
❣️𝑲𝒖𝒎𝒂𝒓💞 𝑹𝒂𝒖𝒏𝒂𝒌💞 𝑲𝒂𝒔𝒉𝒚𝒂𝒑❣️
@k_r_kashyap
🚩भगवा की ताकत के आगे, ब्रम्हांड भी सर झुकाता हैं,
॥ 'श्रीरामरक्षास्तोत्रम्' ॥
॥ श्रीराम स्तुति ॥ श्लोक ॥
माता रामो मत्पिता रामचन्द्रः,
स्वामी रामो मत्सखा रामचन्द्रः।
सर्वस्वं मे रामचन्द्रो दयालुः,
नान्यं जाने नैव जाने न जाने॥
🌼🏹🌼🏹🌼🏹🌼🏹🌼🏹🌼🏹🌼🏹
॥ हिंदी अर्थ ॥
इस श्लोक में भक्त अपनी अनन्य भक्ति प्रकट करते हुए कहता है:
🌸 माता रामो मत्पिता रामचन्द्रः: श्री रामचंद्र जी ही मेरी माता हैं और श्री रामचंद्र जी ही मेरे पिता हैं।
🌸 स्वामी रामो मत्सखा रामचन्द्रः:श्री रामचंद्र जी ही मेरे स्वामी (प्रभु) हैं और श्री रामचंद्र जी ही मेरे परम मित्र हैं।
🌸 सर्वस्वं मे रामचन्द्रो दयालुः: वे अत्यंत दयालु श्री रामचंद्र जी ही मेरा सब कुछ (सर्वस्व) हैं।
🌸 नान्यं जाने नैव जाने न जाने: उनके अतिरिक्त मैं किसी और को नहीं जानता, सचमुच नहीं जानता, बिल्कुल नहीं जानता।
🌼🏹🌼🏹🌼🏹🌼🏹🌼🏹🌼🏹🌼🏹
भावार्थ (महत्व):
यह श्लोक सिखाता है कि जब हम ईश्वर को अपने हर सांसारिक रिश्ते (माता, पिता, मित्र) के रूप में स्वीकार कर लेते हैं, तब हमारा भय समाप्त हो जाता है। यहाँ 'न जाने' की तीन बार पुनरावृत्ति दृढ़ विश्वास को दर्शाती है कि श्री राम के अलावा भक्त का कोई दूसरा आश्रय नहीं है।
जय श्री राम 🙏🚩
🚩।। जय जय सियाराम ।।🚩
🚩।। जय बजरंगबली ।।🚩
. 🚩 !! जय जय श्री राम !!🚩
➳ᴹᴿ̶᭄K̶u̶m̶a̶r̶ ̶R̶a̶u̶n̶a̶k̶ ̶K̶a̶s̶h̶y̶a̶p̶
ऐसी ही अनेकानेक पोस्ट पाने के लिये हमारे फेसबुक पेज ‘शिव पुराण ’ को फॉलो और लाईक करें हमारा पेज का लिंक हमारी फेसबुक पर देखें।
फेसबुक लिंक–
https://www.facebook.com/share/16z3CgT2xK/ #👏भगवान विष्णु😇 #🌸जय सिया राम #🌺राधा कृष्ण💞 #🌸श्री गजानन महाराज🙏🏻 #🌷शुभ गुरुवार
https://www.facebook.com/share/17k2bcrKp8/
🚩।। जय जय सियाराम ।।🚩
🚩।। जय बजरंगबली ।।🚩
. 🚩 !! जय जय श्री राम !!🚩
➳ᴹᴿ̶᭄K̶u̶m̶a̶r̶ ̶R̶a̶u̶n̶a̶k̶ ̶K̶a̶s̶h̶y̶a̶p̶
ऐसी ही अनेकानेक पोस्ट पाने के लिये हमारे फेसबुक पेज ‘शिव पुराण ’ को फॉलो और लाईक करें हमारा पेज का लिंक हमारी फेसबुक पर देखें।
फेसबुक लिंक–
https://www.facebook.com/share/16z3CgT2xK/ #🌺राधा कृष्ण💞 #🌸श्री गजानन महाराज🙏🏻 #🌷शुभ गुरुवार #👏भगवान विष्णु😇 #🌸जय सिया राम
https://www.facebook.com/share/17k2bcrKp8/
महाराष्ट्र में एक चोखामेला नाम के महान भक्त थे, वो गृहस्थ अवश्य थे मगर उनका चित्त हमेशा विठ्ठल भगवान में रहता था। मनुष्य द्वारा बनाई हुई जातियों में वो ऐसी जाति के थे जिनका उस समय मंदिर में प्रवेश वर्जित था। एक दिवस चोखामेला जी बाज़ार में अपने घर के लिए सब्जी आदि खरीद रहे थे, तभी एक फल विक्रेता के पास उनको केले देख कर प्रेरणा आयी कि क्यों न ठाकुर जी को केले का भोग लगाया जाए। वो केले खरीद कर विट्ठल