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हरे कृष्ण हरे कृष्ण
कृष्ण कृष्ण हरे हरे
#✡️महाशिवरात्र के ज्योतिषीय उपाय 🌟 महाशिवरात्रि उपाय 2026 | धन, विवाह, व्यापार और शत्रु नाश के अचूक शिव उपाय #Mahashivratri2026 #mahashivratriupay2026
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*🌞~ वैदिक हिन्दू पंचांग ~🌞*
*⛅दिनांक - 14 फरवरी 2026*
*⛅दिन - शनिवार*
*⛅विक्रम संवत् - 2082*
*⛅अयन - उत्तरायण*
*⛅ऋतु - शिशिर*
*⛅मास - फाल्गुन*
*⛅पक्ष - कृष्ण*
*⛅तिथि - द्वादशी शाम 04:01 तक तत्पश्चात् त्रयोदशी*
*⛅नक्षत्र - पूर्वाषाढा शाम 06:16 तक तत्पश्चात् उत्तराषाढा*
*⛅योग - सिद्धि रात्रि 03:18 फरवरी 15 तक तत्पश्चात् व्यतीपात*
*⛅राहुकाल - सुबह 09:51 से सुबह 11:16 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)*
*⛅सूर्योदय - 07:00*
*⛅सूर्यास्त - 06:22 (सूर्योदय एवं सूर्यास्त उज्जैन मानक समयानुसार)*
*⛅दिशा शूल - पूर्व दिशा में*
*⛅ब्रह्ममुहूर्त - प्रातः 05:19 से प्रातः 06:10 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)*
*⛅अभिजीत मुहूर्त - दोपहर 12:18 से दोपहर 01:04 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)*
*⛅निशिता मुहूर्त - रात्रि 12:16 फरवरी 15 से रात्रि 01:06 फरवरी 15 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)*
*🌥️व्रत पर्व विवरण - मातृ-पितृ पूजन दिवस, शनि प्रदोष व्रत*
*🌥️विशेष - द्वादशी को पोई (पूतिका) व त्रयोदशी को बैंगन खाने से पुत्र का नाश होता है।(ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंड: 27.29-34)*
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*🔹 शनिवार के दिन विशेष प्रयोग 🔹*
*🔸 शनिवार के दिन पीपल के वृक्ष का दोनों हाथों से स्पर्श करते हुए 'ॐ नमः शिवाय' मंत्र का 108 बार जप करने से दुःख, कठिनाई एवं ग्रहदोषों का प्रभाव शांत हो जाता है । (ब्रह्म पुराण)*
*🔸 हर शनिवार को पीपल की जड़ में जल चढ़ाने और दीपक जलाने से अनेक प्रकार के कष्टों का निवारण होता है । (पद्म पुराण)*
*🔸आर्थिक कष्ट निवारण हेतु🔸*
*🔸एक लोटे में जल, दूध, गुड़ और काले तिल मिलाकर हर शनिवार को पीपल के मूल में चढ़ाने तथा ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' मंत्र जपते हुए पीपल की ७ बार परिक्रमा करने से आर्थिक कष्ट दूर होता है ।* #🙏रोजाना भक्ति स्टेट्स #🌟देखिए खास ज्योतिष उपाय #✡️ज्योतिष समाधान 🌟
#🪔विजया एकादशी 🌺 जानें #एकादशी को #चावल खाना #वर्जित क्यों है ? एकादशी को चावल क्यो नही खाना चाहिए वैज्ञानिक और धार्मिक दृष्टिकोण से जानें रोचक तथ्य…?
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(((( सच्चा इंसान ))))
🔸🔸🔹🔹🔸🔸
रामानुजाचार्य प्राचीन काल में हुए एक प्रसिद्ध विद्वान थे। उनका जन्म मद्रास नगर के समीप पेरुबुदूर गाँव में हुआ था।
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बाल्यकाल में इन्हें शिक्षा ग्रहण करने के लिए भेजा गया। रामानुज के गुरु ने बहुत मनोयोग से शिष्य को शिक्षा दी।
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शिक्षा समाप्त होने पर वे बोले-‘पुत्र, मैं तुम्हें एक मंत्र की दीक्षा दे रहा हूँ। इस मंत्र के सुनने से भी स्वर्गलोक की प्राप्ति होती है।’
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रामानुज ने श्रद्धाभाव से मंत्र की दीक्षा दी। वह मंत्र था-‘ऊँ नमो नारायणाय’।
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आश्रम छोड़ने से पहले गुरु ने एक बार फिर चेतावनी दी-‘रामानुज, ध्यान रहे यह मंत्र किसी अयोग्य व्यक्ति के कानों में न पड़े।’
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रामानुज ने मन ही मन सोचा-‘इस मंत्र की शक्ति कितनी अपार है। यदि इसे केवल सुनने भर से ही स्वर्ग की प्राप्ति हो सकती है तो क्यों न मैं सभी को यह मंत्र सिखा दूँ।’
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रामानुज के हृदय में मनुष्यमात्र के कल्याण की भावना छिपी थी। इसके लिए उन्होंने अपने गुरु की आज्ञा भी भंग कर दी।
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उन्होंने संपूर्ण प्रदेश में उक्त मंत्र का जाप आरंभ करवा दिया। सभी व्यक्ति वह मंत्र जपने लगे।
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गुरु जी को पता लगा कि उन्हें बहुत क्रोध आया।
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रामानुज ने उन्हें शांत करते हुए उत्तर दिया, ‘गुरु जी, इस मंत्र के जाप से सभी स्वर्ग को चले जाएँगे। केवल मैं ही नहीं जा पाऊँगा,
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क्योंकि मैंने आपकी आज्ञा का पालन नहीं किया है।
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सिर्फ मैं ही नरक में जाऊँगा। यदि मेरे नरक जाने से सभी को स्वर्ग मिलता है, तो इसमें नुकसान ही क्या ?’
