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#वैशाखमास2026 माहात्म्य: जानें वैशाख मास माहात्म्य अध्याय 02 जानें वैशाख मास माहात्म्य अध्याय 02 इस अध्याय में:- वैशाख मास में विविध वस्तुओं के दान का महत्त्व तथा वैशाख स्नान के नियम #🙏रोजाना भक्ति स्टेट्स https://www.radheradheje.com/vaishakh-month-mahatmya-vaishakh-month-mahatmya-chapter-02/
*🌞~ वैदिक हिन्दू पंचांग ~🌞* *⛅दिनांक - 04 अप्रैल 2026* *⛅दिन - शनिवार* *⛅विक्रम संवत् - 2083* *⛅अयन - उत्तरायण* *⛅ऋतु - वसंत* *⛅मास - वैशाख* *⛅पक्ष - कृष्ण* *⛅तिथि - द्वितीया सुबह 10:08 तक तत्पश्चात् तृतीया* *⛅नक्षत्र - स्वाती रात्रि 09:35 तक तत्पश्चात् विशाखा* *⛅योग - हर्षण दोपहर 02:17 तक तत्पश्चात् वज्र* *⛅राहुकाल - सुबह 09:24 से सुबह 10:57 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)* *⛅सूर्योदय - 06:17* *⛅सूर्यास्त - 06:43 (सूर्योदय एवं सूर्यास्त उज्जैन मानक समयानुसार)* *⛅दिशा शूल - पूर्व दिशा में* *⛅ब्रह्ममुहूर्त - प्रातः 04:44 से प्रातः 05:30 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)* *⛅अभिजीत मुहूर्त - दोपहर 12:05 से दोपहर 12:55 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)* *⛅निशिता मुहूर्त - मध्यरात्रि 12:06 से मध्यरात्रि 12:53 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)* *🌥️व्रत पर्व विवरण - सर्वार्थसिद्धि योग (प्रातः 06:17 से रात्रि 09:35 तक)* *🌥️विशेष - तृतीया को परवल खाना शत्रुओं की वृद्धि करने वाला है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंड: 27.29-34)* https://whatsapp.com/channel/0029VaARDIOAojYzV7E44245 #✡️ज्योतिष समाधान 🌟 #🙏रोजाना भक्ति स्टेट्स #🌟देखिए खास ज्योतिष उपाय
✡️ज्योतिष समाधान 🌟 - आज का पंचांग वैशाख, ٦= पक्ष कृष्ण radheradheje com WWW ऋतु- वसंत दिन- शनिवार নিনক 04-042026 तिथि- द्वितीया (१०:०८ से तृतीया ) 781-  &afal सूर्य नक्षत्र- रेवती चंद्रनक्षत्र॰ स्वाति लोग हर्ीनण मीन गर(१०:०८ से वणिज ) करण चन्द्र राशि॰ तुला सूर्य राशि- मीन चोघडिया , दिन मुहूर्त ೩೫ राहूुकाल 0९:२४  !606818 0७:५१ अशुभ १०:५७ अशुभ ಔಟೊ14803  १५:३६ अशुभ शुभ 07:51 09:२४ शुभ பளக106818 रोग 0९:२४ - १०:५७ अशुभ 07851 अभिजित १२:०५ उद्वेग १०:५७ १२:५५ शुभ १२:३० अशुभ दूर मुहूर्त 0७:५७ चर१२:३० - १४:०३ शुभ 08:४७ अशुभ 46427:443 २९:३०* अशुभ लाभ 1४४०३ १५:३६ शुभ प्रदोष १८:४२ 21*01 ೩೫ ঔপুন 15:36 1709 ೩೫ १८:४२ अशुभ 46717:09 आपका दिन शुभ और मंगलमय हरो Radhekadlefe आज का पंचांग वैशाख, ٦= पक्ष कृष्ण radheradheje com WWW ऋतु- वसंत दिन- शनिवार নিনক 04-042026 तिथि- द्वितीया (१०:०८ से तृतीया ) 781-  &afal सूर्य नक्षत्र- रेवती