@mp_daily
@mp_daily

मध्य प्रदेश न्यूज़ का डेली डोज़

Madhya pradesh news ka daily dose!

मध्‍य प्रदेश चुनाव परिणाम: कमलनाथ के बाद अब कांग्रेस दफ्तर के बाहर लगे ज्‍योतिरादित्‍य सिंधिया के पोस्‍टर मध्‍य प्रदेश विधानसभा चुनाव के रुझानों में भले ही कांग्रेस और बीजेपी के बीच कांटे की टक्‍कर जारी हो लेकिन राज्‍य में कांग्रेस के सीएम पद के दावेदारों में शामिल कमलनाथ और ज्‍योतिरादित्‍य सिंधिया के समर्थकों में पोस्‍टर वार तेज हो गया है। सोमवार को कांग्रेस दफ्तर के बाहर कमलनाथ के मुख्‍यमंत्री बताने वाले पोस्‍टर लगने के बाद अब मंगलवार को सिंधिया समर्थकों ने उनके कई पोस्‍टर लगाए हैं।
#

ज्योतिरादित्य सिंधिया या कमल नाथ?

ज्योतिरादित्य सिंधिया या कमल नाथ? - ShareChat
3.9k views
1 months ago
#

मप्र चुनाव EVM के साथ छेड़छाड़??

क्या कहते हैं नियम? - वोटिंग मशीनें पूरी सुरक्षा के स्ट्रांग रुम तक पहुंचाई जाएंगी और उनकी 24X7 निगरानी होगी।- स्ट्रांग रुम की सीलिंग के वक्त राज्य और केंद्र की मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के नुमाइंदे - मौजूद रहेंगे. वो चाहें तो अपनी सील भी स्ट्रॉन्ग रूम के ताले पर लगा सकते हैं।- स्ट्रांग रुम डबल लॉक सिस्टम वाला होना चाहिए जिसका सिर्फ एक एंट्री प्वाइंट हो। - स्ट्रांग रुम की खिड़कियों तक को सील किया जाएगा ताकि कोई उसमें घुस ना सके।- एंट्री प्वाइंट की चौबीस घंटे सीसीटीवी कवरेज होगी जिसका आउटपुट बाहर किसी स्क्रीन पर दिखना चाहिए। - सिक्योरिटी गार्ड एक लॉग बुक मेनटेन करेगा जिसमें स्ट्रांग रुम के आसपास आने वाले लोगों के डिटेल्स, आने का वक्त और ठहरने की मियाद तक दर्ज होगी। अब आने वाले भले ही ऑब्जर्वर हों, चुनाव अधिकारी हों, इलाके का एसपी हो या फिर पॉलिटिकल पार्टियों के नुमाइंदे। यानी चौबीस घंटे, चौकस इंतजाम।  इस नियम का सरेआम उल्लंघन : भोपाल के सीसीटीवी कैमरे फेल होने के मामले में चुनाव आयोग की सफाई है कि अचानक बिजली चली गई जबकि गौर करने वाली बात है कि उसी चुनाव आयोग के अपने नियम कहते हैं कि ईवीएम की मौजूदगी के दौरान स्ट्रॉन्ग रूम में बिजली किसी कीमत पर ना जाए। ये सुनिश्चित करने के लिए चीफ इलेक्शन ऑफिसर को चाहिए कि वो संबंधित बिजली बोर्ड के चेयरमैन को लिखकर सूचित करे। बिजली चली भी गई तो जेनेरेटर का इंतजाम होना चाहिए ताकि कैमरा रिकॉर्डिंग में कोई गैप ना आए। 
745 views
1 months ago
#

मप्र चुनाव EVM के साथ छेड़छाड़??