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गुरु ने शिष्य का उत्तर सुनकर उसे गले से लगा लिया और बोले- ‘वत्स, तुमने तो मेरी आँखें खोल दीं। तुम नरक कैसे जा सकते हो ?
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सभी का भला सोचने वाला सदा ही सुख पाता है। तुम सच्चे अर्थों में आचार्य हो।’
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रामानुजाचार्य अपने गुरु के चरणों में झुक गए।
लोगों को भी भी उनकी भाँति सच्चे और सही मायने में इंसान बनना चाहिए।
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सच्चा इंसान वह नहीं होता, जो केवल अपने बारे में सोचे, इंसान वहीं है, जो दूसरों का भला करता है।
🔸🔸🔹🔸🔸🔹🔸🔸🔹🔸🔸🔹🔸🔸🔹🔸🔸 #🙏रोजाना भक्ति स्टेट्स #☝आज का ज्ञान
#🙏रोजाना भक्ति स्टेट्स Ekadashi2026 विजया एकादशी इस व्रत को रखने वाला कभी नहीं होता परास्त, पढ़ें कथा
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*🌞~ वैदिक हिन्दू पंचांग ~🌞*
*⛅दिनांक - 13 फरवरी 2026*
*⛅दिन - शुक्रवार*
*⛅विक्रम संवत् - 2082*
*⛅अयन - उत्तरायण*
*⛅ऋतु - शिशिर*
*⛅मास - फाल्गुन*
*⛅पक्ष - कृष्ण*
*⛅तिथि - एकादशी दोपहर 02:25 तक तत्पश्चात् द्वादशी*
*⛅नक्षत्र - मूल शाम 04:12 तक तत्पश्चात् पूर्वाषाढा*
*⛅योग - वज्र रात्रि 03:23 फरवरी 14 तक तत्पश्चात् सिद्धि*
*⛅राहुकाल - सुबह 11:16 से दोपहर 12:41 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)*
*⛅सूर्योदय - 07:01*
*⛅सूर्यास्त - 06:22 (सूर्योदय एवं सूर्यास्त उज्जैन मानक समयानुसार)*
*⛅दिशा शूल - पश्चिम दिशा में*
*⛅ब्रह्ममुहूर्त - प्रातः 05:19 से प्रातः 06:10 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)*
*⛅अभिजीत मुहूर्त - दोपहर 12:19 से दोपहर 01:04 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)*
*⛅निशिता मुहूर्त - रात्रि 12:16 फरवरी 14 से रात्रि 01:06 फरवरी 14 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)*
*🌥️व्रत पर्व विवरण - विजया एकादशी, विष्णुपदी - कुम्भ संक्रान्ति (पुण्यकाल- सूर्योदय से दोपहर 12:41 तक)*
*🌥️विशेष - एकादशी को शिम्बी (सेम) व द्वादशी को पूतिका (पोइ) खाने से पुत्र का नाश होता है।(ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंड: 27.29-34)*
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*🔹थकान मिटाने हेतु🔹*
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*🔸ध्यान-भजन करने बैठे और थकान लगे तो क्या करे ? पलथी मार के बैठो और शरीर को चक्की कि नाई गोल घुमाओ । अनाज पीसने कि हाथवाली चक्की घूमती है न गोल, ऐसे थोड़ी देर घुमाओ, फिर उसकी विपरीत दिशा में भी घुमाओ । फिर अपने-आप घूमेगा थोड़ी देर । इससे थकान मिटेगी, ताजगी आयेगी ।*
*🔹कलह, धन-हानि व रोग-बाधा से परेशान हों तो...🔹*
*🔸घर में कलहपूर्ण वातावरण, धन-हानि एवं रोग-बाधा से परेशानी होती हो तो आप अपने घर में मोरपंख कि झाड़ू या मोरपंख पूजा-स्थल में रखें । नित्य नियम के बाद मन-ही-मन भगवन्नाम या गुरुमंत्र का जप करते हुए इस पंख या झाड़ू को प्रत्येक कमरे में एवं रोग-पीड़ित के चारों तरफ गोल-गोल घुमाये ।*
