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😄 हंसिये और हंसाइए 😃

💩💩💩💩💩💩💩💩💩💩💩 *गाँव में किसी के भी मरने पर श्मशान के* *पास बने एकमात्र सरकारी स्कूल में छुट्टी* *कर दी जाती थी और तब बच्चों की मानो* *मौज ही हो जाती थी........................!!* *०* *०* *आज भी कोई मर गया था इसलिए सभी* *बच्चे अपने-अपने घर लौट रहे थे........!!* *०* *०* *रास्ते में दो बूढ़े चौपाल पर* *बैठे हुक्का पी रहे थे......!!* *०* *०* *चुन्नू-मुन्नू ने उन्हें देखा तो हँसने लगे....!!* *०* *०* *एक बूढ़े ने हँसने का कारण पूछा तो :👉* *०* *०* *चुन्नू ने बताया : बाबा, मुन्नू कह रहा है* *वो सामने देख हमलोगों की 2 छुट्टियाँ* *आराम से हुक्का गुड़गुड़ा रही हैं.....!!* 👻👻👻👻👻👻👻👻👻👻👻 #😄 हंसिये और हंसाइए 😃 #😛 व्यंग्य 😛 #😉नटखट बच्चे #📜 Whatsapp स्टेटस #🤣 जोक्स 🤣
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2 महीने पहले
हाय हाय ये गरमी, ओ मानसून तुम कहां हो..?? सुबह हो शाम हो या आफ्टरनून, लगता है ये जून अब देगा भून !! धूप में चावल उबल रहे, रोटी सिंक रही और अंडों का आमलेट भी तैयार हो रहा है, ऐसी हालत में एक नजर जरा इधर भी....!! प्रकृति उवाच :~ फ्रिज तथा ऐसी के मजे लूटने वालों, तुम बिगाड़ते रहो ओजोन की सेहत और लोकतंत्र के लुच्चों तुम भी बेरोकटोक अंधाधुंध वृक्ष कटाई कराओ व पर्यावरण का संतुलन बर्बाद करते जाओ साथ ही ओ सुविधाभोगी मानव तुम सब फैलाओ जी भरकर प्रदूषण, अपनी करनी को अनदेखा कर कलपते रहो और तरसों बूंद-बूंद पानी के लिये क्योंकि तुम इसी योग्य हो..!! सूर्यदेव उवाच :~ अभी, फिलहाल, आजकल अपुन मकर रेखा में पहुंचे हुये हैं इसलिये धरती और धरतीवासियों को भूनने हेतु अभिशप्त चल रहे हैं..!! इंद्रदेव उवाच :~ हे सूर्यदेव, आपकी वर्तमान रेखा को अपुन ने देखा पर आपने बताया नहीं कि अपनी स्थिति-परिस्थिति से आप संतुष्ट न प्रसन्न भी हैं अथवा नहीं....प्रत्येक देवता प्राणिमात्र को कुछ न कुछ देने हेतु अभिशप्त हैं पर दुख देना आपको शोभा नहीं देता, यह काम अपने दोनों धर्मराज पुत्रों के लिये छोड़ दीजिये तथा क्रमश: कर्क रेखा से होते हुये विषुवत को प्रस्थान करें..!! तभी आकाशवाणी हुई :~ मैं समय हूं, समय आने पर ही मकर-कर्क और विषुवत का अदल-बदल संभव है....समय रहते, समय से पहले या बाद सिर्फ जय श्री राम ही संभव है हालांकि कुछ लोग इस पर भी मगरमच्छ के अंडों की भांति उबल पड़ते हैं..!! आग है लगी हुई....हर तरफ यहां वहां, जल रही है ये जमीं जल रहा है आसमां !! प्रकृति से निरंतर खिलवाड़ व संसाधनों की नित्य बेहिसाब बर्बादी के चलते समय से पूर्व ही पृथ्वी से जीवन डायनासोरों की भांति लुप्त हो जायेगा, संभवतः अगला विश्वयुद्ध पानी के लिये ही लड़ा जायेगा..!! सारे देश में गरमी ने देखो, याद दिलाई नानी, सूर्य देवता आग हैं उगले, निगलें ढेरों पानी !! बावजूद इसके आजकल नान एसी वाले आसमानी गरमी से जल रहे हैं, एसी वाले तो अक्सर एक-दूसरे से जलते दीख पड़ते हैं....!!
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4 महीने पहले
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मैं इस पोस्ट का विरोध करता हूँ, क्योंकि ये पोस्ट...
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