#santrampaljimaharaj #Kabir is supreme God #कबीर वाणी 👏 #invitation #humanityfirst
अनमोल पुस्तक
जीने की राह पढ़िए……………)
📖📖📖📖📖
जीने की राह पार्ट - 39
पृष्ठ: 90-92
"वैश्या का उद्धार"
*सत्संग सुनने से जीवन सुधर जाता है:-
परमेश्वर कबीर जी रात्रि में घर-घर में सत्संग करते थे। दिन में अपने निर्वाह के लिए सब श्रोता तथा कबीर जी कार्य करते थे। एक रात्रि में सत्संग चल रहा था। थोड़ी दूरी पर काशी शहर की प्रसिद्ध वैश्या चम्पाकली का आलीशान मकान था। उस रात्रि में वैश्या को ग्राहकों का टोटा था। जिस कारण से इंतजार में जाग रही थी। उसको परमात्मा कबीर जी के मुख कमल से प्रिय अमृतवाणी सुनाई दी। सत्संग में बताया गया कि मानव (स्त्री/पुरुष) का जीवन बड़े पुण्यों से प्राप्त होता है। जो स्त्री-पुरूष भक्ति नहीं करते, दान-सेवा नहीं करते, वे परमात्मा के चोर हैं। (गीता अध्याय 3 श्लोक 12 में भी कहा कि जो व्यक्ति परमात्मा से प्राप्त धन का कुछ अंश दान-धर्म में लगाए बिना स्वयं ही पेट भरता रहता है, वह तो परमात्मा का चोर ही है।) जो मानव चोरी, डकैती, ठगी, वैश्यागमन करते हैं, वे महाअपराधी हैं। जो स्त्रियाँ वैश्या का धंधा करती हैं, वे भी महाअपराधी हैं। परमात्मा के दरबार में उनको कठिन दण्ड दिया जाएगा। मानव जीवन शुभ कर्म करने तथा भक्ति करने के लिए प्राप्त होता है।
कबीर, चोरी जारी वैश्या वृति, कबहु ना करयो कोए।
पुण्य पाई नर देही, ओच्छी ठौर न खोए ।।
शब्दार्थ:- हे मानव ! चोरी-जारी यानि परस्त्री गमन, वैश्यावृति यानि परपुरूषों से धन के लोभ में स्त्री का संभोग करना कोई भी ना करना। यह मानव शरीर (स्त्री/पुरुष) बहुत पुण्यों से प्राप्त हुआ है। इससे पाप कार्यों को करके गलत स्थान पर जाकर नष्ट मत कर। शुभ कर्म कर, गुरू धारण करके अपना कल्याण करवाओ।
मानव शरीर प्राप्त प्राणी को चाहिए कि सर्वप्रथम पूर्ण गुरू की शरण में जाकर दीक्षा प्राप्त करे। फिर आजीवन गुरू जी की मर्यादा में रहकर साधना तथा सेवा, दान-धर्म करता रहे। अपना दैनिक कार्य भी करे, परंतु सर्व बुराई त्याग दे। उसका कल्याण अवश्य होता है। अध्यात्म ज्ञान के अभाव से मानव (स्त्री/पुरुष) केवल धन उपार्जन को अपना मुख्य लक्ष्य बनाकर जीवन सफर को तय करता है। यदि आपके पास अरब-खरब तक धन-संपत्ति है जो आपने पूरे जीवन में अट-पट , छल-कपट करके संग्रह की है। अचानक मृत्यु हो जाती है। सारे जीवन का जोड़ा धन यहीं रह गया, साथ तो शरीर भी नहीं गया, साथ गए तो वे पाप जो पूरे जीवन में माया के संग्रह में हुए थे।
काया तेरी है नहीं, माया कहाँ से होय।
गुरू चरणों में ध्यान रख, इन दोनों को खोय।।
कबीर, सब जग निर्धना, धनवता ना कोय।
धनवान वह जानिये, जापे राम नाम घन होय ।।
भावार्थ:- जिस काया को रोगमुक्त कराने के लिए मानव अपनी संपत्ति को भी बेचकर उपचार कराता है। कहा है कि काया भी आपके साथ नहीं जाएगी, माया की तो बात ही क्या है। पूर्ण गुरू जी से दीक्षा लेकर दिन रात्रि भक्ति कर। गुरू जी के बताए ज्ञान को आधार बनाकर जीवन की राह पर चल। काया तथा माया से मोह हटाकर भक्ति धन संग्रह कर।
