Sachin Sharma
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✨ प्रेम, सफर, डरावनी कहानियां ✍️ Kahanighar.in पर
“उसने मेरा नंबर क्यों डिलीट कर दिया?” Boyfriend - Girlfriend की कहानी ❤️ रात के 11 बजे थे। आरव अपने कमरे में बैठा मोबाइल की स्क्रीन देख रहा था। उसने अनन्या को तीन बार मैसेज किया था। "कैसी हो?" "सब ठीक है?" "Reply क्यों नहीं कर रही?" लेकिन हर बार सिर्फ एक टिक दिखाई दे रही थी। दो साल का रिश्ता था। हर सुबह "Good Morning" और हर रात "Take Care" कहे बिना दोनों को नींद नहीं आती थी। लेकिन पिछले कुछ दिनों से अनन्या बदल गई थी। न फोन... न मैसेज... न कोई शिकायत। बस खामोशी। अगले दिन आरव ने हिम्मत करके फोन किया। लेकिन इस बार फोन किसी और ने उठाया। "हैलो?" एक बुजुर्ग महिला की आवाज थी। "जी... अनन्या से बात करनी थी।" कुछ सेकंड चुप्पी रही। फिर उधर से आवाज आई— "बेटा... अनन्या अस्पताल में है।" आरव के हाथ कांप गए। "क्या हुआ उसे?" "उसके पापा का एक्सीडेंट हो गया था। पिछले महीने से वह अस्पताल और घर के बीच भाग रही है। फोन भी खराब हो गया था।" आरव कुछ पल तक कुछ बोल ही नहीं पाया। अगले ही दिन वह अस्पताल पहुंच गया। वहां उसने जो देखा, उसे देखकर उसकी आंखें भर आईं। अनन्या अस्पताल के बाहर बेंच पर बैठी थी। चेहरा थका हुआ था। आंखों के नीचे काले घेरे थे। वह पहले जैसी मुस्कुराती हुई लड़की नहीं लग रही थी। "अनन्या..." उसने धीरे से आवाज दी। अनन्या ने सिर उठाया। उसे देखकर उसकी आंखों में आंसू आ गए। "तुम यहां क्यों आए?" आरव उसके पास बैठ गया। "क्योंकि तुम अकेली नहीं हो।" बस इतना सुनते ही अनन्या रो पड़ी। "मैं तुम्हें परेशान नहीं करना चाहती थी।" "क्यों?" "क्योंकि पापा की दवाई, घर का खर्च, अस्पताल... सब कुछ संभालना पड़ रहा था। मुझे लगा तुम भी परेशान हो जाओगे।" आरव मुस्कुराया। "पागल लड़की... रिश्ता सिर्फ खुशियों में साथ रहने का नाम नहीं होता।" कुछ देर बाद अनन्या ने अपना फोन निकाला। "देखो..." उसने कॉन्टैक्ट लिस्ट खोली। आरव का नंबर गायब था। "मैंने तुम्हारा नंबर डिलीट कर दिया था।" आरव का दिल एक पल के लिए रुक गया। "क्यों?" अनन्या की आंखों से आंसू बह निकले। "क्योंकि मुझे डर था... कि कहीं मैं तुम्हारी जिंदगी पर बोझ न बन जाऊं।" आरव ने उसका हाथ पकड़ लिया। "अगर प्यार में एक-दूसरे का दर्द नहीं बांट सकते... तो फिर वो प्यार कैसा?" अनन्या रोते हुए मुस्कुरा दी। कई दिनों बाद पहली बार उसके चेहरे पर सुकून था। कुछ महीनों बाद उसके पापा पूरी तरह ठीक हो गए। एक शाम वही दोनों पार्क की उसी पुरानी बेंच पर बैठे थे। अनन्या ने हंसते हुए कहा— "अच्छा हुआ मैंने तुम्हारा नंबर डिलीट कर दिया था।" आरव हंस पड़ा। "क्यों?" "क्योंकि तभी मुझे पता चला... कि तुम सिर्फ मेरे boyfriend नहीं, मेरे अपने हो।" आरव ने मुस्कुराकर उसका हाथ थाम लिया। और डूबते सूरज के साथ... दोनों की आंखों में एक नया भरोसा चमक रहा था। सीख ❤️ सच्चा प्यार हर दिन बात करने से साबित नहीं होता, बल्कि मुश्किल समय में बिना बुलाए साथ खड़े रहने से साबित होता है। 