@mohit_jain2052
@mohit_jain2052

Mr.~Mohit~Jain

Ⓜ✍Ⓜ ''अहम्'' एकोस्मि, द्वितीयो नास्ति न भूतो न भविष्यति...🕺🏻 Ⓜ👉 मोहित~जैन

#

👉 लोगों के लिए सीख👈

••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••• *RSS का FULL FORM क्या होता है ?* *RSS कैसे बना ? क्यों बना ? कब बना ?* *RSS के गठन का मुख़्य उद्देश्य क्या थी ?* *क्या यह हिन्दुओं का संगठन है या ब्राह्मणों का ?* *इस संगठन का मुखिया चित्तपावन ब्राह्मण ही क्यों होता है ?* """""""""""""""""""""""""""""""""""""""""""""''''''''''''""""""'''''''''''''""""""''''''' #Racial_Secret_Service( RSS ) प्रजातीय रहस्यमय क्रम-व्यवस्था 🐍 RSS का असली नाम रेसियल सीक्रेट सर्विस है | राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ नहीं | 🐍 RSS की स्थापना इजराइली यहुदी मूल के चितपावन ब्राह्मणों नी की है | 🐍 RSS में ज्यादातर सरसंघचालक चितपावन ब्राह्मण ही होते आए हैं | रिसर्च के अनुसार इन ब्राह्मणों का DNA 99.90% बेने इज़राइली यहूदियों से मिलता है | 🐍 RSS आज भी अमेरिका की आतंकवादी लीस्ट में शामिल है | 🐍 RSS ने अपने कार्यालय पर तिरंगा झंडा लहराना 52 वर्षो के बाद शुरु किया है, इसका असली नाम रेसियल सीक्रेट सर्विस था | 🐍 RSS का आज़ादी के आंदोलन से कोई सरोकार नहीं है । 🐍 RSS ने देश जब 15 अगस्त को आजाद हुआ तब इसने स्वाधीनता दिवस मनाने से इंकार किया था और 1947 से लेकर 2002 तक नागपुर मुख्यालय पर तिरंगा कभी नहीं फहराया। 🐍 RSS ने वर्ष 2002 के बाद बॉम्बे हाई कोर्ट के आदेश के बाद तिरंगा फहराया। 🐍 RSS पर सरदार पटेल ने प्रतिबन्ध (बैन) इसीलिए लगाया था, क्योंकि बैन हटाने के लिए उसने जो हलफनामा दिया था उसमे निम्नलिखित मुख्य बातें थी :-- 1) RSS भारत के संविधान को मानेगा, जिसको वो नहीं मानता था और आज भी नहीं मानता है | इसीलिए स्वयं सेवक गैर संवैधानिक बयान देते रहते हैं | 2) RSS संविधान में निहित राष्ट्रीय प्रतीकों का विरोध नहीं करेगा, जिसके वो हमेंशा खिलाफ रहा और आज भी है | 3) RSS कभी भी राजनीति में नहीं आएगा, परंतु आज वो सरकार में है । 🐍 RSS कुल मिलाकर देशद्रोही संस्था है जो तब भी थी और आज भी देश का सामाजिक ताना बाना बिखेरना चाहती है। 🐍 RSS वाला देशभक्ति की बात करे, तो उसे कहिए *"केस नंबर 176, नागपुर, 2001"* वह शर्म से सिर झुका लेगा | हां, यह तभी होगा अगर उनमें लाज बची हो | सुप्रीम कोर्ट के एडवोकेट और संविधान विशेषज्ञ नितिन मेश्राम की हजारों किताबों की शानदार लाइब्रेरी में इस केस का जजमेंट रखा है | 🐍 RSS के नागपुर हेडक्वार्टर में 26 जनवरी 2001 को तीन युवक पहुंचे, उनके पास भारत का राष्ट्रीय ध्वज था | वे उस बिल्डिंग पर पहली बार राष्ट्रीय ध्वज फहराना चाहते थे | वहां मौजूद RSS के बड़े नेताओं ने ऐसा नहीं करने दिया और पुलिस केस कर दिया | उनकी सरकार थी, पुलिस ने झंडा जब्त कर लिया | आखिरकार कोर्ट ने तीनों को बरी कर दिया | सबसे बड़ी बात.... आदेश में दर्ज है कि झंडे को पूरी मर्यादा के साथ हिफाजत में रखा जाए | 🐍 RSS इस घटना की शर्म की वजह से अब कहीं कहीं राष्ट्रीय झंडा फहराना शुरू कर दिया है। 🐍 RSS विश्व का सबसे बड़ा आतंकवादी संगठन है, यह हम OBC, SC, ST, MINORITY तथा अन्य गैर मनुवादी भारतीय भाई -बहनों को आर्थिक + सामाजिक +मानसिक और यहाँ तक की शारीरिक तौर से गुलाम बनाना चाहता है ! 🐍 RSS का मकसद भगवान बुद्ध, सम्राट अशोक, ज्योतिबा फूले, पेरियार ई. वी. रामासामी नायकर, ललई सिंह यादव, संत कबीरसाहेब, गुरुनानक, गुरुरविदास, छत्रपति शिवाजी, नारायण गुरु, सावित्री बाई फुले, शाहूजी महाराज, डॉ बाबा साहेब आंबेडकर तथा अन्य बहुजन महापुरुषों के संघर्षो को नेस्तनाबूत करना है । 🐍 RSS संगठन भारत के संविधान को बदल कर अपनी मनुस्मृति की विचारधारा हम भारतीयों पर लागू करके सिर्फ और सिर्फ अपना मनुवादी राज्य निर्मित करना चाहता है | 🐍 RSS हमेशा चुनावों के पहले हिंदु-मुसलमान, मंदीर-मस्जिद, गौमाता के नाम पर देश के एससी, एसटी, ओबीसी को हिन्दु बनाकर मुसलमानों के खिलाफ साम्प्रदायिक दंगा करवाता है। 🐍 9 अगस्त 2018 को RSS के लोगों ने ही भारत का संविधान को जलाया और बाबासाहेब आम्बेड़कर को अपमान किया। 🐍 भारत में जो भी बॉम्ब ब्लास्ट हुए सभी RSS के द्वारा किया गया। 🐍 RSS ऐसा संगठन है जो पुश्यमित्र शुंग की तरह भारत को अस्थिर व लोगों में भय पैदा करके अपना मनुव्यवस्था कायम करना चाहता है। 🐍 आज का बीजेपी सरकार RSS के एजेंडों "The bunch of thought" पर काम कर रही है। 🐍 एजेंड़ो के अनुसार- मोवलिंचीग, दलित उत्पीडन, मुस्लिम उत्पीडन, नारी अत्याचार, आदिवासी उत्पीडन, पिछड़ों का बजट शून्य, आरक्षण शून्य आदि उत्पन्न कर दी है। ••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••• Q. क्या RSS मूल भारतीयों (Sc/St/Obc/Dt.Nt/RMs) के लिए कभी अच्छा हो सकता है ? [8/2, 8:14 PM] +91 94154 34804: *भारत की 85% जनसंख्या एससी/एसटी /ओबीसी प्रत्येक को यह संदेश पढ़ना जरूरी है । सिर्फ एक बार जरूर पढ़ें संदेश जरूरत से ज्यादा बड़ा है इसलिए क्षमा करें।* ■■■■■■■■■■■ *जानिए संविधान लिखे जाने से पहले संविधान और संवैधानिक अधिकारों के लिए तत्कालीन राजनेताओं की जहरीली सोच....* *1. लोकमान्य तिलक* : "ये तेली, तंबोली, कुर्मी, कुम्हार, चमार संसद में जाकर क्या हल चलाएंगे।" *2.