इक प्रेम ग्रंथ सी तुम
अक्सर पढ़ता हूं तुमको
तन्हाई मैं...
सपनों की रंगाई में...
आइने सी परछाई मैं
घुंघरू सी आवाज में
प्रेम ग्रंथ सी तुम
अक्सर पढ़ता हूं तुमको
सांसों के स्पंदन में
उभरी बाजुओं की नसों में
सिंदूरी सी मांग
जो सुनाई देती है
धडकनों मैं तेरी,
प्रेम ग्रंथ सी तुम
अक्सर पढ़ता हूं तुमको
कुरान की आयतों में
जो बहती है अक्सर
गंगा की धारा बन के
दिल के करीब से मेरे,
सुनता हूं अक्सर
मंदिर के शंखनाद में
उफनती नदी की धारा मैं
अक्सर तुम सुनाई देती हो
प्रेम ग्रंथ की तरह..
ना मंदिर ना मस्जिद
अब जाता नहीं कहीं मैं सजदा करने
सुनता हूं तुमको अक्सर
धड़कती सांसे,आंखो में अमृत
गुलाबी लब,तमाम शोखी
और ख़्वाब बस ख़्वाब
हां सुनता हूं अक्सर
बस प्रेम ग्रंथ सी तुम..!! #🌹प्रेमरंग #🌹फक्त तुझ्यासाठी.. #💗प्रेम #😘खर प्रेम #💖रोमॅन्टीक Love