🌹 पाठकों से निवेदन 🙏 मेरे प्रिय पाठकों मै एक लेखक हूं और हिंदी कहानियां एवं साहित्य लिखता हूँ, मेरा काम सिर्फ कहानियां लिखना नहीं बल्कि उनके द्वारा लोगों को शिक्षा देना भी है.. मेरे दोस्तों मेरी कहानी को ज्यादा से ज्यादा शेयर करे और मुझे Support करने के लिए मुझे Follow जरूर करें 🙏 #📓 हिंदी साहित्य #📚कविता-कहानी संग्रह #👀रोमांचक कहानियाँ 🕵️‍♂️ #✍️ साहित्य एवं शायरी #📗प्रेरक पुस्तकें📘
📓 हिंदी साहित्य - उसने मेरा नंबर सच्चा प्यार क्यों डिलीट कर दिया? हर दिन बात करने से साबित नहीं होता, बल्कि मुश्किल समय में बिना बुलाए साथ खड़े रहने से साबित होता हैं। EMERGENCY वो चाहती थी मैं परेशान न हो जाऊं॰ मैं चाहती था वो अकेली न रहे.. और फिर हम समझे... देना, য়ো মনলন মাথ चाहे हालात जैसे भी हों ।  கஷிகஷி বুম সিক্চ মহী दूरिंयों गर्लफ्रेंड नहीं , प्यार की गहराई समझा  8#8. #? 3/47=7.. तुम साथ हो, तो हर मुश्किल आसान है. उसने मेरा नंबर सच्चा प्यार क्यों डिलीट कर दिया? हर दिन बात करने से साबित नहीं होता, बल्कि मुश्किल समय में बिना बुलाए साथ खड़े रहने से साबित होता हैं। EMERGENCY वो चाहती थी मैं परेशान न हो जाऊं॰ मैं चाहती था वो अकेली न रहे.. और फिर हम समझे... देना, য়ো মনলন মাথ चाहे हालात जैसे भी हों ।  கஷிகஷி বুম সিক্চ মহী दूरिंयों गर्लफ्रेंड नहीं , प्यार की गहराई समझा  8#8. #? 3/47=7.. तुम साथ हो, तो हर मुश्किल आसान है. - ShareChat
“उसने अपना टिफिन खुद क्यों नहीं खाया?” एक मां की मार्मिक कहानी ❤️ सुबह के 7 बजे थे। पूजा जल्दी-जल्दी रोटियाँ बना रही थी। एक तरफ गैस पर चाय चढ़ी थी, दूसरी तरफ बेटे आरव का स्कूल बैग खुला पड़ा था। घर छोटा था… लेकिन जिम्मेदारियाँ बहुत बड़ी। पति की नौकरी छूटे हुए तीन महीने हो चुके थे। घर का खर्च अब पूजा की सिलाई से चल रहा था। फिर भी वह हर सुबह चेहरे पर मुस्कान रखती। “मम्मी… आज टिफिन में क्या रखा ?” आरव ने मासूमियत से पूछा। पूजा मुस्कुराई “तेरी पसंद के आलू के पराठे।” आरव खुश हो गया। लेकिन सच ये था कि घर में सिर्फ तीन ही पराठे बने थे। दो आरव के टिफिन में चले गए… और एक पति के लिए रख दिया गया। अपने लिए पूजा ने कुछ नहीं रखा। दोपहर में पड़ोसन आई। “अरे पूजा, तूने खाना खा लिया?” पूजा ने झूठी हँसी के साथ कहा, “हाँ दीदी… अभी खाया।” लेकिन उसका पेट सुबह से खाली था। वह चाहकर भी खाना नहीं खा सकती थी। क्योंकि घर में आटा बस शाम तक के लिए बचा था। शाम को आरव स्कूल से लौटा। आज वह थोड़ा चुप था। पूजा ने पूछा, “क्या हुआ बेटा?” आरव ने बैग खोला… और टिफिन बाहर निकाला। टिफिन पूरा भरा हुआ था। “तुमने खाना नहीं खाया?” पूजा घबरा गई। आरव धीरे से बोला— “मम्मी… आज लंच टाइम में मैंने देखा कि आप सुबह खुद कुछ नहीं खा रही थीं।” पूजा चुप हो गई। “आपने कहा था आपको भूख नहीं है… लेकिन मैंने देखा था कि आप खाली डिब्बे