Mohsin khan
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#🌙 गुड नाईट #✍मेरे पसंदीदा लेखक #📗प्रेरक पुस्तकें📘 #✍प्रेमचंद की कहानियां #❤️सैड व्हाट्सएप स्टेटस
🌙 गुड नाईट - 3াত ক্রী ব্রান তিন লীঠা ন हिसाब ही गलतियों का रखना होता हैं हिसाब गलतियाँ उनको ख़ाक पता होगा उनसे तुमने अचाई अच्छाई कौनसी की थी 3ಯ> मुहम्मद मोहसिन रज़ा क़ादरी 3াত ক্রী ব্রান তিন লীঠা ন हिसाब ही गलतियों का रखना होता हैं हिसाब गलतियाँ उनको ख़ाक पता होगा उनसे तुमने अचाई अच्छाई कौनसी की थी 3ಯ> मुहम्मद मोहसिन रज़ा क़ादरी - ShareChat
#❤️सैड व्हाट्सएप स्टेटस #✍प्रेमचंद की कहानियां #📗प्रेरक पुस्तकें📘 #✍मेरे पसंदीदा लेखक #🌙 गुड नाईट
❤️सैड व्हाट्सएप स्टेटस - अनमोल नसीहत किः आप कब्रिस्तान में क्यों बैठे हो?' ন পুত্তা  एक बुजुर्ग से किसी  उस बुजुर्ग ने बेहद ज़हीन और हकीकत पर मबनी जवाब दियाः मैं उनके साथ बैठा हूँ जिनकी तरफ से मुझे... कोई तकलीफ नहीं पहुँचती कोई मुझ पर इल्जाम नहीं लगाता 0 कोई किसी से हसद (जलन ) नहीं करता 0 कोई झूठ नहीं बोलता कोई किसी को तानहीं देता + 0 कोई भी अमानत में खयानत नहीं करता सबसे अच्छी बात और सबसे बड़ी खूबी यह है कि जब मैं यहाँ से उठ कर जाता हूँ, तो पीठ पीछे मेरी गीबत (बुराई ) भी नहीं करते!' जाता (मुहम्मद मोहसिन रज़ा क़ादरी दूधिया) अनमोल नसीहत किः आप कब्रिस्तान में क्यों बैठे हो?' ন পুত্তা  एक बुजुर्ग से किसी  उस बुजुर्ग ने बेहद ज़हीन और हकीकत पर मबनी जवाब दियाः मैं उनके साथ बैठा हूँ जिनकी तरफ से मुझे... कोई तकलीफ नहीं पहुँचती कोई मुझ पर इल्जाम नहीं लगाता 0 कोई किसी से हसद (जलन ) नहीं करता 0 कोई झूठ नहीं बोलता कोई किसी को तानहीं देता + 0 कोई भी अमानत में खयानत नहीं करता सबसे अच्छी बात और सबसे बड़ी खूबी यह है कि जब मैं यहाँ से उठ कर जाता हूँ, तो पीठ पीछे मेरी गीबत (बुराई ) भी नहीं करते!' जाता (मुहम्मद मोहसिन रज़ा क़ादरी दूधिया) - ShareChat
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✍प्रेमचंद की कहानियां - अनमोल ` बातें जब कोई दुनियावी तौर पर ऊंचे रुतबे वाला शख्स आपको कह दे के मैं आपके साथ हूं तो आप तसल्ली में आ जाते हैं लेकिन जब अल्लाह रब्वुल इज़्ज़त कह रहा है के मैं सब्र करने वालों के साथ हूं तो आप उसको मामूली समझते हैं (मुहम्मद मोहसिन रज़ा क़ादरी दूधिया ) अनमोल ` बातें जब कोई दुनियावी तौर पर ऊंचे रुतबे वाला शख्स आपको कह दे के मैं आपके साथ हूं तो आप तसल्ली में आ जाते हैं लेकिन जब अल्लाह रब्वुल इज़्ज़त कह रहा है के मैं सब्र करने वालों के साथ हूं तो आप उसको मामूली समझते हैं (मुहम्मद मोहसिन रज़ा क़ादरी दूधिया ) - ShareChat
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✍प्रेमचंद की कहानियां - अनमोल ` बातें जब कोई दुनियावी तौर पर ऊंचे रुतबे वाला शख्स आपको कह दे के मैं आपके साथ हूं तो आप तसल्ली में आ जाते हैं लेकिन जब अल्लाह रब्वुल इज़्ज़त कह रहा है के मैं सब्र करने वालों के साथ हूं तो आप उसको मामूली समझते हैं (मुहम्मद मोहसिन रज़ा क़ादरी दूधिया ) अनमोल ` बातें जब कोई दुनियावी तौर पर ऊंचे रुतबे वाला शख्स आपको कह दे के मैं आपके साथ हूं तो आप तसल्ली में आ जाते हैं लेकिन जब अल्लाह रब्वुल इज़्ज़त कह रहा है के मैं सब्र करने वालों के साथ हूं तो आप उसको मामूली समझते हैं (मुहम्मद मोहसिन रज़ा क़ादरी दूधिया ) - ShareChat
