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संघर्ष इंसान को मजबूत बनाता है
#😎मोटिवेशनल गुरु🤘 #🥰मोटिवेशन वीडियो #❤️जीवन की सीख #👍 सफलता के मंत्र ✔️
😎मोटिवेशनल गुरु🤘 - गंगा वाणी पवित्र गंगामें नहाते है दुष्ट 1 पापी मक्कार| ;कहती है तुम्हे गंगाकी लहरें हैबारबारधिक्कार।| इन मक्कारों की हर बात झूठी है। कितना भी स्नान करेंये गंगा इनसे रूठीहै।। झूठा है इन दुष्टो का गंगा जल का तर्पण। मक्कारों जरादेखो अपना चेहरा तुम्हेही धिक्कार रहाहैतुम्हारे घरकादर्पणा। गंगा वाणी पवित्र गंगामें नहाते है दुष्ट 1 पापी मक्कार| ;कहती है तुम्हे गंगाकी लहरें हैबारबारधिक्कार।| इन मक्कारों की हर बात झूठी है। कितना भी स्नान करेंये गंगा इनसे रूठीहै।। झूठा है इन दुष्टो का गंगा जल का तर्पण। मक्कारों जरादेखो अपना चेहरा तुम्हेही धिक्कार रहाहैतुम्हारे घरकादर्पणा। - ShareChat
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😎मोटिवेशनल गुरु🤘 - பவபவ 60 MOrI और खूबसूरत स्वास्थ्य কমাথ अच्छे एक मंगल कामना  शुभहो। {4 सुबहकी அ$ பவபவ 60 MOrI और खूबसूरत स्वास्थ्य কমাথ अच्छे एक मंगल कामना  शुभहो। {4 सुबहकी அ$ - ShareChat
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😎मोटिवेशनल गुरु🤘 - जब हुआ अर्जुन मोहमाया से ग्रस्त न्याय और अन्याय के मध्य था महाभारत का युद्ध के विरुद्ध। ] कौरव और पांडव खड़े थे एक S कौरवों ने हमेशा किया पांडवो से अन्याय| द्रोपदी का चीरहरण किया लगी थी उनको हाय। ] धोखे से छीन लिया कौरवों ने पांडवों से राजपाटा होनी थी महाभारत में  भीषण मारकाट।] अब युद्ध से पहले श्रीकृष्ण कौरों के पास पहुँचे लेकर शांति वार्ता | मे मिलझुल कर भ्राता१ ] बातचीत से समस्या हल करो आपस कौरव नही हुये युद्ध विराम के लिए राजी | लेकिन कुटिल श्रीकृष्ण समझ गए पांडवों के हाथ मे आ है अब बाजी। ] चुकी श्रीकृष्ण अर्जुन चले यद्ध क्षेत्र की ओर। 13=13951` <& लगाकर जोरा] अर्जुून रथ में बैठा श्रीकृष्ण बने रथवान। अर्जुन जिन्हें मानव समझ रहा था चो थे स्वयं भगवान। ] जैसे ही रथ युद्ध क्षेत्र में पहुँचा अर्जून ने देखे चचेरे भाई। कैसे इन पर तीर चलाऊ हे कृष्ण कन्हाई। ] अर्जुन हो चुका था मोहमाया से ग्रस्त। श्रीकृष्ण बोले मोहमाया को छोड़कर तू द्रुष्टों पर चला अब अस्त्र। | तुझे कहेगा डरपोका बरना जगत इन दुष्टो मार दे तू मतकर इन पर शोका [ का अंत करना ही है क्षत्रिय का कर्म । ತe दुष्ट चाहे कितना भी सगा हो उसे मारना ही है क्षत्रिय का धर्म । ] श्री कृष्ण बोले मैं हूँ तीनो लोको का नाथ। तू यह युद्ध अवश्य जीतेगा मै हूँ तेरे साथ१] हे अर्जुन तुझे मोहमाया ने कर दिया है निष्क्रिय | मोहमाया को त्याग दे अब हे अर्जुन प्रिय। ] अर्जुन मैं तुझे दिखाता हूँ अपना असली रूप। मैं तुझे दिव्य दृष्टि देता हूँ देख मेरा स्वरूप।] श्रीकृष्ण का जब रूप हुआ विकराल| उसमे समाहित थे समस्त लोक और काल। ] अर्जुन समझ गया ये तो है संसार के कर्ताधर्ता | ये है जीवन दाता ओर प्राणों के हर्ता। ] अर्जुन हुआ कंपित। विकराल