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🚩भगवा की ताकत के आगे, ब्रम्हांड भी सर झुकाता हैं,
❤️ जब एक राजा के प्रेम ने उसे देवता बना दिया: पुरुरवा और उर्वशी की अमर प्रेम गाथा ❤️ भारतीय साहित्य की सबसे पुरानी और सबसे भावुक प्रेम कहानियों में से एक—एक मर्त्य (मनुष्य) और एक अप्सरा के मिलन, विरह और अमर प्रेम की दास्तां। 📖✨ 1️⃣ पहली मुलाकात: आकाश में युद्ध ⚔️ चंद्रवंश के प्रतापी राजा पुरुरवा ने जब आकाश से एक चीख सुनी, तो उन्होंने देखा कि दैत्य 'केशी' स्वर्ग की सबसे सुंदर अप्सरा उर्वशी का अपहरण कर रहा है। राजा ने वीरता से युद्ध कर उर्वशी को बचाया। उस क्षण, जहाँ उर्वशी राजा के शौर्य पर मोहित हुईं, वहीं राजा पुरुरवा अपना दिल हार बैठे। 2️⃣ प्यार की तीन शर्तें 📜 इंद्र के श्राप और अपने प्रेम के कारण उर्वशी धरती पर रहने को तैयार हुईं, लेकिन उन्होंने तीन विचित्र शर्तें रखीं: "मेरे दो मेढ़ों (Rams) की सुरक्षा आपकी जिम्मेदारी है।" 🐏 "आप मुझे कभी नग्न अवस्था में न देखें।" 👁️ "मैं भोजन में केवल घी ग्रहण करूँगी।" राजा प्रेम में इतने डूबे थे कि उन्होंने सब स्वीकार कर लिया। 3️⃣ इंद्र की चाल और बिछड़ना ⛈️ उर्वशी के बिना स्वर्ग सूना था। इंद्र और गंधर्वों ने एक चाल चली। एक रात उन्होंने उर्वशी के मेढ़ों को चुरा लिया। उनकी आवाज सुनकर राजा नग्न अवस्था में ही तलवार लेकर दौड़े। तभी गंधर्वों ने बिजली चमका दी! ⚡ उर्वशी ने राजा को देख लिया... शर्तें टूट गईं। और उसी पल, वह हमेशा के लिए अदृश्य हो गई। 4️⃣ विरह और पागलपन 💔 उर्वशी के जाने के बाद राजा पुरुरवा विक्षिप्त हो गए। वे जंगलों, नदियों और पहाड़ों से पूछते फिरते— "क्या तुमने मेरी उर्वशी को देखा है?" आखिरकार, कुरुक्षेत्र के एक सरोवर में उन्हें उर्वशी मिली, लेकिन उसने लौटने से मना कर दिया और कहा— "अप्सराओं का प्रेम स्थायी नहीं होता।" 5️⃣ अमर मिलन (The Reunion) ✨ लेकिन राजा का प्रेम हार मानने वाला नहीं था। उनकी कठोर तपस्या और एकनिष्ठ प्रेम को देखकर गंधर्वों को झुकना पड़ा। राजा पुरुरवा को अग्नि-स्थाली दी गई, जिससे वे स्वयं गंधर्व (अमर) बन गए। अंततः, एक साधारण मनुष्य अपने प्रेम की शक्ति से देवता बन गया और उर्वशी के साथ सदा के लिए एक हो गया। 🌸 निष्कर्ष: कालिदास के 'विक्रमोर्वशीयम्' और ऋग्वेद में वर्णित यह कथा बताती है कि सच्चा प्रेम सीमाओं को तोड़ देता है। जहाँ उर्वशी का मन चंचल था, वहीं पुरुरवा की भक्ति ने इतिहास बदल दिया। 🤔 क्या आपने यह कहानी पहले सुनी थी? कमेंट्स में बताएं! 👇 !! जय जय श्री राधे !! ➳ᴹᴿ̶᭄K̶u̶m̶a̶r̶ ̶R̶a̶u̶n̶a̶k̶ ̶K̶a̶s̶h̶y̶a̶p̶ #🕉️सनातन धर्म🚩 #🌸 जय श्री कृष्ण😇 #🙏कर्म क्या है❓ #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #🕉 ओम नमः शिवाय 🔱