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✍मेरे पसंदीदा लेखक - वक्त नहीं है सुबह से शाम हो गई नजर नहीं आ रहा 1٥ अब तक दरख़्त नहीं कटा है कि मेरे पास आरे अपने आरे की धरी की धार तेज करने तेज कर लो. का वक्त नहीं है 6 PM 6 AM एक लकड़हारा आरे से दरख़्त काट रहा था। कुंद आरे की वजह से दरख़्त कटने का नाम नहीं ले रहा था। 1 घंटे का काम था मगर अब १० घंटे गुजर गए और लकड़हारा हिमत हारने का था। किसी गुजरने वाले ने कहा, " सुबह से शाम गई तक दरख़्त नहीं कटा! अपने आरे की धरी तेज कर लो. " तो लकड़हारे ने गुजरने वाले को घूर कर देखा और दुरुस्त लहजे में कहा, * नजर नहीं आ रहा है कि मेरे पास आरे की धार तेज करने का वक्त नहीं है!  सबकः शदीद मेहनत के बाद भी रिजल्ट अच्छा न मिल रहा हो तो अपनी महारत को जांचना चाहिए। (मुहम्मद मोहसिन रज़ा क़ादरी दूधिया) वक्त नहीं है सुबह से शाम हो गई नजर नहीं आ रहा 1٥ अब तक दरख़्त नहीं कटा है कि मेरे पास आरे अपने आरे की धरी की धार तेज करने तेज कर लो. का वक्त नहीं है 6 PM 6 AM एक लकड़हारा आरे से दरख़्त काट रहा था। कुंद आरे की वजह से दरख़्त कटने का नाम नहीं ले रहा था। 1 घंटे का काम था मगर अब १० घंटे गुजर गए और लकड़हारा हिमत हारने का था। किसी गुजरने वाले ने कहा, " सुबह से शाम गई तक दरख़्त नहीं कटा! अपने आरे की धरी तेज कर लो. " तो लकड़हारे ने गुजरने वाले को घूर कर देखा और दुरुस्त लहजे में कहा, * नजर नहीं आ रहा है कि मेरे पास आरे की धार तेज करने का वक्त नहीं है!  सबकः शदीद मेहनत के बाद भी रिजल्ट अच्छा न मिल रहा हो तो अपनी महारत को जांचना चाहिए। (मुहम्मद मोहसिन रज़ा क़ादरी दूधिया) - ShareChat
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✍मेरे पसंदीदा लेखक - वक्त नहीं है सुबह से शाम हो गई नजर नहीं आ रहा 1٥ अब तक दरख़्त नहीं कटा है कि मेरे पास आरे अपने आरे की धरी की धार तेज करने तेज कर लो. का वक्त नहीं है 6 PM 6 AM एक लकड़हारा आरे से दरख़्त काट रहा था। कुंद आरे की वजह से दरख़्त कटने का नाम नहीं ले रहा था। 1 घंटे का काम था मगर अब १० घंटे गुजर गए और लकड़हारा हिमत हारने का था। किसी गुजरने वाले ने कहा, " सुबह से शाम गई तक दरख़्त नहीं कटा! अपने आरे की धरी तेज कर लो. " तो लकड़हारे ने गुजरने वाले को घूर कर देखा और दुरुस्त लहजे में कहा, * नजर नहीं आ रहा है कि मेरे पास आरे की धार तेज करने का वक्त नहीं है!  सबकः शदीद मेहनत के बाद भी रिजल्ट अच्छा न मिल रहा हो तो अपनी महारत को जांचना चाहिए। (मुहम्मद मोहसिन रज़ा क़ादरी दूधिया) वक्त नहीं है सुबह से शाम हो गई नजर नहीं आ रहा 1٥ अब तक दरख़्त नहीं कटा है कि मेरे पास आरे अपने आरे की धरी की धार तेज करने तेज कर लो. का वक्त नहीं है 6 PM 6 AM एक लकड़हारा आरे से दरख़्त काट रहा था। कुंद आरे की वजह से दरख़्त कटने का नाम नहीं ले रहा था। 1 घंटे का काम था मगर अब १० घंटे गुजर गए और लकड़हारा हिमत हारने का था। किसी गुजरने वाले ने कहा, " सुबह से शाम गई तक दरख़्त नहीं कटा! अपने आरे की धरी तेज कर लो. " तो लकड़हारे ने गुजरने वाले को घूर कर देखा और दुरुस्त लहजे में कहा, * नजर नहीं आ रहा है कि मेरे पास आरे की धार तेज करने का वक्त नहीं है!  सबकः शदीद मेहनत के बाद भी रिजल्ट अच्छा न मिल रहा हो तो अपनी महारत को जांचना चाहिए। (मुहम्मद मोहसिन रज़ा क़ादरी दूधिया) - ShareChat
