मोहे मोर बनइयों राधा, अपने वृन्दावन में,
पंखों में भर लूँ रंग तेरे, हर एक स्पंदन में।
नील गगन सा ओढ़ लूँ तन, हरित धरा सी चाल,
तेरे नाम की छाप रहे बस, मेरे हर इक ख्याल।
कदम्ब की छाँव तले बैठूँ, सुनूँ बंसी की तान,
हर स्वर में बस तेरा साजन, हर धड़कन में श्याम।
जब तू चल दे कुंज गलिन में, मंद-मंद मुस्कान,
मेरे पंख बिखर जाएँ जैसे, झरता हो आकाश।
मोहे मोर बनइयों राधा, उस रास रचैया धाम,
जहाँ प्रेम ही पूजा बन जाए, और प्रेम ही हो नाम।
बरसे जब सावन की फुहारें, घिर आए बदरा काले,
मैं नाचूँ तेरे आँगन में, पंख पसारे मतवाले।
तेरे नयन कमल की गहराई, जैसे यमुना का नीर,
डूबूँ उनमें खो जाऊँ, जैसे कोई अधीर।
तेरे अधरों की मृदु हँसी, जैसे राग मल्हार,
मेरे मन के हर कोने में, कर दे प्रेम उजागर।
वृन्दावन की हर एक डाली, तेरा ही गुण गाए,
मिट्टी-मिट्टी में बस तेरा ही, मधुर नाम समाए।
ग्वालों की टोली संग-संग, हँसी-ठिठोली रचती,
मैं भी पंख पसार के अपने, तेरी लीला में सिमटती।
मोहे मोर बनइयों राधा, बन जाऊँ तेरा साज,
जब तू नाचे रास में, बनूँ मैं तेरे संग आवाज़।
घुँघरुओं की हर झंकार में, मेरा ही हो विस्तार,
तेरे संग थिरकूँ ऐसे, जैसे सागर में धार।
यमुना तट पे चाँद उतरे, रजनी हो शीतल-सी,
तू बैठे श्याम संग, रचती प्रेम कथा निर्मल-सी।
मैं चुपके से पास खड़ा हो, देखूँ वह अनुपम रूप,
तेरे चरणों में झुका रहूँ, बन जाऊँ धूल स्वरूप।
तेरी चूनर के रंग चुरा लूँ, अपने पंख सजाऊँ,
तेरे हर एक भाव को अपने नर्तन में मैं पाऊँ।
तेरे चरणों की रज बन जाऊँ, यही रहे अरमान,
जनम-जनम तक तेरी छाया, बनकर रहूँ महान।
मोहे मोर बनइयों राधा, अपने वृन्दावन में,
नयन बने बस तेरे दर्शक, हर एक जीवन-क्षण में।
न कुछ माँगूँ, न कुछ चाहूँ, बस इतना उपकार,
तेरे प्रेम की वर्षा में भीगूँ, बारंबार, अपार।
जब थम जाए जीवन की धारा, मिट जाए हर श्वास,
तब भी तेरे नाम की गूँज, करती रहे निवास।
मोहे मोर बनइयों राधा, यही अंतिम पुकार,
तेरे वृन्दावन में मिल जाए, मेरा सारा संसार।
🦚🌹🦚 श्री राधा राधा 🦚🌹🦚
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