भगवान के मंदिर की तरफ चल दिये। वहां पुजारी ने उनका तिरस्कार कर दिया और कहा कि इतने बुरे दिन नहीं आए कि विट्ठल भगवान तुम्हारे दिए हुए केले खाएं। चोखा मेला जी वापस अपने घर आ गए उन्होंने मन ही मन विट्ठल भगवान से शिकायत की कि प्रभु मुझे यह बुरा नहीं लगा कि मेरा अपमान हुआ परंतु जब आपको ऐसा ही करना था तो मेरे मन में आपने केले का भोग लगाने की क्यों प्रेरणा दी। उन्होंने विट्ठल भगवान से कहा आपने मुझे ऐसे कुल में क्यों पैदा किया जिसमें जन्म लेने के बाद मैं आपकी सेव नहीं कर सकता, उन्होंने निर्णय लिया कि यदि मैं विट्ठल भगवान की सेवा नहीं कर सकता तो फिर मैं शरीर का त्याग ही कर देता हूँ।
उन्होंने अपने आप को कमरे में बंद कर लिया और तय किया कि वह अन्न जल का त्याग कर के अपने प्राण त्याग देंगे।
देर रात्रि में चोखामेला जी के दरवाजे पर दस्तक हुई और किसी ने आवाज़ लगाई, "चोखामेला जी ओ चोखामेला जी"। चोखामेला जी को लगा कि इस वक्त कौन आ सकता है, जो आवाज़ चोखामेला जी के कानों में पड़ी वो बड़ी मधुर आवाज़ थी और चोखामेला जी अपने आपको रोक न सके, उन्होंने दरवाज़ा खोल दिया। दरवाज़ा खुलते ही चोखामेला जी के अश्रु निकल गए, सामने साक्षात विठ्ठल भगवान खड़े थे, चोखामेला जी रोते रोते प्रभु के चरणों मे लेट गए, विठ्ठल भगवान ने उन्हें उठाया और कहा ये रोने धोने का समय नहीं है, मुझे भूख लगी है, वो जो तुम केले लाये थे वो कहाँ हैं, चोखामेला जी ने कहा प्रभु आप आसन पर बैठिए मैं अभी लाता हूँ। प्रभु ने कहा मैं आसन पर नहीं तुम्हारी गोद मे बैठकर केले खाऊंगा। प्रभु ने बड़े प्यार से चोखामेला जी की गोद में बैठकर केले खाये। प्रभु ने कहा, मैं जाति, कुल, पूजा, आराधना से नहीं रीझता, मुझे तो मेरे भक्तों का मेरे प्रति सच्चा भाव खींचता है, खूब आंनद से रहो। ऐसा कह कर प्रभु वापस चले गए।
अगली सुबह जब पुजारियों ने पट खोलने चाहे तो पट खुले ही नहीं, बहुत कोशिश की गई, अब पुजारियों के जीवन का सहारा केवल विठ्ठल भगवान ही थे, प्रगट में भी और परमार्थ में भी, पुजारियों ने रो रो कर विठ्ठल भगवान से प्रार्थना की, तब विठ्ठल भगवान अंदर से बोले, पहले चोखामेला जी को आदर सहित पालकी में बिठा कर लाओ, वो कहेंगे तब ही पट खोलूँगा। सारे पुजारी भाग कर पालकी लेकर चोखामेला जी घर पहुँचे और उनके चरणों मे लोट गए, कहा हम जान गए हैं कि आप किस चोटी के भक्त हैं, कृपया हमको क्षमा करिए और मंदिर चल कर प्रभु के पट खुलवाईये। चोखामेला जी बहुत झिझकते हुए पालकी में बैठे और मंदिर पहुँचे, मंदिर पहुँच कर उन्होंने प्रभु से बहुत ही दीन भाव से उनकी यह लीला समाप्त करने की प्रार्थना की ताकि श्रद्धालु दर्शनों का लाभ उठा सकें और मंदिर का कार्य सुचारू रूप से चल सके।
. 🪷।। राधे राधे ।।🪷
. !! जय जय श्री राधे-कृष्ण !!
