#🙏प्रातः वंदन
उमड़/चल रहा है, जो भाव तुम्हारे मन में।
है क्या वह, जो दिल में दबाए जा रहे हो।
साकार होगा कैसे, मन ही मन में बताओ।
बताओगे तो हल होगा,जो छुपाए जा रहे हो।।
जमाने में, किसी के दबाये, दबता कौन है।
दवे/कुचले से ज्यादा, उभरता कौन है।
जो बात कल, सामने आएगी दुनिया में।
क्यों उसे सीने में, दबाये जा रहे हो।।
कल्याण सिंह चौहान "दिल"