
❣️𝑲𝒖𝒎𝒂𝒓💞 𝑹𝒂𝒖𝒏𝒂𝒌💞 𝑲𝒂𝒔𝒉𝒚𝒂𝒑❣️
@k_r_kashyap
🚩भगवा की ताकत के आगे, ब्रम्हांड भी सर झुकाता हैं,
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जन्म से मोक्ष तक की यात्रा: भारतीय संस्कृति के १६ संस्कार 🌸📜
हमारी सनातन संस्कृति में जीवन को केवल 'काटना' नहीं, बल्कि उसे 'संवारना' सिखाया गया है। मनुष्य के जन्म से पहले ही उसके संस्कारों की नींव रख दी जाती है और मृत्यु के बाद तक यह क्रम चलता है।
हमारे ऋषियों ने जीवन को सुव्यवस्थित और पवित्र बनाने के लिए 16 प्रमुख पड़ाव तय किए हैं, जिन्हें 'षोडश संस्कार' कहते हैं। ये संस्कार हमें शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक रूप से उन्नत बनाते हैं।
आइए, जीवन के इन १६ सोपानों को जानें:
👶 गर्भस्थ शिशु के संस्कार (जन्म से पूर्व):
गर्भाधान: श्रेष्ठ संतान प्राप्ति के लिए किया जाने वाला प्रथम संस्कार।
पुंसवन: गर्भ की रक्षा और स्वस्थ शिशु के विकास के लिए (गर्भाधान के तीसरे माह में)।
सीमन्तोन्नयन: गर्भवती माता को प्रसन्न और तनावमुक्त रखने के लिए (चौथे से आठवें माह के बीच)।
🧸 बचपन के संस्कार:
4. जातकर्म: शिशु के जन्म लेते ही किया जाने वाला संस्कार (नाल कटने से पूर्व)।
5. नामकरण: शिशु को एक अर्थपूर्ण नाम देने का संस्कार (जन्म के 11वें या 12वें दिन)।
6. निष्क्रमण: शिशु को पहली बार घर से बाहर निकालकर सूर्य/चंद्र दर्शन कराना (चौथे माह में)।
7. अन्नप्राशन: शिशु को पहली बार अन्न (ठोस आहार) खिलाना (छठे माह में)।
8. चूड़ाकर्म (मुंडन): शिशु के जन्म के बाल उतारना, बौद्धिक विकास के लिए (पहले या तीसरे वर्ष में)।
9. कर्णवेध: कान वेधना, स्वास्थ्य और आभूषण धारण के लिए।
📚 शिक्षा और ब्रह्मचर्य के संस्कार:
10. विद्यारंभ: अक्षर ज्ञान और शिक्षा की शुरुआत (लगभग 5 वर्ष की आयु में)।
11. उपनयन (जनेऊ): गुरु के पास जाकर ब्रह्मचर्य आश्रम में प्रवेश करना। यह अत्यंत महत्वपूर्ण संस्कार है।
12. वेदारंभ: वेदों और शास्त्रों का विधिवत अध्ययन शुरू करना।
13. केशांत (गोदान): 16 वर्ष की आयु में प्रथम बार दाढ़ी-मूंछ मुंडवाना, यह ब्रह्मचर्य की परिपक्वता का सूचक था।
14. समावर्तन: शिक्षा पूर्ण कर गुरुकुल से घर लौटना और गृहस्थ जीवन के लिए तैयार होना।
🏡 गृहस्थ और अंतिम संस्कार:
15. विवाह: गृहस्थ आश्रम में प्रवेश, यह समाज और धर्म का आधार है।
16. अन्त्येष्टि: जीवन का अंतिम संस्कार, देह त्याग के बाद अग्नि को समर्पित होना।
ये सोलह संस्कार एक व्यक्ति को पशुवत जीवन से ऊपर उठाकर 'द्विज' (दोबारा जन्मा हुआ, संस्कृत मनुष्य) बनाते हैं।
विचार करें: आज के आधुनिक युग में हम इनमें से कितने संस्कारों का पालन कर पा रहे हैं? क्या हमें अपनी जड़ों की ओर लौटने की आवश्यकता है? अपने विचार कमेंट्स में साझा करें। 👇
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🌼 सोमवती अमावस्या विशेष: पितृ दोष - लक्षण, कारण और महाउपाय 🌼
क्या आपके परिवार में लगातार परेशानियां बनी रहती हैं? कड़ी मेहनत के बाद भी सफलता नहीं मिलती या घर में बिना कारण कलह होती है? 🛑
यह 'पितृ दोष' के संकेत हो सकते हैं। पितृ दोष एक अदृश्य बाधा है जो हमारे पूर्वजों (पितरों) के रुष्ट होने के कारण हमारे जीवन की उन्नति को रोक देती है।
आज सोमवती अमावस्या के पावन अवसर पर, जानें कि पितृ दोष क्या है और इसे शांत करने के सरल उपाय क्या हैं। 🙏
👇 क्या है पितृ दोष?
