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#ધર્મ અને અધ્યાત્મ
ધર્મ અને અધ્યાત્મ - मन की सफ़ाई सुबह उठते ही शरीर और घर की सफाई करते हैं 1 लेकिन क्या अपने मन क्योंकि हमें गंदगी पसंद नहीं नफरत जैसी गंदगी की सफाई भी की ? ईर्ष्या , द्वेष से मन से सफाई की ? कोई নানী ক্ষী সন স पुरानी पकड़ के तो नहीं रखा ? क्योंकि अगर जीवन में चाहिए तो मन को हर रोज सुमन बनाना होगा अमन मन की सफ़ाई सुबह उठते ही शरीर और घर की सफाई करते हैं 1 लेकिन क्या अपने मन क्योंकि हमें गंदगी पसंद नहीं नफरत जैसी गंदगी की सफाई भी की ? ईर्ष्या , द्वेष से मन से सफाई की ? कोई নানী ক্ষী সন স पुरानी पकड़ के तो नहीं रखा ? क्योंकि अगर जीवन में चाहिए तो मन को हर रोज सुमन बनाना होगा अमन - ShareChat
#ધર્મ અને અધ્યાત્મ
ધર્મ અને અધ્યાત્મ - पुण्य जमा करें हम धन जमा करते हैँ ताकि अचानक जरूर पड़ने पर काम आए लेकिन कई बार ऐसी परिस्थिति भी आती है की वो धन से भी हमारी परिस्थिति का समाधान नहीं हो पाता 1उस समय हमारे पूण्य कर्म रूपी इसलिए जैसे रोज़ check करते है की कितना धन काम आता है धन कमाया उसके साथ ये भी check करें की कितना पुण्य कमाया  आने पर पुण्य का धन ही काम आता है क्योंकि समय पुण्य जमा करें हम धन जमा करते हैँ ताकि अचानक जरूर पड़ने पर काम आए लेकिन कई बार ऐसी परिस्थिति भी आती है की वो धन से भी हमारी परिस्थिति का समाधान नहीं हो पाता 1उस समय हमारे पूण्य कर्म रूपी इसलिए जैसे रोज़ check करते है की कितना धन काम आता है धन कमाया उसके साथ ये भी check करें की कितना पुण्य कमाया  आने पर पुण्य का धन ही काम आता है क्योंकि समय - ShareChat
#ધર્મ અને અધ્યાત્મ
ધર્મ અને અધ્યાત્મ - अलौकिक शंक्तियों का जीयन में प्रयोग چ ٍ مِ ஜன தி 2 0 शक्ति निश्चय की शक्ति शक्ति ಳr एकाग्रता शक्ति शिक्ति करन ffge संकीर्ण करने की शक्ति सामना करने की शक्ति परिवर्तन की॰ शक्ति ক্রী समेटने  शक्ति सिंगठनकी शक्ति शक्ति @ 8 आ सिहयोग 1 ೯ ٍ 8 8 सहन शक्ति 6 f अलौकिक शंक्तियों का जीयन में प्रयोग چ ٍ مِ ஜன தி 2 0 शक्ति निश्चय की शक्ति शक्ति ಳr एकाग्रता शक्ति शिक्ति करन ffge संकीर्ण करने की शक्ति सामना करने की शक्ति परिवर्तन की॰ शक्ति ক্রী समेटने  शक्ति सिंगठनकी शक्ति शक्ति @ 8 आ सिहयोग 1 ೯ ٍ 8 8 सहन शक्ति 6 f - ShareChat
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ધર્મ અને અધ્યાત્મ - आध्यात्म की ओर.. (Towards Spirituality) जीवन ढो चीजों से बना है,एक है शरीर और ढूसरी है शक्वी आत्मा। शरीर की वास्तविकता पांच तत्व हैं जल, वायु, अग्नि और आकाश। उसी तरह चैतन्य 3TT(TT गुण हैं ज्ञान, पवित्रता, प्रेम, की वास्तविकता सात शांति, सुख, आरनंढ और शक्ति। अगर ये सात गुण ন   স্ত্রঙীী    নীত 8 जीवन ச 77 जीवन ही ओर आत्मर्संतुष्टि है। इन सातों बिना सुख केवल गुणों గ్; इन सात गणों अभाव में