➳ᴹᴿ̶᭄K̶u̶m̶a̶r̶ ̶R̶a̶u̶n̶a̶k̶ ̶K̶a̶s̶h̶y̶a̶p̶
ऐसी ही अनेकानेक पोस्ट पाने के लिये हमारे फेसबुक पेज ‘शिव पुराण ’ को फॉलो और लाईक करें हमारा पेज का लिंक हमारी फेसबुक पर देखें।
फेसबुक लिंक–
https://www.facebook.com/share/16z3CgT2xK/ #🌸जय सिया राम #👏भगवान विष्णु😇 #🌺राधा कृष्ण💞 #🌸श्री गजानन महाराज🙏🏻 #🌷शुभ गुरुवार
https://www.facebook.com/share/17k2bcrKp8/
शौर्य, त्याग और लोक कल्याण का महान पर्व: बैसाखी 🌾⚔️
क्या आप जानते हैं कि बैसाखी केवल नई फसल के पकने का जश्न नहीं है, बल्कि यह वह दिन है जब 13 अप्रैल 1699 को दशम गुरु, श्री गुरु गोबिंद सिंह जी ने 'खालसा पंथ' की स्थापना की थी?
जब समाज पर जुल्म और अत्याचार अपनी चरम सीमा पर थे, तब गुरु जी ने आनंदपुर साहिब में 80 हजार की भीड़ के सामने धर्म और राष्ट्र की रक्षा के लिए 5 शीशों का बलिदान मांगा। उन 5 शूरवीरों—भाई दयाराम जी, भाई धरमदास जी, भाई मोहकमचंद जी, भाई हिम्मत राय जी, और भाई साहबचंद जी—को गुरु जी ने अमृत छकाकर 'पंच प्यारे' का रूप दिया और सदियों से चली आ रही जात-पात की दीवारों को हमेशा के लिए गिरा दिया।
“खालसा अकाल पुरख की फौज, प्रगटिओं परमात्म की मौज” 🙏
यह दिन हमें सिखाता है कि निडरता, स्वाभिमान और परोपकार ही सच्चा धर्म है। इसी दिन किसान अपनी मेहनत की रबी फसल कटाई का जश्न भी मनाते हैं।
आइए, इस महान पर्व पर हम भी उन संत-सिपाहियों के त्याग को नमन करें।
वाहेगुरु जी का खालसा, वाहेगुरु जी की फतेह! ✨
🚩।। जय जय सियाराम ।।🚩
🚩।। जय बजरंगबली ।।🚩
. 🚩 !! जय जय श्री राम !!🚩
➳ᴹᴿ̶᭄K̶u̶m̶a̶r̶ ̶R̶a̶u̶n̶a̶k̶ ̶K̶a̶s̶h̶y̶a̶p̶
ऐसी ही अनेकानेक पोस्ट पाने के लिये हमारे फेसबुक पेज ‘शिव पुराण ’ को फॉलो और लाईक करें हमारा पेज का लिंक हमारी फेसबुक पर देखें।
फेसबुक लिंक–
https://www.facebook.com/share/16z3CgT2xK/ #🌷शुभ गुरुवार #🌸श्री गजानन महाराज🙏🏻 #🌸जय सिया राम #👏भगवान विष्णु😇 #🌺राधा कृष्ण💞
https://www.facebook.com/share/17k2bcrKp8/
एक छोटी सी गलती और करोड़पति महिला आ गई सड़क पर! 😨 जानिये गुरुवार के दिन बाल न धोने का असली शास्त्रोक्त कारण...
