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🚩भगवा की ताकत के आगे, ब्रम्हांड भी सर झुकाता हैं,
#🕉️सनातन धर्म🚩 #🔱हर हर महादेव #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #🕉 ओम नमः शिवाय 🔱 #🙏कर्म क्या है❓
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🔱✨ तीन पैरों वाले अद्भुत शिवभक्त की कथा: ऋषि भृंगी ✨🔱 क्या आपने कभी सोचा है कि भगवान शिव के गणों में एक ऋषि तीन पैरों वाले क्यों हैं? यह कथा है अटूट भक्ति, हठ और शिव-शक्ति के परम संतुलन की। कैलाश पर्वत... जहाँ डमरू की ध्वनि गूँजती है, वहीं एक महान तपस्वी रहते थे — भृंगी ऋषि। वे शिव के ऐसे अनन्य भक्त थे कि उनके लिए शिव के अतिरिक्त कोई दूसरा तत्व था ही नहीं। 🔥 अटूट भक्ति का हठ उनकी निष्ठा इतनी एकतरफा थी कि वे केवल भगवान शिव की आराधना करते और माता पार्वती को प्रणाम तक नहीं करते थे। उनका मानना था कि केवल शिव ही सर्वस्व हैं। 🌺 परीक्षा की घड़ी एक दिन कैलाश पर शिव और शक्ति एक साथ विराजमान थे। भृंगी ऋषि ने केवल शिव की परिक्रमा करने की ठानी। माता पार्वती शिव के अत्यंत निकट बैठ गईं। तब भृंगी ने भौंरे का रूप धरा और दोनों के बीच से निकलकर केवल शिव की परिक्रमा करने लगे। ⚡ शक्ति का दंड यह देखकर माता पार्वती ने कहा, "यदि तुम्हें केवल शिव चाहिए और शक्ति अस्वीकार है, तो शक्ति से बना यह शरीर तुम्हारे किस काम का?" माता ने उनके शरीर से रक्त और मांस खींच लिया। भृंगी क्षणभर में केवल हड्डियों का ढांचा रह गए और खड़े रहने में भी असमर्थ हो गए। 🕉️ महादेव की करुणा और तीसरा पैर अपने भक्त की यह दशा देख भोलेनाथ करुणा से भर उठे। उन्होंने भृंगी को संतुलन बनाने के लिए एक 'तीसरा पैर' प्रदान किया। तभी से वे त्रिपद भृंगी कहलाए। 🌼 अर्धनारीश्वर का संदेश इस घटना के बाद, संसार को यह बताने के लिए कि शिव और शक्ति एक ही हैं, भगवान ने अर्धनारीश्वर रूप धारण किया। 📜 कथा का सार यह कथा हमें सिखाती है कि भक्ति में संतुलन आवश्यक है। शक्ति के बिना शिव शव समान हैं। तीसरा पैर केवल सहारा नहीं, बल्कि वह दिव्य संतुलन और शिव-कृपा का प्रतीक है जो हमें समझाता है कि एकांगी दृष्टि छोड़, समग्र भाव से ईश्वर को अपनाओ। 🔱 हर हर महादेव! 🔱 आपको यह दिव्य कथा कैसी लगी? कमेंट में 'ॐ नमः शिवाय' लिखकर अपनी उपस्थिति दर्ज करें! 👇 !! जय जय श्री महाकाल !! ➳ᴹᴿ̶᭄K̶u̶m̶a̶r̶ ̶R̶a̶u̶n̶a̶k̶ ̶K̶a̶s̶h̶y̶a̶p̶ #🔱हर हर महादेव #🕉 ओम नमः शिवाय 🔱 #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #🙏कर्म क्या है❓ #🕉️सनातन धर्म🚩
🔱हर हर महादेव - तीन पैरों वाले अद्भुत शिवभक्तः भृंगी ऋषि शिव-शक्ति एक हैं तीन पैरों वाले अद्भुत शिवभक्तः भृंगी ऋषि शिव-शक्ति एक हैं - ShareChat
💍 सिर्फ गहना नहीं, भाग्य का चाबी भी है आपकी अंगूठी! ✨ क्या आप जानते हैं कि आपकी उंगली में पहनी हुई अंगूठी केवल सुंदरता नहीं बढ़ाती, बल्कि आपके जीवन और ग्रहों की दशा भी बदल सकती है? शास्त्रों और ज्योतिष के अनुसार, अलग-अलग धातुओं का हमारे शरीर और मन पर गहरा असर पड़ता है। जानिए किस धातु की अंगूठी आपके लिए क्या चमत्कार कर सकती है: 🤍 चांदी (Silver): मन की शांति यह चंद्रमा का प्रतीक है। इसे पहनने से मन शांत रहता है, तनाव कम होता है और क्रोध व चिड़चिड़ापन दूर होता है। 