कल्पना आज ITTT आत्मा रूपी बैटरी खाली हो गई है। आज मुझे अपेक्षा है ect क्को. गुवैसेर हे प्रेम और शांति से व्यवहार कि ढूसरा मुझे কব, নবী respect ही ढूसरे को भी मुझसे यही आस है कि मैं उसकी respect करूँ, उसके साथ अच्छा व्यवहार   करूं उसे   समझूं। discharged क्या एक baকter %; ` discharged battery को Charge कर নুন্সবী अपनी battery को charge करने के लिए सकती practice करना अपन का आत्मा समझन एक है और सर्व गूणों स्त्रोत परमात्मा से connect सर होना है, यही योग है। Visualise কব म आत्मा.एक point of light.. इस शरीर में गस्तक के मध्य वथत गुणों की rays मुझसे चारों ओर फैल रही हैं. साता 0I August 2023 Brahmakumaris आध्यात्म की ओर.. (Towards Spirituality) जीवन ढो चीजों से बना है,एक है शरीर और ढूसरी है शक्वी आत्मा। शरीर की वास्तविकता पांच तत्व हैं जल, वायु, अग्नि और आकाश। उसी तरह चैतन्य 3TT(TT गुण हैं ज्ञान, पवित्रता, प्रेम, की वास्तविकता सात शांति, सुख, आरनंढ और शक्ति। अगर ये सात गुण ন   স্ত্রঙীী    নীত 8 जीवन ச 77 जीवन ही ओर आत्मर्संतुष्टि है। इन सातों बिना सुख केवल गुणों గ్; इन सात गणों अभाव में कल्पना आज ITTT आत्मा रूपी बैटरी खाली हो गई है। आज मुझे अपेक्षा है ect क्को. गुवैसेर हे प्रेम और शांति से व्यवहार कि ढूसरा मुझे কব, নবী respect ही ढूसरे को भी मुझसे यही आस है कि मैं उसकी respect करूँ, उसके साथ अच्छा व्यवहार   करूं उसे   समझूं। discharged क्या एक baকter %; ` discharged battery को Charge कर নুন্সবী अपनी battery को charge करने के लिए सकती practice करना अपन का आत्मा समझन एक है और सर्व गूणों स्त्रोत परमात्मा से connect सर होना है, यही योग है। Visualise কব म आत्मा.एक point of light.. इस शरीर में गस्तक के मध्य वथत गुणों की rays मुझसे चारों ओर फैल रही हैं. साता 0I August 2023 Brahmakumaris - ShareChat
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ધર્મ અને અધ્યાત્મ - आध्यात्म की ओर. (Towards Spirituality) वाणी - कर्म में पवित्रता सहज ज्ञान की शक्ति से मन ही आ जाती है। पवित्रता अर्थात् शुद्धि। ज्हां शुद्धि है वहां ईश्वर का निवास होता है। मनुष्य बाह्य  8 लेकिन   आत्मा शुद्धि अपना ঐা जिम्मेवारी नही लेता। जब कोईं अंढर एक और बाहर ढूसरा होता है अर्थात् ढोहरे व्यक्तित्व वाला होता है तो लोग उसे खतरनाक समझते हुए उससे ढूर ही रहना चाहते हैं। पर यदि कोईं अँढर बाहर एक जैसा हो तो उसे भगवान का बँंढा मानते हैं। आज ढ्निया को कैसा व्यक्तित्व पसंद है, हर कोई कैसी दोस्ती चाहता है ? जो पवित्र और सच्ची हो। जहां भावनाओं में, विचारों गें, व्यवहार ठें अशुद्धि है,मिलावट है वहां संबँधों ठें कभी भी प्रेम पनप नहीं सकता। पवित्रता ही आत्मा का वास्तविक स्वरूप है। पवित्रता आत्मा का अनाढ़ि (जब आत्मा परमधाम में होती है) और