धो रही थीं।” पूजा की आँखें भर आईं। आरव ने टिफिन उसकी तरफ बढ़ाया और बोला— “मम्मी… मुझे स्कूल में भूख नहीं लगी। आप खा लो।” पूजा खुद को रोक नहीं पाई। उसने बेटे को सीने से लगा लिया और फूट-फूटकर रोने लगी। एक छोटा बच्चा… अपनी माँ की भूख समझ गया था। उसी रात पूजा चुपचाप छत पर बैठी थी। तभी उसका पति उसके पास आया और बोला— “मैंने सब सुन लिया…” उसकी आँखें भी नम थीं। “मैं वादा करता हूँ पूजा… बहुत जल्दी सब ठीक कर दूँगा।” पूजा मुस्कुरा दी। क्योंकि उस गरीब घर में पैसे भले कम थे… लेकिन प्यार बहुत अमीर था। सीख ✨ माँ अक्सर कह देती है कि उसे भूख नहीं है… लेकिन सच में वह अपना हिस्सा बच्चों के लिए बचा रही होती है। ❤️ पाठकों से निवेदन 🙏 मेरे प्रिय पाठकों मै एक लेखक हूं और हिंदी कहानियां एवं साहित्य लिखता हूँ, मेरा काम सिर्फ कहानियां लिखना नहीं बल्कि उनके द्वारा लोगों को शिक्षा देना भी है.. मेरे दोस्तों मेरी कहानी को ज्यादा से ज्यादा शेयर करे और मुझे Support करने के लिए मुझे Follow जरूर करें 🙏 #📚कविता-कहानी संग्रह #👀रोमांचक कहानियाँ 🕵️‍♂️ #📗प्रेरक पुस्तकें📘 #✍️ साहित्य एवं शायरी #📓 हिंदी साहित्य
📚कविता-कहानी संग्रह - मा की भूख, 3 ரி 36R 8a&_' माँ की भूख, छुपी ఇlతతడ' भूखी अक्सर होती हैं। रहकर भी, हमारी थाली कभी खाली नहीं रहने देती। मों का त्याग , दुनिया का सबसे अनमोल प्यार है। मा माँ हैं तो सब कुछ हैं। मा की भूख, 3 ரி 36R 8a&_' माँ की भूख, छुपी ఇlతతడ' भूखी अक्सर होती हैं। रहकर भी, हमारी थाली कभी खाली नहीं रहने देती। मों का त्याग , दुनिया का सबसे अनमोल प्यार है। मा माँ हैं तो सब कुछ हैं। - ShareChat
“उसने अपनी नई साड़ी वापस क्यों कर दी?” ❤️ पूरे मोहल्ले में दिवाली की तैयारी चल रही थी। हर घर में रंगाई-पुताई, मिठाइयों की खुशबू और नई चीज़ों की खरीदारी हो रही थी। लेकिन सीमा के घर में इस बार अजीब-सी खामोशी थी। सीमा कई दिनों से बाज़ार में एक गुलाबी साड़ी देख रही थी। हर बार दुकान के सामने रुकती… साड़ी को दूर से देखती… और फिर मुस्कुराकर आगे बढ़ जाती। उसका मन करता था कि इस दिवाली वो भी नई साड़ी पहने। पिछले तीन सालों से उसने अपने लिए कुछ नहीं खरीदा था। घर की जिम्मेदारियाँ इतनी थीं कि हर बार उसकी छोटी-सी इच्छा पीछे रह जाती। उसका पति अमित एक छोटी नौकरी करता था। कमाई बस इतनी थी कि घर का खर्च किसी तरह चल जाए। एक शाम अमित ने पूछा, “सीमा… इस बार दिवाली पर तुम्हें क्या चाहिए?” सीमा मुस्कुरा दी, “कुछ नहीं… सब है मेरे पास।” लेकिन अमित समझ गया था कि वह झूठ बोल रही है। अगले दिन ऑफिस से लौटते वक्त अमित उसी दुकान पर गया और EMI पर वही गुलाबी साड़ी खरीद लाया। घर आकर उसने पैकेट सीमा के हाथ में रखा। “Happy Diwali…” सीमा ने जैसे ही साड़ी देखी, उसकी आँखें चमक उठीं। “अरे… ये वही साड़ी…!” उसकी खुशी देखते ही बन रही थी। लेकिन तभी उसकी नजर अमित के हाथों पर गई। उनकी पुरानी घड़ी गायब थी। वही घड़ी… जो अमित को उसके पापा ने पहली