50 साल में 'शोले' के 12 हीरो खो गए... आख़िर किसकी मौत ने सबसे चौंकाया?
फिल्म 'शोले' को आए 50 साल हो गए, और इन पांच दशकों में इसके 12 दिग्गज कलाकार दुनिया को अलविदा कह चुके हैं। वीरू बने धर्मेंद्र का निधन 20 नवंबर 2025 को हुआ, जबकि गब्बर सिंह बनने वाले अमजद खान 1992 में ही दुनिया छोड़ गए। ठाकुर की भूमिका निभाने वाले संजीव कुमार 1985 में कम उम्र में चल बसे। हास्य का तड़का लगाने वाले असरानी ने 2025 में अंतिम सांस ली। इंस्पेक्टर नर्मलाजी बने इफ्तियार 1995 में, रामलाल बने सत्येन कप्पू 2007 में और सांभा बने मैकमोहन 2010 में गुजर गए गए। इमाम साहब का दर्द देने वाले ए. के. हंगल 2012 में, सूरमा भोपाली बने जगदीप 2020 में, मौसी बनीं लीला मिश्रा 1988 में, कालिया का डायलॉग अमर करने वाले विजू खोटे 2019 में और हरिराम नाई का रोल करने वाले केष्टो मुखर्जी 1982 में हमें छोड़ गए। 'शोले' के ये सितारे भले आज नहीं हैं, लेकिन उनका जादू हमेशा अमर रहेगा। #बॉलीवुड
'शोले' (1975) के 50 वर्षों में, अमजद खान (गब्बर), संजीव कुमार (ठाकुर), और मैकमोहन (सांभा) सहित 12 दिग्गजों का निधन भारतीय सिनेमा के लिए एक बड़ा नुकसान है। इनमें सबसे चौंकाने वाली मौत 47 वर्ष की आयु में संजीव कुमार (1985) की थी, जो इतनी कम उम्र में दुनिया से चले गए। इसके अतिरिक्त, 1992 में अमजद खान का केवल 51 वर्ष की आयु में जाना भी एक गहरा सदमा था।
फिल्म के मुख्य किरदारों में से जो अब हमारे बीच नहीं हैं:
अमजद खान (गब्बर सिंह): 1992
संजीव कुमार (ठाकुर): 1985
मैकमोहन (सांभा): 2010
जगदीप (सूरमा भोपाली): 2020
ए.के. हंगल (इमाम साहब): 2012
लीला मिश्रा (मौसी): 1988
विजू खोटे (कालिया): 2019
असरानी (जेलर): (2025 में निधन की खबर, यद्यपि यह विवादित हो सकती है)
इफ्तियार (पुलिस इंस्पेक्टर): 1995
सत्येन कप्पू (रामलाल): 2007
केष्टो मुखर्जी (हरिराम नाई): 1982
धर्मेंद्र (वीरू) का भी हाल ही में (2025) निधन हुआ।
'शोले' के इन दिग्गजों की विरासत आज भी दर्शकों के दिलों में जिंदा है। #बॉलीवुड
वैभव सूर्यवंशी क्रिकेट के सबसे कम उम्र के
सुपरस्टार हैं, जिनका जन्म 2011 में बिहार के समस्तीपुर के गरीब परिवार में हुआ।
पिता ने खेत बेचे, मां ने रात में सिर्फ 3 घंटे सोकर घर चलाया, और वैभव ने 4 साल की उम्र से क्रिकेट शुरू किया।
पटना तक 100 किमी की यात्रा, फटे जूतों में प्रैक्टिस और पिज्जा-मटन त्यागकर उन्होंने संघर्ष किया। 12 साल में रणजी डेब्यू, 13 साल में लिस्ट ए शतक, और यूथ वर्ल्ड कप में धमाकेदार प्रदर्शन से रिकॉर्ड तोड़े।
2024 में राजस्थान रॉयल्स ने 1.1 करोड़ में साइन किया, 2025 आईपीएल डेब्यू पर गुजरात के खिलाफ 35 गेंदों में शतक ठोका टी20 का सबसे युवा शतकवीर।
नेट वर्थ 2-2.5 करोड़, परिवार की बलिदान सफल। उम्र विवाद के बाद बोन टेस्ट से साफ, अब भारत के लिए खेलने का सपना। #क्रिकेट
यशस्वी जायसवाल का जन्म 2001 में उत्तर
