#🙏जय शिव शम्भू #🔱हर हर महादेव #🕉 ओम नमः शिवाय 🔱 #🙏शिव पार्वती #🔱बम बम भोले🙏 वह शून्य में थमे योगी हैं, वह सृजन की पहली धारा है,
वह मस्तक पर चंद्रमा सजाते, वह जग का रूप सँवारा है।
एक भस्म रमाए बैठे हैं, दूजी कुमकुम से दमकती है,
एक के कंठ में हलाहल है, दूजी अमृत सी छलकती है।
वह अघोरी हैं श्मशानों के, वह महलों की राजकुमारी,
वह शांत अडिग हिमालय हैं, वह चंचल नदियाँ प्यारी।
तपस्या की जब अग्नि जली, तब सती ने पार्वती रूप लिया,
छोड़ भोग-विलास सारा, शिव के चरणों में वास किया।
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