*कुछ देर ‘ॐकार ‘ का कीर्तन करें-करायें । ऐसा करने से समस्त प्रकार की नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है तथा ऊपरी एवं बुरी शक्तियों का प्रभाव भी दूर हो जाता है ।*
*🔹विद्यार्थी विशेष🔹*
*🔸सर्वांगीण विकास के पाँच दिव्य सोपान🔸*
*🔸एकाग्रता, अनासक्ति, श्रद्धा, सच्चरित्रता और ब्रह्मचर्य पाँच साधन इतने प्रभावशाली हैं कि छोटे-से-छोटे व्यक्ति को भी महान बनाने में देर नहीं करते । ये सद्गुण विकसित करें तो ईश्वरप्रापि हो जाय । और ईश्वरप्राप्ति हो गयी तो क्या बाकी रहा ! जगत की कोई भी चीज उसके लिए अप्राप्त नहीं है, आसान है । फिर तो पढ़ाई में भी छक्का स्वास्थ्य में भी छक्का, आनंद में भी छक्का !*
विजया एकादशी 2026: तिथि, पूजा सामग्री, शुभ मुहूर्त, व्रत विधि, कथा और आरती
विजया एकादशी व्रत फाल्गुन कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को रखा जाता है।
पौराणिक शास्त्रों में फाल्गुन कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को समस्त पापों का हरण करने वाली तिथि भी कहते हैं।
यह अपने नाम के अनुरूप फल देती है, इस दिन व्रत धारण करने से व्यक्ति को मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है व जीवन के हर क्षेत्र में विजय प्राप्त होती है।
धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, जब भगवान राम लंका विजय के लिए समुद्र तट पर पहुंचे थे, तब बगदालभ मुनि ने उन्हें विजया एकादशी का व्रत करने की सलाह दी थी। तब, भगवान राम ने यह व्रत किया, जिसके प्रभाव से उन्हें समुद्र पार करने और रावण पर विजय प्राप्त करने में सफलता मिली।
एकादशी तिथि का प्रारंभ 12 फरवरी 2026 को दोपहर 12 बजकर 22 मिनट पर होगा और इसका समापन 13 फरवरी 2026 को दोपहर 2 बजकर 25 मिनट पर होगा।
व्रत का पारण 14 फरवरी 2026 को सुबह 7 बजे से 9 बजे के बीच किया जाएगा।
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*🌞~ वैदिक हिन्दू पंचांग ~🌞*
*⛅दिनांक - 12 फरवरी 2026*
*⛅दिन - गुरुवार*
*⛅विक्रम संवत् - 2082*
*⛅अयन - उत्तरायण*
*⛅ऋतु - शिशिर*
*⛅मास - फाल्गुन*
*⛅पक्ष - कृष्ण*
*⛅तिथि - दशमी दोपहर 12:22 तक तत्पश्चात् एकादशी*
*⛅नक्षत्र - ज्येष्ठा दोपहर 01:42 तक तत्पश्चात् मूल*
*⛅योग - हर्षण रात्रि 03:06 फरवरी 13 तक तत्पश्चात् वज्र*
*⛅राहुकाल - दोपहर 02:06 से दोपहर 03:31 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)*
*⛅सूर्योदय - 07:01*
*⛅सूर्यास्त - 06:21 (सूर्योदय एवं सूर्यास्त उज्जैन मानक समयानुसार)*
*⛅दिशा शूल - दक्षिण दिशा में*
*⛅ब्रह्ममुहूर्त - प्रातः 05:20 से प्रातः 06:11 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)*
*⛅अभिजीत मुहूर्त - दोपहर 12:19 से दोपहर 01:04 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)*
*⛅निशिता मुहूर्त - रात्रि 12:16 फरवरी 13 से रात्रि 01:06 फरवरी 13 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)*
*🌥️व्रत पर्व विवरण - महर्षि दयानंद सरस्वती जयंती*
*🌥️विशेष - दशमी को कलंबी का शाक खाना त्याज्य है व एकादशी को शिम्बी (सेम) खाने से पुत्र का नाश होता है।(ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंड: 27.29-34)*
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*🔹मातृ-पितृ पूजन दिवस की आवश्यकता व उद्देश्य🔹*