आढि (जब आत्मा पहली बार परमधाम से इस सृष्टि मंच पर आती है) स्वरूप है। पवित्रता ही आत्मा तेज को बढ़ाता है। शांति की जननी है पवित्रता ही सुख Purity is the जहां पवित्रता mother of peace & prosperty शांति स्वतः होगी है, वर्हां सुख २० August २०२३ Brahmakumaris आध्यात्म की ओर. (Towards Spirituality) वाणी - कर्म में पवित्रता सहज ज्ञान की शक्ति से मन ही आ जाती है। पवित्रता अर्थात् शुद्धि। ज्हां शुद्धि है वहां ईश्वर का निवास होता है। मनुष्य बाह्य  8 लेकिन   आत्मा शुद्धि अपना ঐা जिम्मेवारी नही लेता। जब कोईं अंढर एक और बाहर ढूसरा होता है अर्थात् ढोहरे व्यक्तित्व वाला होता है तो लोग उसे खतरनाक समझते हुए उससे ढूर ही रहना चाहते हैं। पर यदि कोईं अँढर बाहर एक जैसा हो तो उसे भगवान का बँंढा मानते हैं। आज ढ्निया को कैसा व्यक्तित्व पसंद है, हर कोई कैसी दोस्ती चाहता है ? जो पवित्र और सच्ची हो। जहां भावनाओं में, विचारों गें, व्यवहार ठें अशुद्धि है,मिलावट है वहां संबँधों ठें कभी भी प्रेम पनप नहीं सकता। पवित्रता ही आत्मा का वास्तविक स्वरूप है। पवित्रता आत्मा का अनाढ़ि (जब आत्मा परमधाम में होती है) और आढि (जब आत्मा पहली बार परमधाम से इस सृष्टि मंच पर आती है) स्वरूप है। पवित्रता ही आत्मा तेज को बढ़ाता है। शांति की जननी है पवित्रता ही सुख Purity is the जहां पवित्रता mother of peace & prosperty शांति स्वतः होगी है, वर्हां सुख २० August २०२३ Brahmakumaris - ShareChat
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ધર્મ અને અધ્યાત્મ - आध्यात्म की ओर. owards Spirituality) की इस् आधुनिक जीवनशैली क्या आत्म ज्ञान या आध्यात्मिकता में कोई आवश्यकता है ? क्या इस्से हमारी वर्तमान समस्याओं का हल प्राप्त हो सकता है ? सर्व विदित है कि अनेकों युद्ध अकेले जीतने वाला अर्जुन महाभारत युद्ध के समय विषाद और अवसाद nervous & depressed ) होकर, अपने शस्त्र छोड़ ग्रस्त कि वह युद्ध नहीं बार भगवान से निवेद्न करने लगा 07 aగ भगवान ने उसे कौन सा ज्ञान दिया करना चाहता। तब उस समय जिससे वह विषाद मुक्त होकर युद्ध के लिए तत्पर हो गया ? भगवान ने उसते आध्यात्मिक ज्ञान से आत्मनिष्ठ स्थिति में स्थित किया और स्वधर्म (आत्मिक धर्म) का परिचय केकर उसकी अनंत शक्ति को उजागर करने की विथि बताई जिससे वह कर्मयोगी की हर चुनौती का सामना कर सके। आज जीवन बनकर जीवन சிரக संघर्ष है, हर वक्त युद्ध करना पड़ता है, जीवन की कई चुनौतियों के सामने अर्जुन की ही तरह हम nervous और depressed हो जाते हैं। अर्जुन की तरह " क्या करुं, क्या न की दुविधा में जकड़े मनुष्य के मन में आता हैकि आखिर কত" भी ये संघर्ष कब तक ? ऐसे में आत्म ज्ञान ही मन का तनाव और भय दूर कर निर्भय और शक्ति संपग्न बनाता है। राजयोग से अपनी  आंतरिक शक्तियों को उजागर कर आत्म विश्वास् से हर चुनौती कर