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#Ludhiana wale 🙏🙏
Ludhiana wale 🙏🙏 - जीवन में दो चीजें आपको परिभाषित करती हैं जब आपके पास कुछ नहीं होता तो आपका धैर्य कुछ हो तो आपका रवैया। और जब आपके पास सब | 771 0 जीवन में दो चीजें आपको परिभाषित करती हैं जब आपके पास कुछ नहीं होता तो आपका धैर्य कुछ हो तो आपका रवैया। और जब आपके पास सब | 771 0 - ShareChat
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DJJS Ldh - चरैवेति Charaiveti समाधि को बरसों बीते मन दर्शन को तरस रहा है धैर्य और विश्वास सुदृढ़ पर हृदय भीतर से बरस रहा है चातक-्सा मैं नयन उठाए हर पल राह निहारता हूँ आपकी को दीप स्मृति  बनाकर साधकता सँवारता 8 बस एक झलक आपकी मेरे जीवन का संबल बन जाएगी प्रतीक्षा की यह तप्त प्यास ही भक्ति की गहराई बन जाएगी Jtottte_ಣt ٠٤؟؟٤٢٤٦٤٤ 28 d 83328| JAN p @X आप अपनी स्वलिखित कविताओं को cc@djjs org पर SHARE करें। Ijsworld |WW ajjs org CC-4305 चरैवेति Charaiveti समाधि को बरसों बीते मन दर्शन को तरस रहा है धैर्य और विश्वास सुदृढ़ पर हृदय भीतर से बरस रहा है चातक-्सा मैं नयन उठाए हर पल राह निहारता हूँ आपकी को दीप स्मृति  बनाकर साधकता सँवारता 8 बस एक झलक आपकी मेरे जीवन का संबल बन जाएगी प्रतीक्षा की यह तप्त प्यास ही भक्ति की गहराई बन जाएगी Jtottte_ಣt ٠٤؟؟٤٢٤٦٤٤ 28 d 83328| JAN p @X आप अपनी स्वलिखित कविताओं को cc@djjs org पर SHARE करें। Ijsworld |WW ajjs org CC-4305 - ShareChat
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DJJS Ldh - चरैवेति Charaiveti  Even in silence, the Master guides With His devotees, He ever abides] Live to the fullest leave doubt and fear For, the golden age of light draws near. Charaiveti echoes through His every deed Guiding every soul His grace guaranteed Brace up, let not the spirit die Divya Guru's Divya Samadhi will make the world risel p@X{OIdjjsworld SHARE YOUR SELF-COMPOSED POEMS AT cc@djjs.or8 wwwdjjs org CC-43054 चरैवेति Charaiveti  Even in silence, the Master guides With His devotees, He ever abides] Live to the fullest leave doubt and fear For, the golden age of light draws near. Charaiveti echoes through His every deed Guiding every soul His grace guaranteed Brace up, let not the spirit die Divya Guru's Divya Samadhi will make the world risel p@X{OIdjjsworld SHARE YOUR SELF-COMPOSED POEMS AT cc@djjs.or8 wwwdjjs org CC-43054 - ShareChat
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DJJS Ldh - चरैवेति Charaiveti Are erasers made for people who make wistakes ? No, the'  re made fr people who choose to correct them P@X{OIdjjsworld SHARE YOUR SELF-COMPOSED POEMS AT cc@djjs.or8 wwwdjjs org CC-4296 चरैवेति Charaiveti Are erasers made for people who make wistakes ? No, the'  re made fr people who choose to correct them P@X{OIdjjsworld SHARE YOUR SELF-COMPOSED POEMS AT cc@djjs.or8 wwwdjjs org CC-4296 - ShareChat