जब हमारे पूर्वज यह महसूस करते हैं कि उनके परिवार के लोग उनके प्रति श्रद्धा नहीं रखते, उन्हें याद नहीं करते या उनका तर्पण/श्राद्ध नहीं करते, तो वे दुखी होकर अपने वंशजों को जो नकारात्मक ऊर्जा देते हैं, उसे ही "पितृ-दोष" कहते हैं।
👇 पितरों के रुष्ट होने के प्रमुख लक्षण:
अगर आपके जीवन में ये घटनाएं घट रही हैं, तो सावधान हो जाएं:
🔸 मानसिक अशांति: घर में बिना कारण कलह या अवसाद।
🔸 उन्नति में बाधा: व्यापार में लगातार नुकसान या करियर में रुकावट।
🔸 मांगलिक कार्यों में अड़चन: विवाह में देरी या संतान सुख में बाधा।
🔸 अजीब संकेत: बार-बार खाने में बाल निकलना या घर से अजीब दुर्गंध आना।
🔸 स्वप्न: पूर्वजों का बार-बार सपने में आना (विशेषकर दुखी अवस्था में)।
🔸 आर्थिक कष्ट: प्रॉपर्टी बिकने में दिक्कत या पैसा टिकना नहीं।
👇 पितृ दोष शांति के 10 सरल और अचूक उपाय:
सोमवती अमावस्या और पितृ पक्ष में ये उपाय अवश्य करें:
1️⃣ अमावस्या दान: हर अमावस्या को पितरों के नाम से ब्राह्मण को भोजन या कच्चा राशन (सीधा) दान करें। गाय, कुत्ते और कौवे के लिए भोजन निकालें।
2️⃣ शिव आराधना: भगवान शिव का ध्यान कर नित्य 'ॐ तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय च धीमहि तन्नो रुद्रः प्रचोदयात' मंत्र की एक माला जाप करें।
3️⃣ पीपल सेवा: पितृ पक्ष या अमावस्या पर पीपल के वृक्ष की 108 परिक्रमा करें और जल चढ़ाएं।
4️⃣ बड़ों का सम्मान: घर के बुजुर्गों और माता-पिता का सम्मान करें, इससे पितर सर्वाधिक प्रसन्न होते हैं।
5️⃣ सूर्य अर्घ्य: ताम्बे के लोटे में जल, लाल फूल और रोली डालकर सूर्य देव को अर्घ्य दें।
6️⃣ श्रीमद्भागवत पाठ: प्रेत बाधा या भारी दोष के लिए श्रीमद्भागवत या हरिवंश पुराण का पाठ करवाएं।
7️⃣ कन्या विवाह में मदद: किसी गरीब कन्या के विवाह में गुप्त रूप से आर्थिक सहयोग करें।
8️⃣ दीप दान: पितृ पक्ष में घर के वायव्य कोण (उत्तर-पश्चिम) में सरसों के तेल का दीपक जलाएं।
🕉️ विशेष उपाय: नारायणबलि-नागबलि 🕉️
यदि पीढ़ी दर पीढ़ी कष्ट चल रहे हों, अकाल मृत्यु हुई हो या कोई उपाय काम न कर रहा हो, तो शास्त्रों में 'नारायणबलि-नागबलि' का विधान है।