गुरुवार के दिन घर के बड़े बुजुर्ग हमेशा बाल धोने, नाखून काटने या घर से भारी सामान निकालने से मना करते हैं। आज की पीढ़ी इसे अंधविश्वास मान सकती है, लेकिन हमारे सनातन धर्म के हर नियम के पीछे एक गहरा विज्ञान और शास्त्र छिपा है।
क्या कहता है ज्योतिष? 🔭
बृहस्पतिवार भगवान विष्णु और देवगुरु बृहस्पति का दिन है। नवग्रहों में बृहस्पति सबसे भारी ग्रह है। इस दिन शरीर या घर को "हल्का" करने वाले काम (जैसे बाल धोना, कबाड़ निकालना) वर्जित हैं, क्योंकि इससे ग्रह का प्रभाव भी हल्का हो जाता है। महिलाओं के लिए गुरु पति और संतान की सफलता का प्रतीक है; इसे कमजोर करने से परिवार पर संकट आ सकता है।
साधु और अमीर महिला की कथा: 📜
(यहाँ पर कथा को संक्षेप में लिखें) ...एक अमीर महिला ने भिक्षा मांगने आए साधु को टालने के लिए समय न होने का बहाना बनाया। साधु रूपी भगवान बृहस्पति ने उसे हर गुरुवार बाल धोने का श्राप नुमा वरदान दिया। कुछ ही समय में वह महिला सब कुछ गँवा बैठी और उसे अपने कर्मों का फल मिला।
इसीलिए गुरुवार को भगवान बृहस्पति की कृपा पाने के लिए पीले वस्त्र पहनें और पीले फूलों से पूजा करें! 🌼
👇 कमेंट में "जय श्री हरि" या "राधे राधे" लिखकर भगवान बृहस्पति का आशीर्वाद प्राप्त करें!
. 🪷।। राधे राधे ।।🪷
. !! जय जय श्री राधे-कृष्ण !!
➳ᴹᴿ̶᭄K̶u̶m̶a̶r̶ ̶R̶a̶u̶n̶a̶k̶ ̶K̶a̶s̶h̶y̶a̶p̶
ऐसी ही अनेकानेक पोस्ट पाने के लिये हमारे फेसबुक पेज ‘शिव पुराण ’ को फॉलो और लाईक करें हमारा पेज का लिंक हमारी फेसबुक पर देखें।
फेसबुक लिंक–
https://www.facebook.com/share/16z3CgT2xK/ #🌺राधा कृष्ण💞 #👏भगवान विष्णु😇 #🌷शुभ गुरुवार #🌸श्री गजानन महाराज🙏🏻 #🌸जय सिया राम
https://www.facebook.com/share/17k2bcrKp8/
जब भक्त का बोझ भगवान स्वयं उठा लें! ❤️🙏
बूंदी नगर के रामदास जी अपने व्यापार के साथ-साथ संतों की सेवा में ऐसे लीन रहते थे कि स्वयं भगवान को भी उनके कष्ट का आभास हो गया। क्या आपने कभी सोचा है कि जब हम दूसरों की सेवा में अपना सुख भूल जाते हैं, तो परमात्मा हमारा ध्यान रखने के लिए किस रूप में आ सकते हैं?
इस अद्भुत कथा में पढ़िए कैसे भगवान श्रीराम ने एक किसान का रूप धरकर न केवल अपने भक्त की भारी गठरी उठाई, बल्कि उनके मन की इच्छा (कढ़ी-फुलका) को भी पूर्ण किया।
सीख: जो संतों और मानवता की सेवा करता है, भगवान उसके लिए सदैव तत्पर रहते हैं। 🚩
. 🪷।। राधे राधे ।।🪷
. !! जय जय श्री राधे-कृष्ण !!
➳ᴹᴿ̶᭄K̶u̶m̶a̶r̶ ̶R̶a̶u̶n̶a̶k̶ ̶K̶a̶s̶h̶y̶a̶p̶
ऐसी ही अनेकानेक पोस्ट पाने के लिये हमारे फेसबुक पेज ‘शिव पुराण ’ को फॉलो और लाईक करें हमारा पेज का लिंक हमारी फेसबुक पर देखें।
फेसबुक लिंक–
https://www.facebook.com/share/16z3CgT2xK/ #👏भगवान विष्णु😇 #🌷शुभ गुरुवार #🌸 जय श्री कृष्ण😇 #🌺राधा कृष्ण💞 #🌸श्री गजानन महाराज🙏🏻
https://www.facebook.com/share/17k2bcrKp8/
🔱 मृत्यु को भी हरा दिया शिव भक्ति ने: जानिए श्री नंदी महाराज के जन्म और अमरता की अद्भुत कथा! 🐂