🕉️सनातन धर्म🚩 - 3 PURURAVA & URVASHI: AN ETERNAL LOVE SAGA 3 PURURAVA & URVASHI: AN ETERNAL LOVE SAGA - ShareChat
🦚 जब भक्त की गवाही देने के लिए भगवान को पैदल चलना पड़ा! 👣 क्या भगवान अपने भक्त के लिए मीलों पैदल चल सकते हैं? ओडिशा के 'साक्षी गोपाल' मंदिर की कहानी कहती है— हाँ! कथा: एक वृद्ध ब्राह्मण ने वृंदावन में भगवान गोपाल के सामने एक गरीब युवक को अपनी बेटी से विवाह कराने का वचन दिया। लेकिन गांव लौटने पर वह मुकर गया। पंचायत ने सबूत मांगा, तो युवक ने कहा— "वृंदावन के गोपाल ही मेरे गवाह हैं!" उस युवक की अटूट भक्ति देखकर भगवान गोपाल ने कहा: "मैं तुम्हारे पीछे-पीछे चलूंगा गवाही देने, लेकिन अगर तुमने पीछे मुड़कर देखा, तो मैं वहीं पत्थर बन जाऊंगा।" वृंदावन से ओडिशा तक भगवान उसके पीछे चले। लेकिन गांव के पास रेतीली जमीन पर जब भगवान के पैरों (घुंघरुओं) की आवाज आनी बंद हुई, तो युवक ने घबराकर पीछे देख लिया। भगवान गोपाल वहीं स्थिर हो गए और 'साक्षी गोपाल' (गवाह गोपाल) कहलाए। आज भी माना जाता है कि पुरी की यात्रा तब तक पूरी नहीं होती, जब तक आप साक्षी गोपाल के दर्शन न कर लें। 🙏 जय श्री कृष्ण! जय साक्षी गोपाल! ❤️ क्या आपने कभी इस मंदिर के दर्शन किए हैं?" !! जय जय श्री राधे !! ➳ᴹᴿ̶᭄K̶u̶m̶a̶r̶ ̶R̶a̶u̶n̶a̶k̶ ̶K̶a̶s̶h̶y̶a̶p̶ #🙏गुरु महिमा😇 #🙏कर्म क्या है❓ #🙏🌺जय बजरंगबली🌺🙏 #🕉️सनातन धर्म🚩 #🌸 जय श्री कृष्ण😇
🙏गुरु महिमा😇 - गोपालः T೫ ' जब भगवान गवाह बने वृंदावन से ओडिशाः एक भक्त की पुकार पर गोपालः T೫ ' जब भगवान गवाह बने वृंदावन से ओडिशाः एक भक्त की पुकार पर - ShareChat
😱 रहस्यमयी मंदिर: यहाँ हर दिन बढ़ता है गणेश जी का आकार! 🐘✨ क्या आपने कभी सुना है कि पत्थर की मूर्ति का आकार बढ़ सकता है? आंध्र प्रदेश के चित्तूर में स्थित 'कनिपक्कम विनायक मंदिर' में ऐसा ही एक चमत्कार होता है! इस मंदिर के 3 बड़े रहस्य: 1️⃣ बढ़ता हुआ आकार: यहाँ मौजूद गणेश जी की मूर्ति 'स्वयंभू' (अपने आप प्रकट हुई) है। इसका आकार लगातार बढ़ रहा है। प्रमाण यह है कि जो चांदी का कवच भगवान को 50 साल पहले पहनाया जाता था, वह अब उन्हें छोटा पड़ता है! 2️⃣ अद्भुत उत्पत्ति: यह मूर्ति एक कुएं की खुदाई के दौरान मिली थी। कुदाल लगने से पत्थर से खून की धारा निकली थी, जिससे वहां का पानी लाल हो गया था। 3️⃣ सत्य की अदालत: यहाँ लोग आपसी विवाद सुलझाने आते हैं। मान्यता है कि यहाँ 'सत्य प्रमाण' (शपथ) लेने के बाद कोई झूठ नहीं बोल सकता। जो झूठ बोलता है, उसे तुरंत दंड मिलता है। अगर आप भी बप्पा के इस चमत्कार को नमन करना चाहते हैं, तो कमेंट में लिखें— 'गणपति बप्पा मोरया'! 🙏🌺 !! जय जय श्री महाकाल !! ➳ᴹᴿ̶᭄K̶u̶m̶a̶r̶ ̶R̶a̶u̶n̶a̶k̶ ̶K̶a̶s̶h̶y̶a̶p̶ #🕉 ओम नमः शिवाय 🔱 #🙏🌺जय बजरंगबली🌺🙏 #🛕मंदिर दर्शन🙏 #🙏गुरु महिमा😇 #🙏कर्म क्या है❓
🕉 ओम नमः शिवाय 🔱 - कनिपक्कम विनायक मंदिरः एक चमत्कारिक कथा तीन दिव्यांग भाइयों का उद्धार और बढ़ती हुई मूर्ति का रहस्य चित्तूर, : दर्शन के लिए अवश्य पधारें आंध्र प्रदेश कनिपक्कम विनायक मंदिरः एक चमत्कारिक कथा तीन दिव्यांग भाइयों का उद्धार और बढ़ती हुई मूर्ति का रहस्य चित्तूर, : दर्शन के लिए अवश्य पधारें आंध्र प्रदेश - ShareChat
🚩 बजरंगबली भी नहीं उतार पाए अपनी माँ के दूध का कर्ज! 🤱 क्या दुनिया का सबसे शक्तिशाली योद्धा अपनी माँ का कर्ज उतार सकता है? जब लंका युद्ध जीतकर हनुमान जी वापस लौटे, तो उन्होंने माता अंजनी से कहा— "माँ! मैं आपके दूध का कर्ज उतारना चाहता हूँ।" माता अंजनी मुस्कुराईं और सामने पड़े एक काले पत्थर की ओर इशारा करते हुए कहा— "पुत्र! यदि कर्ज उतारना है, तो बस इस पत्थर को तोड़कर दिखाओ।" पर्वत उठाने वाले हनुमान जी ने अपनी गदा से पूरी ताकत लगा दी, पसीना-पसीना हो गए, लेकिन वह मामूली पत्थर नहीं टूटा! 😱 हैरान होकर जब उन्होंने कारण पूछा, तो माता ने कहा: "बेटा! बचपन में तुम्हें दूध पिलाते समय मेरी कुछ बूंदें इस पत्थर पर गिर गई थीं। माँ के दूध में इतनी शक्ति होती है कि यह पत्थर 'वज्र' से भी कठोर हो गया है।" हनुमान जी नतमस्तक हो गए। सच है, माँ के दूध और त्याग का कर्ज कोई संतान नहीं उतार सकती। 🙏 जय माता अंजनी! जय बजरंगबली! ❤️ "अपनी माँ के लिए एक ❤️ कमेंट में जरूर छोड़ें।" !! जय जय श्री राम !! ➳ᴹᴿ̶᭄K̶u̶m̶a̶r̶ ̶R̶a̶u̶n̶a̶k̶ ̶K̶a̶s̶h̶y̶a̶p̶ #🌸जय सिया राम #🙏कर्म क्या है❓ #🙏गुरु महिमा😇 #🕉 ओम नमः शिवाय 🔱 #🙏🌺जय बजरंगबली🌺🙏
🌸जय सिया राम - माँ के दूध का कर्ज और हनुमान की परीक्षा माँ के दूध का कर्ज और हनुमान की परीक्षा - ShareChat
🌸 असुर होकर भी जो देवताओं से महान बना: राजा महाबली और ओणम की कहानी! 👑 केरल में ओणम सिर्फ एक त्योहार नहीं, बल्कि एक राजा के अपनी प्रजा के प्रति अटूट प्रेम का प्रतीक है। कहानी: प्राचीन काल में राजा महाबली (मावेली) का राज था। उनके राज्य में कोई दुख नहीं था, सब बराबर थे। उनकी बढ़ती शक्ति देख देवता घबरा गए और भगवान विष्णु के पास गए। भगवान विष्णु ने 'वामन' (बौने ब्राह्मण) का रूप धारण किया और महाबली से तीन पग (3 Steps) जमीन मांगी। महाबली ने वचन दे दिया। देखते ही देखते वामन ने विशाल रूप लिया— 1️⃣ पहले पग में धरती नाप ली। 2️⃣ दूसरे पग में आकाश नाप लिया। 3️⃣ जब पूछा तीसरा पग कहाँ रखूँ? तो दानी महाबली ने अपना सिर आगे कर दिया! 🙏 भगवान ने प्रसन्न होकर उन्हें पाताल लोक का राजा बना दिया और वरदान दिया कि "साल में एक बार तुम अपनी प्रजा से मिलने आ सकोगे।" मान्यता है कि ओणम के दिन राजा महाबली अपनी प्रजा का हाल-चाल लेने धरती पर आते हैं। उन्हीं के स्वागत में केरल में फूलों की रंगोली (पूकलम) सजती है और महाभोज (सद्या) होता है। 🍛🚣‍♂️ !! जय जय श्री राधे !! ➳ᴹᴿ̶᭄K̶u̶m̶a̶r̶ ̶R̶a̶u̶n̶a̶k̶ ̶K̶a̶s̶h̶y̶a̶p̶ #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #🙏कर्म क्या है❓ #🕉 ओम नमः शिवाय 🔱 #🙏गुरु महिमा😇 #🌸जय सिया राम
🙏🏻आध्यात्मिकता😇 - ओणमः मह्ाबली के त्याग और वासन अवढार की गाथा ओणमः मह्ाबली के त्याग और वासन अवढार की गाथा - ShareChat
🔱 जहाँ गिरे थे माता सती के तीसरा नेत्र: कोल्हापुर महालक्ष्मी (अंबाबाई) का दिव्य रहस्य! 🔱 मंदिर की कहानी (पौराणिक कथा) यह कथा दो भागों में जुड़ी हुई है: एक माता सती के देह त्याग से और दूसरी माता महालक्ष्मी के कोल्हापुर आने से। 1. माता सती के नेत्र गिरने की कथा: पौराणिक कथा के अनुसार, जब प्रजापति दक्ष ने एक विशाल यज्ञ का आयोजन किया, तो उन्होंने अपने दामाद भगवान शिव और पुत्री सती को आमंत्रित नहीं किया। माता सती बिना बुलाए यज्ञ में पहुँच गईं, जहाँ दक्ष ने शिवजी का घोर अपमान किया। पति का अपमान सहन न कर पाने के कारण सती ने उसी यज्ञ कुंड में कूदकर अपने प्राण त्याग दिए। भगवान शिव शोक और क्रोध में सती के जलते हुए शरीर को लेकर तांडव करने लगे। सृष्टि को विनाश से बचाने के लिए भगवान विष्णु ने अपने सुदर्शन चक्र से सती के शरीर के 51 टुकड़े कर दिए। जहाँ-जहाँ ये टुकड़े गिरे, वहाँ शक्तिपीठ बने। मान्यता है कि कोल्हापुर में माता सती के नेत्र (आंखें) गिरे थे। इसलिए यह एक जाग्रत शक्तिपीठ माना जाता है और यहाँ माँ की मूर्ति की आँखों में एक विशेष दिव्यता मानी जाती है। 2. कोल्हापुर में महालक्ष्मी के निवास की कथा (कोल्हासुर वध): एक अन्य प्रचलित कथा के अनुसार, एक बार ऋषि भृगु ने भगवान विष्णु की छाती पर लात मारी, लेकिन विष्णु जी ने क्रोधित होने के बजाय ऋषि के पैर सहलाए। यह देखकर माता लक्ष्मी को बहुत बुरा लगा कि उनके पति ने अपमान का बदला नहीं लिया। वे रूठकर बैकुंठ छोड़कर पृथ्वी पर कोल्हापुर (करवीर क्षेत्र) आ गईं। उस समय यहाँ कोल्हासुर नाम का एक राक्षस राज करता था, जो लोगों को बहुत परेशान करता था। देवताओं और ऋषियों की प्रार्थना पर, माता लक्ष्मी ने (जिन्हें अंबाबाई भी कहा जाता है) कोल्हासुर से युद्ध किया और उसका वध कर दिया। मरते समय कोल्हासुर ने वरदान माँगा कि इस क्षेत्र का नाम उसके नाम पर रखा जाए, इसीलिए इसे 'कोल्हापुर' कहा जाता है। मंदिर की खास बातें: किरणोत्सव: साल में दो बार (नवंबर और जनवरी/फरवरी में) सूर्य की किरणें सीधे मंदिर के गर्भगृह में प्रवेश करती हैं और माता की मूर्ति के चरणों से होते हुए उनके मुख मंडल (चेहरे) तक पहुँचती हैं। इसे देखने के लिए लाखों भक्त आते हैं। साढ़े तीन शक्तिपीठ: महाराष्ट्र में देवी के 'साढ़े तीन' शक्तिपीठ माने जाते हैं, जिनमें कोल्हापुर महालक्ष्मी एक 'पूर्ण' शक्तिपीठ है। मूर्ति: यहाँ माता की मूर्ति काले पत्थर की बनी है और यह 'स्वयंभू' मानी जाती है। माता के साथ सिंह (शेर) भी विराजमान है। कोल्हापुर स्थित श्री महालक्ष्मी (अंबाबाई) मंदिर, महाराष्ट्र के साढ़े तीन शक्तिपीठों में से एक है। यहाँ की दिव्यता और शांति मन को मोह लेती है। कोल्हासुर का वध करने वाली माँ अंबाबाई सबकी मनोकामना पूर्ण करें। 📍 स्थान: कोल्हापुर, महाराष्ट्र 🚩 जय माँ महालक्ष्मी! "क्या आप यहाँ गए हैं? !! जय जय श्री महाकाल !! ➳ᴹᴿ̶᭄K̶u̶m̶a̶r̶ ̶R̶a̶u̶n̶a̶k̶ ̶K̶a̶s̶h̶y̶a̶p̶ #🙏 देवी दर्शन🌸 #🙏 माँ वैष्णो देवी #🙏 जय माँ दुर्गा 🙏 #🙏जय माँ काली🌼 #🛕मंदिर दर्शन🙏
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👁️ जहाँ गिरे थे माता सती के नेत्र: जय माँ नैना देवी! 🚩 नैना देवी मंदिर की दो प्रमुख कहानियाँ प्रचलित हैं। एक पौराणिक (शक्तिपीठ से जुड़ी) और दूसरी ऐतिहासिक (मंदिर निर्माण से जुड़ी)। यहाँ विस्तार से दोनों कहानियाँ दी गई हैं: 1. शक्तिपीठ बनने की पौराणिक कथा (माता सती के नयन) यह कथा भगवान शिव और माता सती से जुड़ी है, जो सभी शक्तिपीठों का आधार है: दक्ष का अपमान: जब प्रजापति दक्ष ने कनखल (हरिद्वार) में विशाल यज्ञ किया, तो उन्होंने भगवान शिव को आमंत्रित नहीं किया। माता सती अपने पिता के घर बिना बुलाए गईं, लेकिन वहाँ शिवजी का अपमान देखकर उन्होंने यज्ञ कुंड में कूदकर अपने प्राण त्याग दिए। शिव का तांडव: भगवान शिव सती के जलते हुए शरीर को कंधे पर उठाकर ब्रह्मांड में तांडव करने लगे। सृष्टि को विनाश से बचाने के लिए भगवान विष्णु ने अपने सुदर्शन चक्र से सती के शरीर के टुकड़े कर दिए। नयनों का गिरना: मान्यता है कि माता सती के शरीर के अंग जहाँ-जहाँ गिरे, वहाँ शक्तिपीठ बने। हिमाचल के इस स्थान पर माता सती के 'नयन' (आंखें) गिरे थे। नामकरण: चूँकि यहाँ माता के 'नयन' गिरे थे, इसलिए इस शक्तिपीठ का नाम 'नैना देवी' पड़ा। यहाँ पिंडी रूप में माता के नयनों की ही पूजा की जाती है। 2. मंदिर निर्माण की लोककथा (ग्वाला नैना गुर्जर) मंदिर की खोज और निर्माण को लेकर एक बहुत प्रसिद्ध लोककथा है, जो एक गुर्जर (ग्वाले) से जुड़ी है: बहुत समय पहले, इस पहाड़ी इलाके में 'नैना' नाम का एक गुर्जर अपनी गायें चराने आता था। उसने देखा कि उसकी गायों में से एक 'कपिला' गाय रोज एक विशेष जगह (एक पेड़ के नीचे या पत्थर पर) जाकर खड़ी हो जाती है और उसके थनों से अपने आप दूध की धारा बहने लगती है। यह दृश्य कई दिनों तक चलता रहा। नैना गुर्जर को लगा कि शायद कोई जानवर गाय का दूध पी जाता है, लेकिन जब उसने छिपकर देखा तो पाया कि गाय एक पत्थर (पिंडी) पर दूध का अभिषेक कर रही थी। उसी रात, नैना गुर्जर को सपने में माँ दुर्गा दिखाई दीं। माता ने उससे कहा, "मैं उसी स्थान पर पिंडी रूप में विराजमान हूँ, जहाँ तुम्हारी गाय दूध चढ़ाती है। वहाँ मेरा मंदिर बनवाओ।" नैना गुर्जर ने यह बात उस समय के राजा बीर चंद (बिलासपुर के राजा) को बताई। राजा ने जब उस स्थान की खुदाई करवाई, तो वहाँ वास्तव में एक पिंडी मिली (जो माता के नेत्रों का प्रतीक थी)। राजा ने वहाँ एक भव्य मंदिर बनवाया। माता ने प्रसन्न होकर वरदान दिया कि "यह स्थान मेरे नाम से पहले तुम्हारे नाम से जाना जाएगा।" इसीलिए इस धाम का नाम 'नैना' गुर्जर के नाम पर 'नैना देवी' पड़ा। 3. गुरु गोबिंद सिंह जी और नैना देवी सिख इतिहास में भी इस स्थान का महत्व है। कहा जाता है कि सिखों के दसवें गुरु, गुरु गोबिंद सिंह जी ने मुगलों से युद्ध करने से पहले इसी स्थान पर (या इसके निकट) एक महायज्ञ किया था और माँ भगवती (चंडी) से आशीर्वाद प्राप्त किया था। इसके बाद ही उन्होंने 'खालसा पंथ' की स्थापना की और अत्याचारी मुगलों का सामना किया। मंदिर की विशेषताएँ स्थान: यह मंदिर एक ऊंची पहाड़ी पर स्थित है, जहाँ से नीचे गोबिंद सागर झील (भाखड़ा नांगल बांध का जलाशय) का अद्भुत दृश्य दिखाई देता है। पूजा: यहाँ माता की तीन पिंडियों की पूजा होती है—दाहिनी ओर माँ काली, मध्य में नैना देवी (शक्ति) और बाईं ओर भगवान गणेश। त्योहार: नवरात्रों के दौरान यहाँ विशाल मेला लगता है। सार: नैना देवी मंदिर श्रद्धा और शक्ति का केंद्र है। जहाँ माता के नेत्र गिरे, वहाँ भक्तों को "दिव्य दृष्टि" और ज्ञान का आशीर्वाद मिलता है। जय माँ नैना देवी! 🙏🚩 आप आखिरी बार नैना देवी कब गए थे?" या "क्या आपने रोप-वे (Ropeway) का सफर किया है?" !! जय जय श्री राधे !! ➳ᴹᴿ̶᭄K̶u̶m̶a̶r̶ ̶R̶a̶u̶n̶a̶k̶ ̶K̶a̶s̶h̶y̶a̶p̶ #🛕मंदिर दर्शन🙏 #🙏जय माँ काली🌼 #🙏 देवी दर्शन🌸 #🙏 माँ वैष्णो देवी #🙏 जय माँ दुर्गा 🙏
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🪕 एक दासीपुत्र कैसे बना ब्रह्मांड का सबसे बड़ा 'देवर्षि'? 🪕 हम सब देवर्षि नारद को 'नारायण-नारायण' जपते हुए देखते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि वे अपने पूर्वजन्म में एक साधारण दासीपुत्र थे? श्रीमद्भागवत के अनुसार, नारद जी पिछले जन्म में एक निर्धन दासी के पुत्र थे। बचपन में ही संतों की सेवा और उनकी पत्तलों की जूठन (प्रसाद) खाने से उनका अंतःकरण शुद्ध हो गया। मात्र 5 वर्ष की आयु में माता का देहांत हो गया। वे अनाथ हो गए, लेकिन उन्होंने इसे भगवान का संकेत माना और जंगल में तपस्या करने निकल पड़े। वहां भगवान की एक झलक पाकर वे व्याकुल हो उठे। आकाशवाणी हुई— "हे बालक! इस जन्म में अब तुम्हें मेरे दर्शन नहीं होंगे। अगले कल्प में तुम मेरे पार्षद बनोगे।" वही बालक अपनी कठोर तपस्या और भक्ति के बल पर ब्रह्मा जी के मानस पुत्र 'देवर्षि नारद' के रूप में अवतरित हुए। 🌟 आज वे अपनी वीणा की तान से दुखी संसार को आनंदित करते हैं। ध्रुव, प्रह्लाद और वाल्मीकि जैसे महान भक्तों के गुरु नारद जी ही हैं। सीख: सत्संग और भक्ति से रंक भी 'देवर्षि' बन सकता है। 🙏 ।। जय श्री हरि ।। !! जय जय श्री राधे !! ➳ᴹᴿ̶᭄K̶u̶m̶a̶r̶ ̶R̶a̶u̶n̶a̶k̶ ̶K̶a̶s̶h̶y̶a̶p̶ #🙏गुरु महिमा😇 #🌸जय सिया राम #🙏कर्म क्या है❓ #🕉 ओम नमः शिवाय 🔱 #🙏🏻आध्यात्मिकता😇
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🕉️ समस्त पापनाशक स्तोत्र: अग्नि पुराण का दिव्य उपहार 🕉️ भगवान वेदव्यास रचित 'अग्नि पुराण' में एक ऐसा अद्भुत स्तोत्र है, जो अनजाने में हुए पापों और मन की ग्लानि को धोने की शक्ति रखता है। जब महात्मा पुष्कर ने अग्निदेव से पूछा कि "मनुष्य चित्त की मलिनता और पापों से मुक्ति कैसे पाए?" तब यह 'समस्त पापनाशक स्तोत्र' प्रकट हुआ। 📜 प्रमुख श्लोक और भावार्थ: "नृसिंहानन्त गोविन्द भूतभावन केशव। दुरूक्तं दुष्कृतं ध्यातं शमयाघं नमोऽस्तु ते।।" अर्थ: हे नृसिंह! हे अनन्त! हे गोविन्द! हे केशव! मेरे द्वारा जो दुर्वचन कहे गए हों या पापपूर्ण चिंतन किया गया हो, उसे शांत कीजिए। मैं आपको नमन करता हूँ। "कायेन मनसा वाचा कृतं पापमजानता। जानता च हृषीकेश पुण्डरीकाक्ष माधव। नामत्रयोच्चारणतः पापं यातु मम क्षयम्।।" अर्थ: हे हृषीकेश! हे पुण्डरीकाक्ष! हे माधव! मन, वाणी और शरीर से, जाने या अनजाने में मुझसे जो भी पाप हुए हों, आपके इन तीन नामों के उच्चारण मात्र से वे नष्ट हो जाएं। 🙌 माहात्म्य (फलश्रुति): अग्नि पुराण के अनुसार, जो व्यक्ति गम्भीरतापूर्वक इस स्तोत्र का पाठ या श्रवण करता है, वह शरीर, मन और वाणी के पापों से मुक्त होकर भगवान विष्णु के परम पद को प्राप्त करता है। यह स्तोत्र पापों का सर्वश्रेष्ठ प्रायश्चित है। ।। ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ।। !! जय जय श्री राधे !! ➳ᴹᴿ̶᭄K̶u̶m̶a̶r̶ ̶R̶a̶u̶n̶a̶k̶ ̶K̶a̶s̶h̶y̶a̶p̶ #🌸जय सिया राम #🕉 ओम नमः शिवाय 🔱 #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #🙏गुरु महिमा😇 #🙏कर्म क्या है❓
🌸जय सिया राम - समस्त पापनाशक स्तोत्र अग्नि पुराण समस्त पापनाशक स्तोत्र अग्नि पुराण - ShareChat
🚩 चलो बुलावा आया है, माता ने बुलाया है! 🚩🏔️ पहाड़ों वाली माता: भारत के 10 दिव्य मंदिर जहाँ जरूर जाना चाहिए! 🏔️ हमारे देश में मान्यता है कि देवी माँ अक्सर ऊंचे पर्वतों पर निवास करती हैं। आज दर्शन कीजिए उन 10 प्रसिद्ध मंदिरों के जो अपनी ऊंचाई और चमत्कारों के लिए जाने जाते हैं: 1️⃣ बम्लेश्वरी देवी (छत्तीसगढ़): 1600 फ़ीट की ऊंचाई और 1100 सीढ़ियां! यहाँ का नज़ारा और माता का आशीर्वाद दोनों अद्भुत हैं। 2️⃣ सप्तश्रृंगी देवी (महाराष्ट्र): सात पर्वतों से घिरी, 18 भुजाओं वाली महाशक्ति का धाम। 3️⃣ तारा तारिणी (उड़ीसा): दो जुड़वां बहनों (देवियों) का यह मंदिर तंत्र साधना का केंद्र माना जाता है। 4️⃣ वैष्णो देवी (जम्मू-कश्मीर): त्रिकुटा पर्वत पर बसी माँ, जहाँ प्राचीन गुफा में भैरव को मोक्ष मिला था। 5️⃣ शारदा माता (मैहर, मप्र): यहाँ देवी सती का हार गिरा था, इसीलिए इसे 'मैहर' (माई का हार) कहते हैं। 6️⃣ कनक दुर्गा (आंध्र प्रदेश): यह वही पावन स्थान है जहाँ अर्जुन ने भगवान शिव से पाशुपतास्त्र प्राप्त किया था। 7️⃣ तारा देवी (शिमला): बादलों के बीच बसा 250 साल पुराना मंदिर, जहाँ माँ की मूर्ति बंगाल से आई थी। 8️⃣ चामुंडेश्वरी (कर्नाटक): यहाँ महिषासुर मर्दिनी का रौद्र और रक्षक रूप विराजता है। 9️⃣ मनसा देवी (हरिद्वार): शिवालिक पहाड़ियों पर बसी माँ, जहाँ धागा बांधने से हर मन्नत पूरी होती है। 🔟 अधर देवी (माउंट आबू): यहाँ भक्तों को बादलों में देवी की छवि दिखाई देती है। ❓ इनमें से आपने किन-किन शक्तिपीठों के दर्शन किए हैं? कमेंट में बताएं! ।। जय माता दी ।। 🚩 ➳ᴹᴿ̶᭄K̶u̶m̶a̶r̶ ̶R̶a̶u̶n̶a̶k̶ ̶K̶a̶s̶h̶y̶a̶p̶ #🙏 जय माँ दुर्गा 🙏 #🙏 माँ वैष्णो देवी #🛕मंदिर दर्शन🙏 #🙏जय माँ काली🌼 #🙏 देवी दर्शन🌸
🙏 जय माँ दुर्गा 🙏 - पहाड़ों वाली माता भारत के प्रसिद्ध शक्तिपीठ पहाड़ों वाली माता भारत के प्रसिद्ध शक्तिपीठ - ShareChat