💛 सोना (Gold): आत्मविश्वास और भाग्य यह जीवन में सकारात्मक ऊर्जा लाता है। इससे भाग्य और आत्मविश्वास (Confidence) बढ़ता है, जो आपकी #personalgrowth में मदद करता है। 🧡 तांबा (Copper): ऊर्जा संतुलन सूर्य और मंगल से जुड़ा तांबा शरीर की ऊर्जा (#energy) को संतुलित रखता है और मन को शांति प्रदान करता है। ⚫ लोहा (Iron): सुरक्षा कवच यह शनि देव का प्रतीक है। लोहे का छल्ला पहनने से हर तरह की नकारात्मक ऊर्जा (Negative Energy) और बुरी नज़र से रक्षा होती है। 🟡 पीतल (Brass): स्थिरता और स्वास्थ्य यह देवगुरु बृहस्पति से जुड़ा है। इसे पहनने से जीवन में स्थिरता (Stability) आती है और समग्र स्वास्थ्य व सुख-शांति बढ़ती है। 🌈 पंचधातु (Panchdhatu): अद्भुत संतुलन पांच पवित्र धातुओं का यह मिश्रण शरीर के चक्रों को संतुलित करता है, जिससे मानसिक और शारीरिक सामंजस्य बना रहता है। #selfimprovement 👇 अब आपकी बारी! आप अपनी उंगली में किस धातु की अंगूठी पहनना सबसे ज्यादा पसंद करते हैं या आपने अभी कौन सी पहनी है? हमें कमेंट्स में ज़रूर बताएं! !! जय जय श्री राधे !! ➳ᴹᴿ̶᭄K̶u̶m̶a̶r̶ ̶R̶a̶u̶n̶a̶k̶ ̶K̶a̶s̶h̶y̶a̶p̶ #🙏कर्म क्या है❓ #🕉 ओम नमः शिवाय 🔱 #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #🔱हर हर महादेव #🕉️सनातन धर्म🚩
🙏कर्म क्या है❓ - अंगूठीः भाग्य और ग्रहों का विज्ञान क्या आप जानते हैं? आपकी अंगूठी बदल सकती है जीवन और ग्रहों की दशा। 2 1 aia (silver): लोहा (ron): क्रोध दूर। नकारात्मक ऊर्जा मन शांत और बुरी नज़र से रक्षा। (चंद्रमा ) पीतल (Brass): तांबा (Copper): संतुलित ऊर्जा स्थिरता , स्वास्थ्य और सुख शांति। (#energy), शांति। पंचधातुः चक्र सोना (Gold): संतुलन , मानसिक- सकारात्मकता  शारीरिक सद्र्भाव आत्मविश्वास , #personalgrowthl (#selfimprovement)l आपकी पसंदीदा अंगूठी कौन सी है? कमेंट में बताएं! (9 9 अंगूठीः भाग्य और ग्रहों का विज्ञान क्या आप जानते हैं? आपकी अंगूठी बदल सकती है जीवन और ग्रहों की दशा। 2 1 aia (silver): लोहा (ron): क्रोध दूर। नकारात्मक ऊर्जा मन शांत और बुरी नज़र से रक्षा। (चंद्रमा ) पीतल (Brass): तांबा (Copper): संतुलित ऊर्जा स्थिरता , स्वास्थ्य और सुख शांति। (#energy), शांति। पंचधातुः चक्र सोना (Gold): संतुलन , मानसिक- सकारात्मकता  शारीरिक सद्र्भाव आत्मविश्वास , #personalgrowthl (#selfimprovement)l आपकी पसंदीदा अंगूठी कौन सी है? कमेंट में बताएं! (9 9 - ShareChat
✨ क्या आपकी जेब (Pocket) में छिपा है आपकी किस्मत का राज़? ✨ क्या आप जानते हैं कि जेब में रखी छोटी-छोटी चीज़ें आपकी #energy (ऊर्जा) और भाग्य को पूरी तरह बदल सकती हैं? वास्तु और तंत्र शास्त्र के अनुसार, घर से निकलते समय यदि आप ये मामूली चीज़ें अपनी जेब में रखते हैं, तो जीवन में चमत्कारिक बदलाव आ सकते हैं। यह आपके #personalgrowth का एक आसान रास्ता है: 🟢 हरी इलायची (Green Cardamom): जेब में सिर्फ एक इलायची रखने से हर तरह का 'नज़र दोष' (Evil Eye) दूर रहता है और आप सकारात्मकता से घिरे रहते हैं। 🤍 फिटकरी का टुकड़ा (Alum): अगर बेवजह डर (Anxiety) लगता है या बुरे सपने आते हैं, तो फिटकरी का एक छोटा टुकड़ा जेब में रखें। मन का डर हमेशा के लिए खत्म हो जाएगा। #selfimprovement 🦚 मोरपंख (Peacock Feather): जेब या डायरी में छोटा सा मोरपंख रखने से राहु दोष का प्रभाव कम होता है और बरसों से बिगड़े हुए काम अचानक बनने लगते हैं। 