हम सब महादेव के मंदिरों में नंदी जी के दर्शन करते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि महादेव के सबसे प्रिय भक्त और उनके गणाध्यक्ष 'नंदी' का जन्म कैसे हुआ और उन्होंने मृत्यु पर कैसे विजय प्राप्त की? आइए जानते हैं यह परम पावन कथा:
✨ बिना गर्भ के हुआ था 'अयोनिज' जन्म:
प्राचीन काल में शिलाद मुनि ने भगवान शिव के समान एक ऐसे पुत्र की कामना की जो 'मृत्युहीन' और 'अयोनिज' (जिसका जन्म माता के गर्भ से न हुआ हो) हो। उनकी कठोर तपस्या से प्रसन्न होकर महादेव ने स्वयं उनके पुत्र के रूप में अवतार लेने का वरदान दिया। एक दिन जब शिलाद मुनि यज्ञ भूमि जोत रहे थे, तब उनके पसीने की एक बूंद से एक दिव्य बालक का प्राकट्य हुआ। यह बालक साक्षात् रुद्र रूप थे, जिनका नाम 'नंदी' रखा गया।
⚡ अल्पायु की भविष्यवाणी और एक बड़ा संकट:
जब नंदी केवल सात वर्ष के हुए, तब मुनि मित्र और वरुण ने उनके पिता को एक दुःखद बात बताई— "यह बालक अल्पायु है।" अपने पिता को इस भविष्यवाणी से शोकाकुल देखकर, नंदी ने उन्हें ढांढस बंधाया और महादेव की शरण में जाने का संकल्प लेकर वन की ओर निकल पड़े।
🧘♂️ कठोर तपस्या और काल पर विजय:
नंदी ने वन में जाकर भगवान शिव की घोर तपस्या की। उनकी इस अटूट और निष्काम भक्ति से प्रसन्न होकर साक्षात् उमा-महेश्वर (शिव-पार्वती) वहां प्रकट हुए। महादेव ने मुस्कुराकर नंदी से कहा— "पुत्र! वे मुनि तो केवल तुम्हारी परीक्षा लेने आए थे। तुम तो स्वयं मेरा ही स्वरूप हो, तुम्हें काल (मृत्यु) का कोई भय कैसे हो सकता है?"
🌸 गणाध्यक्ष का पद और अमरता का वरदान:
भगवान शिव ने नंदी को अजर-अमर होने का वरदान दिया। इतना ही नहीं, महादेव ने अपने गले की दिव्य कमल माला उतारकर नंदी को पहना दी और उन्हें अपने सभी गणों का अध्यक्ष (गणाध्यक्ष) नियुक्त कर दिया।
इसी अटूट भक्ति के कारण श्री नंदी महाराज सदा के लिए शिव के सबसे समीप स्थित हो गए और 'अक्षय' पद के अधिकारी बने।
सीख: सच्ची भक्ति में वह शक्ति है जो भाग्य की रेखाओं को भी मिटा सकती है और मृत्यु को भी टाल सकती है!
कमेंट्स में प्रेम से 'हर हर महादेव' या 'ॐ नमः शिवाय' अवश्य लिखें! 🙏👇
।। ॐ नमः शिवाय ।।
।। हर हर महादेव ।।
. !! जय जय श्री महाकाल !!
➳ᴹᴿ̶᭄K̶u̶m̶a̶r̶ ̶R̶a̶u̶n̶a̶k̶ ̶K̶a̶s̶h̶y̶a̶p̶
ऐसी ही अनेकानेक पोस्ट पाने के लिये हमारे फेसबुक पेज ‘शिव पुराण ’ को फॉलो और लाईक करें हमारा पेज का लिंक हमारी फेसबुक पर देखें।
फेसबुक लिंक–
https://www.facebook.com/share/16z3CgT2xK/ #🌸श्री गजानन महाराज🙏🏻 #🌺राधा कृष्ण💞 #👏भगवान विष्णु😇 #🌷शुभ गुरुवार #🌸 जय श्री कृष्ण😇
https://www.facebook.com/share/17k2bcrKp8/
#🌸श्री गजानन महाराज🙏🏻
🔥 धर्म गाथा: जब छल से दुखी होकर शेषनाग ने त्याग दिया संसार... और फिर उठा ली पूरी पृथ्वी! 🌍🐍
हिंदू धर्म में 'शेषनाग' का स्थान अत्यंत दिव्य है। वे सिर्फ नागों के राजा ही नहीं, बल्कि सृष्टि के संतुलन, समय और धैर्य के सबसे बड़े प्रतीक हैं। उन्हें 'आदि शेष' और ‘अनंत’ भी कहा जाता है—अर्थात वह जो कभी समाप्त नहीं होता!
आइए जानते हैं कैसे उन्होंने डगमगाती पृथ्वी का भार अपने फनों पर उठाया:
✨ कौन हैं शेषनाग और क्यों किया उन्होंने वैराग्य धारण?
