कितना बोझिल होता है मन कभी कभी,
न कुछ सुनना चाहता है ,
ओर न ही कुछ कहना चाहता है,
शून्य में विलीन हो जाना चाहता है,
रो देना चाहता है फूट फूटकर,
जी भर कर ....
मन का गुबार खाली हो जाने तक,
और समझ भी नहीं आता कि,
तकलीफ किस किस बात की है,
हर बात घूम फिरकर दस्तक देती है ,
हर बात चुभती सी महसूस होती है,
यूं लगता है मै शायद जरूरी ही नहीं,
यूं लगता है हमारा होना शायद ज़ाया ही हुआ,
आइने से होती है नफरत सी ,
अपने वजूद में लगता है कुछ भारीपन,
आंखे न जाने कितनी भारी भारी हुई जाती हैं,
एक समुंदर वहां ठहरा हो जैसे ...
ख़ैर..... #💓 मोहब्बत दिल से