प्रदेश के गरीब परिवार में हुआ, जहां पिता छोटी दुकान चलाते थे और घर में दो वक्त की रोटी भी नसीब मुश्किल से होती।
क्रिकेट का जुनून ले मुंबई पहुंचे 10 साल की उम्र में, चाचा ने जगह न दी तो डेयरी में काम किया, फिर आजाद मैदान के टेंट में 3 साल गुजारे-पानीपुरी बेची, भूखे सोए, माली की पिटाई झेली।
कोच ज्वाला सिंह ने सहारा दिया, जिससे करियर संवर गया।
आज वे भारतीय टीम के स्टार ओपनर हैं, IPL में राजस्थान रॉयल्स के साथ 18 करोड़ रिटेन, नेट वर्थ 65-70 करोड़। टेस्ट में दो डबल सेंचुरी समेत रिकॉर्ड्स बनाए, परिवार मुंबई में सुखी है।
गरीबी से करोड़पति बन संघर्ष की मिसाल हैं यशस्वी। #क्रिकेट
यशस्वी जायसवाल का जन्म 2001 में उत्तर
प्रदेश के गरीब परिवार में हुआ, जहां पिता छोटी दुकान चलाते थे और घर में दो वक्त की रोटी भी नसीब मुश्किल से होती।
क्रिकेट का जुनून ले मुंबई पहुंचे 10 साल की उम्र में, चाचा ने जगह न दी तो डेयरी में काम किया, फिर आजाद मैदान के टेंट में 3 साल गुजारे-पानीपुरी बेची, भूखे सोए, माली की पिटाई झेली।
कोच ज्वाला सिंह ने सहारा दिया, जिससे करियर संवर गया।
आज वे भारतीय टीम के स्टार ओपनर हैं, IPL में राजस्थान रॉयल्स के साथ 18 करोड़ रिटेन, नेट वर्थ 65-70 करोड़। टेस्ट में दो डबल सेंचुरी समेत रिकॉर्ड्स बनाए, परिवार मुंबई में सुखी है।
गरीबी से करोड़पति बन संघर्ष की मिसाल हैं यशस्वी #क्रिकेट
यशस्वी जायसवाल का जन्म 28 दिसंबर 2001 को उत्तर प्रदेश के भदोही जिले के सुरियावां गांव में हुआ था। उनके पिता, भूपेंद्र कुमार जायसवाल, एक छोटी सी हार्डवेयर दुकान चलाते हैं, जबकि उनकी मां, कंचन जायसवाल, गृहिणी हैं। यशस्वी चार भाई-बहनों में सबसे छोटे हैं; उनके एक बड़े भाई, तेजस्वी जायसवाल, दिल्ली में क्रिकेटर बनने की कोशिश कर रहे हैं, जबकि उनकी दो बहनों में से एक शिक्षिका हैं और दूसरी विवाहित हैं।
सिर्फ 10 साल की उम्र में, यशस्वी ने क्रिकेट में करियर बनाने के सपने के साथ मुंबई का रुख किया। शुरुआत में, उन्होंने एक डेयरी में काम के बदले रहने की जगह ली, लेकिन क्रिकेट अभ्यास के कारण काम न कर पाने के चलते उन्हें वहां से निकाल दिया गया। इसके बाद, उन्होंने मुंबई के आज़ाद मैदान में ग्राउंड्समैन के साथ एक तंबू में रहना शुरू किया और जीविका चलाने के लिए पानीपुरी बेचना शुरू किया।
तीन साल तक कठिन परिस्थितियों में रहने के बाद, दिसंबर 2013 में कोच ज्वाला सिंह ने उनकी प्रतिभा को पहचाना और उन्हें अपने संरक्षण में लिया। ज्वाला सिंह ने उन्हें रहने की जगह दी और उनके कानूनी अभिभावक बन गए, जिससे यशस्वी को क्रिकेट में आगे बढ़ने का अवसर मिला।
यशस्वी की मां, कंचन जायसवाल, ने एक साक्षात्कार में बताया कि उन्होंने अपने बेटे से वापस गांव लौटने का आग्रह किया था, लेकिन यशस्वी ने कहा, "मैं मैदान में ही रहूंगा, तो सब कुछ आसान होगा; सुबह उठते ही मेरे सामने क्रिकेट होगा।"