नौकरी पर दी थी। सीमा समझ गई। “आपने… घड़ी बेच दी?” उसने धीरे से पूछा। अमित मुस्कुरा दिया, “पुरानी हो गई थी।” लेकिन सीमा जानती थी— वो सिर्फ घड़ी नहीं थी, अमित की सबसे प्यारी निशानी थी। उस रात सीमा चुप रही। सुबह अमित उठा तो देखा— टेबल पर वही गुलाबी साड़ी रखी थी। “सीमा… ये क्या?” सीमा मुस्कुराई, “मैंने वापस कर दी।” “लेकिन क्यों? तुम्हें तो बहुत पसंद थी ना?” सीमा ने धीरे से कहा— “जिस साड़ी की कीमत आपकी यादों से चुकानी पड़े… वो खुशी मुझे नहीं चाहिए।” अमित की आँखें भर आईं। सीमा आगे बोली— “दिवाली नए कपड़ों से नहीं… अपने लोगों के साथ से खूबसूरत बनती है।” अमित ने पहली बार महसूस किया— सच्चा प्यार वो नहीं जो महंगे तोहफे दे, बल्कि वो है जो दूसरे की तकलीफ समझ जाए। उस दिन दोनों बिना नई साड़ी और बिना बड़ी खरीदारी के भी बहुत खुश थे। क्योंकि उस घर में प्यार था… और प्यार से बड़ा कोई त्योहार नहीं होता। ❤️ सीख ✨ कभी-कभी रिश्तों की असली चमक नए कपड़ों में नहीं, बल्कि एक-दूसरे की भावनाओं को समझने में होती है। पाठकों से निवेदन 🙏 मेरे प्रिय पाठकों मै एक लेखक हूं और हिंदी कहानियां एवं साहित्य लिखता हूँ, मेरा काम सिर्फ कहानियां लिखना नहीं बल्कि उनके द्वारा लोगों को शिक्षा देना भी है.. मेरे दोस्तों मेरी कहानी को ज्यादा से ज्यादा शेयर करे और मुझे Support करने के लिए मुझे Follow जरूर करें 🙏 #📓 हिंदी साहित्य #📚कविता-कहानी संग्रह #👀रोमांचक कहानियाँ 🕵️‍♂️ #📗प्रेरक पुस्तकें📘 #✍️ साहित्य एवं शायरी
📓 हिंदी साहित्य - दिवाली की असली चमक नए कपड़ों में नहीं , एक दूसरे की भावनाओं समझने में है.. को प्यार से बड़ी कोई चीज नहीं... बाँटने से खुशियां  और बढ़ती  ೩ रिश्ते वो नहीं जो चीज़ों से बनते हैं रिश्ते वो हैं जो दिल से निभाए जाते हैं...  दिवाली की असली चमक नए कपड़ों में नहीं , एक दूसरे की भावनाओं समझने में है.. को प्यार से बड़ी कोई चीज नहीं... बाँटने से खुशियां  और बढ़ती  ೩ रिश्ते वो नहीं जो चीज़ों से बनते हैं रिश्ते वो हैं जो दिल से निभाए जाते हैं... - ShareChat
“पापा ने नया जूता क्यों नहीं खरीदा?” – एक मार्मिक पिता की कहानी 👞 रवि कई दिनों से एक ही बात बोल रहा था— “पापा, इस बार मेरे birthday पर वो white वाले shoes दिला देना… वही जो रोहन पहनकर स्कूल आता है।” हर दिन स्कूल जाते समय वह दुकान के बाहर रुककर उन जूतों को देखता। उसकी आँखों में एक अलग ही चमक होती थी। पापा हर बार मुस्कुरा देते, “हाँ बेटा… इस बार जरूर।” लेकिन सच्चाई कुछ और थी। रवि के पापा, मनोज, एक छोटी-सी किराने की दुकान पर काम करते थे। पूरे दिन खड़े-खड़े काम करने के बाद भी महीने के आखिर तक पैसे कम पड़ जाते थे। घर का किराया… दादी की दवाई… स्कूल की फीस… और ऊपर से बढ़ती महंगाई। मनोज कई बार रात को चुपचाप बैठकर खर्चों का हिसाब देखते रहते। एक शाम रवि ने फिर पूछा, “पापा… birthday में बस 5 दिन बचे हैं।” मनोज ने उसकी तरफ देखा और मुस्कुरा दिए, “मिल जाएंगे