🤎 3 लौंग (Cloves): किसी ज़रूरी काम, डील या व्यापार के लिए जाते समय जेब में 3 लौंग रखें। यह आपको बड़े आर्थिक नुकसान से बचाने में मदद करता है। ⚪ कपूर (Camphor): कपूर का एक छोटा टुकड़ा जेब में रखने से राहु-केतु और अन्य ग्रह दोष शांत होते हैं। इससे दिनभर मन प्रसन्न और शांत रहता है। 👇 अब आपकी बारी! आप आज से अपनी जेब या पर्स में इनमें से कौन सी चमत्कारी चीज़ रखने वाले हैं? हमें कमेंट्स में ज़रूर बताएं! ............................................. ⚠️ डिस्क्लेमर (Disclaimer): यह जानकारी वास्तु शास्त्र, ज्योतिष और पारंपरिक लोक मान्यताओं पर आधारित है। इसका उद्देश्य केवल सामान्य जानकारी प्रदान करना है। इन उपायों के परिणाम व्यक्ति की श्रद्धा, विश्वास और कर्मों पर निर्भर करते हैं। यह किसी भी प्रकार की पेशेवर, आर्थिक या चिकित्सीय सलाह का विकल्प नहीं है। !! जय जय श्री राधे !! ➳ᴹᴿ̶᭄K̶u̶m̶a̶r̶ ̶R̶a̶u̶n̶a̶k̶ ̶K̶a̶s̶h̶y̶a̶p̶ #🕉️सनातन धर्म🚩 #🔱हर हर महादेव #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #🙏कर्म क्या है❓ #🕉 ओम नमः शिवाय 🔱
🕉️सनातन धर्म🚩 - जेब का वास्तु : ५ चमत्कारी चीज़ें जो बदल देंगी किस्मत! सकारात्मक ऊर्जा और #personalgrowth के लिए। > 0 हरी इलायचीः नज़र दोष से रक्षा फिटकरीः मन का डर खत्म ( #selfimprovement) मोरपंखः बिगड़े काम बनें (राहु दोष) ३ लौंगः आर्थिक नुकसान से बचाव कपूरः ग्रह दोष शांत , प्रसन्न मन आप कौन सी चीज़ रखेंगे ? कमेंट में बताएं! डिरक्लेगरः यह जानकारी सामान्य मान्यताओं पर आथारित है। जेब का वास्तु : ५ चमत्कारी चीज़ें जो बदल देंगी किस्मत! सकारात्मक ऊर्जा और #personalgrowth के लिए। > 0 हरी इलायचीः नज़र दोष से रक्षा फिटकरीः मन का डर खत्म ( #selfimprovement) मोरपंखः बिगड़े काम बनें (राहु दोष) ३ लौंगः आर्थिक नुकसान से बचाव कपूरः ग्रह दोष शांत , प्रसन्न मन आप कौन सी चीज़ रखेंगे ? कमेंट में बताएं! डिरक्लेगरः यह जानकारी सामान्य मान्यताओं पर आथारित है। - ShareChat
🔱 भगवान कार्तिकेय के 6 सिर (षडानन) का अद्भुत रहस्य: क्या यह केवल एक पौराणिक कथा है या इसके पीछे छिपा है कोई गहरा आध्यात्मिक संदेश? ✨🦚 महादेव और माता पार्वती के लाडले पुत्र, देवसेनापति भगवान कार्तिकेय को हम 'षडानन', 'षण्मुख' और 'स्कंद' के नाम से भी जानते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि उनके 6 मुख केवल उनका अलौकिक रूप नहीं हैं, बल्कि यह हमारे जीवन के लिए एक बहुत बड़ा आध्यात्मिक प्रतीक हैं? आइए जानते हैं षण्मुख भगवान के 6 मुखों का रहस्य: 👇 🌺 1️⃣ जन्म की कथा – 6 कृत्तिका माताओं का आशीर्वाद पुराणों के अनुसार, जब भगवान शिव के तेज से कार्तिकेय प्रकट हुए, तो उनका पालन-पोषण 6 'कृत्तिका' माताओं ने किया। 6 माताओं के स्नेह से पोषित होने के कारण उनके 6 मुख हुए। जब माता पार्वती ने उन्हें अपने हृदय से लगाया, तो वे 6 बालक एकाकार होकर 6 मुख वाले दिव्य स्वरूप में प्रकट हुए। 🔥 2️⃣ 6 दिव्य शक्तियों के स्वामी उनके छह मुख छह अद्भुत और दिव्य शक्तियों का प्रतीक माने जाते हैं: ✨ ज्ञान (बुद्धि) ✨ वैराग्य ✨ बल ✨ कीर्ति ✨ शक्ति ✨ तेज 🌞 3️⃣ 6 दिशाओं के रक्षक देवसेना के सेनापति होने के कारण उनका सर्वदर्शी होना आवश्यक है। उनके 6 मुख ब्रह्मांड की छह दिशाओं— पूर्व, पश्चिम, उत्तर, दक्षिण, आकाश और पाताल— की रक्षा और निगरानी का प्रतीक हैं। 