🤯 ✨ मय दानव और माया सभ्यता (Mayan Civilization): पांडवों के लिए इंद्रप्रस्थ का निर्माण करने वाले 'मय दानव' को ही कई लोग मध्य अमेरिका की प्रसिद्ध 'माया सभ्यता' का जनक मानते हैं! कहा जाता है कि उनके प्राचीन ग्रंथ 'पोपोल वूह' और हमारे वेदों में देवासुर संग्राम जैसी कई समानताएं हैं। ✨ नामों का अद्भुत संयोग: क्या आप जानते हैं कि कुछ मान्यताओं के अनुसार 'कनाडा' का नाम महर्षि कणाद के नाम पर और 'अर्जेंटीना' का नाम 'अर्जुन-स्थान' से प्रेरित माना जाता है? ✨ विमान और पनडुब्बी का ज़िक्र: ऋग्वेद में सात पहियों वाले रथ और समुद्र के अंदर चलने वाली नौकाओं (पनडुब्बियों) का उल्लेख मिलता है। यहां तक कि पुराणों में शुकदेव जी के हवाई मार्ग से अमेरिका (पाताल लोक) से यूरोप होते हुए मिथिला आने का रोचक वर्णन भी है! ✨ ग्लोबल ट्रेड और 200 से अधिक जनपद: महाभारत काल में अखंड भारत में 200 से अधिक जनपद थे। शक, हूण, यवन और म्लेच्छ जातियों के साथ संपर्क के अलावा रोम, मिस्र और अरब देशों के साथ प्राचीन भारतीयों के गहरे व्यापारिक संबंध थे। 📜 इतिहास या शानदार पौराणिक कल्पना? यद्यपि आधुनिक इतिहासकार और भाषाविज्ञानी (Linguists) मानते हैं कि 'कनाडा' (इरोक्वियन शब्द 'कनाटा') और 'अर्जेंटीना' (लैटिन शब्द 'अर्जेंटम') के नामकरण के पीछे हमारे संस्कृत शब्दों का नहीं, बल्कि स्थानीय भाषाओं का प्रभाव है। इन बातों को ऐतिहासिक तथ्य के बजाय 'भाषाई संयोग' माना जाता है। लेकिन, इन सबके बावजूद, एक बात तो तय है—हमारे पूर्वजों की भौगोलिक सोच, समुद्री व्यापार का ज्ञान और वैश्विक कल्पना इतनी विशाल थी कि वह आज भी हमें हैरत में डाल देती है! प्राचीन भारत वास्तव में एक ग्लोबल सुपरपॉवर था। 🇮🇳✨ . !! जय जय श्री राम !! ➳ᴹᴿ̶᭄K̶u̶m̶a̶r̶ ̶R̶a̶u̶n̶a̶k̶ ̶K̶a̶s̶h̶y̶a̶p̶ ऐसी ही अनेकानेक पोस्ट पाने के लिये हमारे फेसबुक पेज ‘शिव पुराण ’ को फॉलो और लाईक करें हमारा पेज का लिंक हमारी फेसबुक पर देखें। फेसबुक लिंक– https://www.facebook.com/share/16z3CgT2xK/ #🔱हर हर महादेव #✋भगवान भैरव🌸 #🚩जय श्रीराम🙏 #🙏 जय माँ दुर्गा 🙏 #🌷शुभ रविवार https://www.facebook.com/share/17k2bcrKp8/
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🌞 सूर्य की दिशा और आपके घर का वास्तु: जानिए किस समय कौन सा काम होता है शुभ! 🏡✨ क्या आप जानते हैं कि सूर्य की स्थिति हमारे वास्तु शास्त्र और दिनचर्या को सीधे तौर पर प्रभावित करती है? अगर हम अपने घर का निर्माण और अपने रोजमर्रा के काम सूर्य की दिशा के अनुसार करें, तो जीवन में सुख, शांति और स्वास्थ्य बना रहता है। आइए जानते हैं 24 घंटे का सही वास्तु चक्र: 👇 🕒 1. ब्रह्म मुहूर्त (रात 3:00 - सुबह 6:00): सूर्य इस समय उत्तर-पूर्व (ईशान कोण) में होता है। यह समय ध्यान, योग, और अध्ययन के लिए सबसे सर्वश्रेष्ठ है। 🧘‍♂️📖 🌅 2. ताज़ा सुबह (सुबह 6:00 - 9:00): सूर्य घर के पूर्वी हिस्से में आ जाता है। घर के दरवाजे और खिड़कियां ऐसे रखें कि सुबह की पहली सकारात्मक धूप सीधे अंदर आ सके! ☀️ 🍳 3. ऊर्जा का समय (सुबह 9:00 - दोपहर 12:00): सूर्य दक्षिण-पूर्व (आग्नेय कोण) में होता है। यह दिशा रसोई और स्नानघर के लिए उत्तम है ताकि धूप से नमी दूर हो और स्वास्थ्य बना रहे। 