Ashok Kumar
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Ludhiana
#👍 डर के आगे जीत👌 #❤️Love You ज़िंदगी ❤️ #❤️जीवन की सीख
👍 डर के आगे जीत👌 - Good Morning एक दिन शिकायत वक़्त और ज़माने से नहीं तुम्हें खुद "से होगी. जिंदगी *कि और तुम सामने थी दुनिया में उलझे रहे. Good Morning एक दिन शिकायत वक़्त और ज़माने से नहीं तुम्हें खुद "से होगी. जिंदगी *कि और तुम सामने थी दुनिया में उलझे रहे. - ShareChat
#❤️जीवन की सीख #👍 डर के आगे जीत👌 #❤️Love You ज़िंदगी ❤️
❤️जीवन की सीख - हमारी अंतरात्मा को लगना चाहिए कि हम अपने आप में सही हैं बाकी ईश्वर के भरोसे छोड़ दो क्योंकि ईश्वर के न्याय की चक्की थोड़ी धीमी ज़रूर चलती है लेकिन पीसती बहुत बारीक है॰. हमारी अंतरात्मा को लगना चाहिए कि हम अपने आप में सही हैं बाकी ईश्वर के भरोसे छोड़ दो क्योंकि ईश्वर के न्याय की चक्की थोड़ी धीमी ज़रूर चलती है लेकिन पीसती बहुत बारीक है॰. - ShareChat
#❤️Love You ज़िंदगी ❤️ #❤️जीवन की सीख
❤️Love You ज़िंदगी ❤️ - কভনা মত" गरीब आदमी जमोन पर 4 जाये तोवो जगह उसकी औकात कहलाती है और अगर कोई धनवान आदमी जमीन पर बैठ जाए तोये उसका बड़प्पन कहलाता है কভনা মত" गरीब आदमी जमोन पर 4 जाये तोवो जगह उसकी औकात कहलाती है और अगर कोई धनवान आदमी जमीन पर बैठ जाए तोये उसका बड़प्पन कहलाता है - ShareChat
#❤️जीवन की सीख #👍 डर के आगे जीत👌 #❤️Love You ज़िंदगी ❤️
❤️जीवन की सीख - धैर्य की ताकत किस्सी से बदला लेने की जःात नही। धैर्य रखो बस जेसा करेगा , जो वक्त़ आने पर वैस्सा ही पाएगा| समय से बडा़ कोई न्यायाधीश ೧ नही होता। TT T-Ta T धैर्य की ताकत किस्सी से बदला लेने की जःात नही। धैर्य रखो बस जेसा करेगा , जो वक्त़ आने पर वैस्सा ही पाएगा| समय से बडा़ कोई न्यायाधीश ೧ नही होता। TT T-Ta T - ShareChat
#❤️Love You ज़िंदगी ❤️ #❤️जीवन की सीख #📖जीवन का लक्ष्य🤔
❤️Love You ज़िंदगी ❤️ - बहुत लोगों ने *पैसे* की तंगी से *पढ़ाई छोड़ दी... *लेकिन* *बीड़ी , सिगरेट और नशे* वाली आदतें . *किसी ने नहीं छोड़ी...* 2 बहुत लोगों ने *पैसे* की तंगी से *पढ़ाई छोड़ दी... *लेकिन* *बीड़ी , सिगरेट और नशे* वाली आदतें . *किसी ने नहीं छोड़ी...* 2 - ShareChat
सर्वोदय बाल विद्यालय ,पटेल नगर दिल्ली से ये खबर आई है। जहाँ स्कूल के प्रिंसिपल ने पिछले दो साल से यह कविता लगा रखी है। कल जब अनिता जी ने ये व्हाट्सअप किया तो बताया कि स्कूल का जब पहला दिन था ऑफिस के आगे यही कविता पढ़ी थी। मैं कोई रानी महारानी होती तो ऐसे गले से माला उतार कर देती। मगर....... क्या कहें😁 इसी खुशी में कविता एक बार फिर से😍 लड़के हमेशा खड़े रहे खड़ा रहना उनकी कोई मजबूरी नहीं रही बस उन्हें कहा