बेटा।” लेकिन उस मुस्कान के पीछे चिंता साफ दिखाई दे रही थी। उसी रात जब सब सो गए, मनोज ने अपनी पुरानी अलमारी खोली। अंदर उनका फटा हुआ जूता रखा था। जूते का तलवा लगभग निकल चुका था। बारिश में पानी अंदर आ जाता था। लेकिन फिर भी वो रोज वही जूते पहनकर काम पर जाते थे। उन्होंने धीरे से जूते को हाथ में लिया और खुद से बोले— “एक महीना और चला लेंगे… पहले बेटे के shoes जरूरी हैं।” अगले दिन मनोज काम पर पैदल गए। क्योंकि उन्होंने बस का किराया भी बचाना शुरू कर दिया था। पूरा हफ्ता उन्होंने अपने लिए कुछ नहीं खरीदा। दोपहर का खाना तक छोड़ दिया। सिर्फ इसलिए… ताकि बेटे की आँखों की चमक बनी रहे। आखिर रवि का birthday आ गया। सुबह मनोज एक छोटा-सा डिब्बा लेकर घर आए। “Happy Birthday बेटा…” रवि ने जल्दी से डिब्बा खोला— अंदर वही white shoes थे। उसकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा। वह खुशी से पापा के गले लग गया। “पापा! Exactly वही वाले!” मनोज बस उसे खुश होकर देखते रहे। लेकिन तभी रवि की नजर नीचे गई… पापा के जूते पूरी तरह भीगे हुए थे। एक तरफ से फटे हुए। “पापा… आपके जूते?” रवि धीरे से बोला। मनोज ने तुरंत पैर पीछे कर लिए, “अरे कुछ नहीं… अभी चल रहे हैं।” लेकिन पहली बार रवि समझ चुका था— उसके shoes सिर्फ पैसे से नहीं खरीदे गए थे… उनमें उसके पिता की भूख, थकान, और अधूरी जरूरतें भी शामिल थीं। उस रात रवि अपने नए shoes को देखता रहा… और फिर चुपचाप उन्हें वापस डिब्बे में रख दिया। अगली सुबह वह पापा के पास गया और बोला— “पापा… मुझे ये shoes बाद में चाहिए। पहले आप अपने लिए नए जूते ले लो।” मनोज की आँखें भर आईं। उन्होंने बेटे को सीने से लगा लिया। और उस पल… एक छोटा बच्चा थोड़ा बड़ा हो गया। सीख 👇 पिता अक्सर अपने सपनों को नहीं, अपनी जरूरतों को मारते हैं— ताकि बच्चों की छोटी-सी खुशी भी अधूरी न रहे। ❤️ पाठकों से निवेदन 🙏 मेरे प्रिय पाठकों मै एक लेखक हूं और हिंदी कहानियां एवं साहित्य लिखता हूँ, मेरा काम सिर्फ कहानियां लिखना नहीं बल्कि उनके द्वारा लोगों को शिक्षा देना भी है.. मेरे दोस्तों मेरी कहानी को ज्यादा से ज्यादा शेयर करे और मुझे Support करने के लिए मुझे Follow जरूर करें 🙏 #📓 हिंदी साहित्य #📚कविता-कहानी संग्रह #✍️ साहित्य एवं शायरी #👀रोमांचक कहानियाँ 🕵️‍♂️ #📗प्रेरक पुस्तकें📘
📓 हिंदी साहित्य - पिता..! ce32*'65 पापा आप हो तो वो इंसान नहीं , कुछ है सब एक एहसास हैं. जो खुद भूखा रहकर भी बच्चों के चेहरे কং মুকান লানা ট1 सच्चे हीरो कैप नहीं पहनते , उनके नाम पापा होते हैं। मेरे हीरो मेरे पापा हैं तो दुनिया हैं #+ 1 qII ^^^ पिता..! ce32*'65 पापा आप हो तो वो इंसान नहीं , कुछ है सब एक एहसास हैं. जो खुद भूखा रहकर भी बच्चों के चेहरे কং মুকান লানা ট1 सच्चे हीरो कैप नहीं पहनते , उनके नाम पापा होते हैं। मेरे हीरो मेरे पापा हैं तो दुनिया हैं #+ 1 qII ^^^ - ShareChat
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