🥗🚿 🛌 4. विश्राम काल (दोपहर 12:00 - 3:00): सूर्य अब दक्षिण दिशा में होता है। यह आराम का समय है, इसलिए मास्टर बेडरूम (शयन कक्ष) इसी दिशा में होना सबसे शुभ माना जाता है। 😴 📚 5. कार्य और अध्ययन (दोपहर 3:00 - शाम 6:00): सूर्य दक्षिण-पश्चिम (नैऋत्य कोण) में रहता है। यह जगह आपके स्टडी रूम, लाइब्रेरी या ऑफिस डेस्क के लिए बिल्कुल परफेक्ट है! 💻💡 🍽️ 6. परिवार के साथ समय (शाम 6:00 - रात 9:00): सूर्य पश्चिम में होता है। शाम का यह समय परिवार के साथ बैठने और खाने का है, इसलिए डाइनिंग या लिविंग रूम यहाँ बनाना सबसे अच्छा है। 👨‍👩‍👧‍👦🍲 🌙 7. रात्रि विश्राम (रात 9:00 - मध्य रात्रि): सूर्य उत्तर-पश्चिम (वायव्य कोण) में होता है। यह दिशा भी गेस्ट रूम या एक आरामदायक बेडरूम के लिए बेहतरीन है। 🛌✨ 💎 8. मध्य रात्रि का रहस्य (मध्य रात्रि - रात 3:00): सूर्य घर के उत्तरी भाग (कुबेर की दिशा) में होता है। यह अत्यंत गोपनीय समय है। आपकी कीमती वस्तुएं, तिजोरी और जेवरात रखने के लिए यह दिशा सबसे सुरक्षित और शुभ है! 💰🔒 क्या आपके घर का वास्तु भी सूर्य की दिशा के अनुसार है? कमेंट्स में जरूर बताएं! 👇 अगर जानकारी अच्छी लगी हो तो अपने परिवार और दोस्तों के साथ शेयर करना न भूलें। 🔄 . !! जय जय श्री राधे-कृष्ण !! ➳ᴹᴿ̶᭄K̶u̶m̶a̶r̶ ̶R̶a̶u̶n̶a̶k̶ ̶K̶a̶s̶h̶y̶a̶p̶ ऐसी ही अनेकानेक पोस्ट पाने के लिये हमारे फेसबुक पेज ‘शिव पुराण ’ को फॉलो और लाईक करें हमारा पेज का लिंक हमारी फेसबुक पर देखें। फेसबुक लिंक– https://www.facebook.com/share/16z3CgT2xK/ #🌷शुभ रविवार #🙏 जय माँ दुर्गा 🙏 #🔱हर हर महादेव #✋भगवान भैरव🌸 #🚩जय श्रीराम🙏 https://www.facebook.com/share/17k2bcrKp8/
🌷शुभ रविवार - 3iRaRg सूर्य कौन सा समय किस काम के लिए होता है शुभ? 1 3AM - 6AM मुहूर्त ब्रह्म 12AM 9 AM 3AM 2 6 AM 8 मध्य रात्रि' 0 46 चिंतन ्मनन व अध्ययन पर्याप्त रौशनी गोपनीय वस्तुएं, तिजोरी মুর্য কী 9 AM १२ PM 9PM 12AM 3 उत्तर 'R1ಗ' प्रातः & % भोजन पकाना ப शयन कक्ष रसोई व स्नानघर 6 PM 9 PM 12 PM 3 PM 6 PM 5 3 PM दोपहर' 'মায' दोपहर' (West) South) भोजन या बैठक कक्ष विश्रांति काल (आराम ) (South West) कार्य और अथ्ययन शयन कक्ष अध्ययन कक्ष 3iRaRg सूर्य कौन सा समय किस काम के लिए होता है शुभ? 1 3AM - 6AM मुहूर्त ब्रह्म 12AM 9 AM 3AM 2 6 AM 8 मध्य रात्रि' 0 46 चिंतन ्मनन व अध्ययन पर्याप्त रौशनी गोपनीय वस्तुएं, तिजोरी মুর্য কী 9 AM १२ PM 9PM 12AM 3 उत्तर 'R1ಗ' प्रातः & % भोजन पकाना ப शयन कक्ष रसोई व स्नानघर 6 PM 9 PM 12 PM 3 PM 6 PM 5 3 PM दोपहर' 'মায' दोपहर' (West) South) भोजन या बैठक कक्ष विश्रांति काल (आराम ) (South West) कार्य और अथ्ययन शयन कक्ष अध्ययन कक्ष - ShareChat
✨ निरंतर अभ्यास की शक्ति: एक अद्भुत पौराणिक कथा! 🌧️ कल्पना कीजिए... पृथ्वी पर लगातार 12 वर्षों का भीषण अकाल। नदियाँ और जलाशय सूख चुके हैं, चारों ओर हाहाकार है। ऐसे में चिलचिलाती धूप के बीच एक किसान अपनी बंजर ज़मीन पर पूरी मेहनत से हल जोत रहा था। 🧑‍🌾 वहां से गुज़र रहे भगवान शिव और माता पार्वती यह देखकर आश्चर्यचकित रह गए। 