महात्मा गांधी* : "अगर अंग्रेज शूद्रों को भी आजादी देते हैं, तो मुझे ऐसी आजादी नहीं चाहिए, मैं शूद्रों को आजादी देने के पक्ष में नहीं हूँ।" *3. महात्मा गांधी* : "मैं शूद्रों को पृथक आरक्षण देने का विरोध करता हूँ।" *4. सरदार पटेल* : "डॉ अंबेडकर के लिए संविधान सभा के दरवाजें ही नहीं, खिड़कियाँ भी बंद कर दी है, देखता हूँ, डॉ अंबेडकर कैसे संविधान सभा में आता है।" *5. आरएसएस* : "डॉ अंबेडकर साहब के द्वारा भारत का संविधान लिखने के बाद संविधान को लागू नहीं करवाने के लिए डॉ अंबेडकर साहब के पूरे देश में पुतलें जलाये गये।" *इसीलिए संविधान की महत्ता और ज्यादा हो जाती है कि इतने दिग्गजों के विरोध के बावजूद बाबा साहब डॉ अंबेडकर साहब ने अपनी योग्यता और सूझभुज से देश का ऐसा संविधान लिखा जिसे मानना सबके लिए जरूरी हो गया...* *भारत का गणतंत्र- मतलब--जनता का, जनता के लिए और जनता के द्वारा शासन....* अर्थात गणतंत्र अर्थात प्रजातंत्र अर्थात लोकतंत्र अर्थात जनतंत्र में जहाँ देश की जनता ही सर्वोपरि है.... महत्व : *गणतंत्र के सम्पूर्ण संचालन में जनता की भागीदारी सुनिश्चित करना....* संविधान : *देश को संचालित करने का लिखित विधान जिसमें सब नागरिक बिना स्थान, जाति, धर्म, लिंग, भेद के समान भागीदार हों....* इसी क्रम में संविधान लागू करने और मानने की उपयोगिता देश और प्रत्येक नागरिक के लिए आवश्यक हो जाती है.... संविधान, संविधान-सभा की उप-समिति *प्रारूप समिति के अध्यक्ष भारतरत्न डॉ भीमराव अंबेडकर साहब की अध्यक्षता* में या कटु सच्चाई कहे तो एकमात्र बाबा साहब डॉ अंबेडकर साहब द्वारा 29 अगस्त, 1947 से 26 नवंबर, 1949 की अल्पकालीन समयावधि में लिपिबद्ध किया गया जिसे संविधान-सभा द्वारा 26 नवंबर, 1949 को अंगीकार करके 26 जनवरी, 1950 को समता, समानता, न्याय और बंधुता की अखंड भावना के अंतर्निहित देश में लागू किया गया जिसकी महान स्मृति में प्रत्येक वर्ष गणतंत्र दिवस देशभर में मनाया जाता है.... *संविधान को मानने के अनेकों-अनेकों कारण हैं जिनमें से कुछ पर संक्षिप्त में प्रकाश डाला जा रहा है :-* *1.* संविधान की दृष्टि में भारत का प्रत्येक नागरिक समान है । *2.* नागरिकों में संवैधानिक रूप से किसी प्रकार का स्थान, जाति, धर्म, लिंग के आधार पर विभेद नहीं किया गया है । *3.* संविधान के अंतर्गत राष्ट्र को सर्वोपरि माना गया है । *4.* सभी जाति-धर्म के लोगों की बिना भेदभाव के संपूर्ण विकास की परिकल्पना की गई है । *5.* राष्ट्र के विकास की मुख्यधारा में सभी नागरिकों की भूमिका निहित की गई है । *6.* सामाजिक आधार पर शोषित, वंचित, बहिष्कृत, पीड़ित वर्ग को भी राष्ट्र की विकास की मुख्यधारा में जोड़ने के लिए विशेषाधिकार प्रतिपादित किए गए हैं । *7.* महिलाओं को लिंगभेद और जातिभेद से मुक्ति दिलाकर उनके लिए राष्ट्र के विकास की मुख्यधारा में समानांतर भूमिका का प्रतिपादन किया गया है । *8.* महिलाओं को पिता और पति की सम्पत्ति का भागीदार बनाया गया है। *9.* महिलाओं के लिए मातृत्व अवकाश और विशेषाधिकारों की व्यवस्था की गई है । *10.* नागरिकों के लिए शिक्षा और सुविधा के साथ-साथ रोजगार देने की सुविधा भी प्रतिपादित की गई है । *11.* नागरिकों को अपनी पसंद का जनप्रतिनिधि चुनने का मताधिकार दिया गया है । *12.* बिना भेदभाव के योग्यता के आधार पर उच्चतम चयन की प्रक्रिया प्रतिपादित की गई है। *13.* बिना भेदभाव के उच्चतम पद तक चुनाव की प्रणाली प्रतिपादित की गई है । *14.* समतामूलक समाज की परिकल्पना को समाहित किया गया है। *15.* विधि के समक्ष सभी नागरिकों को समानांतर माना गया है। *16.* स्वतंत्र चुनाव आयोग की स्थापना की गई है। *17.* स्वतंत्र न्यायपालिका की स्थापना की गई है । *18.* भारतीय रिजर्व बैंक की स्थापना की गई है । *19.* देश की बाहरी और आंतरिक सुरक्षा की संरचना का निर्माण किया गया है । *20.* नागरिकों को मौलिक अधिकारों सहित नीति-निर्देशक नियम प्रदत्त किये गए हैं । *21.* धार्मिक उपाधियों का अंत करके धार्मिक गुलामी से आजादी दिलाई गई हैं । *22.* देश का मूल और ऐतिहासिक नाम *"भारत"* रखकर सभी जाति-धर्मों में देश के प्रति राष्ट्रीय भावना का संचार किया गया है । *23.* राष्ट्र के नाम के परिवर्तन का अधिकार संसद को भी नहीं दिया गया है ताकि कभी कोई साम्प्रदायिक सरकार भी देश के नाम को परिवर्तन नहीं कर सके । *24.* धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र की संकल्पना के तहत किसी भी धर्म को संविधान में दखल करने का अधिकार नहीं है । ये वो कुछ खूबियाँ संविधान की हैंं जिनको हमें जानना हैं.... *आजकल संविधान व जाति-धर्म के विरोध में राजनेताओं द्वारा बहुत कुछ कहा जा रहा है तो हमें यह भी जानना जरूरी है कि किसने क्या कहा....* *1.प्रधानमंत्री मोदी जी* : "दलित मंदबुद्धि होते हैं।" *2. संघप्रमुख मोहनभागवत* : आरक्षण जाति आधारित नहीं होना चाहिए, अतः आरक्षण की समीक्षा की जाएं। *3. केन्द्रीय मंत्री वीके सिंह* : "दलित कुत्ते होते हैं।" *4. भाजपा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी* : "हम यानि भाजपा आरक्षण को निर्रथक कर देंगे।" *5. केंद्रीय मंत्री अनंतकुमार हेगड़े* : "हम यानि भाजपा सत्ता में संविधान बदलने आये हैं।" *6. केन्द्रीय मंत्री अनंतकुमार हेगड़े* : "व्यक्ति की पहचान जाति से होनी चाहिए।" *7. धर्मगुरु स्वरूपानंद सरस्वती* : "हम संविधान को नहीं मानते हैं।" *यह क्यों कहा गया, यह जानना भी जरूरी है....* *1.* संविधान के पहले जो जातियां धार्मिक गुलाम थी, वे संवैधानिक अधिकारों को पाकर सक्षम होने लगी हैं जिनकी उन्नति और प्रगति धर्म के ठेकेदारों को हजम नहीं हो रही हैं। *2.* संवैधानिक अधिकारों की बदौलत अशिक्षित वर्ग शिक्षित होकर इनका प्रतिभागी बन गया है। *3.