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@ritika_and_muskan
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भाड़ में जाओ तुम और तुम्हारा प्यार 💯❤️‍🔥😡
#😒दर्द भरी शायरी🌸 #📒 मेरी डायरी
😒दर्द भरी शायरी🌸 - 100 चुप रहना ही सही लगता है क्योंकि समझने वाला कोई नहींहै और जो समझने वाले हैं वो बातों का अलग ही मतलब নিব্ধাল লন৪" Cnunnu purrarls -a^U 100 चुप रहना ही सही लगता है क्योंकि समझने वाला कोई नहींहै और जो समझने वाले हैं वो बातों का अलग ही मतलब নিব্ধাল লন৪" Cnunnu purrarls -a^U - ShareChat
#📒 मेरी डायरी
📒 मेरी डायरी - दिल दुखता है तब.. q जुबान अपने आप बंद हो जाती है.. दिल दुखता है तब.. q जुबान अपने आप बंद हो जाती है.. - ShareChat
#yehi h reality of life 🤕🤕
yehi h reality of life 🤕🤕 - ShareChat
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#😭💔 True Line 😭 Sad😭 status 😭 दर्द भरे स्टेटस - Gam Bhare Status- Gam Status - गम भरे स्टेटस 😂
😭💔 True Line 😭 Sad😭 status 😭 दर्द भरे स्टेटस - Gam Bhare Status- Gam Status - गम भरे स्टेटस 😂 - ShareChat
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#🌸 सत्य वचन #❤️जीवन की सीख #👌 अच्छी सोच👍
🌸 सत्य वचन - शब्द छोटे होते हैं, पर उनका असर बहुत गहरा होता है। | इसलिए बोलने से ' सोचो , पहले क्योंकि एक कड़वा शब्द रिश्ते तोड़ सकता है और एक मीठा शब्द दिल जोड़ सकता है। ভপ शब्द छोटे होते हैं, पर उनका असर बहुत गहरा होता है। | इसलिए बोलने से ' सोचो , पहले क्योंकि एक कड़वा शब्द रिश्ते तोड़ सकता है और एक मीठा शब्द दिल जोड़ सकता है। ভপ - ShareChat
#🏠घर-परिवार #😎भाई बहन का स्वैग 🥰 #❤️मेरी माँ मेरी दुनिया ❤️ #❤️पापा बेटी का प्यार #👬 भाइयों का प्यार
🏠घर-परिवार - 25 | 05 Date Page No भाई   कमाने निकल गया ससुराल चली गई। बहन एक ही॰ घर के दो चिराग दुनिया में खो गए। अलग- अलग जो आँगन कभी हँसी से गूँजता " , वहाँ  सन्नाटा सोता है। आज पर टिकती हैं , माँकी आँखें   दरवाज़े தச 8 &1 पिता सब चुपचाप ೫ ಷc ೫, एक   रोटी टुकड़ों चार थाली   पूरी रह जाती है। आज में शोर कम नहीं होता था जिस घर आतीहै। अब घड़ी की टिक- टिक सुनाई वक्त ने क्या खेल रचाया है सब अपने होकर भी॰ दूर हो गए। ही छत के नीचे पलने वाले, एक अलग - अलग जिगहों में मजबूर हो गए। आज कहूँ तहेी॰ है॰ और सच নী . धर भज " घर वाले " कहीं खो गए। बस त्योहारों में वो रौनक नहीं दिखती , अब दीवारें भी जैसे चुप-चुप सी रहती हैं। महफ़िल सज जाती थी कभी जो छोटी-सी बात पर बनकर आँखें भिगो जाती हैं। आज वही बाते याद का खाना बनाती है , माँ आज भी सबके पसंद नहीं   बैठ पाते हैं। खाने वाले अब साथ बस 25 | 05 Date Page No भाई   कमाने निकल गया ससुराल चली गई। बहन एक ही॰ घर के दो चिराग दुनिया में खो गए। अलग- अलग जो आँगन कभी हँसी से गूँजता " , वहाँ  सन्नाटा सोता है। आज पर टिकती हैं , माँकी आँखें   दरवाज़े தச 8 &1 पिता सब चुपचाप ೫ ಷc ೫, एक   रोटी टुकड़ों चार थाली   पूरी रह जाती है। आज में शोर कम नहीं होता था जिस घर आतीहै। अब घड़ी की टिक- टिक सुनाई वक्त ने क्या खेल रचाया है सब अपने होकर भी॰ दूर हो गए। ही छत के नीचे पलने वाले, एक अलग - अलग जिगहों में मजबूर हो गए। आज कहूँ तहेी॰ है॰ और सच নী . धर भज " घर वाले " कहीं खो गए। बस त्योहारों में वो रौनक नहीं दिखती , अब दीवारें भी जैसे चुप-चुप सी रहती हैं। महफ़िल सज जाती थी कभी जो छोटी-सी बात पर बनकर आँखें भिगो जाती हैं। आज वही बाते याद का खाना बनाती है , माँ आज भी सबके पसंद नहीं   बैठ पाते हैं। खाने वाले अब साथ बस - ShareChat