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लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के विरुद्ध अविश्वास प्रस्ताव
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आदेश है ईश्वर का
(भाग - २५)
(अदृश्य शक्ति के रूप में सृष्टि के कण-कण में व्याप्त भगवान का मानवता के नाम इस युग का संदेश, उन्हीं की वाणी में)
अध्याय - १८६ : जीवन को कर्मठ और गतिपूर्ण बनाओ
२ जुलाई, १९९६
( ... या फिर उनके आवेगों से ग्रस्त होता है, - वही सत्य है। ) के आगे
" जो बादल बन कर बरस जाता है, फिर भी सूखता नहीं; जो हर स्थिति, हर रूप, हर कर्म में रूप देता, रंग देता, रस - माधुर्य और गंध देता हुआ भी, रूप - रस - गंधहीन नहीं होता। सभी (कुछ) संसार में उसका बनाया हुआ होता है, और वह बनाता भी रहता है। मगर उसको बनाने वाली शक्तियां और उनके वे रूप, जिनके द्वारा वह सभी कुछ बनाता है, उनमें से भी कुछ भी नष्ट नहीं होता, सभी वैसे का वैसा ही रहता है। न तो शक्ति से क्षीण होता है, न गति से, न रूप - रस - गन्ध से क्षीण होता है। संसार में समाया दिखाई देता हुआ, कर्म करता हुआ यही, वह सत्य है, जो असीम है, अपरिचित है, जो चिर सत्य ज्ञान, चिर शक्तिशाली और चिर गतिपूर्ण, अक्षय और अनंत बन कर सृष्टि में रहता है। सृष्टि के हर रूप, हर कण को समाप्त करता हुआ भी, सभी में शेष भी रहता है, - वही सत्य है। "
... क्रमशः : भगवान की वाणी : पृ. संख्या. १४८१ - १४८२
: प्रत्यक्ष लेखिका एवं संवाहिका - प. पू. देवी माँ ( श्रीमती कुसुम अस्थाना)
सिद्ध शक्ति पीठ
सत्य मंदिर, लखनऊ।
विशेष नोट:
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भगवान की वाणी में ब्रैकेट में दिये गए शब्द देवी मां के द्वारा भगवान से अनुमति प्राप्ति के पश्चात दिए गए हैं; शेष सभी शब्द और वाक्य भगवान का स्वयं अपना कहा हुआ है।
भगवान की वाणी, प. पू. श्री कृष्ण चेतनावतार देवी मां की भागवत शक्ति चालित लेखनी के माध्यम से लिपि रूप में अवतरित हुई। उपरोक्त ज्ञान भगवान ने देवी मां को संबोधित करते हम सबको दिया है। लिपि रूप में प्राप्त ज्ञान को ' भगवान की वाणी ' कहा गया। अपने ' लिपि रूप ' को भगवान ने साकार दर्शन और ' वाणी ' को अपना शक्ति रूप दर्शन बताया है।
भगवान ने ये भी कहा कि आज मैं उसी गीता के ज्ञान को जो मैने कृष्ण रूप में अर्जुन को दिया था, आज फिर से अपनी वाणी के रूप में और भी सरल से सरलतम भाषा में देता जा रहा हूं।
ॐ शिव: हरि:
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