क्यों करें: यह अपूर्ण इच्छाओं की पूर्ति और पितृदोष के पूर्ण निवारण के लिए किया जाता है।
श्रेष्ठ समय: पितृपक्ष, सोमवती अमावस्या या शनैश्चरी अमावस्या।
स्थान: यह त्रयंबकेश्वर (नासिक) या गंगा तट जैसे तीर्थ स्थलों पर योग्य पुरोहित द्वारा संपन्न कराया जाता है।
✨ याद रखें: पितरों के प्रति आपकी सच्ची श्रद्धा ही किसी भी उपाय की सफलता की कुंजी है।
इस महत्वपूर्ण जानकारी को अपने प्रियजनों के साथ शेयर अवश्य करें। शायद आपका एक शेयर किसी के जीवन की बड़ी बाधा दूर कर सके। 🙏
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संस्कृति के पन्नों से: क्या आप धर्मशास्त्र की ये बातें जानते हैं? 📜🌸
हमारे धर्मशास्त्रों में जीवन को जीने की कला को बहुत ही वैज्ञानिक ढंग से संख्याओं में बाँटा गया है। आइए अपनी जड़ों से जुड़ें और जानें भारतीय संस्कृति के कुछ मूल तत्व:
३ ऋण जिन्हें चुकाना आवश्यक है: देव ऋण, पितृ ऋण और ऋषि ऋण।
४ पुरुषार्थ (जीवन के लक्ष्य): धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष।
४ आश्रम (जीवन के चरण): ब्रह्मचर्य, गृहस्थ, वानप्रस्थ और संन्यास।
५ महायज्ञ (दैनिक कर्तव्य): देव, पितृ, मनुष्य, भूत और ब्रह्म यज्ञ।
७ मोक्षदायिनी नदियां: गंगा, यमुना, सिंधु, कावेरी, नर्मदा, ब्रह्मपुत्र और सरस्वती।
८ अष्टांग योग: यम, नियम, आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार, धारणा, ध्यान एवं समाधि।
१६ संस्कार: गर्भाधान (जन्म से पूर्व) से लेकर अन्त्येष्टि (मृत्यु) तक मनुष्य के १६ संस्कार होते हैं।
सनातन धर्म केवल पूजा-पाठ नहीं, बल्कि जीवन जीने की एक पूर्ण व्यवस्था है।
इस बहुमूल्य जानकारी को अपने मित्रों और परिवार के साथ साझा करें। 🙏
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भगवान विष्णु के २४ दिव्य अवतार: सृष्टि के रक्षक की अद्भुत यात्रा 🕉️✨
"यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत..."
जब-जब पृथ्वी पर अधर्म बढ़ा है, भक्तों की पुकार सुनकर भगवान विष्णु ने विभिन्न रूपों में अवतार लिया है। हम अक्सर 'दशावतार' (10 अवतारों) के बारे में सुनते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि श्रीमद्भागवत महापुराण में भगवान के कुल 24 अवतारों का वर्णन मिलता है?