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DJJS Ldh - चरैवेति Charaiveti PARAKRAM DIWAS: HONOURING NETAIIS FEARLESS JOURNEY FOR FREEDOM "TRUE LEADERS DONT WAIT FOR COURAGE; THEY FORGE IT THROUGH SACRIFICE BLAZING TRAILS WHERE OTHERS FEAR TO TREAD p @X f @/djjsworld wwwdjjsorg SHARE YOUR SELF-COMPOSED POEMS AT cc@djjs org CC- 43004 चरैवेति Charaiveti PARAKRAM DIWAS: HONOURING NETAIIS FEARLESS JOURNEY FOR FREEDOM "TRUE LEADERS DONT WAIT FOR COURAGE; THEY FORGE IT THROUGH SACRIFICE BLAZING TRAILS WHERE OTHERS FEAR TO TREAD p @X f @/djjsworld wwwdjjsorg SHARE YOUR SELF-COMPOSED POEMS AT cc@djjs org CC- 43004 - ShareChat
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DJJS Ldh - 0 08018 अनुंक्नूंति  उनका " आशीर्वाद " और " उपस्थिति " सदा हमारे साथ है Enlightening Experlences 23 2026 प्रकारान तिथि 01 मैं आप सभी के साथ अपनी एक दिव्य अनुभूति साँझा करना चाहती हूँ। मैंने आज हम सभी रो रहे हैं और मुख से देखा- एक कमरे में हम तीन- चार साधक बैठे हुए हैं। एक ही पुकार फूट रही है - महाराज जी! अब तो आप वापस आ जाइए। भक्तों के हृदय से उठती पुकार ने तुरंत अपना प्रभाव दिखा दिया। अगले ही क्षण, उस से गुरु कक्ष में स्वयं गुरुदेव प्रकट हो गए। उनका स्वरूप अतिविशाल था। एकदम जी को यूँ सामने प्रकट हुआ देख हम सभी स्तब्ध रह गए। बडी- बड़ी आँखें महाराज में डूबा कर बस हम उन्हें देखे जा रहे थे। कोई आश्चर्य था तो कोई भावों में खोया हुआ था। किसी के मन में चल रहा था- अरे, महाराज जी आ गए। अब तो मैं सभी को जाकर बताऊँगा कि मेरे महाराज जी आ गए हैं। किसी दूसरे के मन में ढेरों प्रश्न जी से पूछना चाहता था लेकिन वाणी मौन थी, शब्द साथ चल रहे थे, जो वो महाराज ಫ ही नहीं दे रहे थे। सामने से कोई प्रत्यक्ष प्रतिक्रिया न देख गुरु महाराज जी स्वयं हमारे पास आकर बैठ गए। तब भी हम केवल उन्हें निहारते ही रहे। मेरी पलकें तो मानो झपकना ही भूल गई थीं। उनका दर्शन इतना मनमोहक और अलौकिक था कि वहाँ से नज़रें हट ही रहा, न शीश झुकाना और न मुख से कोई बात निकली। नहीं रही थीं। न प्रणाम याद तभी गुरु महाराज जी मंद-मंद मुस्कुरा दिए। उनकी वो मुस्कान मानो कह रही थी- क्या अब प्रणाम भी नहीं करोगे? गुरुदेव का यह संकेत पाते ही हम सब एक-एक कर उठे और श्रद्धा से उनके श्रीचरणों में प्रणाम करने लगे। मैं जैसे-जैसे आगे बढ रही थी, भीतर एक कंपन हो रहे थे। मैं मन ही मन गुरु महाराज जी से रही थी। भय और आनंद एक साथ उमड थी कि महाराज जी! क्या मैं सच में इन आँखों से आपका दर्शन कर पा रही पूछ रही साहस जुटाकर मैं आगे बढ़ी और उनके श्रीचरणों को छूकर जीवन धन्य कर लिया। इसके बाद, जैसे ही गुरु महाराज जी उठकर जाने लगे तो यह देख हम सब व्याकुल हो उठे। हृदय से पुकार निकली- महाराज जी, अब आप कहीं मत जाइए। इतना सब होे चुका है, विरह की इतनी लंबी अवधि हो गई है , अब तो हमें छोड़कर मत जाइए। गुरु महाराज जी ने करुण मुस्कान के साथ हम सबको आशीर्वाद दिया और उसी क्षण उस कमरे से अंतर्धान हो गए। उनके जाते ही मन में एक असीम शून्य रह गया, पर साथ ही यह अनुभूति भी कि उनका आशीर्वाद और उपस्थिति सदा हमारे साथ है। शाम्भवी सिंह चिराग दिल्ली , दिल्ली 111గ1 ೧೨೯7031371 i Y|a 