*नैनं छिन्दन्ति शस्त्राणि नैनं दहति पावकः।*
*न चैनं क्लेदयन्त्यापो न शोषयति मारुतः॥*
*श्रीमद्भागवत गीता(अध्याय २, श्लोक २३)*
*व्याख्या:*
अर्जुन सोच रहा था – “इतने लोग मर जाएंगे, पाप लगेगा।”
```कृष्ण मुस्कुराते हुए कहते हैं –``` 🌸*“जो तुम मारने जा रहे हो वो शरीर है, आत्मा नहीं। आत्मा को कोई हथियार नहीं काट सकता, आग नहीं जला सकती, पानी नहीं भिगो सकता, हवा नहीं सुखा सकती।”* 🌸
_हम सब आत्मा हैं जो अलग-अलग शरीर रूपी वस्त्र पहनकर आते-जाते रहते हैं ।
जब यह बात मन में बैठ जाए तो जीवन में न डर रहता है, न शोक। बस शुद्ध प्रेम और कर्तव्य रह जाता है। 🌌✨ #🙏प्रातः वंदन #☝अनमोल ज्ञान #🌸 सत्य वचन #😇 जीवन की प्रेरणादायी सीख