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🌿✨ आमलकी या रंगभरी एकादशी: श्रीहरि की कृपा और महादेव के रंगों का पावन पर्व! ✨🌿
फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को 'आमलकी' या 'रंगभरी' एकादशी के रूप में बड़ी ही श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाता है। यह एक ऐसा अद्भुत दिन है जब श्रीहरि विष्णु जी की पूजा के साथ-साथ महादेव शिव की रंगोत्सव परंपरा का अनूठा संगम देखने को मिलता है।
आइए जानते हैं इस पावन पर्व से जुड़े कुछ बेहद खास और रोचक पहलू:
🌳 आंवले (आमलकी) का विशेष महत्व:
इस दिन भगवान विष्णु जी के साथ-साथ आंवले के पेड़ की पूजा करने का विशेष विधान है। प्रभु को आंवला अर्पित करने से जीवन में सुख-समृद्धि आती है और सभी कष्टों से मुक्ति मिलती है।
🌸 माता पार्वती का गौना और महादेव:
पौराणिक कथाओं के अनुसार, इसी शुभ दिन पर भगवान शिव माता पार्वती का गौना कराकर पहली बार अपनी नगरी 'काशी' पहुंचे थे। उनके आगमन की खुशी में यह भव्य उत्सव मनाया गया था।
🎨 रंगों का अद्भुत समावेश:
काशी (वाराणसी) में इस दिन बाबा विश्वनाथ और माँ गौरी को अबीर-गुलाल अर्पित करने की सदियों पुरानी परंपरा है। इसी दिन से काशी में रंगों के पावन पर्व 'होली' की विधिवत शुरुआत हो जाती है।
🙏 व्रत का महाफल:का व्रत करने से मनुष्य के सभी पाप नष्ट हो जाते हैं, मोक्ष की प्राप्ति होती है और उत्तम स्वास्थ्य का लाभ मिलता है।
भगवान विष्णु और बाबा विश्वनाथ की कृपा आप और आपके परिवार पर सदैव बनी रहे।
।। ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ।।
।। हर हर महादेव ।। 🙏🌺🌿
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