ये अवतार कभी ज्ञान देने के लिए, कभी भक्तों की रक्षा के लिए, तो कभी सृष्टि के संतुलन के लिए हुए हैं।
📜 ये हैं प्रभु के २४ कल्याणकारी अवतार:
सनकादि ऋषि: ब्रह्मचर्य और ज्ञान का उपदेश देने के लिए।
वाराह अवतार: पृथ्वी को जल से बाहर निकालने के लिए।
नारद अवतार: भक्ति मार्ग का प्रचार करने के लिए।
नर-नारायण: तपस्या और संयम का उदाहरण प्रस्तुत करने के लिए।
कपिल मुनि: सांख्य योग का ज्ञान देने के लिए।
दत्तात्रेय: त्रिदेवों के संयुक्त रूप, गुरु परंपरा के लिए।
यज्ञ अवतार: यज्ञों की रक्षा और संचालन के लिए।
ऋषभदेव: जड़योग और वैराग्य का मार्ग दिखाने के लिए।
पृथु महाराज: पृथ्वी का दोहन कर अन्न-धन उगाने के लिए।
मत्स्य अवतार: प्रलय काल में वेदों और बीजों की रक्षा के लिए।
कूर्म (कच्छप) अवतार: समुद्र मंथन के समय मंदराचल पर्वत को आधार देने के लिए।
धन्वन्तरि: आयुर्वेद और अमृत कलश लेकर प्रकट हुए।
मोहिनी अवतार: देवताओं को अमृत पान कराने के लिए।
नृसिंह अवतार: भक्त प्रह्लाद की रक्षा और हिरण्यकशिपु के वध के लिए।
वामन अवतार: राजा बलि के अहंकार को तोड़ने और तीन पग भूमि मांगने के लिए।
परशुराम: आततायी क्षत्रियों से पृथ्वी को मुक्त कराने के लिए।
वेद व्यास: वेदों का विभाजन और पुराणों की रचना के लिए।
श्री राम: मर्यादा पुरुषोत्तम रूप में रावण वध और आदर्श राज्य स्थापना के लिए।
बलराम: शेषनाग के अवतार, श्री कृष्ण के बड़े भाई के रूप में।
श्री कृष्ण: पूर्णावतार, गीता का ज्ञान और दुष्टों के संहार के लिए।
हयग्रीव: वेदों को मधु-कैटभ दैत्यों से वापस लाने के लिए।
हंस अवतार: सनकादि मुनियों की शंका निवारण के लिए।
बुद्ध अवतार: अहिंसा और करुणा का संदेश देने के लिए।
कल्कि अवतार (भविष्य): कलियुग के अंत में अधर्म के नाश के लिए (अभी होना शेष है)।
हर अवतार की अपनी एक दिव्य लीला और उद्देश्य है।
🙏 जय श्री हरि! जय श्री विष्णु! 🙏
कमेंट में 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' लिखकर बताएं! 👇
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🛑 सावधान: कहीं आपकी रसोई (Kitchen) ही तो नहीं बन रही आपकी तरक्की में रुकावट?
क्या आप जानते हैं कि जाने-अनजाने में रसोई में की गई छोटी-छोटी गलतियाँ आपके घर की सुख-शांति और #energy को पूरी तरह खराब कर सकती हैं?
वास्तु और ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, रसोई सिर्फ खाना बनाने की जगह नहीं, बल्कि घर का ऊर्जा केंद्र है। आज ही सुधारें ये 5 आदतें और देखें अपने जीवन में सकारात्मक बदलाव:
🍽️ रात को जूठे बर्तन छोड़ना:
यह सीधा माँ लक्ष्मी को नाराज करने जैसा है। इससे घर की बरकत रुक जाती है और धन का अभाव होने लगता है।
🩴 जूते-चप्पल पहनकर जाना:
रसोई एक पवित्र स्थान (माँ अन्नपूर्णा का मंदिर) है। यहाँ जूते ले जाने से देवगुरु बृहस्पति (Jupiter) कमजोर होते हैं, जिससे ज्ञान और भाग्य में कमी आती है।
🍳 गैस चूल्हे पर गंदगी:
गंदा चूल्हा मंगल (Mars) और राहु (Rahu) को खराब करता है। यह आपकी हर तरक्की (Progress) में बड़े रोड़े अटकाता है।
🧂 नमक का डिब्बा खुला रखना:
खुला नमक आसपास की नकारात्मकता को सोख लेता है और शनि देव (Saturn) को खराब करता है, जिससे जीवन में संघर्ष बढ़ता है।
🥣 टूटे-फूटे बर्तन रखना:
टूटे या चटके हुए बर्तन शुक्र (Venus) ग्रह को कमजोर करते हैं, जिसका सीधा असर घर की सुख-सुविधाओं और धन-समृद्धि पर पड़ता है।
याद रखें, अपनी आदतों में सुधार (#selfimprovement) ही सबसे बड़ा वास्तु उपाय है! ✨
❓ अब सच-सच बताएं: क्या आप रात को अपनी रसोई पूरी तरह साफ करके सोते हैं?