🕉️ माता पार्वती ने पूछा कि जब बारिश की कोई उम्मीद ही नहीं है, तो बिना बात हल चलाने का क्या लाभ? किसान का उत्तर आपके भी रोंगटे खड़े कर देगा! उसने कहा, "मैं हल इसलिए चला रहा हूं ताकि इतने लंबे अकाल के कारण कहीं मैं हल चलाने का अभ्यास ही न भूल जाऊं।" 💯 किसान की इस अटूट निष्ठा और समर्पण को देखकर माता पार्वती ने एक चतुर युक्ति सोची। उन्होंने शिव जी से मुस्कुराते हुए कहा, "प्रभु, कहीं इतने वर्षों तक वर्षा न करने के कारण... आप भी अपना शंख बजाना तो नहीं भूल गए?" 🐚 अपनी कुशलता सिद्ध करने के लिए जैसे ही महादेव ने अपना शंख बजाया... चमत्कार हो गया! 🌩️ आकाश में घने बादल घिर आए और मूसलाधार वर्षा होने लगी। 🌱 कहानी की सीख: किसान के निरंतर अभ्यास और माता पार्वती की सूझबूझ से न सिर्फ अकाल समाप्त हुआ, बल्कि पूरी सृष्टि को जीवनदान मिला। परिस्थितियां चाहे कितनी भी विपरीत क्यों न हों, अपना कर्म और अभ्यास कभी न छोड़ें। क्या पता, आपकी निरंतर मेहनत ही अगले चमत्कार का कारण बन जाए! ✨ . !! जय जय श्री महाकाल !! ➳ᴹᴿ̶᭄K̶u̶m̶a̶r̶ ̶R̶a̶u̶n̶a̶k̶ ̶K̶a̶s̶h̶y̶a̶p̶ ऐसी ही अनेकानेक पोस्ट पाने के लिये हमारे फेसबुक पेज ‘शिव पुराण ’ को फॉलो और लाईक करें हमारा पेज का लिंक हमारी फेसबुक पर देखें। फेसबुक लिंक– https://www.facebook.com/share/16z3CgT2xK/ #🚩जय श्रीराम🙏 #✋भगवान भैरव🌸 #🌷शुभ रविवार #🙏 जय माँ दुर्गा 🙏 #🔱हर हर महादेव https://www.facebook.com/share/17k2bcrKp8/
🚩जय श्रीराम🙏 - अभ्यास और विश्वास की जीत }সযাম কা সংবে महादेव का आशीर्वाद १२ वर्ो का भीपण अकाल अभ्यास और विश्वास की जीत }সযাম কা সংবে महादेव का आशीर्वाद १२ वर्ो का भीपण अकाल - ShareChat
🦚✨ श्री कृष्ण की बाँसुरी का दिव्य रहस्य! ✨🦚 "श्याम पिया की बाँसुरी, प्रेम सुधा रस सुन। ब्रज में कण-कण बोलता, श्री राधे-राधे धुन।" क्या आपने कभी सोचा है कि कान्हा की बाँसुरी की तान में ऐसा क्या है, जो पूरी दुनिया को मंत्रमुग्ध कर देता है? 🎶 🌸 प्रेम का अमृत: जब हमारे 'श्याम पिया' अपनी बाँसुरी बजाते हैं, तो वह महज कोई संगीत नहीं होता; वह साक्षात् 'प्रेम का अमृत' (प्रेम सुधा रस) है! यह वह दिव्य ध्वनि है जो कानों के रास्ते सीधे हमारी आत्मा में उतर जाती है और हमें सांसारिक मोह-माया से निकालकर ईश्वरीय प्रेम में डुबो देती है। 💖 🌸 ब्रज के कण-कण में गूंज: इस दोहे का सबसे गहरा रहस्य यह है कि बाँसुरी भले ही कान्हा के होठों पर सजी हो, लेकिन उसके हर एक स्वर से जो धुन निकलती है, वह केवल "राधे-राधे" है! 🙌 इतना ही नहीं, ब्रजमंडल की दिव्यता तो देखिए—वहाँ की हवा, पेड़-पौधे, मिट्टी और हर एक कण इसी पवित्र नाम की गूंज से जीवंत है। अगर आप भी ब्रज की इस दिव्यता और कान्हा के प्रेम को महसूस कर पा रहे हैं, तो हाजिरी जरूर लगाएं! 🙏 👇 कमेंट में प्रेम से लिखें: "राधे-राधे" 🌺 . !! जय जय श्री राधे-कृष्ण !! ➳ᴹᴿ̶᭄K̶u̶m̶a̶r̶ ̶R̶a̶u̶n̶a̶k̶ ̶K̶a̶s̶h̶y̶a̶p̶ ऐसी ही अनेकानेक पोस्ट पाने के लिये हमारे फेसबुक पेज ‘शिव पुराण ’ को फॉलो और लाईक करें हमारा पेज का लिंक हमारी फेसबुक पर देखें। फेसबुक लिंक– https://www.facebook.com/share/16z3CgT2xK/ #🙏 जय माँ दुर्गा 🙏 #🌷शुभ रविवार #🚩जय श्रीराम🙏 #🌸 जय श्री कृष्ण😇 #✋भगवान भैरव🌸 https://www.facebook.com/share/17k2bcrKp8/
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