हे मानय! मानव का पिछला इतिहास देख ले।
सर्व सोने की लंका थी, रावण से रणधीरं।
एक पलक में राज नष्ट हुआ, जम के पड़े जजीरं ।।
गरीब, भक्ति बिना क्या होत है, भ्रम रहा संसार।
रती कंचन पाया नहीं, रावण चली बार।।
भावार्थ:- संत गरीबदास जी ने भी इसी बात का समर्थन किया कि भक्ति बिना जीव को कोई लाभ नहीं होता। माया जोड़ने के लिए आजीवन भटकता रहता है। श्रीलंका के राजा रावण के पास अनन्त धन, स्वर्ण आदि था, परंतु संसार त्यागकर जाते समय एक ग्राम स्वर्ण भी साथ नहीं ले जा सका। सत्य भक्ति सत्य पुरुष की न करने से यमदूतों के द्वारा बेल (हथकड़ी) बाँधकर ऊपर यमराज के पास ले जाया गया। नरक में डाला गया। इसलिए हे मानव। अशुभ कर्मों से डर, सत्य भक्ति गुरू धारण करके कर।
शंका समाधान करते हुए परमेश्वर कबीर जी ने सत्संग में बताया कि आध्यात्मिक ज्ञान के न होने के कारण अच्छे व्यक्तियों से भी पाप हुए हैं। जब उन्होंने सत्संग सुना तो सर्व अपराध त्यागकर भक्ति करके अपना कल्याण कराया है। परमात्मा कबीर जी ने बताया कि मेरे पास साधना के वे यथार्थ मंत्र हैं जो सर्व पापों को नष्ट कर देते हैं। पुण्य बच जाते हैं। (जैसे वर्तमान में वैज्ञानिकों ने ऐसी औषधि खोजी है जो खेती में डालने से घास व खरपतवार को नष्ट कर देती है, फसल सुरक्षित रहती है।) ये मंत्र मैं अपने लोक से लेकर आया हूँ।
सोह शब्द हम जग में लाए। सार शब्द हम गुप्त छिपाए।।
शब्दार्थ:- शब्दार्थ ऊपर किया है।
(ऋग्वेद मण्डल 9 सूक्त 95 मंत्र 2 में भी प्रमाण है कि "परमात्मा इस संसार में प्रत्यक्ष प्रकट होकर अपनी अमृतवाणी द्वारा मुक्ति के सत्य मार्ग की प्रेरणा करता है। वह परमात्मा सब देवों का देव यानि सर्व का मालिक भक्ति के गुप्त नामों का आविष्कार करता है। )यदि कोई महापापी भी है, सत्य साधना करने लग जाता है है और भविष्य में कोई पाप नहीं करता है तो उसके सर्व पाप समाप्त हो जाते हैं, भक्ति करके अपना कल्याण करा सकता है।
उपरोक्त अमृतवचन सुनकर वह बहन वैश्या जैसे गहरी नींद से जागी हो। कांपने लग गई। घर में ताला लगाकर सत्संग स्थल पर गई। पीछे ही महिलाओं की ओर बैठ गई। सत्संग समाप्त होने के पश्चात् आवाज लगी कि जो दीक्षा लेना चाहता है, वह आगे गुरु देव जी के पास आ जाए। कुछ स्त्री तथा पुरुष उठकर आगे आए। वह वैश्या भी आई और गुरूदेव जी को अपना परिचय दिया और बताया कि मैंने तो 40 वर्ष की आयु में प्रथम बार ये उपकारी वचन सुनने को मिले हैं। परमात्मा ! क्या मेरे जैसी पापिन का भी कल्याण संभव है? वैसे तो आप जी ने सर्व समाधान सत्संग में बता दिया, परंतु जब अपने घृणित जीवन की ओर झांकती हूँ तो ग्लानि होती है तथा विश्वास नहीं हो रहा कि मेरे जैसे अपराधी को क्षमा कर दिया जाएगा। परमेश्वर कबीर जी ने कहा कि :-
कबीर, जब ही सत्यनाम हृदय धरा, भयो पाप को नाश।
जैसे चिनंगी अग्नि की, पडै पुरानै घास ।।