सकते है। कासामना Brahmakumaris 8 August 2023 आध्यात्म की ओर. owards Spirituality) की इस् आधुनिक जीवनशैली क्या आत्म ज्ञान या आध्यात्मिकता में कोई आवश्यकता है ? क्या इस्से हमारी वर्तमान समस्याओं का हल प्राप्त हो सकता है ? सर्व विदित है कि अनेकों युद्ध अकेले जीतने वाला अर्जुन महाभारत युद्ध के समय विषाद और अवसाद nervous & depressed ) होकर, अपने शस्त्र छोड़ ग्रस्त कि वह युद्ध नहीं बार भगवान से निवेद्न करने लगा 07 aగ भगवान ने उसे कौन सा ज्ञान दिया करना चाहता। तब उस समय जिससे वह विषाद मुक्त होकर युद्ध के लिए तत्पर हो गया ? भगवान ने उसते आध्यात्मिक ज्ञान से आत्मनिष्ठ स्थिति में स्थित किया और स्वधर्म (आत्मिक धर्म) का परिचय केकर उसकी अनंत शक्ति को उजागर करने की विथि बताई जिससे वह कर्मयोगी की हर चुनौती का सामना कर सके। आज जीवन बनकर जीवन சிரக संघर्ष है, हर वक्त युद्ध करना पड़ता है, जीवन की कई चुनौतियों के सामने अर्जुन की ही तरह हम nervous और depressed हो जाते हैं। अर्जुन की तरह " क्या करुं, क्या न की दुविधा में जकड़े मनुष्य के मन में आता हैकि आखिर কত" भी ये संघर्ष कब तक ? ऐसे में आत्म ज्ञान ही मन का तनाव और भय दूर कर निर्भय और शक्ति संपग्न बनाता है। राजयोग से अपनी  आंतरिक शक्तियों को उजागर कर आत्म विश्वास् से हर चुनौती कर सकते है। कासामना Brahmakumaris 8 August 2023 - ShareChat
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ધર્મ અને અધ્યાત્મ - आध्यात्म की ओर Oowanls Spinituality आध्यात्मिक यात्रा है। मन की TISuIT WT d1 एक स्वाभाविक प्रवत्ति है कि उसको घमना अच्छा लगता है॰ कभी किन्हीं विचारों में चक्कर लगाता چ कभी दनिया के किसी दसरे कोने में बैठे व्यक्ति पास पॅहेंच जाता है, तो रकभी बचपन में चला जाता శ్లా్ా है। मनॅ के लिए समय या स्थान का कोई नहीं है। राजयोग ध्यान में मन की इसी प्रकति परमात्मा के ध्यान के लिए परिवर्तित कर्र लेते और मन को एक आध्यात्मिक यात्रा पर परमात्मा के सानिध्य में ले जा सकते हैं और मन को शांति प्रेम और शक्तियों सकते हैं। इसके   लिए भर परमात्मा से कछ मांगने की आवश्र्यकता  % = हे प्रभू मुझै शांति दो.. हे प्रभू मुझे शक्ति दो.. समुर्द्र कै पास जाकर हम समुद्ु से यह = Tಾತ ಸತಮ್ತೆಾಸ್ತತ್ ಏೆಡಾ ಸಾಗತ್ಯನ T कै धप में 4 रहने अपनी गमोहट् दो। आप ही गर्माहट मिलती है। ही आत्म स्चर्ूप में मन को स्थित करने से धीरे [್ಾ परमात्मा की ओर जाने लगता है और परमात्मा सानिध्य में जाने पर आप ही सब कुछ अपने मिलने लगता हे। Omanmakumanis 078 आध्यात्म की ओर Oowanls Spinituality आध्यात्मिक यात्रा है। मन की TISuIT WT d1 एक स्वाभाविक प्रवत्ति है कि उसको घमना अच्छा लगता है॰ कभी किन्हीं विचारों में चक्कर लगाता چ कभी दनिया के किसी दसरे कोने में बैठे व्यक्ति पास पॅहेंच जाता है, तो रकभी बचपन में चला जाता శ్లా్ా