*🔹१४ फरवरी को 'मातृ-पितृ पूजन दिवस' महापर्व है । इस लोक-मांगल्यकारी, विश्वव्यापी, सभी धर्मों के लोगों द्वारा मनाये जानेवाले पर्व के प्रणेता व मार्गदर्शक हैं ब्रह्मवेत्ता संत पूज्य बापूजी । इस पर्व को सर्जित करने की आवश्यकता क्यों पड़ी तथा इसको मनाने से क्या लाभ होते हैं यह जानते हैं पूज्यश्री के ही श्रीमुख से :*
*🔸प्रेमी-प्रेमिका 'आई लव यू, आई लव यू...' करके काम-विकार में गिरते हैं, थोड़ी देर के बाद अभागे ठुस्स हो जाते हैं । मैंने इससे लाखों- लाखों बच्चों की जिंदगी तबाह होते हुए सुनी है ।*
*🔸२८ विकसित देशों में 'आई लव यू व वेलेंटाइन डे' के चक्कर में हर वर्ष १३ से १९ साल की १२ लाख ५० हजार कन्याएँ स्कूल जाते-जाते गर्भवती हो जाती हैं । जिनमें से ५ लाख कन्याएँ तो चुपचाप गर्भपात करा लेती हैं और जो नहीं करा पाती हैं ऐसी ७ लाख ५० हजार कन्याएँ कुँवारी माँ बनकर नर्सिंग होम, सरकार व माँ बाप के लिए बोझा बन जाती हैं अथवा वेश्यावृत्ति धारण कर लेती हैं ।*
*🔸अमेरिका और अन्य विकसित देशों के करोड़ों रुपये वेलेंटाइन डे में तबाह हुए ऐसे छोरे-छोरियों की जिंदगी बचाने में खर्च होते हैं । ऐसा काहे को करना !*
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*🔹लेकिन विदेशियों ने फैशन चला दिया: 'आई लव यू, आई लव यू...' बड़ी बेशर्माई है । बच्चे माँ-बाप को पूछें ही नहीं, लोफर-लोफरियाँ बन जायें । वे खुद बरबाद हो जायें तो माँ-बाप की क्या सेवा करेंगे ?*
*🔸इसमें सबका भला है🔸*
*🔸कुछ मनुष्य तो अक्लवाले होते हैं और कुछ अक्ल खो के प्रेमिकाओं के पीछे, प्रेमियों के दिवस : १४ फरवरी पीछे तबाह होते हैं, उनकी बुद्धि नष्ट हो जाती है ।*
*सुंदरी सुंदरे जितने कामी होते हैं उतनी ही उनकी बुद्धि नष्ट हो जाती है । ऐसे कामी सँभल जायें तो अच्छा है, नहीं तो फिर ऐसे लोग मरने के बाद पतंगे होते हैं । पतंगे दीये में जलते हैं। एक जल रहा है यह दूसरों को दिख रहा है फिर भी दे धड़ाधड़... और जल मरते हैं ।*
*🔸वेलेंटाइन डे' वाले तो अपनी ईसाइयत का प्रचार करते हैं परंतु लोगों की जिंदगी तबाह होती है । फिर मैं भगवान का ध्यान करके भगवान में डूब गया, एकाकार हो गया और उपाय खोजा । उपाय मिल गया - गणपति और कार्तिकेय स्वामी की चर्चा का प्रसंग । उसे मैंने अच्छी तरह समझ लिया । मैंने सत्संग में बोला कि 'माँ की प्रदक्षिणा करने से सारे तीर्थों का फल होता है और पिता का आदर व प्रदक्षिणा करने से सब देवों की पूजा का फल मिलता है ।*
*सर्वतीर्थमयी माता, सर्वदेवमयः पिता ।*
*🔸इसका प्रचार करेंगे तो बच्चे-बच्चियों का, माँ-बाप का सबका भला हो जायेगा ।' मैं भी आशाओं का राम हूँ, आशाओं का गुलाम नहीं हूँ । मैं जब चाहूँ मेरा प्यारा मेरे लिए ज्ञान के दरवाजे खोल देता है ।*
*🔸मैंने इस विषय पर सत्संग चालू किये फिर घोषणा कर दी: 'वेलेंटाइन डे के बदले मातृ-पितृ पूजन दिवस मनाओ ।'*
*🔸फिर मैंने यह भी बता दिया कि 'हम ईसाई, मुसलमान, हिन्दू, सिख तथा और भी जो जाति-धर्म-पंथ हैं सभीका भला चाहते हैं । हम किसीका बुरा नहीं चाहते हैं । बच्चे-बच्चियाँ तबाह न हों इसलिए १४ फरवरी को वेलेंटाइन डे के बदले मातृ-पितृ पूजन दिवस चालू किया है।' अब तो यह विश्वव्यापी हो गया है ।*