चंद्रनक्षत्र॰ स्वाति लोग हर्ीनण मीन गर(१०:०८ से वणिज ) करण चन्द्र राशि॰ तुला सूर्य राशि- मीन चोघडिया , दिन मुहूर्त ೩೫ राहूुकाल 0९:२४  !606818 0७:५१ अशुभ १०:५७ अशुभ ಔಟೊ14803  १५:३६ अशुभ शुभ 07:51 09:२४ शुभ பளக106818 रोग 0९:२४ - १०:५७ अशुभ 07851 अभिजित १२:०५ उद्वेग १०:५७ १२:५५ शुभ १२:३० अशुभ दूर मुहूर्त 0७:५७ चर१२:३० - १४:०३ शुभ 08:४७ अशुभ 46427:443 २९:३०* अशुभ लाभ 1४४०३ १५:३६ शुभ प्रदोष १८:४२ 21*01 ೩೫ ঔপুন 15:36 1709 ೩೫ १८:४२ अशुभ 46717:09 आपका दिन शुभ और मंगलमय हरो Radhekadlefe - ShareChat
*वैशाख मास: जानें वैशाख मास महात्म्य और वैशाख मास की श्रेष्ठता स्कन्द पुराण से* #🙏रोजाना भक्ति स्टेट्स https://www.radheradheje.com/vaishaakh-maas-importance-of-vaishakh-month-vaishakh-month-mahatmya-excellence-of-vaishakh-month/
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वैशाख मास: जानें वैशाख मास महात्म्य और वैशाख मास की श्रेष्ठता स्कन्द पुराण से
भारतीय पंचांग के अनुसार वैशाख वर्ष का दूसरा महीना होता है। विशाखा नक्षत्र से सम्बन्ध होने के कारण इसको वैशाख कहा जाता है, इस महीने में भगवान ब्रह्मा ने तिलों का निर्माण किया था अतः तिलों का विशेष प्रयोग भी होता है। इस महीने में धन प्राप्ति और पुण्य प्राप्ति के तमाम अवसर आते हैं। इस महीने में मुख्य रूप से भगवान विष्णु, परशुराम जी और देवी उपासना की जाती है, इसी महीने में भगवान बुद्ध और परशुराम जी का जन्म भी हुआ था। वर्ष में केवल एक बार श्री बांके बिहारी जी के चरण दर्शन भी इसी महीने में होते हैं। इस मास के कुछ महत्त्वपूर्ण व्रत, अक्षय तृतीया आदि होते हैं।
सूर्य देव कैसे बने श्रीहनुमान जी के गुरु 〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️ (शिक्षा ग्रहण करने के लिए हनुमान जी को माता अंजनादेवी ने किसके पास भेजा) भगवान हनुमानजी जिनसे सभी बल, बुद्धि,बिद्या देने की कामना करते हैं। हनुमानजी की शिक्षा के लिए उनकी माता कितनी चिंतित थी ये तो उनका इतिहास पढ़ने से ही पता चलता है। कई एसी पौराणिक कथाएं है जिनसे हम उनके बारे में पढ़ सकते हैं। जैसे माता अखिल ब्रह्माण्ड की अदम्य शक्ति स्वरूपा होती है। समग्र सृष्टि का स्वरूप माता की गोद में ही अंकुरित, पल्लवित, पुष्पित एवं विकसित होता है। विश्व का उज्ज्वल भविष्य माता के स्नेहांचल में ही फूलता-फलता है। यदि कहा जाए कि निखिल संसार की सर्जना-शक्ति माता है, तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी। बालक जन्म से पूर्व गर्भ में ही माता से संस्कार ग्रहण करने लग जाता है और जन्म के बाद वह माता के संस्कार का अनुगामी हो जाता है। बालक के बचपन का अधिकांश समय माता की वात्सल्यमयी छाया में ही व्यतीत