आज, यशस्वी जायसवाल भारतीय क्रिकेट टीम के एक उभरते हुए सितारे हैं, जिन्होंने अपने संघर्षों और परिवार के समर्थन से यह मुकाम हासिल किया है। उनकी कहानी उन सभी के लिए प्रेरणा है जो कठिनाइयों के बावजूद अपने सपनों को साकार करना चाहते हैं। #क्रिकेट
रिंकू सिंह की कहानी गरीबी से सफलता की
एक प्रेरणादायक दास्तान है। उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ में 12 अक्टूबर 1997 को जन्मे रिंकू का परिवार बेहद गरीब था; पिता LPG सिलेंडर डिलीवर करते थे।
9वीं कक्षा में फेल होने के बाद पढ़ाई छोड़कर उन्होंने क्रिकेट को चुना, पुराने सामान उधार लेकर कानपुर की अकादमी में ट्रेनिंग की, भूखे रहकर दूर-दूर यात्राएं कीं। पिता के विरोध और 2021 की घुटने की चोट के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी।
सफाईकर्मी की नौकरी ठुकराकर क्रिकेट पर दांव लगाया। आज रिंकू IPL स्टार हैं, KKR ने उन्हें 13 करोड़ रुपये में रिटेन किया है। 2023 में GT के खिलाफ आखिरी ओवर में 5 छक्के मारकर मशहूर हुए। भारत के लिए T201 डेब्यू किया, एशिया कप 2025 जीता।
नेट वर्थ 20-25 करोड़, अलीगढ़ में 'वीणा पैलेस' बंगला, महंगी कारें और बाइकें हैं। प्रिया सरोज से सगाई कर चुके हैं और गरीब बच्चों के लिए स्पोर्ट्स हॉस्टल खोला। #क्रिकेट
रिंकू सिंह की कहानी गरीबी से सफलता की
एक प्रेरणादायक दास्तान है। उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ में 12 अक्टूबर 1997 को जन्मे रिंकू का परिवार बेहद गरीब था; पिता LPG सिलेंडर डिलीवर करते थे।
9वीं कक्षा में फेल होने के बाद पढ़ाई छोड़कर उन्होंने क्रिकेट को चुना, पुराने सामान उधार लेकर कानपुर की अकादमी में ट्रेनिंग की, भूखे रहकर दूर-दूर यात्राएं कीं। पिता के विरोध और 2021 की घुटने की चोट के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी।
सफाईकर्मी की नौकरी ठुकराकर क्रिकेट पर दांव लगाया। आज रिंकू IPL स्टार हैं, KKR ने उन्हें 13 करोड़ रुपये में रिटेन किया है। 2023 में GT के खिलाफ आखिरी ओवर में 5 छक्के मारकर मशहूर हुए। भारत के लिए T201 डेब्यू किया, एशिया कप 2025 जीता।
नेट वर्थ 20-25 करोड़, अलीगढ़ में 'वीणा पैलेस' बंगला, महंगी कारें और बाइकें हैं। प्रिया सरोज से सगाई कर चुके हैं और गरीब बच्चों के लिए स्पोर्ट्स हॉस्टल खोला। #क्रिकेट
एल्विश यादव, जिनका असली नाम सिद्धार्थ
यादव है, हरियाणा के गुरुग्राम के वज़ीराबाद में 1997 में एक मिडिल क्लास परिवार में पैदा हुए।
कॉलेज के दिनों में यूट्यूब पर छोटे-छोटे देसी कॉमेडी स्केच से उन्होंने 2016 में सफर शुरू किया, जहाँ शुरुआती स्ट्रगल के बावजूद उनकी हरियाणवी स्टाइल और ह्यूमर ने लाखों फैंस खड़े कर दिए।
2023 में बिग बॉस ओटीटी 2 को वाइल्डकार्ड एंट्री से जीतकर उन्होंने इतिहास रचा, जिसके बाद उनकी कमाई के स्रोतों में यूट्यूब, ब्रांड्स, म्यूजिक वीडियो और इवेंट्स शामिल हो गए।
आज उनके चैनलों पर 15 मिलियन से ज्यादा सब्सक्राइबर्स हैं और 2026 में नेट वर्थ करीब 80-140 करोड़ रुपये आंकी जा रही है। #क्रिकेट