🕉️ 4️⃣ मानव शरीर के 'षड् चक्रों' का प्रतीक योग दर्शन के अनुसार, भगवान कार्तिकेय के 6 मुख हमारे शरीर के 6 मुख्य आध्यात्मिक चक्रों (मूलाधार से लेकर आज्ञा चक्र तक) का प्रतिनिधित्व करते हैं। वे कुंडलिनी शक्ति के जागरण के मार्गदर्शक हैं। ⚔️ 5️⃣ 6 आंतरिक शत्रुओं (षड् रिपु) का विनाश मनुष्य के पतन का कारण उसके 6 शत्रु होते हैं— काम, क्रोध, लोभ, मोह, मद और मात्सर्य (ईर्ष्या)। भगवान कार्तिकेय के 6 मुख हमें इन छह शत्रुओं पर विजय प्राप्त करने की प्रेरणा देते हैं। 🌿 निष्कर्ष: कार्तिकेय जी का यह स्वरूप हमें यह संदेश देता है कि जब मनुष्य अपने भीतर के 6 दोषों (शत्रुओं) को भस्म कर लेता है और 6 दिव्य गुणों को धारण कर लेता है, तब वह भी “षण्मुख” की उच्च आध्यात्मिक अवस्था को प्राप्त कर लेता है। 🙏 क्या आप भगवान कार्तिकेय के इस गूढ़ रहस्य को जानते थे? !! जय जय श्री राधे !! ➳ᴹᴿ̶᭄K̶u̶m̶a̶r̶ ̶R̶a̶u̶n̶a̶k̶ ̶K̶a̶s̶h̶y̶a̶p̶ #🙏गुरु महिमा😇 #🕉 ओम नमः शिवाय 🔱 #🕉️सनातन धर्म🚩 #🙏 माँ वैष्णो देवी #🔱हर हर महादेव
🙏गुरु महिमा😇 - भगवान कार्तिकेय के ६ सिर (षडानन) का रहस्य 3 ज्ञान, शक्ति और विजय का प्रतीक भगवान कार्तिकेय के ६ सिर (षडानन) का रहस्य 3 ज्ञान, शक्ति और विजय का प्रतीक - ShareChat
🌿 बाजार की मिलावट से बचें! घर पर बनाएं 100% शुद्ध और खुशबूदार 'गरम मसाला' 🍲✨ क्या आपकी सब्जी या पुलाव में वो ढाबे या रेस्टोरेंट वाली खुशबू नहीं आती? इसका राज छिपा है ताजे कुटे हुए मसालों में! बाजार के पैकेट वाले मसालों को भूल जाइए और आज ही अपने किचन में तैयार करें यह जादुई 'होममेड गरम मसाला'। 👇 🛒 सामग्री (Whole Spices): 🔹 जीरा – 2 बड़े चम्मच 🔹 साबुत धनिया – 2 बड़े चम्मच 🔹 काली मिर्च – 1 बड़ा चम्मच 🔹 हरी इलायची – 6-8 🔹 बड़ी इलायची – 2 🔹 तेजपत्ता – 2-3 🔹 दालचीनी – 2 इंच का टुकड़ा 🔹 लौंग – 8-10 🔹 जावित्री – 1 छोटा टुकड़ा 🔹 जायफल – ½ (कद्दूकस किया हुआ) 🔹 चक्रफूल (स्टार ऐनीस) – 1-2 (आप अपने स्वाद के अनुसार मात्रा थोड़ी कम-ज्यादा कर सकते हैं) 👩‍🍳 बनाने की आसान विधि: 1️⃣ मसाले भूनें: एक भारी तले की कढ़ाई गरम करें। सभी साबुत मसालों को धीमी आंच पर 2-3 मिनट तक सूखा भूनें। (ध्यान रखें मसाले जलें नहीं, बस हल्की खुशबू आने तक भूनें)। 2️⃣ ठंडा करें: भुने हुए मसालों को एक प्लेट में निकालकर पूरी तरह से ठंडा होने दें। 3️⃣ पीस लें: अब इन्हें मिक्सर ग्राइंडर में डालकर बारीक पीस लें। जायफल को अलग से कद्दूकस करके मिला लें। 4️⃣ छान लें (वैकल्पिक): एकदम बाजार जैसा फाइन पाउडर चाहिए, तो छलनी से छान लें। 🫙 स्टोर करने का सही तरीका: ✅ हमेशा एयरटाइट कांच की बोतल या जार में भरकर रखें। ✅ ठंडी और सूखी जगह पर रखें। ✅ यह मसाला 2-3 महीने तक एकदम ताजा और खुशबूदार रहता है! 🌟 उपयोग: दाल, सूखी सब्जी, पनीर, पुलाव या बिरयानी में... इसे एकदम अंत में डालें। आपकी डिश का स्वाद और खुशबू दोगुनी हो जाएगी! 😋 🤔 आप अपने घर में गरम मसाला खुद बनाते हैं या बाजार से लाते हैं? कमेंट्स में जरूर बताएं! 👇 !! जय जय श्री राधे !! ➳ᴹᴿ̶᭄K̶u̶m̶a̶r̶ ̶R̶a̶u̶n̶a̶k̶ ̶K̶a̶s̶h̶y̶a̶p̶ #🕉 ओम नमः शिवाय 🔱 #🕉️सनातन धर्म🚩 #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #🙏गुरु महिमा😇 #🌸 जय श्री कृष्ण😇