कमेंट्स में 'हाँ' या 'नहीं' लिखकर ज़रूर बताएं! 👇
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🌌 पंचक विशेष: डरें नहीं, समझें! क्या करें और क्या न करें? 🌌
हम अक्सर सुनते हैं कि "अभी पंचक लगा है, यह शुभ काम नहीं करना चाहिए।" लेकिन क्या सच में पंचक इतना अशुभ है? ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, हर पंचक बुरा नहीं होता। आइए, पंचक से जुड़ी भ्रांतियों को दूर करें और सही जानकारी जानें। 🌸
🤔 आखिर क्या है पंचक?
जब चंद्रमा कुंभ और मीन राशि पर गोचर करता है, तो उस 5 दिन के समय को 'पंचक' कहते हैं। यह समय ज्योतिष में कुछ विशेष कार्यों के लिए अशुभ माना जाता है।
⚠️ पंचक के 5 प्रमुख प्रकार और सावधानियां:
पंचक किस दिन शुरू हो रहा है, इस पर उसका प्रभाव निर्भर करता है:
1️⃣ रोग पंचक (रविवार से शुरू): 🤕 सेहत के लिए भारी। शारीरिक और मानसिक कष्ट संभव। स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखें।
2️⃣ राज पंचक (सोमवार से शुरू): 👑 सरकारी नौकरी जॉइन करने के लिए शुभ, लेकिन नई प्राइवेट नौकरी के लिए अशुभ।
3️⃣ अग्नि पंचक (मंगलवार से शुरू): 🔥 आग का भय। घर बनाना या गृह प्रवेश वर्जित। कोर्ट-कचहरी के कामों के लिए ठीक है।
4️⃣ चोर पंचक (शुक्रवार से शुरू): 💰 धन हानि का खतरा। यात्रा और बड़े लेन-देन से बचें।
5️⃣ मृत्यु पंचक (शनिवार से शुरू): 💀 सबसे जोखिम भरा। दुर्घटना का भय। कोई भी बड़ा शुभ कार्य या जोखिम वाला काम न करें।
👉 नोट: बुधवार और गुरुवार को शुरू होने वाले पंचक में मुख्य 5 वर्जित कार्यों को छोड़कर अन्य शुभ काम किए जा सकते हैं।
🚫 पंचक में ये 5 काम हैं विशेष रूप से वर्जित:
चाहे कोई भी पंचक हो, ये कार्य नहीं करने चाहिए:
दक्षिण दिशा की यात्रा: यह यम की दिशा मानी गई है।
छत डलवाना या पलंग/चारपाई बनवाना।
ईंधन इकट्ठा करना: घास, लकड़ी आदि एकत्रित न करें।
अंतिम संस्कार: यह सबसे महत्वपूर्ण है। पंचक में मृत्यु होने पर 'पंचक शांति' (पुतलों का दहन) विधान अति आवश्यक है, अन्यथा गरुड़ पुराण के अनुसार परिवार पर संकट आ सकता है।
✨ भ्रांतियां तोड़ें: पंचक में शुभ कार्य भी संभव हैं! ✨
यह मानना गलत है कि पंचक में कुछ भी अच्छा नहीं हो सकता। 'मुहूर्त चिंतामणि' ग्रंथ के अनुसार पंचक के नक्षत्रों के शुभ फल भी हैं:
✅ धनिष्ठा और शतभिषा नक्षत्र: यात्रा करना, वाहन या मशीनरी खरीदना शुभ है। 🚗
✅ उत्तराभाद्रपद नक्षत्र: गृह प्रवेश, बीज बोना, या जमीन से जुड़े स्थिर कार्यों के लिए सफल। 🏠
✅ रेवती नक्षत्र: व्यापारिक सौदे, गहने-कपड़े खरीदना या विवाद सुलझाने के लिए उत्तम। 💍
निष्कर्ष:
पंचक में सावधानी जरूरी है, अंधविश्वास नहीं। किसी भी महत्वपूर्ण कार्य को करने से पहले किसी विद्वान ज्योतिषी से सलाह अवश्य लें, क्योंकि कई बार पंचक के दौरान भी 'सर्वार्थसिद्धि' जैसे अत्यंत शुभ योग बनते हैं।
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जब हर तरफ से निराश हों, तो यह राह चुनें... 🙏✨]
जीवन है तो परेशानियाँ भी होंगी, लेकिन सनातन धर्म में हर समस्या का एक दिव्य समाधान मौजूद है! जब इंसान दुनिया से हार जाता है, तब ईश्वर का द्वार ही उसे नई #energy (ऊर्जा) और सही रास्ता दिखाता है।
अगर आप जीवन में किसी संकट से जूझ रहे हैं, तो जानिए किस पवित्र धाम में आपको समाधान मिलेगा:
👉 किस्मत रूठ गई हो?