* संविधान प्रदत्त अधिकारों से बहिष्कृत वर्ग अपने अधिकारों को पाने के लिए संघर्ष करने लग गया है। *4.* संवैधानिक अधिकारों से जागरूक होकर गुलाम वर्ग शासक बनने की ओर अग्रसर हो रहा है । *5.* अधिकारसंपन्न होकर पिछड़ी जातियां शारीरिक आत्मरक्षा करने में सक्षम हो रही हैं । *6.* इन्हें कमजोर करने के षड़यंत्र और साजिश के तहत आजकल अनर्गल बयानबाजी करके भारत के बहुजन मूलनिवासियों के विरूद्ध साम्प्रदायिक और जातीय भेदभाव के माहौल का निर्माण किया जा रहा है। *"आपकी सावधानी और जागरूकता ही समाज को वापिस गुलाम होने से बचा सकती है :-"* *1.* मनुवादी ताकतों ने स्पष्ट इशारा कर दिया है कि वो वापस से भारत के मूलनिवासियों अर्थात SC-ST-OBC को गुलाम बनाने की तैयारी कर रहे हैं जिससे हमें सावधान रहना है। *2.* हमारे बच्चों को मनुवादी संगठनों से दूर करके हमारे महापुरुषों के इतिहास को उन्हें बताना चाहिए। *3.* बच्चों को संविधान की जानकारी देनी चाहिए। *4.* कम खा लेना, परंतु बच्चों को जरूर शिक्षित करना। *5.* संविधान और आरक्षण के विरोधियों को तुरंत जवाब देना होगा। *6.* मनुवादियों के किसी भी संगठन पर विश्वास मत करना क्योंकि मनुवादी धर्म के नाम आपको भ्रमित करके आपसे ही आपके संवैधानिक अधिकारों का विरोध करवाने की साजिश रच सकते हैं । *7.* कोई कितना भी समझाए, यह मान लेना कि हम बाबा साहब डॉ अंबेडकर साहब से ज्यादा बुद्धिमान नहीं हो सकते हैं । *8.* बाबा साहब डॉ अंबेडकर साहब ने जोकुछ किया है, वो बहुत सोच-समझकर किया है अर्थात बाबा साहब डॉ अंबेडकर साहब गलत नहीं हो सकते हैं। *9.* भले चाहे जितनी बड़ी कुर्बानी देनी पड़े, संविधान खत्म मत होने देना । *10.* संविधान बचा रहेगा तो SC-ST-OBC का अस्तित्व भी बचा रहेगा, अन्यथा जिस दिन संविधान खत्म होगा, आप उसी दिन से वापस गुलाम हो जाएंगे- आप ने इसे पढ़ने के लिए समय दिया उसका बहुत बहुत धन्यवाद । अब एक एहसान और करदो इस संदेश को अन्य 10-20 साथियों में और भेज दो। बस यही तरीका है अपने साथियों को जागरूक करने का । धन्यवाद । #👉 लोगों के लिए सीख👈
129 ने देखा
7 दिन पहले
#

👉 लोगों के लिए सीख👈

••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••• *RSS का FULL FORM क्या होता है ?* *RSS कैसे बना ? क्यों बना ? कब बना ?* *RSS के गठन का मुख़्य उद्देश्य क्या थी ?* *क्या यह हिन्दुओं का संगठन है या ब्राह्मणों का ?* *इस संगठन का मुखिया चित्तपावन ब्राह्मण ही क्यों होता है ?* """""""""""""""""""""""""""""""""""""""""""""''''''''''''""""""'''''''''''''""""""''''''' #Racial_Secret_Service( RSS ) प्रजातीय रहस्यमय क्रम-व्यवस्था 🐍 RSS का असली नाम रेसियल सीक्रेट सर्विस है | राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ नहीं | 🐍 RSS की स्थापना इजराइली यहुदी मूल के चितपावन ब्राह्मणों नी की है | 🐍 RSS में ज्यादातर सरसंघचालक चितपावन ब्राह्मण ही होते आए हैं | रिसर्च के अनुसार इन ब्राह्मणों का DNA 99.90% बेने इज़राइली यहूदियों से मिलता है | 🐍 RSS आज भी अमेरिका की आतंकवादी लीस्ट में शामिल है | 🐍 RSS ने अपने कार्यालय पर तिरंगा झंडा लहराना 52 वर्षो के बाद शुरु किया है, इसका असली नाम रेसियल सीक्रेट सर्विस था | 🐍 RSS का आज़ादी के आंदोलन से कोई सरोकार नहीं है । 🐍 RSS ने देश जब 15 अगस्त को आजाद हुआ तब इसने स्वाधीनता दिवस मनाने से इंकार किया था और 1947 से लेकर 2002 तक नागपुर मुख्यालय पर तिरंगा कभी नहीं फहराया। 🐍 RSS ने वर्ष 2002 के बाद बॉम्बे हाई कोर्ट के आदेश के बाद तिरंगा फहराया। 🐍 RSS पर सरदार पटेल ने प्रतिबन्ध (बैन) इसीलिए लगाया था, क्योंकि बैन हटाने के लिए उसने जो हलफनामा दिया था उसमे निम्नलिखित मुख्य बातें थी :-- 1) RSS भारत के संविधान को मानेगा, जिसको वो नहीं मानता था और आज भी नहीं मानता है | इसीलिए स्वयं सेवक गैर संवैधानिक बयान देते रहते हैं | 2) RSS संविधान में निहित राष्ट्रीय प्रतीकों का विरोध नहीं करेगा, जिसके वो हमेंशा खिलाफ रहा और आज भी है | 3) RSS कभी भी राजनीति में नहीं आएगा, परंतु आज वो सरकार में है । 🐍 RSS कुल मिलाकर देशद्रोही संस्था है जो तब भी थी और आज भी देश का सामाजिक ताना बाना बिखेरना चाहती है। 🐍 RSS वाला देशभक्ति की बात करे, तो उसे कहिए *"केस नंबर 176, नागपुर, 2001"* वह शर्म से सिर झुका लेगा | हां, यह तभी होगा अगर उनमें लाज बची हो | सुप्रीम कोर्ट के एडवोकेट और संविधान विशेषज्ञ नितिन मेश्राम की हजारों किताबों की शानदार लाइब्रेरी में इस केस का जजमेंट रखा है | 🐍 RSS के नागपुर हेडक्वार्टर में 26 जनवरी 2001 को तीन युवक पहुंचे, उनके पास भारत का राष्ट्रीय ध्वज था | वे उस बिल्डिंग पर पहली बार राष्ट्रीय ध्वज फहराना चाहते थे | वहां मौजूद RSS के बड़े नेताओं ने ऐसा नहीं करने दिया और पुलिस केस कर दिया | उनकी सरकार थी, पुलिस ने झंडा जब्त कर लिया | आखिरकार कोर्ट ने तीनों को बरी कर दिया | सबसे बड़ी बात.... आदेश में दर्ज है कि झंडे को पूरी मर्यादा के साथ हिफाजत में रखा जाए | 🐍 RSS इस घटना की शर्म की वजह से अब कहीं कहीं राष्ट्रीय झंडा फहराना शुरू कर दिया है। 🐍 RSS विश्व का सबसे बड़ा आतंकवादी संगठन है, यह हम OBC, SC, ST, MINORITY तथा अन्य गैर मनुवादी भारतीय भाई -बहनों को आर्थिक + सामाजिक +मानसिक और यहाँ तक की शारीरिक तौर से गुलाम बनाना चाहता है ! 🐍 RSS का मकसद भगवान बुद्ध, सम्राट अशोक, ज्योतिबा फूले, पेरियार ई. वी. रामासामी नायकर, ललई सिंह यादव, संत कबीरसाहेब, गुरुनानक, गुरुरविदास, छत्रपति शिवाजी, नारायण गुरु, सावित्री बाई फुले, शाहूजी महाराज, डॉ बाबा साहेब आंबेडकर तथा अन्य बहुजन महापुरुषों के संघर्षो को नेस्तनाबूत करना है । 