Ashok Rajput
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@keshav249965017
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Ashok Rajput
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🌸jay sir Hanuman🌺
#🪔बसंत पंचमी की शुभकामनाएं🙏🌸
🪔बसंत पंचमी की शुभकामनाएं🙏🌸 - आप सभी को बसंत पंचमो के पावन पर्व की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं! आप सभी को बसंत पंचमो के पावन पर्व की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं! - ShareChat
#छेर छेरा की हार्दिक शुभकामनाएँ
छेर छेरा की हार्दिक शुभकामनाएँ - ०३ जनवरी अन्नदान के महापर्व छेरछेरा तिहार की आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएं ०३ जनवरी अन्नदान के महापर्व छेरछेरा तिहार की आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएं - ShareChat
#❤️Love You ज़िंदगी ❤️
❤️Love You ज़िंदगी ❤️ - ्िदुयी कभी-कभी उदासी की आग है जिंदगी | कभीनकभी खुशियों का बाग है जिंदगी | हंसता और रुलाता राग है जिंदगी | कडवे और मिंठे अनुभवों का स्वाद है जिंदगी | पर अंत में तो अपनें किये हुये कर्मो का हिसाब है जिंदगी | రకాదేరా ्िदुयी कभी-कभी उदासी की आग है जिंदगी | कभीनकभी खुशियों का बाग है जिंदगी | हंसता और रुलाता राग है जिंदगी | कडवे और मिंठे अनुभवों का स्वाद है जिंदगी | पर अंत में तो अपनें किये हुये कर्मो का हिसाब है जिंदगी | రకాదేరా - ShareChat
#🇮🇳मेरा भारत, मेरी शान
🇮🇳मेरा भारत, मेरी शान - 'वंदे मातरम्' राष्ट्रीय गीत 'वंदे मातरम्' भारत की एकता, देशभक्ति और मातृभूमि के प्रति श्रद्धा का अमर प्रतीक है। नवंबर २०२५ को भारत के राष्ट्रीय गीत 'वंदे मातरम्' की रचना के লিব ] १५० वर्ष पूरे हो रहे हैं, जो देश के एक अत्यंत गौरवपूर्ण और ऐतिहासिक अवसर है। इस अमर गीत की रचना महान साहित्यकार और स्वतंत्रता सेनानी बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने 7 नवंबर १८७५ को की थी, जिसने भारत के स्वतंत्रता संग्राम में करोड़़ों भारतीयों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनकर राष्ट्रीय चेतना को जगाया।राष्ट्रगीत 'वंदे १ ५० वर्ष पूरा होने के मौके पर 7 से १५ नवंबर तक মানমূ' ক राजेन्द्र प्रसाद ने देश में उत्सव देश के प्रथम ரரிI राष्ट्रपति ST १९५० में इसे राष्ट्रगीत का दर्जा दिया था।वंदे मातरम बंकिम चंद्र चटर्जी द्वारा लिखित एक संस्कृत कविता है। यह १८८२ में प्रकाशित आनंद मठ से लिया गया था। वंदे मातरम को पहली बार १८९६ में रवींद्रनाथ टैगोर ने गाया था। यह २४ जनवरी १९५० को घटक विधानसभा द्वारा अपनाया गया था। जदुनाथ भट्टाचार्य ने वंदे मातरम संगीत की रचना की मातरम के १५० साल URL 'वंदे मातरम्' राष्ट्रीय गीत 'वंदे मातरम्' भारत की एकता, देशभक्ति और मातृभूमि के प्रति श्रद्धा का अमर प्रतीक है। नवंबर २०२५ को भारत के राष्ट्रीय गीत 'वंदे मातरम्' की रचना के লিব ] १५० वर्ष पूरे हो रहे हैं, जो देश के एक अत्यंत गौरवपूर्ण और ऐतिहासिक अवसर है। इस अमर गीत की रचना महान साहित्यकार और स्वतंत्रता सेनानी बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने 7 नवंबर १८७५ को की थी, जिसने भारत के स्वतंत्रता संग्राम में करोड़़ों भारतीयों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनकर राष्ट्रीय चेतना को जगाया।राष्ट्रगीत 'वंदे १ ५० वर्ष पूरा होने के मौके पर 7 से १५ नवंबर तक মানমূ' ক राजेन्द्र प्रसाद ने देश में उत्सव देश के प्रथम ரரிI राष्ट्रपति ST १९५० में इसे राष्ट्रगीत का दर्जा दिया था।वंदे मातरम बंकिम चंद्र चटर्जी द्वारा लिखित एक संस्कृत कविता है। यह १८८२ में प्रकाशित आनंद मठ से लिया गया था। वंदे मातरम को पहली बार १८९६ में रवींद्रनाथ टैगोर ने गाया था। यह २४ जनवरी १९५० को घटक विधानसभा द्वारा अपनाया गया था। जदुनाथ भट्टाचार्य ने वंदे मातरम संगीत की रचना की मातरम के १५० साल URL - ShareChat
#🎁दिवाली गिफ्ट 🪔
🎁दिवाली गिफ्ट 🪔 - आपको और आपके परिवार को 3 गोबर्धन की हार्दिक शुभकामनाऐँ आशीर्वाद भगवान श्री कष्ण का आप पर सदैव बना रहे। ర్ల్గా ೫ आपको और आपके परिवार को 3 गोबर्धन की हार्दिक शुभकामनाऐँ आशीर्वाद भगवान श्री कष्ण का आप पर सदैव बना रहे। ర్ల్గా ೫ - ShareChat
#❤️Love You ज़िंदगी ❤️
❤️Love You ज़िंदगी ❤️ - 9IG ক্রা হ্ী যা মিব্বী ক্রা दीपक सोने कीमत उसकी रोशनी की होती है. ೧೦ वैसे ही इंसान अमीर हौ या गरीब कीमत उसके व्यवहार की होती है॰॰ Ashok Rajput 9IG ক্রা হ্ী যা মিব্বী ক্রা दीपक सोने कीमत उसकी रोशनी की होती है. ೧೦ वैसे ही इंसान अमीर हौ या गरीब कीमत उसके व्यवहार की होती है॰॰ Ashok Rajput - ShareChat