सती अनुसूया और त्रिदेव
अहंकार और परीक्षा की योजना
एक बार देवी सरस्वती, लक्ष्मी और पार्वती के बीच स्वयं को श्रेष्ठ पतिव्रता सिद्ध करने की बहस छिड़ गई। जब त्रिदेवों ने ऋषि अत्रि की पत्नी माता अनुसूया को सर्वश्रेष्ठ बताया, तो ईर्ष्यावश देवियों ने त्रिदेवों को उनकी परीक्षा लेने के लिए विवश किया।
त्रिदेवों का आगमन और अनुचित शर्त
ब्रह्मा, विष्णु और महेश साधु का वेश धरकर महर्षि अत्रि के आश्रम पहुँचे। उस समय ऋषि आश्रम में नहीं थे। साधुओं ने अनुसूया के सामने भोजन ग्रहण करने के लिए एक अत्यंत कठिन शर्त रखी—कि वे उन्हें निर्वस्त्र होकर भोजन कराएं।
सती का संकल्प और चमत्कार
माता अनुसूया धर्म संकट में पड़ गईं, किंतु अपने तपोबल से उन्होंने जान लिया कि ये साधु स्वयं त्रिदेव हैं। उन्होंने अपने पति का स्मरण कर संकल्प किया कि यदि उनका पतिव्रत सच्चा है, तो ये तीनों साधु छह मास के शिशु बन जाएं। क्षण भर में त्रिदेव बालक बन गए। इसके बाद माता ने उन्हें वात्सल्य भाव से भोजन कराया।
देवियों का पश्चाताप और वरदान
जब सृष्टि का संतुलन बिगड़ने लगा और त्रिदेव वापस नहीं आए, तब तीनों देवियाँ लज्जित होकर आश्रम पहुँचे और माता अनुसूया से क्षमा मांगी। माता ने शिशुओं को पुनः उनके वास्तविक रूप में बदल दिया। अनुसूया की भक्ति से प्रसन्न होकर त्रिदेवों ने उन्हें वरदान दिया और उनके पुत्रों के रूप में जन्म लिया:
दत्तात्रेय (विष्णु के अंश)
दुर्वासा (शिव के अंश)
चंद्रदेव (ब्रह्मा के अंश)
निष्कर्ष: यह कथा सिद्ध करती है कि जहाँ निष्काम भक्ति और चरित्र की शुद्धता होती है, वहाँ स्वयं ईश्वर को भी झुकना पड़ता है।
राधे राधे
#🙏भक्ति 🌺 #🙏शाम की आरती🪔 #🤗जया किशोरी जी🕉️ #❤️Love You ज़िंदगी ❤️
मोहे मोर बनइयों राधा, अपने वृन्दावन में,
पंखों में भर लूँ रंग तेरे, हर एक स्पंदन में।
नील गगन सा ओढ़ लूँ तन, हरित धरा सी चाल,
तेरे नाम की छाप रहे बस, मेरे हर इक ख्याल।
कदम्ब की छाँव तले बैठूँ, सुनूँ बंसी की तान,
हर स्वर में बस तेरा साजन, हर धड़कन में श्याम।
जब तू चल दे कुंज गलिन में, मंद-मंद मुस्कान,
मेरे पंख बिखर जाएँ जैसे, झरता हो आकाश।
मोहे मोर बनइयों राधा, उस रास रचैया धाम,
जहाँ प्रेम ही पूजा बन जाए, और प्रेम ही हो नाम।
बरसे जब सावन की फुहारें, घिर आए बदरा काले,
मैं नाचूँ तेरे आँगन में, पंख पसारे मतवाले।
तेरे नयन कमल की गहराई, जैसे यमुना का नीर,
डूबूँ उनमें खो जाऊँ, जैसे कोई अधीर।
तेरे अधरों की मृदु हँसी, जैसे राग मल्हार,
मेरे मन के हर कोने में, कर दे प्रेम उजागर।
वृन्दावन की हर एक डाली, तेरा ही गुण गाए,
मिट्टी-मिट्टी में बस तेरा ही, मधुर नाम समाए।
ग्वालों की टोली संग-संग, हँसी-ठिठोली रचती,
मैं भी पंख पसार के अपने, तेरी लीला में सिमटती।
मोहे मोर बनइयों राधा, बन जाऊँ तेरा साज,
जब तू नाचे रास में, बनूँ मैं तेरे संग आवाज़।
घुँघरुओं की हर झंकार में, मेरा ही हो विस्तार,
तेरे संग थिरकूँ ऐसे, जैसे सागर में धार।
यमुना तट पे चाँद उतरे, रजनी हो शीतल-सी,
तू बैठे श्याम संग, रचती प्रेम कथा निर्मल-सी।
मैं चुपके से पास खड़ा हो, देखूँ वह अनुपम रूप,
तेरे चरणों में झुका रहूँ, बन जाऊँ धूल स्वरूप।
तेरी चूनर के रंग चुरा लूँ, अपने पंख सजाऊँ,
तेरे हर एक भाव को अपने नर्तन में मैं पाऊँ।
तेरे चरणों की रज बन जाऊँ, यही रहे अरमान,
जनम-जनम तक तेरी छाया, बनकर रहूँ महान।
मोहे मोर बनइयों राधा, अपने वृन्दावन में,
नयन बने बस तेरे दर्शक, हर एक जीवन-क्षण में।
न कुछ माँगूँ, न कुछ चाहूँ, बस इतना उपकार,
तेरे प्रेम की वर्षा में भीगूँ, बारंबार, अपार।
जब थम जाए जीवन की धारा, मिट जाए हर श्वास,
तब भी तेरे नाम की गूँज, करती रहे निवास।
मोहे मोर बनइयों राधा, यही अंतिम पुकार,
तेरे वृन्दावन में मिल जाए, मेरा सारा संसार।
🦚🌹🦚 श्री राधा राधा 🦚🌹🦚
@nikesh #🙏गीता ज्ञान🛕 #🙏शाम की आरती🪔 #🤗जया किशोरी जी🕉️ #🙏भक्ति 🌺 #❤️Love You ज़िंदगी ❤️
#🙏गीता ज्ञान🛕 #🤗जया किशोरी जी🕉️ #🙏शाम की आरती🪔 #🙏भक्ति 🌺 #❤️Love You ज़िंदगी ❤️
#🙏शाम की आरती🪔 #🙏भक्ति 🌺 #🤗जया किशोरी जी🕉️ #❤️Love You ज़िंदगी ❤️
#🙏गीता ज्ञान🛕 #🙏शाम की आरती🪔 #🤗जया किशोरी जी🕉️ #❤️Love You ज़िंदगी ❤️ #🙏भक्ति 🌺
#🙏गीता ज्ञान🛕 #🤗जया किशोरी जी🕉️ #🙏शाम की आरती🪔 #🙏भक्ति 🌺 #❤️Love You ज़िंदगी ❤️