🔱 उज्जैन के राजा महाकाल की शरण में जाएं। (जय श्री महाकाल)
👉 विवाह में बाधाएं आ रही हैं?
🌺 माँ कामाख्या देवी के दरबार में हाजिरी लगाएं।
👉 कर्ज का बोझ नहीं उतर रहा?
🕉️ त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग के दर्शन कर अपनी चिंताएं उन्हें सौंप दें।
👉 मन बहुत उदास या अशांत है?
🦚 वृंदावन की गलियों में जाएं, वहाँ का प्रेम सच्चा #stressrelief है।
👉 मृत्यु या अनहोनी का डर सताता है?
🌙 काशी विश्वनाथ जी के दरबार में जाएं, जहाँ काल भी डरता है।
👉 पैसा आता है पर टिकता नहीं?
🏹 हारे के सहारे खाटू श्याम जी के दर पर जाएं, वहाँ झोली भर जाती है।
सच्चे मन से की गई तीर्थ यात्रा हमारे #personalgrowth और #selfimprovement का सबसे बड़ा माध्यम बनती है।
❓ अब आपकी बारी: आप इनमें से किस पवित्र धाम के दर्शन कर चुके हैं, या अगली यात्रा कहाँ की करना चाहेंगे?
हमें कमेंट्स में ज़रूर बताएं! 👇
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🚨 सावधान! 24 फ़रवरी से शुरू हो रहे हैं 'होलाष्टक' (Holashtak 2026)! इन 8 दिनों में भूलकर भी न करें ये गलतियां! 🚨
होली के रंगों से ठीक पहले के 8 दिनों को हिंदू शास्त्रों में 'होलाष्टक' कहा जाता है। ज्योतिष और मान्यताओं के अनुसार, इन दिनों में ग्रहों का स्वभाव उग्र रहता है और नकारात्मक शक्तियों का प्रभाव काफी अधिक होता है।
अपने परिवार की सुख-शांति और सुरक्षा के लिए 24 फरवरी से लेकर होलिका दहन तक इन बातों का विशेष ध्यान रखें: 👇
❌ इन कार्यों पर है सख्त रोक:
मांगलिक कार्य वर्जित: इन 8 दिनों में कोई भी शुभ कार्य जैसे— विवाह, सगाई, मुंडन, या गृह प्रवेश बिल्कुल न करें।
नई शुरुआत से बचें: कोई नया काम, नया व्यापार (Business) शुरू करने या किसी नई और लंबी यात्रा पर जाने से बचें।
खरीद-बिक्री: होलाष्टक के दिनों में सोना-चाँदी खरीदना, वाहन खरीदना या बेचना शुभ नहीं माना जाता है।
विदाई: इन दिनों में नई बहू या बेटी की विदाई भूलकर भी नहीं करनी चाहिए।
⚠️ विशेष सावधानी (इनका रखें खास ख्याल):
🤰 गर्भवती महिलाएं: कोशिश करें कि इन दिनों अनावश्यक रूप से घर से बाहर न निकलें। नकारात्मक ऊर्जा से अपना बचाव करें।
👶 छोटे बच्चे: बच्चों का खास ख्याल रखें। उन्हें खासकर दोपहर या गोधूलि (शाम) के समय घर से बाहर अकेले खेलने न भेजें।
🛡️ नकारात्मक ऊर्जा से बचने का अचूक उपाय:
चूंकि इन दिनों नकारात्मक ऊर्जा हावी रहती है, इसलिए यदि किसी बहुत जरूरी काम से घर से बाहर जाना ही पड़े, तो अपने साथ लोहे का छल्ला, कोई छोटी चाकू या चाबी का गुच्छा जरूर रख लें। लोहा नकारात्मकता को दूर रखता है!