🕉 ओम नमः शिवाय 🔱 - घर का बना गरम मसालाः शुद्ध, खुशबूदार , जायकेदार घर का बना गरम  মমালা a घर का बना गरम मसालाः शुद्ध, खुशबूदार , जायकेदार घर का बना गरम  মমালা a - ShareChat
🌊 सात समंदर पार की रानी: जब समुद्र देव के भयंकर क्रोध ने ली राजा रतन सेन के प्रेम की परीक्षा! 👑✨ हम सभी ने रानी पद्मावती के जौहर और अलाउद्दीन खिलजी की कहानी सुनी है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि चित्तौड़ पहुँचने से पहले ही राजा रतन सेन का सामना 'समुद्र देव' (Ocean God) के भयंकर क्रोध से हुआ था? 🌪️🚢 यह दास्तान है प्रेम, अहंकार और एक अनोखी परीक्षा की! 📖👇 1️⃣ सात समंदर पार का प्रेम 🦜 सिंहल द्वीप (श्रीलंका) के राजा गंधर्वसेन की पुत्री पद्मावती दुनिया की सबसे सुंदर स्त्री थीं। एक दिन 'हीरामन' नाम का एक बोलने वाला तोता चित्तौड़ के राजा रावल रतन सेन के पास पहुँचा। तोते ने पद्मावती के रूप का ऐसा बखान किया कि राजा बिना देखे ही उनके प्रेम में दीवाने हो गए। राज-पाट छोड़कर, एक जोगी (संन्यासी) का भेष धारण कर, राजा ने सात समंदर पार किए और कठिन तपस्या के बाद पद्मावती को अपनी रानी बनाया। 2️⃣ अहंकार और समुद्र देव का महाक्रोध 🌊 विवाह के बाद जब राजा विशाल जहाजों के बेड़े के साथ चित्तौड़ लौट रहे थे, तो उनके मन में अहंकार आ गया— "मैंने दुनिया की सबसे सुंदर स्त्री को जीत लिया है, अब मुझसे बड़ा और भाग्यशाली कोई नहीं!" इस घमंड को तोड़ने के लिए समुद्र देव ने भयंकर तूफान ला दिया। लहरें आसमान छूने लगीं, जहाज तहस-नहस हो गए और राजा-रानी एक दूसरे से बिछड़ गए। 💔 3️⃣ लच्छमी की माया और प्रेम की परीक्षा 👁️ तूफान में बहते हुए रानी पद्मावती एक टापू पर पहुँचीं, जो समुद्र देव की पुत्री 'लच्छमी' का था। उसने रानी को सुरक्षित रख लिया। दूसरी ओर, राजा रतन सेन के सच्चे प्रेम की परीक्षा का समय था। लच्छमी ने माया से हूबहू पद्मावती का रूप धारण किया और राजा के सामने गई। लेकिन राजा की आँखों में इतना सच्चा प्रेम था कि उन्होंने तुरंत पहचान लिया और फूट-फूट कर रोने लगे— "तुम मेरी पद्मावती नहीं हो!" 4️⃣ क्षमा, पुनर्मिलन और चित्तौड़ वापसी 🏰 राजा के निश्छल प्रेम और टूटे हुए अहंकार को देखकर समुद्र देव प्रसन्न हुए। उन्होंने राजा को क्षमा किया, रानी पद्मावती को सुरक्षित लौटाया और अथाह धन-संपत्ति देकर उन्हें भारत (चित्तौड़) की भूमि पर पहुँचाया। (इसी के बाद चित्तौड़ में वह ऐतिहासिक अध्याय शुरू होता है, जिसे आज पूरी दुनिया जानती है।) 🪷 एक अन्य मान्यता (दक्षिण भारत): दक्षिण भारत में भगवान वेंकटेश्वर (तिरुपति बालाजी) की पत्नी देवी पद्मावती को भी पूजा जाता है। वे देवी महालक्ष्मी का अवतार हैं (जो समुद्र मंथन से प्रकट हुई थीं), इसलिए उन्हें भी 'समुद्र की पुत्री' माना जाता है। 🙏 🌸 निष्कर्ष: यह कथा सिखाती है कि प्रेम में कोई कितनी भी बड़ी विजय क्यों न पा ले, 'अहंकार' उस रिश्ते और जीवन की नैया को पल भर में डुबो सकता है। 🤔 क्या आपने रानी पद्मावती की यह 'समुद्र देव की परीक्षा' वाली कथा पहले सुनी थी? कमेंट्स में अपने विचार साझा करें! 👇 !! जय जय श्री राधे !! ➳ᴹᴿ̶᭄K̶u̶m̶a̶r̶ ̶R̶a̶u̶n̶a̶k̶ ̶K̶a̶s̶h̶y̶a̶p̶ #🙏 माँ वैष्णो देवी #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #🕉 ओम नमः शिवाय 🔱 #🕉️सनातन धर्म🚩 #🔱हर हर महादेव
