क्या शिव और पार्वती का प्रेम ‘ईश्वर और शक्ति’ के मिलन का रूपक है ?
तो क्या हर प्रेम आध्यात्मिक हो सकता है?
बहुत ही प्यारा प्रश्न है।
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जी हां, शिव और पार्वती का प्रेम ईश्वर और शक्ति का मिलन हैं। शिव ईश्वर हैं और पार्वती उनकी शक्ति। माता पार्वती ही भगवान शिव को वैराग्य से संसार की ओर ले जाती हैं। शिव यदि सूर्य हैं तो शक्ति उनकी किरण, शिव समुद्र हैं तो शक्ति लहर, ये एक ही हैं अलग नहीं।
प्रेम है ही एक अद्भुत चीज, वास्तविक प्रेम तो तभी होता है जब आपका आध्यात्मिक जुड़ाव हो। और ये प्रैक्टिकल भी है, यदि आपके जीवन में कोई ना हो तो मन वैरागी हो जाता, सांसारिक जीवन में रुचि नहीं होती लेकिन जैसे ही आप अपनी प्रेयसी के संपर्क में आते हैं तो एक अलग ऊर्जा आती है, तब आप सांसारिक जीवन में अधिक सक्रिय भी हो जाते हैं, चाहे आपकी उससे ज्यादा बात ना भी होती हो, आजकल क्रश शब्द बड़ा चलन है, क्रश केवल कुछ समय तक ही रहता जो केवल आकर्षण है.. लेकिन प्रेम तो सदैव रहता है, चाहे आप उससे डायरेक्ट रिलेशनशिप में ना लेकिन उसकी उपस्थिति से आनंद की अनुभूति होती है। प्रेम एक गहरा आत्मिक जुड़ाव है।
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जानती हो राधा रानी ❤️
कुछ प्रेम इंतजार करना चाहता है
कुछ प्रेम आत्मा की तरह इंतजार चाहता है
कुछ प्रेम बदलता नहीं ठहर जाता है
प्रेम मौन होता है
प्रेम हमे जुड़े रखता
मौन रहकर
भी
एक दूसरे को देखकर
एक दूसरे दूर से महसूस करवाते रहता है
क्यू कि जिसे हम प्रेम करते है
उनको भी हमारी यादें आती है❤️💗❤️ #❤️Love You ज़िंदगी ❤️ #🙏गीता ज्ञान🛕 #🙏भक्ति 🌺 #🌸 जय श्री कृष्ण😇