🐍 RSS संगठन भारत के संविधान को बदल कर अपनी मनुस्मृति की विचारधारा हम भारतीयों पर लागू करके सिर्फ और सिर्फ अपना मनुवादी राज्य निर्मित करना चाहता है | 🐍 RSS हमेशा चुनावों के पहले हिंदु-मुसलमान, मंदीर-मस्जिद, गौमाता के नाम पर देश के एससी, एसटी, ओबीसी को हिन्दु बनाकर मुसलमानों के खिलाफ साम्प्रदायिक दंगा करवाता है। 🐍 9 अगस्त 2018 को RSS के लोगों ने ही भारत का संविधान को जलाया और बाबासाहेब आम्बेड़कर को अपमान किया। 🐍 भारत में जो भी बॉम्ब ब्लास्ट हुए सभी RSS के द्वारा किया गया। 🐍 RSS ऐसा संगठन है जो पुश्यमित्र शुंग की तरह भारत को अस्थिर व लोगों में भय पैदा करके अपना मनुव्यवस्था कायम करना चाहता है। 🐍 आज का बीजेपी सरकार RSS के एजेंडों "The bunch of thought" पर काम कर रही है। 🐍 एजेंड़ो के अनुसार- मोवलिंचीग, दलित उत्पीडन, मुस्लिम उत्पीडन, नारी अत्याचार, आदिवासी उत्पीडन, पिछड़ों का बजट शून्य, आरक्षण शून्य आदि उत्पन्न कर दी है। ••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••• Q. क्या RSS मूल भारतीयों (Sc/St/Obc/Dt.Nt/RMs) के लिए कभी अच्छा हो सकता है ? [8/2, 8:14 PM] +91 94154 34804: *भारत की 85% जनसंख्या एससी/एसटी /ओबीसी प्रत्येक को यह संदेश पढ़ना जरूरी है । सिर्फ एक बार जरूर पढ़ें संदेश जरूरत से ज्यादा बड़ा है इसलिए क्षमा करें।* ■■■■■■■■■■■ *जानिए संविधान लिखे जाने से पहले संविधान और संवैधानिक अधिकारों के लिए तत्कालीन राजनेताओं की जहरीली सोच....* *1. लोकमान्य तिलक* : "ये तेली, तंबोली, कुर्मी, कुम्हार, चमार संसद में जाकर क्या हल चलाएंगे।" *2.महात्मा गांधी* : "अगर अंग्रेज शूद्रों को भी आजादी देते हैं, तो मुझे ऐसी आजादी नहीं चाहिए, मैं शूद्रों को आजादी देने के पक्ष में नहीं हूँ।" *3. महात्मा गांधी* : "मैं शूद्रों को पृथक आरक्षण देने का विरोध करता हूँ।" *4. सरदार पटेल* : "डॉ अंबेडकर के लिए संविधान सभा के दरवाजें ही नहीं, खिड़कियाँ भी बंद कर दी है, देखता हूँ, डॉ अंबेडकर कैसे संविधान सभा में आता है।" *5. आरएसएस* : "डॉ अंबेडकर साहब के द्वारा भारत का संविधान लिखने के बाद संविधान को लागू नहीं करवाने के लिए डॉ अंबेडकर साहब के पूरे देश में पुतलें जलाये गये।" *इसीलिए संविधान की महत्ता और ज्यादा हो जाती है कि इतने दिग्गजों के विरोध के बावजूद बाबा साहब डॉ अंबेडकर साहब ने अपनी योग्यता और सूझभुज से देश का ऐसा संविधान लिखा जिसे मानना सबके लिए जरूरी हो गया...* *भारत का गणतंत्र- मतलब--जनता का, जनता के लिए और जनता के द्वारा शासन....* अर्थात गणतंत्र अर्थात प्रजातंत्र अर्थात लोकतंत्र अर्थात जनतंत्र में जहाँ देश की जनता ही सर्वोपरि है.... महत्व : *गणतंत्र के सम्पूर्ण संचालन में जनता की भागीदारी सुनिश्चित करना....* संविधान : *देश को संचालित करने का लिखित विधान जिसमें सब नागरिक बिना स्थान, जाति, धर्म, लिंग, भेद के समान भागीदार हों....* इसी क्रम में संविधान लागू करने और मानने की उपयोगिता देश और प्रत्येक नागरिक के लिए आवश्यक हो जाती है.... संविधान, संविधान-सभा की उप-समिति *प्रारूप समिति के अध्यक्ष भारतरत्न डॉ भीमराव अंबेडकर साहब की अध्यक्षता* में या कटु सच्चाई कहे तो एकमात्र बाबा साहब डॉ अंबेडकर साहब द्वारा 29 अगस्त, 1947 से 26 नवंबर, 1949 की अल्पकालीन समयावधि में लिपिबद्ध किया गया जिसे संविधान-सभा द्वारा 26 नवंबर, 1949 को अंगीकार करके 26 जनवरी, 1950 को समता, समानता, न्याय और बंधुता की अखंड भावना के अंतर्निहित देश में लागू किया गया जिसकी महान स्मृति में प्रत्येक वर्ष गणतंत्र दिवस देशभर में मनाया जाता है.... *संविधान को मानने के अनेकों-अनेकों कारण हैं जिनमें से कुछ पर संक्षिप्त में प्रकाश डाला जा रहा है :-* *1.* संविधान की दृष्टि में भारत का प्रत्येक नागरिक समान है । *2.* नागरिकों में संवैधानिक रूप से किसी प्रकार का स्थान, जाति, धर्म, लिंग के आधार पर विभेद नहीं किया गया है । *3.* संविधान के अंतर्गत राष्ट्र को सर्वोपरि माना गया है । *4.* सभी जाति-धर्म के लोगों की बिना भेदभाव के संपूर्ण विकास की परिकल्पना की गई है । *5.* राष्ट्र के विकास की मुख्यधारा में सभी नागरिकों की भूमिका निहित की गई है । *6.* सामाजिक आधार पर शोषित, वंचित, बहिष्कृत, पीड़ित वर्ग को भी राष्ट्र की विकास की मुख्यधारा में जोड़ने के लिए विशेषाधिकार प्रतिपादित किए गए हैं । *7.* महिलाओं को लिंगभेद और जातिभेद से मुक्ति दिलाकर उनके लिए राष्ट्र के विकास की मुख्यधारा में समानांतर भूमिका का प्रतिपादन किया गया है । *8.* महिलाओं को पिता और पति की सम्पत्ति का भागीदार बनाया गया है। *9.* महिलाओं के लिए मातृत्व अवकाश और विशेषाधिकारों की व्यवस्था की गई है । *10.* नागरिकों के लिए शिक्षा और सुविधा के साथ-साथ रोजगार देने की सुविधा भी प्रतिपादित की गई है । *11.* नागरिकों को अपनी पसंद का जनप्रतिनिधि चुनने का मताधिकार दिया गया है । *12.* बिना भेदभाव के योग्यता के आधार पर उच्चतम चयन की प्रक्रिया प्रतिपादित की गई है। *13.* बिना भेदभाव के उच्चतम पद तक चुनाव की प्रणाली प्रतिपादित की गई है । *14.* समतामूलक समाज की परिकल्पना को समाहित किया गया है। *15.* विधि के समक्ष सभी नागरिकों को समानांतर माना गया है। *16.* स्वतंत्र चुनाव आयोग की स्थापना की गई है। *17.* स्वतंत्र न्यायपालिका की स्थापना की गई है । *18.* भारतीय रिजर्व बैंक की स्थापना की गई है । *19.