🙏 माँ वैष्णो देवी - प्रेम की परीक्षा और पुनर्मिलन प्रेम की परीक्षा और पुनर्मिलन - ShareChat
🏔️ मंदिर में बैठी कोई मूर्ति नहीं, पहाड़ों की 'बेटी' हैं मां नंदा: पढ़ें देवभूमि उत्तराखंड की सबसे भावुक लोककथा! ✨ उत्तराखंड के लोग मां नंदा देवी (माता पार्वती का रूप) को केवल एक देवी के रूप में नहीं पूजते, बल्कि वे उन्हें अपने गांव की बेटी (गढ़वाली/कुमाऊंनी में 'ध्यानी') मानते हैं। यह कहानी केवल भक्ति की नहीं, बल्कि एक बेटी के मायके आने और रोते हुए ससुराल (कैलाश) विदा होने की है। 🌸 1️⃣ पहाड़ों की बेटी और कैलाश का कष्ट 🏔️ पौराणिक कथाओं के अनुसार, नंदा पर्वतराज हिमालय की पुत्री थीं। उनका विवाह भगवान शिव से हुआ, जिनका निवास अत्यंत दुर्गम और बर्फीले कैलाश पर्वत पर है। पहाड़ों की हर विवाहित लड़की की तरह, मां नंदा को भी अपने ससुराल में कठिन जीवन बिताना पड़ता है, जहां कड़ाके की ठंड है और भोजन में केवल कंद-मूल। 2️⃣ मायके की याद और आंसुओं से भरी विदाई 💧 कहा जाता है कि साल में एक बार (भाद्रपद माह में) मां नंदा अपने मायके आती हैं। उनके आने पर पूरे उत्तराखंड में जश्न मनाया जाता है, बिल्कुल वैसे ही जैसे किसी की अपनी सगी बेटी घर आई हो। लेकिन जब उनके वापस कैलाश लौटने का समय आता है, तो पूरा पहाड़ रो पड़ता है। गांव वाले अपनी इस 'बेटी' को नए कपड़े, चूड़ी, बिंदी और पकवान देकर बिल्कुल एक आम बेटी की तरह रोते हुए विदा करते हैं। 3️⃣ दुष्टों का संहार: नंदा-सुनंदा अवतार ⚔️ मां केवल एक कोमल बेटी नहीं, बल्कि एक योद्धा भी हैं। जब हिमालय क्षेत्र में असुरों का आतंक बढ़ा, तब माता ने देवी नंदा और उनकी बहन देवी सुनंदा के रूप में अवतार लिया और राक्षसों का वध किया। इसी जीत की खुशी में आज भी केले के तने से नंदा-सुनंदा की सुंदर मूर्तियां बनाई जाती हैं। 4️⃣ हिमालय का महाकुंभ: 'नंदा देवी राजजात यात्रा' 🚩 मां नंदा की इसी विदाई को एक महा-यात्रा के रूप में मनाया जाता है, जो दुनिया की सबसे कठिन धार्मिक यात्राओं में से एक है: 🔹 हर 12 साल में एक बार: यह यात्रा हर 12 साल में आयोजित होती है। 🔹 280 किमी का पैदल सफर: श्रद्धालु नंगे पैर रूपकुंड (कंकालों वाली झील) और खतरनाक ग्लेशियरों को पार करते हुए 280 किलोमीटर चलते हैं। 🔹 चार सींगों वाला रहस्यमयी खाडू (Ram): इस यात्रा का सबसे बड़ा चमत्कार है— एक चार सींगों वाला मेंढा (चौसिंगा खाडू), जो यात्रा वाले साल अपने आप कहीं जन्म ले लेता है! माता की विदाई का सारा श्रृंगार और सामान इसी की पीठ पर लादा जाता है। 🔹 अंतिम विदाई: 16,000 फीट की ऊंचाई पर 'होमकुंड' पहुंचकर, लोग इस मेंढे की पूजा कर उसे अकेला छोड़ देते हैं। मान्यता है कि वह अकेला ही बर्फीले पहाड़ों को पार कर माता का सामान भगवान शिव (कैलाश) तक पहुंचा देता है। 🌸 निष्कर्ष: मां नंदा देवी का दुःख-सुख उत्तराखंड के हर घर से जुड़ा है। वे आस्था भी हैं और पहाड़ की हर उस बेटी का प्रतीक भी, जो शादी के बाद अपने मायके को तरसती है। 🙏 क्या आप देवभूमि उत्तराखंड से हैं या आपने कभी इस महान राजजात यात्रा के बारे में सुना है? कमेंट्स में लिखें— "जय मां नंदा देवी!" 👇 !! जय जय श्री राधे !! ➳ᴹᴿ̶᭄K̶u̶m̶a̶r̶ ̶R̶a̶u̶n̶a̶k̶ ̶K̶a̶s̶h̶y̶a̶p̶ #🔱हर हर महादेव #🕉 ओम नमः शिवाय 🔱 #🕉️सनातन धर्म🚩 #🙏 माँ वैष्णो देवी #🙏🏻आध्यात्मिकता😇