रूप को देखकर अब उसके हिर्दय में हो गया सत्य ज्ञान अंकित। | निष्काम कर्म ही है मानव का कर्तव्य | श्रीकृष्ण के व्यक्तव्य। ] अब उसे समझ आ गए अर्जुन समझ गया सत्य असत्य में अंतरा श्रीकृष्ण ने बताए हैं सत्य और कर्म के सभी TRll गीता में कर्म करो निष्काम जरूर मिलेगा फक| कर्म से ही मिलेगा सभी समस्याओं का हल। ] जब हुआ अर्जुन मोहमाया से ग्रस्त न्याय और अन्याय के मध्य था महाभारत का युद्ध के विरुद्ध। ] कौरव और पांडव खड़े थे एक S कौरवों ने हमेशा किया पांडवो से अन्याय| द्रोपदी का चीरहरण किया लगी थी उनको हाय। ] धोखे से छीन लिया कौरवों ने पांडवों से राजपाटा होनी थी महाभारत में  भीषण मारकाट।] अब युद्ध से पहले श्रीकृष्ण कौरों के पास पहुँचे लेकर शांति वार्ता | मे मिलझुल कर भ्राता१ ] बातचीत से समस्या हल करो आपस कौरव नही हुये युद्ध विराम के लिए राजी | लेकिन कुटिल श्रीकृष्ण समझ गए पांडवों के हाथ मे आ है अब बाजी। ] चुकी श्रीकृष्ण अर्जुन चले यद्ध क्षेत्र की ओर। 13=13951` <& लगाकर जोरा] अर्जुून रथ में बैठा श्रीकृष्ण बने रथवान। अर्जुन जिन्हें मानव समझ रहा था चो थे स्वयं भगवान। ] जैसे ही रथ युद्ध क्षेत्र में पहुँचा अर्जून ने देखे चचेरे भाई। कैसे इन पर तीर चलाऊ हे कृष्ण कन्हाई। ] अर्जुन हो चुका था मोहमाया से ग्रस्त। श्रीकृष्ण बोले मोहमाया को छोड़कर तू द्रुष्टों पर चला अब अस्त्र। | तुझे कहेगा डरपोका बरना जगत इन दुष्टो मार दे तू मतकर इन पर शोका [ का अंत करना ही है क्षत्रिय का कर्म । ತe दुष्ट चाहे कितना भी सगा हो उसे मारना ही है क्षत्रिय का धर्म । ] श्री कृष्ण बोले मैं हूँ तीनो लोको का नाथ। तू यह युद्ध अवश्य जीतेगा मै हूँ तेरे साथ१] हे अर्जुन तुझे मोहमाया ने कर दिया है निष्क्रिय | मोहमाया को त्याग दे अब हे अर्जुन प्रिय। ] अर्जुन मैं तुझे दिखाता हूँ अपना असली रूप। मैं तुझे दिव्य दृष्टि देता हूँ देख मेरा स्वरूप।] श्रीकृष्ण का जब रूप हुआ विकराल| उसमे समाहित थे समस्त लोक और काल। ] अर्जुन समझ गया ये तो है संसार के कर्ताधर्ता | ये है जीवन दाता ओर प्राणों के हर्ता। ] अर्जुन हुआ कंपित। विकराल रूप को देखकर अब उसके हिर्दय में हो गया सत्य ज्ञान अंकित। | निष्काम कर्म ही है मानव का कर्तव्य | श्रीकृष्ण के व्यक्तव्य। ] अब उसे समझ आ गए अर्जुन समझ गया सत्य असत्य में अंतरा श्रीकृष्ण ने बताए हैं सत्य और कर्म के सभी TRll गीता में कर्म करो निष्काम जरूर मिलेगा फक| कर्म से ही मिलेगा सभी समस्याओं का हल। ] - ShareChat
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😎मोटिवेशनल गुरु🤘 - R अत्यधिक लंबे समयकी दूरी या ओझलपन से प्रेम व स्नेहर्मैंकमी आजाती है R अत्यधिक लंबे समयकी दूरी या ओझलपन से प्रेम व स्नेहर्मैंकमी आजाती है - ShareChat
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😎मोटिवेशनल गुरु🤘 - गीताउपदेश बुद्धिमानव्यक्तिको बिनाकिसी स्वार्थ चाहिए केसमाजकी सेवाकरनी ' गीताउपदेश बुद्धिमानव्यक्तिको बिनाकिसी स्वार्थ चाहिए केसमाजकी सेवाकरनी ' - ShareChat