* देश की बाहरी और आंतरिक सुरक्षा की संरचना का निर्माण किया गया है । *20.* नागरिकों को मौलिक अधिकारों सहित नीति-निर्देशक नियम प्रदत्त किये गए हैं । *21.* धार्मिक उपाधियों का अंत करके धार्मिक गुलामी से आजादी दिलाई गई हैं । *22.* देश का मूल और ऐतिहासिक नाम *"भारत"* रखकर सभी जाति-धर्मों में देश के प्रति राष्ट्रीय भावना का संचार किया गया है । *23.* राष्ट्र के नाम के परिवर्तन का अधिकार संसद को भी नहीं दिया गया है ताकि कभी कोई साम्प्रदायिक सरकार भी देश के नाम को परिवर्तन नहीं कर सके । *24.* धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र की संकल्पना के तहत किसी भी धर्म को संविधान में दखल करने का अधिकार नहीं है । ये वो कुछ खूबियाँ संविधान की हैंं जिनको हमें जानना हैं.... *आजकल संविधान व जाति-धर्म के विरोध में राजनेताओं द्वारा बहुत कुछ कहा जा रहा है तो हमें यह भी जानना जरूरी है कि किसने क्या कहा....* *1.प्रधानमंत्री मोदी जी* : "दलित मंदबुद्धि होते हैं।" *2. संघप्रमुख मोहनभागवत* : आरक्षण जाति आधारित नहीं होना चाहिए, अतः आरक्षण की समीक्षा की जाएं। *3. केन्द्रीय मंत्री वीके सिंह* : "दलित कुत्ते होते हैं।" *4. भाजपा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी* : "हम यानि भाजपा आरक्षण को निर्रथक कर देंगे।" *5. केंद्रीय मंत्री अनंतकुमार हेगड़े* : "हम यानि भाजपा सत्ता में संविधान बदलने आये हैं।" *6. केन्द्रीय मंत्री अनंतकुमार हेगड़े* : "व्यक्ति की पहचान जाति से होनी चाहिए।" *7. धर्मगुरु स्वरूपानंद सरस्वती* : "हम संविधान को नहीं मानते हैं।" *यह क्यों कहा गया, यह जानना भी जरूरी है....* *1.* संविधान के पहले जो जातियां धार्मिक गुलाम थी, वे संवैधानिक अधिकारों को पाकर सक्षम होने लगी हैं जिनकी उन्नति और प्रगति धर्म के ठेकेदारों को हजम नहीं हो रही हैं। *2.* संवैधानिक अधिकारों की बदौलत अशिक्षित वर्ग शिक्षित होकर इनका प्रतिभागी बन गया है। *3.* संविधान प्रदत्त अधिकारों से बहिष्कृत वर्ग अपने अधिकारों को पाने के लिए संघर्ष करने लग गया है। *4.* संवैधानिक अधिकारों से जागरूक होकर गुलाम वर्ग शासक बनने की ओर अग्रसर हो रहा है । *5.* अधिकारसंपन्न होकर पिछड़ी जातियां शारीरिक आत्मरक्षा करने में सक्षम हो रही हैं । *6.* इन्हें कमजोर करने के षड़यंत्र और साजिश के तहत आजकल अनर्गल बयानबाजी करके भारत के बहुजन मूलनिवासियों के विरूद्ध साम्प्रदायिक और जातीय भेदभाव के माहौल का निर्माण किया जा रहा है। *"आपकी सावधानी और जागरूकता ही समाज को वापिस गुलाम होने से बचा सकती है :-"* *1.* मनुवादी ताकतों ने स्पष्ट इशारा कर दिया है कि वो वापस से भारत के मूलनिवासियों अर्थात SC-ST-OBC को गुलाम बनाने की तैयारी कर रहे हैं जिससे हमें सावधान रहना है। *2.* हमारे बच्चों को मनुवादी संगठनों से दूर करके हमारे महापुरुषों के इतिहास को उन्हें बताना चाहिए। *3.* बच्चों को संविधान की जानकारी देनी चाहिए। *4.* कम खा लेना, परंतु बच्चों को जरूर शिक्षित करना। *5.* संविधान और आरक्षण के विरोधियों को तुरंत जवाब देना होगा। *6.* मनुवादियों के किसी भी संगठन पर विश्वास मत करना क्योंकि मनुवादी धर्म के नाम आपको भ्रमित करके आपसे ही आपके संवैधानिक अधिकारों का विरोध करवाने की साजिश रच सकते हैं । *7.* कोई कितना भी समझाए, यह मान लेना कि हम बाबा साहब डॉ अंबेडकर साहब से ज्यादा बुद्धिमान नहीं हो सकते हैं । *8.* बाबा साहब डॉ अंबेडकर साहब ने जोकुछ किया है, वो बहुत सोच-समझकर किया है अर्थात बाबा साहब डॉ अंबेडकर साहब गलत नहीं हो सकते हैं। *9.* भले चाहे जितनी बड़ी कुर्बानी देनी पड़े, संविधान खत्म मत होने देना । *10.* संविधान बचा रहेगा तो SC-ST-OBC का अस्तित्व भी बचा रहेगा, अन्यथा जिस दिन संविधान खत्म होगा, आप उसी दिन से वापस गुलाम हो जाएंगे- आप ने इसे पढ़ने के लिए समय दिया उसका बहुत बहुत धन्यवाद । अब एक एहसान और करदो इस संदेश को अन्य 10-20 साथियों में और भेज दो। बस यही तरीका है अपने साथियों को जागरूक करने का । धन्यवाद । #👉 लोगों के लिए सीख👈
224 ने देखा
7 दिन पहले
Ⓜ✍~ #शरद_पूर्णिमा_महामहोत्सव..🙏🙏 #शरद_पूर्णिमा का शशि भी जब मिथ्यातम न हटा पाया.! तब धरती पर पुण्य योग से आप सरीखा शशि आया.!! #विद्याधर" सा बेटा पाकर मलप्पा कृत्कृत्य हुए.! धन्य हुई श्रीमति जनित्री प्रातः उत्सव नृत्य हुए.!! ~गुरुभक्त~"मोहित~जैन" Ⓜ✍~पूज्य गुरुदेव आचार्य श्री विद्यासागर जी के चरणों में कोटिशः नमोस्तु..🙏🙏🙏 #शरद_पूर्णिमा_महामहोत्सव_की_हार्दिक_शुभकामनायें.🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹 ~Ⓜ✍Ⓜ #Mohit_Jain 🔰🔰🔰🔰🔰🔰🔰🔰🔰🔰🔰🔰🔰🔰🔰 *शरद पूर्णिमा 13अक्टूबर 2019 पर विशेष* *आचार्य श्री विद्यासागर जी* *तपस्या में सर्वश्रेष्ठ है*🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻 *भारत भूमि के प्रखर तपस्वी, चिंतक, कठोर साधक, गौरक्षक, लेखक, महाकवि, राष्ट्रहित चिंतक आचार्यश्री विद्यासागरजी महाराज का अवतरण दिवस है आपका जन्म कर्नाटक के बेलगाँम (सदलगा) जिले के ग्राम चिक्कोड़ी में आश्विन शुक्ल पूर्णिमा (शरद पूर्णिमा), दिनाँक 10 अक्टूबर 1946, विक्रम संवत्‌ २००३ को हुआ था। आपका पूर्व का नाम विद्याधर था। आपको आचार्य श्रेष्ठ महाकवि ज्ञानसागरजी महाराज का शिष्यत्व पाने का सौभाग्य प्राप्त हुआ था*। विद्यासागरजी में अपने शिष्यों का संवर्धन करने का अभूतपूर्व सामर्थ्य है। उनका बाह्य व्यक्तित्व सरल* *सहज, मनोरम है किंतु अंतरंग तपस्या में वे वज्र से कठोर साधक हैं*। रात्रि में लकड़ी के पाटे पर विश्राम करते है और ठंड में भी रात्रि में कुछ भी नही ओढ़ते है। कन्नड़ भाषी होते हुए भी विद्यासागरजी ने हिन्दी, संस्कृत, कन्नड़, प्राकृत, बंगला और अँग्रेजी में लेखन किया है। आपने अनेक ग्रंथो का स्वयं ही पद्यानुवाद किया है। आपके द्वारा रचित संसार में सर्वाधिक चर्चित, काव्य प्रतिभा की चरम प्रस्तुति है- ‘मूकमाटी’ महाकाव्य जिसके ऊपर मूकमाटी मीमांसा (भाग 1 2 3) लगभग 283 हिंदी विद्वानों ने समीक्षाएं लिखी है जो भारतीय ज्ञान पीठ से प्रकाशित हो चुकी है इस पर 4 डी. लिट्. 