🙏 होलाष्टक के दौरान भगवान नरसिंह और श्री हरि विष्णु का ध्यान व मंत्र जाप करना बेहद शुभ फलदायी होता है। 👇 क्या आपके घर में भी होलाष्टक के इन नियमों का पालन किया जाता है? कमेंट में "जय श्री हरि" या "जय नरसिंह भगवान" जरूर लिखें!
🔁 अपने परिवार, रिश्तेदारों और दोस्तों की सुरक्षा के लिए इस जरूरी जानकारी को तुरंत शेयर करें!
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🌀✨ सम्मोहन विद्या (Hypnotism) के रहस्य: मन की असीम शक्तियों को पहचानें! (भाग - 3) ✨🌀
सम्मोहन (Hypnosis) कोई जादू-टोना नहीं, बल्कि एक प्राचीन भारतीय विज्ञान है, जिसे पहले 'प्राण विद्या' या 'त्रिकाल विद्या' कहा जाता था। पश्चिमी देशों ने इसे 'मेस्मेरिज्म' और फिर 'हिप्नोटिज्म' का नाम दिया। आइए जानते हैं इसके पीछे का विज्ञान, इसके प्रकार और रहस्य! 👇
🧠 चेतन और अवचेतन मन का अद्भुत खेल:
हमारे मन के मुख्य रूप से दो स्तर होते हैं:
1️⃣ चेतन मन (Conscious Mind): यह हमारा जाग्रत मन है, जिससे हम खुली आँखों से तर्क करते हैं और दैनिक काम करते हैं।
2️⃣ अवचेतन मन (Subconscious Mind): यह मन सोते समय भी जागता रहता है। यह हमें खतरों का पूर्वाभास देता है और हमारी 'छठी इंद्री' (Sixth Sense) की तरह काम करता है। सम्मोहन में इसी अवचेतन मन को जाग्रत करके शक्तिशाली बनाया जाता है।
🖐️ सम्मोहन के 5 मुख्य प्रकार:
आत्म सम्मोहन: खुद के मन और शरीर को सकारात्मक निर्देश (सुझाव) देना।
पर सम्मोहन: किसी दूसरे व्यक्ति के मनोविकारों को दूर करने के लिए उसे सम्मोहित करना।
समूह सम्मोहन: एक साथ पूरी भीड़ या समूह को सम्मोहित करना।
प्राणी सम्मोहन: पशु-पक्षियों को सम्मोहित करना (जैसे सर्कस के रिंगमास्टर करते हैं)।
परामनोविज्ञान सम्मोहन: पूर्व जन्म जानना, दूर बैठे व्यक्ति से संपर्क करना या आत्माओं से जुड़ना।
🗣️ यह काम कैसे करता है? (सुझाव की शक्ति)
सम्मोहन पूरी तरह से 'सुझाव' (Suggestion) पर आधारित है। जब किसी निर्देश को बार-बार दोहराया जाता है, तो हमारा चेतन मन सो जाता है और अवचेतन मन उस बात को सच मानकर वैसा ही शरीर और मन से करवाने लगता है।
🧘♂️ इसे कैसे साधा जाता है?
