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🙋द❍ʈυ चाय☕लेकर आ🏃 मेहमान 𝐏ɽ❍ƒιℓε📸देखने आए है
#🌞 Good Morning🌞 #❤️Love You ज़िंदगी ❤️ #📖जीवन का लक्ष्य🤔 #❤️जीवन की सीख
🌞 Good Morning🌞 - सुप्रभात अपनी उम्मीद की टोकरी को खाली कर दीजिये परेशानियां नाराज होकर खुद चली जायेंगी . CgeedO euinu_ सुप्रभात अपनी उम्मीद की टोकरी को खाली कर दीजिये परेशानियां नाराज होकर खुद चली जायेंगी . CgeedO euinu_ - ShareChat
#🌞 Good Morning🌞 #❤️Love You ज़िंदगी ❤️ #❤️जीवन की सीख #📖जीवन का लक्ष्य🤔
🌞 Good Morning🌞 - बाधा टले धा से पहुँचे धाम। हे, पूरण हो अनमोल @ '7'ಹ೯ಗ) सब নাম काम।। राधा 070،0 ٥ 0)0 बाधा टले धा से पहुँचे धाम। हे, पूरण हो अनमोल @ '7'ಹ೯ಗ) सब নাম काम।। राधा 070،0 ٥ 0)0 - ShareChat
#🌞 Good Morning🌞 #❤️Love You ज़िंदगी ❤️ #📖जीवन का लक्ष्य🤔 #❤️जीवन की सीख
🌞 Good Morning🌞 - 54> gsf| ٤٤٤٤٢ S& देर से देते हैं, पर जब देते हैं तो वजह समझा भी देते हैं। 54> gsf| ٤٤٤٤٢ S& देर से देते हैं, पर जब देते हैं तो वजह समझा भी देते हैं। - ShareChat
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❤️Love You ज़िंदगी ❤️ - बेइंतहा जुड़े रहने के लिए भरोसा चाहिए॰. लिए  और बिछड़ने के एक गलतफहमी काफी है..! शुभ प्रभात बेइंतहा जुड़े रहने के लिए भरोसा चाहिए॰. लिए  और बिछड़ने के एक गलतफहमी काफी है..! शुभ प्रभात - ShareChat
#❤️Love You ज़िंदगी ❤️ #❤️जीवन की सीख #📖जीवन का लक्ष्य🤔 #🎶हैप्पी रोमांटिक स्टेटस
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#🌞 Good Morning🌞 #❤️Love You ज़िंदगी ❤️ #❤️जीवन की सीख #📖जीवन का लक्ष्य🤔
🌞 Good Morning🌞 - शिव तांडव स्तोत्रम् जटाटवीगलज्जल प्रवाहपावितस्थले अगर्वसर्वमंगला कलाकदम्बमंजरी रसप्रवाह माधुरी विजृंभणा मधुव्रतम् | गलेडवलम्ब्य लम्बितां भुजंगतुंगमालिकाम्। डमड्डमड्डमड्डमनिनादवड्डमर्वयं स्मरांतकं पुरातकं भावंतकं मखांतकं चकार चंडतांडवं तनोतु नः शिवः शिवम II१ II गजांतकांधकांतकं तमंतकांतकं भजे II१०।I जयत्वदभ्रविभ्रम भ्रमद्भुजंगमस्फुर जटा कटा हसंभ्रम भ्रमन्निलिंपनिर्झरी द्धगद्धगद्वि निर्गमत्कराल भाल हव्यवाट् विलोलवी चिवल्लरी विराजमानमूर्धनि पट्टपावके धिमिद्धिमिद्धिमि नन्मृदंगतुंगमंगल- धगद्धगद्ध गज्ज्वलल्ललाट किशोरचंद्रशेखरे रतिः प्रतिक्षणं ममं II२ II ध्वनिक्रमप्रवर्तित प्रचण्ड ताण्डवः शिवः II१ १ II दृषद्विचित्रतल्पयोर्भुजंग मौक्तिकमस्रजो धरेंद्र नंदिनी विलास बंधुवंधुर- धर स्फुरदृगंत संतति प्रमोद मानमानसे | र्गरिष्ठरत्नलोष्टयोः सुहृद्विपक्षपक्षयोः कृपाकटा क्षधारणी निरुद्धदुर्धरापदि