50 पी. एच्. डी. 8एम . फिल. 2 एम. एड. तथा 6 एम. ए. आदि हो चुके है मूक माटी का मराठी, अंग्रेजी, बंगला, कन्नड़, गुजराती, उर्दू , संस्कृत ब्राम्ही लिपि आदि में अनुवाद हुए हैं और हो रहे हैं। राष्ट्रपति श्री रामनाथ कोविंद जी के द्वारा रामटेक में 22 सितंबर 2017 को मूक माटी के उर्दू अनुवाद का विमोचन हुआ था पूर्व राष्ट्रपति श्रीमती प्रतिभा पाटिल जी के द्वारा 14 जून 2012 को राष्ट्रपति भवन में 'द साइलेंट अर्थ' मूक माटी के अंग्रेजी अनुवाद का विमोचन हुआ था। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के द्वारा भोपाल में मूक माटी के 14 अक्टूबर 2016 को भोपाल में गुजराती अनुवाद का विमोचन हुआ था। आचार्य श्री का साहित्य अनेक विश्वविद्यालयों महाविद्यालयों के पाठ्यक्रम में शामिल हो चुका है कई जगह प्रक्रिया चल रही है जबलपुर अजमेर ट्रेन का नाम *दयोदय एक्सप्रेस* आपके गुरु की रचित कृति के नाम पर हुआ था। *भाग्योदय तीर्थ सागर* में मानव सेवा एवं शिक्षा फार्मेसी कॉलेज नर्सिंग कॉलेज चल रहे है। बीना बारह, मंडला, भोपाल , कुंडलपुर, खजुराहो, मुम्बई, अशोकनगर, जगदलपुर, डिंडोरी में *हथकरघा* चल रहे है। जिसमें अहिंसक पद्धति से वस्त्र बनाए जा रहे हैं और युवाओं को रोजगार दिया जा रहा है और शांति धारा दुग्ध योजना चल रही है जिसमें 500 से अधिक गायों का पालन करके दूध घी आदि शुद्ध वस्तुओं का उत्पादन हो रहा है जैविक पद्धति से सभी वस्तुओं का उत्पादन होता है आचार्य श्री विद्यासागर शोध संस्थान भोपाल में विभिन्न पदों के लिए कोचिंग मिलती है भारतवर्षीय प्रशासकीय प्रशिक्षण संस्थान जबलपुर में स्थित है जिसमे हजारो युवाओ ने शिक्षण करके प्रसाशन के उच्च पदों को प्राप्त किया है । सुप्रीम कोर्ट से 7 जजों की बेंच से ऐतिहासिक गौ वध पर प्रतिबंध का फैसला हुआ था बैलों की रक्षा एवं रोजगार हेतु दयोदय जहाज का गंज बासौदा विदिशा में वितरण किया गया था मध्य प्रदेश में सरकार द्वारा *आचार्य विद्यासागर जी गौ संवर्धन योजना* भी चल रही है पूरे देश में लगभग 135 गौशालाओ में लाखों पशुओं का संरक्षण हो रहा है आपके दर्शन से पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय श्री अटल बिहारी बाजपेई वर्तमान राष्ट्रपति श्री रामनाथ कोविंद जी प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी और अनेक मुख्यमंत्री और अनेकों राज्यपाल सुप्रीम कोर्ट के जज, हाई कोर्ट के जज, आयोग अध्यक्ष एवं विशिष्ट पदों वाले व्यक्तियों से चर्चा के दौरान अनेक अच्छे कार्य हुए हैं आपके दर्शनार्थ हेतु आये राजनैतिक, चिंतक, विचारक, साहित्यकार, शिक्षाविद, न्यायधीश, धर्माचार्य, डॉक्टर, संपादक, समाज सेवी, उद्योगपति, अधिवक्ता, जिलाधीश, पुलिस अधीक्षक, कुलपति आदि ने मार्गदर्शन प्राप्त किया है। आपने मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान, गुजरात, छत्तीसगढ़, झारखंड आदि में बिहार किया है आपने नमक मीठा का सन 1969 से त्याग किया है। चिटाई का त्याग सन 1985 से किया है। वनस्पति फल सब्जी का त्याग 1994 से किया है। 9 निर्जल उपवास लगातार आपने किए थे। आपके द्वारा रूपक कथा काव्य, अध्यात्म, दर्शन व युग चेतना का संगम है। संस्कृति, जन और भूमि की महत्ता को स्थापित करते हुए आचार्यश्री ने इस महाकाव्य के माध्यम से राष्ट्रीय अस्मिता को पुनर्जीवित किया है। उनकी रचनाएँ मात्र कृतियाँ ही नहीं हैं, वे तो अकृत्रिम चैत्यालय हैं। उनके उपदेश, प्रवचन, प्रेरणा और आशीर्वाद से अनेको तीर्थ, मंदिर का निर्माण औषधालय भाग्योदय तीर्थ, अनेको अस्पताल, प्रतिभास्थली, हथकरघा, त्रिकाल चौबीसी आदि की स्थापना कई स्थानों पर हुई है और अनेक जगहों पर निर्माण जारी है। कितने ही विकलांग शिविरों में कृत्रिम अंग, श्रवण यंत्र, बैसाखियाँ, तीन पहिए की साइकलें वितरित की गई हैं। शिविरों के माध्यम से आँख के ऑपरेशन, दवाइयों, चश्मों का निःशुल्क वितरण हुआ है। ‘सर्वोदय तीर्थ’ अमरकंटक में विकलांग निःशुल्क सहायता केंद्र चल रहा है। जीव व पशु दया की भावना से देश के विभिन्न राज्यों में दयोदय गौशालाएँ स्थापित हुई हैं, जहाँ कत्लखाने जा रहे हजारों पशुओं को लाकर संरक्षण दिया जा रहा है। आचार्यजी की भावना है कि पशु मांस निर्यात निरोध का जनजागरण अभियान किसी दल, मजहब या समाज तक सीमित न रहे अपितु इसमें सभी राजनीतिक दल, समाज, धर्माचार्य और व्यक्तियों की सामूहिक भागीदारी रहे। ‘जिन’ उपासना की ओर उन्मुख विद्यासागरजी महाराज तो सांसारिक आडंबरों से विरक्त हैं। जहाँ वे विराजते हैं, वहाँ तथा जहाँ उनके शिष्य होते हैं, वहाँ भी उनका जन्म दिवस उनके समर्थन से नहीं मनाया जाता। तपस्या उनकी जीवन पद्धति, अध्यात्म उनका साध्य, विश्व मंगल उनकी पुनीत कामना तथा सम्यक दृष्टि एवं संयम उनका संदेश है। अपनेंवचनामृतों से जनकल्याण में निरत रहते हुए व साधना की उच्चतर सीढ़ियों पर आरोहण करते हुए *आचार्यश्री विद्यासागरजी महाराज समग्र देश में पद-विहार करते हैं। भारत-भूमि का कण-कण तपस्वियों की पदरज से पुनीत हो चुका है। इस युग के तपस्वियों की परंपरा में *आचार्यश्री विद्यासागरजी अग्रगण्य