भावार्थ :- जैसे करोड़ टन सूखे घास का ढेर लगा हो। यदि उसमें एक तीली माचिस की जलाकर डाल दी जाए तो उस घास को राख बना देती है। फिर हवा चलेगी जो उस राख को भी उड़ाकर ले जाएगी। काम-तमाम हुआ। इसी प्रकार करोड़ों जन्मों के भी पाप क्यों न हों, मेरे सच्चे मंत्र का जाप उसे जलाकर राख कर देगा। भविष्य में कोई गलती न करना, कल्याण हो जाएगा।
(यजुर्वेद के अध्याय 8 मंत्र 13 में भी यही प्रमाण है कि परमात्मा अपने भक्त (एनसः एनसः) घोर पापों का नाश कर देता है। जीव का कल्याण कर देता है।)
उस बहन ने पाप का कार्य (वैश्या का धंधा) त्याग दिया। परमात्मा कबीर जी से दीक्षा लेकर मर्यादा का पालन करते हुए आजीवन साधना करके चम्पाकली ने मोक्ष प्राप्त किया।
•••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••
आध्यात्मिक जानकारी के लिए आप संत रामपाल जी महाराज जी के मंगलमय प्रवचन सुनिए। Sant Rampal Ji Maharaj YOUTUBE चैनल पर प्रतिदिन 7:30-8.30 बजे। संत रामपाल जी महाराज जी इस विश्व में एकमात्र पूर्ण संत हैं। आप सभी से विनम्र निवेदन है अविलंब संत रामपाल जी महाराज जी से नि:शुल्क नाम दीक्षा लें और अपना जीवन सफल बनाएं।
https://online.jagatgururampalji.org/naam-diksha-inquiry
#Kabir is supreme God #santrampaljimaharaj
#Kabir is supreme God #worldpeace #invitation #santrampaljimaharaj #humanityfirst
अनमोल पुस्तक
जीने की राह पढ़िए……………)
📖📖📖📖📖
जीने की राह पार्ट - 36
पृष्ठ: 83-86
"चोर कभी धनी नहीं होता"
कबीर परमेश्वर जी अपने विधानानुसार एक नगर के बाहर जंगल में आश्रम बनाकर रहते थे। कुछ दिन आश्रम में रहते थे, सत्संग करते थे। फिर भ्रमण के लिए निकल जाते थे। उनका एक जाट किसान शिष्य था जो कुछ ही महीनों से शिष्य बना था। किसान निर्धन था। उसके पास एक बैल था। उसी से किसी अन्य किसान के साथ मेल-जोल करके खेती करता था। दो दिन अन्य का बैल स्वयं लेकर दोनों बैलों से हल चलाता था। फिर दो दिन दूसरा किसान उसका बैल लेकर अपने बैल के साथ जोड़कर हल जोतता था। किसान अपने कच्चे मकान के आँगन में बैल को बाँधता था। एक रात्रि में चोर ने उस किसान के बैल को चुरा लिया। किसान ने देखा कि बैल चोरी हो गया तो सुबह वह आश्रम में गया। गुरूदेव जी से अपना दुःख सांझा किया। गुरूदेव जी ने कहा कि बेटा! विश्वास रख परमात्मा पर दान-धर्म-भक्ति करता रह, आपको परमात्मा दो बैल देगा। जो चुराकर ले गया है, वह पाप का भागी बना है। परमेश्वर की कृपा से बारिश अच्छी हुई। किसान भक्त की फसल चौगुनी हुई। भक्त किसान ने दो बैल मोल लिये और उनको अच्छी खुराक खिलाई। बैल खागड़ों (सांडों) जैसे ताकतवर हो गए। गाँव में उसके बैलों की चर्चा होती थी। एक वर्ष पश्चात् वही चोर उसी क्षेत्र में चोरी करने आया। कहीं दाँव नहीं लगा। उसने विचार किया कि जिसका बैल चुराया था, उसके घर देखता हूँ, हो सकता है कोई बैल ले आया हो। देखा तो दो बैल खागड़ों जैसे बँधे थे। चोर ने दोनों चुरा लिए। किसान जागा तो बैल चोरी हो चुके थे। गुरू जी से बताया तो गुरू जी ने कहा कि बेटा! तेरे घर चार बैल देगा भगवान। चोर कभी सेठ नहीं हो सकता। पाप-पाप इकट्ठे करता है। रजा परमात्मा की, आशीर्वाद गुरूदेव का, बारिश ने किसानों की मौज कर दी। भक्त किसान के पास जमीन पर्याप्त थी, परंतु बारिश के अभाव से खेती थोड़े क्षेत्र में करता था। बारिश अच्छी हो गई। दो बैल मोल लिए, दो कर्जे पर लिए, खेती अधिक जमीन में की। एक नौकर हाली रखा। एक वर्ष में सब कर्ज भी उतर गया। बैल चार हो गए खागड़ों जैसे मोटे-मोटे, तगड़े-तगड़े। मकान भी पक्का बना लिया। चोर दो वर्ष के पश्चात् उधर गया और पहले उसी किसान की स्थिति देखने गया। चोर ने देखा कि चार बैल सांडों जैसे बैठे थे और चोर के पास दो दिन का आटा शेष था। अधिक निर्धन हो गया था। चोर ने किसान को रात्रि में नींद से उठाया तो किसान बोला, कौन हो आप? चोर ने कहा कि मैं चोर हैं जिसने तेरे तीन बैल चुराए थे। किसान बोला, भाई! मेरी नींद खराब ना कर, तू अपना काम कर। परमात्मा अपना कर रहा है. मुझे सोने दे। चोर ने पैर पकड़ लिए और बोला, हे देवता! मेरे से अब चोरी नहीं हो रही। एक बात हे भाई बता, आपका चोर आपके सामने खड़ा है, आप पकड़ भी नहीं रहे हो। हे भाई तेरा एक बैल मैंने चुराया, तेरे घर अगले वर्ष दो बैल खागडों जैसे बँधे थे, वे दोनों मैं चुरा ले गया। आज दो वर्ष पश्चात आपके आँगन में चार बैल खागडों जैसे हैं। मेरा सर्वनाश हो चुका है। बालक भी भूखे रहते हैं। मुझे मार चाहे छोड़, मुझे तेरे विकास का राज बता। मैं भी जाट किसान हूँ, जमीन भी है। निर्धनता बेअंत है। भक्त किसान ने उसको कहा कि आप स्नान करो, खाना खाओ। चोर ने कैस ही किया। फिर भक्त उस चोर को आश्रम में लेकर गया। गुरूदेव से सब घटना बताई। गुरु देव ने चोर को समझाया। सात-आठ दिन भक्त किसान ने अपने घर पर रखा और प्रतिदिन गुरू जी से मिलाकर सत्संग सुनाया। चोर ने दीक्षा ली। गुरु जी ने कहा कि भक्त बेटा! नए भक्त को एक बैल दे दे उधारा। खेती करेगा, तो पैसे लौटा देगा। भक्त ने कहा, गुरूजी! ठीक है। भक्त किसान ने नए भक्त क एक बैल दे दिया। नया भक्त प्रति महीना सत्संग में आता था। पूरे परिवार को नाम (दीक्षा) दिला दिया। दो वर्ष में वित्तीय स्थिति अच्छी हो गई। एक बैल +तीन पहले वाले (चोरी वाले) बैलों के रूपये लेकर चोर भक्त उस किसान भक्त के घर आया। उसके बच्चे भी साथ थे। किसान भक्त से उस चोर भक्त ने सब पैसे देकर कह कि मुझे क्षमा करना। आपका उपकार मेरी सात पीढ़ी भी नहीं उतार पाएगी पुराना भक्त बोला कि हे भाई! यह सब गुरूदेव जी की कृपा है। उनका वचन फल रहा है। आप यह सब रूपये गुरू जी को दान रूप में दो। मेरे को तो उन्होंने पहले है क कई गुणा बैलों की पूंजी दे दी थी। मेरे काम की नहीं। दोनों भक्त गुरू जी के पास ले गए और सर्व दान राशि चरणों में दख दी। गुरू जी ने भोजन-भण्डारा (लंगर) लगा दी, सत्संग किया। इस प्रकार चोरी का धन मोरी में जाता है। भक्त सदा फलता-फूलता है।
> "संस्कार छूत के रोग की तरह फैलते हैं" :-
अच्छे तथा बुरे संस्कार संक्रमण रोग की तरह फैलते हैं जैसे भक्त के हाथ से बोये गए बीज में भी भक्ति संस्कार प्रवेश होते हैं। जो उस अन्न को खाता है उसमें भी भक्ति की प्रेरणा होती है।
यदि कोई नशा करने वाला तथा किसी प्रकार के अन्य विचारों को मन मंथन करता हुआ हाली बीज बोता है तो उस बीज में भी उसके विचार प्रवेश होते है है जो उस अन्न को खाने वाले को प्रभावित करते हैं।
उदाहरण:- एक बहन ने गुरू दीक्षा ले रखी थी। उसके घर पर गुरु जी जाए तथा साथ में एक शिष्य भी था। उस बहन की बहन भी किसी कार्यवश उसी दिन आ गई।उसका दामाद मृत्यु को प्राप्त हो गया था। लड़की के छोटे-छोटे बच्चे थे। वह बहुत चिंतित थीं। रह-रहकर विचार उठ रहे थे कि बेटी का निर्वाह कैसे होगा? बेटी तो उजड़ गई। देवर-जेठ किसी के नहीं होते। बच्चो को कौन पालेगा? हे भगवान! यह क्या बनी? कौन-से जन्म का पाप आड़े आ गया? उपदेशी बहन भोजन बनाने लगी तो उसकी बहन उसकी सहायता करने लगी। अधिक भोजन उस बहन ने बनाया जिसका दामाद मर गया था। संत-भक्त खाना खाकर सो गए। सुबह भक्त ने गुरू देव जी से कहा कि हे गुरूदेव ! आज रात्रि में निंद्रा के दौरान मन बहुत दुःखी रहा। जैसे मेरा दामाद मर गया। बेटी के छोटे-छोटे बच्चे हैं। उनकी बेहद चिंता सताती रही। इनका क्या होगा? कैसे निर्वाह होगा? गुरू जी ने अपनी शिष्या से पूछा कि बेटी! रात्रि का भोजन किसने बनाया था? उसने उत्तर दिया कि - मेरी छोटी बहन आई है, उसने बनाया था। संत ने पूछा कि उसको कोई कष्ट है क्या? शिष्या ने उत्तर दिया कि गुरूदेव ! कष्ट तो बहुत ज्यादा है। लड़की के छोटे-छोटे बच्चे हैं। दामाद की मृत्यु हो गई है। सारा-सारा दिन मेरी बहन इसी चिंता में रहती है। दिन में कई-कई बार यह कहती रहती है कि बेटी का क्या होगा? कैसे बच्चों का पालन करेगी? गुरू जी ने शिष्य को बताया कि उस बेटी के विचार भोजन में प्रविष्ट हुए और खाने वाले को प्रभावित किया। मेरे को भी यही परेशानी सारी रात रही थी। इसी प्रकार यदि भक्ति नाम-स्मरण या आरती या संतों की वाणी का मनन करते-करते भोजन बनाया जाए तो खाने वाले में वे सुसंस्कार अच्छी प्रेरणा करते हैं। भक्ति की रूचि बढ़ती है। कोई हाली गाने-रागनी गाता हुआ बीज बोता है या खाना बनाने वाली गाने या रागनी गाती हुई भोजन बनाती है तो उस अन्न में वे संस्कार प्रवेश हो जाते हैं। उसे खाने वाले का स्वभाव भी उसी प्रकार बकवाद करने को प्रेरित होता है जिसका परिणाम वर्तमान (1997 के आसपास) में दिखाई दे रहा है। अच्छाई में कम बुराई में अधिक संख्या में मानव लगा है।
यदि संतों की वाणी-पाठ-आरती-स्मरण करने वालों की संख्या अधिक हो जाएगी तो वातावरण भक्तिमय हो जाएगा। प्रत्येक व्यक्ति के मन में भक्त जैसे भाव उपजेंगे। उस वातावरण को बनाने के लिए घर-घर में आरती, स्मैणी तथा नित्य-नियम चलना चाहिए। गुरू से दीक्षा लेकर नाम का स्मरण करना चाहिए जिससे वातावरण में भक्ति के विचारों के तत्व अधिक भर जाएंगे तथा बुरे संस्कारों वाले विचार ऊपर उठ जाएंगे। भक्ति संस्कार ऑक्सीजन जानों तथा बुरे विचार कार्बन-डाईऑक्साईड समझें। ऑक्सीजन रूपी भक्ति संस्कार के सिलेंडर के सिलेंडर खोलने पड़ेंगे यानि सद्ग्रन्थ साहिब के पाठ पर पाठ करने पड़ेंगे तथा तीनों समय की संध्या (नित्य कर्म) करने होंगे। स्मरण करना होगा। भक्ति करने वालों की सँख्या बढ़ेगी तो भक्त्ति के विचार भी पृथ्वी पर अधिक फैलेंगे जिनसे प्रत्येक के मन में शांति का आभास होगा। सत्संग करने किसी के घर जाते थे तो पहले दिन तो हमारा भी मन अशांत-सा हो जाता था। फिर प्रत्येक भक्त अपनी-अपनी रमैणी,सुबह के नित्य-नियम, शाम की आरती तथा स्मरण करते, फिर सत्संग सुनाता उस घर से बुरे विचार (कुसंस्कार) निकल जाते । सुसंस्कारों की अधिकता होने से मन शांत होता। जब हम सत्संग या पाठ करके अगले गाँव जाने लगते थे तो परिवार रोने लग जाता था। उनको इतनी शांति संत व भक्तों के संग में मिलती थी। उन संस्कारों का प्रभाव महीनों रहता है। यदि नाम लेकर प्रतिदिन की संध्या व स्मरण परिवार के लोग करने लग जाएँ तो वह शांति सदा बनी रहती।
* जो बीड़ी-हुक्का में तमाखू (तम्बाकू) पीता है और वह बीज बोता है तो उस अन्न में भी तमाखू की वासना (सूक्ष्म तत्व) प्रवेश कर जाते हैं। उस अन्न को खाने वाले में भी तमाखू सेवन करने की प्रेरणा बन जाती है। जिस कारण से नशा तेजी से युवाओं में बढ़ रहा है। जब तक बच्चे हैं, तब तक तो पिता-चाचा-ताऊ, दादा जी के डर से तम्बाकू सेवन नहीं करते, परंतु युवा होते ही वे संस्कार प्रबल हो जा हैं और नशे की आदत शीघ्र पड़ जाती है। मेरा उद्देश्य है कि मानव समाज से नशा तथा अन्य सर्व बुराई जड़ से समाप्त करके धरती पर स्वर्ग बनाऊँ। परमात्मा कबीर जी का कहा वचन साकार हुआ देखना चाहता हूँ। उन्हीं की प्रेरणा व शक्ति से यह अनमोल कार्य सफल हो सकता है। यह दास तथा मेरे अनुयाई सच्ची नीयत से इस मिशन की सफलता के लिए प्रयत्नशील हैं। सफलता की पूरी आशा है।
•••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••
आध्यात्मिक जानकारी के लिए आप संत रामपाल जी महाराज जी के मंगलमय प्रवचन सुनिए। Sant Rampal Ji Maharaj YOUTUBE चैनल पर प्रतिदिन 7:30-8.30 बजे। संत रामपाल जी महाराज जी इस विश्व में एकमात्र पूर्ण संत हैं। आप सभी से विनम्र निवेदन है अविलंब संत रामपाल जी महाराज जी से नि:शुल्क नाम दीक्षा लें और अपना जीवन सफल बनाएं।
https://online.jagatgururampalji.org/naam-diksha-inquiry
#Kabir is supreme God #कबीर वाणी 👏
#santrampaljimaharaj #Kabir is supreme God #invitation #worldpeace








![Kabir is supreme God - क्यामाँगूँकुछथीरनारहाईदिखतनैनचलाजगजाई] एकलखपूतसवा लखनातीbउसरावणकआजदीवानबाती ] क्यामाँगूँकुछथीरनारहाईदिखतनैनचलाजगजाई] एकलखपूतसवा लखनातीbउसरावणकआजदीवानबाती ] - ShareChat Kabir is supreme God - क्यामाँगूँकुछथीरनारहाईदिखतनैनचलाजगजाई] एकलखपूतसवा लखनातीbउसरावणकआजदीवानबाती ] क्यामाँगूँकुछथीरनारहाईदिखतनैनचलाजगजाई] एकलखपूतसवा लखनातीbउसरावणकआजदीवानबाती ] - ShareChat](https://cdn4.sharechat.com/bd5223f_s1w/compressed_gm_40_img_63663_2d733a70_1777485062178_sc.jpg?tenant=sc&referrer=user-profile-service%2FrequestType50&f=178_sc.jpg)




