_न रूप देखा, न रंग देखा, न देखा धन का अंबार,_
_पार्वती ने तो केवल देखा, शिव का भोला सा प्यार।_
_हज़ारों वर्ष की तपस्या थी, और अडिग सा विश्वास था,_
_तभी तो योगेश्वर के मन में, प्रेम का हुआ निवास था।_
_वह अर्धनारीश्वर रूप मनोहर, जग को यह सिखलाता है,_
_बिना शक्ति के शिव शव है, यह नाता गहरा कहलाता है।_
_विष भी अमृत बन जाता है, जब संग खड़ी हो गौरी माँ,_
_सारे जग का सार यही है, शिव-पार्वती की प्रेम कथा।_
`शिव पार्वती जी` ❤️ #🙏🏻 मेरे भगवान 🙏🏻 #🕉 ओम नमः शिवाय 🔱 #🔱हर हर महादेव #🙏शिव पार्वती