हैं। वीतराग परमात्मा बनने के मार्ग पर चलने वाले इस पथिक का प्रत्येक क्षण जागरूक व आध्यात्मिक आनंद से भरपूर होता है। उनका जीवन विविध आयामी है। उनके विशाल व विराट व्यक्तित्व के अनेक पक्ष हैं तथा सम्पूर्ण भारतवर्ष उनकी कर्मस्थली है*। पदयात्राएँ करते हुए उन्होंने अनेक मांगलिक संस्थाओं, विद्या केन्द्रों के लिए प्रेरणा व प्रोत्साहन का संचार किया है। उनके आगमन से त्याग, तपस्या व धर्म का सुगंधित समीर प्रवाहित होने लगता है। लोगों में नई प्रेरणा व नए उल्लास का संचरण हो जाता है। असाधारण व्यक्तित्व, कोमल, मधुर और ओजस्वी वाणी व प्रबल आध्यात्मिक शक्ति के कारण सभी वर्ग के लोग आपकी ओर आकर्षित हो जाते हैं। कठोर तपस्वी, दिगम्बर मुद्रा, अनन्त करुणामय हृदय, निर्मल अनाग्रही दृष्टि, तीक्ष्ण मेधा व स्पष्ट वक्ता के रूप में उनके अनुपम व्यक्तित्व के समक्ष व्यक्ति स्वयं नतशिर हो जाते हैं। अल्पवय में ही इनकी आध्यात्मिक अभिरुचि परिलक्षित होने लगी थी। खेलने की उम्र में भी वीतरागी साधुओं की संगति इन्हें प्रिय थी। मानो मुनि दीक्षा के लिए मनोभूमि तैयार हो रही थी। ज्ञानावरणीय कर्म का प्रबल क्षयोपशम था, संयम के प्रति अंत:प्रेरणा तीव्र थी। *आचार्यश्री की प्रेरणा से उनके परिवार के छः सदस्यों ने भी जैन साधु के योग्य संन्यास ग्रहण किया। उनके माता-पिता के अतिरिक्त दो छोटी बहनों व दो छोटे भाइयों ने भी आर्यिका एवं मुनिदीक्षा धारण की..।। आचार्य श्री विद्यासागरजी का बाह्य व्यक्तित्व भी उतना ही मनोरम है, जितना अंतरंग, तपस्या में वे वज्र से कठोर हैं, पर उनके मुक्त हास्य और सौम्य मुखमुद्रा से कुसुम की कोमलता झलकती है। वे आचार्य कुन्दकुन्द और समन्तभद्र की परम्परा को आगे ले जाने वाले आचार्य हैं तथा यशोलिप्सा से अलिप्त व शोर-शराबे से कोसों दूर रहते हैं। शहरों से दूर तीर्थों में एकान्त स्थलों पर चातुर्मास करते हैं। खजुराहो में लगभग 2000 विदेशियो ने मांसाहार, शराब आदि का त्याग किया । *आयोजन व आडम्बर से दूर रहने के कारण प्रस्थान की दिशा व समय की घोषणा भी नहीं करते हैं। वे अपने दीक्षार्थी शिष्यों को भी पूर्व घोषणा के बिना ही दीक्षा हेतु तैयार करते हैं। हाथी, घोड़े, पालकी व बैण्ड-बाजों की चकाचौंध से अलग सादे समारोह में दीक्षा का आयोजन करते हैं*। *इस युग में ऐसे संतों के दर्शन अलभ्य-लाभ है। आचार्यश्री जैसे तपोनिष्ठ व दृढ़संयमी हैं, वैसी ही उनकी शिष्यमण्डली भी है। धर्म के पथ पर उग आई दूब को उखाड़ फेंकने में यह शिष्य-मंडली अवश्य समर्थ होगी। केवल कथनी में धर्मामृत की वर्षा करने वालों की भीड़ के कारण धर्म के क्षेत्र में दुःस्थिति बनी हुई है। *आचार्यश्री विद्यासागरजी जैसे संत इस दुःस्थिति में आशा की किरण जगाते हैं। वह अपने बाल भी प्रत्येक 2 माह में अपने हाथों से निकालते है एवं 24 घंटे में एक बार भोजन एवं जल ग्रहण करते है*।🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻 *योगी, साधक, चिन्तक, आचार्य, दार्शनिक आदि विविध रूपों में उनका एक रूप कवि भी है*। उनकी जन्मजात काव्य प्रतिभा में निखार संभवतः उनके गुरुवर ज्ञानसागरजी की प्रेरणा से आया है। आपका संस्कृत पर वर्चस्व है ही, शिक्षा कन्नड़ भाषा में होते हुए भी आपका हिन्दी पर असाधारण अधिकार है। आपने हिंदी भाषा अभियान के लिए अपना समर्थन दिया है हिंदी भाषा , मातृभाषा को हम भूले नही और इंडिया नही भारत बोले इसके लिए भी आपने मार्गदर्शन प्रेरणा दी है। आपके सारे महाकाव्यों में अनेक सूक्तियाँ भरी पड़ी हैं, जिनमें आधुनिक समस्याओं की व्याख्या तथा समाधान भी है, जीवन के सन्दर्भों में मर्मस्पर्शी वक्तव्य भी है। सामाजिक, राजनीतिक व धार्मिक क्षेत्रों में व्याप्त कुरीतियों का निदर्शन भी है। *आचार्यश्री विद्यासागरजी महाराज वीतराग, निस्पृह, करुणापूरित, परीषहजयी समदृष्टि-साधु के आदर्श मार्ग के लिए परम-आदर्श हैं। आपकी भावना जन जन के कल्याण की रहती है। ऐसे दुर्लभ संत का समागम सभी प्राप्त हो उनके द्वारा दीक्षित शिष्य भी दर्शन के लिए लालायित रहते है..!!! ~मोहित #🙏जैन धर्म शास्त्री... 🔰🔰🔰🔰🔰🔰🔰🔰🔰🔰🔰
#

🙏जैन धर्म

🙏जैन धर्म - ® ~ शरद पूर्णिमा ~ महामहोत्सव ®2 ~ शरद पूर्णिमा का शशि भी जब मिथ्यातम न हटा पाया . ! तब धरती पर पुण्य योग से आप सरीखा शशि आया . ! ! विद्याधर सा बेटा पाकर मलप्पा कृत्कृत्य हुए . ! धन्य हुई श्रीमति जनित्री प्रातः उत्सव नृत्य हुए . ! ! ~ गुरुभक्त मोहित ~ जैन ® . पूज्य गुरुदेव आचार्य श्री विद्यासागर जी के चरणों में कोटिशः नमोस्तु . . . . . ~ शरद पूर्णिमा ~ महामहोत्सव की हार्दिक शुभकामनायें . . . - Me . Mohit - Jain _ _ _ YourQuote . in - ShareChat
301 ने देखा
1 महीने पहले
#

📓 हिंदी साहित्य

*यह जानकारी आपको कहीं नहीं मिलेगी और न कोई बताएगा:-* 👇🏻 *xxxxxxxxxx 01 xxxxxxxxxx* *दो लिंग 😗 नर और नारी । *दो पक्ष 😗 शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष। *दो पूजा 😗 वैदिकी और तांत्रिकी (पुराणोक्त)। *दो अयन 😗 उत्तरायन और दक्षिणायन। *xxxxxxxxxx 02 xxxxxxxxxx* *तीन देव 😗 ब्रह्मा, विष्णु, शंकर। *तीन देवियाँ 😗 महा सरस्वती, महा लक्ष्मी, महा गौरी। *तीन लोक 😗 पृथ्वी, आकाश, पाताल। *तीन गुण 😗 सत्वगुण, रजोगुण, तमोगुण। *तीन स्थिति 😗 ठोस, द्रव, गेस। *तीन स्तर 😗 प्रारंभ, मध्य, अंत। *तीन पड़ाव 😗 बचपन, जवानी, बुढ़ापा। *तीन रचनाएँ 😗 देव, दानव, मानव। *तीन अवस्था 😗 जागृत, मृत, बेहोशी। *तीन काल 😗 भूत, भविष्य, वर्तमान। *तीन नाड़ी 😗 इडा, पिंगला, सुषुम्ना। *तीन संध्या 😗 प्रात:, मध्याह्न, सायं। *तीन शक्ति 😗 