🔱हर हर महादेव - माँ नंदा की विदाईः एक अलौकिक महायात्रा माँ नंदा की विदाईः एक अलौकिक महायात्रा - ShareChat
🍎✨ सोने का सेब, सुनहरी चिड़िया और अपनों का धोखा: सच्चाई और जादुई दुनिया की एक अद्भुत कहानी! 🕊️👑 बचपन में सुनी गई परियों और जादू की कहानियों का अपना एक अलग ही रोमांच होता है। आज पढ़िए एक ऐसे राजकुमार की दास्तान, जिसने एक सुनहरी चिड़िया को पाने के लिए जादुई दुनिया का सफर तय किया! 📖👇 1️⃣ सोने का सेब और रहस्यमयी चोर 🍎 एक अमीर राजा के बगीचे में एक जादुई पेड़ था, जिस पर सोने के सेब (Golden Apples) उगते थे। लेकिन हर रात एक सेब चोरी होने लगा। राजा ने अपने बड़े बेटों को पहरे पर बिठाया, पर वे सो गए। तीसरी रात सबसे छोटे राजकुमार की बारी थी। उसने देखा कि ठीक आधी रात को आसमान से एक बेहद खूबसूरत सुनहरी चिड़िया (Golden Bird) आई और सेब चुराने लगी। राजकुमार के तीर चलाने पर चिड़िया तो उड़ गई, लेकिन उसका एक चमकदार 'सुनहरा पंख' गिर गया। 2️⃣ जादुई खोज और बोलने वाली लोमड़ी 🦊 पंख की चमक देख राजा ने कहा— "मुझे यह सुनहरी चिड़िया हर हाल में चाहिए!" बड़े भाई खोज में निकले, पर एक बोलने वाली लोमड़ी का मजाक उड़ाकर सराय में भोग-विलास में डूब गए। लेकिन छोटे राजकुमार ने लोमड़ी की बात मानी। लोमड़ी ने उसे अपनी जादुई पूंछ पर बैठाया और पल भर में एक रहस्यमयी महल तक पहुँचा दिया। 3️⃣ लालच और तीन जादुई शर्तें 🏰 लोमड़ी ने चेतावनी दी थी कि चिड़िया को लकड़ी के पिंजरे में रखना, पर राजकुमार ने लालच में सोने का पिंजरा छू लिया। सैनिक जाग गए और राजकुमार पकड़ा गया! राजा ने शर्त रखी— "अगर तुम मुझे 'सोने का घोड़ा' लाकर दोगे, तो चिड़िया तुम्हारी।" घोड़ा चुराते वक्त भी राजकुमार ने वही गलती की— सोने की लगाम पहना दी! फिर उसे पकड़ा गया और तीसरी शर्त मिली— "सोने के महल की राजकुमारी को लेकर आओ!" आखिरकार लोमड़ी की चतुराई से राजकुमार को राजकुमारी, सोने का घोड़ा और सुनहरी चिड़िया तीनों मिल गए। 4️⃣ अपनों का धोखा और कुएं की गहराई 💔 लौटते समय राजकुमार ने अपने बड़े भाइयों की जान बचाई, पर लालची भाइयों ने उसे ही कुएं में धक्का दे दिया! वे राजकुमारी, घोड़ा और चिड़िया लेकर पिता के पास पहुँच गए और सारा श्रेय खुद ले लिया। 5️⃣ सच्चाई की जादुई जीत ✨ दयालु लोमड़ी ने फिर छोटे राजकुमार को कुएं से निकाला। उधर महल में क्या हुआ? छोटे राजकुमार के बिना सुनहरी चिड़िया ने गाना बंद कर दिया, सोने के घोड़े ने खाना छोड़ दिया और राजकुमारी दिन-रात रोने लगी। लेकिन जैसे ही छोटा राजकुमार भिखारी के भेष में महल लौटा: 🕊️ सुनहरी चिड़िया मीठा गीत गाने लगी! 🐎 सोने का घोड़ा खुशी से उछलने लगा! 👸 राजकुमारी के चेहरे पर मुस्कान आ गई! राजकुमारी ने राजा को सारी सच्चाई बता दी। धोखेबाज भाइयों को सजा मिली और छोटे राजकुमार का विवाह उस सुंदर राजकुमारी से हो गया। 🌸 कहानी की सीख: लालच और धोखा इंसान को कुछ पल की खुशी दे सकते हैं, लेकिन जो दूसरों की भलाई करता है और अहंकार नहीं करता, अंत में जीत उसी की होती है! 🤔 क्या आपको भी बचपन में ऐसी जादुई कहानियाँ सुनना पसंद था? कमेंट्स में बताएं और कहानी अच्छी लगी हो तो शेयर जरूर करें! 👇 !! जय जय श्री राधे !! ➳ᴹᴿ̶᭄K̶u̶m̶a̶r̶ ̶R̶a̶u̶n̶a̶k̶ ̶K̶a̶s̶h̶y̶a̶p̶ #🔱हर हर महादेव #🕉️सनातन धर्म🚩 #🙏कर्म क्या है❓ #🌸जय सिया राम #🕉 ओम नमः शिवाय 🔱