है। मनॅ के लिए समय या स्थान का कोई नहीं है। राजयोग ध्यान में मन की इसी प्रकति परमात्मा के ध्यान के लिए परिवर्तित कर्र लेते और मन को एक आध्यात्मिक यात्रा पर परमात्मा के सानिध्य में ले जा सकते हैं और मन को शांति प्रेम और शक्तियों सकते हैं। इसके   लिए भर परमात्मा से कछ मांगने की आवश्र्यकता  % = हे प्रभू मुझै शांति दो.. हे प्रभू मुझे शक्ति दो.. समुर्द्र कै पास जाकर हम समुद्ु से यह = Tಾತ ಸತಮ್ತೆಾಸ್ತತ್ ಏೆಡಾ ಸಾಗತ್ಯನ T कै धप में 4 रहने अपनी गमोहट् दो। आप ही गर्माहट मिलती है। ही आत्म स्चर्ूप में मन को स्थित करने से धीरे [್ಾ परमात्मा की ओर जाने लगता है और परमात्मा सानिध्य में जाने पर आप ही सब कुछ अपने मिलने लगता हे। Omanmakumanis 078 - ShareChat
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ધર્મ અને અધ્યાત્મ - 8 ed भगवान सबसे श्रेष्ठ खजाना है संकल्प का खजाना। संकल्प के खजाने को waste करते हैं, मतलब व्यर्थ संकल्प (waste thoughts) होती है ? जिनका व्यर्थ संकल्प बह्त करते हैं result क्या है उनकी बुद्धि कमज़ोर होती है।वो confused होते हैं। সলনা निर्णय ठीक नहीं होगा, क्या करुं, क्या न करुं स्पष्ट निर्णय नहीं की गति बहुत तीव्र होती है, होगा। লথ सकल्प इसालए control नहीं कर पाते। परेशानी या खुशी गायब हा जाना, मन সকল্প उदास रहना, अपने जीवन से मजा नहीं आना ये व्यर्थ की निशानियां है। संकल्प व्यर्थ चल रहे होते हैं तो उस घड़ी समय भी waste होता है। बचने के लिए संकल्पों के ऊपर control বুসব रखें और व्यर्थ संकल्प को संकल्प में परिवर्तन करें। संकल्प समर्थ economy 3| के खजाने Brahmakumaris पर आधारित ) गुरलियों  अव्यक्त 8 ed भगवान सबसे श्रेष्ठ खजाना है संकल्प का खजाना। संकल्प के खजाने को waste करते हैं, मतलब व्यर्थ संकल्प (waste thoughts) होती है ? जिनका व्यर्थ संकल्प बह्त करते हैं result क्या है उनकी बुद्धि कमज़ोर होती है।वो confused होते हैं। সলনা निर्णय ठीक नहीं होगा, क्या करुं, क्या न करुं स्पष्ट निर्णय नहीं की गति बहुत तीव्र होती है, होगा। লথ सकल्प इसालए control नहीं कर पाते। परेशानी या खुशी गायब हा जाना, मन সকল্প उदास रहना, अपने जीवन से मजा नहीं आना ये व्यर्थ की निशानियां है। संकल्प व्यर्थ चल रहे होते हैं तो उस घड़ी समय भी waste होता है। बचने के लिए संकल्पों के ऊपर control বুসব रखें और व्यर्थ संकल्प को संकल्प में परिवर्तन करें। संकल्प समर्थ economy 3| के खजाने Brahmakumaris पर आधारित ) गुरलियों  अव्यक्त - ShareChat
#ધર્મ અને અધ્યાત્મ
ધર્મ અને અધ્યાત્મ - आध्यात्मा की ओर. (Towards Spirituality) chemical component पूरी तरह से dis battery जब organised =7 எர & 7ி battery எ 8 f कहा discharge हो गई है। फिर उसको चार्जर में रख कर electric source के साथ connect करना पड़ता है। इसी प्रकार आज discharge हो गई है। इसका प्रमाण आत्मा की batterry भी है छोटी छोटी बातों में चिड़चिड़ापन, तनाव, गुस्सा आने लगता  है, self control नही रहा है। ईर्ष्या, द्वेष नकारात्मक बातें आती हैं खुद  से ही परेशान हो जाते हैं कि पहले तो ऐसा नही रहती ऐसा क्यों होता है ? आत्मा की इस होता था, आजकल कमज़ोरी के परिणामस्वरूप आत्मा की तीनों शक्तियों मन, बुद्धि और संस्कार में तालमेल fs गया है। जो सोचते वह बोल नही पाते और जो बोलते वह कर नही पाते। एक अंतर्द्वंद चलता रहता है इससे आत्म विश्वास कम होने लगता है और हताशा बढ़ने लगती है। राजयोग ध्यान के माध्यम से जब परमात्मा से संबंध जुड़ जाता है तब सर्वशक्तियों की ऊर्जा मिलने लगती है। आत्मा में शक्ति भरने वाला एकमात्र स्रोत परमात्मा ही है। जब उससे जुड़ जाते हैं तो हमारे स्वभाव में, संस्कारों में, व्यवहार में एक परिवर्तन की प्रक्रिया शुरू हो जाती है जिसे हम स्वयं भी और हमारे आस पास वाले भी महसूस करते हैं। स्वभाव शांत होने लगता है, मानसिक एकाग्रता बढने लगती है अपना कार्य ठीक ढंग से करने लगते हैंl हमारे मन, की की सूक्ष्म शक्तियां सु व्यवस्थित होने लगती संस्कार ٤ ०५ August २०२३ Brahmakumaris आध्यात्मा की ओर. (Towards Spirituality) chemical component पूरी तरह से dis battery जब organised =7 எர & 7ி battery எ 8 f कहा discharge हो गई है। फिर उसको चार्जर में रख कर electric source के साथ connect करना पड़ता है। इसी प्रकार आज discharge हो गई है। इसका प्रमाण आत्मा की batterry भी है छोटी छोटी बातों में चिड़चिड़ापन, तनाव, गुस्सा आने लगता  है, self control नही रहा है। ईर्ष्या, द्वेष नकारात्मक बातें आती हैं खुद  से ही परेशान हो जाते हैं कि पहले तो ऐसा नही रहती ऐसा क्यों होता है ? आत्मा की इस होता था, आजकल कमज़ोरी के परिणामस्वरूप आत्मा की तीनों शक्तियों मन, बुद्धि और संस्कार में तालमेल fs गया है। जो सोचते वह बोल नही पाते और जो बोलते वह कर नही पाते। एक अंतर्द्वंद चलता रहता है इससे आत्म विश्वास कम होने लगता है और हताशा बढ़ने लगती है। राजयोग ध्यान के माध्यम से जब परमात्मा से संबंध जुड़ जाता है तब सर्वशक्तियों की ऊर्जा मिलने लगती है। आत्मा में शक्ति भरने वाला एकमात्र स्रोत परमात्मा ही है। जब उससे जुड़ जाते हैं तो हमारे स्वभाव में, संस्कारों में, व्यवहार में एक परिवर्तन की प्रक्रिया शुरू हो जाती है जिसे हम स्वयं भी और हमारे आस पास वाले भी महसूस करते हैं। स्वभाव शांत होने लगता है, मानसिक एकाग्रता बढने लगती है अपना कार्य ठीक ढंग से करने लगते हैंl हमारे मन, की की सूक्ष्म शक्तियां सु व्यवस्थित होने लगती संस्कार ٤ ०५ August २०२३ Brahmakumaris - ShareChat
#ધર્મ અને અધ્યાત્મ