इच्छाशक्ति, ज्ञानशक्ति, क्रियाशक्ति। *xxxxxxxxxx 03 xxxxxxxxxx* *चार धाम 😗 बद्रीनाथ, जगन्नाथ पुरी, रामेश्वरम्, द्वारका। *चार मुनि 😗 सनत, सनातन, सनंद, सनत कुमार। *चार वर्ण 😗 ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य, शूद्र। *चार निति 😗 साम, दाम, दंड, भेद। *चार वेद 😗 सामवेद, ॠग्वेद, यजुर्वेद, अथर्ववेद। *चार स्त्री 😗 माता, पत्नी, बहन, पुत्री। *चार युग 😗 सतयुग, त्रेतायुग, द्वापर युग, कलयुग। *चार समय 😗 सुबह,दोपहर, शाम, रात। *चार अप्सरा 😗 उर्वशी, रंभा, मेनका, तिलोत्तमा। *चार गुरु 😗 माता, पिता, शिक्षक, आध्यात्मिक गुरु। *चार प्राणी 😗 जलचर, थलचर, नभचर, उभयचर। *चार जीव 😗 अण्डज, पिंडज, स्वेदज, उद्भिज। *चार वाणी 😗 ओम्कार्, अकार्, उकार, मकार्। *चार आश्रम 😗 ब्रह्मचर्य, ग्रहस्थ, वानप्रस्थ, सन्यास। *चार भोज्य 😗 खाद्य, पेय, लेह्य, चोष्य। *चार पुरुषार्थ 😗 धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष। *चार वाद्य 😗 तत्, सुषिर, अवनद्व, घन। *xxxxxxxxxx 04 xxxxxxxxxx* *पाँच तत्व 😗 पृथ्वी, आकाश, अग्नि, जल, वायु। *पाँच देवता 😗 गणेश, दुर्गा, विष्णु, शंकर, सुर्य। *पाँच ज्ञानेन्द्रियाँ 😗 आँख, नाक, कान, जीभ, त्वचा। *पाँच कर्म 😗 रस, रुप, गंध, स्पर्श, ध्वनि। *पाँच उंगलियां 😗 अँगूठा, तर्जनी, मध्यमा, अनामिका, कनिष्ठा। *पाँच पूजा उपचार 😗 गंध, पुष्प, धूप, दीप, नैवेद्य। *पाँच अमृत 😗 दूध, दही, घी, शहद, शक्कर। *पाँच प्रेत 😗 भूत, पिशाच, वैताल, कुष्मांड, ब्रह्मराक्षस। *पाँच स्वाद 😗 मीठा, चर्खा, खट्टा, खारा, कड़वा। *पाँच वायु 😗 प्राण, अपान, व्यान, उदान, समान। *पाँच इन्द्रियाँ 😗 आँख, नाक, कान, जीभ, त्वचा, मन। *पाँच वटवृक्ष 😗 सिद्धवट (उज्जैन), अक्षयवट (Prayagraj), बोधिवट (बोधगया), वंशीवट (वृंदावन), साक्षीवट (गया)। *पाँच पत्ते 😗 आम, पीपल, बरगद, गुलर, अशोक। *पाँच कन्या 😗 अहिल्या, तारा, मंदोदरी, कुंती, द्रौपदी। *xxxxxxxxxx 05 xxxxxxxxxx* *छ: ॠतु 😗 शीत, ग्रीष्म, वर्षा, शरद, बसंत, शिशिर। *छ: ज्ञान के अंग 😗 शिक्षा, कल्प, व्याकरण, निरुक्त, छन्द, ज्योतिष। *छ: कर्म 😗 देवपूजा, गुरु उपासना, स्वाध्याय, संयम, तप, दान। *छ: दोष 😗 काम, क्रोध, मद (घमंड), लोभ (लालच), मोह, आलस्य। *xxxxxxxxxx 06 xxxxxxxxxx* *सात छंद 😗 गायत्री, उष्णिक, अनुष्टुप, वृहती, पंक्ति, त्रिष्टुप, जगती। सात स्वर : सा, रे, ग, म, प, ध, नि। *सात सुर 😗 षडज्, ॠषभ्, गांधार, मध्यम, पंचम, धैवत, निषाद। *सात चक्र 😗 सहस्त्रार, आज्ञा, विशुद्ध, अनाहत, मणिपुर, स्वाधिष्ठान, मूलाधार। *सात वार 😗 रवि, सोम, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि। *सात मिट्टी 😗 गौशाला, घुड़साल, हाथीसाल, राजद्वार, बाम्बी की मिट्टी, नदी संगम, तालाब। *सात महाद्वीप 😗 जम्बुद्वीप (एशिया), प्लक्षद्वीप, शाल्मलीद्वीप, कुशद्वीप, क्रौंचद्वीप, शाकद्वीप, पुष्करद्वीप। *सात ॠषि 😗 वशिष्ठ, विश्वामित्र, कण्व, भारद्वाज, अत्रि, वामदेव, शौनक। *सात ॠषि 😗 वशिष्ठ, कश्यप, अत्रि, जमदग्नि, गौतम, विश्वामित्र, भारद्वाज। *सात धातु (शारीरिक) 😗 रस, रक्त, मांस, मेद, अस्थि, मज्जा, वीर्य। *सात रंग 😗 बैंगनी, जामुनी, नीला, हरा, पीला, नारंगी, लाल। *सात पाताल 😗 अतल, वितल, सुतल, तलातल, महातल, रसातल, पाताल। *सात पुरी 😗 मथुरा, हरिद्वार, काशी, अयोध्या, उज्जैन, द्वारका, काञ्ची। *सात धान्य 😗 गेहूँ, चना, चांवल, जौ मूँग,उड़द, बाजरा। *xxxxxxxxxx 07 xxxxxxxxxx* *आठ मातृका 😗 ब्राह्मी, वैष्णवी, माहेश्वरी, कौमारी, ऐन्द्री, वाराही, नारसिंही, चामुंडा। *आठ लक्ष्मी 😗 आदिलक्ष्मी, धनलक्ष्मी, धान्यलक्ष्मी, गजलक्ष्मी, संतानलक्ष्मी, वीरलक्ष्मी, विजयलक्ष्मी, विद्यालक्ष्मी। *आठ वसु 😗 अप (अह:/अयज), ध्रुव, सोम, धर, अनिल, अनल, प्रत्युष, प्रभास। *आठ सिद्धि 😗 अणिमा, महिमा, गरिमा, लघिमा, प्राप्ति, प्राकाम्य, ईशित्व, वशित्व। *आठ धातु 😗 सोना, चांदी, तांबा, सीसा जस्ता, टिन, लोहा, पारा। *xxxxxxxxxx 08 xxxxxxxxxx* *नवदुर्गा 😗 शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चन्द्रघंटा, कुष्मांडा, स्कन्दमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी, सिद्धिदात्री। *नवग्रह 😗 सुर्य, चन्द्रमा, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि, राहु, केतु। *नवरत्न 😗 हीरा, पन्ना, मोती, माणिक, मूंगा, पुखराज, नीलम, गोमेद, लहसुनिया। *नवनिधि 😗 पद्मनिधि, महापद्मनिधि, नीलनिधि, मुकुंदनिधि, नंदनिधि, मकरनिधि, कच्छपनिधि, शंखनिधि, खर्व/मिश्र निधि। *xxxxxxxxxx 09 xxxxxxxxxx* *दस महाविद्या 😗 काली, तारा, षोडशी, भुवनेश्वरी, भैरवी, छिन्नमस्तिका, धूमावती, बगलामुखी, मातंगी, कमला। *दस दिशाएँ 😗 पूर्व, पश्चिम, उत्तर, दक्षिण, आग्नेय, नैॠत्य, वायव्य, ईशान, ऊपर, नीचे। *दस दिक्पाल 😗 इन्द्र, अग्नि, यमराज, नैॠिति, वरुण, वायुदेव, कुबेर, ईशान, ब्रह्मा, अनंत। *दस अवतार (विष्णुजी) 😗 मत्स्य, कच्छप, वाराह, नृसिंह, वामन, परशुराम, राम, कृष्ण, बुद्ध, कल्कि। *दस सती 😗 सावित्री, अनुसुइया, मंदोदरी, तुलसी, द्रौपदी, गांधारी, सीता, दमयन्ती, सुलक्षणा, अरुंधती। 🕉🙏✡ 🔰🔰🔰🔰🔰🔰🔰🔰🔰🔰🔰🔰 मोहित जैन शास्त्री 🔰🔰🔰🔰🔰🔰🔰🔰🔰🔰🔰🔰 नोट : कृपया उपर्युक्त पोस्ट को बच्चो को कण्ठस्थ करा दे। इससे घर में भारतीय संस्कृति जीवित रहेगी। #📓 हिंदी साहित्य
1.1k ने देखा
1 महीने पहले
अन्य एप्स पर शेयर करें
Facebook
WhatsApp
लिंक कॉपी करें
डिलीट करें
Embed
मैं इस पोस्ट का विरोध करता हूँ, क्योंकि ये पोस्ट...
Embed Post
अन्य एप्स पर शेयर करें
Facebook
WhatsApp
अनफ़ॉलो
लिंक कॉपी करें
शिकायत करें
ब्लॉक करें
रिपोर्ट करने की वजह: