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जय श्री राधे राधे

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कार्तिक माह की तीसरी कहानी...... किसी गाँव में एक बुढ़िया रहती थी, उसकी एक पुत्रवधु भी थी. कार्तिक का महीना आता तो बुढ़िया बारह कोस नहाने जाती लेकिन उसकी बहू वही पतीले में पानी डालकर कहती कि मन चंगा तो कठौती गंगा और गंगा जी उसके लिए वहीं आ जाती. वह उस गंगा में अपना कार्तिक नहान कर लेती. एक बार कार्तिक नहाते हुए सास की नथ बह गई और बहकर वह बहू के नहाने वाले पतीले में आ गई तो उसने वह उठाकर रख ली. सास घर वापिस आई तो उदास थी कि उसकी नथ बह गई है. बहू ने सास को उदास देखकर पूछा कि आप उदास क्यूँ हो ? सास ने कहा कि मेरी नथ गंगा जी में बह गई है. बहू ने कहा कि अच्छा वह नथ! वह तो मेरे पास है. सास ने पूछा कि वह कैसे तुम्हारे पास है? बहू ने कहा कि सासु जी आप तो बारह कोस कार्तिक नहाने जाती हो, मैं तो यही कठड़े में पानी डाल कह देती हूँ कि मन चंगा तो कठौती गंगा और गंगा जी बह कर मेरे पास आ जाती है जिससे मैं स्नान कर लेती हूँ. आज गंगा जी बहकर आई तो उसी में आपकी नथ भी आ गई जिसे मैने उठाकर रख दिया. इस कहानी के बाद कहना चाहिए कि जैसे बहू की आई सभी के आए लेकिन जैसे सास की आई वैसे किसी की ना आए जय जय श्रीराधे भक्तों.....🙏🙏 #🌸 जय श्री कृष्ण #🙏 भक्ति
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🌸 जय श्री कृष्ण

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3 घंटे पहले
#ईश्वरीय_दृष्टिकोण🌺🌺🌺 एक बार दो आदमी एक मंदिर के पास बैठे गपशप कर रहे थे। वहां अंधेरा छा रहा था और बादल मंडरा रहे थे। थोड़ी देर में वहां एक आदमी आया और वो भी उन दोनों के साथ बैठकर गपशप करने लगा। कुछ देर बाद वो आदमी बोला उसे बहुत भूख लग रही है, उन दोनों को भी भूख लगने लगी थी। पहला आदमी बोला मेरे पास 3 रोटी हैं, दूसरा बोला मेरे पास 5 रोटी हैं, हम तीनों मिल बांट कर खा लेते हैं। उसके बाद सवाल आया कि 8 (3+5) रोटी तीन आदमियों में कैसे बांट पाएंगे?? पहले आदमी ने राय दी कि ऐसा करते हैं कि हर रोटी के 3 टुकडे करते हैं, अर्थात 8 रोटी के 24 टुकडे (8 X 3 = 24) हो जाएंगे और हम तीनों में 8 - 8 टुकडे बराबर बराबर बंट जाएंगे। तीनों को उसकी राय अच्छी लगी और 8 रोटी के 24 टुकडे करके प्रत्येक ने 8 - 8 रोटी के टुकड़े खाकर भूख शांत की और फिर बारिश के कारण मंदिर के प्रांगण में ही सो गए। सुबह उठने पर तीसरे आदमी ने उनके उपकार के लिए दोनों को धन्यवाद दिया और प्रेम से 8 रोटी के टुकडो़ के बदले दोनों को उपहार स्वरूप 8 सोने की गिन्नी देकर अपने घर की ओर चला गया। उसके जाने के बाद पहला आदमी ने दुसरे आदमी से कहा हम दोनों 4 - 4 गिन्नी बांट लेते हैं। दुसरा बोला नहीं मेरी 5 रोटी थी और तुम्हारी सिर्फ 3 रोटी थी अतः मै 5 गिन्नी लुंगा, तुम्हें 3 गिन्नी मिलेंगी। इस पर दोनों में बहस और झगड़ा होने लगा। इसके बाद वे दोनों सलाह और न्याय के लिए मंदिर के पुजारी के पास गए और उसे समस्या बताई तथा न्यायपूर्ण समाधान के लिए प्रार्थना की। पुजारी भी असमंजस में पड़ गया, उसने कहा तुम लोग ये 8 गिन्नियाँ मेरे पास छोड़ जाओ और मुझे सोचने का समय दो, मैं कल सबेरे जवाब दे पाऊंगा। पुजारी को दिल में वैसे तो दूसरे आदमी की 3 - 5 की बात ठीक लगी रही थी पर फिर भी वह गहराई से सोचते सोचते गहरी नींद में सो गया। कुछ देर बाद उसके सपने में भगवान प्रगट हुए तो पुजारी ने सब बातें बताई और न्यायिक मार्गदर्शन के लिए प्रार्थना की और बताया कि मेरे ख्याल से 3 - 5 बंटवारा ही उचित लगता है। *भगवान मुस्कुरा कर बोले- नहीं। पहले आदमी को 1 गिन्नी मिलनी चाहिए और दुसरे आदमी को 7 गिन्नी मिलनी चाहिए।* भगवान की बात सुनकर पुजारी अचंभित हो गया और अचरज से पूछा- *प्रभू ऐसा कैसे ?* भगवन फिर एकबार मुस्कुराए और बोले : *इसमें कोई शंका नहीं कि पहले आदमी ने अपनी 3 रोटी के 9 टुकड़े किये परंतु उन 9 में से उसने सिर्फ 1 बांटा और 8 टुकड़े स्वयं खाया अर्थात उसका त्याग सिर्फ 1 रोटी के टुकड़े का था इसलिए वो सिर्फ 1 गिन्नी का ही हकदार है।* *दुसरे आदमी ने अपनी 5 रोटी के 15 टुकड़े किये जिसमें से 8 टुकडे उसने स्वयं खाऐ और 7 टुकड़े उसने बांट दिए। इसलिए वो न्यायानुसार 7 गिन्नी का हकदार है .. ये ही मेरा गणित है और ये ही मेरा न्याय है!* *ईश्वर की न्याय का सटीक विश्लेषण सुनकर पुजारी उनके चरणों में नतमस्तक हो गया।* *इस कहानी का सार ये ही है कि हमारा वस्तुस्थिति को देखने का, समझने का दृष्टिकोण और ईश्वर का दृष्टिकोण एकदम भिन्न है। हम ईश्वरीय न्यायलीला को जानने समझने में सर्वथा अज्ञानी हैं। हम अपने त्याग का गुणगान करते है परंतु ईश्वर हमारे त्याग की तुलना हमारे सामर्थ्य एवं भोग तौल कर यथोचित निर्णय करते हैं। #🌸 जय श्री कृष्ण #🙏 भक्ति
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13 घंटे पहले
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मैं इस पोस्ट का विरोध करता हूँ, क्योंकि ये पोस्ट...
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