गया हर बार चलो तुम तो लड़के हो, खड़े हो जाओ तुम मलंगों का कुछ नहीं बिगड़ने वाला। छोटी-छोटी बातों पर ये खड़े रहे कक्षा के बाहर स्कूल विदाई पर जब ली गई ग्रुप फोटो लड़कियाँ हमेशा आगे बैठी और लड़के बगल में हाथ दिए पीछे खड़े रहे वे तस्वीरों में आज तक खड़े हैं। कॉलेज के बाहर खड़े होकर करते रहे किसी लड़की का इंतजार या किसी घर के बाहर घंटों खड़े रहे एक झलक एक हाँ के लिए अपने आपको आधा छोड़ वे आज भी वहीं रह गए हैं। बहन-बेटी की शादी में खड़े रहे मंडप के बाहर बारात का स्वागत करने के लिए खड़े रहे रात भर हलवाई के पास कभी भाजी में कोई कमी ना रहे खड़े रहे खाने की स्टाल के साथ कोई स्वाद कहीं खत्म न हो जाए खड़े रहे विदाई तक दरवाजे के सहारे और टैंट के अंतिम पाईप के उखड़ जाने तक बेटियाँ-बहनें जब लौटेंगी वे खड़े ही मिलेंगे। वे खड़े रहे पत्नी को सीट पर बैठाकर बस या ट्रेन की खिड़की थाम कर वे खड़े रहे बहन के साथ घर के काम में कोई भारी सामान थामकर वे खड़े रहे माँ के ऑपरेशन के समय ओ. टी. के बाहर घंटों वे खड़े रहे पिता की मौत पर अंतिम लकड़ी के जल जाने तक वे खड़े रहे दिसंबर में भी अस्थियाँ बहाते हुए गंगा के बर्फ से पानी में। लड़कों रीढ़ तो तुम्हारी पीठ में भी है क्या यह अकड़ती नहीं? #📖जीवन का लक्ष्य🤔 #❤️जीवन की सीख #❤️Love You ज़िंदगी ❤️ #👍 डर के आगे जीत👌
#❤️Love You ज़िंदगी ❤️ #❤️जीवन की सीख #📖जीवन का लक्ष्य🤔 #👍 डर के आगे जीत👌
❤️Love You ज़िंदगी ❤️ - जिस रात को मन उदास हो ना.. तो यह सोच कर सोना चाहिए कि॰ सर पर अपनी छत है॰ पहनने को साफ कपड़ हैं ! जो कहीं से फटे नहीं है॰ किसी के उतरे हुए नहीं है ! खाने को ताजा खाना मिलता है, किसी का बचा कुचा नहीं मिलता और. हाथ पैर सलामत है॰ अपनी मर्जी से.. चल फिर सकते हैं उठ सकते हैं बैठ सकते हैं ! दुनिया में ऐसे बहुत लोग हैं जिनके पास... इनमें से कुछ भी नहीं है ! हमारे पास अगर यह सब कुछ है तो, शुक्र मनाना चाहिए | जिस रात को मन उदास हो ना.. तो यह सोच कर सोना चाहिए कि॰ सर पर अपनी छत है॰ पहनने को साफ कपड़ हैं ! जो कहीं से फटे नहीं है॰ किसी के उतरे हुए नहीं है ! खाने को ताजा खाना मिलता है, किसी का बचा कुचा नहीं मिलता और. हाथ पैर सलामत है॰ अपनी मर्जी से.. चल फिर सकते हैं उठ सकते हैं बैठ सकते हैं ! दुनिया में ऐसे बहुत लोग हैं जिनके पास... इनमें से कुछ भी नहीं है ! हमारे पास अगर यह सब कुछ है तो, शुक्र मनाना चाहिए | - ShareChat
पिता जी के पास कोई और शर्ट पैंट नहीं है क्या ? जब से देख रहा हूं यही तीन चार जोड़ी कपड़े लटकाए रहते हैं ।" कोचिंग से आकर पानी भी नहीं पिया सीधा मां को शिकायत सुनाने लगा...!! "क्या हुआ आज फिर किसी ने पिता जी पर कमेंट कर दिया क्या ?" छत से लाए कपड़ों को तह लगाते हुए मां ने कहा...!! "और नहीं तो क्या । पिता जी का नाम ही चेक शर्ट वाले अंकल रख दिया है सबने । और ना जाने क्या क्या कहते रहते हैं ।" वो एकदम से रुआंसा हो गया । मानों अभी रो देगा...!! "किसी के बोलने से क्या होता है । बच्चे तो ऐसे ही लड़ते हैं । तू खुद हरीश के पिता जी को किस नाम से बुलाता है याद है तुझे ।" वो समझ गया कि मां पिताजी की ही साइड लेंगी इसीलिए चुपचाप अपने कमरे में चला गया । पिता जी तक हर बात पहुंच जाती थी । उनका जानना ज़रूरी भी था कि उनका बेटा उनके बारे में क्या सोचता है । वो हर बात सुनते और बस मुस्कुरा कर रह जाते । इंसान अगर समझदार है तो वो कभी भी छोटी छोटी बातों पर प्रतिक्रिया नहीं देता...!! सारे दिन का थका हुआ होता है, चाहता है कि अब घर में कुछ ऐसा ना हो जो थकान इतनी बढ़ जाए कि फिर उतरे ही ना । ऐसा भी नहीं कि उन्हें फर्क नहीं पड़ता । पड़ता भी है मगर वो बताते नहीं...!! इसी फर्क के कारण उन्हें ऐसा कुछ सुनने पर घंटे भर बाद नींद आती है । एक करवट लेटे वो सोचते रहते हैं कि आखिर बच्चों के लिए क्या ऐसा करें कि वे उनसे खुश रह सकें, उन पर गर्व कर सके...!! हर तीसरे दिन मां के पास पिता जी की कोई ना कोई शिकायत पहुंच जाया करती थी । पिता जी ऐसा क्यों करते हैं, पिता जी के पास पुराना स्कूटर क्यों है, नई गाड़ी या बाइक क्यों नहीं ? पिता जी ने ये नहीं दिलाया, पिता जी कहीं अच्छी जगह घुमाने क्यों नहीं ले गए कभी, पिता जी बाक़ी दोस्तों के पिताजी लोग की तरह अमीर क्यों नहीं ?...?? ऐसी ही शिकायतों के साथ हर साल की तरह ये साल भी बीत गया । बेटे का इस साल इंटर था । रिजल्ट आया तो मर मर कर किसी तरह पास हुआ था । मैट्रिक में जिस लड़के के 82% थे, इंटर में वो 53% पर ही पहुंच पाया । शाम को पिता जी आए तो घर में मैय्यत का सन्नाटा पसरा था । बेटे साहब अपने कमरे में दुबके पड़े थे...!! "कहां है ?" बैग टेबल पर रखते ही पिता जी ने पहला सवाल यही किया । शायद ऑफिस में ही रिजल्ट देख लिया था...!! "जाने दीजिए ना, पहले ही बहुत डरा हुआ है ।" मां पिताजी के मूड को भांप गई थी इसलिए चाह रही थी कि फिलहाल बेटा इनके सामने ना ही आए तो अच्छा है । "उसे बुलाओ जल्दी और ये अपनी ममता ना साल भर के लिए बचा कर रखो । साल भर हम हर गलती माफ करते हैं । कभी बोलने नहीं जाते मगर आज तुम्हारी ये ममता एक पिता के गुस्से को रोंक नहीं सकती । यहां बुलाओ उसे, अगर हम कमरे में चले गए तो आज लात बांह छिटका देंगे...!! मां समझ गई कि पिता का गुस्सा तूफान बन चुका है और उस तूफान को ये ममता का छाता रोक ना पाएगा । किसी भी घर में ऐसा समय मांओं को दुविधा में डाल देता है...!! मां उसे कमरे से समझा बुझा कर लाई । जो अक्सर पिता के बारे में नुक्स निकालता रहता था आज एकदम सहमा हुआ सा खड़ा था । पापा ने उसे एक बार ऊपर से नीचे तक देखा...!! "तो फिर बताओ कि इतने कम नंबर किस वजह से आए तुम्हारे ? क्या इसका कारण ये है कि हमारे पास सिर्फ़ चार जोड़ी कपड़े ही हैं जो हमने सालों पहले सिलवाए थे ? या फिर हमारी पुरानी स्कूटर के कारण तुम नंबर ना ला पाए ? या फिर हम अमीर नहीं हैं तुम्हारे दोस्त के पापा लोग की तरह इस वजह से तुम्हारे नंबर काट लिए गए ?" पिता जी के इन तानों को सुन कर बेटे ने एक बार मां की तरफ देखा और फिर से सिर झुका लिया । उसे महसूस हो गया कि ए बातें तो मैं मम्मी से अकेले में कही थी तो पिता जी तक मां के अलावा कोई नहीं पहुंचा सकता ? "मन में कोई वहम हो तो चलो तुमको कल ही गांव ले चलते हैं अपने और वहां मिलवाते हैं अपने पुराने साथियों से । वे सब तुम्हें बताएंगे कि हम क्या चीज़ थे । महीने का कलेंडर बाद में बदलता था मगर हम अपने जूते और कपड़े पहले बदल लेते थे । पूरे जिले भर में इकलौती राजदूत बाइक थी हमारे पास...!! उसकी आवाज़ से ही कोई कह देता था कि भूरे भईया होंगे । और एक हमारे पिता जी थे वही दो जोड़ी धोती और दो चलानी गंजी लटकाए रहते थे । तुम लोगों जितना दिमाग नहीं चढ़ा था हमारा लेकिन फिर भी सोच लेते थे कभी कभी कि आखिर पैसा रख कर करेंगे क्या, जब तन पर एक ठो अच्छा कपड़ा नहीं है...!! बेटे का सिर अभी भी झुका था । शायद वो समझ ही नहीं पा रहा था कि पिता जी ये सब मुझे क्यों बता रहे हैं । "वक़्त बदला, हालात भी बदल गए । पिता जी असमय चले गए । उनके जाने के बाद बुद्धि खुली । समझ आ गया कि पिता के होते तक ही मौज है। उसके बाद तो जरूरतें पूरी हो जाएं वही बहुत है । खुद को जानते थे हम । पता था कि खुद को खेत में जोत कर कुछ खास कर नही पाएंगे इसलिए पढ़ाई में मन लगाने लगे । किस्मत अच्छी रही कि नौकरी मिल गई...!! आधी बुद्धि तो पिता जी के जाते ही खुल गई और आधी खुली जब तुम हुए ।" पापा आज अपनी पूरी भड़ास निकल देने के मूड में थे...!! "तुम्हारे पैदा होने के बाद हमें समझ आया कि पिता जी वो दो जोड़ी धोती और गंजी में कैसे सालों बिता देते थे । ये जो तुम अमीर घरों के बच्चों के बीच पढ़ते हुए हमारे पैंट शर्ट पर शर्मिंदगी महसूस करते हो, महंगा फोन चलाते हो, वो लैपटॉप जो लिए हो पढ़ने के लिए और चलाते गेम और फिल्में हो, ये कपड़े जूते, ये सब इसीलिए हैं...!! क्योंकि हमारे पास सालों से सिर्फ़ चार जोड़ी कपड़े हैं । हम ऐश कर पाए क्योंकि हमारे पिता के पास केवल दो जोड़ी कपड़े थे । ऐसा थोड़े ना है कि हमारा मन नहीं करता बन ठन के रहने का, अच्छा पहनने अच्छा खाने का लेकिन हम मन मारते हैं सिर्फ़ इसलिए कि तुम्हारे मन का हो सके और बदले में क्या चाहते हैं तो बस यही कि तुम पढ़ाई में अच्छा करो...!! "पिता जी मैं....वो...।" इससे ज़्यादा वो कुछ बोल नहीं पाया...!! "हां हां, बताओ क्या वो ? अरे अब तो वो ज़माना भी नहीं रहा कि तुमको सिर्फ़ पढ़ने के लिए कहें । बताओ हमको कि पढ़ाई से ध्यान हटा कर तुम कौन से खेल या कला में आगे बढ़े हो ? बताओ कि हमारी मेहनत की कमाई, हमारे त्याग और हम जो अपने ही बच्चे से बेज्जती सहते हैं, उसके बदले क्या मिला है हमको ?" बेटे के पास इसका कोई जवाब नहीं था । वो कैसे कहता कि उसका सारा ध्यान तो खुद और अपने साथ के बच्चों के बीच का फर्क नापने में गया है...!! "तुम पढ़ाई में अच्छे हो, ये हम जानते हैं । ना होते तो हम कुछ कहते ही नहीं । तुम अच्छा कर सकते हो लेकिन दिक्कत पता क्या है ? तुम ना अभी से हैसीयत नापने लगे हो । इतना क्रिकेट देखते और खेलते हो कभी ये नहीं सीखे कि पहले ही ओवर में 25-30 रन बना देने वाला बड़ा खिलाड़ी नहीं होता...!! बड़ा खिलाड़ी वो है जो अंत तक मैदान में खड़ा रहता है और जिसका कुल स्कोर उसकी टीम को जिताता है । बेटा शुरुआत कोई नहीं देखता यहां सबको अंजाम से मतलब है । अभी से हैसीयत देखोगे तो कुछ हाथ नहीं आएगा । अभी तो वक़्त है खुद की हैसीयत बनाने का । ध्यान दो वर्ना कुछ भी हासिल नहीं कर पाओगे ।" बेटा अभी भी सिर झुकाए वहां खड़ा था...!! "अब जाओ, इतना ही कहने को बुलाए थे । अभी समझ आ जाए तो अच्छा है वर्ना बाद में सिवाए पछताने के कुछ कर नहीं पाओगे ।" मां कुछ नहीं बोली बस पिता जी को देखती रही...!! अगले दिन पिता जी ऑफिस से आए तो बेटा सिर झुकाए सामने खड़ा था । पिता जी ने बैग टेबल पर रखा और अपने थके शरीर को सोफे पर पटक दिया...!! "पिता जी ।" "हम्म्म्म ।" "एडमिशन करा ली मैंने ।" "अच्छी बात है । कौन से सबजेक्ट लिए हो...!! "वही साइंस ही ।" "इंटर में देख ही लिए हो कि साइंस नहीं हो पाएगा तो कुछ और देख लेते...!! "फिर से इंटर में ही एडमिशन लिया है । एक साल तो बर्बाद जाएगा मगर इस बार अच्छे नंबर आएंगे । पूरी मेहनत करूंगा ।" बेटे ने डरते हुए कहा । पिता जी मुस्कुराए...!! "पढ़ना तुमको है बेटा । हम बस ये चाहते हैं कि अच्छा बुरा के बीच का फर्क जान जाओ । और ध्यान रखना कि अगर मेहनत होती रहे तो साल कभी बर्बाद नहीं जाता ।" बेटा पिता जी की बातों को समझ गया था ये देख कर पिता जी को अच्छा लगा...!! कुछ देर बाद बेटा अंदर से एक पैकेट ले कर आया और पिता जी को थमा दिया । पिता जी ने पैकेट देखते पूछा "ये क्या है ?" इतना कहते हुए उन्होंने पैकेट भी खोल लिया...!! "शर्ट है पिता जी । अपनी पॉकेट मनी से लाया हूं । समझ आ गया है कि आप मेरे लिए खुद की जरूरतों पर खर्च करने से भी डरते हैं लेकिन मैं तो अपने खर्च