होता है। करणीय-अनुकरणीय, उचित-अनुचित, हित-अहित सभी संस्कारों का प्रथमाक्षर वह माता से ही सीखता है। सन्तान के चरित्र-निर्माण में माता की भूमिका आधारशिलास्वरूप है इसीलिए महीयसी “माता को प्रथम गुरु” का सम्मान दिया गया है। अंजनादेवी परम सदाचारिणी, तपस्विनी एवं सद्गुण-सम्पन्न आदर्श माता थीं। वे अपने पुत्र श्रीहनुमानजी को श्लाघनीय तत्परता से आदर्श बालक का स्वरूम प्रदान करने की दिशा में सतत जगत और सचेष्ट रहती थीं। पूजनोपरान्त और रात्रि में शयन के पूर्व वे अपने प्राणाधिक प्रिय पुत्र को पुराणों की प्रेरणाप्रद कथाएं सुनाया करतीं थीं। वे आदर्श पुरुषों के चरित्र श्रीहनुमानजी को पुनः-पुनः सुनातीं और अपने पुत्र का ध्यान उनकी ओर आकृष्ट करती रहतीं। माता अंजनादेवी जब भगवान् श्रीरामजी के अवतार की कथा सुनाना प्रारम्भ करतीं, तब बालक श्रीहनुमानजी का सम्पूर्ण ध्यान उक्त कथा में ही केन्द्रित हो जाता। निद्रा एवं क्षुधा उनके लिए कोई अर्थ नहीं रखतीं। सहजानुराग से श्रीहनुमानजी पुनः-पुनः श्रीराम-कथा का श्रवण करते और खो जाते । माता को चिंता सताने लगी। श्री हनुमानजी की आयु भी विद्याध्ययन के योग्य हो गई थी। माता अंजनीदेवी एवं वानरराज केसरी ने विचार किया- ‘अब हनुमान को विद्यार्जन के निमित्त किसी योग्य गुरु के हाथ सौंपना ही होगा। अतएव माता अंजना और कपीश्वर केसरी ने श्रीहनुमानजी को ज्ञानोपलब्धि के लिए गुरु-गृह भेजने का निर्णय किया। अपार उल्लास के साथ माता-पिता ने अपने प्रिय श्रीहनुमानजी का उपनयन-संस्कार कराया और उन्हें विद्यार्जन के लिए गुरु-चरणों की शरण में जाने का स्नेहिल आदेश किया, पर समस्या यह थी कि श्रीहनुमानजी किस सर्वगुण-सम्पन्न आदर्श गुरु का शिष्यत्व अंगीकृत करें। माता अंजना ने प्रेमल स्वर में कहा- ‘‘पुत्र ! सभी देवताओं में आदि देव भगवान् भास्कर को ही कहा जाता है और फिर, सकलशास्त्रमर्मज्ञ भगवान् सूर्यदेव तुम्हें समय पर विद्याध्ययन कराने का कृपापूर्ण आश्वासन भी तो दे चुके हैं। अतएव, तुम उन्हीं के शरणागत होकर श्रद्धा-भक्तिपूर्वक शिक्षार्जन करो।’’ श्रीहनुमानजी माता-पिता के श्रीचरणों में अपने प्रणाम सादर निवेदित कर आकाश में उछले तो सामने “सूर्यदेव के सारथि अरुण” मिले। श्रीहनुमानजी ने पिता का नाम लेकर अपना परिचय दिया और अरुण ने उन्हें अंशुमाली के पास जाने को कहा। आंजनेय ने अतीव श्रद्धापूर्वक भगवान् सूर्यदेव के चरणों का स्पर्श करते हुए उन्हें अपना हार्दिक नमन निवेदित किया। विनीत श्रीहनुमानजी को बंद्धाजलि खड़े देख भगवान् भुवनभास्कर ने स्नेहिल शब्दों में पूछा- ‘बेटा ! आगमन का प्रयोजन कहो।’ श्रीहनुमानजी ने विनम्र स्वर में निवेदन किया- ‘प्रभो ! मेरा यज्ञोपवीत संस्कार सम्पन्न हो जाने पर माता ने मुझे आपके चरणों में विद्यार्जन के लिए भेजा है। आप कृपापूर्वक मुझे ज्ञानदान कीजिए।’ सूर्यदेव बोले- ‘‘बेटा ! मुझे तुम्हें अपना शिष्य बनाने में अमित प्रसन्नता होगी, पर तुम तो मेरी स्थिति देखते ही हो। मैं तो अहर्निश अपने रथ पर सवार दौड़ता रहता हू। सूर्यदेव की बात सुनकर पवनात्मज बोले-‘प्रभो ! वेगपूर्वक चलता आपका रथ कहीं से भी मेरे अध्ययन को बाध्त नहीं कर सकेगा। हां आपको किसी प्रकार की असुविधा नहीं होनी चाहिए। मैं आपके सम्मुख रथ के वेग के साथ ही आगे बढ़ता रहंगा।’ श्रीहनुमानजी सूर्यदेव की ओर मुख करके उनके आगे-आगे स्वभाविक रूप में चल रहे थे। भानुसों पढ़न हनुमान गए भानु मन, अनुमानि सिसुकेलि कियो फेरफार सो। पाछिले पगनि गम गगन मगन-मन, क्रम को न भ्रम, कपि बालक-बिहार सो।। सूर्यदेव को ये देख हैरानी नहीं हुई क्योंकि वे जानते थे कि हनुमानजी खुद बुद्धिमान हैं लेकिन प्रथा के अनुसार गुरु द्वारा शिक्षा गृहण करना जरुरी है इसलिए सूर्यदेव ने कुछ ही दिनों में उन्हें कई विद्याएं सिखा दी जिससे वे विद्वान कहलाएं। 〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️ #🙏हनुमान जयंती की शुभकामनाएं🚩 #🙏रोजाना भक्ति स्टेट्स
🙏हनुमान जयंती की शुभकामनाएं🚩 - सूर्यदेव कैसे बने जी के गुरु हनुमान सूर्यदेव कैसे बने जी के गुरु हनुमान - ShareChat
सूर्य को हनुमान जी कैसे निगल गये? 〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️ पृथ्वी से 28 लाख गुना सूर्य हनुमान जी ने कैसे निगल लिया? क्या यह विज्ञान के साथ मजाक है???? इस हिसाब से तो आपको हर उस चीज पर सवाल उठाने चाहिए जो की आसान नहीं है। जैसे कि हनुमान जी ने बिन थके इतना विशाल समुद्र कैसे पार कर लिया। अरे श्री हनुमान जी भगवान का अंश है उन्हे विभिन्न तरीके के वरदान प्राप्त हुए है। भगवान है। हनुमान जी के पास अष्ट महासिद्धि और नौ निधि हैं. ये अष्ट महासिद्धि अणिमा, लघिमा, महिमा, ईशित्व, प्राक्रम्य, गरिमा और वहित्व हैं। इन्ही सिद्धि के सहारे उनका सूर्य के पास जाना और उसे निगलना संभव हैं लेकिन हनुमान जी निगलते नहीं है। गोस्वामी तुलसीदास द्वारा लिखी हनुमान चालीसा के इस 18वीं चौपाई में सूर्य और पृथ्वी के बीच की दूरी का वर्णन है। जुग सहस्त्र जोजन पर भानू। लील्यो ताहि मधुर फल जानू।। यह दोहा अवधी भाषा में है इस दोहे का हिंदी भाषा में अर्थ है कि हनुमानजी ने एक युग सहस्त्र योजन की दूरी पर स्थित भानु यानी सूर्य को मीठा फल समझकर खा लिया था (खाने ही वाले थे तभी देवराज इंद्र ने प्रहार कर दिया)। अगर आप यहां विज्ञान का तर्क देना चाहते है तो दे सकते है जैसे कि – अपनी लघिमा सिद्धि का उपयोग करके हनुमान जी अपना वजन सूक्ष्म मतलब न के बराबर कर सकते थे। जैसा हमने विज्ञान में पड़ा है कि जिस पार्टीकल का वजन ना के बराबर