इसे साधने के लिए मुख्य रूप से त्राटक (किसी एक बिंदु जैसे मोमबत्ती की लौ को एकटक देखना), प्राणायाम और योग निद्रा (शवासन) का अभ्यास किया जाता है।
🌟 सम्मोहन के अद्भुत फायदे:
✅ शारीरिक और मानसिक रोगों में जबरदस्त सुधार।
✅ किसी भी प्रकार के डर (Phobia) और बुरी आदतों से हमेशा के लिए छुटकारा।
✅ भरपूर आत्मविश्वास और निडरता की प्राप्ति।
✅ भूत, भविष्य, वर्तमान और पिछले जन्म (Past Life) की जानकारी पाना।
✅ शरीर से बाहर निकलकर सूक्ष्म जगत (Astral Travel) की यात्रा करना।
⚠️ सावधानी और खतरे (नुकसान):
किसी अप्रशिक्षित या गलत व्यक्ति से सम्मोहित होना बेहद खतरनाक हो सकता है। अवचेतन मन जो सुझाव ग्रहण कर लेता है, उसे ही सत्य मानता है, जिससे हानिकारक प्रभाव भी पड़ सकते हैं।
🛑 विशेष नोट: ऊपर बताई गई विधियां केवल आपकी जानकारी के लिए हैं। यह विद्या बेहद शक्तिशाली है, इसलिए बिना किसी योग्य गुरु के मार्गदर्शन के इसका प्रयोग बिल्कुल न करें! 🙏
👇 क्या आप मन की इन शक्तियों पर विश्वास करते हैं? कमेंट में अपने विचार साझा करें!
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. !! जय जय श्री महाकाल !!
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![🔱हर हर महादेव - सम्मोहन विद्या के रहस्यः चेतन से अवचेतन की यात्रा ঈনন মন = अवचेतन मन (प्राण विद्या) 4 % 2 < 3 . 69 minmt @ Gane 0 و Eunuye ذ 8 O8i मेस्मेरिज्म / हिप्नोटिज्म त्राटक और योग निद्रा 8 IMl [F] पूर्व जन्म ज्ञान सूक्ष्म शरीर यात्रा रोग निवारण सावधानीः यह विद्या शक्तिशाली है। बिना गुरु मार्गदर्शन प्रयोग वर्जित है। = सम्मोहन विद्या के रहस्यः चेतन से अवचेतन की यात्रा ঈনন মন = अवचेतन मन (प्राण विद्या) 4 % 2 < 3 . 69 minmt @ Gane 0 و Eunuye ذ 8 O8i मेस्मेरिज्म / हिप्नोटिज्म त्राटक और योग निद्रा 8 IMl [F] पूर्व जन्म ज्ञान सूक्ष्म शरीर यात्रा रोग निवारण सावधानीः यह विद्या शक्तिशाली है। बिना गुरु मार्गदर्शन प्रयोग वर्जित है। = - ShareChat 🔱हर हर महादेव - सम्मोहन विद्या के रहस्यः चेतन से अवचेतन की यात्रा ঈনন মন = अवचेतन मन (प्राण विद्या) 4 % 2 < 3 . 69 minmt @ Gane 0 و Eunuye ذ 8 O8i मेस्मेरिज्म / हिप्नोटिज्म त्राटक और योग निद्रा 8 IMl [F] पूर्व जन्म ज्ञान सूक्ष्म शरीर यात्रा रोग निवारण सावधानीः यह विद्या शक्तिशाली है। बिना गुरु मार्गदर्शन प्रयोग वर्जित है। = सम्मोहन विद्या के रहस्यः चेतन से अवचेतन की यात्रा ঈনন মন = अवचेतन मन (प्राण विद्या) 4 % 2 < 3 . 69 minmt @ Gane 0 و Eunuye ذ 8 O8i मेस्मेरिज्म / हिप्नोटिज्म त्राटक और योग निद्रा 8 IMl [F] पूर्व जन्म ज्ञान सूक्ष्म शरीर यात्रा रोग निवारण सावधानीः यह विद्या शक्तिशाली है। बिना गुरु मार्गदर्शन प्रयोग वर्जित है। = - ShareChat](https://cdn4.sharechat.com/bd5223f_s1w/compressed_gm_40_img_735705_1584ad32_1771743734173_sc.jpg?tenant=sc&referrer=user-profile-service%2FrequestType50&f=173_sc.jpg)