में कटौती कर के आपके लिए कुछ ला सकता हूं ना ।" पिता जी बेटे को देखते रहे । उनका मन हुआ कि उठ कर गले लगा ले उसे मगर इतना खुले नहीं थे ना उससे...!! "और मां के लिए ?" पीछे खड़ी मां ने खुद के आँसुओं को रोंकते हुए कहा...!! "वो पिता जी ले आएंगे ना ।" इस बात पर सबके चेहरे पर हंसी आ गई । बेटा आगे क्या करेगा ये तो पता नहीं लेकिन अब से पिता की इज़्ज़त ज़रूर करेगा ये पक्का है...!! #❤️Love You ज़िंदगी ❤️ #❤️जीवन की सीख
पुरुष का मौन क्यों पहाड़ सा खड़ा रहता है...?? उसके जन्म पर खुशियाँ मनाई जाती है, थाली बजाई जाती है, लड्डू बांटे जाते हैं क्योंकि वो एक दुधारू गाय है, जिसे हर कोई दुहता है, उसके मन में सुख है या दुख इसकी थाह कोई नहीं पाता है....??? वह हर पल अपनों के लिए जीता है, जीवन का एक एक पल दूसरों के लिए समर्पित करता है, बचपन से जवानी तक माँ बाप के सपनों को साकार करने के लिए दिन रात संघर्ष करता है, तो कभी पितृहीन होकर परिवार की बागडोर मुखिया के रुप में संभालता है.... कभी छोटे भाई बहनों के लिए अपने सपनों की बलि देता है तो कभी परिवार की परम्परा के लिए अपने प्यार की तिलांजलि देता है और परिवार की खुशी के लिए अनचाही शादी करता है.... पत्नी कैसी भी हो उसे निभाता है, पत्नी सुन्दर सुशील हो तो अपनी किस्मत को सराहता है और बदसूरत...बददिमाग हो तो ताउम्र नरक की सजा भुगतता है, पिता बन कर संतानों की परवरिश करने में अपना तन मन धन सब कुछ समर्पित करता है.... अपनी हर लड़ाई में रहता है वह मौन, अपना संघर्ष किसी को नहीं बता पाता है, एक एक तिनका इकट्ठा करके अपने सपनों का आशियाना बनाने की कोशिश करता है, ताउम्र एक एक पैसे का हिसाब रखता है, जिम्मेदारियों के पहाड़ के नीचे दबा उफ तक नहीं कर पाता है.... इस सफर में आदमी जीतता है या हारता लेकिन अंतत: अपने मन में अपनी इच्छाओं की कब्र में अकेला ही रहता है, हर कोई उससे मांगता ही मांगता है, उसे देने कोई नहीं आता है..... और एक दिन चुपचाप चल देता है अनजान सफर पर जहाँ जाकर कोई वापस आता नहीं... आदमी का दर्द हमेशा मौन ही रहता है ... इसलिये पुरुष स्त्री से प्रेम करे, और थोड़ा स्त्री हो जाए, दुःखदायी है एक पुरुष का, ताउम्र पुरुष रह जाना.... सभी पुरुषो को सादर समर्पित 🙏 #❤️जीवन की सीख #☝ मेरे विचार #❤️Love You ज़िंदगी ❤️
#❤️Love You ज़िंदगी ❤️ #❤️जीवन की सीख
❤️Love You ज़िंदगी ❤️ - है ईश्वर आषकीकृषा से एक नयी सुबह देखनेका सौभाग्य मिलाआपका आभार घैरेस्थी मित्र सम्बन्धीसुंखी रहे स्वस्थख्हे  0 9 आप का दिन मंगलमय हा। है ईश्वर आषकीकृषा से एक नयी सुबह देखनेका सौभाग्य मिलाआपका आभार घैरेस्थी मित्र सम्बन्धीसुंखी रहे स्वस्थख्हे  0 9 आप का दिन मंगलमय हा। - ShareChat