होता है वह पार्टीकल ही प्रकाश की गति से ट्रैवल कर सकता है क्योंकि उस स्थिति में उस पार्टीकल पर गुरुत्वाकर्षण बल और सेंटर ऑफ ग्रेविटी का असर नहीं होता हैं। इस तरह हनुमान जी प्रकाश की गति से भी तेज उड़कर सूर्य को निगलने के लिए पहुचे थे। और ये भी जानिए कि 👉 नासा के अनुसार सूर्य और पृथ्वी के बीच की दूरी 149 मिलियन किलोमीटर हैं और यह बात पहले ही हनुमान चालीसा के 18 वीं चौपाई में धरती और सूरज की बीच की दूरी का वर्णन किया गया है। हनुमान जी के अष्ट सिद्धि में से एक महिमा हैं। इस सिद्धि से वह अपने शरीर को जितना चाहे उतना बड़ा कर सकते थे। इसलिए हनुमान जी के सामने पूरी पृथ्वी ही एक फल के सामान हैं। विज्ञान के अनुसार कोई भी ऐसी वस्तु जिसका वजन ज्यादा और उसमे बहुत ऊर्जा हो वह ब्लैक होल बना सकती हैं और ब्लैक होल सूर्य को निगलने की क्षमता रखता हैं। जब ब्लैक होल सूर्य को निगल सकता है तो श्री हनुमान जी भगवान शिव के अवतार है। भगवान है। ब्रह्माण में कुछ भी असंभव नहीं हैं। बदलाव :👉 आज से 70–80 साल पहले अगर कोई कहता कि इंसान अंतरिक्ष में जा सकता है तो लोग हंसते होंगे। 👉 40–50 साल पहले कोई कहता की इंसान हजारों किलोमीटर की दूरी चंद घंटों में पूरी कर सकता है तो लोग हंसते होंगे। 👉 20–30 साल पहले कोई कहता कि इंसान दूर बैठे दूसरे इंसान से बातचीत कर सकता है तो लोग हंसते होंगे। 👉 15–20 साल पहले कोई कहता कि एक इंसान दूर बैठे दूसरे इंसान से फेस टू फेस देख सकता है तो लोग हंसते होंगे। बदलाव – 2 👉 हाल ही में चीन ने अपना खुद का एक कृत्रिम सूर्य बनाने में सफलता हासिल की है। आज हम लोग शहर में रहते है इसलिए इस खबर को सुन/पढ़ कर यकीन कर सकते है। लेकिन गांव में जाकर किसी से पूछोगे तो वह इस सवाल करने वाले की तरह आपका मजाक उड़ाएगा। और इस बात पर यकीन नही करेगा कि कोई देश (किसी देश के लोग) सूर्य को बना सकते है। अब आप समझ गए होंगे कि में क्या कहना चाहता हु! आगे भी विज्ञान की मदद से हम लाइटिंग स्पीड से सफर करने पर रिसर्च कर रहे है (और अभी यह मजाक लग रहा होगा।) लेकिन हमारी यह सोच अब तक सच साबित हुई है तो फिर हमारी संस्कृति के बारे में आप ऐसा क्यों सोचते है जैसे कि सब एक अंधविश्वास हो। हमारी संस्कृति हमारे दिल–दिमाग, इतिहास, किताबो और वेदों में निहित है जबकि विज्ञान अभी शुरुआत ही है इसलिए हम आज तक भी विज्ञान को सही तरीक़े से नहीं समझ पाए है तो फिर अपनी संस्कृति को आप एक लिमिट तक सही लेकिन ज़्यादा विज्ञान से तुलना कैसे कर सकते है। इसलिए कभी भी अपनी संस्कृति को विज्ञान से ज्यादा तुलना नही करनी चाहिए। कुछ चीजें ऐसी होती है जो अभी विज्ञान भी नही समझ सकता। जय जय श्रीराम 〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️ #🙏रोजाना भक्ति स्टेट्स #🙏हनुमान जयंती की शुभकामनाएं🚩