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: ⚡ क्या आप जानते हैं 'कुल्लू घाटी' के पहाड़ एक विशालकाय राक्षस का शरीर हैं? जानिए 'बिजली महादेव' का अद्भुत रहस्य! 🏔️🔱 हिमाचल प्रदेश की खूबसूरत कुल्लू घाटी को देखकर मन शांत हो जाता है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस सुंदर घाटी का निर्माण एक भयानक राक्षस के शरीर से हुआ था? और यहाँ भगवान शिव आज भी इंसानों को बचाने के लिए आसमानी बिजली का प्रहार अपने ऊपर सहते हैं! 🙏✨ यह कहानी है कुलान्त (Kulanth) राक्षस और बिजली महादेव की। 👇 1️⃣ कुलान्त राक्षस का भयानक षड्यंत्र 🐍 प्राचीन काल में कुल्लू घाटी में 'कुलान्त' नाम का एक अति-शक्तिशाली और क्रूर राक्षस रहता था। एक बार उसने पूरी घाटी को डुबोने की ठानी। उसने एक विशालकाय अजगर (Giant Snake) का रूप लिया और मथाण गांव के पास जाकर 'ब्यास नदी' के प्रवाह को अपने शरीर से रोक दिया, ताकि घाटी जलमग्न हो जाए। 2️⃣ महादेव की चतुराई और राक्षस का वध 🔱 इतने विशाल अजगर को सीधे मारना कठिन था, इसलिए शिवजी ने चतुराई से काम लिया। वे अजगर के पास गए और बोले— "कुलान्त! जरा पीछे मुड़कर देखो, तुम्हारी पूंछ में आग लग गई है!" जैसे ही घबराकर कुलान्त ने पीछे देखा, महादेव ने अपने त्रिशूल से उसके सिर पर जोरदार प्रहार किया और राक्षस वहीं ढेर हो गया। 3️⃣ राक्षस का शरीर बन गया पहाड़ ⛰️ मृत्यु के बाद कुलान्त राक्षस का वह विशालकाय शरीर पहाड़ों की एक लंबी श्रृंखला में बदल गया। कुल्लू घाटी के चारों ओर जो ऊंचे-ऊंचे पहाड़ नजर आते हैं, वे उसी अजगर के शरीर का हिस्सा माने जाते हैं। इसी 'कुलान्त पीठ' (कुलान्त का अंत) के नाम पर इस जगह का नाम 'कुल्लू' पड़ा। 4️⃣ आसमानी बिजली और शिवलिंग का रहस्य (बिजली महादेव) ⚡ राक्षस के मरने के बाद, उसके बचे हुए प्रभाव को नष्ट करने के लिए शिवजी ने देवराज इंद्र को वहां आसमानी बिजली गिराने का आदेश दिया। लेकिन शिव नहीं चाहते थे कि इस बिजली से घाटी के जीवों को नुकसान हो, इसलिए उन्होंने उस प्रहार को अपने ऊपर (शिवलिंग के रूप में) झेल लिया। 🧈 मक्खन का चमत्कार: आज भी कुल्लू की ऊंची पहाड़ी पर स्थित 'बिजली महादेव' मंदिर में समय-समय पर भयंकर आसमानी बिजली सीधे शिवलिंग पर गिरती है! बिजली गिरने से शिवलिंग टूटकर चकनाचूर हो जाता है। इसके बाद मंदिर के पुजारी उन टुकड़ों को इकट्ठा कर सत्तू और ताजे मक्खन (Butter) से जोड़ देते हैं। सबसे बड़ा चमत्कार यह है कि कुछ ही महीनों में वह शिवलिंग अपने आप फिर से जुड़कर एक ठोस पत्थर बन जाता है! 😲 🌸 निष्कर्ष: यह मंदिर भगवान शिव के उस महान बलिदान का प्रतीक है, जहाँ वे आज भी अपने भक्तों की रक्षा के लिए प्रकृति का भयंकर प्रहार अपने ऊपर ले लेते हैं। 🙏 क्या आप कभी कुल्लू के 'बिजली महादेव' मंदिर गए हैं? कमेंट्स में "हर हर महादेव" लिखकर बाबा का आशीर्वाद प्राप्त करें! 👇 !! जय जय श्री महाकाल !! ➳ᴹᴿ̶᭄K̶u̶m̶a̶r̶ ̶R̶a̶u̶n̶a̶k̶ ̶K̶a̶s̶h̶y̶a̶p̶ #🕉️सनातन धर्म🚩 #🙏कर्म क्या है❓ #🙏गुरु महिमा😇 #🔱हर हर महादेव #🕉 ओम नमः शिवाय 🔱
🕉️सनातन धर्म🚩 - बिजली महादेवः कुल्लू घाटी की अद्धुत गाथा बिजली महादेवः कुल्लू घाटी की अद्धुत गाथा - ShareChat