ધર્મ અને અધ્યાત્મ - आध्यात्म की ओर. (Towards Spirituality) वर्तमान युग को कलयुग या रावण राज्य कहा जाता है নগ্ী रखते हैं। इस् युग को फिर से राम राज्य लाने की चाह रावण राज्य क्यों कहते हैं ? रावण कोई असुर नहीं, ब्राम्हण था अर्थात् ऊंच कुल का था, महाविद्वान था। अपनी बुद्धि की शक्ति से प्रकृति के सभी देवताओं को और नौ ग्रहों को अपना दास बनाकर रखा था। उसके पास दिव्य अस्त्र-शस्त्र थे। धनवान उसकी पूरी लंका सोने की थी। महान शिव भक्त भी था। 91, बुद्धि और भक्ति - इन चारों ही बातों में संपग्न था अर्थ , बल, सर्वनाश हुआ क्योंकि उसके जीवन में दो फिर भी उसका कमजोरियां थीं - २. अहंकार की अति और २. चरित्रहीनता| मनुष्य जैसा बुद्धिवान और शक्तिशाली और कोई नहीं। आज से ऊड़ सकता है , समुद्र मार्ग से यात्रा कर सकता वायु मार्ग d है। विज्ञान की शक्ति से इंद्र देव को नल में , वायु देव को electric switch में और अग्नि देव को cyllinder में कैद कर रखा है जो एक बटन दबाते ही सेवा में हाज़िर हो जाते हैं। मिसाइल (त्रह्मास्त्र ) भी बना लिया है भी है , गली- गली 5 बुद्धि और भक्ति इन में धर्म स्थल बने हुए हैं। अर्थ , बल, चारों ही उपब्धियों से संपग्न है इतना सब होने के बाद भी संसार अपने ही सर्वनाश की दिशा में अग्रसर है क्योंकि आज २. अहंकार और २. चरित्रहीनता या नैतिक पतन भी चरम पर है। हैं कि सृष्टि हिंसा और नकारात्मकता चरम पर है कह सकते अपने   परिवर्तन की ओर अग्रसर है। I6 August 2023 Brahmakumaris आध्यात्म की ओर. (Towards Spirituality) वर्तमान युग को कलयुग या रावण राज्य कहा जाता है নগ্ী रखते हैं। इस् युग को फिर से राम राज्य लाने की चाह रावण राज्य क्यों कहते हैं ? रावण कोई असुर नहीं, ब्राम्हण था अर्थात् ऊंच कुल का था, महाविद्वान था। अपनी बुद्धि की शक्ति से प्रकृति के सभी देवताओं को और नौ ग्रहों को अपना दास बनाकर रखा था। उसके पास दिव्य अस्त्र-शस्त्र थे। धनवान उसकी पूरी लंका सोने की थी। महान शिव भक्त भी था। 91, बुद्धि और भक्ति - इन चारों ही बातों में संपग्न था अर्थ , बल, सर्वनाश हुआ क्योंकि उसके जीवन में दो फिर भी उसका कमजोरियां थीं - २. अहंकार की अति और २. चरित्रहीनता| मनुष्य जैसा बुद्धिवान और शक्तिशाली और कोई नहीं। आज से ऊड़ सकता है , समुद्र मार्ग से यात्रा कर सकता वायु मार्ग d है। विज्ञान की शक्ति से इंद्र देव को नल में , वायु देव को electric switch में और अग्नि देव को cyllinder में कैद कर रखा है जो एक बटन दबाते ही सेवा में हाज़िर हो जाते हैं। मिसाइल (त्रह्मास्त्र ) भी बना लिया है भी है , गली- गली 5 बुद्धि और भक्ति इन में धर्म स्थल बने हुए हैं। अर्थ , बल, चारों ही उपब्धियों से संपग्न है इतना सब होने के बाद भी संसार अपने ही सर्वनाश की दिशा में अग्रसर है क्योंकि आज २. अहंकार और २. चरित्रहीनता या नैतिक पतन भी चरम पर है। हैं कि सृष्टि हिंसा और नकारात्मकता चरम पर है कह सकते अपने   परिवर्तन की ओर अग्रसर है। I6 August 2023 Brahmakumaris - ShareChat