🙏रोजाना भक्ति स्टेट्स - सूर्य को हनुमान कैीसे Aat गए सूर्य को हनुमान कैीसे Aat गए - ShareChat
*🌞~ वैदिक हिन्दू पंचांग ~🌞* *⛅दिनांक - 03 अप्रैल 2026* *⛅दिन - शुक्रवार* *⛅विक्रम संवत् - 2083* *⛅अयन - उत्तरायण* *⛅ऋतु - वसंत* *⛅मास - वैशाख* *⛅पक्ष - कृष्ण* *⛅तिथि - प्रतिपदा सुबह 08:42 तक तत्पश्चात् द्वितीया* *⛅नक्षत्र - चित्रा शाम 07:25 तक तत्पश्चात् स्वाती* *⛅योग - व्याघात दोपहर 02:09 तक तत्पश्चात् हर्षण* *⛅राहुकाल - सुबह 10:57 से दोपहर 12:30 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)* *⛅सूर्योदय - 06:18* *⛅सूर्यास्त - 06:43 (सूर्योदय एवं सूर्यास्त उज्जैन मानक समयानुसार)* *⛅दिशा शूल - पश्चिम दिशा में* *⛅ब्रह्ममुहूर्त - प्रातः 04:45 से प्रातः 05:31 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)* *⛅अभिजीत मुहूर्त - दोपहर 12:05 से दोपहर 12:55 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)* *⛅निशिता मुहूर्त - मध्यरात्रि 12:07 से मध्यरात्रि 12:53 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)* *🌥️व्रत पर्व विवरण - गुड फ्राइडे* *🌥️विशेष - द्वितीया को बृहती (छोटा बैंगन या कटेहरी) खाना निषिद्ध है।(ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंड: 27.29-34)* https://whatsapp.com/channel/0029VaARDIOAojYzV7E44245 *🔹गर्मियों में स्वास्थ्य-सुरक्षा हेतु🔹* #🌟देखिए खास ज्योतिष उपाय #✡️ज्योतिष समाधान 🌟 #🙏रोजाना भक्ति स्टेट्स *✅ क्या करें ?* *🔸 १] गर्मी के कारण जिनको सिरदर्द व कमजोरी होती है वे लोग सूखा धनियां पानी में भिगा दें और घिसके माथे पर लगायें । इससे सिरदर्द और कमजोरी दूर होगी ।* *🔸 २] नाक से खून गिरता हो तो हरे धनिये अथवा ताजी कोमल दूब (दूर्वा) का २ – २ बूँद रस नाक में डालें । इससे नकसीर फूटना बंद हो जायेगा ।* *🔸 ३] सत्तू में शीतल जल, मिश्री और थोडा घी मिलाकर घोल बनाके पियें । यह बड़ा पुष्टिा दायी प्रयोग है । भोजन थोडा कम करें ।* *🔸 ४] भोजन के बीच में २५ – ३५ मि. ली. आँवले का रस पियें । ऐसा २१ दिन करें तो ह्रदय व मस्तिष्क की दुर्बलता दूर होगी । ( शुक्रवार व रविवार को आँवले का सेवन वर्जित है ।)* *🔸 ५] २० मि. ली. आँवला रस, १० ग्राम शहद, ५ ग्राम घी – सबका मिश्रण करके पियें तो बल, बुद्धि, ओज व आयु बढ़ाने में मदद मिलती है ।* *🔸 ६] मुँह में छाले पड गये हों तो त्रिफला चूर्ण को पानी में डाल के कुल्ले करें तथा मिश्री चूसें । इससे छाले शांत हो जायेंगे ।* *❌ क्या न करें ?* *🔸 १] अति परिश्रम, अति कसरत, अति रात्रि-जागरण, अति भोजन व भारी भोजन नहीं करें । भोजन में लाल मिर्च व गर्म मसालों का प्रयोग न करें ।* *🔸 २] गर्मियों में दही भूल के भी नहीं खाना चाहिए । इससे आगे चल के नस-नाड़ियों में अवरोध उत्पन्न होता है और कई बीमारियाँ होती हैं । दही खाना हो तो सीधा नहीं खायें, पहले उसे मथ के मक्खन निकाल लें और बचे हुए भाग को लस्सी या छाछ बना के मिश्री मिला के या छौंक लगा के सेवन करें । ध्यान रहे, दही खट्टा न हो ।* *🔸 ३] बाजारू शीतल पेयों से बचें । फ्रिज का पानी न पियें । धूप में से आकर तुरंत पानी न पियें ।* *🔸 ४ ] अति मैथुन से बुढापा जल्दी आयेगा, कमजोरी जल्दी आयेगी । अत: इससे दूर रहें | ग्रीष्म ऋतू में विशेषरूप से संयम रखें ।* #friday #goddess #laxmiji #panchang #prosperity #healthylifestyle #keytosuccess #sadguru #blessings #mantra #jaishreeram #HanumanJanmotsav2026 #facebookviral #fbviral #trendingnow
🌟देखिए खास ज्योतिष उपाय - आज का पंचांग मास- वैशाख, पक्ष कृष्ण radheradheje com WWW ऋतु- वसंत दिन- शुक्रवार दिनांक 03=04 २०२६ तिथि॰ प्रतिपदा (०८४४२ से द्वितीया ) नक्षत्र- चित्रा सूर्य नक्षत्र- रेवती चंद्रनक्षत्र॰   चित्रा लोग॰ मीन ಖಳd कौलव (0८:४२ से तैतुल) करण चन्द्र राशि- कन्या (0६:२८ से तुला) सूर्य राशि- मीन चोघडिया , दिन मुहूर्त शुभ राहूुकाल १०:५७ १२:३० अशुभ 06819 0७:५२ शुभ यम र्घंटा १५:३६ - १७:०९ अशुभ G0852 09:२५ शुभ गुली काल 0७:५२ अमृत 09:२५ १०:५७ शुभ 09:25 अभिजित १२:०६ १२:५५ शुभ ಈ೯10857 १२:३० अशुभ ক্ুম্ভুন 0884]  0९:३७ अशुभ 98 12:30 १४:०३ शुभ &[14:03 दूर मुहूर्त १२३५३ 13845 39೫ १५:३६ अशुभ उद्वेग १५:३६ : 4725:288 २७:१३* अशुभ १७:०९ अशुभ प्रदोष १८४४२ - २१:०१ शुभ 18842 ೩೫ c17.09 आपका दिन शुभ और मंगलमय हरो Radhekadlefe आज का पंचांग मास- वैशाख, पक्ष कृष्ण radheradheje com WWW ऋतु- वसंत दिन- शुक्रवार दिनांक 03=04 २०२६ तिथि॰ प्रतिपदा (०८४४२ से द्वितीया ) नक्षत्र- चित्रा सूर्य नक्षत्र- रेवती चंद्रनक्षत्र॰   चित्रा लोग॰ मीन ಖಳd कौलव (0८:४२ से तैतुल) करण चन्द्र राशि- कन्या (0६:२८ से तुला) सूर्य राशि- मीन चोघडिया , दिन मुहूर्त शुभ राहूुकाल १०:५७ १२:३० अशुभ 06819 0७:५२ शुभ यम र्घंटा १५:३६ - १७:०९ अशुभ G0852 09:२५ शुभ गुली काल 0७:५२ अमृत 09:२५ १०:५७ शुभ 09:25 अभिजित १२:०६ १२:५५ शुभ ಈ೯10857 १२:३० अशुभ ক্ুম্ভুন 0884]  0९:३७ अशुभ 98 12:30 १४:०३ शुभ &[14:03 दूर मुहूर्त १२३५३ 13845 39೫ १५:३६ अशुभ उद्वेग १५:३६ : 4725:288 २७:१३* अशुभ १७:०९ अशुभ प्रदोष १८४४२ - २१:०१ शुभ 18842 ೩೫ c17.09 आपका दिन शुभ और मंगलमय हरो Radhekadlefe - ShareChat
#🔥हनुमान जयंती Status 🚩 #🙏 जय हनुमान #🙏 भक्ति #🙏हनुमान जयंती की शुभकामनाएं🚩
🔥हनुमान जयंती Status 🚩 - श्री हनुमान जन्मोत्सव की हार्दिक शुभकामनाएं श्री हनुमान जन्मोत्सव की हार्दिक शुभकामनाएं - ShareChat