चुनाव के बाद राजनीतिक दल के नेता आराम के मूड में रहते हैं। लेकिन, इस बार मध्य प्रदेश में चुनाव के बाद भी राजनीति में गर्माहट है। वजह 28 नवबंर को मतदान के बाद ईवीएम को लेकर कांग्रेस ने प्रदेश हर जिले में हो-हल्ला मचा रखा है।  इसकी शुरूआत सागर जिले के खुरई विधानसभा क्षेत्र से शुरू हुई। यहां की खुरई विधानसभा क्षेत्र की रिजर्व में रखी गई ईवीएम 48 घंटे बाद स्ट्रांग रूम लाई गई। ईवीएम के सागर हेडक्वॉर्टर पहुंचने पर यहां के स्ट्रांग रूम में दो घंटे से ज्यादा समय के लिए सीसीटीवी कैमरा बंद हो गया था। इस पर कांग्रेस और दूसरी पार्टियों ने जमकर हंगामा किया। घटना के दूसरे दिन ईवीएम पहुंचने में देरी होने के मामले में सागर के एक नायब तहसीलदार को निलंबित कर दिया गया है। खुरई से सागर 37 रिजर्व ईवीएम डिलिवर करने के लिए 25 किलोमीटर का रास्ता तय करने में एक स्कूल बस समेत दो गाड़ियों को दो दिन का वक्त लग गया। स्कूल बस पर कोई रजिस्ट्रेशन नंबर भी नहीं था। 
2.7k views
1 months ago
पूर्व मुख्य निर्वाचन आयुक्त ओपी रावत का कहना है कि विधानसभा चुनाव आधुनिक ईवीएम से किए जा रहे हैं। ये मशीनें मार्क 3 कैटेगरी की हैं। अगर कोई मशीनों के मदरबोर्ड में छेड़छाड़ करेगा, तो मशीन बंद हो जाती है। रावत ने यह भी माना कि पहले ईवीएम के मदरबोर्ड से छेड़छाड़ संभव थी। उन्होंने कहा कि इससे पहले की ईवीएम में यह समस्या थी कि यदि वह प्रशासनिक नियंत्रण से बाहर जाती है, तो उसमें मदरबोर्ड से छेड़छाड़ हो सकती थी। हालांकि, आयोग की व्यवस्था इतनी मजबूत रही है कि यह कभी भी प्रशासनिक नियंत्रण से बाहर नहीं रही और न ही शिकायत आई।
#

मप्र चुनाव EVM के साथ छेड़छाड़??

मप्र चुनाव EVM के साथ छेड़छाड़?? - ShareChat
1.6k views
1 months ago
जिस पार्टी ने वोटर्स को बूथ तक खींचा, फायदा तो उसे ही मिलेगा : राजीव करंदीकर, सैफोलॉजिस्ट (डायरेक्टर, चेन्नई मैथेमेटिकल इंस्टीट्यूट) मध्य प्रदेश में मतदान 28 नवम्बर को हो चुका है, मतगणना 11 दिसम्बर को होगी। इस दरम्यान सभी इस चर्चा में व्यस्त है कि जीत किसकी होगी? अधिकतर ओपिनियन पोल्स यह बता रहे थे कि मध्य प्रदेश में कांग्रेस और भाजपा के बीच कांटे की टक्कर हैं। मतदान में जो 3 प्रतिशत की बढ़त हुई है, उसका परिणामों पर क्या असर होगा इसकी चर्चा हो रही है। अब तीन बातें तय करेंगी की जीत किसकी होगी - किस पार्टी (कांग्रेस या भाजपा) ने उम्मीदवारों का चयन बेहतर किया है, किस पार्टी को ज्यादा बागी उम्मीदवारों का सामना करना पड़ा और किस पार्टी ने चुनाव के दिन ज्यादा संख्या में अपने मतदाताओं को मतदान केंद्रों तक पहुंचाने में सफलता हासिल की? जहां तक बागी उम्मीदवारों का सवाल है, भाजपा से टिकट न मिलने पर निर्दलीय बन कर चुनाव लड़ने वालों की संख्या ज्यादा बताई जाती है और इसका खामियाजा भाजपा को भुगतना पड़ेगा लेकिन कांग्रेस में भी नाराज नेताओं की कमी नहीं हैं। कांग्रेस भी दो या तीन खेमों में बंटी हुई है। मुख्यमंत्री पद के लिए कांग्रेस ने किसी के नाम की घोषणा नहीं की है। ऐसे में कांग्रेस को भी गुटबाजी से काफी नुकसान हो सकता हैं। यह कहना मुश्किल है कि आंतरिक कलह से किस पार्टी को ज्यादा नुकसान होगा।
#

मप्र विधानसभा चुनाव || जीत किसकी?

मप्र विधानसभा चुनाव || जीत किसकी? - ShareChat
2.5k views
1 months ago
ShareChat Install Now
ShareChat - Best & Only Indian Social Network - Download Now
Share on other apps
Facebook
WhatsApp
Copy Link
Delete
Embed
I want to report this post because this post is...
Embed Post
Share on other apps
Facebook
WhatsApp
Unfollow
Copy Link
Report
Block
I want to report because