तृणारविंदचक्षुषोः प्रजामहीमहेन्द्रयोः कवचिद्विगम्बरे मनो विनोदमेतु वस्तुनि II३II समं प्रवर्तयन्मनः कदा सदाशिवं भजे II१२II भुजं गपिंगल स्फुरत्फणामणिप्रभा- निलिंपनिर्झरी निकुजकोटरे वसन् जटा কনা कदंबकुंकुम द्रवप्रलिप्त दिग्वधूमुखे | विमुक्तदुर्मतिः सदा शिरःस्थमंजलिं वहन्। Rig  रस्फुरत्वगुत्तरीयमेदुरे विमुक्तलोललोचनो ललामभाललग्नकः मदांध विनोदद्भुत बिंभर्तु भूतभर्तरि II४ II शिवेति मंत्रमुच्चरन्कदा भवाम्यहम्।।१3१| मनो பசி सहस्र लोचन प्रभृत्य शेषलेखशेखर निलिम्प नाथनागरी कदम्ब मौलमल्लिका- निगुम्फनिर्भक्षरन्म धूष्णिकामनोहरः प्रसून धूलिधोरणी विधूसरांघ्रिपीठभूः निबद्धजाटजूटकः तनोतु नो मनोमुदं विनोदिनींमहनिशं भुजंगराज मालया श्रिये चिराय जायतां चकोर बंधुशेखरः II५II परिश्रय परं पदं तदंगजत्विषां चयः II१४।। प्रभाशुभप्रचारणी चत्वरज्वलद्धनंजयस्फुरिगभा- ललाट प्रचण्ड वाडवानल निपीतपंचसायकं निमन्निलिंपनायम् महाष्टसिद्धिकामिनी जनावहूत जल्पना fa' सुधा मयुख लेखया विराजमानशेखरं वाम लोचनो विवाहकालिकध्वनिः महा कपालि संपदे शिरोजयालमस्तू नः II६II शिवेति मन्त्रभूषगो जगज्जयाय जायताम् II१ 5।I इमं हि नित्यमेव मुक्तमुक्तमोत्तम स्तवं पट्टिकाधगद्धगद्धगज्ज्वल- कराल भाल द्धनंजया धरीकृतप्रचंडपंचसायके विशुद्धमेति संततम्। ब्रुवन्नरो पठन्स्मरन धराधरेंद्र नंदिनी कुचाग्रचित्रपत्रक हरे गुरौ सुभक्तिमाशु याति नांयथा गतिं प्रकल्पनैकशिल्पिनि त्रिलोचने मतिर्मम II७ II विमोहनं हि देहना तु शंकरस्य चिंतनम II१६।I नवीन मेघ मंडली निरुद्धदुर्धरस्फुर पूजाडवसानसमये दशवक्रत्रगीतं शम्भूपूजनमिदं पठति प्रदोषे त्कुहु निशीथिनीतमः प्रबंधबंधुकंधरः यः  रथगजेंद्रतुरंगयुक्तां  सिंधुरः निलिम्पनिर्झरि धरस्तनोतु कृत्ति तस्य स्थिरां कलानिधानबंधुरः श्रियं जगंद्धुरंधरः II८II लक्ष्मी सदैव सुमुखीं प्रददाति शम्भुः II१ ७II प्रफुल्ल नील पंकज प्रपंचकालिमच्छटा- इति शिव तांडव स्तोत्रं संपूर्णम्। विडंबि कंठकंध रारुचि प्रबंधकंधरम् स्मरच्छिदं पुरच्छिंद भवच्छिदं मखच्छिदं गजच्छिदांधकच्छिदं तमंतकच्छिदं भजे II९ II शिव तांडव स्तोत्रम् जटाटवीगलज्जल प्रवाहपावितस्थले अगर्वसर्वमंगला कलाकदम्बमंजरी रसप्रवाह माधुरी विजृंभणा मधुव्रतम् | गलेडवलम्ब्य लम्बितां भुजंगतुंगमालिकाम्। डमड्डमड्डमड्डमनिनादवड्डमर्वयं स्मरांतकं पुरातकं भावंतकं मखांतकं चकार चंडतांडवं तनोतु नः शिवः शिवम II१ II गजांतकांधकांतकं तमंतकांतकं भजे II१०।