311 3l 0 m 0 08018 अनुंक्नूंति  उनका " आशीर्वाद " और " उपस्थिति " सदा हमारे साथ है Enlightening Experlences 23 2026 प्रकारान तिथि 01 मैं आप सभी के साथ अपनी एक दिव्य अनुभूति साँझा करना चाहती हूँ। मैंने आज हम सभी रो रहे हैं और मुख से देखा- एक कमरे में हम तीन- चार साधक बैठे हुए हैं। एक ही पुकार फूट रही है - महाराज जी! अब तो आप वापस आ जाइए। भक्तों के हृदय से उठती पुकार ने तुरंत अपना प्रभाव दिखा दिया। अगले ही क्षण, उस से गुरु कक्ष में स्वयं गुरुदेव प्रकट हो गए। उनका स्वरूप अतिविशाल था। एकदम जी को यूँ सामने प्रकट हुआ देख हम सभी स्तब्ध रह गए। बडी- बड़ी आँखें महाराज में डूबा कर बस हम उन्हें देखे जा रहे थे। कोई आश्चर्य था तो कोई भावों में खोया हुआ था। किसी के मन में चल रहा था- अरे, महाराज जी आ गए। अब तो मैं सभी को जाकर बताऊँगा कि मेरे महाराज जी आ गए हैं। किसी दूसरे के मन में ढेरों प्रश्न जी से पूछना चाहता था लेकिन वाणी मौन थी, शब्द साथ चल रहे थे, जो वो महाराज ಫ ही नहीं दे रहे थे। सामने से कोई प्रत्यक्ष प्रतिक्रिया न देख गुरु महाराज जी स्वयं हमारे पास आकर बैठ गए। तब भी हम केवल उन्हें निहारते ही रहे। मेरी पलकें तो मानो झपकना ही भूल गई थीं। उनका दर्शन इतना मनमोहक और अलौकिक था कि वहाँ से नज़रें हट ही रहा, न शीश झुकाना और न मुख से कोई बात निकली। नहीं रही थीं। न प्रणाम याद तभी गुरु महाराज जी मंद-मंद मुस्कुरा दिए। उनकी वो मुस्कान मानो कह रही थी- क्या अब प्रणाम भी नहीं करोगे? गुरुदेव का यह संकेत पाते ही हम सब एक-एक कर उठे और श्रद्धा से उनके श्रीचरणों में प्रणाम करने लगे। मैं जैसे-जैसे आगे बढ रही थी, भीतर एक कंपन हो रहे थे। मैं मन ही मन गुरु महाराज जी से रही थी। भय और आनंद एक साथ उमड थी कि महाराज जी! क्या मैं सच में इन आँखों से आपका दर्शन कर पा रही पूछ रही साहस जुटाकर मैं आगे बढ़ी और उनके श्रीचरणों को छूकर जीवन धन्य कर लिया। इसके बाद, जैसे ही गुरु महाराज जी उठकर जाने लगे तो यह देख हम सब व्याकुल हो उठे। हृदय से पुकार निकली- महाराज जी, अब आप कहीं मत जाइए। इतना सब होे चुका है, विरह की इतनी लंबी अवधि हो गई है , अब तो हमें छोड़कर मत जाइए। गुरु महाराज जी ने करुण मुस्कान के साथ हम सबको आशीर्वाद दिया और उसी क्षण उस कमरे से अंतर्धान हो गए। उनके जाते ही मन में एक असीम शून्य रह गया, पर साथ ही यह अनुभूति भी कि उनका आशीर्वाद और उपस्थिति सदा हमारे साथ है। शाम्भवी सिंह चिराग दिल्ली , दिल्ली 111గ1 ೧೨೯7031371 i Y|a 311 3l 0 m - ShareChat
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DJJS Ldh - azafa Charaiveti उम्मीद व परिश्रम का सावन धरती में हरियाली भर दे सूखी ব্তুন ল अपना जब मन उजाला तो किस्मत भी दिशा बदल दे अनवरत बढ़ हे जागृत साधक! दिव्य गुरु का वचन संबल ले p @X f @ /djjsworld आप अपनी स्वलिखित कविताओँ को cc@djjs org पर SHARE करें। CC-4295 wwwdjjs org azafa Charaiveti उम्मीद व परिश्रम का सावन धरती में हरियाली भर दे सूखी ব্তুন ল अपना जब मन उजाला तो किस्मत भी दिशा बदल दे अनवरत बढ़ हे जागृत साधक! दिव्य गुरु का वचन संबल ले p @X f @ /djjsworld आप अपनी स्वलिखित कविताओँ को cc@djjs org पर SHARE करें। CC-4295 wwwdjjs org - ShareChat