#📗प्रेरक पुस्तकें📘 #✍प्रेमचंद की कहानियां #🌙 गुड नाईट #❤️सैड व्हाट्सएप स्टेटस #✍मेरे पसंदीदा लेखक
📗प्रेरक पुस्तकें📘 - अअपनी तौरीफ़ ज़माने के लोग तारीफ जगह ते भाग जाया करते पुराने  थे सबसे ज्यादा कमजोर चीज़ अपनी तारीफ सुनना है ~ सबसे खतरनाक चीज होताी मुहं ने अपनी तारीफ करना यह एक वबा है और यह बबा फता हुली है अपनी > शकल की अपनने खानाददान और शक्लन तो तारीफ और अपननी जात की तारीफ ~ ( मुहम्मद मोहसिन रज़ा क़ादरी दूधिया ) अअपनी तौरीफ़ ज़माने के लोग तारीफ जगह ते भाग जाया करते पुराने  थे सबसे ज्यादा कमजोर चीज़ अपनी तारीफ सुनना है ~ सबसे खतरनाक चीज होताी मुहं ने अपनी तारीफ करना यह एक वबा है और यह बबा फता हुली है अपनी > शकल की अपनने खानाददान और शक्लन तो तारीफ और अपननी जात की तारीफ ~ ( मुहम्मद मोहसिन रज़ा क़ादरी दूधिया ) - ShareChat
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❤️सैड व्हाट्सएप स्टेटस - ன3&எ' अच्छे इंसान की सबसे पहली और आखरी निशानी ये है कि वो उन लोगों की भी इज़्ज़त करता है जिससे किसी किस्म का भी नुक्सान या फायदा नहीं होता (मुहम्मद मोहसिन रज़ा क़ादरी दूधिया ) ன3&எ' अच्छे इंसान की सबसे पहली और आखरी निशानी ये है कि वो उन लोगों की भी इज़्ज़त करता है जिससे किसी किस्म का भी नुक्सान या फायदा नहीं होता (मुहम्मद मोहसिन रज़ा क़ादरी दूधिया ) - ShareChat
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📗प्रेरक पुस्तकें📘 - एक अहम बात लोहा कभी ख़राब नहीं होता वह हमेशा अपने ही ज़ंग से बर्बाद होता है तरह इंसान को कोई बर्बाद नहीं कर सकता इसी ' उसकी सोच और दूसरों से उम्मीदे ही उसे बर्बाद कर देती हैं (मुहम्मद मोहसिन रज़ा क़ादरी दूधिया ) एक अहम बात लोहा कभी ख़राब नहीं होता वह हमेशा अपने ही ज़ंग से बर्बाद होता है तरह इंसान को कोई बर्बाद नहीं कर सकता इसी ' उसकी सोच और दूसरों से उम्मीदे ही उसे बर्बाद कर देती हैं (मुहम्मद मोहसिन रज़ा क़ादरी दूधिया ) - ShareChat
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✍मेरे पसंदीदा लेखक - पानी औरनमाज पानी और नमाज एक जैसै हैँ पानी मोहताज नहीं पीने वालों का और नमाज मोहताज नहीं पढ़ने वालौं की लिए । प्यास जरूरी है दोनों के जिस्म की प्यास के लिएपानी লিভ रूह की प्यास के ஏன अल्लाह ताला हमारी रूह को हुमेशा नमाज का तलबगार बनाए (31d) का तलबगार - मोहसिन रज़ा क़ादरी दूधिया दुआओं ; पानी औरनमाज पानी और नमाज एक जैसै हैँ पानी मोहताज नहीं पीने वालों का और नमाज मोहताज नहीं पढ़ने वालौं की लिए । प्यास जरूरी है दोनों के जिस्म की प्यास के लिएपानी লিভ रूह की प्यास के ஏன अल्लाह ताला हमारी रूह को हुमेशा नमाज का तलबगार बनाए (31d) का तलबगार - मोहसिन रज़ा क़ादरी दूधिया दुआओं ; - ShareChat