पौराणिक ग्रंथों के अनुसार, शेषनाग महर्षि कश्यप और माता कद्रू के सबसे ज्येष्ठ पुत्र हैं। एक समय ऐसा आया जब माता कद्रू और उनके अन्य पुत्रों ने छल-कपट से माता विनता और उनके पुत्रों को अपना दास बना लिया। अपनों के इस अन्याय और दुष्ट स्वभाव से शेषनाग इतने दुखी हुए कि उन्होंने संसार से विरक्ति ले ली और तपस्या के मार्ग पर निकल पड़े।
🧘♂️ तपस्या और त्याग की पराकाष्ठा:
शेषनाग ने गंधमादन पर्वत, बदरिकाश्रम, गोकर्ण, पुष्कर और हिमालय जैसे पवित्र स्थलों पर जाकर घोर तप किया। उन्होंने केवल वायु को अपना आहार बनाया। उनकी इस कठोर और निष्काम साधना को देखकर स्वयं सृष्टिकर्ता ब्रह्मा जी प्रकट हुए!
🙏 ब्रह्मा जी का वरदान और एक महान दायित्व:
ब्रह्मा जी ने प्रसन्न होकर कहा— "हे शेष! प्रजा का कल्याण करो और वर मांगो।" शेषनाग ने केवल इतना मांगा कि उनकी बुद्धि सदा धर्म, तप और संयम में लगी रहे।
तब ब्रह्मा जी ने उन्हें एक अद्भुत कार्य सौंपा— "यह पृथ्वी पर्वत, सागर और नगरों सहित डगमगाती रहती है। तुम इसे अपने फनों पर धारण करो और स्थिर बनाओ!"
🐍 अनंत फनों पर टिकी है हमारी पृथ्वी:
शेषनाग ने बिना किसी संकोच के यह दायित्व स्वीकार किया। वे पाताल लोक गए और अपने अनगिनत फनों पर पूरी पृथ्वी को धारण कर लिया। मान्यता है कि तभी से यह पृथ्वी स्थिर बनी हुई है और उनकी यह निस्वार्थ सेवा आज भी निरंतर चल रही है—बिना थके, बिना रुके!
⚡ रोचक तथ्य:
ब्रह्मा जी ने पक्षिराज 'गरुड़' को शेषनाग का सहायक नियुक्त किया।
शेषनाग के पाताल जाने के बाद अन्य नागों ने 'वासुकि' को अपना राजा चुन लिया।
✨ जीवन के लिए 3 बड़ी सीख:
👉 सच्चा त्याग और तपस्या ही व्यक्ति को महान बनाती है।
👉 अपनी जिम्मेदारी से भागना नहीं, बल्कि उसे निभाना ही असली धर्म है।
👉 धैर्य और संयम से ही सृष्टि (और हमारे जीवन) का संतुलन बना रहता है।
कमेंट्स में 'जय अनंत शेषनाग' या 'ॐ नमो नारायण' अवश्य लिखें! 🙏👇
।। ॐ नमः शिवाय ।।
।। हर हर महादेव ।।
. !! जय जय श्री महाकाल !!
➳ᴹᴿ̶᭄K̶u̶m̶a̶r̶ ̶R̶a̶u̶n̶a̶k̶ ̶K̶a̶s̶h̶y̶a̶p̶
ऐसी ही अनेकानेक पोस्ट पाने के लिये हमारे फेसबुक पेज ‘शिव पुराण ’ को फॉलो और लाईक करें हमारा पेज का लिंक हमारी फेसबुक पर देखें।
फेसबुक लिंक–
https://www.facebook.com/share/16z3CgT2xK/ #🌺राधा कृष्ण💞 #🚩जय श्रीराम🙏 #🌸 जय श्री कृष्ण😇
https://www.facebook.com/share/17k2bcrKp8/ #🌷शुभ गुरुवार
#👏भगवान विष्णु😇
🚩 जब भगवान जगन्नाथ छप्पन भोग छोड़कर पहुँचे एक साधारण मछुआरे की कुटिया में! 🚩
क्या ईश्वर को सोने-चांदी के महलों और राजसी भोग की आवश्यकता है? या वे केवल एक सच्चे 'भाव' के भूखे हैं? श्री जगन्नाथ पुरी की यह अद्भुत कथा हर भक्त की आँखों में आंसू ला देगी:
🛶 मछली में साक्षात नारायण के दर्शन:
पुरी के पास रहने वाला रघु केवट पेशे से एक मछुआरा था, लेकिन उसका हृदय अत्यंत कोमल था। जीव-हिंसा से उसे गहरी ग्लानि होती थी। एक दिन जब उसने अपने जाल में फंसी एक तड़पती हुई मछली की आँखों में देखा, तो उसे उसमें साक्षात 'नारायण' के दर्शन हुए! उसी क्षण रघु ने मछली को वापस जल में छोड़ दिया और जीवन भर के लिए हिंसा का त्याग कर पूर्णतः भक्ति में लीन हो गया।
😱 मंदिर में चमत्कार: जब दर्पण से गायब हुआ प्रभु का अक्स!
रघु की इस निस्वार्थ दया और अनन्य भक्ति ने ऐसा चमत्कार किया कि स्वयं त्रिलोकीनाथ भगवान जगन्नाथ, मंदिर का राजसी छप्पन भोग छोड़कर रघु की साधारण कुटिया में उसके हाथों से भोजन करने पहुँच गए।
इधर पुरी के भव्य मंदिर में हाहाकार मच गया! 'भोग मंडप' के दर्पण में प्रभु का प्रतिबिंब दिखना बंद हो गया। राजा और पुजारी व्याकुल हो उठे कि आखिर प्रभु कहाँ चले गए?
✨ भक्त और भगवान का मिलन:
अंततः, भगवान ने राजा को स्वप्न में दर्शन देकर बताया— "मैं तो अपने भक्त रघु के प्रेम के वशीभूत होकर उसकी कुटिया में हूँ।" राजा स्वयं नंगे पैर रघु की कुटिया तक गए और उसे ससम्मान जगन्नाथ पुरी लेकर आए। जैसे ही उस सच्चे भक्त के चरण मंदिर में पड़े, प्रभु का सान्निध्य और उनका प्रतिबिंब पुनः लौट आया!
सीख: यह कथा इस बात का सबसे बड़ा प्रमाण है कि ईश्वर मंदिर की भव्यता या महंगे चढ़ावे में नहीं, बल्कि भक्त के कोमल हृदय और 'जीव-दया' में बसते हैं।
कमेंट्स में प्रेम से 'जय जगन्नाथ' अवश्य लिखें! 🙏👇
. 🪷।। राधे राधे ।।🪷
. !! जय जय श्री राधे-कृष्ण !!
➳ᴹᴿ̶᭄K̶u̶m̶a̶r̶ ̶R̶a̶u̶n̶a̶k̶ ̶K̶a̶s̶h̶y̶a̶p̶
ऐसी ही अनेकानेक पोस्ट पाने के लिये हमारे फेसबुक पेज ‘शिव पुराण ’ को फॉलो और लाईक करें हमारा पेज का लिंक हमारी फेसबुक पर देखें।
फेसबुक लिंक–
https://www.facebook.com/share/16z3CgT2xK/ #🌸 जय श्री कृष्ण😇 #🌸जय सिया राम #🌺राधा कृष्ण💞 #🚩जय श्रीराम🙏
https://www.facebook.com/share/17k2bcrKp8/
#🌷शुभ गुरुवार
🌼 नवगुंजरा: जब प्रकृति और परमात्मा एक हुए! 🌼
पांडव अपने वनवास का कठिन समय व्यतीत कर रहे थे। श्रेष्ठता और ज्ञान की खोज में रहने वाले अर्जुन, मणिपुर की शांत पहाड़ियों पर एकांत तपस्या में लीन थे। चारों ओर सन्नाटा था... तभी अचानक वातावरण का स्पंदन बदल गया।
अर्जुन ने आँखें खोलीं, तो उनके सामने एक ऐसा दृश्य था जिसे देख बड़े-बड़े महारथियों का साहस डगमगा जाए!
✨ एक अद्भुत दर्शन: नौ रूपों का संगम ('नवगुंजरा')
उनके सम्मुख एक ऐसा जीव खड़ा था जो सृष्टि के हर नियम को चुनौती दे रहा था। वह नौ विभिन्न प्राणियों के अंगों से बना एक दिव्य कौतुक था:
🐓 मस्तक: मुर्गे की तरह गर्व से उठा हुआ।
🦚 गर्दन: मोर जैसी नीली आभा और लालित्य।
🐂 पीठ: बैल के कूबड़ जैसी सुदृढ़।
🦁 कमर: शेर की तरह लचीली और शक्तिशाली।
🐍 पूँछ: सांप की तरह लहराती हुई।
🐘 🐅 🐎 पैर: तीन अलग शक्तियों के प्रतीक—एक हाथी का, एक बाघ का और एक घोड़े का।
🪷 हाथ: जो पूरी तरह मानवीय था और जिसने बड़ी कोमलता से एक खिला हुआ 'कमल' थाम रखा था!
🏹 अर्जुन का भ्रम और समर्पण:
अर्जुन का हाथ स्वभाववश उनके गांडीव धनुष की ओर गया। उन्हें लगा यह कोई मायावी राक्षस है। उन्होंने बाण साध लिया। परंतु, जैसे ही उन्होंने उस जीव की आँखों में देखा, उन्हें एक असीम शांति का अनुभव हुआ।
अर्जुन की मेधा ने संकेत दिया— "जो प्रकृति के विरुद्ध लगे, वह राक्षस हो सकता है, लेकिन जिसमें पूरी प्रकृति ही समा जाए, वह तो साक्षात ईश्वर है!" अर्जुन ने तुरंत धनुष रख दिया और नतमस्तक हो गए। देखते ही देखते, वह विचित्र जीव अंतर्ध्यान हो गया और उनके स्थान पर मंद-मंद मुस्कुराते हुए भगवान श्रीकृष्ण प्रकट हुए।
🌺 इस कथा के 3 गहरे संदेश:
१. विश्वरूप का सौम्य प्रतीक: कुरुक्षेत्र में अर्जुन ने श्रीकृष्ण का भयानक 'विश्वरूप' देखा था, वहीं यहाँ उन्होंने उसी विराटता का सौम्य रूप देखा। यह दर्शाता है कि ईश्वर जल, थल, नभ और मनुष्य—हर योनि में मौजूद है।
२. ओडिशा की सांस्कृतिक धरोहर: ओडिशा के जनमानस और 'पट्टचित्र' कला में 'नवगुंजरा' का गहरा स्थान है। पुरी के जगन्नाथ मंदिर की नक्काशी हो या प्राचीन 'गंजीफा' कार्ड्स, यह वहां की पहचान है।
३. संकीर्णता का त्याग: जो हमारी समझ से बाहर हो, उसे हम अक्सर 'गलत' मान लेते हैं। सच्चा ज्ञान वह है, जो विचित्रता में भी दिव्यता और विविधता में एकता देखना सिखा दे।
यह पूरी सृष्टि एक ही परम ऊर्जा से संचालित है। अपनी संकीर्ण दृष्टि छोड़ें, तो हर जीव में उस 'कमलधारी' ईश्वर के दर्शन हो सकते हैं। 🙏
. 🪷।। राधे राधे ।।🪷
. !! जय जय श्री राधे-कृष्ण !!
➳ᴹᴿ̶᭄K̶u̶m̶a̶r̶ ̶R̶a̶u̶n̶a̶k̶ ̶K̶a̶s̶h̶y̶a̶p̶
ऐसी ही अनेकानेक पोस्ट पाने के लिये हमारे फेसबुक पेज ‘शिव पुराण ’ को फॉलो और लाईक करें हमारा पेज का लिंक हमारी फेसबुक पर देखें।
फेसबुक लिंक–
https://www.facebook.com/share/16z3CgT2xK/ #🌸जय सिया राम #🌺राधा कृष्ण💞 #🌸 जय श्री कृष्ण😇 #🙏🌺जय बजरंगबली🌺🙏
https://www.facebook.com/share/17k2bcrKp8/








![👏भगवान विष्णु😇 - भक्त की गठरी , बोझ प्रभु का ]؟ नमक মিন; संत सेवा और भगवान के निस्वार्थ प्रेम की दिव्य कथा राम करे सो होयः जब रामदास जी पर दया की स्वयं प्रभु ने भक्त की गठरी , बोझ प्रभु का ]؟ नमक মিন; संत सेवा और भगवान के निस्वार्थ प्रेम की दिव्य कथा राम करे सो होयः जब रामदास जी पर दया की स्वयं प्रभु ने - ShareChat 👏भगवान विष्णु😇 - भक्त की गठरी , बोझ प्रभु का ]؟ नमक মিন; संत सेवा और भगवान के निस्वार्थ प्रेम की दिव्य कथा राम करे सो होयः जब रामदास जी पर दया की स्वयं प्रभु ने भक्त की गठरी , बोझ प्रभु का ]؟ नमक মিন; संत सेवा और भगवान के निस्वार्थ प्रेम की दिव्य कथा राम करे सो होयः जब रामदास जी पर दया की स्वयं प्रभु ने - ShareChat](https://cdn4.sharechat.com/bd5223f_s1w/compressed_gm_40_img_987117_2702d661_1776284985790_sc.jpg?tenant=sc&referrer=user-profile-service%2FrequestType50&f=790_sc.jpg)



