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#📚कविता-कहानी संग्रह #✍️ साहित्य एवं शायरी #📓 हिंदी साहित्य
📚कविता-कहानी संग्रह - aRiI uf3 urf भौजी भइया , रोय के गए हैं तुम ढकोला रहौ रिश्तेदारी है II रहौ त्वाड़ा हम तुम्हारि ब्वाला अब ना देखाय पडेव बप्पव ते बताय देहेव न कब्बौं चाहे लागै महामारी है Il 3TTua हौ तुम, 7 মনক্কী কলনি मनकी करौ अब खूब जईबे काल्हि हमहू छोड़ि महल अटारी है II लड़िकन का खवायेव , हगायेव, सौंचायेव मुला आयेव ना बोलावय तुमका कसम हमारी है II कवि कमलेश सोनी संडीला हरदोई aRiI uf3 urf भौजी भइया , रोय के गए हैं तुम ढकोला रहौ रिश्तेदारी है II रहौ त्वाड़ा हम तुम्हारि ब्वाला अब ना देखाय पडेव बप्पव ते बताय देहेव न कब्बौं चाहे लागै महामारी है Il 3TTua हौ तुम, 7 মনক্কী কলনি मनकी करौ अब खूब जईबे काल्हि हमहू छोड़ि महल अटारी है II लड़िकन का खवायेव , हगायेव, सौंचायेव मुला आयेव ना बोलावय तुमका कसम हमारी है II कवि कमलेश सोनी संडीला हरदोई - ShareChat
Kavita #कविता #✍️ साहित्य एवं शायरी #प्रदूषण #📚कविता-कहानी संग्रह #📚कविता-कहानी संग्रह #📓 हिंदी साहित्य
कविता - সনুবিন বত্তি धरा पर जो धरा है, इसी धरा ने धरा है, पर यही धरा हाय! धराशायी हो रही Il प्रश्न उठता है कि प्रदूषण का दोषी कौन? प्रकृति की पाठशाला में पढ़ाई हो रही Il राग, अनुराग व पराग में लगी है आग, हर ओर की हवा हवाहवाई हो रही ।l आयु वाली वायु, प्राणवायु का हो चीरहरण, जलवायु की धरा से ही सफाई हो रही Il वायु है तो जीवन है, प्रदूषित करना कवि स्वयं के विनाश को बुलाना है। Kamlesh Soni (प्रकृति, समाज और संवेदना की आवाज़) मेरी सोच, मेरी कविता पेड़ लगाएं साइकिल प्रकृति को प्रदूषण प्रकृत्ति हमारी मौं ह॰ चायु उसका प्राण| जब चायु प्रदूषित होती ह, तो केवल वाततावरण नहीं कम कर अपनाए बचाए मानव का भविष्य भी सकट में होता है। आइए॰ हम सन मिलकर इसे स्वच्छ शुद्ध और  जीवनदायी बनाएं ताकि आने वाली पीढ़ियों भी खली सांस ले सर्के। সনুবিন বত্তি धरा पर जो धरा है, इसी धरा ने धरा है, पर यही धरा हाय! धराशायी हो रही Il प्रश्न उठता है कि प्रदूषण का दोषी कौन? प्रकृति की पाठशाला में पढ़ाई हो रही Il राग, अनुराग व पराग में लगी है आग, हर ओर की हवा हवाहवाई हो रही ।l आयु वाली वायु, प्राणवायु का हो चीरहरण, जलवायु की धरा से ही सफाई हो रही Il वायु है तो जीवन है, प्रदूषित करना कवि स्वयं के विनाश को बुलाना है। Kamlesh Soni (प्रकृति, समाज और संवेदना की आवाज़) मेरी सोच, मेरी कविता पेड़ लगाएं साइकिल प्रकृति को प्रदूषण प्रकृत्ति हमारी मौं ह॰ चायु उसका प्राण| जब चायु प्रदूषित होती ह, तो केवल वाततावरण नहीं कम कर अपनाए बचाए मानव का भविष्य भी सकट में होता है। आइए॰ हम सन मिलकर इसे स्वच्छ शुद्ध और  जीवनदायी बनाएं ताकि आने वाली पीढ़ियों भी खली सांस ले सर्के। - ShareChat