I जयत्वदभ्रविभ्रम भ्रमद्भुजंगमस्फुर जटा कटा हसंभ्रम भ्रमन्निलिंपनिर्झरी द्धगद्धगद्वि निर्गमत्कराल भाल हव्यवाट् विलोलवी चिवल्लरी विराजमानमूर्धनि पट्टपावके धिमिद्धिमिद्धिमि नन्मृदंगतुंगमंगल- धगद्धगद्ध गज्ज्वलल्ललाट किशोरचंद्रशेखरे रतिः प्रतिक्षणं ममं II२ II ध्वनिक्रमप्रवर्तित प्रचण्ड ताण्डवः शिवः II१ १ II दृषद्विचित्रतल्पयोर्भुजंग मौक्तिकमस्रजो धरेंद्र नंदिनी विलास बंधुवंधुर- धर स्फुरदृगंत संतति प्रमोद मानमानसे | र्गरिष्ठरत्नलोष्टयोः सुहृद्विपक्षपक्षयोः कृपाकटा क्षधारणी निरुद्धदुर्धरापदि तृणारविंदचक्षुषोः प्रजामहीमहेन्द्रयोः कवचिद्विगम्बरे मनो विनोदमेतु वस्तुनि II३II समं प्रवर्तयन्मनः कदा सदाशिवं भजे II१२II भुजं गपिंगल स्फुरत्फणामणिप्रभा- निलिंपनिर्झरी निकुजकोटरे वसन् जटा কনা कदंबकुंकुम द्रवप्रलिप्त दिग्वधूमुखे | विमुक्तदुर्मतिः सदा शिरःस्थमंजलिं वहन्। Rig  रस्फुरत्वगुत्तरीयमेदुरे विमुक्तलोललोचनो ललामभाललग्नकः मदांध विनोदद्भुत बिंभर्तु भूतभर्तरि II४ II शिवेति मंत्रमुच्चरन्कदा भवाम्यहम्।।१3१| मनो பசி सहस्र लोचन प्रभृत्य शेषलेखशेखर निलिम्प नाथनागरी कदम्ब मौलमल्लिका- निगुम्फनिर्भक्षरन्म धूष्णिकामनोहरः प्रसून धूलिधोरणी विधूसरांघ्रिपीठभूः निबद्धजाटजूटकः तनोतु नो मनोमुदं विनोदिनींमहनिशं भुजंगराज मालया श्रिये चिराय जायतां चकोर बंधुशेखरः II५II परिश्रय परं पदं तदंगजत्विषां चयः II१४।। प्रभाशुभप्रचारणी चत्वरज्वलद्धनंजयस्फुरिगभा- ललाट प्रचण्ड वाडवानल निपीतपंचसायकं निमन्निलिंपनायम् महाष्टसिद्धिकामिनी जनावहूत जल्पना fa' सुधा मयुख लेखया विराजमानशेखरं वाम लोचनो विवाहकालिकध्वनिः महा कपालि संपदे शिरोजयालमस्तू नः II६II शिवेति मन्त्रभूषगो जगज्जयाय जायताम् II१ 5।I इमं हि नित्यमेव मुक्तमुक्तमोत्तम स्तवं पट्टिकाधगद्धगद्धगज्ज्वल- कराल भाल द्धनंजया धरीकृतप्रचंडपंचसायके विशुद्धमेति संततम्। ब्रुवन्नरो पठन्स्मरन धराधरेंद्र नंदिनी कुचाग्रचित्रपत्रक हरे गुरौ सुभक्तिमाशु याति नांयथा गतिं प्रकल्पनैकशिल्पिनि त्रिलोचने मतिर्मम II७ II विमोहनं हि देहना तु शंकरस्य चिंतनम II१६।I नवीन मेघ मंडली निरुद्धदुर्धरस्फुर पूजाडवसानसमये दशवक्रत्रगीतं शम्भूपूजनमिदं पठति प्रदोषे त्कुहु निशीथिनीतमः प्रबंधबंधुकंधरः यः  रथगजेंद्रतुरंगयुक्तां  सिंधुरः निलिम्पनिर्झरि धरस्तनोतु कृत्ति तस्य स्थिरां कलानिधानबंधुरः श्रियं जगंद्धुरंधरः II८II लक्ष्मी सदैव सुमुखीं प्रददाति शम्भुः II१ ७II प्रफुल्ल नील पंकज प्रपंचकालिमच्छटा- इति शिव तांडव स्तोत्रं संपूर्णम्। विडंबि कंठकंध रारुचि प्रबंधकंधरम् स्मरच्छिदं पुरच्छिंद भवच्छिदं मखच्छिदं गजच्छिदांधकच्छिदं तमंतकच्छिदं भजे II९ II - ShareChat
#जय श्री पशु राम #🙏परशुराम जयंती🪔📿 #🌞 Good Morning🌞 #❤️जीवन की सीख #❤️Love You ज़िंदगी ❤️
जय श्री पशु राम - धर्म एवं न्याय के मार्ग का अनुसरण करने वाले , f के छठे अवतार, भगवान ज्ञान, शक्ति, साहस और शील के प्रतीक भगवान श्री परशुरव जी की जयंती की हार्दिक शुभकामनाएं. ! धर्म एवं न्याय के मार्ग का अनुसरण करने वाले , f के छठे अवतार, भगवान ज्ञान, शक्ति, साहस और शील के प्रतीक भगवान श्री परशुरव जी की जयंती की हार्दिक शुभकामनाएं. ! - ShareChat
#🙏परशुराम जयंती🪔📿 #🌞 Good Morning🌞 #❤️Love You ज़िंदगी ❤️ #❤️जीवन की सीख
🙏परशुराम जयंती🪔📿 - हिन्दुत्व ही है য जहाँ डाक ऋषि बने जहाँ सम्राट भिक्षुक बने जहाँ चरवाहा बना जहाँ नारियाँ योद्धा  सम्राट बनीं जहाँ बालक तपस्वी बने वृद्घों ने मृत्यु स्वयं चुनी जहाँ पशु व वृक्ष पूजे  गए जहाँ मृतकों को जल मिला, और  जहाँ देवता मनुष्य रूप में जन्मे। हिन्दुत्व ही है য जहाँ डाक ऋषि बने जहाँ सम्राट भिक्षुक बने जहाँ चरवाहा बना जहाँ नारियाँ योद्धा  सम्राट बनीं जहाँ बालक तपस्वी बने वृद्घों ने मृत्यु स्वयं चुनी जहाँ पशु व वृक्ष पूजे  गए जहाँ मृतकों को जल मिला, और  जहाँ देवता मनुष्य रूप में जन्मे। - ShareChat
#🙏परशुराम जयंती🪔📿 #🌞 Good Morning🌞 #❤️Love You ज़िंदगी ❤️ #❤️जीवन की सीख #📖जीवन का लक्ष्य🤔
🙏परशुराम जयंती🪔📿 - अग्रतः चतुरो वेदाः पृष्ठतः सशरं धनुः इदं ब्राह्मं इदं क्षात्रं शापादपि शरादपि ।। সথনি : चार वेद मौखिक हे अर्थात् पूर्ण ज्ञान हे एव पीठपर धनुष्य बाण हे अर्थात् शौर्प हे अर्थातू यहा बराह्यतेज एव क्षात्रतेज दोनों हे।जो कोई डनका विरोध करेगा उसे शाप देकर अथवा बाणसे परशुराम पराजित करेंगे | ऐसी उनकी विशेषता हे  Meaning He has the four Vedas in His mouth (Absolute Knowledge of Vedas) and a bow and arrows on His back Gas valour) Here Brahmatej and Kshatratej co-exist Whoever opposed Him was defeated by Parashuram either with a curse or an arow. तृतीया एवं परशुराम जयंती की हार्दिक शुभकामनाएं 3&4 अग्रतः चतुरो वेदाः पृष्ठतः सशरं धनुः इदं ब्राह्मं इदं क्षात्रं शापादपि शरादपि ।। সথনি : चार वेद मौखिक हे अर्थात् पूर्ण ज्ञान हे एव पीठपर धनुष्य बाण हे अर्थात् शौर्प हे अर्थातू यहा बराह्यतेज एव क्षात्रतेज दोनों हे।जो कोई डनका विरोध करेगा उसे शाप देकर अथवा बाणसे परशुराम पराजित करेंगे | ऐसी उनकी विशेषता हे  Meaning He has the four Vedas in His mouth (Absolute Knowledge of Vedas) and a bow and arrows on His back Gas valour) Here Brahmatej and Kshatratej co-exist Whoever opposed Him was defeated by Parashuram either with a curse or an arow. तृतीया एवं परशुराम जयंती की हार्दिक शुभकामनाएं 3&4 - ShareChat